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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिंदी कविता

दिलों की मेलजोली यही है सच्ची होली।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ दिलों की मेलजोली यही है सच्ची होली। ♦

जीवन के बयार में, उड़ रही प्रेम की बोली,
लोग हो गए सेल्फिस वेल्फिस, तंग हो गई टोली।
नहीं रहा अब नाज और नखरा, कैद हो गई बोली,
बदल रही फिज़ा, खो रही दोस्तों की खोली।
प्यार के दो मीठे बोल के लिए, तरस रही आली,
दिल से दिलों की टोली, यही है सच्ची होली,
दिलों की मेलजोली यही है सच्ची होली।

जीवन पथ पर अग्रसर संघर्ष रूपी पथिक को,
न खाने की फुर्सत ही है, न अपनों के लिए वक्त।
इस आपाधापी ने संबंधों में घोला विष,
प्यार ने छोड़ी राह, कड़वाहटों ने दामन थामा।
साल भर के गीले शिकवे मिटाती, रंगों की लाली।
दिल से दिलों की टोली यही है सच्ची होली,
दिलों की मेलजोली यही है सच्ची होली।

रिश्तों में आई दरार भरती हमारी, रंगों की थाली,
हर चेहरे पर रंग चढ़ाती, खासियत है इसकी निराली।
हर सूखे चेहरे पर लाती, मुस्कान की लाली,
बड़ी निराली बड़ी सुहानी खुशियों की हमझोली।
दिल के ढीले तारों को कसकर, शरगम बजाती ताली,
दिल से दिलों की टोली यही है सच्ची होली,
दिलों की मेलजोली यही है सच्ची होली।

सादगी और विश्वास का प्रतीक है हमारी होली,
रंगों से रंग मिलकर, दोस्तों दुश्मन भी गले मिल जाते है।
का पावन संदेश जन जन तक फैलती,
भाईचारे संग दिलों का संगम, यही है इसकी बोली।
अनोखा अनूठा विश्वास से भरा है हमारी होली।
दिल से दिलों की टोली यही है सच्ची होली,
दिलों की मेलजोली यही है सच्ची होली।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

मेरे प्रिय पाठकों सपरिवार तहे दिल से होली महापर्व की शुभकामनाएं।–KMSRAJ51

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — होली रंगों का ही नहीं सामाजिक भेदभाव मिटाने एवं सामूहिकता का पर्व भी है। होली बुराई पर अच्छाई के प्रतीक का पर्व भी है। इस बार हम होलिका दहन के साथ कोरोना वायरस का भी दहन करें तो फिर पहले की तरह सौहार्द्र पूर्ण वातावरण में एक-दूसरे से गले मिलते हुए होली मना सकेंगे। होली रंगों का त्योहार है और जीवन में रंग तभी तक हैं, जब तक परिवार-समाज सुरक्षित है।

—————

यह कविता (दिलों की मेलजोली यही है सच्ची होली।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2022-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: poet vivek kumar, vivek kumar poems, कवि‍ताएँ, रंग बिरंगी होली आई रे, विवेक कुमार, विवेक कुमार की कविताएं, होली पर कविता, होली पर कविता हिंदी में, होली पर गजल, होली पर पंक्तियां, होली पर साहित्यिक कविता

होलिका दहन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ होलिका दहन। ♦

होलिका दहन (छोटी होली)

हवाएं जब भी बहना,
देश की संस्कृत में रहना।
पर्वत आये अथवा घाटी,
गांव शहर वा नव परिपाटी।

वैदिक सिद्धांतों में चलना,
सबका तुम कल्याण करना।
रंगीन रास्ते भी आएंगे,
फुसलाकर वहां ले जाएंगे।

माया को उल्लंघन कर जाते,
संसार सागर से भी तर जाते।
साधक के साधना गर पल्लवित,
पापों से मुक्ति और त्रिगुणातीत।

पक्षपात रहित वह हो जाता,
जब भक्ति मार्ग में रम जाता।
जो घृणा – द्वेष करता रहता,
परमात्मा को प्राप्त नहीं होता।

भक्त प्रहलाद विष्णु में रमता,
असुराधिपति मात्र हाथ मलता।
हिरण्यकश्यप विष्णु से जलता,
भगवान से घोर शत्रुता करता।

प्रह्लाद पिता पर नहीं चलता,
विष्णु भक्ति में तत्पर रहता।
दानव पुत्र मात्र दानव न होता,
धर्मात्मा पुत्र धर्म परायण ही!

विष्णु कृपा से प्रहलाद हुआ महान,
उसकी हत्या का पिता किया प्लान!
दानव निज बहन को दिया यह काम,
शाल होलिका ने मिली एक वरदान।

भक्त प्रहलाद की कयाधु है माता,
विष्णु जी थे उसकी भाग्य विधाता।
जब माता ने मन से प्रभु को पुकारा,
तब प्रहलाद बचे होलिका हुई स्वाहा।

आग से बचाने में साल दिखाती करामात,
जिसे ब्रह्मा ने होलिका को दिया वर के साथ।
छल छद्म में उसने प्रहलाद को लिया गोद में,
भली-भांति बर्बरता के थी वह आगोश में।

लोक दिखाओ कार्य से ईश्वर होता रूस्ट,
ध्रुव प्रहलाद सूर तुलसी मीरा में दी प्रभु भक्ति।
जब विशाल अलाव में होलिका संग प्रहलाद को देखा,
हवा को तत्काल बुलावा विष्णु जी ने भेजा।

हवा के संग – संग शीतलता भी वहां तभी आईं,
देवलोक की अप्सराओं ने भी मधुरिम गीत सुनाई!
होलिका के ऊपर से शाल प्रहलाद के ऊपर ऊढ़ाई,
वही होलिका को जलाकर प्रहलाद की जान बचाई।

हिरण्यकश्यप शिव का करता था बड़ा तप,
भगवान शिव की प्रसन्नता से मिला उसको एक वर।
नाय आकाश नहीं पाताल में मारा जाएगा!
उसे ना ही जानवर ना ही मानव मार पाएगा।

आशूरा अधिपति हिरण्यकश्यप को मारने,
नरसिंह रूप में भगवान विष्णु प्रकट होकर आए।
प्राप्त वर को ध्यान में रखकर संहारक बन ढाये,
नरसिंह रूपी नाखून प्रहार कर नव जीवन में पहुंचाएं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — भक्त प्रह्लाद की विष्णु भक्ति व हिरण्यकश्यप के अहंकार को कविता के रूप में बताया हैं। होली रंगों का ही नहीं सामाजिक भेदभाव मिटाने एवं सामूहिकता का पर्व भी है। होली बुराई पर अच्छाई के प्रतीक का पर्व भी है। इस बार हम होलिका दहन के साथ कोरोना वायरस का भी दहन करें तो फिर पहले की तरह सौहार्द्र पूर्ण वातावरण में एक-दूसरे से गले मिलते हुए होली मना सकेंगे। होली रंगों का त्योहार है और जीवन में रंग तभी तक हैं, जब तक परिवार-समाज सुरक्षित है।

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sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (होलिका दहन।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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रंग बिरंगी होली आई रे।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ रंग बिरंगी होली आई रे। ♦

चल पड़ी मतवालों की ये टोली,
सबके होंठों पर सजी इक प्यारी बोली।
लो फिर से सजेगी रंगों की टोली,
प्रीति प्रेम की राह बनेगी होली।

होली के यंत्र-करण कई है,
संग जोड़ने वाले संबंध कई है।

रंग बिरंगे गर्द गुबारों से,
फिर से गुलालों की झड़ियों वाली है।
फिर से संवरेगी रंगों की हमजोली,
प्रीति प्रेम की स्रोत बनेगी होली।

कब तक रुष्ट रहोगे तुम सबसे,
कुछ तो बोलो क्यों हो गुमसुम तुम।

तुमको रंग लगाने में जाएगी गुम,
कटुता के कारावास से निकलो,
बन जाओ अब तो हमजोली।
फिर सजधज के आई रंगों की टोली,
प्रीति प्रेम की साधन बनेगी ये होली।

अंतस् में नहीं वंचना किसी के,
उत्तङ्ग बहुत है आत्मबल सबका।
होली के रंग बिरंगे कंगना,
उर पावन ब्रम्हद्रव से सजना।

अंत:सार भी निर्मल हो पूरा,
आनन अगर है परमप्रिय बोली।
फिर श्रृंगारित होती रंगों की होली,
प्रीति प्रेम की उर्मि बनेगी होली।

निकल पड़ी अलमस्तों की ये टोली,
सबकी जिह्वा पर इक ही बोली।
फिर बन-ठन कर आई रंगों की होली,
प्रीति प्रेम की निर्झर-सी बनेगी ये होली।

मंच (KMSRAJ51.COM) से जुड़े समस्त कवि/कवित्रियों को होलिका दहन एवं होली की शुभकामनायें।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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  • “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल`“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — होली रंगों का ही नहीं सामाजिक भेदभाव मिटाने एवं सामूहिकता का पर्व भी है। होली बुराई पर अच्छाई के प्रतीक का पर्व भी है। इस बार हम होलिका दहन के साथ कोरोना वायरस का भी दहन करें तो फिर पहले की तरह सौहार्द्र पूर्ण वातावरण में एक-दूसरे से गले मिलते हुए होली मना सकेंगे। होली रंगों का त्योहार है और जीवन में रंग तभी तक हैं, जब तक परिवार-समाज सुरक्षित है।

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यह कविता (रंग बिरंगी होली आई रे।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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कीव पर कहर बरपा?

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ कीव पर कहर बरपा? ♦

रूसी – यूक्रेन पर कहर बरपाएगा,
यूक्रेनी सेना हाथ उठाकर आएगा?
आज की रात पुतिन यूक्रेन जाएंगे,
ज़ेलेंस्की के मंसूबे पानी फिर जाएंगे?

जिद में जनता को तबाह कर आया,
दुश्मनी की कीमत उसने चुकाया।
मनमानी करने की कीमत चुकाएगा,
पूरी दुनिया तमाशबीन रह जाएगा।

लोगों की भावना में ज़ेलेंस्की आया,
भड़काऊ भाषण दे पुतिन उकसाया।
जनता को ही रीफूजी सा बनवाया,
खंडहर में यूक्रेन को यह बदलवाया।

यूक्रेन अपने आप जाएगा यह हार,
प्रचंड उसका होना है उस पर प्रहार।
आधी छोड़ पूरी पर उसने भी ढाया,
नहीं पूरी ना आधी कीमत वह पाया।

फिल्मी कॉमेडी कर राष्ट्रपति आया,
जीनियस पुतिन से आकर टकराया।
कूटनीतिक ककहरा दूजे से पढ़ाया,
परास्त होने जिद में मैं हो उठ आया।

पास – पड़ोस ने प्रोपो गंडा चलाया,
भ्रामक प्रचार में यूक्रेन जंग चलाया।
बिना विचारे जो युद्ध में कूद जाता,
समय की मार पड़ते वही घबराता।

ब्रिटेनी सांसद महा विनाशकारी कहे,
विश्वयुद्ध निश्चित है दुनियां को बताते!
दुनिया के नेता अपनी-अपनी सुनाते,
समय और खराब हो सकता है कहे।

तीन देशों ने कहा विश्वयुद्ध है तय,
दुनिया दो भागों में सभी लोग दंग।
दुनिया के विनाश का हम देखेंगे रंग,
आप बताए आप शांति के हैं संग?

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — अत्यधिक घमंड चाहे व्यक्तिगत हो या राष्ट्रीय सदैव ही सर्वनाश का कारण बनता है। अभी जो माहौल रूस यूक्रेन संघर्ष युद्ध का चल रहा है, यह युद्ध पूरी दुनिया के लिए हानिकारक है। संस्कृत का बहुत प्रसिद्ध लघु सूत्र है “अति सर्वत्र वर्जयेत्” जिसका हिंदी शब्दार्थ है कि “अति करने से हमेशा बचना चाहिए”, अति का परिणाम हमेशा हानिकारक होता है। वास्तव में अति किसी भी चीज की अच्छी नही होती। “लेकिन प्रश्न यहां पर यह है की – मासूम जनता की क्या गलती है?” कुछ भी बनाने में वर्षों का समय लग जाता है, लेकिन बर्बाद यूँ ही मिनटों में हो जाता है। जो कल तक लाखो – करोड़ों, घर दूकान, मकान, कार के मालिक थे, वो आज भिखारी बन गए। उन्हें तो समझ में ही नही आ रहा की आखिर किस गलती का भुगतान हम कर रहे है, गलती कौन करें – भरे कौन ? क्या ज़ेलेंस्की के द्वारा भड़काऊ भाषण यूक्रेन को पूर्ण रूपेण खंडहर में तब्दील करके ही छोड़ेगा?

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यह कविता (कीव पर कहर बरपा?) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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खट्टी मिट्ठी अतरंग।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ खट्टी मिट्ठी अतरंग। ♦

पंच वर्षों की अथक परिश्रम,
शब्दों इरादों मजबूत दीवारें।
कुछ मजबूती कुछ ढहती मीनारें,
ले चलती, फिर सत्ता के गलियारे।

कौन कहाँ कैसे रह पायेगा,
आने वाले आज में जी पायेगा।
सुदृढ़ नींव संग ऊंचा उठ पायेगा,
अस्तित्व की लड़ाई में बच पायेगा।

धर्म की ध्वजा फहराने के लिए,
कर्म कर्तव्य की सतह बनाने में।
सिर पर मुकुट रखने के लिए,
इस सत्ता समर गलियारे में।

अनबूझ व्यक्तित्व बन छा जाने में,
देखो – देखो आँखों के चारों को।
सर्वाधार संकल्प दोहरानें को,
फिर बन बवंडर छा जानें को।

लाल पीला भगवा नीला,
या रंगीन बहारों को सजाने में।
हरियाली की सम्मत लाने में,
खट्टी-मिट्ठी बंधा अतरंगी सपने में।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल`“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — सच्ची प्रीति और प्रेम अपने देश की माटी से हम भी रखते हैं, जब भी जरूरत हो देश को हमारी, माँ भारती की सेवा के लिए सदैव तैयार हम भी रहते है। माँ भारती की सेवा के लिए हो तो अपेक्षा अर्पित होने की तो वो साहस हम भी रखते हैं। धर्म की ध्वजा फिर से फहराने के लिए,कर्म कर्तव्य की सतह बनाने में, सिर पर मुकुट रखने के लिए, इस सत्ता समर गलियारे में।

—————

यह कविता (खट्टी मिट्ठी अतरंग।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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Filed Under: 2022-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: peeda antah man kee, Poems of Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', कवि सतीश शेखर श्रीवास्तव – परिमल, खट्टी मिट्ठी अतरंग, ख्वाहिश हम भी रखते हैं, पीड़ा अंतः मन की, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल, सतीश शेखर श्रीवास्तव – परिमल, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता aspire we also keep

ख्वाहिश हम भी रखते हैं।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ ख्वाहिश हम भी रखते हैं। ♦

प्रीति और प्रेम अपने देश की माटी से हम भी रखते हैं,
चुभती रहे जो मन में वो पिपासा हम भी रखते हैं।

हो तो अपेक्षा अर्पित होने की वो साहस हम भी रखते हैं,
वो हिम्मत वो शूर वीरता वो बहादुरी हम भी रखते हैं।

दुनियां को उलट देने का घमंड रखने वालों,
जगत को कंपकपा देने की ताकत हम भी रखते हैं।

कहर कयामत से हो पूरी अमा उनके समर्थन पर,
दैवीय ताकतों का समर्थन हम भी रखते हैं।

बासंतिक गुलिस्तां की आशा भी मरीचिका हो जाये,
माँ जया की असीम कृपा से कर्म-वांक्षा हम भी रखते हैं।

न शत्रुता न ही शिकायत की सुन लिया सब से,
तुम्हारी करुणा उपकार की शिकायत हम भी रखते हैं।

पवित्र कर्म है की मुक्ति से अनुराग तुम भी रखते हो,
अवगुण है की स्वतंत्रता से अनुराग हम भी रखते हैं।

‘परिमल’ तेरा नाम भी शायद कुसुरवारों में शामिल होगा,
माँ दुर्गा की कृपा से उन्माद से रक्षण हम भी रखते हैं।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल`“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — सच्ची प्रीति और प्रेम अपने देश की माटी से हम भी रखते हैं, जब भी जरूरत हो देश को हमारी, माँ भारती की सेवा के लिए सदैव तैयार हम भी रहते है। माँ भारती की सेवा के लिए हो तो अपेक्षा अर्पित होने की तो वो साहस हम भी रखते हैं, वो हिम्मत वो शूर वीरता वो बहादुरी हम भी रखते हैं। अदम्य और अद्भुत साहस हम भी रखते है, दैवीय ताकतों का समर्थन हम भी रखते हैं। याद रखना माँ दुर्गा की कृपा से उन्माद से रक्षण हम भी रखते हैं।

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यह कविता (ख्वाहिश हम भी रखते हैं।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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तबाही के भरे मद मंजर में।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ तबाही के भरे मद मंजर में। ♦

संजोया सपना तबाह हो गया, इमारतें भी अब ढह रही है।
इस तबाही के भरे मद मंजर में, रूहें चीख के कह रही है।
या खुदा ओ परवरदिगार! ये हम कौन सा जुर्म सह रही हैं?
दशों दिशाओं में गर देखें तो, विध्वंस की नदियां बह रही हैं।

यूक्रेन रूस का ताजा हाल, विश्व पटल को क्या बता रहा है?
यह द्वंद्व युद्ध का महा विनाश क्या, विश्व युद्ध में समा रहा है?
कलियुग का कल जनित कलह, संतोष धरती का खा रहा है।
मदवानों की मदहोशी का आलम, निर्दोषों का लहू बहा रहा है।

आधुनिक अस्त्रों के भयानक बवंडर ने, नव निर्माण सब तोड़े हैं।
चाव से बनाए थे जो महल अटाली, वे भव्य भवन कहां छोड़े हैं।
इस कल कलह के महा विनाश ने, कई मारे, कई सर फोड़े हैं।
ये मदहोश क्या जाने कि ये सुख साधन, पुरखों ने कैसे जोड़े हैं?

कितना आसान है सब नष्ट कर देना, निर्माण तो मुश्किल भारी है।
था जो कल तक कार कोठी का मालिक, आज वह बना भिखारी है।
किसको समझाऊं? सुनता ही कौन है? सबकी मत जो मारी है।
किसी का घर जल रहा, कोई आग सेंकता, यही तो दुनियांदारी है।

इतिहास के कितने ही पन्नो पर, युद्धों का हर परिणाम है लिखा।
ताजुब है मानव मस्तिष्क की सोच का, उसने इससे क्या है सीखा ?
जाने मानव मद होश हुआ क्यों? दूजे को नीचा दिखाने में क्या दिखा?
इतिहास गवाह है तलवार से नहीं पर, प्रेम से अशोक ने सब जग जीता।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — अत्यधिक घमंड चाहे व्यक्तिगत हो या राष्ट्रीय सदैव ही सर्वनाश का कारण बनता है। अभी जो माहौल रूस यूक्रेन संघर्ष युद्ध का चल रहा है, यह युद्ध पूरी दुनिया के लिए हानिकारक है। संस्कृत का बहुत प्रसिद्ध लघु सूत्र है “अति सर्वत्र वर्जयेत्” जिसका हिंदी शब्दार्थ है कि “अति करने से हमेशा बचना चाहिए”, अति का परिणाम हमेशा हानिकारक होता है। वास्तव में अति किसी भी चीज की अच्छी नही होती। “लेकिन प्रश्न यहां पर यह है की – मासूम जनता की क्या गलती है?” कुछ भी बनाने में वर्षों का समय लग जाता है, लेकिन बर्बाद यूँ ही मिनटों में हो जाता है। जो कल तक लाखो – करोड़ों, घर दूकान, मकान, कार के मालिक थे, वो आज भिखारी बन गए। उन्हें तो समझ में ही नही आ रहा की आखिर किस गलती का भुगतान हम कर रहे है, गलती कौन करें – भरे कौन ?

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यह कविता (तबाही के भरे मद मंजर में।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

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मित्रता से मैत्री।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मित्रता से मैत्री। ♦

मित्र, जैविक-देह में ह्रदय सम सुहृद है,
जग-जीवन में है, मङ्गलमय सह-पथिक।
देता मनोबल, साहस, प्रेरक, क्षेमद है,
जिसका सुखद साथ अनुभूति विशद है।

तरणि सत्य मित्र, सुभग तरिणी निदेशक,
स्वीकृत संबंध है, विशेष आधार चतुर्दिक।
सहयोग, साहचर्य परस्पर आस्था मानक,
इक दूजे के स्वतंत्र मन से बनें साधक।

दुःख में स्नेह-सांत्वना से करता अभिषेक,
सुख में शुभैषणा दर्शाता वह भावांजलि से।
मन की नेकी के साथ वे चिंतन समता रखें,
सखा-संग है, मन संगीत, मिले प्रेमांजलि से।

दो मित्र सरल उत्तमता से भावित हों,
इक-दूजे के गुण-चरित के भक्त हों।

जब मित्रों के परस्पर गुण से हो श्रृंगार,
सहज गहन मैत्री, होती जग में प्रकट है।
सक्रिय करुणा है, यह अनमोल सुअवसर,
है, मानव के स्व की असीम खिलावट है।

मित्रता होती मानव की पर्यावरण से।
ईश से भी होती सखा-भाव भक्ति है।
मित्रता में, मैत्री का है, सूक्ष्म अंतर्भाव,
वह समग्र ब्रह्माण्ड से शुभ प्रीति है।

जो चर-अचर में स्व-आत्म को दरशें,
मित्र-भाव होवे, जग मैत्री में विलय।
हर मन के दुर्गुण को करता तिरोहित,
मनु-जीवन हो असीम आनंद निलय।

♦ प्रो• मीरा भारती जी – पुणे, महाराष्ट्र  ♦

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  • “प्रो• मीरा भारती जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से बताने की कोशिश की है — इस पृथ्वी पर सबसे अच्छा रिश्ता मित्रता का रिश्ता होता है, क्योकि मित्रता का रिश्ता हम खुद बनाते है, बाकि सभी रिश्ते तो जन्म के साथ ही मिल जाते है। कहा गया है कि 50 मित्र बनाने से अच्छा है की एक ही मित्र से 50 वर्षों तक अच्छे से रिश्ता बनाये रखना। एक अच्छा और सच्चा मित्र सदैव ही अपने दोस्त का कल्याण करता हैं। एक सच्चा और अच्छा मित्र हरेक परिस्थिति में शांत रूप से सदैव साथ निभाता हैं।

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यह कविता (मित्रता से मैत्री।) “प्रो• मीरा भारती जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं से नई पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम मीरा भारती (मीरा मिश्रा/भारती) है। मैंने BRABU Muzaffarpur, Bihar, R.S College में प्राध्यापिका के रूप में 1979 से 2020 तक सक्रिय चिंतन और मनन, अध्यापन कार्य किया, आनलाइन शिक्षण कार्यक्रम से वर्तमान में भी जुड़ी हूं, मेरे द्वारा प्रशिक्षित बच्चे लेखनी का सुंदर उपयोग किया करते हैं। मैंने लगभग 130 कविताएं लिखी है, जिसमें अधिक प्रकाशित हैं, कई आलेख भी, लिखे हैं। दृढ़ संकल्प है, कि लेखन और अध्यापन से, अध्ययन के सामूहिक विस्तारण से समाज कल्याण – कार्य के कर्तृत्व बोध में वृद्धि हो सकती है। अधिक सकारात्मक परिणाम आ सकते हैं।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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महिला दिवस बधाईयां।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ महिला दिवस बधाईयां। ♦

कौन सा दिन महिलाओं के लिए नहीं है,
कुछ बातें सिर्फ़ समझने की, अनकही है।

जो यह कहते हैं कि आज महिला दिवस है,
वो अज्ञानी, नादान हैं, ये बेकार का बहस है।

पश्चिम का दुष्प्रचार है, भ्रम है एक साजिश है,
भोले भाले भारतीयों को भटकाने की कोशिश है।

महिलाएं हैं तो हम हैं, इस धरती पे जिंदगी है,
सुबह की पहली चाय से लेकर रातों की दूध हल्दी है।

निर्जीव मिट्टी गारे पत्थर को घर बनाने वाली,
प्रेम, वात्सल्य, त्याग से जीवन अंदर लाने वाली।

कभी अपनी पहचान कभी सम्मान हार बैठती है,
बेशिकन आदि से अ़ंत दिलो-जान वार बैठती है।

कितना किरदार बदलती नित हँसते रोते,
हम पुरूष तो कब के टूट बिखर चुके होते।

पेट ही नहीं वो हृदय में ज्ञान ओ प्राण भरती है,
हम सत्यवानों के लिए यमराज से भी लड़ती है।

एक कदम भी चल ना पाएँ गर माताएँ ना हों,
राम कैसे श्रीराम बनेंगे गर सीताएँ ना हों।

और हम मूढ़ कहते हैं सिर्फ एक दिवस उनका है,
क्षमा करो देवी, आपका बालक अबोध तिनका है।

हे जड़मति! पहचानो अपनी माँ, शक्ति स्वरूपा नारी को,
जीवनदात्री, जग निर्मात्री, वास्तविक अधिकारी को।

स्नेह, आशीष बनाये रखें, आदम के वंशज पर,
आँचल की दें छाँव, सुरक्षा, सुत औ राष्ट्रध्वज पर।

हर दिन क्या हर लम्हा आपका दिवस हो जय जयकार हो,
हृदय की गहराइयों से सादर पदवंदन स्वीकार हो।

(अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर श्रद्धामना मातृशक्ति को समर्पित)

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है – कवि इस संसार के लोगो से प्रश्न कर रहे हैं – आखिर क्यों केवल एक दिन ही नारी को वह मान सम्मान दे जिसकी वह सदैव से हकदार हैं? क्या केवल एक दिन का मान सम्मान ही काफी हैं उनके लिए? इस पर गंभीरता से विचार करें। आखिर जो हर शक्ति से सम्पूर्ण हैं चाहे वो किसी भी रूप में हो, माँ, बहन, दादी, पत्नी, काकी हर रूप में सदैव ही हम पर प्यार, ममता बरसाती हैं। आज के समय में नारी हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं, चाहे वह आसमान हो, या समुद्र हर जगह अपना सम्पूर्ण योगदान दे रही हैं। माँ बन कर जीवन में पूर्णता पा लेती है नारी, सर्वस्व अपना सौंप कर, बच्चों को महान बनाती हैं नारी। जैसे प्रकृति धरती सदैव ही देना जानती है, उसी की तरह, बस देना ही जानती है नारी, प्रेम, भाव, इज्जत, बस यही तो मांगती हैं नारी। जीवन के हर पड़ाव में, बस आलंबन चाहती है नारी, वरना तो वो स्वयं शक्ति है, और हर किसी पर भारी है नारी। नारी को सरल समझने की भूल न करो, ईश्वरत्व का मिश्रण है नारी, हम खुद अपना सम्मान करें, और मान करें हम हैं नारी। ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ पर साहस व शौर्य की प्रतिमूर्ति नारी शक्ति को नमन। नारी सशक्तिकरण के बिना मानवता का विकास अधूरा है।

—•—•—•—

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यह कविता (महिला दिवस बधाईयां।) “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: चली जाती है।
  • जरूर पढ़े: अच्छा लगता है।

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ओ नारी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ ओ नारी। ♦

कभी लाड़ लड़ती कभी प्यार लड़ाती,
तेरे कोमल भावों ने जग को सींचा है।
परिवार की खुशी के खातिर तो तूने,
हर आंसू का कतरा कोरों में भींचा है।
फिर भी न जाने इस नृशंस समाज ने,
तेरा वीभत्स सा चित्र क्यों खींचा है?

तेरे कदम से तो ओ पगली उग आते हैं,
मरू भूमि के बंजर में भी हरित उद्यान।
तेरे स्पर्श से पस्त हुए पुरुरवा सरीखे,
हो जाते हैं द्रवित तब कठोर पाषाण।
जब नम्रता की प्रतिमूर्ति तुझ नारी की,
पड़ती है मंद – मंद वह मधुर मुस्कान।

तेरे रहमों करम की कायल यह दुनियां,
पगली क्या क्या में आज बखान करूं?
तुझ पर हो रहे अत्याचारों का ओ देवी!
हां किस विधि से आज मैं निदान करूं।
खुद मैं गुनहगार सदियों से शायद तेरा,
इस बात का कैसे किससे प्रचार करूं?

आज विश्व नारी दिवस के अवसर पर,
देख रहा हूं, दुनियां तेरी जयकार करें।
यह झूठा है सब मान – सम्मान या फिर,
क्यों तू नित दिन छुप छुप के आहें भरें?
बलिदान की अजीबोगरीब कहानी की,
तेरे यह मतलबी संसार क्यों कदर करें?

जब जन्म लेना था मुझ को पगली तो,
तू नारी से ममता की मूर्ति बन मां बनी।
फिर भगनी, भावज और चाची – ताई,
पत्नी बनकर तू मेरा सकल जहां बनी।
नर के इस नृशंस जीवन में ओ पगली!
तेरी हर पल ही तो खलती यहां कमी।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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