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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिन्दी-कविता

पृथ्वी करे पुकार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ पृथ्वी करे पुकार। ♦

मैंने तो तुम्हें सब कुछ परोपकार में दिया।
स्वार्थवश कभी भी तुमसे नही कुछ लिया॥

फिर तुमने मुझें इतना क्यों है बिसराया?
अपने कर्मों से जहर मेरी नस-नस में फैलाया॥

स्वच्छ पानी, हवा, मिट्टी सब मुझसे ही तो आया।
खुदगर्जी में आकर तुमने इन सबका कैसा रूप बनाया॥

तुम इंसानों की खातिर सर्वस्व मैंने लुटाया।
पर तुमने खून के आंसू मुझें रुलाया॥

मैं भी आखिर ये कब तक सह पाऊँगी।
कब तक मैं भी यूँ चुप रह पाऊँगी॥

ज्यादा पैदावार के लालच में जहर से भर दिया सीना।
प्रदूषण से मुश्किल हुआ, मेरी ही प्रकृति का जीना॥

होंठ अब तो मेरे भी सूखने लगे प्यास से।
स्वच्छ पानी के ताल, तलैया कब भरेंगे बैठी इसी आस में॥

कुल्हाड़ी मार-मार कर कर दिया छलनी सीना।
प्यारे पौधों के बगैर दुशवार हुआ जीना॥

हे इंसान! न जाने तुम कब मुझें मानोगे अपनी माता।
मेरा दिल तो सदैव अपनी संतान पर प्यार लुटाता॥

जागो हे मेरी संतान, मेरे भी सुख – दुख का ख्याल करो।
स्वच्छ हवा, जल, मिट्टी रखकर अपनी झोली खुशियों से भरो॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आओं हम सब मिलकर ये संकल्प ले की प्रत्येक वर्ष एक पेड़ जरूर लगाएंगे और उसका अच्छे से देखभाल भी करेंगे तब तक जब तक की वह पेड़ अपना खुराख़ पृथ्वी से खुद न लेने लगे। पृथ्वी को हम सब मिलकर हरा भरा और स्वच्छ बनाएंगे फिर से। दुनियाभर के देशों द्वारा पृथ्वी दिवस हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाता है। इसका मकसद पृथ्वी पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे मुद्दों जैसे जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग आदि के बारे में जागरूकता फैलाना और इसके लिए सकारात्मक कदमों को बढ़ावा देना है। साल 1970 से इसे हर साल इसी तारीख को मनाया जाता है।

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यह कविता (पृथ्वी करे पुकार।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2022-KMSRAJ51 की कलम से, सुशीला देवी जी की कविताएं।, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Earth Day Poem in Hindi, Earth Day Poems in Hindi, Poem on Earth Day, sushila devi poems, कवियित्री सुशीला देवी, धरती पर सुविचार, पृथ्वी करे पुकार, पृथ्वी दिवस पर कविता, पृथ्वी दिवस पर कविताएं, पृथ्वी पर कुछ कवितायेँ, सुशीला देवी की कविताएं

लो जी अब तपतपाती गर्मी आ गई।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ लो जी अब तपतपाती गर्मी आ गई। ♦

लो जी अब तपतपाती गर्मी आ गई।

बाजारों में कोल्ड ड्रिंक्स की हुई भरमार।
विज्ञापनों में भी दिखें बस इनसे ही प्यार॥

लो जी अब तपतपाती गर्मी आ गई।

बाजारों में देसी शीतल पेय दिखता नहीं।
क्योंकि वो अब धड़ल्ले से बिकता नहीं॥

लो जी अब तपतपाती गर्मी आ गई।

ठंडे विदेशी पेय की बाजारों में धूम मची।
जगह-जगह बोतलों की दुकान सजी है॥

लो जी अब तपतपाती गर्मी आ गई।

क्यों अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रहें?
क्यों हमें बोतल बंद शीतल पेय से प्यार रहें?

लो जी अब तपतपाती गर्मी आ गई।

आओं कुछ स्वदेशी ठंडक वाला पीते है।
गन्ने का जूस पीकर पहले की जिंदगी जीते है॥

लो जी अब तपतपाती गर्मी आ गई।

ठंडे पेय के असली देसी गुणों पर आए।
क्यों बाहरी चमक पर हम जी ललचाये?

लो जी अब तपतपाती गर्मी आ गई।

होता गुणों का भंडार मटके का ठंडा पानी।
सुनी है इसकी कहानी बड़ों की जुबानी॥

लो जी अब तपतपाती गर्मी आ गई।

चलों गर्मी में जल – जीरे का स्वाद भी चखते है।
धूप में सुबह से खड़े उस रेहड़ी का मान रखते है॥

लो जी अब तपतपाती गर्मी आ गई।

नींबू वाले मटके के पेय का स्वाद कुछ निराला है।
बाजार का मसाले वाला सलाद भी मतवाला है॥

लो जी अब तपतपाती गर्मी आ गई।

स्वदेशी पेय की महक भी दिल पर छा गयी।
इनके आगे तो सब कोल्ड ड्रिंक्स शरमा गयी॥

लो जी अब तपतपाती गर्मी आ गई।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — नींबू पानी और काले नमक का कॉम्बिनेशन पाचन से जुड़ी समस्याओं को दूर करता है। इसका सेवन करने से अपच की समस्या नहीं होती है। नींबू पानी के साथ काले नमक का सेवन करने से एसिडिटी, स्किन रोग और अर्थराइटिस की समस्या नहीं होती है। काला नमक भोजन से अधिक मात्रा में पोषक तत्वों को अवशोषित करता है। गन्ने में कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे पोषक तत्व होते हैं, ऐसे में ये हमारी इम्यूनिटी को भी मजबूत करता है। गन्ने में अल्कलाइन की अच्छी खासी मात्रा होने की वजह से यह शरीर को कैंसर जैसी घातक बीमारी से भी बचाता है। गन्ने का जूस पीने से स्तन, पेट और फेफड़ों के कैंसर का खतरा कम हो सकता है।

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यह कविता (लो जी अब तपतपाती गर्मी आ गई।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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नारी : सृष्टि की फुलवारी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नारी : सृष्टि की फुलवारी। ♦

सृजनकर्ता का अनुपम उपहार है नारी,
नारी ही तो है सृष्टि की फुलवारी।

नीरव भीतों को नारी ही तो घर बनाती है,
गृहलक्ष्मी जब तुलसी में दीप जलाती है।

द्वारे पर जब नारी रंग रँगोली के बिखराती है,
प्रसन्न हो माता लक्ष्मी स्वयं चली आती है।

जहाँ सम्मान घर की लक्ष्मी का नहीं होता,
किसी देवता का वहाँ वास नहीं होता।

नारी ही सृष्टि में बाल फूल खिलाती है,
प्रगति की राहों से बाधा शूल हटाती है।

सावित्री सी डट जाये तो यम पर भी भारी है,
सुहाग लौटाने की सुनी यम की लाचारी है।

मान करोगे नारी का तो सौ भूल भुला देगी,
वरना त्रि-देवों को भी झूले में झुला देगी।

प्रकृति रूप है नारी का वरना बंजर धरा सारी है,
नारी है तो सृष्टि है नारी सृष्टि की फुलवारी है।

♦ वेदस्मृति ‘कृती’ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

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  • “वेदस्मृति ‘कृती’ जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — नारी का सम्मान करोगे तो वह भी तुम्हारा सम्मान करेगी, नारी घर की लक्ष्मी है। यह जरूरी है कि हम स्वयं को और अपनी शक्तियों को समझें। जब कई कार्य एक समय पर करने की बात आती है तो महिलाओं को कोई नहीं पछाड़ सकता। यह उनकी शक्ति है और हमें इस पर गर्व होना चाहिए। में समाज में ही नहीं, बल्कि परिवार के भीतर भी महिलाओं और पुरुषों के बीच भेदभाव को रोकना होगा। महिलाओं को खुद से जुड़े फैसले लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए – सही मायने में हम तभी नारी सशक्तिकरण को सार्थक कर सकते हैं। नारी सशक्तिकरण में आर्थिक स्वतंत्रता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। चाहे वो शोध से जुड़ी गतिविधियां हों या फिर शिक्षा क्षेत्र, महिलाएं काफी अच्छा काम कर रही हैं। कृषि के क्षेत्र में भी महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान है।

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यह कविता (नारी : सृष्टि की फुलवारी।) ” वेदस्मृति ‘कृती’ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी मुक्तक/कवितायें/गीत/दोहे/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई आई टी . शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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घूसखोरी का जमाना।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ घूसखोरी का जमाना। ♦

काम निकालना हो गर जल्दी से,
घूस दीजिएगा टेबल के नीचे से।
दफ्तर के चक्कर ना यू काटिऐगा,
हरे हरे नोट जरा सरका दीजिएगा।

रिश्वत खोरी का है जमाना यारो,
यहां काम आसानी से नहीं होता।
टेबल के नीचे से करो इनको दान,
हर काम तब सफल है हो जाता।

सरकार से इनको मिलती तनख्वाह,
इससे इन लोगो का पेट नहीं भरता।
जब तक ना ले टेबल के नीचे से दाना,
इनके घरों में कभी चुल्हा नहीं जलता।

हम अपना काम निकालने हेतु,
टेबल के नीचे से नोट है सरकाते।
खीला खीला कर हराम की इनको,
खुद भी भ्रष्टाचारी हम बन जाते।

पढ़ना है हमको अच्छे कॉलेज में,
इनको भर भर के फिर डोनेशन दो।
पेटी भर के मारो मुंह पे हरे हरे नोट,
फिर आसानी से यहां प्रमोशन लों।

घूसखोरी का चारो तरफ है आलम,
हम इन्हे दे देकर हो गए कंगाल।
पेट फुलाए बैठे है कुर्सी पर चोर,
लूट रहे गरीबों से इनका माल।

♦ अजय नायर जी – कोच्चि, केरल ♦

—————

• Conclusion •

  • “अजय नायर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — घूसखोरी (रिश्वत खोरी) का भूख खत्म ही नहीं हो रहा है, ज़माने से। इनको सैलरी मिलता है सरकार से फिर भी जब तक घूसखोरी का घूस न मिले तब तक इनके घर में चूल्हा भी नहीं जलता। ये बेशर्म घूस ऐसे मांगते है, जैसे इन्होने क़र्ज़ दिया हो या बहुत अच्छा कार्य कर रहे हो, बेशर्मी की सारी हदें पार कर घूस मांगते रहते हैं। एक बात याद रखें – घूस लेना तो जुर्म हैं ही, घूस देना भी बहुत बड़ा जुर्म हैं। इसलिए ना घूस देना है और ना ही लेना हैं।

—————

यह कविता (घूसखोरी का जमाना।) “अजय नायर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम अजय नायर है। मैं एक प्राइवेट मल्टीनेशनल कंपनी में पब्लिक रिलेशन ऑफीसर के पद पर चेन्नई में कार्यरत हूं। मुझे लिखने का शौक बचपन से रहा। १५ (15) वर्ष की आयु में हमने पहली कविता “दोस्त” इस नाम से लिखी जो पहली बार अखबार में प्रकाशित हुई। तब से आज तक करीबन ३५०० (3500) से अधिक कविता / गजल/ बाल कविताएं/ शेरो शायरी लिखी है। जो की भारत के सभी अखबारों में अब तक प्रकाशित हुई है। साहित्य संगम संस्थान के सभी मंचो से हमें श्रेष्ठ रचनाकार, श्रेष्ठ टिप्पणी कार, श्रेष्ठ विषय प्रवर्तक आदि सम्मानों से सम्मानित किया गया है। काव्य गौरव सम्मान, कलम वीर सम्मान, गौरव सम्मान, मदर टेरेसा सम्मान, बेस्ट ऑथर सम्मान, आदि सम्मान अलग अलग साहित्य जगत से प्राप्त हुआ है। हमारी पहली शेरो शायरी की पुस्तक का प्रकाशन संकल्प पब्लिकेशन द्वारा २०२१ (2021) में हुआ है। जो की सरल सुगम हिंदी भाषा में लिखा हुआ है।

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हां मैं लिखता हूं!

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हां मैं लिखता हूं! ♦

मैं लिखता नहीं हूं इनाम के लिए,
मैं लिखता नहीं हूं पहचान के लिए,
मैं लिखता हूं प्यारे हिंदुस्तान के लिए।
हां मैं लिखता हूं!

मैं लिखता नहीं हूं छपने के लिए,
मैं लिखता नहीं हूं रटने के लिए,
मैं लिखता हूं तो बस सपने के लिए।
हां मैं लिखता हूं!

मैं लिखता नहीं हूं बताने के लिए,
मैं लिखता नहीं हूं जताने के लिए,
मैं लिखता हूं बस जमाने के लिए।
हां मैं लिखता हूं!

मैं लिखता नहीं हूं चाटुकारिता के लिए,
मैं लिखता नहीं हूं औपचारिकता के लिए,
मैं लिखता हूं तो बस साहित्यकारिता के लिए ।
हां मैं लिखता हूं!

मैं लिखता नहीं हूं सियासतदानों के लिए,
मैं लिखता नहीं हूं महज विद्वानों के लिए,
मैं लिखता हूं तो बस सिर्फ आवामों के लिए।
हां मैं लिखता हूं!

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — मैं किसी इनाम के लिए नहीं लिखता हूं, पहचान के लिए भी नहीं लिखता हूं। मैं लिखता हूं अपने प्यारे हिंदुस्तान के लिए व वर्तमान और आने वाली पीढ़ी के लिए। मैं छपने के लिए भी नहीं लिखता हूं और मैं लिखता नहीं हूं रटने के लिए, मैं लिखता हूं तो बस सपने के लिए। मैं बताने के लिए भी नहीं लिखता हूं, मैं लिखता नहीं हूं जताने के लिए, मैं लिखता हूं बस जमाने के लिए। मैं कभी भी लिखता नहीं हूं चाटुकारिता के लिए, मैं लिखता नहीं हूं औपचारिकता के लिए, मैं लिखता हूं तो बस साहित्यकारिता के लिए। मैं लिखता नहीं हूं सियासतदानों के लिए, मैं लिखता नहीं हूं महज विद्वानों के लिए, मैं लिखता हूं तो बस सिर्फ आवामों के लिए।

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यह कविता (हां मैं लिखता हूं!) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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भीमराव अंबेडकर।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ भीमराव अंबेडकर। ♦

गूंज उठा आर्यव्रत का जन जन,
उनके पद चिन्हों पर बढा कदम।
अंबेडकर का हम करें स्मरण,
बाबा भीमराव जी को करें नमन।

जिसने किया रांची में था अनशन,
मराठों जैसे लगने वाले थे एकदम।
भाव भरा था हिंदू का उनके तन मन,
हम हिंदुस्तानी हैं करें उन्हें नमन।

रमा और सविता ने निभाया साथ,
अंबेडकर ने किया दो था व्याह।
75 बरसो में हम सब पढ़ लिए पाठ,
छुआछूत पर हुआ कुठाराघात।

दारू वाला क्यों नहीं पीता उनकी बात,
जिससे होने वाला देश का उद्धार।
एक पीढी तक ही चाहते थे आरक्षण,
दूसरी बार सभी हो जाएंगे सवर्ण?

वेद उपनिषद हिंदुत्व का हिस्सा माना,
मनुस्मृति में उलझ कर बौद्ध के बाना।
प्रजातंत्र में बौद्ध की ले ली सौगात,
भीमराव का साथ दिए साहू महाराज।

उच्च शिक्षा ग्रहण करने साहू भेजे,
महाराज कोल्हापुर के से सम्राट।
गरीबों को ऊपर उठाना सरकारी काम,
मोदी और योगी ने दिया अन्न दान।

कांग्रेसी, गांधी दियो अछूत को हरिजन नाम,
विरोध में उतरे भीमराव अंबेडकर नंगे पांव।
कांग्रेस उन्हें रक्षा कमेटी में सलाहकार बनाया,
फिर भी अंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाया।

सुदेश कानून व्यवस्था के बनाए गए प्रथम मंत्री,
कानून का पालन कराने के लिए उतरे मानों संत्री।
कानून बनाने के उद्देश्य पर राजेंद्र बाबू का साथ,
भीमराव अंबेडकर ने भी अपने स्तर से किया प्रयास।

हम सभी हिंदुस्तानी हैं करें उन्हें हमेशा याद,
गूंज उठा है आर्यावर्त में कानून का राज।
मध्य प्रदेश की धरती पर कीचड़ से खिला गुलाब,
पूरा देश बाबा अंबेडकर को कह रहा सावास।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए साहू जी महाराज कोल्हापुर के सम्राट ने विदेश भेजे। गरीबों को ऊपर उठाना सरकारी काम, मोदी और योगी ने दिया अन्न दान। सत्ता के लोभ में नेताओं ने जात पात की रूढ़ भावना को अभी तक खींचते आ रहे है। जिस कारण अमीर और अमीर व गरीब और गरीब होता चला जा रहा हैं। इस जातिगत आरक्षण के कारण एकता और भाईचारा ख़त्म हो गया हैं। संविधान में तो इस भेद भाव को मिटाने की बात की गई है। जबकि संविधान में आरक्षण का प्रावधान मात्र 10 साल तक प्रभावी रखने के निर्देश संविधान निर्माताओं ने दिए थे। लेखक का मानना है कि संसार में मात्र दो ही जातियां हैं, एक स्त्री और दूसरी पुरुष। जो प्रकृति ने सृष्टि संचालन के उद्देश्य से अपना सहयोग करने के लिए बनाई है। बाकी सब मानव मस्तिष्क की खुराफत है।

—————

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यह कविता (भीमराव अंबेडकर।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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बर्बाद बाबा का सपना कर दिया।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बर्बाद बाबा का सपना कर दिया। ♦

बर्बाद बाबा का सपना कर दिया,
कुछ खुदगर्ज मिजाजी लोगों ने।
आरक्षण का रबड़ कुछ यूं खेंचा,
कि भूले समता सत्ता के भोगों में।

जात पात का जो जहर था भारत में,
उसको और भी ज्यादा बढ़ावा दिया।
अमीर तो अमीर ही बनता गया बस,
दलित होने का महज दिखावा किया।

आरक्षण तो बाबा ने भारत की विधि में,
सिर्फ समता के खातिर ही अपनाया था।
आजादी के अगले दशक में बाबा जी ने,
इसे हटाने का विकल्प भी सुलझाया था।

सत्ता सागर में नहाने वालों ने ही तो इसे,
स्वार्थ हेतु दशक दर दशक बढ़ाया था।
नुकसान हुआ असली पिछड़े दलित को,
जिसको हर लाभ से वंचित करवाया था।

उच्च दलित की पीढ़ियां तो उठती ही गई,
निम्न दलित निरन्तर त्यों ही पीसता रहा।
आर्थिक विषमता की लौ में भूनता भारत,
जाति धर्म के झगड़ों में एडियां घिसता रहा।

कन्याकुमारी से ले कर काश्मीर तलक,
समूचे भारत में जाति धर्म का नाम न हो।
मानव धर्म का पालन करे राष्ट्र की जनता,
ऊंच नीच से ग्रसित शेष कोई भी ग्राम न हो।

शायद यही था सपना बाबा भीम का, पर,
उनके सपनों पर उड़ेली सियासी मिट्टी है।
रह गया दफन सपना संविधान में शायद,
जो कानूनों की किताब बाबा ने लिखी है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — सत्ता के लोभ में नेताओं ने जात पात की रूढ़ भावना को अभी तक खींचते आ रहे है। जिस कारण अमीर और अमीर व गरीब और गरीब होता चला जा रहा हैं। इस जातिगत आरक्षण के कारण एकता और भाईचारा ख़त्म हो गया हैं। संविधान में तो इस भेद भाव को मिटाने की बात की गई है। जबकि संविधान में आरक्षण का प्रावधान मात्र 10 साल तक प्रभावी रखने के निर्देश संविधान निर्माताओं ने दिए थे। लेखक का मानना है कि संसार में मात्र दो ही जातियां हैं, एक स्त्री और दूसरी पुरुष। जो प्रकृति ने सृष्टि संचालन के उद्देश्य से अपना सहयोग करने के लिए बनाई है। बाकी सब मानव मस्तिष्क की खुराफत है।

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यह कविता (बर्बाद बाबा का सपना कर दिया।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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जिंदगी का सफर।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जिंदगी का सफर। ♦

छोटी सी है जिंदगी,
सफर है बहुत लंबा।
सुख दुख मिले रहो में,
देख इंसान हो अचंभा।

निकले जिस गली से,
वापस वहीं है उसे आना।
सफर चाहे जैसे भी हो,
हमें गुनगुनाते है रहना।

टेडी मेडी पगडंडियों से,
भारी सड़क पर है गुजरना।
लेकर अपनी हजार ख्वाहिश,
जीवन के सफ़र को है काटना।

जीवन के हर एक मोड़ पर,
एक नया अनुभव मिलता है।
दो फूलो के संग सफ़र में,
कांटो को भी सहना पड़ता हैं।

सफर शुरू हुआ जिस मुकाम से,
खत्म होना भी है उसे अब यहां।
खफा नहीं हूं ये मेरी जिंदगी तुमसे,
ले चल मुझे, ले जाना तुझे जहां।

♦ अजय नायर जी – कोच्चि, केरल ♦

—————

• Conclusion •

  • “अजय नायर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — ये छोटी सी है जिंदगी, मगर सफर है बहुत लंबा इसलिए चाहे सुख हो या दुःख कभी भी निराश होकर जिंदगी बैठ न जाना या कोई भी गलत कदम ना उठाना। सुख और दुःख तो वर्षा ऋतू के बादल की तरह है इनका आना जाना तो जीवन में लगा ही रहेगा। इसलिए दुःखी होकर बैठ ना जाना जीवन में। सदैव यही कोशिश करना की तुम्हारी वजह से कभी भी किसी को कोई दुःख ना पहुंचे। जहां तक हो सके लोगों की मदद ही करें।

—————

यह कविता (जिंदगी का सफर।) “अजय नायर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम अजय नायर है। मैं एक प्राइवेट मल्टीनेशनल कंपनी में पब्लिक रिलेशन ऑफीसर के पद पर चेन्नई में कार्यरत हूं। मुझे लिखने का शौक बचपन से रहा। १५ (15) वर्ष की आयु में हमने पहली कविता “दोस्त” इस नाम से लिखी जो पहली बार अखबार में प्रकाशित हुई। तब से आज तक करीबन ३५०० (3500) से अधिक कविता / गजल/ बाल कविताएं/ शेरो शायरी लिखी है। जो की भारत के सभी अखबारों में अब तक प्रकाशित हुई है। साहित्य संगम संस्थान के सभी मंचो से हमें श्रेष्ठ रचनाकार, श्रेष्ठ टिप्पणी कार, श्रेष्ठ विषय प्रवर्तक आदि सम्मानों से सम्मानित किया गया है। काव्य गौरव सम्मान, कलम वीर सम्मान, गौरव सम्मान, मदर टेरेसा सम्मान, बेस्ट ऑथर सम्मान, आदि सम्मान अलग अलग साहित्य जगत से प्राप्त हुआ है। हमारी पहली शेरो शायरी की पुस्तक का प्रकाशन संकल्प पब्लिकेशन द्वारा २०२१ (2021) में हुआ है। जो की सरल सुगम हिंदी भाषा में लिखा हुआ है।

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बाबा साहेब को नमन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बाबा साहेब को नमन। ♦

बाबा साहेब को नमन जो सविंधान निर्माता कहलाये।
अप्रैल 14 को भारत रत्न भीमराव की अम्बेडकर जयंती मनाये॥

एक ऐसे समाज में कोहिनूर हीरा चमका।
जिसके तेज से फिर पूरा देश ही दमका॥

शिक्षा की एक सच्ची राह दिखाई जिसने।
सबमें मानव-धर्म की अलख जगाई उसने॥

दिव्य आकाश का जो चमकता सितारा बना।
बस ऐसा ही डॉ भीमराव शिक्षा का प्यारा बना॥

जिन्होंने अपने ह्रदय में केवल एक ही बात ठानी।
शिक्षा को सर्वोपरि मान सुप्त जन-चेतना जगानी॥

उम्रभर किताबों को ही रखा सच्चा दोस्त बनाये।
दिखा दिया दुनिया को शिक्षा में ही सर्वगुण समाये॥

शिक्षा-ज्ञान ही मानवता के सब गुण भर जाए।
भेदभाव के अवगुण का तिमिर हर ले जाये॥

धन्य थे इनके मात-पिता जो शिक्षा को माने वरदान।
सिखलाया जिन्होंने पढ़-लिख कर बनो देश की शान॥

शिक्षित बन संगठित रहकर करो संघर्ष यही उनका प्रिय ये नारा।
शिक्षा से ही देश-विदेश में पूजनीय भीमराव प्यारा॥

शिक्षा के इस आलौकिक मन्त्र से अपने दिलों को जगमगाये।
कोटिशः वन्दन से श्रद्धा-पुष्प अर्पित कर आज ये दिवस मनाये॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — भीमराव रामजी आम्बेडकर (14 अप्रैल, 1891 – 6 दिसंबर, 1956), डॉ॰ बाबासाहब आम्बेडकर नाम से लोकप्रिय, भारतीय बहुज्ञ, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, और समाजसुधारक थे। उन्होंने दलित बौद्ध आन्दोलन को प्रेरित किया और अछूतों (दलितों) से सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया था। श्रमिकों, किसानों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन भी किया था। वे स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि एवं न्याय मन्त्री, भारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माताओं में से एक थे। बाबासाहब आम्बेडकर जी ने शिक्षा को ही सदैव सर्वोपरि माना और शिक्षा के दम पर सब कुछ करके दिखाया।

—————

यह कविता (बाबा साहेब को नमन।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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विश्वास।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ विश्वास। ♦

अगर हो विश्वास तेरे मन में,
पत्थर भी भगवान नजर आएगा।
विश्वास की डोर अगर हो मजबूत,
विष का प्याला भी अमृत बन जाएगा।

विश्वास का बीज जो बोया तूने,
ये कमाल का फल दे जाएगा।
जीवन सफल होकर फिर तेरा,
जीवन में सिर्फ प्यार नजर आएगा।

बन कर बिगड़ जाते हैं कुछ रिश्ते,
जहां विश्वास कायम नहीं रहेगा।
कितना भी तुम यहां जोर लगा लो,
बिन विश्वास प्रेम कभी नहीं मिलेगा।

विश्वास ही सत्य का मूल रूप बन,
तुझे वास्तविक सत्य दर्शन कराएगा।
बिछाने दो राहों पर अनगिनत कांटे,
विश्वास तेरा उसे फिर फुल बना जाएगा।

मुसीबतों का पहाड़ टूटने तो जीवन में,
जब विश्वास अगर तेरे मन मंदिर में रहेगा।
हर मुसीबत तेरी फिर रूह मोड़कर,
जीवन में खुशियों का एक मोड़ लाएगा।

♦ अजय नायर जी – कोच्चि, केरल ♦

—————

• Conclusion •

  • “अजय नायर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — विश्वास अर्थात: वह धारणा जो मन में किसी भी व्यक्ति के प्रति उसके लिए सद्भाव, हितैषिता, सत्यता, दृढ़ता आदि अथवा किसी सिद्धांत आदि की सत्यता अथवा उत्तमता का ज्ञान होने पर होती है। किसी के गुणों आदि का निश्चय होने पर उसके प्रति उत्पन्न होनेवाला मन में भाव। विश्वास के मुख्य रूप ये हैं – आत्म-विश्वास या आत्म-प्रभावकारिता, गलत आत्मविश्वास, व्यवहारिक विश्वास, भावनात्मक विश्वास, आध्यात्मिक आत्मविश्वास। आपका विश्वास ही आपका भविष्य तय करता हैं।

—————

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