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“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिन्दी-कविता

पायल में समन्वय – मंत्र।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ पायल में समन्वय – मंत्र। ♦

पायल की रुनझुन में, युग – मर्यादा,
के लिए मां सीता की स्वीकार्यता है।

पायल की छम – छम में, कृष्ण-भक्ति,
भाव यज्ञ की राधा-नाम चरितार्थता है।

पायल के गतिमान संगीत में, नारी,
की सेवा निष्ठा, स्नेह की साधना है।

पायल की झंकार में, सहजीवन संग,
भोग वैराग्य मध्य अनासक्ति अर्चना है।

पायल झूमते जेवर – पिटक में, धारक,
नारी मानस शोध करें, नव तकनीक।

क्षेम, नेह, मैत्री हेतु, कुटुंब बंधे हैं,
पायल में, नारी के सब रूप सजे हैं।

प्रणम्य हैं, पायल-स्पर्शित नारी चरण,
अर्पित सुमन उन्हें, करें वे नवनिर्माण।

♦ प्रो• मीरा भारती जी – पुणे, महाराष्ट्र  ♦

—————

  • “प्रो• मीरा भारती जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से बताने की कोशिश की है — पायल का उदाहरण देकर नारी के आंतरिक गुणों का वर्णन किया है। पायल की छम-छम में भक्ति, प्रेम, स्नेह की साधना, सेवा निष्ठा का समन्वय है। पायल की झंकार में, सहजीवन संग, भोग वैराग्य मध्य अनासक्ति अर्चना है। पायल झूमते जेवर – पिटक में, धारक, नारी का मन शोध करें, व नव तकनीक और ऊर्जा से सब सरल करें। जैसे पायल में सभी घुंघरू बांधे है एक साथ उसी तरह क्षेम, नेह, मैत्री हेतु, कुटुंब बंधे हैं, पायल में, नारी के सब रूप सजे हैं पायल में। प्रणम्य हैं, पायल-स्पर्शित नारी चरण, जिनके गर्भ में नजीवन पलता, तहे दिल से अर्पित सुमन उन्हें, करें वे नवनिर्माण।

—————

यह कविता (पायल में समन्वय – मंत्र।) “प्रो• मीरा भारती जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं से नई पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम मीरा भारती (मीरा मिश्रा/भारती) है। मैंने BRABU Muzaffarpur, Bihar, R.S College में प्राध्यापिका के रूप में 1979 से 2020 तक सक्रिय चिंतन और मनन, अध्यापन कार्य किया, आनलाइन शिक्षण कार्यक्रम से वर्तमान में भी जुड़ी हूं, मेरे द्वारा प्रशिक्षित बच्चे लेखनी का सुंदर उपयोग किया करते हैं। मैंने लगभग 130 कविताएं लिखी है, जिसमें अधिक प्रकाशित हैं, कई आलेख भी, लिखे हैं। दृढ़ संकल्प है, कि लेखन और अध्यापन से, अध्ययन के सामूहिक विस्तारण से समाज कल्याण – कार्य के कर्तृत्व बोध में वृद्धि हो सकती है। अधिक सकारात्मक परिणाम आ सकते हैं।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि। ♦

आज धरा भी खूब रोयी, रो रहा है खूब आसमान।
कितना दुख दे गया, ये 8 दिसम्बर के दिन का समा॥

देश के जांबाज वीर, असमय ही काल के मुख में आये।
नाम से रोशन किया देश को, वही आज अग्नि में समाये॥

हे! भगवान क्यूँ आज ऐसा समय तुमने दिखाया।
हर भारतवासी की आँखों में आँसू आया॥

खो दिए हमने आज वो रत्न, जो बहुत ही थे अनमोल।
कितना ह्रदय विदारक दृश्य था दुखों को गया छोड़॥

हे भारत-माता!

तेरे ही लाल, तेरी ही मिट्टी में आज खाक हो गए।
हाय! अग्नि में समर्पित होकर, कैसे राख हो गए॥

आंखों में आंसुओं का सैलाब, दे गई ये शाम।
अधूरा ही छोड़ गए वो, करने चले थे जो काम॥

हे धरती माँ! गोद में तेरी आज समाये, कई देश के वीर जवान।
तेरी ही मिट्टी में मिले आज, जीवन में बढ़ाई जिन्होंने तेरी ही शान॥

ये वतन क्षतिपूर्ति नही कर पायेगा, इन वीर जवानों की।
क्यूँ बलि चढ़ गई, जो पोटली बंधी थी दिल में अरमानों की॥

सलाम कर, भावपूर्ण श्रद्धाजंलि आँसुओं की दे रहे हम।
हे वीरजवानों तुम्हें खोने के दुख में, आज हुई हर आंख नम॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — हमे गर्व है सच्चे देशभक्त महान निर्भीक CDS जनरल बिपिन रावत जी पर और उनके साथ शहीद हुए वीर जवानों व उनकी धर्म पत्नी मधुलिका रावत जी पर। सभी के नाम क्रमशः — Chief of Defence Staff (CDS) Bipin Rawat, Madhulika Rawat (CDS Bipin Rawat’s wife), Brig LS Lidder, Lt Col H Singh, Wg Cdr PS Chauhan, Sqn Ldr K Singh, JWO Das, JWO Pradeep A, Hav Satpal, Nk Gursewak Singh, Nk Jitender, L/Nk Vivek, L/Nk S Teja, जिन्होंने अपने अंतिम सांस तक सच्चे मन से देश की सेवा की। आपके रिक्त जगह को कभी भी कोई नहीं भर पायेगा। अदम्य साहस से भरपूर हंसमुख चेहरा सदैव सच्चे मन से देश की सेवा में समर्पित ऐसे महानायक जिससे दुश्मन देश चीन व पाकिस्तान डरकर कांपते थे। CDS जनरल बिपिन रावत जी जैसे महान वीर योद्धा सदियों में एक या दो ही जन्म लेते है। आप सदैव ही हर भारतीय के दिलो में जीवित रहेंगे। आपके वीरता पूर्ण कार्य से सदैव ही भारतीय सेना प्रेरित होती रहेगी। आपके वीरता पूर्ण कार्य से प्रेरित आने वाली पीढ़ी भारत माँ के सेवा में दिल से समर्पित होगा। तहे दिल से नमन है आपको सर CDS जनरल बिपिन रावत जी।

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यह कविता (अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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ओ साजन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ ओ साजन। ♦

पाता जगा यदि जीवन इन्हीं तरंगों पर,
गीत तुम्हारे ओ साजन।

स्वप्न सारे रात के ये मोह-बन्धन तोड़ जाते,
घिर आती तुम्हारी छवि फिर अश्रुजल के किनारे।
बजते जिगर में तार गति के चरण निर्झर किरणों में,
लेता साध ही तुम्हें मैं वीणा मरण अधर में।
जो यह व्याप्त है चारों ओर मर्म के विरह-सा पथ में,
एक सुख से कांप उठता अमावस के पर्व में।
अवसाद श्यामल मेघ-सा साजन॥

कितने स्निग्ध शिशिर से सब्ज आते स्नेह से,
शेष संवाद किस अतल की सजाते किरणों से।
उठती चीख मर्म वाणी की अकथित भाषाहीन से,
कहानी उन प्रभातों की पाता भूल न पलभर।
घूमा निरंतर मैं रिक्तकर द्वार पर तुम्हारे जब से,
किस लिये चेतना का शून्य मन अशांत उमंगों से।
प्रचंड कुहराम है साजन॥

कितना विवश मैं आज पर जन्म-जन्मांतर से परिचित,
अन्तर की उमस से दग्ध पिपासा ही आज नीरव।
विराट-विप्लव यह लोहित कर्म का समर्पण आज,
किसी की सांस का दो कण खींच लाया निर्माल्य तक।
किसी दिन असफलता में साधना में लीन होगी मगर,
तुम्हारे इन्हीं जीवन तरंगों पर जगा पाया यदि अगर।
गा उठुंगा गान साजन॥

सदायें दिल की किसी को टूटते सुना पाता यदि,
ये रातें मरणवाहन जिसकी पनपती इक जिंदगी।
खोल पाता यदि अंतःस्थली की अमावस जिंदगी की,
पिपासाओं के प्रलय को अगर पी पाता समझ चेतन पावस।
यदि लेता सोख उभरती वांछा अपनी निदारुण,
फिर कभी बुझ न पाती मेरी लगाई।
शीतल-सी पावक साजन॥

मेरे जख्मों पर हँस सके वह दर्द का दौर आये,
रजनी सावित्री हो उठे मेरा दीप निहार बहाये।
बीती बहारें बींधती चमन में आये शिशिर को संग लाये,
मेरे मौन सूलों की गुहारें रुक न पाये ये विकल।
यदि न हो पाये मुखर भी नयन आकुल अन्तरों के,
रह ही जायेगा चिर-शून्य सच कह दूं मैं हूं शून्य।
दहक अंगार-सा जाऊंगा साजन॥

यह बसेरा इस वीरान में रात भर का मानता हूं,
कब उछाहों ने न घेरा बस विष बरसता ही मिला।
कौन सी आरज़ू लाऊं फूलों के महल में आज,
जीवन की निधियां लुटाऊं कौन संचित रह सकी जो।
जलती रहे रात भर मेरी चिरुकी भरपूर इतनी,
यह जीवन में रहे सर्वत्र क्या यही कम जलन विद्रुप रुदन के,
पाता जगा यदि जीवन इन्हीं तरंगों पर।
गीत तुम्हारे ओ साजन॥

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी — जिला–सिंगरौली , मध्य प्रदेश ♦

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  • “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल`“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — अपने साजन की याद में एक सजनी की क्या मनोदशा होती है? उसके मन में किस तरह के विचारों व भावनाओ के तरंग उड़ते है ये बताने की कोशिश की है। उमड़ घुमड़ कर बहुत सारी भावनाएं चलती है उअके मन पटल पर, वो कही खो सी गई है। उसकी भावनाएं कुछ इस तरह चलती है…… मेरे जख्मों पर हँस सके वह दर्द का दौर आये, रजनी सावित्री हो उठे मेरा दीप निहार बहाये। बीती बहारें बींधती चमन में आये शिशिर को संग लाये, मेरे मौन सूलों की गुहारें रुक न पाये ये विकल। यदि न हो पाये मुखर भी नयन आकुल अन्तरों के, रह ही जायेगा चिर-शून्य सच कह दूं मैं हूं शून्य। दहक अंगार-सा जाऊंगा साजन।

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यह कविता (ओ साजन।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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बिहार के लाल भारत के भाल।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बिहार के लाल भारत के भाल। ♦

बहुमुखी प्रतिभा के धनी, बिहार का लाल,
जिसने अपने कार्यों से किया, देश को निहाल।

जिरादेई के कमलेश्वरी, महादेव का सितारा,
अपने कर्मो से बढ़ाया, लोगों के सोंच का पिटारा।

सरल जीवन, ऊंचे विचार, यही था उनका व्यवहार,
सच्चाई और सादगी के, अवतार।

अंदर और बाहर का जीवन था, जिनका एक समान,
भारतवासी जिन्हें करते है, सदा नमन।

मध्यम परिवार से निकला, बिहार का बाबू,
जानते है नाम से जिन्हें, हम सब राजेंद्र बाबू।

बापू जिनके थे परम आदरणीय आदर्श,
मजबूत जिजीविषा ने पहुंचाया, उन्हें फर्श से अर्श।

शरीर था दुबला पतला, मगर फौलाद सा था मन,
आजादी के संग्राम में सक्रिय हो, निभाई भूमिका समान।

विलक्षण प्रतिभा एवं राष्ट्र प्रेम ने बनाया, उन्हें मनोयोगी,
प्रथम राष्ट्रपति सह संविधान के बने, सहयोगी।

भारत रत्न सम्मान ने बढ़ाया, उनका बल,
बिहार के थे लाल, भारत के बने भाल।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — डॉ. राजेंद्र प्रसाद की आज जयंती (Dr. Rajendra Prasad Jayanti) है। पूरा देश आज उनकी जयंती (Rajendra Prasad Birth Anniversary) के मौके पर उन्हें याद कर रहा है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म (Rajendra Prasad Birthday) 3 दिसंबर 1884 में बिहार के सीवान जिले के जीरादेई गांव में हुआ था। राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति (First President Of India) थे। वे भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में भी अपना योगदान दिया था। पूरे देश में अत्यन्त लोकप्रिय होने के कारण उन्हें राजेन्द्र बाबू (Rajendra Babu) या देशरत्न कहकर पुकारा जाता था। राजेंद्र प्रसाद एकमात्र नेता रहे, जिन्हें दो बार लगातार राष्ट्रपति पद के लिए चुना गया।

—————

यह कविता (बिहार के लाल भारत के भाल।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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कार्तिक पूर्णिमा स्नान।

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♦ कार्तिक पूर्णिमा स्नान। ♦

नमन इस महा जीवन दिवस को करें,
सत भक्ति भाव से, कार्तिक पूर्णिमा को।
हों ध्यानमय, महत्तर कार्य, इस लग्न में,
तन-मन, विवेक स्नात हों, करें प्रवेशसदा।
पवित्र देवनदी में……॥

मानव – व्यक्तित्व सदा श्रेयस है, धरा पर,
त्रिवेणी है, जहाँ ज्ञानमय, मनोमय, आत्म –
तत्त्व कोष, सदा अमर – कोष रूप रक्षित।
लें संकल्प, रहे सुरसरि शुद्ध सदानीरा॥

मनकोष, प्राणकोष, ज्ञानकोष सुरसरि का,
स्रोत है, सतत आरोग्य, ज्ञान, जीवन-मोक्ष का।
तरंगिणी यह श्लोक है, प्रकृति – रक्षण का,
करें शोध हम, इसकी परिशुद्धि हेतु जो॥

देवनदी रहें, मातृत्व – भाव स्नेहिल, निर्मल,
तो कृतिका पूजन से शिव होते हर्षित होंगे।
अभयदानी, वह विश्व – जन कल्याण के ध्यानी,
विचरें जटा बिच गंग – सलिल पूत॥

ज्ञान दीप आज का, देवनदी शुद्ध रहें,
अनंत काल रहें, वह मोक्षदा धरा हेतु।
सुरसरि-जल में मिलन हो जन-भक्ति,
भाव की वारि का, जो सत्य हो, ‘पुष्कर’
लक्ष्य ‘पद्मक-योग’……॥

♦ प्रो• मीरा भारती जी – पुणे, महाराष्ट्र  ♦

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  • “प्रो• मीरा भारती जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से बताने की कोशिश की है — बुरी शक्तियों पर दैवी शक्तियों को जीत जब मिलता है, उस जीत की खुशी में सभी देवतागण द्वारा जो दीपक जलाकर अपनी खुशी जाहिर की जाती है वही देव दीपावली का महापर्व कहलाया। आओ हमसब मिलकर इस देव दीपावली महापर्व को सच्चे मन से मनाए। इस दिन ध्यान साधना करे, सच्चे मन से। अपने मन को शांत रखने के लिए इस देव दीपावली पर देशी घी से यज्ञ करे पूर्ण शांत मन से। देव दीपावली पर पुरे दिन अच्छे व सच्चे मन से ध्यान – साधना में रत रहे। पूर्ण शांत मन से ध्यान करने से, आपके आत्मा की सुषुप्त शक्तियां जागृत होने लगती। आत्मा की सुषुप्त शक्तियां जिस भी मनुष्य की जागृत हो जाती है, उसके लिए हर कार्य आसान हो जाता हैं।

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यह कविता (कार्तिक पूर्णिमा स्नान।) “प्रो• मीरा भारती जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं से नई पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम मीरा भारती (मीरा मिश्रा/भारती) है। मैंने BRABU Muzaffarpur, Bihar, R.S College में प्राध्यापिका के रूप में 1979 से 2020 तक सक्रिय चिंतन और मनन, अध्यापन कार्य किया, आनलाइन शिक्षण कार्यक्रम से वर्तमान में भी जुड़ी हूं, मेरे द्वारा प्रशिक्षित बच्चे लेखनी का सुंदर उपयोग किया करते हैं। मैंने लगभग 130 कविताएं लिखी है, जिसमें अधिक प्रकाशित हैं, कई आलेख भी, लिखे हैं। दृढ़ संकल्प है, कि लेखन और अध्यापन से, अध्ययन के सामूहिक विस्तारण से समाज कल्याण – कार्य के कर्तृत्व बोध में वृद्धि हो सकती है। अधिक सकारात्मक परिणाम आ सकते हैं।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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चुनावी मौसम।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ चुनावी मौसम। ♦

मौसम आया चुनावों का देखो,
हर दल जनता को लुभाते है।
लोक लुभवन घोषणा पत्र तो कभी,
विचित्र सा स्वप्न – डर दिखलाते हैं।

कुछ का बिगड़ा मिजाज है देखो,
मय – माया से वोट खरीदवाते हैं।
सत्ता हो हासिल जैसे भी कैसे,
साम, दाम, दंड, भेद सभी अपनाते हैं।

धिक्कार है ऐसी जनता को जो,
अपना जमीर बेच के खाती है।
किस्मत फोड़ के खुद ही अपनी,
क्यों कहती है? सत्ताएं हमें सताती हैं।

तब थे देखो हुए तुम मदमाते,
अब सत्ताएं भी हुई मदमाती हैं।
तुम ने लूटा इनसे तब थोड़ा – थोड़ा,
अब सब ये तुमसे पूरा करवाती हैं।

देश की हो गई है देखो हालत पतली,
जनता – सत्ता अदला-बदली ही चुकाती हैं।
कैसे सुधरेगी हालत देश की तब तक?
जब तक जनता खुद ही न जाग जाती है।

है किसी भी दल के नेता के यहां,
नेक न देखो कोई भी इरादे।
सत्ता को हथियाने के चलते सब,
करते हैं देखो हर वादे पे वादे।

यह रोग नहीं है मात्र ऊपर ही ऊपर,
इसकी गिरफ्त में है स्थानीय निकाय।
इलाज एक ही दुरुस्त है इसका बस,
कि कैसे ना कैसे जनता जाग जाए।

सवाल एक ही चूहे – बिल्ली के खेल में,
बिल्ली के गले में घंटी कौन लटकाए?
सबकी हो गई है फितरत एक सी आज,
कैसे न कैसे जान बचे तो लाख उपाए।

देश की किसी को न चिंता है आज,
हसरत है, मेरा तुम्बा पहले भर जाए।
फिर कोई जाति – धर्म मे बांटें हमको,
या फिर खुद ही अपना वोट बिकवाए।

चुनावी मौसम है भाई हाथ मार लो,
फिर क्या मालूम फसल आए न आए?
मतदान है महा पुण्य दान, ये इनको,
कौन समझाए ? कि इसे न बिकवाए।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — चुनाव नजदीक आते ही नेता लोग आने लगते है हमारे घर पर वोट मांगने, जितने के बाद नेता जी 5 वर्ष के लिए लापतागंज में लापता हो जाते है। एक बार भी भूल से भी नज़र नहीं आते नेता जी। और तो और जनता के पैसे पर ऐश करेंगे और हमे ही डराएंगे व धमकाएंगे, कोई कार्य नहीं करेंगे, बस अपना खज़ाना भरेंगे। अपनी 12 पीढ़ियों के लिए खज़ाना भरेंगे। इनके नज़रिये से जनता जाए भाड़ में अपना खज़ाना भरेंगे दबा के। जनता भी कुछ कम नही है, चंद पैसो के लिए अपने वोट को बेच देती है। उसके बाद सरकार को कोसती रहती है।

—————

यह लेख (चुनावी मौसम।) “हेमराज ठाकुर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

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ये इश्क।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ ये इश्क।  ♦

सुना करते है ये इश्क तो होता है बहुत लाजवाब।
न किया तो सोचों खो दिया एक सुनहरा ख्वाब॥

सोचा चलो हम भी इश्क कर ही लेते है।
इस दिल को एक नया उपहार देते है॥

कुछ नियम तो नहीं, मालूम नही थे इसके हमको।
बस शिद्दत से चाहना होता है इश्क करो जिसको॥

हम करने लगे उसको दिल जान से प्यार।
बना लिया उसको रात – दिन का यार॥

दुनिया वाला इश्क दिल से आकर चला गया न जाने कब।
यूँ प्यार भरी नजरों से देखते ही रहें हमें सब॥

पर हम तो बहुत दीवाने हुए हो गए मस्ताने।
अपनी प्यारी कलम के इश्क में बन गए परवाने॥

सच कहूँ तो मुझें भी खबर न लगी ये हुआ कब।
मेरे इश्क ने इसको सच्ची प्रेमिका बना लिया अब॥

कुछ जुनून कुछ इश्क मेरा, मेरी कलम से।
मेरी मंजिल तक पहुँचा देगी, कसम से॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — एक सच्चे और अच्छे रचनाकार का पूर्ण प्रेम मात्र अपनी कलम और अपनी रचना से होती है। एक सच्चा रचनाकार अपनी रचनाओं से सभी दिलों में सच्चा व पवित्र सात्विक प्रेम जागृत करता है। इस संसार के प्रेम की बात करे तो… इश्क का मतलब क्या केवल दो जिस्मों का मिलन ही होता है या फिर कुछ और ? अगर सच कहु तो सच्चा इश्क वो होता है जिसमे दो आत्माओ का मन का तार जुड़ता है, पूर्ण मन से एक दूजे को समझते है। सच्चे इश्क में स्वार्थ का कोई स्थान नहीं होता है। बस होता है तो पूर्ण मन से प्रेम ही प्रेम। प्रेम का मतलब दो जिस्मों का मिलन नहीं होता, प्रेम का मतलब होता है पूर्ण मन से एक दूजे का सम्मान करना, रक्षा करना, ख्याल रखना।

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यह कविता (ये इश्क।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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श्रवण क्षेत्र अंबेडकर नगर।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ श्रवण क्षेत्र अंबेडकर नगर। ♦

खार ही खार जिसके हो मन में भरा,
पलटकर पूर्वांचल एक्सप्रेस वे देखे जरा।
राह में अकबरपुर प्रतीक्षा में है खड़ा,
बोलता है वह मीठी बोली मैं ही सदा॥

नफरतों को जो मन में छुपाए हुए हो,
दिल्ली से बलिया सुंदर सजाए बड़ा।
मुस्करा रहा आजमगढ़, मऊ देखकर,
गांव के लिंक अंबेडकर नगर देखकर॥

खैर पूछेगा पर जब सामने आएगा,
बाराबंकी, सुल्तानपुर, गाजीपुर से जाएगा।
आवाजाही की सुविधा सुंदर सुलभ,
जाम से अकबरपुर निजात पाएगा॥

एक दिन काम आएगी करामात यह,
फोरलेन सड़क सब जब हो जाएगी।
छोड़कर आदतों को सब अपनी बुरी,
रास्ते पर चलने जनता आ जाएगी॥

मेरे दिल ने कभी तो यह भी है चाहा,
परंपराओं को अपने सिर पर बिठाया।
शब्दों को मैंने भाव ओढ़े गहना बनाया,
लहराती सरयू तट पर लहरें नेक नियत लाया॥

कवि वाल्मीकि श्रवण क्षेत्र रामायण रच डाला,
श्रृंगी ऋषि का सेवा गंज क्षेत्र मन को भाने वाला।
फलाहारी बाबा का बसखारी में एक आश्रम आला,
रामबाग के संत अवध दास का आश्रम बड़ा निराला॥

मेरा योगी बांध रहा है गांव – गांव में टीले – पीले,
खारेपन को रोक रहा है और परोसता मीठी झीलें।
साकेत को सजाने की कसमें उसने संकल्पित कर ली,
मान रखोगे क्या उन सारे संकल्पों वचनों की॥

गोपाल बाग राजेसुल्तानपुर का पहले ही नाम पड़ा,
मलेक्ष काल में इसका नाम बदलकर सुल्तानपुर जड़ा।
इसके उत्तर में श्री श्री लल्लन ब्रह्मचारी जी का धाम है,
आश्रम घिनहापुर का देश में अपना एक स्थान है॥

जलालपुर के संत पलटू साहब का एक इतिहास है,
डगमगाती नाव कि यह आश्रम बड़ी दृढ़ पतवार है।
घन निशा में नसीरपुर की भुजिया माता दृष्टि देती,
भयंकर भंवर से निकाल कर जिंदगी सवार देती॥

सरयू, मड़हा, विसुई नदी अंबेडकर नगर में बहती है,
थिरुई, मझुई, तमसा नदी भी सबकी दु:ख हरती है।
स्थापत्य कला में अंबेडकर नगर जिला महान है,
हंसवर, मकरही – देवरिया स्टेट का दर्जा ज्ञानवान है॥

लोरपुर – रियासत और चाहोड़ा घाट मंदिर विद्यमान है,
प्राचीन इतिहास में इसका सुंदर और खूबसूरत नाम है।
29 सितम्बर 1995 में अंबेडकर नगर जिला नाम मिला,
तत्कालीन मुख्यमंत्री सुश्री मायावती का ह्रदय खिला,
1 जनवरी सन 1996 में आलापुर तहसील नाम दिया,
राज्यपाल मोतीलाल वोरा ने आकर शिलान्यास किया॥

भीटी, मसढ़ा, शुकुल बाजार, हंसवर के झील है,
चार झीलों से आक्षादित यह पसंद चारो धाम है।
डरबन, देव हट, गढवा और हंसवर जिसका नाम है,
चारों झीलों का पुनर निर्माण करना सरकार के काम है॥

डम डम डमरु बजा शिव बाबा सीमा सीहमई में,
शिव महिमा, शिव मंदिर, बारंबार पारा में गाते हैं।
संत गोविंद साहब जी का विश्व प्रसिद्ध मेला लगता,
अहिरौली गोविंद साहब मैं वर्ष में यह आता रहता॥

योगी सरकार ने अंबेडकर नगर पर ध्यान दिया,
राजकीय मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन प्लांट मिला।
सी एच सी जलालपुर में ऑक्सीजन प्लांट लगेगा,
जनपद ऑक्सीजन संकट से हमेशा दूर रहेगा॥

योगी जनपद में ट्रामा सेंटर का निर्माण करेंगे,
पी जी आई लखनऊ जाने से मरीज बचेंगे।
मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले, जिले में सजने लगे,
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज होने लगे॥

आयुष्मान कार्ड अंबेडकर नगर जिले में मिलने लगे,
मुफ्त इलाज की सुविधा पांच लाख की मिलने लगा।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना चलने लगा,
साढ़े छ: लाख कार्ड धारकों को मुफ्त अनाज मिलने लगा॥

वृद्धजन को वृद्धा पेंशन का पूरा लाभ दिया,
किसान को किसान पेंशन का खाता में भुगतान किया।
मेधावी छात्र – छात्राओं को वाजिफे का लाभ दिया,
ग्रामीण ढेरों में भी गरीबों को पक्का छत मिला॥

इतिहासकार जिले के गुण का करते सदा से गुणगान,
यहां के साहित्यकार रहे हैं बड़े – बड़े गुणवान।
जिले के पत्रकारों ने पत्रिका से छेत्र को प्रकाशित किया,
देश दुनिया के लिए रचयिता वाल्मीकि रामायण रचे॥

यहां के योगाचार्य करते रहते हैं योग का प्रचार,
भारत की संस्कृति को देश विदेश में बताते हैं धर्माचार्य!
प्रवक्ताओं कि इस क्षेत्र में लगी हुई है कतार,
अपने प्रवचन से ही लोगों में भरते हैं संस्कार॥

इस क्षेत्र के लेखकों ने अपनी लेखनी से रचा इतिहास,
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री विचारों का देते रहते विचार!
सत्य मार्ग पर चलने का भाव भरते हैं लोगों में संस्कार,
अयोध्या नगरी का लेखक करता सदा – सदा सत्कार॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — क्षेत्र अंबेडकर नगर के साथ – साथ उसके आस पास के सभी जिलों का व वहां के वर्तमान और इतिहास पर नजर डाला है। बहुत ही सरल शब्दो का प्रयोग करते हुए, विधि पूर्वक सभी मुख्य महान संतो से लेकर अच्छे कार्यों का वर्णन किया है। लगभग पूर्वांचल पर नजर डाला है। वर्तमान सरकार के द्वारा किये जा रहे अच्छे कार्यों का वर्णन भी बखूबी किया है।

—————

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यह कविता (श्रवण क्षेत्र अंबेडकर नगर।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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देव पूर्णिमा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ देव पूर्णिमा। ♦

चली है नई हवा देव पूर्णिमा पर,
ठंडी हवा से लगा वसंत आया लगता है।
सभी जगह खुशनुमा माहौल है,
सर्द पूर्णिमा के साथ वसंत सा आया लगता है।

आओ ऐसी पूजा करे ठंड से,
भूख से, मौत न हो किसी की,
देव पूर्णिमा सर्द ऋतु के साथ बसंत आया लगता हैं।
चारों ओर माहौल में धुआं – धुआं सा छाया है।

इस धुएं को छांटने सर्द हवाओं के साथ,
बसंत सा आया लगता है।
जो महामारी फैली है संसार में चारों ओर,
इसे खत्म करने सर्द ऋतु में बसंत सा आया लगता है।

हरियाली छाई है सर्द मौसम में,
देव पूर्णिमा के साथ वसंत सा आया लगता है।
हर चेहरे पर खुशी की शमा जलती रहे विजयलक्ष्मी,
ये सर्द हवाओं के मौसम में वसंत आया लगता है।

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

—————

  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए समझाने की कोशिश की हैं — बुरी शक्तियों पर दैवी शक्तियों को जीत जब मिलता है, उस जीत की खुशी में सभी देवतागण द्वारा जो दीपक जलाकर अपनी खुशी जाहिर की जाती है वही देव दीपावली का महापर्व कहलाया। आओ हमसब मिलकर इस देव दीपावली महापर्व को सच्चे मन से मनाए। इस दिन ध्यान साधना करे, सच्चे मन से। अपने मन को शांत रखने के लिए इस देव दीपावली पर देशी घी से यज्ञ करे पूर्ण शांत मन से। देव दीपावली पर पुरे दिन अच्छे व सच्चे मन से ध्यान – साधना में रत रहे। पूर्ण शांत मन से ध्यान करने से, आपके आत्मा की सुषुप्त शक्तियां जागृत होने लगती। आत्मा की सुषुप्त शक्तियां जिस भी मनुष्य की जागृत हो जाती है, उसके लिए हर कार्य आसान हो जाता हैं।

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यह कविता (देव पूर्णिमा।) “विजयलक्ष्मी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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देव दीपावली।

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♦ देव दीपावली। ♦

देव दीपावली महापर्व।

गंगा तट की लहरें डोलीं,
रोचक कथा कण – कण बोले।
देवता दीप प्रज्वलित करते,
देव दीपावली मनाते हैं।

योग साधना के द्वार खोलकर,
जंगल झाड़ पहाड़ खिलेंगे।
जितने सुखद विचार उठेंगे,
अनंत काल तक दीप जलेंगे।

तारकासुर राक्षस का वध किया,
कार्तिकेय देव के सेनापति।
बाप का बदला लेने के निमित्त,
घोर तपस्या की त्रिपुरा-सुर।

अमरता का वरदान दिया ब्रह्मा ने,
तीनों लोक में आतंक मचाया।
घोर विनाशक त्रिपुरासुर राक्षस,
देवताओं पर भी कहर बरपाया।

सभी देवता मिलकर शिवजी से,
अनुनय विनय निवारण खोजा।
देवताओं के आग्रह पर शिव जी ने,
त्रिपुरा सुर का वध का डाला।

राक्षस के वध की खुशी में ही,
देवों ने देव दीपावली सजाया।
देवता दीप प्रज्वलित करते हैं,
हम देव दीपावली मनाते हैं।

गुरु नानक की जन्म जयंती तिथि,
धर्म अनुयाई सिक्ख जगाते हैं।
इसीलिए वह भी देव दीपावली,
पुनीत त्यौहार खूब मनाते हैं।

चातुर्मास बिता कर विष्णु जी,
देव दीपावली पूर्व जग जाते हैं।
उन्हीं के प्रेम में पलते सनातनी,
देव दीपावली पर्व बनाते हैं।

काशी की संस्कृत परंपरा में ही,
गंगा जी का घाट सजाया जाता।
असंख्य दीपों की श्रृंखला के संग,
देव दीपावली मनाई जाती है।

कार्तिक अमावस्या को दीपावली,
पूर्णिमा को देव दीपावली आती है।
दीपावली के 15 दिन बाद पूर्णिमा
पर्व, देव दीपावली मनाई जाती है।

आप सभी को प्रेम पूर्वक तहे दिल से देव दीपावली महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — बुरी शक्तियों पर दैवी शक्तियों को जीत जब मिलता है, उस जीत की खुशी में सभी देवतागण द्वारा जो दीपक जलाकर अपनी खुशी जाहिर की जाती है वही देव दीपावली का महापर्व कहलाया। आओ हमसब मिलकर इस देव दीपावली महापर्व को सच्चे मन से मनाए। इस दिन ध्यान साधना करे, सच्चे मन से। अपने मन को शांत रखने के लिए इस देव दीपावली पर देशी घी से यज्ञ करे पूर्ण शांत मन से। देव दीपावली पर पुरे दिन अच्छे व सच्चे मन से ध्यान – साधना में रत रहे। पूर्ण शांत मन से ध्यान करने से, आपके आत्मा की सुषुप्त शक्तियां जागृत होने लगती। आत्मा की सुषुप्त शक्तियां जिस भी मनुष्य की जागृत हो जाती है, उसके लिए हर कार्य आसान हो जाता हैं।

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sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (देव दीपावली।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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