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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिंदी कविता

गुरु ही गोविंद है।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ गुरु ही गोविंद है। ♦

पिता का सा बृहद प्यार है जिसमें,
है मां की सी जिसमें कोमल ममता।
उसी गुरुदेव के दिए ज्ञान में ही तो है,
गोविन्द से जीव को मिलाने की क्षमता।

तुतलाती सी इस जुबान को जिसने,
निज शब्द स्नेह का अमृत पिलाया।
गुरुदेव ही तो है वह दुनियां में अपना,
जो उंगली पकड़ कर लिखना सिखाया।

हां हम भूल गए आज सब ज्ञानी होकर,
प्राप्त ज्ञान को अपनी उपलब्धि बताया।
स्वार्थपरता के इस धुंधलके अंधे युग में,
गुरु उपकारों को उसका फर्ज ठहराया।

ओ नादान मानुष! क्या औकात है तेरी?
कबीर सरीखों ने गुरु को गोविन्द बताया।
ज्ञान सागर से बूंद भर लेकर तू इतराता है,
तेरी फितरत का यह रंग कुछ समझ न आया।

गुरु ही गोविन्द है, सन्तों, ऋषि, मुनियो ने,
पीढ़ी दर पीढ़ी सदियों से बहुत समझाया।
नादान मानुष की फितरत तो देखो, हैरत है,
उसकी समझ में आज तक कुछ न आया।

तथाकथित आधुनिकता के नशे में चूर होकर,
अपनी चिर परिचित सभ्यता को है भुलाया।
गुरु – गुड़ व चेला शक्कर, कहावत के बल पर,
नादान ने खुद को गुरु से बढ़कर है बताया।

गुरु चरण कमल की धूली के बिन,
कभी खुलते नहीं है बुद्धि के दरवाजे।
गुरु की दी शब्दशक्ति के बल से ही,
गूंजती है भीतर में कल्पना, आवाजे।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

ज़रूर पढ़ें — शिक्षक की महानता।

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — प्राचीन काल से ही गुरु ही गोविन्द है, सन्तों, ऋषि, मुनियो ने, पीढ़ी दर पीढ़ी सदियों से बहुत समझाया। नादान मानुष की फितरत तो देखो, हैरत है, उसकी समझ में आज तक कुछ न आया। तथाकथित आधुनिकता के नशे में चूर होकर, अपनी चिर परिचित सभ्यता को है भुलाया। गुरु – गुड़ व चेला शक्कर, कहावत के बल पर, नादान ने खुद को गुरु से बढ़कर है बताया।

—————

यह कविता (गुरु ही गोविंद है।) “हेमराज ठाकुर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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शिक्षक की महानता।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शिक्षक की महानता। ♦

ए दिल, तुझें आज जिसकी महानता पर लिखना, वो तो है सर्वोपरि।
चला जो भी इनके पद्चिन्हों पर, जिंदगी बनी उनकी सोने जैसी खरी॥

आलौकित पथ करता हमारा, ये तो वो पुंज-प्रकाश का।
बुलंदी के सितारें चमकते हैं जिस पर, वो पटल आकाश का॥

जिनके ज्ञान के भंडार में छिपी, धरा के गर्भ जैसी गहराई।
जिसने समझा इनको, उन्होंने अपनी विजय-पताका लहराई॥

कभी ये बन कर माली, अवगुणों के कांटो को दूर कर गुणों के फूल खिलायें।
अपने प्यारे उपवन की महक से, ये सारा जहान सुगन्धित बनायें॥

जब ये परखने पर आए, तो एक परिपक्व जौहरी बन जाता है।
घिस-घिस कर पत्थर को भी, हीरा सा चमकाता है॥

हर किसी की जिंदगी में इनकी छवि, एक अलग ही रुतबा पाती है।
इनकी अनुपम – गाथा तो हर शह को, संगीतमय बनाती है॥

ये ऐसा अदभुत कलाकार, जिसके गुणों को सुनाया न जा सके।
इसकी खूबियों के समक्ष हम केवल, ये शीश झुका सके॥

आओं! आज इनके दिये संस्कारों को, अपने जीवन में उतार ले।
अपने सद्कर्मों से नाम रोशन कर जायें, बस यही गुरु-दक्षिणा का उपहार दे॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

मेरे सभी प्रिय पाठकों आप सभी को — KMSRAJ51.COM — की तरफ से तहे दिल से शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं।

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से शिक्षक और छात्र के दिव्य व पवित्र तथा उन्नत सम्बन्ध को बताया है। एक अच्छे शिक्षक और अच्छे छात्र के गुणों को समझाने की कोशिश की है। छात्र जीवन किसी भी इंसान के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है, पुरे जीवन का आधार स्तम्भ होता है छात्र जीवन। अपने सद्कर्मों से नाम रोशन कर जायें अपने गुरुजन का बस यही गुरु-दक्षिणा का उपहार दे हम इस शिक्षक दिवस पर।

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यह कविता (शिक्षक की महानता।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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जीवन और संघर्ष।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जीवन और संघर्ष। ♦

जब इंसान पैदा होता है,
जीवन में संघर्ष का पड़ाव शुरू होता है।
अनबोल बच्चा दूध के लिए रोता है,
यही से संघर्ष का दौर शुरू होता है॥

बड़ा होने पर संघर्षों का रुप बदल जाता है,
इंसान चुनौतियों का सामना करता है।
जीवन की नैया पार कर जाता है,
जीत की खुशी में फूला नहीं समाता है॥

संघर्ष के साथ ने व्यक्तित्व का निर्माण होता है,
तब कहीं जाकर समाज में स्थान मिलता है।
मां – बाप का मन हर्षित हो जाता है,
संघर्षों के साथ बेटा – बेटी आफिसर बन जाता है॥

संघर्षों के साथ जो कर्तव्यों का निर्वहन करता है,
जीवन रस के साथ इंसान का जीवन सार्थक हो जाता है।
विजयलक्ष्मी है कहती ए-इंसान संघर्षों से क्यों घबराता है,
अंत में संघर्ष करते हुए ही इंसान भगवान के चरणों में जगह पाता हैं॥

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

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  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — जब इंसान जन्म लेता है तब से ही उसके जीवन में संघर्ष शुरू हो जाता है और यह संघर्ष अंतिम श्वास तक चलता है।

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यह कविता (जीवन और संघर्ष।) “विजयलक्ष्मी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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दिल खोल।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ दिल खोल। ♦

अपना सपना – हकीकत दिखी दिल खोलकर,
चलना – फिरना लिखना – पढ़ना तोल कर।
सोच – समझ सुरक्षित संबल का शोध कर,
साथ – आए साथ – निभाएं दिल खोलकर॥

अक्षर – अक्षर और निक्षर पढ़ते खोज कर,
अनछुए, पहलू – उजागर करें सोचकर।
चल- चल, पद – छंद सुच्चरित लय जोड़कर,
घातक – प्रतिघात रहित विश्वास – खुलकर॥

ताना – बाना, माना – जाना छोड़ कर,
चलना – संभलना सदा रिश्ता जोड़कर।
बिरहा – कजरी – रसिया रचिये सोचकर,
सोहर – सुहाग – सावन सुनाएं खोजकर॥

बेबसी – बेचैनी में खुलकर चर्चा कर,
स्वछंद खग – सम उन्मुक्त प्रेम रस भर।
गीत – गोविंद की पदावली वा सूर,
भाव – भाषा, कल्पना लिख लें भरपूर॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — जीवन में परिस्थिति अनुकूल हो या विपरीत हो, सदैव ही कोई भी निर्णय दिल से ले, दिल खोल कर चर्चा करें।

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यह कविता (दिल खोल।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें: पृथु का प्रादुर्भाव।

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आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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राम नाम की महिमा अपार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ राम नाम की महिमा अपार। ♦

राम चेतना – राम प्रेरक,
नाम सर्वव्यापी हैं।
आदर्श भरा – चरित्र खरा,
श्री राम अविनाशी है।

अभिमान मर्दक – दुष्ट नाशक,
राम सुखद राशि वाले है।
साकार धाम – अयोध्या धाम,
अयोध्या अविनाशी है।

निराकार राम – साकार राम,
राम नाम में मुक्ति है।
राम ब्रह्म – परमार्थ रूप,
सृष्टि का पालन करता है।

राम का नाम जो भी जपता है,
भवसागर से पार उतरता है।
राम शक्ति – राम भक्ति योग,
सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है।

दैहिक – दैविक – भौतिक ताप,
राम नाम से फटक नहीं पाते है।
हनुमान की पूजा जो भी करता,
वह राम नाम का सुख पाता है।

राम नाम मधुर – मनोहर छवि,
तुलसी दोहावली में गाते हैं।

‘रा’ शब्द विश्व व्यापक है,
‘म’ शब्द ईश्वर वाचक है।
यानी लोक मंगल का ईश्वर जो,
वही राम कहलाता है।

रमा के साथ जो रमण करता,
उसी को राम कहा जाता है।
सहस्त्रों नामों से जो फल मिलता,
वह राम के नाम से मिलता है।

भगवान शिव जी पार्वती से बोले,
मैं निरंतर राम में रमण करता हूं।
परम मनोहर श्री राम नाम ही है,
सुमुखी! सहस्त्रनाम के समान है।

श्री राम के ही प्रताप से वाल्मीकि,
एक डाकू से आदि कवि कहलाए।

परमार्थ की – मोक्ष की आशा जो,
कोई भी व्यक्ति मन से करता है।
राम नाम जप के बिना उसे भी,
प्राप्ति असंभव सा ही लगता है।

द्वापर में दान से जो फल मिलता,
कलयुग में राम नाम से मिलता है।
सूर्य, चंद्रमा, अग्नि और वायु सब,
राम नाम की शक्ति से चलते हैं।

भगवान राम अपने भक्तों का,
सभी रोग – शोक दूर करते हैं।

शुभ काम में भक्तों को लगाकर ,
सौभाग्य और समृद्धि बढ़ाते हैं।
घी, तिल, खीर से जो हवन करता,
मनवांछित कामना – पूर्ति करते हैं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में बताया है, राम नाम के महत्व व महिमा को और राम का नाम लेने से जीवन में क्या-क्या फायदे होते है।

—————

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यह कविता (राम नाम की महिमा अपार।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें: पृथु का प्रादुर्भाव।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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प्रगीत और संगीत तत्व।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ प्रगीत और संगीत तत्व। ♦

साहित्य और संगीत का वांछनीय संबंध,
साहित्यकार की पद शैली में सदा रहती।
पद साहित्य – परंपरा पीछे छूटने पर भी,
साहित्यकार – संबंध में संगीत बना रहता॥

मानव भावानुभूति का सहज साधन संगीत,
प्रगीतों में निश्चल विद्यमान रहती अनुभूति।
अपने ही चरम ऐश्वर्य को प्राप्त करता,
जब वह सांगीतिक वैभव से परिपुष्ट होता॥

गायन वादन नृत्य को आदर प्रदान करती,
प्रेमानुभूति अभिव्यक्ति की संचित सुविधा दी।
तत्कालीन कविता में इतिवृत्तात्मकता और,
रचनात्मकता – रस आत्मकता काव्य होता॥

रीति काल की ध्रुपद धमार शैली सशक्त रही,
जो पर्याप्त रूप से पीछे छूटने लगी।
दादरा – ठुमरी – ख्याल इत्यादि में श्रृंगारिक,
शैली से प्रगीतकारों ने नाता तोड़ा॥

प्रगीत काव्य में प्रथम ग्राम – गीत और,
लोकगीत का भावनात्मक प्रमुख स्थान है।
दोनों हमारी संस्कृति और भावनात्मक,
अक्षर भंडार – कलापरक मूल संगीत उत्सव है॥

सोहर, घोड़ी, बन्नी, सुहाग, सावन सुमधुर गीत,
लोकाचार व्यवहार सामाजिक अवदान है।
पुरुषों द्वारा भी ग्राम गीतों की रचना होती,
अधिकांश गीतों की रचना स्त्रियां रचती॥

बिरहा कजरी रसिया आदि गीतों की रचना,
पुरूषों द्वारा रचा और गाया जाता है।
राग – ताल और शास्त्रीय जकड़ बंदी इनमें,
कला परक विशेषता का प्रतिबंध कम होता॥

यह गीत प्रायः कहरवा, दादरा जैसे हल्की,
लोकधुन, चलती हुई घुन पर आधारित होती।
जब कला परक संगीत – श्रृंगार से नियमन होता,
लोकगीत ही नूतन रूप – रंग में मिलता॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में बताया है, साहित्य और संगीत का सम्बन्ध आरंभिक समय से ही है। साहित्य और संगीत एक दूसरे के पूरक है। जब कला परक संगीत – श्रृंगार से नियमन होता, लोकगीत ही नूतन रूप – रंग में मिलता।

—————

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यह कविता (प्रगीत और संगीत तत्व।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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आओ कान्हा – तेरा स्वागत है।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ आओ कान्हा – तेरा स्वागत है। ♦

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को, विष्णु जी के आठवें अवतार ने जन्म लिया।
कान्हा के जन्म के अलौकिक दिव्य प्रकाश ने, संसार को उजाले से भर दिया॥

भगवान भी भक्तों की आस्था, भक्ति व प्रीत में झूमते चले आए।
माता देवकी- वासुदेव की यह संतान, नंद-यशोदा के प्यारे कहलाए॥

जब-जब अपने पांव पसारे ब्रह्मांड में, इस अधर्म ने।
तब-तब अवतार अवतरित हुए इस भू पर, शौर्य बढ़ाया धर्म ने॥

द्वारकाधीश की लीला से, भला अब तक कौन है? अपरिचित।
जिन्होंने धर्म युद्ध में गुंजाया गीता उपदेश, हुए सब कर्मफल से परिचित॥

गहरी हुंकार भरी, जब-जब धर्म ने, काल भी थर्राया है।
पाप कर्म की अधिकता का अंत करने, भगवान ही अवतरित हो आया है॥

तेरे आगमन को मथुरा वृंदावन के मंदिर भी जैसे पूनम की चांदनी से नहाए।
लगे ऐसा मानो ब्रह्मांड का अनुपम सौंदर्य, इस धरती पर उतर आए॥

जब मयूरपंख धारण कर तू, अपनी मुरली की सुरीली धुन सुनाए।
ब्रह्मांड में चहुँ ओर, खुशियों के फूल बिखर जाए॥

हे कृष्णा! तेरी भक्ति में लीन गोपी बन सब दिल, मस्त होकर झूमेंगे मन बावरें।
नैनो के अश्रु जल से पाक कर-आस्था, श्रद्धा के फूल बिछा कर, तेरी राह निहारें बस सावरें॥

स्वागत है तेरा चले आओ हे! कान्हा, इस धरा को फिर से स्वर्ग बनाने।
हम तो भावविभोर हैं तेरे जन्मदिवस की जन्माष्टमी मनाने॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से श्री कृष्ण जी के जन्म उत्सव व अद्भुत लीलाओं का सुंदर मनभावन वर्णन किया है। तुमने ही धर्म युद्ध में गुंजाया गीता उपदेश, हुए सब कर्मफल से परिचित।

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यह कविता (आओ कान्हा – तेरा स्वागत है।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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खड़ा हो रहा है अफगानी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ खड़ा हो रहा है अफगानी। ♦

अफगान के पांच जिलों से तालिबानियों को खदेड़ दिया,
काबुल में, अमरीकी इनामी हक्कानी तालिबान से जा मिला।

अहमद मसूद के बुलावे पर, खालिद अमीरी आया,
अफ़गान के पंजशीर घाटी में आकर मसूद से मिला।

पंजशीर से अफगानी राष्ट्रभक्त मिलकर,
अफगान के चार जिले को तालिबान से मुक्त करा लिया।

पंजशीर के शूरवीरो ने ‘अंद्राब’ से देश विरोधियों को पकड़ा,
जिसमें दो तालिबानी सहीत वहां चार पाकिस्तानी मिला।

मोस्ट वांटेड अमेरिका के सैंतीस करोड़ का इनामी,
तालिबान का सुरक्षा इंचार्ज सामने आया – खलील हक्कानी।

‘खिंजन’ जिला को भी पंजशीर के बहादुरों ने आजाद कराया,
उधर तालिबानियों ने बुजुर्ग व्यक्ति के ऊपर कोड़ा बरपाया।

पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी करजई का सगा भाई,
हशमत गनी करजई ने तालिबानी से जा मिला।

बेल्जियम का हवाई जहाज काबुल के एयर वेश से वापस गया,
बेल्जियम के नागरिक हवाई अड्डे के खराब स्थिति से नहीं आये।

पूर्व राष्ट्रपति अफगान से भागकर यू• ए• ई• में शरण ली,
जिसने अफगानी की आवाम को भी धोखा दी।

और एक विमान काबुल से नागरिकों को लेकर भारत आया,
हिंडन एयर बेस गाजियाबाद पर सुरक्षित पहुंचाया।

पंजशीर पर तालिबान ने धावा बोलकर चढ़ाई का असफल प्रयास किया,
जो पंजशीर के आगे घुटने टेक दिए, दर्जनों तालिबानी मारे गये।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में — वर्तमान समय में तालिबान के लड़ाकों या यूँ कहे इंसानियत के दुश्मन आतंकवादियों का अफ़गान के पंजशीर घाटी से अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह के नेतृत्व में डटकर तालिबान के लड़ाकों का सामना कर रहे हैं।

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यह कविता (खड़ा हो रहा है अफगानी।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें: अफगानी – दुर्दशा।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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जीवन और धैर्यशीलता।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जीवन और धैर्यशीलता। ♦

ना घबराना अंधियारे से,
ना डर कर पथ से भटकना,
धैर्य सहनशीलता के सब्र से,
ऐ मानव तू आगे बढ़ना,
जीत कभी तो पाएगा,
तू जीत कभी तो पाएगा॥

अपने जीवन से थकना ना तू,
हृदय में हौसला रख जीतने का तू,
विषम परिस्थितियों से,
लड़कर भी जीत जाएगा,
जीत कभी तो पाएगा,
तू जीत कभी तो पाएगा॥

नियमों के कदमों से,
श्री राम जैसा धैर्य रख,
सहनशीलता, मर्यादा के साथ चल तू,
मंजिल को अवश्य पाएगा,
जीत कभी तो पाएगा,
तू जीत कभी तो पाएगा॥

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

—————

  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — जीवन में कितना भी उतार चढ़ाव आये, कितनी भी समस्या आये कभी भी धैर्य व सहनशीलता छोड़ना मत। धैर्य व सहनशीलता से हर समस्याओं से बाहर निकल जाएंगे।

—————

यह कविता (जीवन और धैर्यशीलता।) “विजयलक्ष्मी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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पाहन से मुलाकात।

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♦ पाहन से मुलाकात। ♦

एक दिन एक पाहन से
हुई थी मुलाक़ात।
उसने कहीं उस दिन,
मुझसे अपने मन की बात।
पूछा उसने मुझसे…
कुछ नाराज़गी से —

“क्यों करते हो तुलना हमारी
तुम कठोर हृदय मनुज से ?”

ये अपमान है हमारा
मेरी समझ से,
क्योंकि —
हम तो संगीत के राग
से ही पिघल जाते हैं।
कोई तराश दे तो,
मूर्ति में ढल जाते हैं।

हम दिखते हैं कठोर,
किन्तु मन में नहीं चोर।
दुर्ग और भवनों में,
आलीशान इमारतों में,
मेरे पारिवारिक सदस्य
जड़ें है कई गुम्बदों में।

सुनी हैं मैंने सच्ची दास्तानें,
मनुष्य की कुटिलता की।
दौलत, सत्ता के लोभ,
अपनों के कत्ल और क्रूरता की।

पाषाण नहीं करते ऐसा,
फिर हम पर ये आरोप कैसा ?

तुम्हारे ह्रदय जितने कठोर नहीं हैं हम।
घाती, कपटी, कुटिल चोर नहीं हैं हम।
देखो, सुनो जाकर अपने टी वी पर,
कैसे मनुज की वजह से मनुज मर रहा है।
मेरा ह्रदय तोसे कहते हुए भी पिघल रहा है।

और भी बहुत कुछ कहा उसने,
एक पत्थर ने सामने मेरे …
कटु सच का पुलिन्दा रख दिया।
और किस कदर मनुष्य होने पर
मुझे शर्मिंदा कर दिया।

♦ वेदस्मृति ‘कृती’ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

—————

  • “वेदस्मृति ‘कृती’ जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों में समझाने की कोशिश की हैं — पत्थर का उदाहरण देकर बताया है की आजकल के पत्थर दिल मनुष्य से तो लाख गुना अच्छा पत्थर है। सुनी हैं मैंने सच्ची दास्तानें मनुष्य की कुटिलता की। दौलत, सत्ता के लोभ, अपनों के कत्ल और क्रूरता की। पाषाण नहीं करते ऐसा, फिर हम पर ये आरोप कैसा ?

—————

यह कविता(पाहन से मुलाकात।) ” वेदस्मृति ‘कृती’ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/गीत सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई आई टी . शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक. समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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