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“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिंदी कविता

पंजशीर : मानवता शर्मसार हुई।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ पंजशीर : मानवता शर्मसार हुई। ♦

दुनिया के सारे आतंकी इकट्ठा एक जगह आये,
मानवता के विरोध में पाकिस्तान ने साथ दिया।
उसने अफगानी मनुष्यों को निरीह बनाया,
मानवाधिकार का दुनिया ने आवाज नहीं उठाया॥

भोजन पानी आवश्यक वस्तु जनता नहीं पा रही,
दुनिया इस घोर अत्याचार को आंखों से देख रही।
इतिहास लिखने वालों ने कोरी कलम चलाया,
धिक्कार धिक्कार धिक्कार दुनिया को सुनाया॥

पाक प्रायोजित प्रोपोगंडा तालीवान ने फैलाया,
पंजशीर को जीतने का भ्रम दुनिया से चलाया।
मसूद के लड़ाकों ने मंगलवार को हवाई हमला किया,
16 दिन से मसूद, तालीवान – पाकिस्तान से लड़ रहा॥

पाक आई एस प्रमुख हे फैज अफ़ग़ान आया,
अर्ध रात्रि सितंबर 3, 21को पाकिस्तान बम बरपाया।
पाक ने पंजशीर में सेना लेकर उसपर दहाया,
दुनियां से पंजशीर गुहार सहायता की लगाया॥

अहमद मसूद पाक और तालीवान से लड़ रहा,
मसूद ने तालिबान के खिलाफ आने की उम्मीद की।
अफगानी औरतों ने विरोध का बिगुल बजाया,
मसूद के लड़ाकों ने हजारों दुश्मन मार गिराया॥

अपने को भी पंजशीर ने लड़ाई में वीर गवाया,
उधर ईरानी पाकिस्तान को संदेश देकर चेताया।
अपनी हद में रहने की इमरान को इरान सुनाया,
भीषण युद्ध आगे होने वाला है ऐसा संदेश आया॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में — वर्तमान समय में तालिबान के लड़ाकों या यूँ कहे इंसानियत के दुश्मन आतंकवादियों द्वारा अफगानिस्तान के पंजशीर पर कब्जा और उनकी बर्बरता लूट, बलात्कार, हत्या, और खून खराबा करने की नाकाम कोशिश को दर्शाया है।

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यह कविता (पंजशीर : मानवता शर्मसार हुई।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें: अफगानी – दुर्दशा।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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प्यार पर शोध।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ प्यार पर शोध। ♦

जब से मेरा साहित्य में अनुराग जगा,
मैंने नाना विधाओं का साहित्य पढ़ा।
किया गौर तो ये पाया मैंने कि आधा,
साहित्य प्रेम कथाओं से है भरा पड़ा।

गीत, गज़लें, कविता, दोहे, रुबाई, छन्द,
लेख, निबन्ध, मुक्तक न जाने कितने ग्रंथ।
रच डाले कवियों ने प्रेम की व्याख्या में,
फिर भी समझा न पाये है क्या प्रेम पंथ?

उसी पल मन में मेरे आया ये विचार,
करुँ शोध मैं भी, जानूँ क्या है प्यार ?
अपने अनेक मित्रों का आया मुझे ख्याल,
सबसे पूछा मैंने बस यही एक सवाल।

पहले एक डॉक्टर मित्र से की मुलाक़ात,
सुन कर प्रश्न हँसे वो, कही विचित्र बात।
कृती इट्स मीनिंगलैस वर्ड, मेक्स नो सेन्स,
यू कैन डिफाइन इट एज़ हॉर्मोनल इम्बैलेन्स।

किसी ने कहा इसे काल्पनिक अफसाना,
किसी ने कहा इसे जिंदगी का तराना।
कुछ थे गालिब से सहमत, बोले है ये,
आग का दरिया और डूब कर है जाना।

कोई बोला इश्क ने जीना सीखा दिया,
कोई बोला इश्क ने पीना सीखा दिया।
एक ने कहा बेकार की चीज है मुहब्बत,
खाम खां इंसान को निकम्मा बना दिया।

किसी ने नियामत कहा, किसी ने कयामत,
किसी ने शरारत कहा, किसी ने इबादत।
किसी के लिए आंसू और आह थी उल्फत,
किसी के लिये खुदा का नूर थी मुहब्बत।

परिभाषा प्यार की न कोई बता पाया,
सबने केवल अपना अनुभव ही सुनाया।
चकराई बुद्धि मेरी सोच – सोच कर फिर,
ढाई आखर की कितनी विचित्र है माया।

मन मस्तिष्क में चला वैचारिक संघर्ष,
गहन चिन्तन के बाद निकला ये निष्कर्ष।
निजी अनुभव नहीं है प्यार की परिभाषा,
प्यार तो है जीवन का उत्सर्ग, उत्कर्ष।

इस शोध के बाद एक सत्य तो पता चला,
प्यार ने किसी का किया भला या हो छल।
पर ये भावना हर किसी में थी मौजूद,
कोई भी हृदय प्यार से रिक्त नहीं मिला।

प्रेम होता नहीं दुखद जब तक रहे शुद्ध,
मिलावट हिंसा की करती है इसे अशुद्ध।
प्यार और मार का नहीं है कोई मेल,
सबका यही संदेश नानक हो या बुद्ध।

प्यार ही समझता है मानवता की हद,
नासमझी से हमारी हो जाता है बद।
होती है मिलावट इसमें हिंसा की जब,
खोकर स्वरूप अपना बन जाता है जिद।

यही भाव मेरे चिंतन में व्याप्त हुआ,
मुझे तो प्यार का यही अर्थ प्राप्त हुआ।
इसी ज्ञान और संदेश के साथ दोस्तों,
“प्रेम” विषय पर शोध मेरा समाप्त हुआ।

♦ वेदस्मृति ‘कृती’ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

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  • “वेदस्मृति ‘कृती’ जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए समझाने की कोशिश की हैं — प्रेम होता नहीं दुखद जब तक रहे शुद्ध, मिलावट हिंसा की करती है इसे अशुद्ध। प्यार और मार का नहीं है कोई मेल, सबका यही संदेश नानक हो या बुद्ध।

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यह कविता (प्यार पर शोध।) ” वेदस्मृति ‘कृती’ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/गीत/दोहे/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई आई टी . शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक. समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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वर्षा ऋतु कृष्ण कोडर।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ वर्षा ऋतु कृष्ण कोडर। ♦

वर्षा ऋतु का जब शुभारंभ होता,
सभी प्राणियों की बढ़ती हो जाती।
आकाश क्षुब्ध – सा दिखने लगता,
नीले – घने बादल घिर जाते हैं॥

बिजली की कौंध डराती धमकाती,
बार – बार गड़गड़ाहट सुनाई पड़ती।
सूर्य चंद्रमा – तारे रह – रह ढ़क जाते,
समय – समय किरण अंध छांटता॥

प्राणी के कल्याण में बादल बरसता,
जनजीवन पाकर मानव खुश होता।
जेठ आषाढ़ गर्मी धरा सूख जाती,
वर्षाऋतु जल सिंचित करने आती॥

तप करते जस शरीर – दुर्बल हो जाता,
जल को पीने से हृष्ट पुष्ट होता दिखता।
वर्षा के सायंकाल घना अंधेरा छा जाता,
घर – बाहर निकला बालक डर जाता॥

नदियां जो सूख रही थी जेठ – आषाढ़,
उमड़ – घुमड़ घर के बाहर बहने लगती।
शरीर का छुपा कौमार्य जागने लगता,
पृथ्वी पर हरियर घास उगने लगती॥

खेतों में हरी – भरी हरियाली छाने लगी,
किसान में आनंद की लहरें उठने लगी।
आनंद के पुष्प कमल खिलने लगते,
बरसाती मेंढक टर टर करते – निकलते॥

वर्षा ऋतु में उपयोगी हवा तेज बहती,
नदियों के किनारे और वह क्षुब्ध रहती।
कामनाओं के उभार से मन भर जाता,
मूसलाधार वर्षा से पहाड़ दरकने लगता॥

इंद्र धनुष की शोभा में सगुण दिखाती,
चंद्रमा की उज्जवल चांदनी दिखती।
तब बादलों से सही समय पता चलता,
मोर – मोरनी का रोम – रोम खिल जाता॥

कुहुक से नृत्य के आनंदोत्सव मनाता,
भगवत भक्त जी आनंद मग्न हो जाता।
सारस – क्षण भर तालाब नहीं छोड़ते,
भील – भीलनियां आनंद मगन होती॥

पर्वतों के झर – झर झरने से जल बहते,
झरते जल की आवाज सुरीली लगती।
कृष्ण किसी कोडर में जाकर छिपते,
कंद मूल ग्वाला खाकर खेलते रहते॥

कभी किसी चट्टान पर जाकर सभी बैठते,
ग्वाल बाल दही भात साग खा जाते।
थोड़ी देर में गाय भर पेट घास चर लेती,
आंख मूंदकर बैठ जुगाली करती रहती॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में — वर्षा ऋतु के मनभावन दृश्य, प्रकृति का सुन्दर दृश्य, इंद्र धनुष की शोभा, चंद्रमा की उज्जवल चांदनी, मोर- मोरनी का सुन्दर नृत्य, पर्वतों के झरने से झर-झर कर बहते जल, खेतों में हरी-भरी हरियाली, किसान में आनंद की लहरें, और बारिश के दौरान श्री कृष्ण का ग्वाल बालों के साथ क्रीड़ा का खूबसूरत वर्णन किया है।

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यह कविता (वर्षा ऋतु कृष्ण कोडर।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — शिक्षक की महानता।

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आप सभी का प्रिय दोस्त

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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शिक्षक दिवस।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शिक्षक दिवस। ♦

भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के,
जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाता है।
राष्ट्रीय शिक्षक दिवस 6 मई को मनाया जाता है,
5 सितंबर शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाता है॥

अंग्रेजी माध्यम के बच्चे जिसे टीचर्स डे कहते हैं,
हिंदी माध्यम के बच्चे शिक्षक दिवस उसे कहते हैं।
गुरु के महत्व को शायद ही कोई ना समझे,
शिक्षकों के महत्व को लोगों में समझाया जाता है॥

रचनाकार उनकी रचनाएं ऐसे बताई जाती है,
हिंदी बोलो, चाहे इंग्लिश माथे बिंदी लगाई जाती।
शिक्षा के महत्व को खास बताया जाता है,
सच्चा गुरु जीवन में आमतौर पर प्रकाश लाता है॥

खोलो – खोलो, अपना – अपना दरवाजा खोलो,
पर्दा लगा हटाओ, जल्दी शुद्ध हवा आती है।
खूंटे से जो बधी हवा है, मिलकर छुड़ाओ संगी,
मौसम के वो मेहमान तुम, उड़ चली हवा ताजी बासी॥

चल उड़ चल कहीं और जहां खुश हो मंजिल का ठौर,
हवा बह रही मधुर सुहानी, राष्ट्र प्रेम जगाने आती।
यह देश तुम्हारा तुम्हीं हो नेता, रस्ते कठिन चलो सम्हाल,
तुम अपने हो इसलिए कहता, आता अक्सर ही॥

हम किताब है और वह पढ़ने आता है,
छद्म घाघरा पहने कोई पढ़ने जाता है।
दुर्गति होने पर भी उसे संतोष नहीं होता,
पाप कर्मों से प्रेरित शुभ बुद्धि हरण होती॥

मान – मर्यादा को त्याग कर जी हजूरी करता,
कौवे की भांति दूसरों के घर से टुकड़ा लाता।
कच्चे – पक्के बाल अपना मुखड़ा दिखलाता,
छम – छम अलबेला सर पर ताज बताता॥

सच्चा गुरुजी आता तो अंधियारा मीट जाता है,
लक्ष्य दिखाई देने लगता, पग आगे बढ़ जाता है।
सतगुरु – सत्पुरुषों की मैत्री स्थाई होती है,
आरंभ कम, लेकिन कालांतर में बढ़ती जाती है॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाता है। राष्ट्रीय शिक्षक दिवस 6 मई को मनाया जाता है, 5 सितंबर शिक्षक दिवस के रुप में अपनाया जाता है। अंग्रेजी माध्यम के बच्चे जिसे टीचर्स डे कहते हैं, हिंदी माध्यम के बच्चे शिक्षक दिवस उसे कहते हैं। गुरु के महत्व को शायद ही कोई ना समझे, इस दिन शिक्षकों के महत्व को लोगों में समझाया जाता है।

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यह कविता (शिक्षक दिवस।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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गुरु ही गोविंद है।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ गुरु ही गोविंद है। ♦

पिता का सा बृहद प्यार है जिसमें,
है मां की सी जिसमें कोमल ममता।
उसी गुरुदेव के दिए ज्ञान में ही तो है,
गोविन्द से जीव को मिलाने की क्षमता।

तुतलाती सी इस जुबान को जिसने,
निज शब्द स्नेह का अमृत पिलाया।
गुरुदेव ही तो है वह दुनियां में अपना,
जो उंगली पकड़ कर लिखना सिखाया।

हां हम भूल गए आज सब ज्ञानी होकर,
प्राप्त ज्ञान को अपनी उपलब्धि बताया।
स्वार्थपरता के इस धुंधलके अंधे युग में,
गुरु उपकारों को उसका फर्ज ठहराया।

ओ नादान मानुष! क्या औकात है तेरी?
कबीर सरीखों ने गुरु को गोविन्द बताया।
ज्ञान सागर से बूंद भर लेकर तू इतराता है,
तेरी फितरत का यह रंग कुछ समझ न आया।

गुरु ही गोविन्द है, सन्तों, ऋषि, मुनियो ने,
पीढ़ी दर पीढ़ी सदियों से बहुत समझाया।
नादान मानुष की फितरत तो देखो, हैरत है,
उसकी समझ में आज तक कुछ न आया।

तथाकथित आधुनिकता के नशे में चूर होकर,
अपनी चिर परिचित सभ्यता को है भुलाया।
गुरु – गुड़ व चेला शक्कर, कहावत के बल पर,
नादान ने खुद को गुरु से बढ़कर है बताया।

गुरु चरण कमल की धूली के बिन,
कभी खुलते नहीं है बुद्धि के दरवाजे।
गुरु की दी शब्दशक्ति के बल से ही,
गूंजती है भीतर में कल्पना, आवाजे।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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ज़रूर पढ़ें — शिक्षक की महानता।

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — प्राचीन काल से ही गुरु ही गोविन्द है, सन्तों, ऋषि, मुनियो ने, पीढ़ी दर पीढ़ी सदियों से बहुत समझाया। नादान मानुष की फितरत तो देखो, हैरत है, उसकी समझ में आज तक कुछ न आया। तथाकथित आधुनिकता के नशे में चूर होकर, अपनी चिर परिचित सभ्यता को है भुलाया। गुरु – गुड़ व चेला शक्कर, कहावत के बल पर, नादान ने खुद को गुरु से बढ़कर है बताया।

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यह कविता (गुरु ही गोविंद है।) “हेमराज ठाकुर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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शिक्षक की महानता।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शिक्षक की महानता। ♦

ए दिल, तुझें आज जिसकी महानता पर लिखना, वो तो है सर्वोपरि।
चला जो भी इनके पद्चिन्हों पर, जिंदगी बनी उनकी सोने जैसी खरी॥

आलौकित पथ करता हमारा, ये तो वो पुंज-प्रकाश का।
बुलंदी के सितारें चमकते हैं जिस पर, वो पटल आकाश का॥

जिनके ज्ञान के भंडार में छिपी, धरा के गर्भ जैसी गहराई।
जिसने समझा इनको, उन्होंने अपनी विजय-पताका लहराई॥

कभी ये बन कर माली, अवगुणों के कांटो को दूर कर गुणों के फूल खिलायें।
अपने प्यारे उपवन की महक से, ये सारा जहान सुगन्धित बनायें॥

जब ये परखने पर आए, तो एक परिपक्व जौहरी बन जाता है।
घिस-घिस कर पत्थर को भी, हीरा सा चमकाता है॥

हर किसी की जिंदगी में इनकी छवि, एक अलग ही रुतबा पाती है।
इनकी अनुपम – गाथा तो हर शह को, संगीतमय बनाती है॥

ये ऐसा अदभुत कलाकार, जिसके गुणों को सुनाया न जा सके।
इसकी खूबियों के समक्ष हम केवल, ये शीश झुका सके॥

आओं! आज इनके दिये संस्कारों को, अपने जीवन में उतार ले।
अपने सद्कर्मों से नाम रोशन कर जायें, बस यही गुरु-दक्षिणा का उपहार दे॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

मेरे सभी प्रिय पाठकों आप सभी को — KMSRAJ51.COM — की तरफ से तहे दिल से शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं।

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से शिक्षक और छात्र के दिव्य व पवित्र तथा उन्नत सम्बन्ध को बताया है। एक अच्छे शिक्षक और अच्छे छात्र के गुणों को समझाने की कोशिश की है। छात्र जीवन किसी भी इंसान के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है, पुरे जीवन का आधार स्तम्भ होता है छात्र जीवन। अपने सद्कर्मों से नाम रोशन कर जायें अपने गुरुजन का बस यही गुरु-दक्षिणा का उपहार दे हम इस शिक्षक दिवस पर।

—————

यह कविता (शिक्षक की महानता।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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जीवन और संघर्ष।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जीवन और संघर्ष। ♦

जब इंसान पैदा होता है,
जीवन में संघर्ष का पड़ाव शुरू होता है।
अनबोल बच्चा दूध के लिए रोता है,
यही से संघर्ष का दौर शुरू होता है॥

बड़ा होने पर संघर्षों का रुप बदल जाता है,
इंसान चुनौतियों का सामना करता है।
जीवन की नैया पार कर जाता है,
जीत की खुशी में फूला नहीं समाता है॥

संघर्ष के साथ ने व्यक्तित्व का निर्माण होता है,
तब कहीं जाकर समाज में स्थान मिलता है।
मां – बाप का मन हर्षित हो जाता है,
संघर्षों के साथ बेटा – बेटी आफिसर बन जाता है॥

संघर्षों के साथ जो कर्तव्यों का निर्वहन करता है,
जीवन रस के साथ इंसान का जीवन सार्थक हो जाता है।
विजयलक्ष्मी है कहती ए-इंसान संघर्षों से क्यों घबराता है,
अंत में संघर्ष करते हुए ही इंसान भगवान के चरणों में जगह पाता हैं॥

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

—————

  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — जब इंसान जन्म लेता है तब से ही उसके जीवन में संघर्ष शुरू हो जाता है और यह संघर्ष अंतिम श्वास तक चलता है।

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यह कविता (जीवन और संघर्ष।) “विजयलक्ष्मी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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दिल खोल।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ दिल खोल। ♦

अपना सपना – हकीकत दिखी दिल खोलकर,
चलना – फिरना लिखना – पढ़ना तोल कर।
सोच – समझ सुरक्षित संबल का शोध कर,
साथ – आए साथ – निभाएं दिल खोलकर॥

अक्षर – अक्षर और निक्षर पढ़ते खोज कर,
अनछुए, पहलू – उजागर करें सोचकर।
चल- चल, पद – छंद सुच्चरित लय जोड़कर,
घातक – प्रतिघात रहित विश्वास – खुलकर॥

ताना – बाना, माना – जाना छोड़ कर,
चलना – संभलना सदा रिश्ता जोड़कर।
बिरहा – कजरी – रसिया रचिये सोचकर,
सोहर – सुहाग – सावन सुनाएं खोजकर॥

बेबसी – बेचैनी में खुलकर चर्चा कर,
स्वछंद खग – सम उन्मुक्त प्रेम रस भर।
गीत – गोविंद की पदावली वा सूर,
भाव – भाषा, कल्पना लिख लें भरपूर॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — जीवन में परिस्थिति अनुकूल हो या विपरीत हो, सदैव ही कोई भी निर्णय दिल से ले, दिल खोल कर चर्चा करें।

—————

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यह कविता (दिल खोल।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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राम नाम की महिमा अपार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ राम नाम की महिमा अपार। ♦

राम चेतना – राम प्रेरक,
नाम सर्वव्यापी हैं।
आदर्श भरा – चरित्र खरा,
श्री राम अविनाशी है।

अभिमान मर्दक – दुष्ट नाशक,
राम सुखद राशि वाले है।
साकार धाम – अयोध्या धाम,
अयोध्या अविनाशी है।

निराकार राम – साकार राम,
राम नाम में मुक्ति है।
राम ब्रह्म – परमार्थ रूप,
सृष्टि का पालन करता है।

राम का नाम जो भी जपता है,
भवसागर से पार उतरता है।
राम शक्ति – राम भक्ति योग,
सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है।

दैहिक – दैविक – भौतिक ताप,
राम नाम से फटक नहीं पाते है।
हनुमान की पूजा जो भी करता,
वह राम नाम का सुख पाता है।

राम नाम मधुर – मनोहर छवि,
तुलसी दोहावली में गाते हैं।

‘रा’ शब्द विश्व व्यापक है,
‘म’ शब्द ईश्वर वाचक है।
यानी लोक मंगल का ईश्वर जो,
वही राम कहलाता है।

रमा के साथ जो रमण करता,
उसी को राम कहा जाता है।
सहस्त्रों नामों से जो फल मिलता,
वह राम के नाम से मिलता है।

भगवान शिव जी पार्वती से बोले,
मैं निरंतर राम में रमण करता हूं।
परम मनोहर श्री राम नाम ही है,
सुमुखी! सहस्त्रनाम के समान है।

श्री राम के ही प्रताप से वाल्मीकि,
एक डाकू से आदि कवि कहलाए।

परमार्थ की – मोक्ष की आशा जो,
कोई भी व्यक्ति मन से करता है।
राम नाम जप के बिना उसे भी,
प्राप्ति असंभव सा ही लगता है।

द्वापर में दान से जो फल मिलता,
कलयुग में राम नाम से मिलता है।
सूर्य, चंद्रमा, अग्नि और वायु सब,
राम नाम की शक्ति से चलते हैं।

भगवान राम अपने भक्तों का,
सभी रोग – शोक दूर करते हैं।

शुभ काम में भक्तों को लगाकर ,
सौभाग्य और समृद्धि बढ़ाते हैं।
घी, तिल, खीर से जो हवन करता,
मनवांछित कामना – पूर्ति करते हैं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में बताया है, राम नाम के महत्व व महिमा को और राम का नाम लेने से जीवन में क्या-क्या फायदे होते है।

—————

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यह कविता (राम नाम की महिमा अपार।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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प्रगीत और संगीत तत्व।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ प्रगीत और संगीत तत्व। ♦

साहित्य और संगीत का वांछनीय संबंध,
साहित्यकार की पद शैली में सदा रहती।
पद साहित्य – परंपरा पीछे छूटने पर भी,
साहित्यकार – संबंध में संगीत बना रहता॥

मानव भावानुभूति का सहज साधन संगीत,
प्रगीतों में निश्चल विद्यमान रहती अनुभूति।
अपने ही चरम ऐश्वर्य को प्राप्त करता,
जब वह सांगीतिक वैभव से परिपुष्ट होता॥

गायन वादन नृत्य को आदर प्रदान करती,
प्रेमानुभूति अभिव्यक्ति की संचित सुविधा दी।
तत्कालीन कविता में इतिवृत्तात्मकता और,
रचनात्मकता – रस आत्मकता काव्य होता॥

रीति काल की ध्रुपद धमार शैली सशक्त रही,
जो पर्याप्त रूप से पीछे छूटने लगी।
दादरा – ठुमरी – ख्याल इत्यादि में श्रृंगारिक,
शैली से प्रगीतकारों ने नाता तोड़ा॥

प्रगीत काव्य में प्रथम ग्राम – गीत और,
लोकगीत का भावनात्मक प्रमुख स्थान है।
दोनों हमारी संस्कृति और भावनात्मक,
अक्षर भंडार – कलापरक मूल संगीत उत्सव है॥

सोहर, घोड़ी, बन्नी, सुहाग, सावन सुमधुर गीत,
लोकाचार व्यवहार सामाजिक अवदान है।
पुरुषों द्वारा भी ग्राम गीतों की रचना होती,
अधिकांश गीतों की रचना स्त्रियां रचती॥

बिरहा कजरी रसिया आदि गीतों की रचना,
पुरूषों द्वारा रचा और गाया जाता है।
राग – ताल और शास्त्रीय जकड़ बंदी इनमें,
कला परक विशेषता का प्रतिबंध कम होता॥

यह गीत प्रायः कहरवा, दादरा जैसे हल्की,
लोकधुन, चलती हुई घुन पर आधारित होती।
जब कला परक संगीत – श्रृंगार से नियमन होता,
लोकगीत ही नूतन रूप – रंग में मिलता॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में बताया है, साहित्य और संगीत का सम्बन्ध आरंभिक समय से ही है। साहित्य और संगीत एक दूसरे के पूरक है। जब कला परक संगीत – श्रृंगार से नियमन होता, लोकगीत ही नूतन रूप – रंग में मिलता।

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यह कविता (प्रगीत और संगीत तत्व।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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