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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिंदी कविता

बल के लिए।

Kmsraj51 की कलम से…..

Bal Ke Liye | बल के लिए।

देवभूमि की जड़, जमीन, जंगल के लिए,
नदिया, पर्वत, सेहरा, चरखा, हल के लिए।
बलखाती बेले, लहलहाती फसल के लिए,
सुखद सुरक्षित आज, सुनहरे कल के लिए।
क्यूँ ना सीना चौड़ा हो, क्यूँ ना मस्तक ऊँचा हो,
हमे चुना माँ भारती नें अपने सुहाग, आँचल के लिए।
हम प्रहरी क्यूँ ना गर्व करें, सीमा सुरक्षा बल के लिए।

सरहद से संसद तक जल और थल के लिए,
विघ्न और बाधाओं से दंगल के लिए।
शत्रुओं का दर्प-दलन ओ दहल के लिए,
हम तैयार खड़े सब अनल, गरल के लिए।
जब देश को सर की जरूरत हो,
त्यागी तेवर की जरूरत हो,
तब राष्ट्र हमारी ओर तके उस पल के लिए।
हम प्रहरी क्यूँ ना गर्व करें सीमा सुरक्षा बल के लिए।

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है – बॉर्डर ही उसका बिस्तर है, आकाश ही उसका चादर है। क्यूँ ना सीना चौड़ा हो, क्यूँ ना मस्तक ऊँचा हो, हमे चुना माँ भारती नें अपने सुहाग, आँचल के लिए। हम प्रहरी क्यूँ ना गर्व करें, सीमा सुरक्षा बल के लिए। सरहद से संसद तक जल और थल के लिए, हर प्रकार के विघ्न और बाधाओं से दंगल के लिए। शत्रुओं का दर्प-दलन ओ दहल के लिए, सदैव ही हम (सीमा सुरक्षा बल) तैयार खड़े सब अनल, गरल के लिए। जब देश को सर की जरूरत हो, त्यागी तेवर की जरूरत हो, तब राष्ट्र हमारी (सीमा सुरक्षा बल) ओर तके उस पल के लिए। हम प्रहरी क्यूँ ना गर्व करें सीमा सुरक्षा बल के लिए। जय हिन्द – जय भारत।

—•—•—•—

sk-mishra-kmsraj51.png

यह कविता (बल के लिए।) “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: चली जाती है।
  • जरूर पढ़े: अच्छा लगता है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Desh Bhakti Kavita in Hindi, Patriotic Poems in Hindi, poet shailesh kumar mishra, Shailesh Kumar Mishra, उत्साह बढ़ाने वाली कविता, जोश भर देने वाली देशभक्ति कविता, देश के जवान पर कविता, देशभक्ति कविता, देशभक्ति कविता बच्चों के लिए, देशभक्ति क्रांतिकारी कविता, देशभक्ति जोशीला कविता, देशभक्ति पर सर्वश्रेष्ठ कविताएँ, बल के लिए, बल के लिए - शैलेश कुमार मिश्र शैल, बहादुरी पर कविता, वीर जवानों पर कविता, वीरों पर कविता, शैलेश कुमार मिश्र, शैलेश कुमार मिश्र “शैल”, शैलेश कुमार मिश्र-शैल जी की कवितायें, सैनिकों पर हिंदी में देशभक्ति कविता

आन बान आउर शान बा।

Kmsraj51 की कलम से…..

Aan Baan Aur Shaan Ba | आन बान आउर शान बा।

आन बान आउर शान बा,
तिरंगा हम्मर जान बा।
मर जाईब, मिट जाईब,
इसकी खातिर दुनिया से,
भी लड़ जाईब।

सर पे कफ़न,
हाथ में कलम की धार बा।
सच्चाई, ईमानदारी,
अहिंसा हम्मर पहचान बा।

लोकतंत्र हमनी के सम्मान बा,
बसुधैव कटुंबकम,
बंधुता रग रग में बसल बा।
मिट्टी की सौंधी खुशबू
जिसका स्वाभिमान बा,
ओ कोई और नहीं,
हमर हिंदुस्तान बा।

आजादी के लिए कुर्बान,
वीरों की शहादत पर गर्व बा।
फर्ज की खातिर सभी जन,
जहां तिरंगे को कफन…
बनाने की रखते चाह बा।

उस राष्ट्र पे हमें नाज बा,
जहां गांधी, सुभाष, भगत जन्म लिए।
जान हथेली पर लिए हुए,
अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए।
उन नामों पे हम सब को गर्व बा,
आन बान आउर शान बा,
तिरंगा हम्मर जान बा।

जय हिन्द – जय भारत।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — हम सभी का शान है तिरंगा, हमे गर्व है अपने तिरंगे पर, माँ भारती की सेवा के लिए सर पे कफ़न, हाथ में कलम की धार बा। सच्चाई, ईमानदारी, अहिंसा हम सबका पहचान है। हमे गर्व है अपने लोकतंत्र पर, हम सब बसुधैव कटुंबकम की भाषा जानते है, लेकिन यदि कोई गलत नज़र वाली आँख उठाएगा तो उसका जवाब भी देना जानते है। जिस मिट्टी की सौंधी खुशबू जो मिट्टी हम सभी का स्वाभिमान बा, ओ कोई और नहीं, हमारा हिंदुस्तान बा। आजादी के लिए कुर्बान हुए अपने वीरों की शहादत पर गर्व है हमे। फर्ज की खातिर सभी जन, जहां तिरंगे को कफन… बनाने की रखते चाह वह प्यारा हमर हिंदुस्तान बा। जय हिन्द – जय भारत।

—————

यह कविता (आन बान आउर शान बा।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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सैनिक का सैनिक।

Kmsraj51 की कलम से…..

Sainik Ka Sainik | सैनिक का सैनिक।

उसके हिस्से चारदीवारी, शहर कहाँ आता है,
शब्दकोश में छुट्टी, आराम अक्षर कहाँ आता है।
दुनियाँ को सैनिक का शौर्य, त्याग तो दिखता है,
उस सैनिक के पीछे का सैनिक नजर कहाँ आता है।

जिसे जवानी कहते हैं वो उमर कहाँ आता है,
वो चार कदम वाला रोमांटिक सफर कहाँ आता है।
किस्मत में उसके मायके और ससुराल आया करती है,
उस सैनिक के हिस्से अपना घर कहाँ आता है।

उनके ख्वाबों के परिंदों को पर कहाँ आता है,
सरहद से उसकी जमीं उसका अंबर कहाँ आता है।
लोगों के दिन, दुनियाँ, तकदीर बदलते रहते हैं,
उस सैनिक के हिस्से नया कैलेंडर कहाँ आता है।

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है – बॉर्डर ही उसका बिस्तर है, आकाश ही उसका चादर है, उसके हिस्से में चारदीवारी या शहर का आराम कहाँ आता है। एक सैनिक के शब्दकोश में छुट्टी व आराम अक्षर कहाँ आता है भला। दुनियाँ को एक सैनिक का शौर्य, त्याग तो दिखता है, पर उस सैनिक के पीछे का सैनिक नजर कहाँ आता है। एक सैनिक के लिए जवानी का उमर व चार कदम वाला रोमांटिक सफर कहाँ आता है। किस्मत में उसके मायके और ससुराल आया करती है, उस सैनिक के हिस्से अपना घर कहाँ आता है, उसका घर तो पूरा देश ही है। आम लोगों के दिन, दुनियाँ, तकदीर बदलते रहते हैं, पर उस सैनिक के हिस्से नया कैलेंडर कहाँ आता है। गर्व करो अपने वीर सैनिकों पर जो बॉर्डर पर सीना ताने खड़े है हमारे सुख चैन के लिए। जय हिन्द – जय भारत।

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  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

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आज आजादी है हमको मिली तो।

Kmsraj51 की कलम से…..

Aaj Azadi Hai Hamko Mili Tho | आज आजादी है हमको मिली तो।

आज आजादी है हमको मिली तो,
दिलाई शहीदों और वीर जवानों ने।
सीमा के प्रहरी जवानों की वजह से
सुरक्षित हैं हम अपने मकानों में।

है उदगार हमारे क्या उनके खातिर?
क्या भाव और कितनी कैसी यादें हैं?
एक रस्म जान मजबूरन हर साल हम,
15 अगस्त व 26 जनवरी को मनाते हैं।

इन खेतों पर है आज हक हमारा तो,
उन शहीदों का बलिदान ये हम खाते हैं।
ये खेत, खलियान थे सब जमीदारों के,
न जाने ये बातें कैसे हम भूल जाते हैं?

था फिरंगियों का कब्जा जमीं पर हमारी,
हम तो उनकी शतरंज के मोहरे प्यादे थे।
जमीन हमारी थी और था देश भी हमारा,
पर फिर भी बने वे आकर यहां शहजादे थे।

हम काश्तकार थे महज जमीनों के,
मालिक तो वे ही असल कहलाते थे।
फसल उगाते वे हमसे थे यहां खेतों में,
फिर कच्चा माल अपने देश ले जाते थे।

भला तो हो उन बहादुर शहिद वीरों का,
जो देश के लिए बलिदान अपना चढ़ाते थे।
एक धेला न लिया था पगार का उन्होंने,
खुद कमाते थे और मेहनत का ही खाते थे।

आज हमको मिली आजादी विरासत में,
हम पगार लेकर भी काम कहां करते हैं?
लाखों के वेतन भत्ते हैं हमारे फिर भी तो,
सब्सिडी और मुफ़्त का इंतजार करते हैं।

मुफ़्तखोरी की आदत से भारत को जल्दी,
हम सबको मिलकर निजात दिलाना होगा।
आर्थिक संकट में फंसते आजाद भारत को,
हमको ही तो बरबाद होने से बचाना होगा।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जरा सोचिये जमीं भी अपनी थी देश भी अपना था फिर भी था फिरंगियों का कब्जा जमीं पर हमारी, हम तो उनकी शतरंज के मोहरे व प्यादे थे। जमीन हमारी थी और था देश भी हमारा, पर फिर भी बने वे आकर यहां शहजादे थे क्यों ? हम तो नाम मात्र के काश्तकार थे जमीनों के, मालिक तो वे ही असल कहलाते थे। फसल उगवाते वे हमसे थे यहां खेतों में और फिर कच्चा माल अपने देश ले जाते थे। गर्व करों उन बहादुर शहिद वीरों का, जो देश के लिए बलिदान अपना चढ़ाते थे। कभी भी एक धेला न लिया था पगार का उन्होंने, सदैव ही खुद कमाते थे और मेहनत का ही खाते थे। जो आज़ादी हमे विरासत में मिली है उसका सम्मान क्यों नहीं करते आज? पगार लेते है लाखों में काम ना करने के। करों संकल्प की आज से ही मुफ़्तखोरी की आदत से भारत को जल्दी, हम सबको मिलकर निजात दिलाना होगा। आर्थिक संकट में फंसते आजाद भारत को, हमको ही तो बरबाद होने से बचाना होगा।

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यह कविता (आज आजादी है हमको मिली तो।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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हो जाओ तैयार।

Kmsraj51 की कलम से…..

Ho Jao Taiyaar – हो जाओ तैयार।

दे रहा आवाज समय हमको, हो जाओ तैयार,
जीवन का राज यही है, हो जाओ तैयार।
चलो रे साथी चलो रे मेरे यार…….

मिटा दो दिल की रंजिशें,
छुआ-छूत को दूर करो।
देश से प्रेम अगर है तो जाओ तैयार,
कदम-कदम से-ऽऽ दिल को मिला लो।
लड़ने को हो तैयार, हो जाओ तैयार,
चलो रे साथी, चलो रे मेरे यार…….

जैसे मिले-ऽऽ सुर से ताल,
तालों से मिले सुर और राग।
घुल-मिल जाओ राग बनाओ,
सरगम के शोलों से आग बनाओ।
आगों से चराग जलाओ-ऽऽ
त्यागो-ऽऽ दिल के भेद, हो जाओ तैयार।
चलो रे साथी चलो रे मेरे यार…….

ये भूख हमें क्या जलायेगी,
जल – जल कर खुद मर जायेगी।
दीवाने हैं हम वतन के,
बाँधे हैं हम कफन सर पे।
हँसकर शूली चढ़ जायेगे,
झूलकर डोरी पर कह जायेगें।
आजाद वतन के हम परिंदें,
परवाज हम कर जायेंगे।
हँस – हँसकर खेल जायेगें,
कहते-कहते हम जायेगें, हो जाओ तैयार।
चलो रे साथी, चलो रे मेरे यार…….

ये युद्ध की अब बारी है,
सरहद पर मिटने की यारी है।
अपने लहू से लिख जायेगें,
जान निछावर कर जायेगें।
शोर – शराबे से हम नहीं डरते,
किसी की धमकी से नहीं झुकते।
तिरंगे की शान बढ़ायेगें,
वतन की आन बनायेगें।
कहते कहते कह जायेगें,
चलो रे साथी, चलो रे मेरे यार…….

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला – सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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यह कविता (हो जाओ तैयार।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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पहले और अब – गणतंत्र दिवस।

Kmsraj51 की कलम से…..

Earlier and Now – Republic Day – पहले और अब – गणतंत्र दिवस।

वो जमीन न रही, वो आसमां न रहा,
गणतंत्र दिवस मना रहें हैं हम।
वो गण न रहे वो तंत्र न रहा,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

संविधान हम सब पूजते हैं,
हर जन के मन में विधान न रहा।
न्याय है किताबों में हकीकत में न रहा,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

बात जब आती है अधिकारों पर,
तरिका-ए-कार न रहा।
वो मानव अधिकार न रहा,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

प्रस्तावना को उद्देशिका कहा जाता रहा,
संविधान निर्माता राष्ट्र निर्माण सजाता रहा।
संपूर्ण प्रभुता के साथ संपन्नता दिखाता रहा,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

समाजवाद, पंथनिरपेक्षता को 42वें,
संशोधन से जोड़ा गया।
लोकतंत्रात्मक जनता का शासन बताते रहे,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को हम मनाते रहे,
सामाजिक, आर्थिक न्याय की गुहार लगाते रहे।
न्यूनतम और अधिकतम आयु हमें दर्शात रहा,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

राजनीति, विचार अभिव्यक्ति बताते रहे,
अध्याय 19(1) जनमत निर्माण हमें बताते रहे।
विश्वास, धर्म उपासना का अधिकार भी बताता रहा,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

प्रतिष्ठा और अवसर की समानता भी बताता रहा,
व्यक्ति की गरिमा न रही फिर भी गिनवाता रहा।
राष्ट्र की एकता अखंडता सलामत रही,
भाई से भाई को मरवाता रहा,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

आओ हम सब सच्चाई का रूख अपनाएं,
26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाए।
हर जन में मानव व मानवीयता बनी रहे,
वो जमीन भी उजागर हो आसमां भी उजागर रहे।
जय हिन्द – जय भारत॥

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

—————

  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए; इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — आज प्रश्न है तो वह यह है कि आखिर भारत में कब पूर्ण गणतंत्र मनाया जाएगा? जब हर आदमी को उसका पूरा अधिकार मात्र कागजों में ही नहीं बल्कि असल में मिलेगा। जिन पूर्वजों ने अपना बलिदान देकर भारत को यह सपना देख कर आजाद करवाया था, कि भारत की जनता को पूर्ण गणतंत्रता प्राप्त हो। उनके दिलों पर आज क्या बीतती होगी, यदि वे किसी लोक या दुनियां से आज भारत का दृश्य देखते होंगे। वे तो अंग्रेज थे, जो भारतीयों का काम कभी भी समय पर नहीं करते थे। फिर करते भी थे तो पूरी खुशामद करवा कर ही करवाते थे। पर आज तो काम करवाने वाला भी भारतीय है और काम करने वाला भी भारतीय ही है। आज हालत उससे भी बदतर है। बिना रिश्वत या चाटुकारिता के कोई काम करने को राजी नहीं है। शायद ऐसे भारत की कल्पना तो कभी हमारे पुरखों ने न की हो।

—————

यह कविता (पहले और अब – गणतंत्र दिवस।) “विजयलक्ष्मी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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बदलता भारत।

Kmsraj51 की कलम से…..

Badalta Bharat – बदलता भारत।

बदल गया भारत, देश बदल गया,
नया दौर आने से भारत बदल गया।
इंसान ही इंसान का दुश्मन बन गया,
जो विश्वास अपनों पर था वो मिट गया।

ऐसा मंजर आया, सब कुछ बदल गया,
झूठ का बोलवाला, सत्य का पतन हो गया।
बन गए अलग-अलग दल, अपनी राजनीति चला रहे है,
सत्ता की खातिर, एक दूसरे को नीचा दिखा रहे है।

देश प्रेम और सद्भावना तो कहाँ लुप्त हो रही है,
गुनाहों और अपराधों को सरेआम बढ़ावा दिया जा रही है।
दिन दहाड़े अपहरण, धोखाधड़ी,
बेटियों की इज्जत सरे आम लूटी जा रही है,
देखकर भी सभी मौन धारण किये हुए है।

तिरंगा की शान की खातिर कितने वीरों ने बलिदान दिया,
आज वही तिरंगा शर्म से सर को झुकाए हुए है।
आजादी की खातिर हमारे वीरों ने अपने प्राण गवाएं,
आज देख भारत की दुर्दशा देख कर आँखों में आँसू भर आएं।
इंसान अपने में इतना व्यस्त हो गया,
दूसरे को अनदेखा कर अपने में ही खो गया।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — चारो तरफ आज झूठ का बोलवाला है सत्य का पतन हो गया। सभी राजनीति दल, अपनी-अपनी राजनीति चला रहे है, गरीबो व निर्दोषों की ना सुने कोई, जनता मारी-मारी फिर चहु ओर। जिस देश प्रेम और सद्भावना के लिए वीरो ने अपना बलिदान दिया वो तो कहाँ लुप्त हो गया है, गुनाहों और अपराधों को सरेआम बढ़ावा दिया जा रही है अब। दिन दहाड़े अपहरण, धोखाधड़ी, बेटियों की इज्जत सरे आम लूटी जा रही है, देखकर भी सभी मौन धारण किये हुए है क्यों? इंसान ही इंसान का दुश्मन बन बैठा है आज, जो विश्वास था अपनों पर वो मिट गया है आज।

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यह कविता (बदलता भारत।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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माँ की शिकायत।

Kmsraj51 की कलम से…..

Maa ki Shikayat – माँ की शिकायत।

साँपों का अब देश नहीं सारी दुनियां स्वीकार करे,
इधर ना अब ताके-झाँकें ना खरी कोई दीवार करे।
महारूद्र सा सीमा प्रहरी सरहद पर हुंकार रहा,
जिसकी माँ ने दूध पिलाया हो वो सीमा पार करे।

काटके गर्दन रख दूँगा सीमा-स्तंभ के ऊपर ही,
हर वार सामने से होगा मस्तक, छाती औ धर पर ही।
सन सैंतालीस, बासठ का ना भारत हमें समझना तुम,
आँख हमारी दुश्मन पर और रहते कर खंजर पर ही।
कदम बढ़ाने से पहले अंजाम का सोच विचार करे,
जिसकी माँ ने दूध…….

कायर श्रृगालों चोरी छुप के सोये शेरों को मत छेड़ो,
अपने नापाक हाथ हमारे शीश, भाल पर मत फेरो।
थप्पड़ पड़ते ही दुम दबाकर राष्ट्रसंघ भाग जाते हो,
चूहे-बिल्ली की फौज बनाकर ऐरावत को मत घेरो।
या फिर बीवी-बहनों को बेवा बनने को तैयार करे,
जिसकी माँ ने दूध…….

एक से बढ़के एक हुतात्मा खड़े हैं दिल दहलाने को,
रणचंडी बन शत्रु के घर में त्राहिमाम मचाने को।
दो हाथ दिये, दो पाँव दिये, दो आँखे भी दी लड़ने को,
सिर्फ एक ही जिंदगी क्यूँ दी भारत माँ पे लुटाने को।
यही शिकायत माँ को भी है सुत दो से प्रभु चार करे,
जिसकी माँ ने दूध पिलाया हो वो सीमा पार करे।

जय हिन्द – जय भारत।

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है – मेरे देश के वीर सैनिक, महारूद्र सा सीमा प्रहरी सरहद पर हुंकार रहा, जिसकी माँ ने दूध पिलाया हो वो सीमा पार करे। वीर सैनिको की गर्जना है – काटके गर्दन रख दूँगा सीमा-स्तंभ के ऊपर ही, हर वार सामने से होगा मस्तक, छाती औ धर पर ही। सन सैंतालीस या बासठ का ना भारत हमें समझना तुम, आँख हमारी दुश्मन पर और रहते कर खंजर पर ही। कदम बढ़ाने से पहले अंजाम का सोच विचार करलो। कायर श्रृगालों चोरी छुप के जो वार करने की आदत है तुम्हारी, ये मत भूलो व सोये शेरों को मत छेड़ो, अपने नापाक हाथ हमारे शीश, भाल पर मत फेरो। जरा सा थप्पड़ पड़ते ही दुम दबाकर राष्ट्रसंघ भाग जाते हो तुम। एक से बढ़के एक वीर हुतात्मा खड़े हैं तुम्हारे दिल दहलाने को, रणचंडी बन शत्रु के घर में त्राहिमाम मचाने को। “हे प्रभु दो हाथ दिये, दो पाँव दिये, दो आँखे भी दी लड़ने को, सिर्फ एक ही जिंदगी क्यूँ दी भारत माँ पे लुटाने को।” यही शिकायत माँ को भी है सुत दो से प्रभु चार करे, जिसकी माँ ने दूध पिलाया हो वो सीमा जरा पार करे। जय हिन्द – जय भारत।

—•—•—•—

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यह कविता (माँ की शिकायत।) “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: चली जाती है।
  • जरूर पढ़े: अच्छा लगता है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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गणतंत्र दिवस समारोह।

Kmsraj51 की कलम से…..

Republic Day Celebrations – गणतंत्र दिवस समारोह।

आओ झूमे, नाचे, जश्न मनाएं,
गणतंत्र दिवस आया है।
जिरादेई की धरती पर लिया जनम,
डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को कोटी कोटी नमन।
कलम के पुजारी ने संभाली कमान,
संविधान समिती के स्थाई अध्यक्ष बने।
देश को दिया नया संविधान।

भारत मां के सपूत प्रेम बिहारी रायजादा,
संविधान लिखने का लिया प्रण।
हर पन्ने पर नाम है अंकित,
समर्पण किया हर क्षण।
अधर में लटका हुआ था,
भारत की जनता का ख्वाब।
कई सपूत आगे आए,
ऐसे उभरे मानो खिलता हुआ गुलाब।

स्वतंत्र भारत की सांसों में,
नए जीवन का संचार किया।
ओजपूर्ण विचार धारा से,
जनता को जागृत किया।
अनेकता में एकता की भारत भूमी पर,
संविधान लाकर एकता का शंखनाद किया।

राष्ट्रभक्ति की ज्योति जलाकर,
जन – जन में प्रकाश भरे।
भारत तुम्हारा ऋणी रहेगा,
चारो ओर गुणगान करेगा।
नभ में चांद, सूरज जैसा,
हर रोज तुम्हारी यशगान करेगा।

२६ जनवरी १९५० का दिन था महान,
अंबेडकर जी ने,
राजेंद्र बाबू से हस्ताक्षर करवाई।
हर चेहरे पर आई रौनक,
नए संविधान ने समानता लाई।
बहुत नाम गुमनाम है,
सबको “भोला” का सत सत नमन।

अमर हैं आप सभी,
रचकर भारतीय संविधान।
नया संविधान लागू कर,
भारत में नया इतिहास रच दिया।
खून बहाकर आजादी पाने वाले,
हर सपूत के सपनों को सच कर दिया।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

—————

  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — 26 जनवरी 1950 ईस्वी को भारत का संविधान भारतीय संविधान की प्रस्तावना के तहत भारत में विधिवत लागू किया गया। इस दिन से भारत एक पूर्ण गणतंत्र राष्ट्र बन गया। इसलिए इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस संविधान को तैयार करने में 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन का समय लगा था। भारतीय संविधान को अपने हाथों से लिखने वाले श्री प्रेम बिहारी नारायण रायजादा जी थे। गणतंत्र दिवस समारोह महान राष्ट्रीय नेता, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती 23 जनवरी को शुरू होकर 30 जनवरी को शहीद दिवस पर समाप्‍त होने के साथ सप्ताह भर चलेगा। यह समारोह आईएनए के दिग्गजों, स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने वाले लोगों और आदिवासी समुदायों को श्रद्धांजलि होगी जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था।

—————

यह कविता (गणतंत्र दिवस समारोह।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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देश की मिट्टी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Desh ki Mitti – देश की मिट्टी।

मेरे देश मिट्टी में जन्में अनेक वीर जवान है।
कृष्ण, राम, तुलसी जैसे महापुरुषों की तपोभूमि है।

देश की मिट्टी में अनेक ऋषि, मुनियों ने जन्म लिया है।
सारी दुनियाँ में मेरा देश महान है।

सीता, सती, सावित्री ने इस धरा पर जन्म लिया।
देश की मिट्टी का तिलक लगाकर वीरों ने बलिदान दिया।

देश की मिट्टी की ख़ातिर सरहद पर बैठे सीना ताने है।
सीने पर गोली खाये दुश्मन के आगे सर न झुकाते है।

बैठे देश के रक्षक बनकर ऐसे वीरों को सलाम है।
देश की मिट्टी को महान वीर भगतसिंह।

सुभाष जैसे बलिदानियों ने अपने रक्त से सींचा है।
कल-कल करता नदियों का पानी इस मिट्टी की शान है।

वेद-पुराण, उपनिषद, गीता, रामायण,
और गुरुग्रथ साहिब मेरे देश का अभिमान है।

मेरे देश की मिट्टी पवित्र पावनी और महिमा अपरम्पार है।
देश की मिट्टी में मिला जन्म ये हमारा सौभाग्य है।

देश की मिट्टी गुण अनंत और अपार है।
देश की मिट्टी का हम करते वंदन बारम्बार है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — मेरे देश मिट्टी में जन्में अनेक वीर जवान है। यह देवो की भूमि है, यह कृष्ण, राम, तुलसी जैसे महापुरुषों की तपोभूमि है। देश की मिट्टी में अनेक ऋषि, मुनियों ने जन्म लिया है, सारी दुनियाँ में मेरा देश महान है। माता सीता, सती, सावित्री ने इस धरा पर जन्म लिया। देश की मिट्टी का तिलक लगाकर सदैव वीरों ने बलिदान दिया है। वेद-पुराण, उपनिषद, गीता, रामायण, और गुरुग्रथ साहिब मेरे देश का अभिमान है। मेरे देश की मिट्टी पवित्र पावनी और इसकी महिमा अपरम्पार है, देश की मिट्टी में मिला जन्म ये हमारा सौभाग्य है। अपने देश की मिट्टी का हम तहे दिल से करते वंदन बारम्बार है।

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यह कविता (देश की मिट्टी।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: desh bhakti poem in hindi, poonam gupta, poonam gupta poems, कवयित्री पूनम गुप्ता, देश की मिट्टी, देश की मिट्टी - पूनम गुप्ता, देश भक्ति गीत, देश-प्रेम - देश-भक्ति कविताएँ, देश-भक्ति हिंदी कविता, देशभक्ति कविताएं - देश की मिट्टी, पूनम गुप्ता, पूनम गुप्ता जी की कविताएं

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