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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिंदी कविता

जनक शहीदों के…

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जनक शहीदों के… ♦

समन्दर बनकर आंसू बहते, हमने उन माँओं के देखे हैं।
शहीद हो कर सरहदों से जब, लौटते बलिदानी बेटे हैं।

पत्थर दिल बापों को हमने, पीटते छाती अपनी देखा है।
जब तिरंगे में लिपट लौटता, शहिद हो उनका बेटा है।

विधवा बहू की मांग को सूनी, देख के दोनो जब रोते हैं।
मृत प्राय से पड़ जाते हैं दोनो, सुध – बुद्ध अपनी खोते हैं।

जाना था जब हमको पहले, क्यों लल्ला को भिजवा दिया?
उल्टी गंगा बहाकर रब्बा, यह तुमने आखिर क्या किया?

नेह के आंसू सावन से झरते, बरसात को भी शर्मिंदा किया।
रुग्ण – रूष्ट इस मीच निगोडी ने, मुर्दों को कब जिंदा किया?

बूढ़ी आंखे बस रोती रही, बेटा धूं – धूं कर तब जलता गया।
मां सिसकियां भरती रह गई, बाप दोनों हाथ ही मलता गया।

अंतिम सत्य है मौत जीवन का, यह सबको इक दिन आनी है।
बेटा क्यों गया हमसे पहले? बूढ़ी आंखों में इसलिए पानी है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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ज़रूर पढ़ें — शिक्षक की महानता।

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — जब जवान सैनिक बेटा शहीद होकर घर आता है उस समय उसके माता – पिता की क्या मनोस्थिति होती है। उनके कलेजे का टुकड़ा उनसे पहले इस दुनिया से विदा होता है यही गम सबसे बड़ा होता है उनके लिए, मृत्यु एक अटल सत्य है इस जीवन का लेकिन समय से पहले दर्द दे जाता है। विधवा बहू की मांग को सूनी, देख के दोनो जब रोते हैं, मृत प्राय से पड़ जाते हैं दोनो, सुध – बुद्ध अपनी खोते हैं।

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यह कविता (जनक शहीदों के…) “हेमराज ठाकुर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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युवा और नशा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ युवा और नशा। ♦

तना सीना, तनी ग्रीवा, लगे अच्छी युवाओं की।
शिथिल कंधे, मुँदी आँखें, नहीं भातीं युवाओं की।

घुसे हैं देश में दुश्मन, तुम्हारा मार्ग भटकाने,
समय से पूर्व ही तुमको, नशे की नींद सुलवाने।
मिले जो मुफ़्त में भी तो, सदा कहना नशे को ना,
बड़ा अनमोल है जीवन, नशे में न खो देना।

क़तारें ख़ूब लंबी हैं, नशे के सरगनाओं की।
सफल साज़िश न हो पाये, भयंकर योजनाओं की।
तना सीना, तनी ग्रीवा, लगे अच्छी युवाओं की।
शिथिल कंधे, मुँदी आँखें, नहीं भातीं युवाओं की।

तुम्हीं तो देश का कल हो, तुम्हीं हो देश की गरिमा,
रचो इतिहास ऐसा तुम, बढ़े जो देश की महिमा।
तुम्हीं को नींव रखनी है, नशे से मुक्त भारत की,
करे जो बात गाँजे की, सजा दो इस जहालत की।

जगाओ चेतना अपनी, दिशा बदलो हवाओं की।
नशे के घोल में डूबी, नशीली इन फ़िज़ाओं की।
तना सीना, तनी ग्रीवा, लगे अच्छी युवाओं की।
शिथिल कंधे, मुँदी आँखें, नहीं भातीं युवाओं की।

नशे के रास्तों से तुम, न नाता जोड़ कर आना,
पिता ने लाड़ से पाला, न रोता छोड़ कर जाना।
शपथ लो आज ही तुम सब, अलख घर – घर जलानी है,
पुनः शेखर भगत सिंह सी, तुम्हें लिखनी कहानी है।

तुम्हीं तो प्राण हो माँ के, कली हो भावनाओं की।
पिता का मान, मन्नत हो, रखो लज्जा दुआओं की।
तना सीना, तनी ग्रीवा, लगे अच्छी युवाओं की।
शिथिल कंधे, मुँदी आँखें, नहीं भातीं युवाओं की।

♦ वेदस्मृति ‘कृती’ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

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  • “वेदस्मृति ‘कृती’ जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए समझाने की कोशिश की हैं — आज की युवा पीढ़ी किस तरह नशा के गर्त में धसती जा रही है, नशे में धुत युवक किसी को भी अच्छे नहीं लगते। नशे के आदी युवक का कोई भविष्य नहीं होता। तना सीना, तनी ग्रीवा, लगे अच्छी युवाओं की। शिथिल कंधे, मुँदी आँखें, नहीं भातीं युवाओं की। इसलिए नशा छोड़े और एक सुन्दर भविष्य के निर्माण में सहयोगी बने। आप युवाओं पर ही भारत का भविष्य निर्भर है, यूँ ही नशे की दीवानी – उड़े जवानी वाले युवक न बनो।

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यह कविता (युवा और नशा।) ” वेदस्मृति ‘कृती’ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/गीत/दोहे/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई आई टी . शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक. समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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बढ़ती जनसंख्या।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बढ़ती जनसंख्या। ♦

बढ़ रही जनसंख्या समाज बचाएं,
सबको समझाएं आगे आयें।

मतभेद – मनभेद न पालें सीमित संसाधन,
उत्तम जुगति अपनायें आगे आयें।

अंधविश्वासी देश न हो ईश्वरीय विधान बताके,
भूखा बच्चा न सुलायें आगे आयें।

नियंत्रण आवश्यक कानून बनवाएं,
पालन कराने आगे आयें।

भूख से बेहाल न हो दूध मुहें बालक हमारे,
थोथी ढोल ना बजायें आगे आयें।

बालक दूध नसीब नहीं इधर-उधर की बातें होती,
समय ना गंवायें आगे आयें।

भीड़ बहुत बढ़ रही रोटी के लाले पड़े,
स्त्री मशीनरी नहीं, दुनियां – समझाएं।

विवशता पर चर्चा होगी? स्त्रियों की दुर्दशा होती,
कृत्रिम साधन अपनायें, आगे आयें।

ब्रह्मचर्य – संयम अपनायें बल – बुद्धि बढ़ाएं,
राष्ट्र निकम्मा न हो लोगों से बताएं।

राजनीति में चर्चा होती, उठ कर जानें क्यों दबती,
फिर वही भाषा आती राष्ट्रभाषा अपनाएं।

लंपट के काफिलों में शैतान को पहचानिए,
कानून नया बताएं आगे आयें।

प्रेमचंद का उपन्यास 1929 ई. पढ़ जायें,
नियंत्रण कानून लायें आगे आयें।

हम दो और हमारे दो का मूल मंत्र अपनाएं,
स्वस्थ समाज बनायें आगे आयें।

संतुलित आहार जरूरी, युग परिवर्तन आवश्यक,
खुद बुद्धि सबल बनायें आगे आयें।

जीवन है अनमोल दुधमुंहे को दूध पिलाएं,
बच्चों को मजबूत बनाएं शोक में न आयें।

प्रेमचंद की कहानी ‘ गमी ‘ कहती,
नियंत्रण अपनाए आगे आयें।

भवजाल से ऊपर संकल्प अपनाएं,
अपना संतोष जनक समाज बनाएं।

मजबूत जिगर के बच्चे अपनी धरा पर आएं,
नियंत्रण नियम अपनाएं कानून लाएँ।

ओजस्विता की खोज में भाव सकारात्मक हो,
समय ना गवाएं, कानून बनाएं आगे आयें।

शहर से दूर गांव तक, सौदागरों के ठांव पर,
मालिक दहलीज तक आगे जाएं।

अंधेरे की कोठरी से निकल बाहर आएं,
दूर दृष्टि अपनाएं आगे आएं।

गलतफहमी में तकलीफ भोलेपन से बाहर निकलें,
इंसानियत न छिपाएं जनता को जगाएं।

छोटी सी झुंझलाहट निकालने की आहट,
आगे बढ़ कर आए लोगों को बताएं।

जनसंख्या नियंत्रण कानून मिलकर बनवाएं,
उसका पालन कराने आगे आयें।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — जनसंख्या नियंत्रण कानून क्यों जरूरी है? जनसंख्या को नियंत्रण करने के लिए हम सभी को आगे क्यों आना है? जनसंख्या को नियंत्रित करने से आने वाली पीढ़ियां ज्यादा तकलीफ में नही रहेंगी। इस संसार के सारे संसाधन सीमित मात्रा में ही है, इसलिए संभल जाएं वरना पछताने के सिवा कुछ नहीं बचेगा।

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यह कविता (बढ़ती जनसंख्या।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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वंदे मातरम।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ वंदे मातरम। ♦

झूम – झूम कर वीर जवानों,
जनगणमन के गीत गाना।
शांति – भक्ति साथ तुम्हारे,
वंदे मातरम मीत सुनाना॥

शांति – क्रांति की लहर उठी,
तिरंगा ऊंचा लहराना।
माता बहनें बच्चे रहे सुरक्षित,
सबको लोकतंत्र में सिखाना॥

गुप्त मंत्र, नाम के सौदागर,
संग गाऊं को घटा बताना।
छीटे, कीचड़ हैं पड़ोस के,
तड़क – भड़क से बचे रहेंगे।
भावी भेंट चढ़े ना ‘मंगल ‘
वर्तमान बढ़ – चढ़ चलना॥

फूक – फूक पग नाप चलें,
वीर जवानों साथ चलें।
फ़ौलादी बंजारे – हरकारे
रस्ते अंधियारे स्याह करें।
बादल ऊपर घर आतंकी,
ओलों की बौछार करें॥

दुश्मन ओढ़े खाल अड़ियल,
उनको सबक सिखाना।
कंचन ओढ़े धन – वैभव,
सीमा पर उन्हें बुलाना।
यतन योग जागृति लव ले,
चारों दिशाओं में फैलाना॥

संदेहों के हैं बाजीगर सारे,
चहल – पहल दिखाना।
मन – मंथन पाछे कर लेंगे,
आगे बढ़कर चलते जाना॥

बदली – बदली चाले चलती,
शौर्य गाथा औ अभिलाषा,
झंझावाती बातूनी हरियाली,
भूले बिसरे पथ हो खुशहाली।
संघर्षों का वह ध्यान सुनाना,
आगे बढ़ – चढ़ चलते जाना॥

लाल गुलामी वा हो काली,
इतिहास का पाठ पढ़ाना।
राष्ट्र सुरक्षा में मां के वीर,
बढ़ – चढ़ कदम बढ़ाना॥

प्राचीन इतिहास से सीखते,
नवीन संकल्प दोहराना।
शंकाओं के आनन फानन में,
शंख ध्वनि, गांडीव उठाओ॥

झूम – झूम कर वीर जवानों,
वंदे मातरम मीत सुनाना।
शांति का क्रांतिकारी कदम बढ़ा,
आगे बढ़ते और चलते जाना॥

सदैव ही भारत माता की सेवा में तत्पर रहो मेरे देश के वीर सपूतो, तुम रूकना नहीं, थकना नहीं चाहे दिन हो या रात। भारत माता की सेवा में अपना सर्व ऊर्जा लगाकर, आतंकी का खात्मा कर, शांति का क्रांतिकारी कदम बढ़ा, आगे बढ़ते और चलते जाना।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में — झूम – झूम कर वीर जवानों, जनगणमन के गीत गाना। शांति – भक्ति साथ तुम्हारे, वंदे मातरम मीत सुनाना। वीर रस से भरपूर उत्साह बढ़ाने वाला संचार भर कर तन मन में, सदैव ही भारत माता की सेवा में तत्पर रहो मेरे देश के वीर सपूतो, तुम रूकना नहीं, थकना नहीं चाहे दिन हो या रात। भारत माता की सेवा में अपना सर्व ऊर्जा लगाकर, आतंकी का खात्मा कर, शांति का क्रांतिकारी कदम बढ़ा, आगे बढ़ते और चलते जाना। झूम -झूम कर वीर जवानों, वंदे मातरम मीत सुनाना। बहुत ही खूबसूरत वर्णन किया है।

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यह कविता (वंदे मातरम।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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समय बड़ा बलवान है।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ समय बड़ा बलवान है। ♦

समय की घड़ी टिक टिक करती जाए,
किसी के लिए न रुकने पाए।
कोई नहीं इसका मोल,
जिसने उपयोग किया उसी ने जाना
समय है कितना अनमोल।
समय बड़ा बलवान है॥

समय बड़ा बलवान है
ये धन से अधिक मूल्यवान है,
भाई समय बड़ा बलवान है।
जिसने इसकी कीमत नहीं जानी,
वहीं समय से हारा है।
समय रेत की मुट्ठी है,
हाथों से फिसलते जाना है॥

समय बड़ा बलवान है समय…
आओ समय की तालिका बनाए,
सबको इस पर चलना सिखाएं,
दुनिया में आगे बढना है तो,
हमको समय के साथ चलना है॥

क्योंकि समय बड़ा बलवान है समय…
समय की किमत श्री राम ने जानी,
मात – पिता की आज्ञा मानी,
रावण था बड़ा अभिमानी,
समय की चाल नहीं पहचानी॥

समय बड़ा बलवान है समय…
राज – पट गवां डाला,
भाईयों पुत्रों को मरवा डाला,
सब कुछ खत्म करवा डाला,
किसी की बात नहीं मानी॥

समय बड़ा बलवान है समय …
दुर्योधन हुआ बड़ा अभिमानी,
समय की चाल नहीं पहचानी।
श्री कृष्ण को बंदी बनाने चला,
किसी की बात नहीं मानी॥

समय बड़ा बलवान है समय…
फिर युद्ध हुआ बड़ा भयंकर,
सब भाईयों को मरवा डाला।
पांडव चले समय के साथ,
धर्म मार्ग पर क्योंकि…
समय की चाल को था पहचाना॥

समय बड़ा बलवान है समय…
श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र में,
अर्जुन को गीता ज्ञान दिया।
विचित्र रूप दिखाया अपना,
समय को था कुछ पल ही रुकना॥

समय बड़ा बलवान है समय…
विजयलक्ष्मी का कहना …
समय है जीवन का गहना।
समय के साथ चलो मेरे भाई,
समय को नहीं है व्यर्थ गवाना॥
समय बड़ा बलवान है समय…

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

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  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — समय के महत्व को समझे और सही समय पर सही निर्णय ले, जिससे सभी का कल्याण हो। याद रखें, सही समय पर लिया गया सही निर्णय सदैव ही सभी के लिए हितकर होता है।

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यह कविता (समय बड़ा बलवान है।) “विजयलक्ष्मी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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राम : द्वारा दुष्टों का संहार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ राम : द्वारा दुष्टों का संहार। ♦

राजा दशरथ के सत्य वचन की रक्षा में,
श्रीराम राज पाठ छोड़ कर वन में निकले।
वन में वे चलते चलते जब थक जाते,
हनुमान और लखन उनका पांव दबाते॥

सहन नहीं कर पाते कुमारी से पांव दबवाना,
जनक नंदिनी सुकुमारी जानकी जी को सबने माना।
श्रीराम के वक्ष: स्थल में जिसे सम्मान मिला,
उन्हें लक्ष्मी – सीता जी का ही नाम मिला है॥

लक्ष्मण द्वारा रावण की बहन सूर्पनखा का,
नाक कान काटने से,
अपनी प्रियतमा का वियोग उन्हें सहना पड़ा।
वियोग के कारण उनकी क्रोध में तनी भौहों से,
भारी समुद्र को भी भयभीत होना पड़ा॥

लंका जाने के लिए एक पुल बाधा गया,
समुद्र ऊपर पुल से सेना लंका कूंच किया।
पहले ही वीर हनुमान ने लंका को जैसे जला दिया।
जस जंगल की दावाग्नि जले वैसे ही मिटा दिया॥

सीता स्वयंबर में शिव का धनुष जिसको,
बड़ा – बड़ा वीर योद्धा भी हिला नहीं पाया।
गुरु का आदेश मिलते ही बात – बात में राम ने,
डोरी चढ़ा खींच कर दो टुकड़ा उसका कर दिया॥

पिता वचन शिरोधार्य कर स्वजन छोड़ जंगल  पयान,
योगी जैसे काया छोड़ चलता है अपने धाम।
खर दूषण, तृषिरा जैसे राक्षसों का संहार किया,
महा धनुष बाण चला कर दुष्टों पर वार किया॥

पर्ण कुटी तक स्वर्ण हिरण भेष में छुपे मरीच आया,
श्री राम ने उसको भी दौड़ा कर मार गिराया।
दक्ष प्रजापति को जैसे वीरभद्र ने मारा था,
उसी तरह श्री राम ने उसका पीछा कर संहार किया॥

सुग्रीव का बड़ा भाई बलवान और था आतताई,
बालि हरण कर सुग्रीव की पत्नी को घर लाया।
वचन देकर सुग्रीव को श्री राम ने उसको मारा,
मार उसे राम ने वचन और मित्रता का धर्म निभाया॥

राम और रावण की सेना में भीषण युद्ध हुआ,
एक एक कर क्रमश: रावण के वीरों का संहार किया।
जब श्री राम जी के सम्मुख था रावण आया,
शिरोमणि राम ने अभिमानी को फटकार लगाया॥

मेरी अनुपस्थिति में प्राण प्रिया मेरी हर कर लाया?
काल को कोई टाल नहीं सकता तेरी सामत आई!
वज्र समान वाण चलाया, खून फेंक दिया रावण वहीं,
रावण का हृदय विदीर्ण हुआ वह हुआ धरासाई॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में — समय समय पर रावण से लेकर खर दूषण, तृषिरा जैसे राक्षसों का संहार किया – मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी ने, बहुत ही खूबसूरत वर्णन किया है।

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यह कविता (राम: द्वारा दुष्टों का संहार।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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पंजशीर : मानवता शर्मसार हुई।

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♦ पंजशीर : मानवता शर्मसार हुई। ♦

दुनिया के सारे आतंकी इकट्ठा एक जगह आये,
मानवता के विरोध में पाकिस्तान ने साथ दिया।
उसने अफगानी मनुष्यों को निरीह बनाया,
मानवाधिकार का दुनिया ने आवाज नहीं उठाया॥

भोजन पानी आवश्यक वस्तु जनता नहीं पा रही,
दुनिया इस घोर अत्याचार को आंखों से देख रही।
इतिहास लिखने वालों ने कोरी कलम चलाया,
धिक्कार धिक्कार धिक्कार दुनिया को सुनाया॥

पाक प्रायोजित प्रोपोगंडा तालीवान ने फैलाया,
पंजशीर को जीतने का भ्रम दुनिया से चलाया।
मसूद के लड़ाकों ने मंगलवार को हवाई हमला किया,
16 दिन से मसूद, तालीवान – पाकिस्तान से लड़ रहा॥

पाक आई एस प्रमुख हे फैज अफ़ग़ान आया,
अर्ध रात्रि सितंबर 3, 21को पाकिस्तान बम बरपाया।
पाक ने पंजशीर में सेना लेकर उसपर दहाया,
दुनियां से पंजशीर गुहार सहायता की लगाया॥

अहमद मसूद पाक और तालीवान से लड़ रहा,
मसूद ने तालिबान के खिलाफ आने की उम्मीद की।
अफगानी औरतों ने विरोध का बिगुल बजाया,
मसूद के लड़ाकों ने हजारों दुश्मन मार गिराया॥

अपने को भी पंजशीर ने लड़ाई में वीर गवाया,
उधर ईरानी पाकिस्तान को संदेश देकर चेताया।
अपनी हद में रहने की इमरान को इरान सुनाया,
भीषण युद्ध आगे होने वाला है ऐसा संदेश आया॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में — वर्तमान समय में तालिबान के लड़ाकों या यूँ कहे इंसानियत के दुश्मन आतंकवादियों द्वारा अफगानिस्तान के पंजशीर पर कब्जा और उनकी बर्बरता लूट, बलात्कार, हत्या, और खून खराबा करने की नाकाम कोशिश को दर्शाया है।

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यह कविता (पंजशीर : मानवता शर्मसार हुई।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें: अफगानी – दुर्दशा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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प्यार पर शोध।

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♦ प्यार पर शोध। ♦

जब से मेरा साहित्य में अनुराग जगा,
मैंने नाना विधाओं का साहित्य पढ़ा।
किया गौर तो ये पाया मैंने कि आधा,
साहित्य प्रेम कथाओं से है भरा पड़ा।

गीत, गज़लें, कविता, दोहे, रुबाई, छन्द,
लेख, निबन्ध, मुक्तक न जाने कितने ग्रंथ।
रच डाले कवियों ने प्रेम की व्याख्या में,
फिर भी समझा न पाये है क्या प्रेम पंथ?

उसी पल मन में मेरे आया ये विचार,
करुँ शोध मैं भी, जानूँ क्या है प्यार ?
अपने अनेक मित्रों का आया मुझे ख्याल,
सबसे पूछा मैंने बस यही एक सवाल।

पहले एक डॉक्टर मित्र से की मुलाक़ात,
सुन कर प्रश्न हँसे वो, कही विचित्र बात।
कृती इट्स मीनिंगलैस वर्ड, मेक्स नो सेन्स,
यू कैन डिफाइन इट एज़ हॉर्मोनल इम्बैलेन्स।

किसी ने कहा इसे काल्पनिक अफसाना,
किसी ने कहा इसे जिंदगी का तराना।
कुछ थे गालिब से सहमत, बोले है ये,
आग का दरिया और डूब कर है जाना।

कोई बोला इश्क ने जीना सीखा दिया,
कोई बोला इश्क ने पीना सीखा दिया।
एक ने कहा बेकार की चीज है मुहब्बत,
खाम खां इंसान को निकम्मा बना दिया।

किसी ने नियामत कहा, किसी ने कयामत,
किसी ने शरारत कहा, किसी ने इबादत।
किसी के लिए आंसू और आह थी उल्फत,
किसी के लिये खुदा का नूर थी मुहब्बत।

परिभाषा प्यार की न कोई बता पाया,
सबने केवल अपना अनुभव ही सुनाया।
चकराई बुद्धि मेरी सोच – सोच कर फिर,
ढाई आखर की कितनी विचित्र है माया।

मन मस्तिष्क में चला वैचारिक संघर्ष,
गहन चिन्तन के बाद निकला ये निष्कर्ष।
निजी अनुभव नहीं है प्यार की परिभाषा,
प्यार तो है जीवन का उत्सर्ग, उत्कर्ष।

इस शोध के बाद एक सत्य तो पता चला,
प्यार ने किसी का किया भला या हो छल।
पर ये भावना हर किसी में थी मौजूद,
कोई भी हृदय प्यार से रिक्त नहीं मिला।

प्रेम होता नहीं दुखद जब तक रहे शुद्ध,
मिलावट हिंसा की करती है इसे अशुद्ध।
प्यार और मार का नहीं है कोई मेल,
सबका यही संदेश नानक हो या बुद्ध।

प्यार ही समझता है मानवता की हद,
नासमझी से हमारी हो जाता है बद।
होती है मिलावट इसमें हिंसा की जब,
खोकर स्वरूप अपना बन जाता है जिद।

यही भाव मेरे चिंतन में व्याप्त हुआ,
मुझे तो प्यार का यही अर्थ प्राप्त हुआ।
इसी ज्ञान और संदेश के साथ दोस्तों,
“प्रेम” विषय पर शोध मेरा समाप्त हुआ।

♦ वेदस्मृति ‘कृती’ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

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  • “वेदस्मृति ‘कृती’ जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए समझाने की कोशिश की हैं — प्रेम होता नहीं दुखद जब तक रहे शुद्ध, मिलावट हिंसा की करती है इसे अशुद्ध। प्यार और मार का नहीं है कोई मेल, सबका यही संदेश नानक हो या बुद्ध।

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यह कविता (प्यार पर शोध।) ” वेदस्मृति ‘कृती’ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/गीत/दोहे/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई आई टी . शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक. समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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वर्षा ऋतु कृष्ण कोडर।

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♦ वर्षा ऋतु कृष्ण कोडर। ♦

वर्षा ऋतु का जब शुभारंभ होता,
सभी प्राणियों की बढ़ती हो जाती।
आकाश क्षुब्ध – सा दिखने लगता,
नीले – घने बादल घिर जाते हैं॥

बिजली की कौंध डराती धमकाती,
बार – बार गड़गड़ाहट सुनाई पड़ती।
सूर्य चंद्रमा – तारे रह – रह ढ़क जाते,
समय – समय किरण अंध छांटता॥

प्राणी के कल्याण में बादल बरसता,
जनजीवन पाकर मानव खुश होता।
जेठ आषाढ़ गर्मी धरा सूख जाती,
वर्षाऋतु जल सिंचित करने आती॥

तप करते जस शरीर – दुर्बल हो जाता,
जल को पीने से हृष्ट पुष्ट होता दिखता।
वर्षा के सायंकाल घना अंधेरा छा जाता,
घर – बाहर निकला बालक डर जाता॥

नदियां जो सूख रही थी जेठ – आषाढ़,
उमड़ – घुमड़ घर के बाहर बहने लगती।
शरीर का छुपा कौमार्य जागने लगता,
पृथ्वी पर हरियर घास उगने लगती॥

खेतों में हरी – भरी हरियाली छाने लगी,
किसान में आनंद की लहरें उठने लगी।
आनंद के पुष्प कमल खिलने लगते,
बरसाती मेंढक टर टर करते – निकलते॥

वर्षा ऋतु में उपयोगी हवा तेज बहती,
नदियों के किनारे और वह क्षुब्ध रहती।
कामनाओं के उभार से मन भर जाता,
मूसलाधार वर्षा से पहाड़ दरकने लगता॥

इंद्र धनुष की शोभा में सगुण दिखाती,
चंद्रमा की उज्जवल चांदनी दिखती।
तब बादलों से सही समय पता चलता,
मोर – मोरनी का रोम – रोम खिल जाता॥

कुहुक से नृत्य के आनंदोत्सव मनाता,
भगवत भक्त जी आनंद मग्न हो जाता।
सारस – क्षण भर तालाब नहीं छोड़ते,
भील – भीलनियां आनंद मगन होती॥

पर्वतों के झर – झर झरने से जल बहते,
झरते जल की आवाज सुरीली लगती।
कृष्ण किसी कोडर में जाकर छिपते,
कंद मूल ग्वाला खाकर खेलते रहते॥

कभी किसी चट्टान पर जाकर सभी बैठते,
ग्वाल बाल दही भात साग खा जाते।
थोड़ी देर में गाय भर पेट घास चर लेती,
आंख मूंदकर बैठ जुगाली करती रहती॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में — वर्षा ऋतु के मनभावन दृश्य, प्रकृति का सुन्दर दृश्य, इंद्र धनुष की शोभा, चंद्रमा की उज्जवल चांदनी, मोर- मोरनी का सुन्दर नृत्य, पर्वतों के झरने से झर-झर कर बहते जल, खेतों में हरी-भरी हरियाली, किसान में आनंद की लहरें, और बारिश के दौरान श्री कृष्ण का ग्वाल बालों के साथ क्रीड़ा का खूबसूरत वर्णन किया है।

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यह कविता (वर्षा ऋतु कृष्ण कोडर।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — शिक्षक की महानता।

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शिक्षक दिवस।

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♦ शिक्षक दिवस। ♦

भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के,
जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाता है।
राष्ट्रीय शिक्षक दिवस 6 मई को मनाया जाता है,
5 सितंबर शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाता है॥

अंग्रेजी माध्यम के बच्चे जिसे टीचर्स डे कहते हैं,
हिंदी माध्यम के बच्चे शिक्षक दिवस उसे कहते हैं।
गुरु के महत्व को शायद ही कोई ना समझे,
शिक्षकों के महत्व को लोगों में समझाया जाता है॥

रचनाकार उनकी रचनाएं ऐसे बताई जाती है,
हिंदी बोलो, चाहे इंग्लिश माथे बिंदी लगाई जाती।
शिक्षा के महत्व को खास बताया जाता है,
सच्चा गुरु जीवन में आमतौर पर प्रकाश लाता है॥

खोलो – खोलो, अपना – अपना दरवाजा खोलो,
पर्दा लगा हटाओ, जल्दी शुद्ध हवा आती है।
खूंटे से जो बधी हवा है, मिलकर छुड़ाओ संगी,
मौसम के वो मेहमान तुम, उड़ चली हवा ताजी बासी॥

चल उड़ चल कहीं और जहां खुश हो मंजिल का ठौर,
हवा बह रही मधुर सुहानी, राष्ट्र प्रेम जगाने आती।
यह देश तुम्हारा तुम्हीं हो नेता, रस्ते कठिन चलो सम्हाल,
तुम अपने हो इसलिए कहता, आता अक्सर ही॥

हम किताब है और वह पढ़ने आता है,
छद्म घाघरा पहने कोई पढ़ने जाता है।
दुर्गति होने पर भी उसे संतोष नहीं होता,
पाप कर्मों से प्रेरित शुभ बुद्धि हरण होती॥

मान – मर्यादा को त्याग कर जी हजूरी करता,
कौवे की भांति दूसरों के घर से टुकड़ा लाता।
कच्चे – पक्के बाल अपना मुखड़ा दिखलाता,
छम – छम अलबेला सर पर ताज बताता॥

सच्चा गुरुजी आता तो अंधियारा मीट जाता है,
लक्ष्य दिखाई देने लगता, पग आगे बढ़ जाता है।
सतगुरु – सत्पुरुषों की मैत्री स्थाई होती है,
आरंभ कम, लेकिन कालांतर में बढ़ती जाती है॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाता है। राष्ट्रीय शिक्षक दिवस 6 मई को मनाया जाता है, 5 सितंबर शिक्षक दिवस के रुप में अपनाया जाता है। अंग्रेजी माध्यम के बच्चे जिसे टीचर्स डे कहते हैं, हिंदी माध्यम के बच्चे शिक्षक दिवस उसे कहते हैं। गुरु के महत्व को शायद ही कोई ना समझे, इस दिन शिक्षकों के महत्व को लोगों में समझाया जाता है।

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यह कविता (शिक्षक दिवस।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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