• Skip to main content
  • Skip to primary sidebar
  • Skip to footer
  • HOME
  • ABOUT
    • Authors Intro
  • QUOTES
  • POETRY
    • ग़ज़ल व शायरी
  • STORIES
  • निबंध व जीवनी
  • Health Tips
  • CAREER DEVELOPMENT
  • EXAM TIPS
  • योग व ध्यान
  • Privacy Policy
  • CONTACT US
  • Disclaimer

KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

Check out Namecheap’s best Promotions!

You are here: Home / Archives for हिन्दी साहित्य

हिन्दी साहित्य

सोशल मीडिया और बच्चे।

Kmsraj51 की कलम से…..

Social Media and Kids | सोशल मीडिया और बच्चे।

आजकल के समय में सोशल मीडिया का विस्तार बड़ी तेजी से हो रहा है। इससे बच्चों पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है यदि बच्चों की उम्र छोटी होती है। तो स्मार्ट फोन के आदि होते जा रहे हैं और अपना अधिक समय इनके साथ ही बिताना पसंद करते हैं। वही बच्चों पर सोशल मीडिया के अच्छे और बुरे दोनों तरह के प्रभाव पड़ते हैं।

अगर बच्चा किसी कारण से स्कूल नहीं जा पाता है तो उसकी अगर क्लास छूट जाती है, तो वह सोशल मीडिया की मदद से उसे पूरा कर सकता है। बच्चों की क्लास के ग्रुप बना दिए जाते हैं। जिससे शिक्षकों से संपर्क कर सकें और छुटी हुए क्लास के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें। इसके अलावा शिक्षकों से अपने डाउट्स आदि भी क्लियर कर सकते हैं।

कोरोना काल के समय यह अच्छा उदाहरण साबित हुआ है अगर किसी सवाल का जवाब नहीं मिलता है, तो वह यूट्यूब की मदद से उस सवाल के जवाब को समझ सकता है। जिससे लिखने में काफी हद तक मदद मिल जाती है। इसके अलावा फेसबुक के जरिए दोस्त रिश्तेदारों से जुड़कर अपनी पढ़ाई में मदद ली जा सकती है। टीवी के अलावा सोशल मीडिया को भी मनोरंजन का एक साधन माना गया है। जिसके जरिए बच्चे सकारात्मक चीजों को देखकर अपना मनोरंजन कर सकते हैं, और अच्छी आदतों को भी अपना सकते हैं।

  • इसके अलावा सोशल मीडिया के माध्यम से रचनात्मक, और अपनी रुचि के अनुसार बहुत कुछ सीखने को भी मिलता है। जिससे वह अपनी अलग पहचान बना सकता है। हर सिक्के के दो पहलू होते है सोशल मीडिया से बच्चों पर सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है।
  • जैसे बच्चे स्मार्ट फ़ोन पर गेम खेलते है उनका उनके दिमाग पर असर देखा जा सकता है। सोशल मीडिया का एक और फायदा यह भी है कि यह बच्चों को खुलकर बोलने का मौका देता है। जिससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और बच्चे आज के समय के अनुसार चलते हैं।
  • लेकिन सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव भी हैं जिसे हम नजर अंदाज नहीं कर सकते हैं। अगर बच्चा आपके सामने स्मार्ट फोन का प्रयोग करता है। तो आपको उसकी रुचि और अरुचि को समझने में काफी हद तक सुविधा मिल जाती है, और आप उस पर नजर भी रख सकते हैं और क्या देख रहा है और किन चीजों में उसकी रुचि है।
  • इससे उसमें आत्मविश्वास की भावना की जाग्रति होती है वह सबके सामने खुलकर बोल सकता है। सोशल मीडिया के जरिये अपनी प्रतिभा का भी प्रदर्शन कर सकता है।
  • सोशल मीडिया का अधिक उपयोग बच्चों की मानसिक स्थिति पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। इस पर हुए एक शोध से जानकारी मिलती है कि स्मार्टफोन के अधिक उपयोग से बच्चों में मानसिक परेशानी की भी बढ़ोतरी हो सकती है। उनके संज्ञानात्मक नियंत्रण पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • सोशल मीडिया जोखिम भी पैदा कर सकता है। आपके बच्चे के लिए, इन जोखिमों में शामिल हैं: अनुचित या परेशान करने वाली सामग्री, जैसे आक्रामक, हिंसक या यौन टिप्पणियों या छवियों के संपर्क में आना। अनुचित सामग्री अपलोड करना, जैसे शर्मनाक या उत्तेजक तस्वीरें या स्वयं या दूसरों के वीडियो।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कुल मिलकर यदि सोशल मीडिया का उपयोग बच्चे सही तरीके से अच्छे कार्यों के लिए करे वह भी केवल जरूरत के हिसाब से निश्चित समय के लिए तो ठीक है व फायदेमंद है। एक संरक्षक होने के नाते यह भी याद रखे की – इसकी लत छात्रों में ज्यादा लगती है यह छात्रों को सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। छात्रों की पढ़ाई, उनका जीवन सब दांव पर लग जाता है। वह पढ़ाई से मन चुराने लगते हैं। व्हाटस्एप्प, फेसबुक और इंस्टाग्राम छात्रों को सबसे ज्यादा भटकाता है। सोशल मीडिया जोखिम भी पैदा कर सकता है। आपके बच्चे के लिए, इन जोखिमों में शामिल हैं: अनुचित या परेशान करने वाली सामग्री, जैसे आक्रामक, हिंसक या यौन टिप्पणियों या छवियों के संपर्क में आना। अनुचित सामग्री अपलोड करना, जैसे शर्मनाक या उत्तेजक तस्वीरें या स्वयं या दूसरों के वीडियो।

—————

यह लेख (सोशल मीडिया और बच्चे।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari Etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिन्दी साहित्य Tagged With: poonam gupta, poonam gupta articles, पूनम गुप्ता, पूनम गुप्ता जी की रचनाएँ, बच्चों के लिए सोशल मीडिया खराब क्यों है?, बच्चों को बेचैन करता सोशल मीडिया का अतिरेक, सोशल मीडिया और बच्चे, सोशल मीडिया और बच्चे - पूनम गुप्ता, सोशल मीडिया का बच्चों पर प्रभाव

गांव से पलायन का जिम्मेदार कौन?

Kmsraj51 की कलम से…..

Gaanv Se Palaayan Ka Jimmedaar Kaun? | गांव से पलायन का जिम्मेदार कौन?

गांव की आबादी आज घटती जा रही है। गांव के लोग शहरों की तरफ रुख़ कर रहे हैं। इसका कारण सबका अपना-अपना मत होगा। परंतु बेरोजगारी और सुविधाओं की कमी से गांव वाले ना चाहते हुए भी अपना घर छोड़ कर शहर के छोटे-छोटे कमरों में रहने को मजबूर हैं। क्योंकि हमारे गांव में बिजली, पानी, शिक्षा, रोजगार नहीं है। मैं सभी गांव की बात नहीं कर रही। परंतु बहुत गांवों में यह समस्या मौजूद है। शहरों का विकास तेजी से हो रहा है और गांव में जाकर देखो, शिक्षा के नाम पर एक प्राइमरी या हाई स्कूल। वह भी सभी गांव में नहीं है। आगे बेचारे गरीब बच्चे कहां जाए पढ़ने? गांव के बच्चों को पढ़ने के लिए बहुत सारी समस्याओं से गुजरना पड़ता है।

यातायात — गांव में यातायात की सुविधा नहीं होती कैसे जाए पढ़ने के लिए बाहर। उनके पास दो विकल्प होते हैं या तो पढ़ाई छोड़ दे या फिर अपना गांव छोड़ शहर में पढ़ने जाएं। जिनके पास सुविधाएं हैं वे आसानी से शहर पढ़ने चले जाते हैं। पर जो गरीब है वह कैसे जाए पढ़ने के लिए। इसी कारण वह पीछे रह जाता। उसकी पढ़ाई छूट जाती है।

बिजली — बिजली की समस्या सबसे बड़ा कारण है अब चाहे कोई लाख दावे करे कि गांव-गांव तक बिजली पहुंची है गांव तक बिजली की तारें जरूर पहुंची है। परंतु गांव में पूरा दिन, पूरी रात बिजली नहीं रहती। गांव में घंटों का समय तय रहता है फिर उसके बाद लाइट कट जाती है। गांव के बच्चों को घर के कामों के साथ-साथ खेती-बाड़ी के कामों में हाथ भी बंटाना होता है।

पानी — पानी गांव में बहुत कम आता है प्रतिदिन तो आता नहीं दो या 3 दिन बाद आता है। किसी-किसी गांव में तो पानी की और भी गंभीर समस्याएं हैं। सुविधाओं की कमी के साथ-साथ ग्रामीण छात्रों को पानी की कमी को भी झेलना पड़ता है।

रोजगार — गांव में रोजगार के साधनों की बहुत कमी है अगर सरकार चाहे तो तीन-चार गांव के बीच कोई फैक्ट्री है या किसी भी तरह का काम लगा सकती है। जिससे गांव के युवाओं को अपना घर ना छोड़ना पड़े और उन्हें आसानी से रोजगार मिल जाए।जिससे उन्हें अपना घर परिवार भी नहीं छोड़ना पड़े और गांव से युवाओं का पलायन भी रुक जाएगा। ऐसा कोई नहीं होगा जो सारी सुख-सुविधाओं के होते हुए अपने घर, गांव को छोड़कर बाहर जाए।

इंटरनेट — हमसभी जानते है की आजकल ज्यादातर सभी कार्य ऑनलाइन इंटरनेट पर होता है, आज भी गावों में इंटरनेट की सुविधा ना पहुंचने के कारण, गांव के युथ (बच्चों) को मज़बूरी में शहर की तरफ भागना पड़ता है। अगर गावों में अच्छी अनलिमिटेड ब्रॉडबैंड इंटरनेट की सुविधा पहुंच जाए तो, बेरोजगार गांव के बच्चे भी कुछ ऑनलाइन कार्य कर कमा सके। वर्तमान सरकार को गांव में जल्द से जल्द अच्छी अनलिमिटेड ब्रॉडबैंड इंटरनेट की सुविधा पहुँचाना चाहिए।

सड़के — अगर गांव की सड़कें, स्कूल और कॉलेज बना दिया जाए तो ग्रामीण बच्चे कदापि भी शहर की तरफ नहीं जाएंगे। बिजली की अच्छी सुविधा दे दी जाए जब शहर की सड़कों पर दोनों तरफ पेड़ पौधे लगा रखे तो गांव में क्यों नहीं? शहर में हर 5 मिनट के अंतराल पर एक पार्क मिल जाएगा क्या गांव के बच्चों को पार्क नहीं चाहिए।

जब ग्रामीण बच्चों को सुविधाएं कम मिलती है तो प्रतियोगी परीक्षाओं में बच्चों को एक सम्मान परीक्षा क्यों ? शहर में रोजगार के अवसर उपलब्ध है परंतु ग्रामीण लोगों को यह सुविधा से वंचित रखा था। जब तक ग्रामीण इलाकों में सुविधाएं नहीं होंगी तब तक हमारा देश कैसे तरक्की कर सकता है।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इंटरनेट, यातायात, बिजली, पानी, रोजगार, सड़के इत्यादि इस तरह की मुलभुत सुविधाएं का ना होना गांव के बच्चों की तरक्की को फुल स्टॉप लगा देता है। जब ग्रामीण बच्चों को सुविधाएं कम मिलती है तो प्रतियोगी परीक्षाओं में बच्चों को एक सम्मान परीक्षा क्यों ? शहर में रोजगार के अवसर उपलब्ध है परंतु ग्रामीण लोगों को यह सुविधा से वंचित रखा था। जब तक ग्रामीण इलाकों में सुविधाएं नहीं होंगी तब तक हमारा देश कैसे तरक्की कर सकता है।

—————

यह लेख (गांव से पलायन का जिम्मेदार कौन?) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. ए. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।

सम्मान पत्र -180 ऑनलाइन सम्मान पत्र, चार बार BSF से सम्मानित, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सोसायटी से सम्मानित, नेहरू युवा केंद्र बाड़मेर से सम्मानित, शुभम संस्थान और विश्वास सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित, प्रज्ञा क्लासेस बाड़मेर द्वारा, आकाशवाणी से लगातार काव्य पाठ, सम्मानित, बीएसएफ में वेलफेयर के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने हेतु सम्मानित। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, प्रेसिडेंट ग्लोबल चेकर अवार्ड।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिन्दी साहित्य Tagged With: gaanv se palaayan ka jimmedaar kaun?, Seema Ranga Indra, seema ranga indra articles, गांव से पलायन का जिम्मेदार कौन? - सीमा रंगा इन्द्रा, सीमा रंगा इन्द्रा, सीमा रंगा इन्द्रा जी की रचनाएँ

आम जनता को कब मिलेगा उसका हक।

Kmsraj51 की कलम से…..

Aam Janta Ko Kab Milega Usaka Hak | आम जनता को कब मिलेगा उसका हक।

शहरातीयत की धक्कम-पेल, ठेलम-ठेल, रेलम-रेल और तिकड़मबाजी तो आज से पहले खूब देखी और सुनी थी पर हस्पताल में भी ऐसा परिदृश्य होता होगा कभी सोचा नहीं था। हर कोई बस इसी जद में लगा है कि मेरा नम्बर पहले लगना चाहिए, मेरा नम्बर पहले लगना चाहिए। सब्र रखने का शायद किसी को वक्त ही नहीं है। बहुत से लोग स्वार्थ और अमानवीयता को यहां भी नहीं छोड़ते और बहुत से ऐसे भी लोग हैं जो इंसानियत की मिसाल पेश करते हैं। बाहर रेहड़ी – फहड़ी तथा रेस्टोरेंट जैसी श्रेणी का खाना बनाने वाले ढाबे व सरकारी कैंटीन आदि वाले खाने-पीने के सामान में जहां मोल भाव करते हैं, वहीं कई लोग गरीबों और मरीजों तथा उनके परिजनों को निशुल्क भंडारा भी तो लगाते हैं।

इस कला में प्रवीण सिख धर्म के लोगों के हुनर को भला कौन नहीं जानता। ये भंडारा लगाने वाले लोग पकड़-पकड़ कर सभी को भंडारा मुफ्त में खिलाते हैं, चाय पिलाते हैं, उनके जूठे बर्तन धोते हैं और भी सेवाएं निशुल्क प्रदान करते हैं। तब लगता है कि दुनियां में दया और धर्म खत्म कहां हुआ है। वह तो आज भी जिंदा है। पर जब दवा और शल्य चिकित्सा के सामानों के दामों को एक दूसरे दुकानदारों के साथ तुलना करके देखते हैं तो लगता है कि दुनियां में चोर बाजारी बहुत है। सच क्या है झूठ क्या है? कुछ कहते नहीं बनता।

उस रोज रात 2:00 बजे जब हम मेरे बेटे को अति संवेदनशील हालत में पी जी आई चंडीगढ़ में लेकर पहुंचे तो वहां के आपातकालीन विभाग का परिदृश्य कोलकाता के मछली बाजार से कम नहीं था। कोई आ रहा था तो कोई जा रहा था। कोई सांस ले रहा था तो कोई साथ छोड़ रहा था। कुछ लोग तो प्राण छोड़ कर के ही इस संसार को हमारी आंखों के सामने अलविदा कह गए थे। खैर, जन्म और मरण तो इस संसार के सनातन सत्य है। भगवान श्री कृष्ण ने गीता में यूं ही उपदेश नहीं दिया कि अर्जुन इस संसार में जो आया है वह एक दिन जाएगा जरूर। पर राहत प्रदान करने वाली जगह भी किसी के दिल को इतना आहत करेगी, कभी सोचा भी नहीं था।

मेरे बेटे को मैंनेनजाइंटिस नामक दिमागी बीमारी ने अचानक बुरी तरह से जकड़ रखा था। मेरे जिले के स्थानीय अस्पताल में उस बीमारी का इलाज संभव ना होने के कारण चिकित्सक लोगों के द्वारा हमें पी जी आई चंडीगढ़ रेफर किया गया। रास्ते में जब हम एंबुलेंस में आ रहे थे तो सांसे गले में आकर अटकती जा रही थी कि न जाने कब और क्या घटना घट जाए ? शायद मैं अपने बेटे को खो न बैठूं। बाप जो हूं, ऐसे उल जलूल ख्यालात आना कोई नई बात नहीं थी। भगवान का शुक्र है कि हम सही सलामत पी जी आई पहुंच गए। उस भीड़ भड़ाके के बीच में रात 2:00 बजे बेटे की हालत को देखकर आपातकालीन विभाग ने दाखिला दे दिया था और सुबह 6:00 बजे तक सभी प्रकार की जांचें द्रुत गति से आपातकालीन विभाग के चिकित्सकों ने करवा ली थी।

बेटे को दर्द बहुत था। सर फटा जा रहा था। क्योंकि सर में दिमागी इंफेक्शन हो गया था। इस भीड़ को देखकर जो मेरे भीतर बेटे की उस पीड़ा को लेकर के एक अजीबोगरीब पीड़ा थी वह सहसा शान्त होती जा रही थी। चारों तरफ स्ट्रेचर पर ट्रॉलियों के ऊपर हर उम्र के छोटे – बड़े और हर प्रकार के मरीज चीख – चिल्ला रहे थे। अब मुझे औरों का दुख घना और अपना हल्का लग रहा था। यह बात जरूर है कि मेरा बेटा दिमागी रूप से बहुत परेशान था। उससे कोई बात नहीं हो पा रही थी और वह अपना दिमागी संतुलन पूर्ण रूप से खो चुका था। पर फिर भी उस चीर-फाड़ भरे मंजर को देखकर, छोटे – बड़े हर रोगियों की चीख-पुकार को सुनकर तथा प्राणों के संघर्ष को हारते हुए अपनी जीवन यात्रा का सफर इस दुनिया से उस दुनिया की ओर करते हुए लोगों को देखकर मेरी आंखें नम हुए जा रही थी।

ऐसा नहीं है कि मैं पहले अस्पताल में कभी नहीं आया था। मैंने दादी मां, छोटे ताया श्री, मंझले भैया तथा दोनों चाचाओं, बड़े तय – ताई के साथ-साथ अपनी सगी बहन को अपनी आंखों के सामने संसार छोड़ते देखा था। कई बार अस्पताल आ चुका था। भीड़ भी कई बार देख चुका हूं। पर जिस तरह की भीड़ और चीख-पुकार मैंने इस बार पी जी आई की आपातकालीन सेवा में देखी थी, वह अति भयानक परिदृश्य था।

आम अस्पतालों में चिकित्सकों को बार-बार हिदायत देते हुए सुना है कि ऐसे खुले वातावरण में ऑपरेशन किए हुए रोगी को या गंभीर हालत के रोगी को कभी नहीं रखना चाहिए। इंफेक्शन का डर रहता है। पर यह क्या? यहां तो हर कोई मरीज बिना बेड के बाहर स्ट्रेचर पर ही लेटे – लेटे अपना पूरा इलाज कर लेता है और यहीं से घर चला जाता है। जिन्हे जीना हो, वे तो जी जाते हैं पर जिन्हें संसार छोड़ना है वे भी यहीं पर अपने प्राण त्याग देते हैं।

हस्पताल की आलीशान पथरीली दीवारों से अपना हाड – मांस का माथा बार – बार टकराता हूं और भगवान से प्रार्थना करता हूं कि हे प्रभु! सबका भला करना। सबका पहले और मेरा पीछे। दिल की पीड़ा जितनी अपने बेटे के लिए सता रही थी, उससे कहीं ज्यादा आस – पास शल्य चिकित्सा से चीर – फाड किए हुए सरों वाले छोटे छोटे बच्चों को देखकर हो रही थी। सोचता हूं कि इन बच्चों ने इस छोटी सी उम्र में ऐसा क्या कर लिया कि ये इतनी गम्भीर दिमागी बीमारी के मरीज हो गए। खैर यह दुनियां है।फिर हस्पताल की दुनियां। जहां एक ओर बच्चों को जनने वालों की खुशी झलकती है तो दूसरी ओर से देह त्यागने वालों के परिजनों की पीड़ा दिखती है। सचमुच किसी ने ठीक ही कहा है कि यह संसार बड़ा रंगीन है।

फिर भीतर ही भीतर व्यवस्था और सत्ता के प्रति गहरी रोष उमड़ती है कि आजादी के 75 साल बीत गए पर हमारे हुक्मरान और अफसरान अभी तक आम और सर्वहारा वर्ग को स्वास्थ्य, शिक्षा और न्याय जैसी मूलभूत सुविधाओं को निशुल्क और अच्छी व्यवस्था के साथ क्यों नहीं मुहैया करवा पाए? देश के पूर्व प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई जी की उस बात का ख्याल मस्तिष्क में पुनः गूंजता है “देश की जनता को कुछ भी मुफ़्त नहीं देना चाहिए। इससे जनता की आदत बिगड़ती है और देश कभी प्रगति नहीं करता। मुफ़्त यदि कुछ मिलना चाहिए तो वह है, स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा व्यवस्था और न्याय व्यवस्था।” कोई कुछ भी कहे बात सोलह आने सही है। आज के दौर में यदि जेब में पैसा न हो तो उपरोक्त तीनों मूलभूत सुविधाओं से आदमी को हाथ धोने पढ़ सकते हैं।

यूं तो कहते हैं कि आदमी के आगे पैसा कुछ भी नहीं है। कुछ हद तक यह सत्य भी है। आदमी ही जिंदा नहीं रहेगा तो पैसों का क्या अचार डालोगे? पर जब इस तरह की गंभीर बीमारी के चक्कर में निम्न मध्य वर्ग और उच्च मध्यवर्ग के साथ-साथ गरीब व्यक्ति फंसता है तो यही पैसे बहुत काम आते हैं। खैर जैसे ही मेरे बेटे की बीमारी की खबर मेरे इष्ट मित्रों और रिश्तेदारों में पहुंची। वैसे ही सभी ने उनके लिए ईश्वर से दुआ की। कहते हैं दवा से बड़ी दुआ होती है। शायद यह असर उन सबकी दुआओं का ही था कि आज मेरा बेटा उस भयानक बीमारी के जीवन नाशक खतरे से लगभग बाहर है। सबकी दुआ में असर होता है और भगवान उस सामूहिक पुकार को सुनता है।शायद परमात्मा ने सबकी सुनी और मानी।

हैरत इस बात की है कि देश को सबसे अधिक कर देने वाली और सबसे अधिक परिश्रम देकर उन्नत करने वाली इतनी बड़ी जमात को सरकार इस तरह से गैलरियों और बरामदों में जीने – मरने के लिए क्यों छोड़ देती है? पी जी आई की आपातकालीन सेवाओं की हर वार्ड में भीड़ इतनी है कि वार्डों में तो जगह ही नहीं होती पर गैलरियों में भी भीड़ इस तरह से लबालब भरी मिलती है मानो कोलकाता का मछली बाजार लग गया हो। बेड के नाम पर नाममात्र की सुविधा। अधिकतर रोगियों को ट्रालियों पर ही लेटे-लेटे अपना इलाज संपन्न करना पड़ता है। बेड तो बहुत ही मुश्किल से किसी भाग्यवान के हिस्से आता है। वह भाग्यवान भी वही व्यक्ति होता है जो जिंदगी और मौत की जंग से बिल्कुल समीप से लड़ रहा होता है। बाकी सब ट्रालियों पर ही होता है। ये ट्रालिया भी अलग-अलग धार्मिक संगठनों और सामाजिक संगठनों की भेंट की हुई है शायद।

सोचता हूं क्या मेरे देश की सरकार इतनी गरीब है कि चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू – कश्मीर तथा आंशिक रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे बड़े भू भाग के गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों का इलाज करने वाले इस हस्पताल की आपातकालीन सेवा को अभी तक वह उन्नत ही नहीं कर पाई। माना कि देश की जनसंख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। पर इसका मतलब यह तो नहीं है कि जो ढांचा आज से वर्षों पहले खड़ा कर दिया गया था, बस उसी को ही बनाए रखें।

क्या सरकारें सिर्फ एक दूसरे पर इल्जाम ही लगाती रहेगी? आजादी के बाद आज तक सभी दलों ने केंद्र में राज किया है। क्या यह सभी दलों की सामूहिक जिम्मेवारी नहीं बनती है कि पी जी आई चंडीगढ़ के ट्रामा सेंटर और आपातकालीन सेवा के भवन को और उन्नत और विकसित किया जाए। वहां हर इमरजेंसी वार्ड में कम से कम 3 से 4 सौ बिस्तरों का आधुनिक तकनीकी सुविधाओं के साथ प्रबंध वर्तमान में सरकार को नहीं करना चाहिए ? क्या बड़े – बड़े लोग फोर्टिस और अपोलो जैसे हॉस्पिटल में अपना इलाज करते हैं, इसलिए इस गरीब और सर्वहारा तथा निम्न मध्य वर्ग के आश्रय स्थल की ओर कोई ध्यान नहीं देता?

इतना ही नहीं, गंभीर समस्याओं से जूझ रहे रोगियों के साथ इनकी देखभाल करने के लिए आए हुए तीमारदारों को भी रात में बाहर खुले में सड़क किनारे सोना पड़ता है। क्या आजादी के 75 साल बाद आजाद हिंदुस्तान में यह बात शोभा देती है? आखिर क्यों नहीं सोचती है सरकार इस दिशा में? कौन करेगा इन गरीबों की और आम जनमानस के हितों की बात? क्या इन सभी लोगों को सुविधा नहीं मिलनी चाहिए? सवाल अनगिनत है और जवाब अपेक्षित।

मैं चाहता हूं यह बात देश की संसद तक पहुंचे ताकि देश की आम जनता को न्याय मिल सके और सुविधा मिल सके। देश में कोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा नहीं बनेगा तो शायद इतनी ज्यादा क्षति नहीं होगी जितनी ज्यादा क्षति इन गरीब एवं आम जनमानस के पीड़ित होने से देश को होगी। देश का मेहनतकश किसान, मजदूर सर्वहारा वर्ग जब जिंदगी और मौत की जंग से इसी प्रकार से खुले में अपने कठिन समय में लड़ता रहेगा तो वह देश की समस्याओं के साथ शायद उस ताकत से नहीं लड़ पाएगा जिससे उसे लड़ना चाहिए।

पर फिर भी देश की उन्नति और समृद्धि के लिए इस गरीब मजदूर और किसान वर्ग ने तथा निम्न मध्य वर्ग के कर्मचारी वर्ग ने अपनी एड़ी – चोटी का जोर लगा कर के भारत का नाम विश्व में रौशन किया है। इसलिए कुछ तो दायित्व देश को चलाने वाली सरकारों का भी बनता है कि और न सही तो मानवीय पहलुओं से सही, इस दृष्टि से जरूर विचार करें। सड़क नहीं बनेगी कोई बात नहीं, रेलमार्ग नहीं बनेगा तो भी चलेगा। किसी को सब्सिडी नहीं मिलेगी तो वह भी जी जाएगा। परन्तु सुविधा के अभाव में हस्पताल में किसी की जान चली जाए, यह तो बिल्कुल नहीं चलेगा।

यह हालत किसी एक हस्पताल की नहीं है। खबरों में ऐसे कई खुलासे हर राज्य से होते रहते हैं, जहां कहीं व्यवस्था के नाम पर तो कहीं प्रबंधन और प्रशासन के नाम पर बट्टा लगता रहता है। पर पी जी आई चंडीगढ़ का स्टॉफ पूरी मुस्तैदी के साथ सीमित सुविधाओं में भी लोगों को उचित सेवाएं देता है। कमी है तो वह है आपातकालीन विभाग में बिस्तर तथा भवन संबधी प्रबंधनों की। इस प्रकार की खामियां सरकारी स्कूलों और न्याय व्यवस्था में भी मौजूद है, जो आजाद देश की आजाद जनता के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ है। फिर से मन में सवाल उठता है कि आखिर देश की आम जनता को उसके हिस्से का हक कब और कैसे मिलेगा?

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — पुरे देश में बड़े सरकारी पी जी आई हस्पताल में सीमित सुविधाओं में लोगों का समय से उचित इलाज का ना होना। आपातकालीन विभाग में बिस्तर तथा भवन संबधी प्रबंधनों की कमी। इस प्रकार की खामियां सरकारी स्कूलों और न्याय व्यवस्था में भी मौजूद है, जो आजाद देश की आजाद जनता के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ है। फिर से मन में सवाल उठता है कि आखिर देश की आम जनता को उसके हिस्से का हक कब और कैसे मिलेगा? जय हिन्द – जय भारत।

—————

यह लेख (आम जनता को कब मिलेगा उसका हक।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिन्दी साहित्य Tagged With: Essay on Health in Hindi, आम जनता को कब मिलेगा उसका हक - हेमराज ठाकुर, स्वास्थ्य व्यवस्था पर निबंध, स्वास्थ्य शिक्षा पर निबंध, हक़ की लड़ाई, हेमराज ठाकुर, हेमराज ठाकुर जी की रचनाएँ

मंत्र को गुप्त क्यों रखा जाता है?

Kmsraj51 की कलम से…..

Mantra Ko Gupt Kyon Rakha Jata Hai | मंत्र को गुप्त क्यों रखा जाता है।

मंत्र दीक्षा का अर्थ है कि जब तुम समर्पण करते हो, तो गुरु तुममें प्रवेश कर जाता है, वह तुम्हारे शरीर, मन, आत्मा में प्रविष्ट हो जाता है। गुरु तुम्हारे अंतस में जाकर तुम्हारे अनुकूल ध्वनि की खोज करेगा। वह तुम्हारा मंत्र होगा। और जब तुम उसका उच्चारण करोगे तो तुम एक भिन्न आयाम में एक भिन्न व्यक्ति होओगे।

जब तक समर्पण नहीं होता, मंत्र नहीं दिया जा सकता है। मंत्र देने का अर्थ है कि गुरु ने तुममें प्रवेश किया है, गुरु ने तुम्हारी गहरी लयबद्धता को, तुम्हारे प्राणों के संगीत को अनुभव किया है। और फिर वह तुम्हें प्रतीक रूप में एक मंत्र देता है जो तुम्हारे अंतस के संगीत से मेल खाता हो। और जब तुम उस मंत्र का उच्चार करते हो तो तुम आंतरिक संगीत के जगत में प्रवेश कर जाते हो, तब आंतरिक लयबद्धता उपलब्ध होती है।

मंत्र तो सिर्फ चाबी है। और चाबी तब तक नहीं दी जा सकती जब तक ताले को न जान लिया जाए। मैं तुम्हें तभी चाबी दे सकता हूं जब तुम्हारे ताले को समझ लूं। चाबी तभी सार्थक है जब वह ताले को खोले। किसी भी चाबी से काम नहीं चलेगा। प्रत्येक आदमी विशेष ढंग का ताला है, उसके लिए विशेष ढंग की चाबी जरूरी है।

यही कारण है कि मंत्रों को गुप्त रखा जाता है। अगर तुम अपना मंत्र किसी और को बताते हो तो वह उसका प्रयोग कर सकता है। यही कारण है कि लोगों को अपने—अपने मंत्र गुप्त रखने चाहिए, उन्हें सार्वजनिक बनाना ठीक नहीं है। वह खतरनाक है। तुम दीक्षित हुए हो तो तुम जानते हो, तुम उसका मूल्य जानते हो, तुम उसे बांटते नहीं फिर सकते। यह दूसरों के लिए हानिकर हो सकता है। यह तुम्हारे लिए भी हानिकर हो सकता है। इसके कई कारण हैं।

पहली बात कि तुम वचन तोड़ रहे हो। और जैसे ही वचन टूटता है, गुरु के साथ तुम्हारा संपर्क टूट जाता है। फिर तुम गुरु के संपर्क में नहीं रहोगे। वचन पालन करने से ही सतत संपर्क कायम रहता है। दूसरी बात, दूसरे को बताने से, दूसरे के साथ उसके संबंध में बातचीत करने से मंत्र मन की सतह पर चला आता है और उसकी गहरी जड़ें टूट जाती हैं। तब मंत्र गपशप का हिस्सा बन जाता है। और तीसरा कारण है कि गुप्त रखने से मंत्र गहराता है। जितना गुप्त रखोगे वह उतना ही गहरे जाएगा; उसे गहरे में जाना ही होगा।

“एक शिष्य के संबंध में खबर है कि जब उसके गुरु ने उसे गुह्य मंत्र दिया तो उससे वचन ले लिया कि वह उसे बिलकुल गुप्त रखेगा। उसे कहा गया कि तुम इसे किसी को भी नहीं बताओगे। फिर शिष्य का गुरु उसके स्वप्न में प्रकट हुआ और उसने पूछा कि तुम्हारा मंत्र क्या है? और स्‍वप्‍न में भी शिष्य ने वचन का पालन किया; उसने बताने से इनकार कर दिया। और कहा जाता है कि इस भय से कि कहीं स्वप्न में गुरु फिर प्रकट हों या किसी को भेजें और वह इतनी नींद में हो कि गुप्त मंत्र को प्रकट कर दे और वचन टूट जाए, शिष्य ने बिलकुल सोना ही छोड़ दिया। वह सोता ही नहीं था।

ऐसे सोए बिना शिष्य को सात आठ दिन हो गए थे। फिर जब उसके गुरु ने पूछा कि तुम सोते क्यों नहीं हो? मैं देखता हूं कि तुमने सोना छोड़ दिया है। बात क्या है? शिष्य ने गुरु से कहा : आप मेरे साथ चालबाजी कर रहे हैं। आपने स्वप्न में आकर मुझसे मेरा मंत्र पूछा था। मैं आपको भी नहीं बताने वाला हूं। जब वचन दे दिया तो मैं उसका स्‍वप्‍न में भी पालन करूंगा। लेकिन फिर मैं डर गया। नींद में, कौन जाने, किसी दिन मैं भूल भी सकता हूं!”

अगर तुम अपने वचन के प्रति इतने सावधान हो कि स्‍वप्‍न में भी उसका स्मरण रहता है तो उसका अर्थ है कि वह गहराई में उतर रहा है। वह अंतस में उतर रहा है; वह अंतरस्थ प्रदेश में प्रवेश कर रहा है। और वह जितनी गहराई को छुएगा, वह उतना ही तुम्हारे लिए चाबी बनता जाएगा। क्योंकि ताला तो अंतर्तम में है।

किसी चीज के साथ भी प्रयोग करो। अगर तुम उसे गुप्त रख सके तो वह गहराई प्राप्त करेगा। और अगर तुम उसे गुप्त न रख सके तो वह बाहर निकल आएगा। तुम क्यों कोई बात दूसरे से कहना चाहते हो? तुम क्यों बातें करते रहते हो?

  • सच तो यह है कि जिस चीज को तुम कह देते हो, उससे मुक्त हो जाते हो। एक बार तुमने किसी से कह दिया, तुम्हारा उससे छुटकारा हो जाता है। वह चीज बाहर निकल गई। मनोविश्लेषण का पूरा धंधा इसी पर खड़ा है। रोगी बोलता रहता है और मनोविश्लेषक सुनता रहता है। इससे रोगी को राहत मिलती है। वह अपनी समस्याओं के बारे में, अपने दुख के बारे में जितना ही बोलता है, वह उनसे उतनी ही छुट्टी पा लेता है।
  • और इसके ठीक विपरीत घटित होता है जब तुम किसी चीज को छिपाकर रखते हो, गुप्त रखते हो। इसीलिए तुम्हें कहा जाता है कि मंत्र को किसी से कभी मत कहो। तब वह गहरे से गहरे तल पर उतरता जाता है और किसी दिन ताले को खोल देता है।

इति शुभमस्तु।

♦ डॉ विदुषी शर्मा जी – नई दिल्ली ♦

—————

  • ” लेखिका डॉ विदुषी शर्मा जी“ ने अपने इस लेख से, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है — अगर तुम अपने वचन के प्रति इतने सावधान हो कि स्‍वप्‍न में भी उसका स्मरण रहता है तो उसका अर्थ है कि वह गहराई में उतर रहा है। वह अंतस में उतर रहा है; वह अंतरस्थ प्रदेश में प्रवेश कर रहा है। और वह जितनी गहराई को छुएगा, वह उतना ही तुम्हारे लिए चाबी बनता जाएगा। क्योंकि ताला तो अंतर्तम में है। किसी मंत्र को या विचार को तुम गुप्त रख सके तो वह गहराई प्राप्त करेगा। और अगर तुम उसे गुप्त न रख सके तो वह बाहर निकल आएगा। तुम क्यों कोई बात दूसरे से कहना चाहते हो? तुम क्यों बातें करते रहते हो? जब तुम किसी चीज को छिपाकर रखते हो, गुप्त रखते हो। इसीलिए तुम्हें कहा जाता है कि मंत्र को किसी से कभी मत कहो। तब वह गहरे से गहरे तल पर उतरता जाता है और किसी दिन ताले को खोल देता है।

—————

यह लेख (मंत्र को गुप्त क्यों रखा जाता है।) “डॉ विदुषी शर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख / कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम डॉ विदुषी शर्मा, (डबल वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर) है। अकादमिक काउंसलर, IGNOU OSD (Officer on Special Duty), NIOS (National Institute of Open Schooling) विशेषज्ञ, केंद्रीय हिंदी निदेशालय, उच्चतर शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार।

ग्रंथानुक्रमणिका —

  1. डॉ राधेश्याम द्विवेदी — भारतीय संस्कृति।
  2. प्राचीन भारत की सभ्यता और संस्कृति — दामोदर धर्मानंद कोसांबी।
  3. आधुनिक भारत — सुमित सरकार।
  4. प्राचीन भारत — प्रशांत गौरव।
  5. प्राचीन भारत — राधा कुमुद मुखर्जी।
  6. सभ्यता, संस्कृति, विज्ञान और आध्यात्मिक प्रगति — श्री आनंदमूर्ति।
  7. भारतीय मूल्य एवं सभ्यता तथा संस्कृति — स्वामी अवधेशानंद गिरी (प्रवचन)।
  8. नवभारत टाइम्स — स्पीकिंग ट्री।
  9. इंटरनेट साइट्स।

ज़रूर पढ़ें — साहित्य समाज और संस्कृति।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari, etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: हिन्दी साहित्य Tagged With: Dr. Vidushi Sharma, dr. vidushi sharma article, mantra ko gupt kyon rakha jata hai, Why is the mantra kept secret?, गुरु मंत्र को गुप्त क्यों रखना चाहिए, गुरुमंत्र किसे कहते हैं ?, डॉ विदुषी शर्मा, डॉ विदुषी शर्मा जी की रचनाएँ, मंत्र कैसे काम करता है?, मंत्र को गुप्त क्यों रखा जाता है - डॉ विदुषी शर्मा, मंत्र से क्या फायदा होता है?

गणतंत्र का महत्व।

Kmsraj51 की कलम से…..

Importance of republic – गणतंत्र का महत्व।

26 जनवरी भारत का गणतंत्र दिवस है। जब भी 26 जनवरी आती है हर सच्चे भारतीय का ह्रदय गर्व से भर जाता है। यह ऐसा विशिष्ट दिवस है जो हम सभी देशवासियों को एक मूल्यों पर आधारित लोकतांत्रिक देश के नागरिक होने का भान करवाता है। हम सभी जानते हैं कि भारत विश्व का सबसे अधिक समृद्धशाली, श्रेष्ठ परंपराओं, नैतिक मूल्यों और वसुधैवकुटुंबकम की परिकल्पना पर आधारित नीतियों का देश रहा है। किन्तु दुर्भाग्यवश नैतिकता से गिरे हुए अनेक आततायी विदेशियों द्वारा समय समय पर इसकी अखंडता को खंडित और धूमिल किया जाता रहा है। इसके अतिरिक्त चन्द देशद्रोहियों के विश्वासघात के कारण भारत जैसे शक्तिशाली देश को वर्षों तक दासता की ज़ंजीरों में रहना पड़ा।

जिसके कारण हमें अपनी अनेक बहुमूल्य धरोहरों (नालंदा विश्वविद्यालय, अनेक ऐतिहासिक इमारतें, अद्भुत शिल्पकलाओं के निर्माण इत्यादि) से विमुख होना पड़ा। दीर्घकालिक संघर्ष और भारतीय शूरवीरों के बलिदान की बदौलत हमें 15 अगस्त 1947 को परतन्त्रता से मुक्ति मिली। कितना अद्भुत अनुपम दिन रहा होगा उन्नीस सौ सैंतालिस का पन्द्रह अगस्त का दिन ‘जब एक लंबी प्रतीक्षा के पश्चात अपने देश का तिरंगा अपनी पूरी आन बान और शान से लहराया होगा’ ये कल्पना ही रोमांचित कर देती है। किन्तु देश का संघर्ष मात्र स्वतन्त्रता मिल जाने से समाप्त नहीं हो जाता केवल संघर्ष की दिशा और प्राथमिकताएँ बदल जाती हैं।

अब सबसे अधिक विचारणीय पक्ष ये होता है कि विदेशियों द्वारा पहुँचाई गई क्षति को ठीक करना और एक ऐसा संविधान बनाना जो सरकार और नागरिकों के लिए नीतियों, कर्तव्यों तथा अधिकारों से संबंधित दिशा निर्देशन करे। ये दिशा निर्देशन ब्रिटिश राज से पूर्ण रूपेण स्वतन्त्रता का बोध कराने के लिए भी अति आवश्यक था। 31 दिसम्बर 1929 को श्री जवाहरलाल नेहरू जी की अध्यक्षता में लाहौर में मध्य रात्रि को एक सत्र का आयोजन किया गया था और उस बैठक में जितने भी लोग उपस्थित थे सबने 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज दिवस मनाने की शपथ भी ली थी। इस निर्णय का सभी क्रांतिकारियों और राजनैतिक दलों ने एक मत से समर्थन किया था।

  • भारतीय संविधान की संरचना की पहली बैठक 9 दिसम्बर 1946 को हुई थी जिसका उद्देश्य भारत की शासन व्यवस्था कैसी होगी इसका एक दीर्घकालिक प्रारूप तैयार करना था। हमारे देश का संविधान बहुत सोच समझ कर, गहरे चिन्तन-मनन और अनेक बैठकों के बाद बनाया गया है। इसलिए इसकी रूपरेखा अपने आप में अनुपम है।
  • हमें स्वतन्त्रता 15 अगस्त 1947 को मिल गई थी। परंतु ग़ुलामी की ज़ंजीरों से आज़ाद होने का सच्चा आभास तब हुआ जब 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान अपनी उत्कृष्ट रूपरेखा के साथ संपूर्ण देश में लागू हुआ।
  • तब से हम हर वर्ष इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते है क्योंकि इसके बाद भारत के नागरिकों को अपनी सरकार स्वयं चुनने का अधिकार मिला।

हमारे देश में संविधान लागू होने के बाद :-

  • डॉ राजेंद्र प्रसाद ने प्रथम राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली।
  • राष्ट्रपति का क़ाफ़िला पाँच मील की दूरी पर स्थित इर्विन स्टेडियम पहुँचा जहाँ गर्व और सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया।

भारतीय संविधान कई कारणों से विशेष है। सबसे विशेष बात ये है कि – उदारता और मानवीय मूल्यों पर आधारित संविधान है। 395 अनुच्छेदों और 8 अनुसूचियों के साथ भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा संविधान है।

  • प्रथम गणतंत्र के अवसर पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी ने समस्त देशवासियों से देश को वर्गहीन, सहकारी, मुक्त और प्रसन्नचित समाज की स्थापना करने की अपील की।

आज हम सभी गर्व और हर्षोल्लास के साथ गणतंत्र दिवस मनाते हैं। एक मुक्तक गणतंत्र दिवस के लिए समर्पित:-

रंग लाया अमर शहीदों का बलिदान जब,
मिला देश को स्वाधीनता का वरदान तब।
देश में संविधान अपना जब पारित हुआ,
भरा देश के हर नागरिक में अभिमान तब।

♦ वेदस्मृति ‘कृती‘ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

—————

  • “वेदस्मृति ‘कृती‘ जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस आलेख में समझाने की कोशिश की है — भारत विश्व का सबसे अधिक समृद्धशाली, श्रेष्ठ परंपराओं, नैतिक मूल्यों और वसुधैवकुटुंबकम की परिकल्पना पर आधारित नीतियों का देश रहा है। किन्तु दुर्भाग्यवश नैतिकता से गिरे हुए अनेक आततायी विदेशियों द्वारा समय समय पर इसकी अखंडता को खंडित और धूमिल किया जाता रहा है। इसके अतिरिक्त चन्द देशद्रोहियों के विश्वासघात के कारण भारत जैसे शक्तिशाली देश को वर्षों तक दासता की ज़ंजीरों में रहना पड़ा। जिसके कारण हमें अपनी अनेक बहुमूल्य धरोहरों (नालंदा विश्वविद्यालय, अनेक ऐतिहासिक इमारतें, अद्भुत शिल्पकलाओं के निर्माण इत्यादि) से विमुख होना पड़ा। दीर्घकालिक संघर्ष और भारतीय शूरवीरों के बलिदान की बदौलत हमें 15 अगस्त 1947 को परतन्त्रता से मुक्ति मिली। आज़ाद होने का सच्चा आभास तब हुआ जब 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान अपनी उत्कृष्ट रूपरेखा के साथ संपूर्ण देश में लागू हुआ।

—————

यह आलेख (गणतंत्र का महत्व।) ” वेदस्मृति ‘कृती‘ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी मुक्तक/कवितायें/गीत/दोहे/लेख/आलेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई• आई• टी• शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Quotes, Poetry, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: वेद स्मृति कृति जी की रचनाएँ।, हिन्दी साहित्य Tagged With: essay on republic day in hindi, importance of republic, Ved Smriti Kreeti, ved smriti kreeti articles, गणतंत्र का महत्व, गणतंत्र का महत्व - आलेख - वेदस्मृति कृती, गणतंत्र का महत्व - वेदस्मृति कृती, गणतंत्र दिवस पर निबंध 500 शब्दों में, वेद स्मृति ‘कृति’, वेद स्मृति कृति जी की रचनाएँ, वेदस्मृति ‘कृती’

गणतंत्र दिवस और भारतीय संविधान।

Kmsraj51 की कलम से…..

Republic Day and Indian Constitution – गणतंत्र दिवस और भारतीय संविधान।

भारत एक गणतांत्रिक देश है। यह सत्य किसी से छुपा नहीं है। परंतु भारत के गणतंत्र दिवस तक की कहानी कैसे-कैसे कदम दर कदम आगे बढ़ती है, यह बात नई पीढ़ी तक ले जाना पुरानी पीढ़ी का जिम्मा है। इसके विषय में जब चर्चा की जाती है तो नई पीढ़ी के लिए एक क्रमिक ज्ञान समायोजित करना पुरानी पीढ़ी का दायित्व बन जाता है। इस कड़ी में यदि हम भारतीय संविधान के निर्माण की गाथा को शुरू से खंगालने की कोशिश करेंगे तो 9 नवंबर 1946 ईस्वी का वह दिन हमें जरूर याद आता है, जिस दिन संविधान सभा के अस्थाई सदस्य डॉ सच्चिदानंद सिन्हा की अध्यक्षता में संविधान सभा की बैठक पहली बार हुई थी। 1946 में ही डॉ राजेंद्र प्रसाद जी को संविधान सभा का अध्यक्ष चुना गया था। हालांकि यह सभा बाद में 1947 में भारत के आजाद होने के पश्चात दो भागों में बंट गई थी। भारत की संविधान सभा अलग और पाकिस्तान की संविधान सभा अलग हो गई थी। भारतीय संविधान सभा की घोषणा 15 अगस्त 1947 ईस्वी को भारत की आजादी के उपलक्ष पर डॉ राजेंद्र प्रसाद जी की अध्यक्षता में ही की गई थी। इस सभा में कुल 284 सदस्य चुने गए थे तथा डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी को संविधान सभा की प्रारूप समिति का अध्यक्ष चुना गया था। डॉक्टर भीमराव जी को भारतीय संविधान के जनक की उपाधि भी दी गई है। अंबेडकर जी भारत के प्रथम कानून और न्याय मंत्री थे।

भारतीय संविधान की मूल प्रति…

भारतीय संविधान सभा ने भारतीय संविधान को लिखना शुरू किया। भारत के संविधान को बनाने के लिए विश्व के लगभग 60 गणतांत्रिक देशों के संविधानों का अध्ययन किया गया था। भारत का संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित गणतांत्रिक संविधान है। इस संविधान को तैयार करने में 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन का समय लगा था। भारतीय संविधान को अपने हाथों से लिखने वाले श्री प्रेम बिहारी नारायण रायजादा जी थे। नारायण जी एक कैलीग्राफी आर्टिस्ट थे। इनका जन्म 1901 में दिल्ली में हुआ था। इन्होंने संविधान को लिखने के बदले में किसी भी प्रकार का वेतन या भत्ता नहीं लिया था। इस संविधान की हस्तलिखित एक मूल प्रकृति(मूल प्रति) महाराज बाड़ा स्थित ग्वालियर की सेंट्रल लाइब्रेरी में रखी गई है। इस मूल प्रति में डॉ राजेंद्र प्रसाद तथा पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ-साथ संविधान सभा के 284 सभी सदस्यों के हस्ताक्षर मूल रूप से चिन्हित है।

भारतीय संविधान में बनाती बार कुल 395 अनुच्छेद थे। ये अनुच्छेद 22 भागों में विभाजित थे तथा इसमें 8 अनुसूचियां थी। परंतु आजकल भारतीय संविधान में 395 अनुच्छेद तथा 12 अनुसूचियां है जो 25 भागों में विभाजित की गई है। भारत का संविधान 251 पन्नों में लिखा गया है। यह संविधान 26 नवंबर 1949 ईस्वी को पारित किया गया था। इसलिए 26 नवंबर को संविधान दिवस के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2015 में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी की 125वी जयंती मनाई गई। उसी दिन से पूरे भारतवर्ष में 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में हर वर्ष मनाया जा रहा है।

भारत एक पूर्ण गणतंत्र राष्ट्र…

26 जनवरी 1950 ईस्वी को भारत का संविधान भारतीय संविधान की प्रस्तावना के तहत भारत में विधिवत लागू किया गया। इस दिन से भारत एक पूर्ण गणतंत्र राष्ट्र बन गया। इसलिए इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारतीय संविधान की प्रस्तावना में लिखा है “संविधान जनता के लिए हैं और जनता ही इसकी अंतिम संप्रभु है। प्रस्तावना लोगों के लक्ष्य, आकांक्षाओं को प्रकट करती है।” प्रस्तावना के इस कथन पर आज भारत की जनता को कितनी संप्रभुता मिली है? यह समझाना आज किसी अजूबे से कम नहीं है। संविधान की माने तो भारत की जनता को राष्ट्र की मूल व्यवस्थाओं के सन्दर्भ में निर्णय लेने का पूर्ण अधिकार प्राप्त होना चाहिए। परन्तु भारत में आजादी के 75 साल बीत जाने के बाद भी जनता को वे अधिकार प्राप्त नहीं है, जो संविधान ने उसे मौलिक अधिकारों के तहत प्रदान किए हैं। सबसे बड़ी अवहेलना समानता के अधिकार के तहत हो रही है। एक देश एक विधा की दृष्टि से यदि देखे तो समानता के अधिकार की नागरिकता के आधार पर धजियाँ उड़ाई जा रही है।

  • जातिवाद और धर्मवाद के आधार पर मानव – मानव में बहुत भेद किया जा रहा है।व्यक्ति – व्यक्ति और समुदाय विशेष के कुछ विशेषाधिकार निहित है, जो समानता के अधिकार की तौहीन है। कुछ वर्गों और समुदायों को संविधान में निर्धारित समय सीमाओं से परे हो कर अधिकार दिए जा रहे हैं और कुछ को कुछ नहीं। यह एक देश एक विधान के तहत अन्याय है।
  • यही हाल विवाह पद्धति के सन्दर्भ में भी है। ये बातें कैसे और किससे कहें? 1950 से 2021 तक संविधान के 105 संशोधन किए जा चुके हैं, पर कहीं भी जन लोकपाल बिल और समान नागरिक संहिता की बात को महत्व नहीं मिल पाया है।

यह सच है कि समय – समय पर ऐसी मांगे उठती रही है। परन्तु उन्हें राजनैतिक षड्यंत्रों की चक्की में पीस दिया जाता है। यदि ठीक से गौर करे तो पूर्ण गणतंत्र राज्य के लिए इन नियमों का कड़ाई से लागू होना अति आवश्यक है। वरना सत्ता और प्रशासनिक वर्ग का प्रभुत्व जनता पर स्थापित हो जाता है। जो वर्तमान समय में दिख भी रहा है। नेतागिरी और आधिकारिक धौंस अभी भी अंग्रेजी हकूमत के जैसी भारत में निरन्तर बनी हुई है। मनाने को तो हम हर वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता हैं, पर क्या वह सही मायने में गणतंत्र दिवस है?

शायद नहीं। क्योंकि आज भी भारत की एक बहुत बड़ी आबादी गरीबी और भूखमरी से जूझ रही है। आज भी आम जनमानस पूर्ण रूप से आजाद नहीं है। क्योंकि उस पर हुकामों और लाल फित्ता धारियों का दबाव है। सम्पति का समान वितरण आज भी कहां हो रहा है। संपति का तीन चौथाई हिस्सा आज भी उच्च और धनाढ्य लोगों के पास है। आम जनमानस को मिलता है तो मात्र एक तिहाही हिस्सा। आज भी भारत की जनता का एक बहुत बड़ा हिस्सा मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।

आज प्रश्न है तो वह यह है कि आखिर भारत में कब पूर्ण गणतंत्र मनाया जाएगा? जब हर आदमी को उसका पूरा अधिकार मात्र कागजों में ही नहीं बल्कि असल में मिलेगा।अन्ना हजारे ने एक प्रयास भी किया था। पर वह भी सिरे नहीं चढ़ पाया। जिन पूर्वजों ने अपना बलिदान देकर भारत को यह सपना देख कर आजाद करवाया था, कि भारत की जनता को पूर्ण गणतंत्रता प्राप्त हो। उनके दिलों पर आज क्या बीतती होगी, यदि वे किसी लोक या दुनियां से आज भारत का दृश्य देखते होंगे।

वे तो अंग्रेज थे, जो भारतीयों का काम कभी भी समय पर नहीं करते थे। फिर करते भी थे तो पूरी खुशामद करवा कर ही करवाते थे। पर आज तो काम करवाने वाला भी भारतीय है और काम करने वाला भी भारतीय ही है। आज हालत उससे भी बदतर है। बिना रिश्वत या चाटुकारिता के कोई काम करने को राजी नहीं है। शायद ऐसे भारत की कल्पना तो कभी हमारे पुरखों ने न की हो।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

Must Read : हिन्दू और हिंदुत्व – एक समीक्षा।

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आज भी भारत की एक बहुत बड़ी आबादी गरीबी और भूखमरी से जूझ रही है। आज भी आम जनमानस पूर्ण रूप से आजाद नहीं है। क्योंकि उस पर हुकामों और लाल फित्ता धारियों का दबाव है। सम्पति का समान वितरण आज भी कहां हो रहा है। संपति का तीन चौथाई हिस्सा आज भी उच्च और धनाढ्य लोगों के पास है। आम जनमानस को मिलता है तो मात्र एक तिहाही हिस्सा। आज भी भारत की जनता का एक बहुत बड़ा हिस्सा मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। नेतागिरी और आधिकारिक धौंस अभी भी अंग्रेजी हकूमत के जैसी भारत में निरन्तर बनी हुई है। मनाने को तो हम हर वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता हैं, पर क्या वह सही मायने में गणतंत्र दिवस है?

—————

यह लेख (गणतंत्र दिवस और भारतीय संविधान।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिन्दी साहित्य Tagged With: hemraj thakur, hemraj thakur articles, original copy of indian constitution, republic day and indian constitution, Republic Day and Indian Constitution - गणतंत्र दिवस और भारतीय संविधान, गणतंत्र दिवस और भारतीय संविधान - हेमराज ठाकुर, भारतीय संविधान की मूल प्रति, हेमराज ठाकुर, हेमराज ठाकुर जी की रचनाएँ

हर बार अंदाजा सही नहीं होता।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हर बार अंदाजा सही नहीं होता। ♦

ट्रेन अपनी स्पीड से चली जा रही थी। परन्तु रमा की टिकट कन्फर्म नहीं हुई थी, परन्तु उनका जाना बहुत जरूरी था इसलिए रमा अपने तीन बच्चों के साथ बिना टिकट कन्फर्म ही ट्रेन में चढ़ गए थे। सोचे हो ही जाएगी, पर बैठने के बाद पता चला टिकट कन्फर्म नहीं हुई। टीटी ने उन्हें सीट पर बैठने को कहा, जैसे ही बैठे एक महिला ने कहा ये हमारी सीट है बड़े ही रोब से। बेचारी को कुछ राहत मिली ही थी। उसे क्या पता था कि उसकी खुशी बस कुछ ही पल की थी। एक आस लगाए टकटकी लगाए उसी महिला को बार-बार इस उम्मीद में निहार रही थी कि शायद वह अपनी एक सीट हमें दे-दें क्योंकि उसके दो बच्चे थे और एक बच्चा लगभग 4 साल का था। उसकी मां ने उसे पास ही अपनी सीट पर सुला रखा था। पर उन्होंने चार सीट बुक करवा रखी थी।

3 सीटों पर ही बैठे थे चौथी सीट खाली थी। रमा ने जैसा सोचा था ऐसा कुछ नहीं हुआ उस महिला ने उसकी तरफ मुड़ के देखा भी नहीं, उसी की बगल वाली सीट पर एक आदमी काफी देर से रमा को घूरे जा रहा था। रमा बार-बार उसे देखकर अपनी नजरें झुका मन ही मन बुदबुदा रही थी। कैसा आदमी है कब से घूरे जा रहा है शर्म नहीं आती है ऐसे लोग बुरे ही होते हैं। क्योंकि वह आदमी देखने में ऐसा लग रहा था शायद कई दिन से नहाया नहीं था। उसके कपड़े भी बहुत मैले- कुचैले थे। ऐसा करते-करते ट्रेन ने कब गति पकड़ ली और रात्रि का समय कब हो गया रमा को आभास ही नहीं हुआ।

वह आदमी अपनी सीट से उठकर आया और बोला बहन जी आप मेरी सीट पर आकर बैठ जाए। आप ऐसे कब तक बच्चों का हाथ पकड़े खड़ी रहेंगी। रमा का तो जैसे खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा था और वह धन्यवाद करते हुए शर्म के मारे गर्दन नीचे किए हुए और अपने तीनों बच्चों को सीट पर बैठा दिया और खुद भी बैठ गई।

आदमी ट्रेन के दरवाजे पर जाकर खड़ा हो गया। रमा लगातार उसे ही देखे जा रही थी। जैसे-जैसे ट्रेन अपनी रफ्तार पकड़ती जा रही थी रमा के अंदर भी प्रश्नों का भूचाल आ रहा था। मन ही मन सोच रही थी कि मैंने इनके कपड़ों को देखकर और इनके हाल को देखकर अंदाजा लगा लिया था कि यह कोई अपराधी प्रवृत्ति का आदमी है, परंतु मेरा अंदाजा बिल्कुल गलत निकला और मुझे अब अपनी सोच पर बहुत शर्म आ रही है। आज जब भी रमा को ट्रेन यात्रा की याद आती है तो हर बार रमा यही सोचती है कि हर बार हमारा अंदाजा सही नहीं होता।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जरुरी नही की हर बार आपका अंदाज़ा सही ही हो, कभी भी किसी के चेहरे और हावभाव को देखकर तुरंत उसके प्रति अपना नकारात्मक विचार नहीं बना लेना चाहिए। पहले सच्चाई के तह तक जाए और दिलसे सोचकर अपना विचार बनाएं। जैसे-जैसे ट्रेन अपनी रफ्तार पकड़ती जा रही थी रमा के अंदर भी प्रश्नों का भूचाल आ रहा था। मन ही मन सोच रही थी कि मैंने इनके कपड़ों को देखकर और इनके हाल को देखकर अंदाजा लगा लिया था कि यह कोई अपराधी प्रवृत्ति का आदमी है, परंतु मेरा अंदाजा बिल्कुल गलत निकला और मुझे अब अपनी सोच पर बहुत शर्म आ रही है। आज जब भी रमा को ट्रेन यात्रा की याद आती है तो हर बार रमा यही सोचती है कि हर बार हमारा अंदाजा सही नहीं होता।

—————

यह लेख (हर बार अंदाजा सही नहीं होता।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. ए. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।

सम्मान पत्र -180 ऑनलाइन सम्मान पत्र, चार बार BSF से सम्मानित, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सोसायटी से सम्मानित, नेहरू युवा केंद्र बाड़मेर से सम्मानित, शुभम संस्थान और विश्वास सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित, प्रज्ञा क्लासेस बाड़मेर द्वारा, आकाशवाणी से लगातार काव्य पाठ, सम्मानित, बीएसएफ में वेलफेयर के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने हेतु सम्मानित। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, प्रेसिडेंट ग्लोबल चेकर अवार्ड।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: हिन्दी साहित्य Tagged With: Seema Ranga Indra, Seema Ranga Indra Article, seema ranga indra articles, जबरदस्त मोटिवेशनल कहानी, जीवन आधारित मोटिवेशनल कहानी, परिवार का महत्व, परिवार की खुशी के लिए पुरुष का समर्पण - सीमा रंगा इन्द्रा, प्रेरणा देने वाली कहानी, मन को सुकून देने वाली कहानी, सीमा रंगा इन्द्रा, सीमा रंगा इन्द्रा जी की रचनाएँ, सुकून देने वाली बातें, हर बार अंदाजा सही नहीं होता - सीमा रंगा इन्द्रा

परिवार की खुशी के लिए पुरुष का समर्पण।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ परिवार की खुशी के लिए पुरुष का समर्पण। ♦

आज के भागदौड़ भरे इस आधुनिक जीवन में किसी के पास वक्त ही नहीं है। एक घर में रहकर भी घर के सदस्य एक-दूसरे के साथ बैठकर खाना नहीं खा पाते, बात नहीं कर पाते हैं । “ऐसा नहीं है बात नहीं करना चाहते।” सभी करना चाहते पर घर-परिवार की जिम्मेदारियां और फिर कमाने की जद्दोजहद में सब व्यस्त रहते हैं।

सोचते हैं इस वर्ष की बात है अगले वर्ष सब ठीक हो जाएगा, परंतु अगले वर्ष करते-करते कब बुढ़े हो जाते हैं पता ही नहीं चलता? एक आदमी को सिर्फ कमाना ही नहीं होता बल्कि बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य, घरवालों के ख्याल के साथ-साथ बहुत से खर्चों का ध्यान रखना पड़ता है। उसे हमेशा एक ही चिंता रहती है कहीं घरवालों की जरूरतें पूरी ना हो, या कहीं कोई क़िस्त समय पर ना जाएं या फिर बच्चे की स्कूल फीस, ट्यूशन फीस लेट ना हो जाए। त्योहारों पर बच्चों की जरूरतों का सामान, खिलौने और ढेर सारी आवश्यकता की पूर्ति करता रहता है बिना कुछ बोले। उसे परिवार की खुशी सर्वप्रथम दिखती है।

मैंने देखा है एक पुरुष घर का सामान दिला देगा, बच्चों को, पत्नी को, मां को आवश्यकता की वस्तु परंतु जब उसकी बारी आती है तो हंसकर बोल देता है मेरे पास तो ढेर सारे कपड़े है। मुझे क्या जरूरत है। वह अपनी भावनाओं को सिर्फ और सिर्फ परिवार की खुशी के लिए दबा देता है। यह समर्पण ही परिवार में खुशी बनाए रखता है। हफ्ते में एक छुट्टी मिलती है आराम करने की। उसी छुट्टी में परिवार की खुशी की खातिर निकलता है बाहर परिवार को खुशी देने के लिए।

“उसका बड़ा मन होता है एक दिन का तो आराम करें, परंतु जिम्मेदारियां और परिवार को खुश रखने की चाहत उसे यह सब करने ही नहीं देती।” परिवार को खुश करने के लिए, उनके सपने सजाने के लिए, व बिना पक्षपात किए सभी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए हैं कब वह बूढ़ा हो जाता है? उसे पता ही नहीं लगता। उसके त्याग से परिवार हंसता, खेलता, मुस्कुराता रहता है।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — परिवार जीवन का वो आधार स्तंभ है, जो हमें प्रेम, अपनापन, भावनात्मक सहारा प्रदान करता है। जीवन के कठिन दौर में जब दुनिया हमसे रूठ जाए, तब परिवार ही है, जो आगे बढ़कर हमें अपने गले लगा लेता है और हर तरह से हमारा साथ देता है। इसलिए सफ़लता प्राप्ति की राह में ऐसा न हो कि परिवार कहीं पीछे छूट जाये। “उसका बड़ा मन होता है एक दिन का तो आराम करें, परंतु जिम्मेदारियां और परिवार को खुश रखने की चाहत उसे यह सब करने ही नहीं देती।” परिवार को खुश करने के लिए, उनके सपने सजाने के लिए, व बिना पक्षपात किए सभी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए हैं कब वह बूढ़ा हो जाता है? उसे पता ही नहीं लगता। उसके त्याग से परिवार हंसता, खेलता, मुस्कुराता रहता है।

—————

यह लेख (परिवार की खुशी के लिए पुरुष का समर्पण।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. ए. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।

सम्मान पत्र -180 ऑनलाइन सम्मान पत्र, चार बार BSF से सम्मानित, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सोसायटी से सम्मानित, नेहरू युवा केंद्र बाड़मेर से सम्मानित, शुभम संस्थान और विश्वास सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित, प्रज्ञा क्लासेस बाड़मेर द्वारा, आकाशवाणी से लगातार काव्य पाठ, सम्मानित, बीएसएफ में वेलफेयर के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने हेतु सम्मानित। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, प्रेसिडेंट ग्लोबल चेकर अवार्ड।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिन्दी साहित्य Tagged With: Seema Ranga Indra, Seema Ranga Indra Article, जबरदस्त मोटिवेशनल कहानी, जीवन आधारित मोटिवेशनल कहानी, परिवार का महत्व, परिवार की खुशी के लिए पुरुष का समर्पण - सीमा रंगा इन्द्रा, प्रेरणा देने वाली कहानी, मन को सुकून देने वाली कहानी, सीमा रंगा इन्द्रा, सीमा रंगा इन्द्रा जी की रचनाएँ, सुकून देने वाली बातें

खजुराहो यात्रा: एक अविस्मरणीय दैवीय अनुभव।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ खजुराहो यात्रा: एक अविस्मरणीय दैवीय अनुभव। ♦

यात्रा…….
जिसका नाम आते ही मन में अजीब सी तरंगे उठने लगती है। एक उत्साह, एक जोश उत्पन्न हो जाता है कि लगातार एक ही तरह की दैनिक जीवन से नया कुछ हटकर देखने को, घूमने को, सीखने को मिलेगा। जहां हम स्वच्छंद होंगे, पारिवारिक जिम्मेदारियों का बोझ शायद कुछ कम होगा। जहां अपनी भावनाओं को, अपने सपनों को, आपकी इच्छाओं को जीने का एक अवसर मिलेगा। इसी के साथ-साथ अपने अनुभवों को, अपनी यादों को, अपने आनंद को हम कैमरे के माध्यम से एक अनंत ख़ज़ाने के रूप में अपने साथ लेकर आएंगे। यही है एक यात्रा की सुखद अनुभूति।

इन यात्राओं के स्मृति चित्रों को दोबारा जब भी हम देखते हैं तो जैसे एक फिल्म की भांति पूरी यात्रा हमारी आंखों के सामने से गुजर जाती है और हमें एक नई ताज़गी, जीने की प्रेरणा फिर से दे जाती है और यदि यह यात्रा किसी धार्मिक स्थल, तीर्थ स्थल और ऐतिहासिक होने के साथ-साथ प्रकृति से भी जुड़ी हो तो क्या बात है।

हम हमेशा से ही सपने देखते हैं। पर यह सपने ऐसे होते हैं जिन्हें किसी के साथ शायद ही साझा कर पाएं। कोई भी चित्र देखकर, कोई फिल्म देखकर, कोई दृश्य देखकर या किसी की बातें सुनकर, वृत्तांत सुनकर हमारे मन में भी कहीं ना कहीं एक इच्छा, एक हूक सी उठती है कि हमें भी उस विशेष स्थान को देखना है, उसकी यात्रा करनी है जीवन में कभी न कभी तो ऐसा मौका जरूर मिलेगा। हम सभी के जीवन में यह पल जरूर आते हैं जब हमारी दबी हुई इच्छाएं साकार रूप ले लेती है। जब हमें उनको पूरा करने का कोई कारण कोई, हेतु प्राप्त होता है।

यात्रा अपने आप में अनोखी ही होती है…

कोई भी यात्रा अपने आप में अनोखी ही होती है और इसके साथ यह भी उसके चित्र भी पास में हो तो वह अविस्मरणीय बन जाती है। यदि इस यात्रा के अनुभव चित्र सहित हम दूसरों के साथ साझा करते हैं तो वह संस्मरण बन जाती है। वैसे तो जीवन भी एक लंबी यात्रा ही है जिसमें विभिन्न प्रकार के पड़ाव आते हैं सुख-दु:ख, हानि-लाभ, मिलन – जुदाई जीवन की यात्रा के कुछ अविस्मरणीय, अवश्यम्भावी पड़ाव होते हैं जो सभी के जीवन में एक अलग अनुभव और सीख ले कर आते हैं। जब इन्हीं अनुभवों को यदि शब्द प्रदान कर दिए जाते हैं तो वह ‘रचना’ बन जाती और शब्द ब्रह्म है इसलिए वह अमर हो जाती है।

बचपन में से लेकर मैं कभी भी खजुराहो के बारे में, उसके मंदिरों इत्यादि के बारे में कोई भी कार्यक्रम, मैगजीन इत्यादि में देखती थी तो मन में इच्छा जरूर होती थी कि जीवन में एक बार तो यहां की यात्रा करनी है। न जाने कब ये इच्छा पूरी होगी।

ये अवसर मुझे 1 फरवरी 2020 को खजुराहो में ESW ( Environment and Social Welfare Society) सोसाइटी की तरफ से 2 दिवसीय अंतराष्ट्रीय संगोष्ठी में जाने का सुवसर प्राप्त हुआ।

मेरी खजुराहो की यात्रा के पीछे की एक महत्वपूर्ण कारण था।

मेरा मन अति प्रसन्न हुआ और मैंने जल्द से जल्द ट्रेन की टिकट रिज़र्व करवा लिए कि मुझे समय पर खजुराहो पहुंचना है। निश्चित समय पर मैं खजुराहो पहुंच गई। मन में बहुत उत्साह था कि आज बचपन का सपना सच होने जा रहा था। सबसे पहले संगोष्ठी में उपस्थित रहना भी आवश्यक था इसीलिए नियत समय पर संगोष्ठी प्रारंभ हो गई।

वहाँ पर मेरे द्वारा डॉ देवी शंकर सुमन जी, साइंटिस्ट मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरमेंट फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज गवर्नमेंट ऑफ इंडिया, डॉ उलरिच वर्क, प्रेसिडेंट जर्मन एसोसिएशन ऑफ होम थेरेपी का विधिवत स्वागत किया गया।

बहुत ही सुंदर संगोष्ठी और पर्यावरण…

बहुत ही सुंदर संगोष्ठी और पर्यावरण पर आधारित विषयों के साथ सभी ने अपने रिसर्च पेपर (पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन) प्रस्तुत किए जिनसे बहुत कुछ सीखने, जानने का मौका मिला। डॉ उलरिच जो कि जर्मनी से थे उन्होंने हवन थेरेपी पर बहुत सुंदर प्रेजेंटेशन प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार से हवन हमारे पर्यावरण के लिए, हमारे अस्तित्व के लिए, हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद है। यह विडंबना ही कहेंगे कि हम अपनी सभ्यता, संस्कृति को भूलते जा रहे हैं जो कि हम पश्चिमीकरण की तरफ बढ़ते जा रहे हैं, कुछ समय की मांग है और कुछ मजबूरी कही जा सकती है। जबकि प्राचीन काल से हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा कोई भी शुभ कार्य हवन, यज्ञ इत्यादि से प्रारंभ किया जाता था जिससे न केवल वातावरण शुद्ध होता था बल्कि हर तरफ एक आध्यात्मिक, सात्विक ऊर्जा का संचार होता था जो हमारे मन मस्तिष्क तथा विचारों को भी सात्विकता प्रदान करती थी। परंतु आज जहां हर तरफ प्रदूषण का ही बोलबाला है तो इस तरह का कार्य बहुत सही दिशा में काम करेगा।

कुल मिलाकर संगोष्ठी का अनुभव बहुत ही अच्छा रहा, स्मरणीय रहा। ये तो संगोष्ठी से संबंधित कुछ अनुभव थे।

फिर मैंने अपना शोधपत्र वाचन किया। इसके पश्चात मैं निकल गई अपनी खजुराहो की यात्रा पर। इसके लिए मैंने एक टैक्सी किराए पर ली ताकि कम समय में मैं अपनी यात्रा पूरी कर सकूं।

खजुराहो के मंदिर अपने आप में ही अपनी मिसाल हैं। खजुराहो के मंदिरों को चंदेल वंश के राजाओं ने बनवाया था। यहां 85 मंदिर थे, जिनमें से सिर्फ़ 20 ही बचे हैं। खजुराहो के मंदिरों की बाहरी दीवारों की कामुक मूर्तियां विश्वप्रसिद्ध हैं और यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की लिस्ट में शामिल हैं।

सभी मंदिरों के बारे में एक साथ बताने की बजाय मैं एक-एक मंदिर की विशेषता और उसके बारे में कुछ स्मृतियां आपके साथ बांटना चाहती हूं।

खजुराहो के मंदिर अपने आप में अद्वितीय…

खजुराहो के मंदिर अपने आप में अद्वितीय हैं। यहां हर पत्थर पर जीवन दिखाई देता है। प्रत्येक मंदिर अपने आप में भव्यता का सबसे बड़ा नमूना कहा जा सकता है। यहां की स्थापत्य कला, शिल्प कला देखते ही बनती है। प्रत्येक मंदिर के द्वार पर अर्ध चंद्र या सूर्य के चित्र बने हुए हैं जिसके दोनों ओर शंख दिखाई देते हैं। सभी मंदिर अपने आप में भव्यता लिए हुए हैं जिनका अलग-अलग महत्व है। यहां पर सभी मंदिर सूर्योदय पर खुलते हैं और सूर्यास्त पर बंद हो जाते हैं। यही सिस्टम रखा हुआ है यहां पर जिसका पालन बहुत ही सख्ती से किया जाता है।

एक मंदिर में रात को लाइट एंड साउंड शो होता है जिसकी टिकट ढाई सौ रुपए रखी गई है। यह लगभग सवा घंटे का शो होता है जिसमें मंदिरों के बारे में बहुत विस्तार से बताया जाता है साथ में उनके इतिहास तथा इन मंदिरों के निर्माण के पीछे जो कथाएं किवदंतियां हैं उनके बारे में विस्तार से सूचना दी जाती है।

खजुराहो के मंदिर चंदेल वंश के द्वारा बनाए गए हैं…

खजुराहो के मंदिर चंदेल वंश के द्वारा बनाए गए हैं। इन सभी मंदिरों में जीवन के सभी पड़ावों पर प्रकाश डाला गया है। मंदिर में जाने से पहले वहां पर अप्सराओं की मूर्तियां है जो नारी सौंदर्य को उजागर करती हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि हमें जीवन में इस तरह के अवसर मिलते रहेंगे जब विषय वासनाएं हमें अपनी और आकृष्ट करती हैं। हमें फिर भी स्वयं पर संयम रखते हुए अपना कर्म करते रहना है। यह अप्सराएं विभिन्न मुद्राओं में दिखाई देती हैं जिनमें दैनिक जीवन से संबंधित कार्यकलाप भी सम्मिलित हैं। इसके बाद गृहस्थ धर्म, प्रेम, समर्पण भाव भी दिखाया गया है।

अभी तक हम लोग यह सोचते थे कि खजुराहो के मंदिर केवल स्त्री पुरुष के मिलन, कामशास्त्र की गाथा का वर्णन करते हैं। वहां पर अंतरंग चित्र अधिक दिखाई देते हैं। प्रेम संबंधों को बहुत सूक्ष्मता से दिखाया गया है। परंतु इनके पीछे जो इतिहास है और जो भावनाएं हैं वह अलग है। यहां पर प्रेम प्रदर्शन के साथ इन मूर्तियों के चेहरों के भावों पर कहीं भी वासना या उत्तेजना नहीं दिखाई देती है। उनके चेहरों पर एक दिव्यता, एक समर्पण, एक संतुष्टि, एक तेज दिखाई देता है जो गृहस्थ धर्म के स्तंभ माने गए हैं। यही प्रेम संबंध, समर्पण सृष्टि चक्र का आधार है। यहीं से एक औरत मां बनने का सौभाग्य प्राप्त करती है और मां बनना पूर्णता को प्राप्त करना है। प्रसव पीड़ा का आनंद और उसके बाद का फल क्या होता है इसके बारे में शब्दों में बता पाना संभव नहीं है।

ईश्वर की प्राप्ति का हेतु हमारा शरीर और मन ही है। हम अपने शरीर, अपने मन के द्वारा संतुष्टि को प्राप्त करने के बाद ईश्वर की ओर अधिक दृढ़ता पूर्वक कदम बढ़ाते हैं। तृप्ति भी हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग है। शरीर और आत्मा तृप्त होने के बाद हम एक दूसरे पायदान पर चलते हैं जहां पर हमें दिव्यता, भव्यता और स्वार्गिक आनंद की प्राप्ति हो सकती है क्योंकि इन सब के लिए हमारे चरित्र में बहुत सी चीजों की आवश्यकता है। कुल मिलाकर आज मेरा भ्रम भी दूर हो क्या कि खजुराहो के मंदिर केवल प्रेम, संबंधों पर ही आधारित नहीं है। यहां पर बहुत कुछ देखने, बहुत कुछ सीखने को मिलता है। जैन धर्म के मंदिर में जहां बहुत से पुराने चित्र दिखाई दिए जिनमें शोध की बहुत से संभावनाएं नजर आई।

खजुराहो के दूल्हा देव मंदिर के कुछ चित्र।

यहां पर एक शिवलिंग है जिसमें 108 छोटे-छोटे शिवलिंग बने हुए हैं। यह शिवलिंग केवल शिवरात्रि पर ही पूजा के लिए उपलब्ध हो पाता है यानि इसके कपाट केवल शिवरात्रि पर ही खुलते हैं। कहा जाता है यहां पर सुहागिने अपने पति की लंबी आयु के लिए वर मांगती हैं। इस मंदिर का नाम दुल्हादेव मंदिर इसलिए पड़ा है कि एक बार एक बारात जा रही थी तो दूल्हे की तबीयत अचानक से खराब हो गई और वह परलोक सिधार गया तो इसी मंदिर में उसकी पत्नी ने आकर पूजा की तो उसे पुनः जीवनदान मिल गया। इसलिए इस मंदिर का नाम दुल्हादेव मंदिर है। बहुत ही शांत तथा स्वच्छ निर्मल वातावरण। अविस्मरणीय अनुभव।

प्रस्तुत चित्र खजुराहो मतंगेश्वर महादेव मंदिर का है। यहां पर प्रात:काल सभी भक्तजन पूजा करने आते हैं जैसा कि मैंने पहले भी कहा है कि खजुराहो में मंदिर सूर्योदय के समय खुलते हैं और सूर्यास्त पर बंद हो जाते हैं। प्रस्तुत मंदिर में लगभग 18 फुट लंबा शिवलिंग एक बहुत बड़े चबूतरे पर स्थित है। मैंने अभी तक कि अपनी जिंदगी में इतना बड़ा शिवलिंग नहीं देखा है। अद्भुत, अद्वितीय और आकर्षक भगवान शिव का प्रतीक शिवलिंग अनंतता, विशालता लिए हुए हैं जिसे देख कर आत्मिक शांति और एक सात्विक ऊर्जा का संचार हुआ। वहां पर पंडित जी ने बताया कि यह शिवलिंग फुट कुल 18 फुट का है, जिसमें 9 फुट ऊपर और 9 फुट नीचे है। शिवलिंग के नीचे एक बहुमूल्य मणि चंदेल वंश के राजाओं के द्वारा दबाई गई है कि वह मणि सुरक्षित रह सके। शायद उस मणि का यह प्रभाव है कि अभी तक यह शिवलिंग कहीं से खंडित नहीं नजर आता। बहुत ही सुंदर नजारा। मैं अपने आप को भाग्यशाली समझती हूं कि मैं यहां पहुंचकर इस शिवलिंग के दर्शन कर पाई।

खजुराहो के जैन मंदिर…

खजुराहो के जैन मंदिर के कुछ चित्र जहां पर शाकाहार परोपकार, पर्यावरण संरक्षण इत्यादि के बारे में कितने सुंदर संदेश दिए हुए हैं। इसी के साथ यहां पर पौराणिक भारतीय सभ्यता के बारे में बहुत सुंदर वर्णित चित्र भी प्रस्तुत थे जिन्हें मैं सहेज कर अपने पास ले आई तथा आप सबके साथ साझा करना चाहती हूं। कृपया आप भी देखिए कितना विशाल है हमारा भारत देश और उसका धर्म, उसकी संस्कृति, उसकी विरासत। गर्व है हमें हमारे भारतीय होने पर। जय मां भारती।

कंदरिया महादेव मंदिर…

खजुराहो के मंदिरों की श्रृंखला में आज हम बात करते हैं ‘कंदरिया महादेव’ मंदिर की। सभी मंदिरों की तरह यह मंदिर भी बहुत भव्य तथा मनमोहक है। यहां की शांति और सौम्यता में तो देखते ही बनती है।

कंदरिया महादेव मंदिर पश्चिमी समूह के मंदिरों में विशालतम है। यह अपनी भव्यता और संगीतमयता के कारण प्रसिद्ध है। इस विशाल मंदिर का निर्माण महान चन्देल राजा विद्याधर ने महमूद गजनवी पर अपनी विजय के उपलक्ष्य में किया था। लगभग 1050 ईसवीं में इस मंदिर को बनवाया गया। यह एक शैव मंदिर है। तांत्रिक समुदाय को प्रसन्न करने के लिए इसका निर्माण किया गया था। कंदरिया महादेव मंदिर लगभग 107 फुट ऊंचा है। मकर तोरण इसकी मुख्य विशेषता है। मंदिर के संगमरमरी लिंगम में अत्यधिक ऊर्जावान मिथुन हैं। अलेक्जेंडर कनिंघम के अनुसार यहां सर्वाधिक मिथुनों की आकृतियां हैं। उन्होंने मंदिर के बाहर 646 आकृतियां और भीतर 246 आकृतियों की गणना की थीं।

अंदर मंडप में जाने के लिए प्रवेश द्वार पर अर्धचंद्र तथा शंख के चित्र बनाए गए हैं।उसके बाद अंदर रोशनी का प्रबंध इस प्रकार से किया गया है कि आर पार आने वाली रोशनी का केंद्र सामने पड़ी मूर्ति पर बिल्कुल स्पष्ट रूप से दिखाई दे। यह जो चित्र दिखाई दे रहे हैं यहां पर कोई भी कृत्रिम रोशनी का प्रबंध नहीं है क्योंकि जैसा भी कि मैंने पहले भी कहा है कि यहां मंदिर सूर्य उदय पर खुलते हैं और सूर्यास्त पर बंद हो जाते हैं तो अधिकतर कृत्रिम रोशनी की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। परंतु मंदिरों के अंदर भी वास्तु कुछ इस प्रकार से है कि रोशनी को मुख्य मंदिर की मूर्ति तक केंद्रित किया गया है ताकि भगवान के दर्शन बहुत स्पष्ट और सुंदर तरीके से हो सके।

यह जो चित्र लिए गए हैं मोबाइल के कैमरे से लिए गए हैं और देखिए कितने स्पष्ट, सुंदर हैं। इसी के साथ मंदिर के मंडप में जाने से पहले दाएं तरफ एक लिपि अंकित की गई है जिसमें प्रथम “ओम नमः शिवाय” बिल्कुल स्पष्ट दिखाई दे रहा है उसके बाद शायद हम पढ़ पाने में संभव नहीं हो पाए। परंतु इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि उस समय भी यह सब कुछ इतना उन्नत था और लिपियां आसानी से पढ़ी और समझी जा रही थी तभी तो वह पत्थरों पर उकेरी गई। यहां की शिल्प कला बहुत ही अद्वितीय है। पत्थरों पर अंकित मूर्तियां अपने आप में इतनी सौम्य और सुंदर है कि उनको शब्दों में अभिव्यक्त कर पाना शायद मेरे बस में नहीं है।

खजुराहो के मंदिर की श्रृंखला में दूसरा मंदिर है विश्वनाथ मंदिर। इसमें भगवान विश्वनाथ यानी शिवलिंग रूप में विराजमान है। प्रत्येक मंडप में यहां बहुत सुंदर चित्रकारी और शिल्प कला, नक्काशी देखने को मिलती है। नंदी मंडप में जब मैंने देखा तो नंदी जी की इतनी विशाल प्रतिमा कि मन गदगद हो गया। बहुत सुंदर शांत वातावरण ऐसा लगता है जैसे ईश्वर का साक्षात्कार हो गया हो। यहां के मंदिरों की विशेषता यह है कि एक ही पत्थर के बनाए गए हैं और पता नहीं उन में कौन सी धातु मिलाई गई है कि अभी तक इतने मजबूत और चिकने है के सभी लोग, पर्यटक दांतो तले उंगली दबा लेते हैं।

यहां की भव्यता सुंदरता देखते ही बनती है। मंदिर के कक्ष में जहां विश्वनाथ जी, की शिवलिंग की स्थापना है वहां पर रोशनी का इस तरह से प्रबंध किया गया है कि क्रॉस वेंटीलेशन के तहत बिना किसी रोशनी के अंदर आते ही शिवलिंग के दर्शन बहुत ही सुंदर प्रकार से हो जाते हैं। क्योंकि दोनों तरफ की रोशनी शिवलिंग पर दिखाई देती है। हर प्रकार के मंदिर के दरवाजे के बाहर अर्धचंद्र या सूर्य का बिंब पूर्ण गोला बनाया गया है। उसके दोनों तरफ शंख हैं। विश्वनाथ मंदिर के मंडप के बाहर एक लिपि का चित्र भी दिखाई दिया जहां पर ओम नमः शिवाय बिल्कुल साफ दिखाई दे रहा है। यानी तब तक हम यह लिपियां और भाषा बिल्कुल सही से पढ़ने और लिखना सीख गए थे। अनुसंधान का विषय है।

देवी जगदम्बा मंदिर…

कंदरिया महादेव मंदिर के चबूतरे के उत्तर में जगदम्बा देवी का मंदिर है। जगदम्बा देवी का मंदिर पहले भगवान विष्णु को समर्पित था और इसका निर्माण 1000 से 1025 ईसवीं के बीच किया गया था। सैकड़ों वर्षों पश्चात यहां छतरपुर के महाराजा ने देवी पार्वती की प्रतिमा स्थापित करवाई थी इसी कारण इसे देवी जगदम्बा मंदिर कहते हैं। यहां पर उत्कीर्ण मैथुन मूर्तियों में भावों की गहरी संवेदनशीलता शिल्प की विशेषता है। यह मंदिर शार्दूलों के काल्पनिक चित्रण के लिए प्रसिद्ध है। शार्दूल वह पौराणिक पशु था जिसका शरीर शेर का और सिर तोते, हाथी या वराह का होता था।

कुल मिलाकर इस मंदिर की यात्रा भी अविस्मरणीय रही। खजुराहो में जो बात सबसे अच्छी लगी वह यह कि यहां पर किसी भी प्रकार के किसी पुजारी के दर्शन बहुत कम हुए और कहीं भी किसी ने दान-दक्षिणा के लिए मजबूर नहीं किया जैसा कि ज्यादातर हिंदू तीर्थों पर आजकल होता है कि आप को दान-दक्षिणा के लिए मजबूर किया जाता है। यदि हम ऐसा नहीं करते तो तरह-तरह की बातें बनाई जाती हैं और हमारी श्रद्धा और आस्था पर प्रश्न चिन्ह लगाया जाता है। मैं यह पूछना चाहती हूं कि यदि जो लोग पैसा नहीं दे सकते या नहीं देते हैं क्या उनमें श्रद्धा नहीं है, ईश्वर में आस्था नहीं है? वे लोग इतनी दूर यदि इतना सब कुछ खर्च करके, अपने पीछे से हर तरह से व्यवस्था करके आए हैं तो क्या बिना आस्था, बिना श्रद्धा के आए हैं? और यदि हम 50 ₹100 चढ़ा दे तो क्या वह श्रद्धा जाग जाएगी ? इस तरह के कार्यकलापों से मन दु:खी हो जाता है। पर यहां ऐसा कुछ नहीं था जिसे देख कर मन को सुकून मिला।

बस इसके बाद वापसी का समय हो गया और वैसे भी खजुराहो के सभी मंदिरों के दर्शन ईश्वर की असीम कृपा से मैंने कर ही लिए थे। यह एक ऐसा वृतांत है जो मन में बहुत शांति, श्रद्धा और एक नई चेतना लेकर आया था। ईश्वर का बहुत-बहुत धन्यवाद इतने पवित्र स्थल के दर्शन मैं कर पाई। बहुत ही अविस्मरणीय यात्रा। इस यात्रा के लिए मैं उस असीम शक्ति का हृदय से धन्यवाद देती हूं। इसी के साथ-साथ मन में बहुत कुछ और भी जागृत हो गया है कि काश कभी, मदुरै, तमिलनाडु, तिरुचिरापल्ली के भी मंदिर एक बार देखने का सौभाग्य प्राप्त हो? देखते हैं यह इच्छा कब पूरी हो पाती है, सब कुछ प्रभु के हाथ है। जब प्रभु इच्छा……… जितना मिला है उसमें भी संतोष करना चाहिए। बस इससे अधिक और क्या लिखना है।
इति शुभमस्तु।

♦ डॉ विदुषी शर्मा जी – नई दिल्ली ♦

—————

  • ” लेखिका डॉ विदुषी शर्मा जी“ ने अपने इस लेख से, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है — अभी तक हम लोग यह सोचते थे कि खजुराहो के मंदिर केवल स्त्री पुरुष के मिलन, कामशास्त्र की गाथा का वर्णन करते हैं। वहां पर अंतरंग चित्र अधिक दिखाई देते हैं। प्रेम संबंधों को बहुत सूक्ष्मता से दिखाया गया है। परंतु इनके पीछे जो इतिहास है और जो भावनाएं हैं वह अलग है। यहां पर प्रेम प्रदर्शन के साथ इन मूर्तियों के चेहरों के भावों पर कहीं भी वासना या उत्तेजना नहीं दिखाई देती है। उनके चेहरों पर एक दिव्यता, एक समर्पण, एक संतुष्टि, एक तेज दिखाई देता है जो गृहस्थ धर्म के स्तंभ माने गए हैं। यही प्रेम संबंध, समर्पण सृष्टि चक्र का आधार है। यहीं से एक औरत मां बनने का सौभाग्य प्राप्त करती है और मां बनना पूर्णता को प्राप्त करना है। प्रसव पीड़ा का आनंद और उसके बाद का फल क्या होता है इसके बारे में शब्दों में बता पाना संभव नहीं है।

—————

यह लेख (खजुराहो यात्रा: एक अविस्मरणीय दैवीय अनुभव।) “डॉ विदुषी शर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख / कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम डॉ विदुषी शर्मा, (डबल वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर) है। अकादमिक काउंसलर, IGNOU OSD (Officer on Special Duty), NIOS (National Institute of Open Schooling) विशेषज्ञ, केंद्रीय हिंदी निदेशालय, उच्चतर शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार।

ग्रंथानुक्रमणिका —

  1. डॉ राधेश्याम द्विवेदी — भारतीय संस्कृति।
  2. प्राचीन भारत की सभ्यता और संस्कृति — दामोदर धर्मानंद कोसांबी।
  3. आधुनिक भारत — सुमित सरकार।
  4. प्राचीन भारत — प्रशांत गौरव।
  5. प्राचीन भारत — राधा कुमुद मुखर्जी।
  6. सभ्यता, संस्कृति, विज्ञान और आध्यात्मिक प्रगति — श्री आनंदमूर्ति।
  7. भारतीय मूल्य एवं सभ्यता तथा संस्कृति — स्वामी अवधेशानंद गिरी (प्रवचन)।
  8. नवभारत टाइम्स — स्पीकिंग ट्री।
  9. इंटरनेट साइट्स।

ज़रूर पढ़ें — साहित्य समाज और संस्कृति।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari, etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: हिन्दी साहित्य Tagged With: author Dr. Vidushi Sharma, Dr. Vidushi Sharma, dr. vidushi sharma articles, खजुराहो यात्रा: एक अविस्मरणीय दैवीय अनुभव - डॉ विदुषी शर्मा, डॉ विदुषी शर्मा, डॉ विदुषी शर्मा जी की रचनाएँ

मां-बाप से बेहतर आपकी खुशी कोई नहीं चाह सकता?

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मां-बाप से बेहतर आपकी खुशी कोई नहीं चाह सकता? ♦

समय आया है संभलने का,
मात-पिता की बात मानने का।
जज्बातों से काम चलेगा नहीं,
अब अनुभव काम आएगा।

मां-बाप से बेहतर आपकी खुशी कोई नहीं चाह सकता। अब समय आ गया संभल कर चलने का। संभल कर रहने का, चारों तरफ गिद्ध नजरे गड़ाए खड़े हैं। यह तुम्हें देखना है कि इनकी नजरों से खुद को कैसे सुरक्षित करें। हालांकि सभी ऐसे नहीं होते। परंतु कोई भी रिश्ता निभाने से पहले अपने माता-पिता से जरूर पूछ लेना चाहिए।उनके पास वर्षों का अनुभव होता है। तुम्हारा अच्छा- बुरा उनसे बेहतर कोई नहीं जान पाएगा और तुम्हारे लिए कौन कैसा साबित होगा उनकी पारखी नजरों से बच नहीं पाएगा। हालांकि ऐसा नहीं है कि अभिभावक मानेंगे नहीं उन्हें भी अपने बच्चों की खुशी का पता है।

बस उनका तरीका अलग है। जब तुम उनके सामने एक बेहतरीन जीवन साथी लाओगे भले ही एक बार मना कर दे पर कुछ समय के बाद मान भी जाएंगे। उन्हें समय चाहिए क्योंकि उन्हें भी तो अपनी जांच-पड़ताल करनी होती है। अगर नहीं मान रहे तो, उनके पीछे का कारण पहचानो। पूछो शायद ठीक हो अगर गलत समझ रहे हैं तो समझाए। जिसने जीवन के इतने कष्ट सहन कर आपको पाला-पोसा भला कैसे वे आपका बुरा चाहेंगे। बस वे चाहते हैं हमारे बच्चों का जीवन खराब नहीं हो। आपकी खुशी में ही उनकी खुशी है वह सिर्फ और सिर्फ आपको खुश देखना चाहते हैं।

आजकल यह बात आम हो गई है कि बच्चे आराम से बोल देते हैं यह हमारा जीवन है हम अपने हिसाब से जिएंगे। परंतु जिन्होंने आप को जन्म दिया आपको पाला-पोसा उनका भी तो कुछ हक है आप पर। भला कौन ऐसा मात-पिता है जो अपने बच्चों का जीवन बर्बाद कर देगा। उन्हें कष्ट दे देगा। हमेशा आपका भला ही चाहेंगे।

उन्होंने तुम्हें बचपन से देखा है। पढ़ा-लिखा कर अच्छा जीवन इसलिए दिया है ताकि आगे का भविष्य भी आपका सुखद रहे। आप जीवन में ऊंचाइयों तक जाओ। आपकी खुशी के लिए वह हमेशा तत्पर रहते हैं। उन्हे चाहे कितना ही कष्ट क्यों ना सहन करना पड़े उनका मकसद होता है कि आपकी खुशी सर्वप्रथम हो। उन्होंने जीवन में जो कड़वे अनुभव सहन किए हैं बस उन्हीं से आप को दूर रखना चाहते हैं।

वे नहीं चाहते उनके बच्चे जीवन में दुखद अनुभव से गुजरे और उनके जीवन में उदासी छाए। माता-पिता यही चाहते हैं हमारे बच्चे का आगे का जीवन बहुत ही खुशहाली और प्रेम-पूर्वक से बीते। इसलिए हमेशा वे एक ऐसे रिश्ते में आपको जोड़ना चाहते हैं जो आपके जीवन को सुखमय खुशहाल बनाएं। बाकी सब का समझने का नजरिया अलग-अलग होता है।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — माता- पिता बच्चे के प्रथम शिक्षक या गुरु होते है। माता-पिता बच्चे को जन्म ही नहीं देते बल्कि वे उन्हे पाल-पोषकर बड़ा करते है। माता-पिता एक बच्चे को बोलना, चलना, तथा उन्हे सभी संस्कार सिखाते है। हमे अपने माता पिता द्वारा बताये गये रास्ते पर चलना चाहिए। वे नहीं चाहते उनके बच्चे जीवन में दुखद अनुभव से गुजरे और उनके जीवन में उदासी छाए। माता-पिता यही चाहते हैं हमारे बच्चे का आगे का जीवन बहुत ही खुशहाली और प्रेम-पूर्वक से बीते। इसलिए हमेशा वे एक ऐसे रिश्ते में आपको जोड़ना चाहते हैं जो आपके जीवन को सुखमय खुशहाल बनाएं। बाकी सब का समझने का नजरिया अलग-अलग होता है।

—————

यह लेख (मां-बाप से बेहतर आपकी खुशी कोई नहीं चाह सकता?) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. ए. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।

सम्मान पत्र -180 ऑनलाइन सम्मान पत्र, चार बार BSF से सम्मानित, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सोसायटी से सम्मानित, नेहरू युवा केंद्र बाड़मेर से सम्मानित, शुभम संस्थान और विश्वास सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित, प्रज्ञा क्लासेस बाड़मेर द्वारा, आकाशवाणी से लगातार काव्य पाठ, सम्मानित, बीएसएफ में वेलफेयर के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने हेतु सम्मानित। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, प्रेसिडेंट ग्लोबल चेकर अवार्ड।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिन्दी साहित्य Tagged With: author seema ranga indra articles, essay on parents in hindi, Seema Ranga Indra, Seema Ranga Indra Article, मां-बाप से बेहतर आपकी खुशी कोई नहीं चाह सकता? - सीमा रंगा इन्द्रा, माता पिता पर निबंध, विद्यार्थी जीवन में माता-पिता का महत्व, सीमा रंगा इन्द्रा, सीमा रंगा इन्द्रा जी की रचनाएँ

« Previous Page
Next Page »

Primary Sidebar

Recent Posts

  • उन्नत बिहार, उज्ज्वल बिहार।
  • योग दिवस – 2026
  • निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।
  • बात वक्त की।
  • तिरंगा का करें सम्मान।
  • एक सफर।
  • बाल विवाह – एक अभिशाप।
  • क्या बदलाव लायेगा नया साल।
  • है तो नववर्ष।
  • मोह।
  • अपना धर्म सबसे उत्तम।
  • ठंडी व्यार।
  • रिश्तों को निभाना सीखो।
  • तंत्र, मंत्र और तत्व ज्ञान में अंतर।
  • मित्र।
  • आखिर क्यों।
  • समय।

KMSRAJ51: Motivational Speaker

https://www.youtube.com/watch?v=0XYeLGPGmII

BEST OF KMSRAJ51.COM

उन्नत बिहार, उज्ज्वल बिहार।

योग दिवस – 2026

निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।

बात वक्त की।

तिरंगा का करें सम्मान।

एक सफर।

बाल विवाह – एक अभिशाप।

क्या बदलाव लायेगा नया साल।

है तो नववर्ष।

मोह।

अपना धर्म सबसे उत्तम।

Footer

Protected by Copyscape

KMSRAJ51

DMCA.com Protection Status

Disclaimer

Copyright © 2013 - 2026 KMSRAJ51.COM - All Rights Reserved. KMSRAJ51® is a registered trademark.