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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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Sukhmangal Singh

जीवंत भाषा में ग्राही शक्ति।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जीवंत भाषा में ग्राही शक्ति। ♦

जीवंत भाषा का उत्तम लक्षण,
उसकी ग्राही का शक्ति होती है।
विशेषता के अनुरूप औरों से,
जितना अधिक ग्रहण कर लेते।

दूरगामी प्रभाव उसका प्रांजल।
हिंदी ने ग्रहण करने की दिशा में,
उदासीनता कभी नहीं दिखाई।
जब भी जैसे जरूरत पड़ी उसने,
अपनी भाषा शक्ति समृद्धि बढ़ाई।

विभिन्न भाषाओं की शब्द शैली,
यात्रा लंबी चलकर कदम बढाई।
ज्यों ज्ञान – विज्ञान विस्तृत होता,
हिंदी की शक्ति यदि और बढ़ती।

ग्रहण शीलता से संपन्नता आती,
हिंदी साहित्य के और काम बाकी।
चिंतन मनन में कमी न हो उदासी,
ज्ञान दर्पण के क्षेत्र में बढ़े देश वासी।

हिंदी साहित्य का बढ़ाया ज्ञान,
संस्कृत का अधिकांश ही दान।
शब्द शैली पद रचना व व्याकरण,
हिंदी अलंकार से अलंकृत होती।

भाषा संस्कृत संकुचित सीमा से पार,
जनता के विशाल क्षेत्र में जब आई!
भाषा की सहजता का प्रयोग प्रश्न,
जनता के अनरूप करने की पाई।

माना कि शासन प्रशासन शिक्षा का,
हिंदी करण तेजी से आगे बढ़ रहा है।
विस्तार के अनुकूल शब्द भंडार भरे
अनिवार्यता का अभाव भी खल रहा।

दुनियां ने ज्ञान विज्ञान की दौड़ में,
तेजी से विस्तार की रफ्तार बढ़ाया।
हिंदी शब्द भंडार में बहुलता मूल्य,
विरासत में पैतृक सम्पत्ति से पाया।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में — हिंदी भाषा के गुणों और महत्व को बताते हुए अन्य भाषाओं में इसकी उपयोगिता को बताया है, चाहे वो संस्कृत की भाषा को निखारने की बात हो या अन्य भाषा की। हिंदी भाषा में जो अपनापन है वो दुनिया के किसी भी अन्य भाषा में नही है।

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यह कविता (जीवंत भाषा में ग्राही शक्ति।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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Filed Under: 2021-KMSRAJ51 की कलम से, सुखमंगल सिंह जी की कविताये।, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: article by sukhmangal singh, author sukhmangal singh, Development and promotion of Hindi, hindi bhasha ki lipi, hindi national language, hindi national language of india, kavi sukhmangal singh, National language Hindi, Sukhmangal Singh, sukhmangal singh poems, कवि सुखमंगल सिंह, देवनागरी, भाषा के महत्व का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए, सुखमंगल सिंह, सुखमंगल सिंह जी की कविताये।, सुखमंगल सिंह जी की रचनाएँ, हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है, हिंदी एक जीवित भाषा है, हिंदी का महत्व, हिंदी भाषा का महत्व व रोचक तथ्य, हिंदी भाषा का स्वरूप महत्व व विशेषताएँ, हिंदी भाषा की आवश्यकता और महत्व, हिंदी भाषा के गुण और महत्व, हिंदी भाषा के महत्व, हिन्दी भाषा का महत्व, हिन्दी भाषा की उत्पत्ति और विकास

राष्ट्र भक्त बनाना होगा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ राष्ट्र भक्त बनाना होगा। ♦

रक्षा सुरक्षा का साजो सामान,
सुरक्षित शस्त्र आगामी रखना।
देश के रक्षक नौजवान हो को,
महत्वपूर्ण सहयोग करना होगा।

अस्त्र – शस्त्र विद्या की बरसा से,
बचने के लिए वंकर बनाना होगा।
आडंबर के भंवरे झाल का भी,
समूल रूप से नष्ट करना होगा।

महा पराक्रमी हिरण्याक्ष का सा,
फिर – फिर बध करना ही होगा।
जयद्रथ जैसी झूठ बोलने वाले,
को भी वैसा ही वध करना होगा।

भूखे प्यासे व्याकुल हो तो उसका,
हमें भरण – पोषण करना होगा।
कोई न भूखा नंगा रहे अपने राष्ट्र में,
विधि पूर्वक व्यवस्था करनी होगी।

देवी – देवताओं की पराक्रम गाथा,
शरणागत वत्सल को सुहाना होगा।
गृहस्थ आश्रम में रहकर सभी को,
गृहस्थ – धर्म अनुसार रहना होगा।

बुद्धिमानों को आवश्यकता अनुसार,
घर और राष्ट्र की सेवा करनी होगी।
सारी समाज को भी आगे आकर,
राष्ट्र भक्ति में योगदान करनी होगी।

गुरुकुल के नियमों में ही अब,
सत्संगी तुमको भी चलना होगा।
शास्त्र विद्या की यादें साथ – साथ,
शस्त्र विद्या का ध्यान करना होगा।

अर्जुन सा श्री कृष्ण का उपदेश,
प्रजाओं ने प्रचार करना होगा।
एकलव्य के धनुर्विद्या का ज्ञान,
शिक्षा साधारण को देनी होगी।

धर्म के अनुसार करता का ध्यान,
सारी समाज को करना होगा।
धर्म के अंदर अनादर करता का,
त्याग समाज को करना होगा।

तीर्थ का सेवन कराकर उसका,
अंतकरण से शुद्ध कराना होगा।
तत्व ज्ञानियों से शिक्षा का ज्ञान,
पास उनके जाकर लेना होगा।

पवित्र कथाओं का चरण बद्ध,
प्रचार – प्रसार भी करना होगा।
प्राकृतिक कोसी बचने के उपाय,
यज्ञ अनुष्ठान सब करना होगा।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – इस कविता में कवि ने बताया है हम सभी को मिलकर ये प्रयास करना है की जो भूखे प्यासे व्याकुल हो तो उसका हमें भरण – पोषण करना होगा। कोई न भूखा नंगा रहे अपने राष्ट्र में विधि पूर्वक व्यवस्था करनी होगी। गृहस्थ आश्रम में रहकर सभी को गृहस्थ – धर्म अनुसार रहना होगा। शास्त्र विद्या के साथ-साथ शस्त्र विद्या का ध्यान करना होगा।

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यह कविता (राष्ट्र भक्त बनाना होगा।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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गुरु की महत्ता और गुरु पूर्णिमा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ गुरु की महत्ता और गुरु पूर्णिमा। ♦

भारतीय समाज में मनाए जाने वाले पूज्यनीय पुण्य देने वाले भारत के सभी त्योहार होते हैं। भारत के अलग-अलग राज्यों में यह त्यौहार अलग-अलग रूप में भी मनाए जाते हैं।

जो किसी न किसी रूप में हमारे ईश्वर से साक्षात्कार कराने वाले होते हैं। जो हमारे आसपास की दुनिया में फैल ज्ञान की शक्ति को संतुलित रखने में मददगार होते हैं। विविध सभ्यताओं का ज्ञान कराते हैं। मानव जीवन को शुभम रूप से चलाने के लिए उमंग और उत्साह भरते हैं। सत्य की खोज, शोध – खोज का अवसर प्रदान करते हैं।

उन्हें आने वाले त्यौहारों में से एक आषाढ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा के दिन जनमानस अलग-अलग समूहों में अपने – अपने लौकिक जगत में व्याप्त गुरुओं के शरण में जाकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

आशीर्वाद प्राप्त करने के उपरांत वह अपने को धन्य मानते हैं। सच में अलौकिक जगत की उत्पत्ति करता संरक्षक रक्षक भगवान भोलेनाथ, भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी हैं जो हमारे सच्चे सर्वसंपन्न परिपूर्ण गुरु हैं।

सब के मालिक हैं और जगत के, जगत को चलाने वाले हैं। फिर भी मानव लौकिक जगत में मनुष्य तात्कालिक लाभ की कामना से गुरु की खोज में लगा रहता है।

जिस ईश्वर ने ही जगत में भेजा है, जो हमारे आप जैसे हैं उन्होंने तब और तपस्या के बल पर अपने को सिद्ध करने का प्रयत्न किया है। उन्हें परम उत्तम मानकर गुरु मान लेता है। मनुष्य अपने कर्मों के अनुसार सुख – दु :ख प्राप्त करता है।

गुरु माता है और गुरु पिता है।
गुरु आचार्य महान ज्ञान वान है।
अध्यापक ब हु तेरी जगत में,
सद्गुरु शकल जहां विद्वान है।

•» ब्रह्मा गुरु है! जो जगत वासियों का व्यक्तित्व निर्माण करने वाले हैं। संसार की स्थित उत्पत्ति और प्रलय के हेतु हैं।

•» विष्णु जी गुरु हैं! वह शिष्य की रक्षा करते हैं उसके अंदर की नकारात्मकता को दूर करते हैं और उसके अवगुणों को दूर करके भगाते हैं। भगवान विष्णु किसी कारण बस भूले भटके शिष्य को भी सत मार्ग पर लाकर सहज रूप से स्वीकार कर लेते हैं। भगवान विष्णु के प्रति प्रेम रखने वाला मनुष्य बैकुंठधाम को जाता है। वह जन्म – मृत्यु के भय से दूर रहता है क्योंकि भगवान जन्म मृत्यु के भय का नाश करने वाले हैं! भगवान विष्णु के भक्त का भक्ति प्रवाह बढ़ने लगता है।

•» शंकर जी यानी महादेव गुरु! महादेव जी चराचर के जगतगुरु है। वैर रहित, शांति मूर्ति, आत्माराम और जगत के परम आराध्य देव हैं। घमंडी धर्म की मर्यादा को तोड़ने वाले का विनाश करने वाले हैं। श्री शंकर जी की घटक जटाओं में गंगा जी सुशोभित होती हैं –

गंगा – यमुना के संगम में,
करता जो अज्ञात स्नान!
प्रसन्नता से परिपूर्ण होकर
पहुंचता अपनी-अपनी धाम।

गुरु पूर्णिमा के दिन से वर्षा ऋतु का काल प्रारंभ माना जाता है वर्षा काल में साधु संत 4 माह तक भ्रमण करके जगत उत्थान के लिए संस्कृति रक्षा और सभ्यता के लिए, धर्म, ज्ञान का प्रचार – प्रसार करते हैं। ज्ञानार्जन के लिए यह चातुर्मास उपयुक्त माना जाता है।

गर्मी और उमस से भरी जिंदगी को शीतलता प्रदान होती है। चारों तरफ हरियाली का वातावरण रहता है मानव मन जो, मानव मन को आह्लादित कर लेता है।

आषाढ़ की पूर्णिमा के ही दिन कृष्ण द्वैपायन व्यास जी का जन्म हुआ था। जिन्होंने महाभारत की रचना की थी। कृष्ण द्वैपायन वेद व्यास जी महाभारत के साथ – साथ वेद – पुराण वेदांत – दर्शन ( ब्रह्म सूत्र) शारीरिक सूत्र, योग शास्त्र सहित अनेक उत्कृष्ट कृतियों की रचना की है।

आज ही के दिन भगवान बुद्ध ने काशी में आकर काशी के प्रमुख संस्थान सारनाथ में यहां सारंग नाथ जी, जो भगवान शंकर के साले कहे जाते हैं उनका मंदिर है उसी के पास में अपने पांच शिष्यों को प्रथम उपदेश दिया था।

शंकर जी ने आज ही के दिन आषाढ़ मास की पूर्णिमा को सप्त ऋषियों को योग और तत्वज्ञान की दीक्षा दी थी। सप्त ऋषियों ने भारत सहित दुनिया में फैल कर विश्व कल्याण के लिए योग दर्शन का बयान संसार को दिया।

गुरु का अर्थ होता है कि वह अंधकार से प्रकाश की तरफ ले जाए, आत्म ज्योति जगाने का काम करें, भक्तों के अंदर आत्मज्योति का बोध कराए।

गुरु की महत्ता को सभी ने स्वीकारा है सभी शास्त्र गुरु तत्व की प्रशंसा करते हैं। गुरु प्रशंसा के योग्य होता है।

स्वामी विवेकानंद जी महाराज के गुरु रामकृष्ण परमहंस जी थे। जिन्होंने एक साधारण बालक को दुनिया का सबसे महान दार्शनिक ज्ञाता और बुद्धिमान बना दिया।

अयोध्या नरेश चक्रवर्ती महाराजा दशरथ के गुरु वशिष्ठ जी के जिनकी सलाह के बिना अयोध्या के दरबार का कोई भी कार्य नहीं होता था। कोई भी कार्य करने के पहले अयोध्या में गुरु वशिष्ठ से आज्ञा लेकर ही किया जाता था।

गुरु का योग्य होना बहुत आवश्यक है। गुरु अपने शिष्य को उपदेश आत्मक वाणी से लक्ष्य की लालसा को निर्मल करने का मार्गदर्शक होता है। गुरु का कर्तव्य है कि वह अपने शिष्य में सद्विद्या का संचार, संचारित करने का तन – मन से प्रयत्न करें।

महाराज मनु ने भी गुरु को महान कहा है उन्होंने गुरु की सेवा करने से ब्रह्म लोक की प्राप्ति होती है बताया। आचार्य को देवता मानने को उन्होंने कहा।

भक्ति काल में भक्त और संत एक स्वर से मुक्त कंठ से गुरु की महिमा और प्रशंसा के गीत गान करते रहते थे।

हिंदी साहित्य गौरव प्रदान करने वाले श्रृंगार रस के कवि सूरदास जी को उनके गुरु वल्लभाचार्य जी के द्वारा यह कहा जाना कि तुम जगत में, घिघियाते ही रहोगे? कवि सूरदास जी गुरु के आशीर्वाद को लेकर श्रृंगार रस के महान कवि हुए आज तक श्रृंगार रस का ऐसा कोई कवि शायद ही धरती पर आया हो।

गुरु की आवश्यकता अलौकिक जगत में हमेशा होती रहती है। अलग-अलग चीजों के ज्ञान के लिए अलग-अलग गुरु की आवश्यकता होती है, जो जीवन में उस वस्तु से संबंधित ज्ञान दे सके सारा जीवन सीखने के लिए ही होता है।

समस्त 12 बारीकियों के, उसको सीखने के लिए मनुष्य को अच्छे गुरु की आवश्यकता होती है। अच्छा गुरु वह होता है जो उस विषय में पारंगत होता है। गुरु शिष्य के बीच बहुत गहरा संबंध होता है। गुरु को कभी भी कच्चा नहीं होना चाहिए और यह गुरु कच्चा है तो उसे शिष्य को गुरु नहीं बनाना चाहिए, इसीलिए शास्त्र सद्गुरु बनाने का उपदेश देता है।

मनुष्य को हमेशा सच्चे गुरु की तलाश करते रहना चाहिए। आंख मूंद कर किसी को अपना गुरु नहीं बनाना चाहिए। मानव जीवन में पग – पग पर गुरु की आवश्यकता होती है। जिससे हम थोड़ा सा भी ज्ञान प्राप्त करते हैं, वह भी गुरु ही होता है। स्कूल कॉलेज में हमें पढ़ाने वाला अध्यापक ही गुरु होता है।

किसी वस्तु की विशेष जानकारी देने वाला व्यक्ति भी गुरु होता है। भारतीय हाउस गुरु की हो रही है जो जीवन के चौथे पल में आवश्यकता होती है। आध्यात्मिक ज्ञान और ईश्वर को प्राप्त कराने वाले गुरु की आवश्यकता पर यहां बल दिया जा रहा है। कहा गया है-

गुरु करिए जांच,
पानी पीजिए छान।

विशुद्ध परंपरा का पालन करते हुए सभ्यता – संस्कृति और समाज का ध्यान रखते हुए गुरु दीक्षा ग्रहण करनी चाहिए।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से लेख के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – इस लेख में बहुत सारे उदाहरण के माध्यम से लेखक ने विस्तार से बताया है की, समय – समय पर हर युग में गुरु के महत्व और भूमिका को उच्च स्थान प्राप्त है। जीवन में गुरु की आवश्यकता को सभी ने स्वीकार किया है। “गुरु का अर्थ होता है कि वह अंधकार से प्रकाश की तरफ ले जाए, आत्म ज्योति जगाने का काम करें, भक्तों के अंदर आत्मज्योति का बोध कराए।”

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यह लेख (गुरु की महत्ता और गुरु पूर्णिमा।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

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विश्व विख्यात प्राचीन पुरी अयोध्या।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ विश्व विख्यात प्राचीन पुरी अयोध्या। ♦

सरयू नदी के तट पर स्थित प्राचीन काल की अयोध्या,
उत्तर प्रदेश राज्य का एक प्रमुख विख्यात धाम अयोध्या।
राजा मनु के दौरान बसाई गई परम पूज्य प्रसिद्ध अयोध्या,
युद्ध के माध्यम से प्राप्त न होने वाली, पुनीत नगरी अयोध्या॥

योग प्रतीक के रूप में है अथर्ववेद कहता है अयोध्या,
रामायण के कहे अनुसार मनु जी द्वारा स्थापित है अयोध्या।
स्कन्द पुराण कथा कहती अमरावती के रूप में है अयोध्या,
हिंदू मठ मंदिर से सजी-धजी मूल रूप से अविनाशी अयोध्या॥

तीर्थकर ऋषभ नाथ जी की जन्म स्थली भी रही अयोध्या,
अजित नाथ जी दूसरे तीर्थकर का जन्म स्थान रही अयोध्या।
चौथे तीर्थकर अभिनन्दन नाथ जी की भी सम्मानित अयोध्या,
सुमित नाथ जी का जन्म बनारस धर्म कर्म प्रेरित अयोध्या॥

जैन वैदिक मतो के प्रवर्तक भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या,
चौदहवें तीर्थकर अनंत नाथ जी की आराध्य देव अयोध्या।
कोशल जनपद की पहले राजधानी रही यह थी अयोध्या,
सूर्यवंशी प्रतापी क्षत्रपों की प्रसिद्ध राजधानी रही अयोध्या॥

भगवान की जन्म स्थली विश्व विदित कल्याणकारी अयोध्या,
मानव सभ्यता की पहली पौराणिक काल की पूरी अयोध्या।
ऋषि मुनियों की तपोस्थली धुनि रमी है सदा सुखी अयोध्या,
कवि लेखक और पत्रकार की रचना करती रही अयोध्या॥

हनुमान गढ़ी के निकट भविष्य खिंच कनक भवन अयोध्या,
कनक भवन के सामने अवस्थित है दसरथ दरबार अयोध्या।
महावीर हनुमान जी रहते हैं यहीं गुफा में एक अयोध्या,
करते हैं जगत विदित रामजन्म भूमि – राम कोटि रक्षा अयोध्या॥

यहां न्याय प्रक्रिया से गुजरना पड़ा स्वाभाविक ही अयोध्या,
सिक्ख धर्म के लिए महत्व पूर्ण स्थान है पूज्य प्रसिद्ध अयोध्या।
यात्रा सलाहकार यहां पर गुरुनानक देव जी आए अयोध्या,
राजा रानी का संबंध कोरिया ने रहा है मूल रूप अयोध्या॥

रूस – भारत का प्राचीतम संबंध स्थापित किया अयोध्या,
भगवान बुद्ध के पूर्वजों की रचना हुई थी वही यह अयोध्या।
श्री राम नवमी, श्री जानकी नवमी, गुरूपूर्णिमा सावन झूला अयोध्या॥

चौरासी कोसी परिक्रमा क्षेत्र की प्रमुख विशेषताएं अयोध्या,
चौदह भुवन चारों दिशाओं में पूज्य प्रसिद्ध अयोध्या।
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग त्रिपुरारी की बनवाया कुश ने अयोध्या,
धूम मचाने शिव रात्रि को शिव जी आते राम की अयोध्या॥

सरयू नदी के तट पर स्थित प्राचीन काल से बसी अयोध्या,
अमरावतीपुरी सी दुनिया को अपनाती, भक्ति भाव में स्थित अयोध्या॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – इस कविता में कवि ने प्राचीन पुरी अयोध्या के गुणों और विशेषताओं का वर्णन किया है। महापुरुषों की पावन भूमि का मनोरम वर्णन किया है, जहाँ से पूरी दुनिया को ज्ञान, ध्यान, धर्म का बोध सदैव ही होता रहा। जिस भूमि पर प्राचीन समय से ही महापुरुष तपस्या करते आये है, निष्काम उपासकों की पुण्य गाथा से कण – कण सुशोभित है प्राचीन पुरी अयोध्या धाम। महाबली हनुमान जी के आराध्य की नगरी अयोध्या धाम।

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यह कविता (विश्व विख्यात प्राचीन पुरी अयोध्या।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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आता है अकेला – चार कंधे से जाता।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ आता है अकेला – चार कंधे से जाता। ♦

इंसान आता है इस धरा पर अकेला — चार कंधे से जाता।

मनुष्य धरा पर अकेला आता,
रोता हुआ खुद जन्म पाता।
जन्म जिस घर में वह लेता,
गीत गवनई वहां गाया जाता।

छठी बरही भी किया जाता,
पालन करने वाला पिता होता।
वहां ढोल मजीरा बजता पाता,
गांव में मुंह मीठा किया जाता।

बच्चे – बच्ची खुशहाली आती,
कालिया आंगन की खुल जाती।
माता उसी की दुखहर्ता होती,
चारों तरफ से बधायां मिलती।

क्रिया – कर्म समझ नहीं पाता,
कुछ दिन बाद खुद उलझ जाता।
मोह – माया में मनुष्य बध जाता,
जन्म – मरण चक्कर फंसा पाता।

आप पाप पुण्य में फंस जाता,
कंचन चक्कर, धरा में घस जाता।
जो भी मंशा लेकर मानव आता,
ठगा हुआ दुनिया में खुद पाता।

कर्म धर्म सारे समझ नहीं पाता,
उसके संग कुछ भी नहीं जाता।
जबकि मनुष्य जीवन सुंदर पाता,
यश कीर्ति धरा पर ही रह जाती।

जिस जीवन हेतु देवता तरस जाता,
उसी पाकर मनुष्य दुख लेकर आता।
जीवन चक्र में वह सुख कहां पाता,
शरण में देवताओं के जब नहीं जाता।

मुक्ति पाने की अभिलाषा लाता,
सत्कार मुंह से जाने क्यों कराता।
अपनी भूल पर अंत छटपटाता,
पाप – पुण्य कर्म समझ नहीं पाता।

झटपट अर्थार्जन में ध्यान बटाता,
पितृ – ऋण भी चुका नहीं पाता।
मृत्यु के समय सबको रुला जाता,
चार कंधों से श्मशान घाट जाता।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – बहुत भाग्य से मानव जीवन मिला है जिसके लिए देवता भी तरशते है। अपने इस अनमोल जीवन को यूँ ही नष्ट ना कर दो। अपने इस अनमोल जीवन का सार्थक प्रयोग करो। जीवन के खट्टे- मीठे उतार चढ़ाव का मधुर वर्णन किया है। अच्छे कर्म कर, जीवन का सदुपयोग कर, मानव जन्म को आनंदमय बनाएं।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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मनुस्मृति में कानून।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मनुस्मृति में कानून।  ♦

भारतवर्ष में राजा न्याय का मूल होता था।
राजा के साथ एक विद्वान और न्याय करता बैठता था।
सभा में राजा विद्वान ब्राह्मण और अनुभवी मंत्री को साथ रखता था।
राजा के साथ तीन ब्राह्मण और एक विद्वान न्याय करता बैठता था।

न्यायिक सभा में दीवानी और फौजदारी का केस चलता था।
सभा में सत्य बोलने के लिए सभी को आज्ञा दी जाती थी।

सत्य बोलने वाले को न्यायालय में जाना नहीं चाहिए।
अगर न्यायालय वह जाता है तो सत्य ही बोलना चाहिए।
झूठ बोलने वाला मनुष्य को पापी कहा जाता था।
न्यायालय में बादी और प्रतिवादी के सामने गवाही लिया जाता था।

दोनों पक्ष के गवाहों को न्याय करता एकत्रित करवाता था।
इस प्रकार वह न्यायालय में समझा-बुझाकर परीक्षा लेता था।

न्याय करता गवाहों से पूछता जो वृतांत तुम लोगों ने बातें किया,
उन बातों को तुम लोग सत्य सत्य कहो क्योंकि इस अभियोग में तुम साक्षी हो।
अपनी गवाही में जो सत्य बोलता है वह मृत्यु के बाद उत्तम स्वर्ग प्राप्त करता है।
इस लोक में अद्वितीय यस पाता और स्वयं ब्रह्मा उसका साक्षात्कार करता है।

जो मनुष्य झूठी गवाही देता है वह वरुण के बंधन में बनता है।
वह मनुष्य 100 जन्मों तक दुख पाता है।

इसलिए मनुष्य को सत्य साक्षी गवाही देनी चाहिए।
सत्यता से गवाही देने वाला पवित्र होता है।
सत्यता से उसका यश वृद्धि होती है।
सभा में उपस्थित गवाही देनी पढ़ती है।

साक्षी देने वाले को सत्य बोलना चाहिए।
जीव का साक्षी स्वयं जीव है, जीव के शरण में स्वयं जीव है।
जीव मनुष्य का परम साक्षी है, उसका निरादर नहीं करना चाहिए।

जबकि पापी अपने मन में विचार करता है कि हमें कोई नहीं देखता।
लेकिन देवता उसको और उसके ह्रदय के भाव को स्पष्ट देखते हैं।
देहधारी मनुष्यों के कर्मों को यह लोग स्वयं देखते हैं-
आकाश पृथ्वी जल हृदय चंद्रमा सूर्य अधिनियम बायो-
रात्रि और दोनों को धूल और न्याय।

न्याय किया जाए इसके लिए सभा में आगे और समझाया जाता था।
जो पापी मनुष्य न्याय करता के इस प्रश्न का भी झूठ उत्तर देता है,
वह सीधे नर्क के पूर्व अंधकार में ठोकर खाता है।

पहले गवाहों को सभा मध्य समझाया जाता था।
फिर भी गवाह झूठी गवाही देता तो उसे देश निकाला जाता था।
राजा वेद पढ़ने वाले विद्यार्थी व शिल्पकार और भांड साक्षी देने से बरी रहते थे।
राज नियम कठोर और स्पष्ट हुआ करते थे।

उपद्रव चोरी बेबी चार्ट बदनामी करने,
मारपीट और अव्यवस्था में फौजदारी के,
अभियोग में साक्षी की योग्यता के नियम कठोर होते थे।

सभा में नियम का पालन करने के लिए आदेश दिए जाते थे।
मनुस्मृति में कितनी है, कानूनों को 18 भागों में बांटा गया है।
सभी कानूनों का पालन कठोरता से कराया जाता था।

मारपीट, बदनामी करना, चोरी – डाका और उपद्रो अथवा हो व्यभिचार।
जुआ खेलना और बाजी लगाना, फौजदारी कानून में इसे लिया जाता।

ऋण, धरोहर, किसी की संपत्ति के स्वामी हुए बिना उसे बेचना,
दान का फेर लेना, वेतन ना देना, प्रतिज्ञा का पालन न करना,
बिक्री और खरीद की हुई वस्तु का लौटाना।
स्वामी और सेवक में झगड़ा होना।
सीमा के संबंध में झगड़ा होना।

पति और पत्नी के कर्तव्य, उत्तराधिकार पाना।
यार सब दीवाने के मुकदमे दर्ज होते थे।

प्राचीन काल में बनाए गए नियम और कानून आज के नियम और कानून में कुछ समानता के साथ आज का नियम बहुत व्यापक हो गया है फर्क केवल इतना है कि प्राचीन काल में जो नियम बनाए जाते थे, उनका कड़ाई से पालन किया जाता था।

आज जो नियम है उनमें पारदर्शिता तो है परंतु कुछ लोग न्याय पाने के लिए अपना पूरा जीवन खो देते हैं और उनकी अगली पीढ़ी भी न्याय के लिए न्यायालय के दरवाजे खटखटा रहता है।

न्यायपालिका पर जनता का पूरा विश्वास होता है। न्यायपालिका के आदेशों का पालन शासन और प्रशासन करता कराता है।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, लेख के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – इस लेख में कवि ने मनुस्मृति में जो कानून था उसे विस्तार से बताया है। प्राचीन काल में बनाए गए नियम और कानून आज के नियम और कानून में कुछ समानता के साथ आज का नियम बहुत व्यापक हो गया है फर्क केवल इतना है कि प्राचीन काल में जो नियम बनाए जाते थे, उनका कड़ाई से पालन किया जाता था। ” आज जो नियम है उनमें पारदर्शिता तो है परंतु कुछ लोग न्याय पाने के लिए अपना पूरा जीवन खो देते हैं और उनकी अगली पीढ़ी भी न्याय के लिए न्यायालय के दरवाजे खटखटा रहता है। “

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यह लेख (मनुस्मृति में कानून।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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धर्म की उन्नति कैसे होगी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ धर्म की उन्नति कैसे होगी। ♦

लिखी बहुत रचनाएं ‘मंगल,’
बहुत लिखा है तभी बिहार।
लिखने को तो बहुत कुछ पर,
लिखो लोक में जय जय कार।

सोचा कि मनुष्य धर्म में उन्नत करें,
पर इच्छानुसार वह करता नहीं।
फिर उसको सत्य पथ पर कैसे लाऊं,
धर्म पथ का उपदेश कहां जा सुनाउं।

लोगों के लिए धर्मों पदेश छपवाया,
नियम संयम का बड़ा पाठ पढ़ाया।
दूर-दूर तक धर्मों का प्रचार कराया,
प्रचार से भलाई का मार्ग दिखाया।

सड़क किनारे नए ग्रोथ के वृक्ष लगाया,
पशुपालन की बड़ी योजना लाया।
शहर नगर सड़कों का जाल बिछाया,
धर्म स्थलों का पुनरुद्धार कराया।

सन्यासी और गृहस्थ को यत्न बताया,
भिन्न-भिन्न पथ के हित का ध्यान किया।
गरीब प्रजा को उसका सम्मान दिया,
गांव गरीब तक विद्युत प्रबंध कराया।

धर्म धारण करने की पूर्ण कला जानू ,
दया दान सत्य और पवित्रता को मानू।
उपकार और भलाई से उन्नति होती,
निंदा लालच पर धन संग्रह अवनति देती।

मनुष्य में धर्म की उन्नत दो तरह से होती,
स्थिर नियम उत्तेजित धर्म विचार करा दी।
दोनों भागों में कठोर नियम ठीक नहीं होता,
हृदय को उत्तेजित करना प्रभावित होता।

पशुओं के बध निषेध का नियम बना लूंगा,
सूर्य चंद्रमा जब तक हैं पालन करवा लूंगा।
इस पथ पर चलने वाले लोक परलोक में सुख पाते हैं,
दया दान सत्य पवित्रता धर्म की उन्नति कराते हैं।

सुख मंगल देश में सुख शांति रहे ऐसा गीत सुनाते हैं,
देश के कोने-कोने से लोगों को आपस में मिलाते हैं।
सतरंगी किरण की आभा जंगल – जंगल फैलाते हैं,
विश्व बंधुत्व के नारे से विश्व चलेगा यही बताते हैं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – इस कविता में कवि ने बताया है की कितनी बड़ी विडम्बना है की इंसान भौतिक उन्नति तो खूब कर रहा है लेकिन धर्म की प्रगति कैसे होगी, इस बारे में कोई क्यों नहीं बोलता? धर्म की उन्नति न करने के कारण इंसान संस्कार, संस्कृति, आदर, सत्कार में पिछड़ जाता है। उसके अंदर दया, करुणा, प्रेम, श्रद्धा दूर – दूर तक नहीं होता। हम सभी को धर्म की उन्नति कैसे हो? इस बारे में सोचना है, और हम सभी को मिलकर धर्म की उन्नति करना हैं।

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यह कविता (धर्म की उन्नति कैसे होगी।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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काशी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी।

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♦ काशी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी। ♦

काशी आदि कालीन साहित्य नगरी है। प्रधानमंत्री जी बाबतपुर हवाई अड्डे पर 11:05 पर पहुंचने पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी सहित तमाम स्वागत कर रहे। उनसे मिलने के उपरांत काशी हिंदू विश्वविद्यालय सभा स्थल पर समय 11:15 बजे पहुंचे।
काशी सभा स्थल पहुंच गए।
भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी अपने काशी संसदीय क्षेत्र में।

कोरोना प्रो o काल का पालन किया। सभा स्थल पर लोग हैं।
प्रधानमंत्री का स्वागत मंच पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने किया। उन्हें राम नाम दुपट्टा दिया।
योगी बोल रहे थे प्रधानमंत्री का स्वागत किया।
योजनाएं चलेगी। पार्टी के सभी पदाधिकारी जिला तथा महानगर विश्व में भारत की संस्कृति सभ्यता और संस्कार को प्रधान मंत्री जी ने आगे बढ़ाया।
आदरणीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में काशी में जो नई पहचान दी है।

काशी में प्रधानमंत्री योजनाओं का उद्घाटन करेंगे और कई योजनाओं का शिलान्यास करने का भी काम किया जाएगा।
काशी वास्तव में काफी उन्नति की है। इसका विकास बहुत हुआ है। पिछले 70 सालों में केवल कैंट स्टेशन बना जबकि यहां से पंडित कमला पति त्रिपाठी आदि कई केंद्रीय मंत्री दिया। राज्य के उप सभापति और कृषि मंत्री श्याम लाल यादव जी को काशी ने दिया था इसके अलावा डॉक्टर संपूर्णानंद जी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं, काशी ने अपने क्षेत्र से दर्जनों राज्य और मंत्री भी रहे परंतु जो उन लोगों से वह नहीं कर सका जिसकी काशी की जनता चाहती थी। जो विकास नहीं किया जा सका उसे गुजरात से आए हुए काशी के लाल आदरणीय नरेंद्र दास नरेंद्र मोदी जी ने कर दिखाया।

नरेंद्र मोदी जी की माता काशी में प्राय: स्नान करने आती और काशी विश्वनाथ का दर्शन तथा अन्य देवी-देवताओं का लगातार दर्शन और पूजन किया करती थीं।
ऐसा लगता है कि उनकी छाप आदरणीय नरेंद्र मोदी जी के ऊपर विशेष रूप से पड़ी थी।

आज काशी में क्या होगा देखे –

कुल 78 परियोजनाओं का उद्घाटन, परियोजनाओं का लोकार्पण आदरणीय नरेंद्र मोदी जी करेंगे।
लगभग डेढ़ हजार करोड़ रुपए की परियोजनाओं का उद्घाटन
उद्घाटन किया-
आदरणीय नरेंद्र मोदी जी ने एक सफेद तकनीकी से बटन दबाकर उद्घाटन किया।

उन परियोजनाओं में रुद्राक्ष का भी उद्घाटन है। रुद्राक्ष सिगरा क्षेत्र में नगर निगम के पास भारत जापान की मैत्री का प्रमुख परियोजना है जो प्रधानमंत्री और जापान के शिंजो आबे जी की विचार विमर्श के उपरांत बनाने का योजना बना था जब जापान के प्रधानमंत्री जी भारत आए थे और गंगा में नौका पर नौका विहार भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के साथ उसी समय यह योजना बनाई गई थी और आज वह पूरी हो रही है रुद्राक्ष का छत शिवलिंग के तरह दिखाई देता है।

आज होने वाले शिलान्यास और प्रस्तावित योजनाएं इस प्रकार हैं।

  • केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एवं तकनीकी संस्थान द्वारा सेंटर फॉर स्क्रीन एवं एक बनी कल सपोर्ट का निर्माण जिसकी लागत 40 दशमलव 10 करोड़ है।
  • आईटीआई मनगांव का निर्माण 14.16 करोड़ का है।
  • राजघाट प्राथमिक विद्यालय का पुनर्निर्माण दोष 2.77 करोड़ लागत का है।
  • वाराणसी में ट्रांस बरुआ क्षेत्र में वाटर सप्लाई परियोजनाओं का स्काडा ऑटोमेशन 19.50 करोड़ का है।
    Water treatment plant Valupur.
  • वाराणसी नगर के वरुणा क्षेत्र में पेयजल संचालन के लिए संबंधित आवश्यक योजना 7.41 करोड़ में।
  • वाराणसी नगर के मोहन कटरा कोनिया घाट क्षेत्र के अंतर्गत ट्रेंचलेस विधि से सीवर लाइन बिछाने एवं तक संबंधित कार्य में 15.3 करोड़ रुपए।
  • घाट पंपिंग स्टेशन सीवेज पंपिंग स्टेशन एसटीपी पर इस कांडा ऑटोमेशन एवं ऑनलाइन इन फॉरेन मॉनिटरिंग सिस्टम का निर्माण 9 दशमलव 64 करोड़ है।
  • कोनिया में बम मेन पंपिंग स्टेशन 0.8 मेगावाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट एवं वृद्ध कन्वेंशन की स्थापना 5.89 करोड़ रुपए।
  • मुकीम गंज एवं चौधरी क्षेत्र में सीवर लाइन बिछाने से संबंधित कार्य 2.83 करोड़ रुपए।
  • लहरतारा चौकाघाट फ्लाईओवर के नीचे अर्बन प्लेसमेकिंग का कार्य 8.50 करोड़ रुपए।
  • कारखियाओं औद्योगिक क्षेत्र में आम व वेजिटेबल इंटीग्रेटेड पंप हाउस का निर्माण 15.78 करोड़ रुपए।
  • पुलिस लाइन वाराणसी में ट्रांजिट हास्टल दो ब्लॉक का निर्माण व आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन सेक्टर इकाई वाराणसी के कार्यालय भवन का निर्माण 26 दशमलव 70 करोड़ रुपए।
  • राइफल एवं पिस्टल शूटिंग रेंज का निर्माण 5.04 करोड़ रुपए।
  • 152.092 किलोमीटर के 47 ग्रामीण संपर्क मार्ग की मरम्मत और चौड़ीकरण 111.26 करोड़ रुपए लगभग।
  • जल जीवन मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 183 करोड़ हर घर नल से जल योजना का कार्यक्रम 428 दशमलव ₹540000000/ ।

इसके अतिरिक्त लोकार्पण के लिए प्रस्तावित परियोजनाएं

  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र रुद्राक्ष का निर्माण।
  • गोदौलिया पर मल्टी लेबल टू व्हीलर पार्किंग का निर्माण।
  • वाराणसी शहर में पुरानी सीवर लाइन का सीआईपीपी लाइनिंग द्वारा जीर्णोद्धार।
  • वाराणसी शहर में सीवर जीर्णोद्धार कार्यक्रम।
  • शहर के छह मुख्य स्थानों पर ऑडियो विजुअल बी एल ई डी स्कीम वाराणसी शहर के 4 पार्क का सौंदर्यीकरण।
  • वाराणसी में सौ बेड का निर्माण।
  • पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला चिकित्सालय पांडेपुर में 50 वार्ड एम सी एच का निर्माण।
  • बीएचयू में रीजनल इंस्टीट्यूट आफ पैथोलॉजी का निर्माण।
  • श्री लाल बहादुर शास्त्री चिकित्सालय रामनगर में आवासीय भवन का निर्माण।
  • 14 विभिन्न स्थानों अस्पतालों तथा स्वास्थ्य केंद्रों में सी एस ए ऑक्सीजन जनरेशन आदि।

प्रधानमंत्री जी का उद्बोधन काशी हिंदू विश्वविद्यालय से…

प्रधानमंत्री जी अपना उद्बोधन काशी हिंदू विश्वविद्यालय से कर रहे हैं, उन्होंने भारत माता की जय का नारा लगवाया, तदुपरांत हर हर महादेव के नारे से पूरा सभा, गूंज द्वारा किए जाने से पूरे बनारस में हर हर महादेव के नारे की आवाज सुनाई देने लगी।

उन्होंने भोलेनाथ और माता अन्नपूर्णा के चरणों में शीश झुका कर नमन किया। मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए सामने सभा के बैठे हुए लोगों को धन्यवाद दिया।

आपने कहा कि बनारस के विकास के लिए जो कुछ भी हो रहा है, वह सब कुछ महादेव के आशीर्वाद और बनारस की जनता के प्रयास से ही जारी है। मुश्किल समय में भी काशी ने दिखा दिया है जो झुकता नहीं है वह थकता नहीं है।

कोरोना काल हम सभी के लिए मानव जांच के लिए बहुत मुश्किल की घड़ी रही है। पूरी ताकत के साथ हम सभी के ऊपर हमला किया परंतु देश का सबसे बड़ा प्रदेश उत्तर प्रदेश की आबादी दर्जनों देशों से भी ज्यादा है, वहां भी यूपी ने महामारी को फैलने से रोकने में सक्षम है। यह 100 साल में दुनिया पर आई सबसे बड़ी महामारी है। उत्तर प्रदेश में जो कुछ किया हुआ है बहुत ही सराहनीय और उल्लेखनीय है।

मैं लंबे समय के बाद काशी में आया हूं। प्रधानमंत्री जी ने कहा कि मैं काशी में कोरोना काल में जिसको भी आधी रात को भी फोन किया, उसे देखा कि वह मोर्चे पर तैनात मिलता था। यही कारण रहा है कि आज यूपी में हालत संभलने लगे। आज उत्तर प्रदेश कोरोना की टेस्टिंग करने वाला सबसे बड़ा प्रदेश और वैक्सीनेशन करने वाला भी यह सबसे बड़ा राज्य रहा है।

अब गरीबी अमीरी की लड़ाई खत्म हो रही है। जो इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है वह भविष्य में भी काफी कल्याणकारी होगा।

बनारस में 14 ऑक्सीजन प्लांट का लोकार्पण।

बहुत सारे मेडिकल कॉलेजों का निर्माण उत्तर प्रदेश में किया जा रहा है। आज बनारस में 14 ऑक्सीजन प्लांट का लोकार्पण किया गया।
बच्चों तथा माताओं को विशेष तरह से ऑक्सीजन देने तथा उनकी व्यवस्था स्वास्थ्य सुविधाओं का ध्यान रखा गया। स्वास्थ्य सुविधा के लिए 23000 करोड का विशेष पैकेज दिया गया है।

काशी नगरी पूर्वांचल का बहुत बड़ा मेडिकल हब बन रहा है। जिन लोगों को इलाज के लिए दिल्ली और मुंबई जाना पड़ता था वह व्यवस्था अब काशी में उपलब्ध है।

महिलाओं और बच्चों के लिए नए हॉस्पिटल काशी को मिल रहा है 100 बेड काशी हिंदू विश्वविद्यालय में और 50 जिला अस्पताल को दिया जा रहा है जिसका लोकार्पण आज किया जाएगा।

आपने बताया कि कुछ ही देर में मैं बीएचयू में बनने वाले 100 बेड के अस्पताल को देखने भी जाने वाला हूं। काशी अपने मौलिक स्थान को बनाए हुए विकास के पथ पर अग्रसर है।

यह जल विद्युत व्यवस्था रेलवे पर्यटन तथा सड़कों गलियों का निर्माण घाटों का निर्माण सहित तमाम कार्य वाराणसी में किए जा रहे हैं।

नए प्रोजेक्ट नए संस्थान काशी के विकास गाथा को और आगे बढ़ा रहे हैं। काशी में ही दिल्ली वाला इलाज उपलब्ध होगा। आंखों की भी इलाज वाराणसी में हो सकेगा जो आज तक नहीं होता था।

गोदौलिया में मल्टी लेवल पार्किंग।

गोदौलिया में मल्टी level पार्किंग बनने से काफी सुविधा लोगों को मिलेगी।

लहरतारा से चौकाघाट बहुत जल्द ही यह परियोजना पूरी हो जाएगी। ग्रामीण क्षेत्र में हर घर में जल की योजना सरकारी चल रहा है, जो बहुत तेजी से चलाया जा रहा है बहुत अच्छी व्यवस्थाएं देने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।

शहर के 700 से ज्यादा स्थानों पर एडवांस कैमरा लगाने का भी काम जारी है। घाटों पर उनका इंफॉर्मेशन ब्रांच लगाए जा रहे हैं। काशी की कलाओं की जानकारी बड़ी स्क्रीनों के माध्यम से दिया जाएगा जो गंगा जी के घाट पर लगाया जाएगा।

जिससे सभी को सही तरह से जानकारी मिल सके। काशी विश्वनाथ में होने वाली आरती तथा गंगा घाट पर होने वाली आरती को पूरे विश्व तक उपलब्ध हो सके इसकी पूरी व्यवस्था की गई है।

मां गंगा मैं चलने वाली नाव को सीएनजी में बदला जा रहा है जिससे प्रदूषण भी कम हो, ना के बराबर हो और खर्च भी कम हो।

रुद्राक्ष सेंटर…

काशी से विश्वस्तरीय संगीतकार, कलाकार जो विश्व स्तर पर उत्कृष्ट स्थान प्राप्त कर रहे हैं परंतु आज तक लोगों ने काशी के कलाकारों को उस तरह का माहौल नहीं दिया गया, आज रुद्राक्ष सेंटर हो जाने से उनको विश्वस्तरीय वह सुविधा काशी में ही उपलब्ध कराए जाने की योजना का आज उद्घाटन होने वाला है।

योगी जी के आने के बाद, योगी जी की सरकार ने इन सभी दिशाओं में काफी कार्य किया है तमाम नई सुविधाएं काशी को मिली है।

कुछ ऐसे संस्थान बनाए गए जिससे औद्योगिक विकास में बहुत मदद मिलेगी। की-पैड साइंस सेंटर के लिए घा के छात्रों को, युवाओं को विशेष रूप से प्रधानमंत्री ने बधाई दी।

मेक इन इंडिया।

कुछ साल पहले तक जिस यूपी में व्यापार कारोबार करना मुश्किल माना जाता था आज मेक इन इंडिया के मामले में उत्तरप्रदेश सबसे ज्यादा पसंद किया जाने लगा है। इसका एकमात्र कारण है योगी जी की सरकार द्वारा शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में काफी काम किया गया है।

एक्सप्रेस जो चाहे पूर्वांचल एक्सप्रेस गंगा एक्सप्रेस बुंदेलखंडी उसके बगल में मल्टीनेशनल औद्योगिक इकाइयां भी लगाई जाएंगी। जिससे यूपी का विशेष रूप से विकास होगा और उत्तर प्रदेश सहित पूर्वांचल का काफी हित साधन उपलब्ध कराया गया।

धान और गेहूं की रिकार्ड सरकारी खरीद।

इस बार धान और गेहूं की रिकार्ड सरकारी खरीद की गई है।
यहां इंटरनेशनल राय सेंटर खोला गया जो देश से ही नहीं पूरे विश्व को काम आएगा। विशेष रूप से छोटे किसान फल सब्जी का कार्य करने वालों को कृषि संबंधित किए गए उपायों से विशेष लाभ होगा।

समय अभाव के कारण मुझे भी यह सोचना पड़ रहा है कि यूपी के विकास के किन कार्यों की सराहना करूं और किन्हे मैं छोड़ दूं यह सब करना पड़ता है यद्यपि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी उत्तर प्रदेश के लिए समर्पित रूप से कार्य कर रहे हैं जो बहुत ही सराहनीय है।

योगी सरकार नहीं थी तब भी मुझे केंद्र से उतने ही प्रयास करने पड़ते थे जो आज मैं कर रहा हूं परंतु उत्तर प्रदेश में दूसरी सरकार होने की वजह से उत्तर प्रदेश में जो योजनाएं दी जाती थी उसमें रोड़ा लग जाता था।

यूपी में कानून का राज।

जितना प्रयास योगी जी बनारस के लिए कर रहे हैं उसी तरह से अलग-अलग जिलों में भी जा कर के वह विकास के लिए लगातार लगे रहते हैं। इसीलिए वह विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं आज यूपी में कानून का राज है। इसके पहले माफिया राज और आतंकवाद था परंतु आज कानून का शिकंजा है।

जिससे बहू बेटियों को जो आतंक और भय से भी जीते थे उस पर रोक लगी है। आज बहू बेटियों पर आंख उठाने वाले अपराधियों को पता है कि हम उत्तर प्रदेश में रहकर कानून से बच नहीं पाएंगे।

उत्तर प्रदेश की सरकार आज भाई भतीजावाद नहीं, बल्कि विकास मार्ग के नाम पर आगे बढ़ रही है। इसीलिए आज जो भी केंद्र द्वारा योजनाएं दी जाती हैं उसका लाभ सीधा जनता को मिला।

साथियों इस विकास की यात्रा में यूपी के हर एक नागरिकों का हाथ है आपका यह आशीर्वाद उत्तर प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर लेकर जाएगा। आपको सब आप की सबसे बड़ी इस समय आवश्यकता है कि आप कोरोना को आगे न बढ़ने दें और कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करें।

हमें कोरोना के सारे नियम कायदे का सख्ती से पालन करते रहना है और सबको वैक्सीन लगवाने और जांच करवाने के अभियान में लगे रहना है वैक्सीन जरूर लगवाना है।

हर हर महादेव करके प्रधानमंत्री जी ने अपने भाषण को समाप्त किया।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के काशी आगमन, और काशी में होने वाले विकास कार्यों का उद्घाटन की प्रक्रिया को आम बोलचाल की भाषा में प्रस्तुत किया हैं। हमें कोरोना के सारे नियम कायदे का सख्ती से पालन करते रहना है और सबको वैक्सीन लगवाने और जांच करवाने के अभियान में लगे रहना है वैक्सीन जरूर लगवाना है।

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यह लेख (काशी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें और लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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शरीर से परम तत्व प्राप्त।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शरीर से परम तत्व प्राप्त। ♦

है शरीर यह एक वृक्ष,
जीवन रूपी पक्षी जिसमें,
घोंसला बनाकर रहता।

कट जाता जब वृक्ष,
उसे छोड़ पक्षी उड़ जाता।

शरीर की दिन-रात आयु
क्षण – क्षण क्षीण है करता।

वह गूढ़ रहस्य जो जानता
परम तत्व का ज्ञान पाता।

शुभ फलों का मानव शरीर
मूल प्राप्ति आधार होता।

साधु भक्त स्वयं धैर्यवान
सत्कर्म – सदविचार करता।

अनुकूलता स्मरण की होने पर
लक्ष्य की दिशा में वह बढ़ता।

कर्म- ज्ञान और भक्ति योग,
से मन परमात्म चिंतन करता।

नियंत्रण नियम अपनाकर,
अपराधी प्रवृत्ति से बचता।

प्रकृति शरीर और सृष्टि का,
क्रमवार चिंतन जो करता।

सृष्टि चिंतन में लय भरता,
दुख बुद्धि रूपी पदार्थ छोड़।

शांति में मन जा कर रमता,
परमात्मतत्व प्राप्त करता।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – इस कविता में कवि ने बताया है की यह शरीर एक वृक्ष की तरह है, जैसे वृक्ष का जड़ जब काट दिया जाता है तब वृक्ष मुरझाकर सुख जाता हैं। वैसे ही परम तत्त्व आत्मा इस शरीर से बाहर निकल जाता है जब यह शरीर किसी काम का नहीं रहता हैं। यह शरीर मिला है, अपने आपको पहचान कर, सत्य मार्ग पर चलकर, उस महान परम तत्त्व परमात्मा से मिलन के लिए।

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यह कविता (शरीर से परम तत्व प्राप्त।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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अयोध्या में गंधर्व गान।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ अयोध्या में गंधर्व गान। ♦

हिंद हिमालय की गोद से,
ऋषि – मुनि करते हैं ध्यान।
सभी के श्री मुख से निकला,
जय जय जय श्री सीताराम।

वेद श्री, श्रीमद् भागवत महाभारत,
रामायण, गीता, औ उपनिषद,
सर्वदा प्रासंगिक रहने वाले।
अपडेट करने के खोलें ताले।

बलशाली अभिमानी सानी रावण,
घमंड मर्दक उत्तम – नरोत्तम।
आतताई नाशक है सर्वोत्तम।
मान् करते गुरुजन का पुरुषोत्तम।

ढ़क नहीं पाए अंधविश्वास उमंग।
वृहद बिचार शीलता नेक ढंग।
घर संस्कृत की परंपरा हो ध्यान।
मानव जीवन संस्कार करे कल्याण।

विशाखा अनुपमा अयोध्या धाम,
कला और संचिका होता सम्मान।
प्रथम महापुरुषों का जन्म स्थान,
चारु दिशाओं को मिलता ज्ञान।

धरा धरातल होता यज्ञ ज्ञान स्थान।
अटके भटके मिलता बिरसा ज्ञान।
सहज समान भावना को सम्मान।
फैला तीनों लोक में संगीत गान।

शहंशाह बच पर रहते विद्वान,
कोई नहीं होता अज्ञान वान।
सदा से रही अजेय अयोध्या धाम,
वही मलिन का भी करती कल्याण।

रामायण महाभारत करें उत्थान,
सत्य पर चलने वाले का कल्याण।
जीवन जीने वालों कला निधान,
गीता औ उपनिषदों में वह ज्ञान।

दशो दिशाओं पर अवध का ध्यान,
आकर देवता करते गुणगान।
तल तलातल से होता प्रभु मान,
ऋषि – गंधर्व गावत अविरल गान।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – इस कविता में कवि ने अयोध्या की पावन भूमि के गुणों और विशेषताओं का वर्णन किया है। महापुरुषों की पावन भूमि का मनोरम वर्णन किया है, यह पावन भूमि सदैव से ही आध्यात्मिकता का स्रोत रहा है, जो आज भी निष्काम उपासकों की पुण्य गाथा से कण – कण सुशोभित करता है।

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यह कविता (अयोध्या में गंधर्व गान।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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