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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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author sushila devi

छाया चित्रों की भरमार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ छाया चित्रों की भरमार। ♦

इस डिजिटल जमाने में जो सबसे ज्यादा हुआ है वो है फ़ोटो खींचने का चलन। क्योंकि ये किसी भी बात का मजबूत प्रमाण बनते हैं। सब जगह देखों तो सेल्फी या फ़ोटो लेने का जमाना ही रह गया। कई बार ऐसा लगता है कि इस दिखावे के पीछे असलियत छिपती जा रही है। झूठ ने इस फोटो के सच का पहनावा पहन लिया है।

अभी हम सब ने विश्व पर्यावरण दिवस मनाया। तो उसमें जहाँ पर भी देखो इस प्रकार के छाया चित्रों की भरमार थी जैसे एक नन्हें से पौधे को लगाकर उसके साथ तीन से लगभग आठ व्यक्तियों का खड़ा होना, और ऐसा लग रहा था मानो जैसे नन्हा पौधा पुकार कर रहा हो कि अरे दूर हटो मुझें भी तो फ़ोटो में आने दो!

निस्वार्थ भाव से की गई हर चीज फलदायी होती है। इस बात को सदैव ही हम अपने दिल में धारण कर रखें। कुछ भी सिर्फ फ़ोटो के लिए न करके दिल से उस कार्य को आत्मसात करें। तभी हमारा, समाज का, देश का व पूरे विश्व का कल्याण है।

निस्वार्थ भाव व नेक कर्म से कार्य करें और छाया चित्र भी लीजिये। लेकिन हर हाल में वास्तविकता दर्शाती हुई होनी चाहिए। कहीं ऐसा न हो इन फ़ोटो की अधिकता में उस कार्य का अस्तित्व ही खतरे में आ जाये, जिसके लिए हमने कर्म किया।

निःस्वार्थ भाव से हर कर्म हम करते जाए।
छायाचित्र में कर्म का अस्तित्व न छिप जाए॥
परोपकार की भावना सदैव दिल में बसाए।
पर्यावरण की रक्षा कर खुद पर कर्म कमाए॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — प्रकृति संतुलन बनाए उसके लिए हम सभी दिल से प्रत्येक इंसान प्रत्येक वर्ष एक पेड़ जरूर लगाए और उस पेड़ का देखरेख तब तक करे, जब तक वह पेड़ जमीन से अपना ख़ुराक खुद न लेने लगे। निस्वार्थ भाव से की गई हर चीज फलदायी होती है। इस बात को सदैव ही हम अपने दिल में धारण कर रखें। कुछ भी सिर्फ फ़ोटो के लिए न करके दिल से उस कार्य को आत्मसात करें। तभी हमारा, समाज का, देश का व पूरे विश्व का कल्याण है।

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यह लेख (छाया चित्रों की भरमार।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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दिवस मनाने की होड़।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ दिवस मनाने की होड़। ♦

आज कल भारत में भी दिवसों को मनाने की होड़ लगी हुई है। एक विशेष दिवस को मनाने की बात समझ में आती थी जैसे शिक्षक दिवस, चिकित्सक दिवस। लेकिन ये क्या अब ये दिवस मनाने में रिश्तें भी पीछे नही रहे। जैसे मातृ-पितृ दिवस।

ये रिश्ता तो इस पृथ्वी पर इतना अहमियत रखता है जिसके आगे देव भी नमन करते हैं। आओं विचार करे कि इन दिवसों को मनाने की जरूरत है या नही। क्योंकि हमारी भारतीय संस्कृति में तो पुराने जमाने में सबसे पहले घर में बने भोजन का भी घर के बड़ों को ही परोसा जाता था। तो ये उनको पूजने जैसा ही तो था, क्योंकि इस कार्य में उनका आदर-मान होता था।

फिर ये दिवस मनाने की जरूरत क्यों आई?
क्या एक ही दिन ही हमें इनको खुश रखना हैं?

पहले हमारे भारत में अनाथ आश्रम तो थे। लेकिन वृद्धाश्रम नही थे। आज वृद्धाश्रम की अधिकता हो गयी। क्योंकि आधुनिकता की दौड़ में घरों के बुजुर्गों का मान सम्मान केवल दिवसों में सिमट कर रह गया है।

मात-पिता का तो हर दिन होता है क्योंकि इनके बिना हम सबका कोई अस्तित्व नही है, तो बस एक ही बात इस दिनों को मनाने को सार्थक कर सकती है जब हम हर अपने मात-पिता का आदर करे।

हमारे माता-पिता हमारे घरों के अंदर हम सब के मध्य ही मुस्कराए। अपने बच्चों को भी हम भारतीय संस्कृति के गुणों को आत्मसात कर बड़ों का दिल से आदर करना सिखाए, क्योंकि बच्चें बड़ों को देखकर ही ज्यादा सीखते है।

तो आओं हम सब अपने माता-पिता का दिलों से सम्मान कर भावी पीढ़ी में भी ये गुण भर दे। ताकि किसी के घर का कोई भी बुज़ुर्ग सड़क पर या वृद्धाश्रम में न हो।

दिवस मनाने की सार्थकता तो तभी है जब…

जब अपनों के मध्य ही इनके चेहरे खिले रहे।
जब तक जीये ये हमारे घरों की ढाल बने रहे॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — स्त्री ईश्वर की वह सुन्दर रचना है जिसमें त्याग, स्नेह, भावनाओं और समर्पण भरपूर होता है। स्त्री अनेक भूमिकाओं को बखूबी निभाती है। वैसे – माता और पिता दिवस ताे हर मनुष्य काे अपने अंतिम श्वास तक मनाना चाहिये। एक सच्चा पिता सदैव ही अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिये दिन-रात अनवरत (continuously) कार्य करता हैं। जहा माता अपने बच्चों के स्वास्थ्य का ध्यान रखती हैं ताे वही पिता उन्हे सही ज्ञान और समझ देते हैं। जहा प्रथम गुरु माँ हैं ताे वही पिता गुरु हाेने के साथ-साथ सच्चा संरक्षक भी हाेता हैं।

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यह लेख (दिवस मनाने की होड़।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि। ♦

आज धरा भी खूब रोयी, रो रहा है खूब आसमान।
कितना दुख दे गया, ये 8 दिसम्बर के दिन का समा॥

देश के जांबाज वीर, असमय ही काल के मुख में आये।
नाम से रोशन किया देश को, वही आज अग्नि में समाये॥

हे! भगवान क्यूँ आज ऐसा समय तुमने दिखाया।
हर भारतवासी की आँखों में आँसू आया॥

खो दिए हमने आज वो रत्न, जो बहुत ही थे अनमोल।
कितना ह्रदय विदारक दृश्य था दुखों को गया छोड़॥

हे भारत-माता!

तेरे ही लाल, तेरी ही मिट्टी में आज खाक हो गए।
हाय! अग्नि में समर्पित होकर, कैसे राख हो गए॥

आंखों में आंसुओं का सैलाब, दे गई ये शाम।
अधूरा ही छोड़ गए वो, करने चले थे जो काम॥

हे धरती माँ! गोद में तेरी आज समाये, कई देश के वीर जवान।
तेरी ही मिट्टी में मिले आज, जीवन में बढ़ाई जिन्होंने तेरी ही शान॥

ये वतन क्षतिपूर्ति नही कर पायेगा, इन वीर जवानों की।
क्यूँ बलि चढ़ गई, जो पोटली बंधी थी दिल में अरमानों की॥

सलाम कर, भावपूर्ण श्रद्धाजंलि आँसुओं की दे रहे हम।
हे वीरजवानों तुम्हें खोने के दुख में, आज हुई हर आंख नम॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — हमे गर्व है सच्चे देशभक्त महान निर्भीक CDS जनरल बिपिन रावत जी पर और उनके साथ शहीद हुए वीर जवानों व उनकी धर्म पत्नी मधुलिका रावत जी पर। सभी के नाम क्रमशः — Chief of Defence Staff (CDS) Bipin Rawat, Madhulika Rawat (CDS Bipin Rawat’s wife), Brig LS Lidder, Lt Col H Singh, Wg Cdr PS Chauhan, Sqn Ldr K Singh, JWO Das, JWO Pradeep A, Hav Satpal, Nk Gursewak Singh, Nk Jitender, L/Nk Vivek, L/Nk S Teja, जिन्होंने अपने अंतिम सांस तक सच्चे मन से देश की सेवा की। आपके रिक्त जगह को कभी भी कोई नहीं भर पायेगा। अदम्य साहस से भरपूर हंसमुख चेहरा सदैव सच्चे मन से देश की सेवा में समर्पित ऐसे महानायक जिससे दुश्मन देश चीन व पाकिस्तान डरकर कांपते थे। CDS जनरल बिपिन रावत जी जैसे महान वीर योद्धा सदियों में एक या दो ही जन्म लेते है। आप सदैव ही हर भारतीय के दिलो में जीवित रहेंगे। आपके वीरता पूर्ण कार्य से सदैव ही भारतीय सेना प्रेरित होती रहेगी। आपके वीरता पूर्ण कार्य से प्रेरित आने वाली पीढ़ी भारत माँ के सेवा में दिल से समर्पित होगा। तहे दिल से नमन है आपको सर CDS जनरल बिपिन रावत जी।

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यह कविता (अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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हे आदिशक्ति।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हे आदिशक्ति। ♦

अब तो आजा!
हे करुणावतार!
कुमकुम लगें पैरों से अब आजा।
इस दुनिया को चैन,
अमन का रास्ता दिखा जा॥

तेरी राहें बुहारें हैं, कब से हम।
आ मिटा दे ये चारों ओर फैला तम।
भीगी पलकों से तड़पते ह्रदय ने …
तुम्हें ही पुकारा है।
हम तेरे दीवानों को न कोई और सहारा है॥

तुझें बरसाना ही होगा,
अपनी करुणा का जल।
दहकती ज्वाला को शांत,
तुझें ही करना होगा।
चाहे तू आज करें या कल॥

हमने तो भिखारी बन,
दामन यहां ही पसारा है।
हे आदिशक्ति, झोली भर,
एक तूही तो जीवन का उजियारा है॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से — आदिशक्ति माँ का आह्वान किया है। इस कविता में भक्त के मन में चलने वाले भावों को बखूबी व्यक्त किया है। हे आदिशक्ति माँ हम पर बरसा अपनी करुणा का जल, हमने तो दामन यहां ही पसारा है। हे आदिशक्ति, झोली भर, एक तूही तो जीवन का उजियारा है।

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यह कविता (हे आदिशक्ति।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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गुरु हमारे।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ गुरु हमारे। ♦

शिक्षक के पर्याय गुरु पर, आज इस कलम को लिखना है।
पर सच मानों, एक आदर्श शिक्षक की से भी, हमें सीखना है॥

इस शब्द की महानता तो, आज तक तो कोई सुना न पाया।
बस इनके गुणों के आगे, सबने शीश झुकाया॥

जितने गुणों को समाहित किया, वो सब इन्होंने दिया जिंदगी में।
बहुत कुछ नायाब मिला, सिर्फ इनकी बन्दगी में॥

जब ये पत्थर को भी तराशने पर आये, तो हीरा बन जाये कोहिनूर।
इनके जब आदर्शों पर चल पाए, तो जिंदगी में आये एक सरूर॥

ये तो वटवृक्ष है, जो जीवन में आदर्शों की छाया दे जाए।
ये वो अथाह सागर है, जहाँ बस प्रीत के मोती पाए॥

ये तो सितारा उस बुलंदी का, जिस पर आसमाँ भी हर्षाये।
ये तो जीवन की हरियाली है, जिस पर ये धरा भी इतराये॥

ये वो जौहरी है, जो परख – परख कर, खोटे को भी खरा बना जाए।
ये है वो कलाकार जो, पत्थर को भी तराश भगवान ले आये॥

कितनी ही उपाधियों से नवाजू इनको, ये भी नतमस्तक होती है इनके आगें।
जो एक सच्चे शिक्षक की उँगली भी थामे, उसके तो भाग्य जागें॥

मैं कौन हूँ, क्या हस्ती मेरी, सिर्फ इनके सजदे में ही शीश झुकाना।
इनके गुणों की रोशनी में, रहकर बस इस जिंदगी को जगमगाना है॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — कहते है की एक सच्चा शिक्षक जब अपने छात्र को तराशने पर आये तो पत्थर से हीरा बन जाये कोहिनूर। इस शब्द की महानता इतनी है की आज तक तो कोई सुना न पाया। बस इनके गुणों के आगे, सबने शीश झुकाया। ये तो वह वटवृक्ष है, जो जीवन में आदर्शों की छाया दे जाए। ये वो अथाह सागर है, जहाँ बस प्रीत ही प्रीत के मोती पाए सभी ने सदैव।

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अजब तेरी माया।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ अजब तेरी माया। ♦

इस संसार से विदा, जो हो गए।
समय – असमय जो, चिरनिद्रा में सो गए॥

हे मालिक! बता तुमने, उन्हें कहाँ छुपाया है।
फिर क्यूँ उनका अक्स भी, नजर नहीं आया है॥

तेरे तो खेल निराले, अजब तेरी माया है।
जो तूनें ब्रह्मांड में, जीवन – मरण का खेल रचाया है॥

इस जग की रीत, तो तुझसे भी निराली है।
जो विदा हो गए यहाँ से, फिर उनकी परछाई भी काली है॥

फिर क्यूँ इस जगत में, मेरा – मेरी ने कोहराम मचाया है।
न जाने क्यूँ इंसान ने, अपने – पराए का जाल बिछाया है॥

मालूम है ये सबको, कि देने वाला लेना भी जानता है।
फिर भी अहम में डूबा इतना, तुझकों नही पहचानता है॥

एक दिन सबको चले जाना है, ये मानुष तन छोड़कर।
आओं! फिर नेक कर्मों के खाते में रखें, अपना नाम जोड़कर॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — इस संसार में जिसका भी जन्म होता है उसकी मृत्यु भी निश्चित है। इसलिए अच्छे कर्म कर ले, विकर्म का खाता इकट्ठा न करें। आपके अच्छे कर्म ही आपको इस संसार में जीवित रखेंगे। इसलिए बुरे कर्म का त्याग कर, अच्छे कर्म ही करे।

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यह कविता (अजब तेरी माया।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

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शिक्षक की महानता।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शिक्षक की महानता। ♦

ए दिल, तुझें आज जिसकी महानता पर लिखना, वो तो है सर्वोपरि।
चला जो भी इनके पद्चिन्हों पर, जिंदगी बनी उनकी सोने जैसी खरी॥

आलौकित पथ करता हमारा, ये तो वो पुंज-प्रकाश का।
बुलंदी के सितारें चमकते हैं जिस पर, वो पटल आकाश का॥

जिनके ज्ञान के भंडार में छिपी, धरा के गर्भ जैसी गहराई।
जिसने समझा इनको, उन्होंने अपनी विजय-पताका लहराई॥

कभी ये बन कर माली, अवगुणों के कांटो को दूर कर गुणों के फूल खिलायें।
अपने प्यारे उपवन की महक से, ये सारा जहान सुगन्धित बनायें॥

जब ये परखने पर आए, तो एक परिपक्व जौहरी बन जाता है।
घिस-घिस कर पत्थर को भी, हीरा सा चमकाता है॥

हर किसी की जिंदगी में इनकी छवि, एक अलग ही रुतबा पाती है।
इनकी अनुपम – गाथा तो हर शह को, संगीतमय बनाती है॥

ये ऐसा अदभुत कलाकार, जिसके गुणों को सुनाया न जा सके।
इसकी खूबियों के समक्ष हम केवल, ये शीश झुका सके॥

आओं! आज इनके दिये संस्कारों को, अपने जीवन में उतार ले।
अपने सद्कर्मों से नाम रोशन कर जायें, बस यही गुरु-दक्षिणा का उपहार दे॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

मेरे सभी प्रिय पाठकों आप सभी को — KMSRAJ51.COM — की तरफ से तहे दिल से शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं।

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से शिक्षक और छात्र के दिव्य व पवित्र तथा उन्नत सम्बन्ध को बताया है। एक अच्छे शिक्षक और अच्छे छात्र के गुणों को समझाने की कोशिश की है। छात्र जीवन किसी भी इंसान के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है, पुरे जीवन का आधार स्तम्भ होता है छात्र जीवन। अपने सद्कर्मों से नाम रोशन कर जायें अपने गुरुजन का बस यही गुरु-दक्षिणा का उपहार दे हम इस शिक्षक दिवस पर।

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यह कविता (शिक्षक की महानता।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

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हार्दिक शुभकामनाएं – नीरज चोपड़ा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हार्दिक शुभकामनाएं – नीरज चोपड़ा। ♦

खिलते कंवल की तरह, तू राष्ट्रीय पहचान बन गया।
नीरज तू अपने नामानुरूप खिल कर, देश की शान बन गया॥

तूनें तो, एक गौरवमय इतिहास ही रच डाला।
बचपन से शौकीन, पकड़ हाथ में भाला॥

कभी अपने दर्द की भी, तूनें नही की परवाह।
सदैव सपनों को हकीकत में बदलने की, भरी आह॥

बना है तू देश का प्रहरी, अपने स्वप्न को भी शिखर तक पहुचाया।
एक नमन तेरे मात-पिता को, जिनका सीना आज गर्व से भर आया॥

कोटिशः सादर वंदन तेरे गुरु को, जिसने अपने शिष्य के नाम का परचम लहरवाया।
तूनें भी शिष्य-गुरु की परंपरा को रख कायम, गुरु का मान बढ़ाया॥

हार्दिक बधाइयां नीरज चोपड़ा तुम्हें, तू बन गया आज बुलंदी के आसमाँ का सितारा।
इस गौरवमय दिन के लिए, हर भारतीय का दिल ऋणी रहेगा तुम्हारा॥

हार्दिक बधाइयां💐हार्दिक बधाइयां॥

भारत के स्टार जैवलीन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक में 87.58 मीटर दूर भाला फेंककर गोल्ड मेडल पर अपना कब्जा जमाया है। भारत के पिछले सौ साल के इतिहास में यह ट्रैक एंड फील्ड में पहला ओलंपिक मेडल है। ट्रैक एंड फील्ड में गोल्ड मेडल जीतकर नीरज ने अपना नाम ओलंपिक इतिहास में सुनहरे अक्षरों से दर्ज करवा लिया है।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा को तहे दिल से हार्दिक शुभकामनाएं दी है, गौरवमयी इतिहास रचने के लिए।

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यह कविता (हार्दिक शुभकामनाएं – नीरज चोपड़ा।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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पावन माह सावन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ पावन माह सावन। ♦

पावन माह सावन में, देव शिव भी चले आयें।
इंद्रदेव भी उनके स्वागत में, मेघों से जल बरसाये।
मंगल ही मंगल होगा, अब तो सब।
सारे संकट संसार के, भोले भंडारी हर लेगें अब॥

इस पावन श्रावण मास में जप से ही,
त्रिलोकी नाथ ने सबको भव से उतार दिया।
माता पार्वती की भक्ति से प्रसन्न हो,
उनको वर का उपहार दिया॥

श्रावण मास में ही शिव ने,
समुन्द्र मंथन का विष-पान कर डाला।
समस्त ब्रह्मांड के कष्टों को,
इस भोले ने पल में हर डाला॥

ऋषि मार्कण्डेय की भी भक्ति से,
प्रसन्न हो, दिया ऐसा वरदान।
यमदेव भी नतमस्तक हो सम्मुख इसके,
इसकी भक्ति को दिया मान॥

आओं इस सावन मास, हम सब
इस अमरनाथ को रिझाएँगे।
कर अर्पण दूध-जल शिवलिंग पर,
संसार की खुशियाँ ये त्रिलोकी दे जायेंगे॥

कष्टों का जो फैला दिया इस महामारी ने,
अपना प्रकोप, इस जग में।
शिव-शक्ति कर देगी कल्याण, इसकी श्रद्धा,
आस्था, भक्ति बसा लो, अपने रग-रग में॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से इस कविता में कवयित्री ने सावन का पवित्र महीना जो की, वर्षा, हरियाली, खेतों में रौनक, और शिव की भक्ति से सराबोर होता है, भोले शिव के गुणों और शक्तियों व उनका संसार के प्रति कल्याणकारी कार्यों का अच्छे से वर्णन किया है।

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यह कविता (पावन माह सावन।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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