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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिंदी कविता

विश्व महिला दिवस।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ विश्व महिला दिवस। ♦

विविधता भरे विचारों में समाधान मिलते हैं,
चुनौतियों से ही आगे बढ़ने की ताकत मिलती है।

अगर चुप बैठेंगे घर पर तो, दिल कमजोर होते हैं,
मुकाबले में खड़े रहोगे तो जीतने की संभावना अधिक है।

सभी क्षेत्रों में लड़कियां अपने सपने को मरने नहीं देती हैं।
जब शिक्षा में सशक्त भूमिका लड़कियां निभाएंगी।

तो अपने अधिकार के तहत सदा ही लड़ पाएगी।
महिलाओं ने सेना में भी अपना नाम दर्ज कराया है।

भारी भरकम हथियारों को उसने सीने से लगाया है।
अमरीकी सैनिक महिलाएं पुरुषों में कदम मिलाकर चलती है।

भारतीय सेना की महिलाएं लड़ाकू विमान उड़ाती हैं।
ट्रेन चलाने के साथ उपग्रह में आसमान में जाती हैं।

शक्ति और मनोबल की बेजोड़ मिसाल दिखाती हैं।
देश की रक्षा और सुरक्षा में वह आगे बढ़कर आती हैं।

संतति को बढ़ाने के लिए अपना मातृ धर्म निभाती हैं।
लोकतंत्र निर्माण में अपने अधिकार का प्रयोग करती हैं।

बच्चों को हुनर वान बनाकर जीवन सवारा करती हैं।
प्रभु की कथा सुनाती आत्म शुद्धि के ईश्वर का गुण गाती हैं।

न्यायालय में नारी न्यायप्रिय रानी के जैसी दिखती हैं।
चिकित्सालय में महिलाएं सेवा भाव रूप में आती हैं।

अच्छे करतब दिखाकर जन-जन को जागरूक करती है।
स्वस्थ समाज की धुरी बनकर महिलाएं आगे आती हैं।

पावन बगिया वगैरह में तरह-तरह की फूल खिलाती हैं।
देश का विघटन करने वालों को जाने क्यों वह भाती हैं।

दो परिवारों में रहकर, सबको साथ लेकर अपना कर्तव्य निभाती हैं।
कलम और कागज से वह दुनिया को जागरूक कर जाती है।
सुंदर परिधान और घुघराले बालों से इंद्र को छकाती हैं।

समृद्ध परंपराओं का पालन करने में आगे आती हैं,
लोरी गाती है वह पारिवारिक संबंध स्थापित करती हैं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — आज के समय में नारी हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं, चाहे वह आसमान हो, या समुद्र हर जगह अपना सम्पूर्ण योगदान दे रही हैं। माँ बन कर जीवन में पूर्णता पा लेती है नारी, सर्वस्व अपना सौंप कर, बच्चों को महान बनाती हैं नारी। जैसे प्रकृति धरती सदैव ही देना जानती है, उसी की तरह, बस देना ही जानती है नारी, प्रेम, भाव, इज्जत, बस यही तो मांगती हैं नारी। जीवन के हर पड़ाव में, बस आलंबन चाहती है नारी, वरना तो वो स्वयं शक्ति है, और हर किसी पर भारी है नारी। नारी को सरल समझने की भूल न करो, ईश्वरत्व का मिश्रण है नारी, हम खुद अपना सम्मान करें, और मान करें हम हैं नारी। ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ पर साहस व शौर्य की प्रतिमूर्ति नारी शक्ति को नमन। नारी सशक्तिकरण के बिना मानवता का विकास अधूरा है।

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sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (विश्व महिला दिवस।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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नारी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नारी। ♦

भारतीय नारी का यहां कोई नही सानी है,
है सब पर भारी क्योंकि वह आत्माभिमानी है।

हो सौंदर्य, वैदुष्य या सहनशीलता हो,
गार्गी, विद्योत्तमा, रंभा या शकुंतला हो।

अपने गुणों से वो सदा सम्मान पाती आई है।
हो भी क्यों ना वह अपने गुणों का लोहा मनवाती आई है।

सृष्टि का आधार है नारी, प्रकृति का श्रृंगार है नारी,
नारी है तो प्रेम है, बंधन है, हर रिश्ते की डोर है नारी।

बचपन की अल्हड़ता में भी, भाव का भंडार हैं नारी,
यौवन में लज्जा संयम का, सुंदरता का संगम है नारी।

होती विदा जब बाबुल के घर से, दो घरों की लाज है नारी,
अपने तन, मन, निष्ठा से, नव जीवन को अपनाती नारी।

माँ बन कर जीवन में, पूर्णता पा लेती है नारी,
सर्वस्व अपना सौंप कर, बच्चों को बनाती हैं नारी।

प्रकृति धरती की तरह, बस देना ही जानती है नारी,
प्रेम, भाव, इज्जत, बस यही तो मांगती हैं नारी।

जीवन के हर पड़ाव में, बस आलंबन चाहती है नारी,
वरना तो वो स्वयं शक्ति है, और हर किसी पर भारी है नारी।

नारी को सरल न समझो, ईश्वरत्व का मिश्रण है नारी,
हम खुद अपना सम्मान करें, और मान करें हम हैं नारी।

♦ डॉ विदुषी शर्मा जी – नई दिल्ली ♦

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  • ” लेखिका डॉ विदुषी शर्मा जी“ ने अपने इस कविता से, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है — माँ बन कर जीवन में पूर्णता पा लेती है नारी, सर्वस्व अपना सौंप कर, बच्चों को महान बनाती हैं नारी। जैसे प्रकृति धरती सदैव ही देना जानती है, उसी की तरह, बस देना ही जानती है नारी, प्रेम, भाव, इज्जत, बस यही तो मांगती हैं नारी। जीवन के हर पड़ाव में, बस आलंबन चाहती है नारी, वरना तो वो स्वयं शक्ति है, और हर किसी पर भारी है नारी। नारी को सरल समझने की भूल न करो, ईश्वरत्व का मिश्रण है नारी, हम खुद अपना सम्मान करें, और मान करें हम हैं नारी। ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ पर साहस व शौर्य की प्रतिमूर्ति नारी शक्ति को नमन। नारी सशक्तिकरण के बिना मानवता का विकास अधूरा है।

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यह कविता (नारी।) “डॉ विदुषी शर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख / कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम डॉ विदुषी शर्मा, (वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर) है। अकादमिक काउंसलर, IGNOU OSD (Officer on Special Duty), NIOS (National Institute of Open Schooling) विशेषज्ञ, केंद्रीय हिंदी निदेशालय, उच्चतर शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार।

ग्रंथानुक्रमणिका —

  1. डॉ राधेश्याम द्विवेदी — भारतीय संस्कृति।
  2. प्राचीन भारत की सभ्यता और संस्कृति — दामोदर धर्मानंद कोसांबी।
  3. आधुनिक भारत — सुमित सरकार।
  4. प्राचीन भारत — प्रशांत गौरव।
  5. प्राचीन भारत — राधा कुमुद मुखर्जी।
  6. सभ्यता, संस्कृति, विज्ञान और आध्यात्मिक प्रगति — श्री आनंदमूर्ति।
  7. भारतीय मूल्य एवं सभ्यता तथा संस्कृति — स्वामी अवधेशानंद गिरी (प्रवचन)।
  8. नवभारत टाइम्स — स्पीकिंग ट्री।
  9. इंटरनेट साइट्स।

ज़रूर पढ़ें — साहित्य समाज और संस्कृति।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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शस्त्र या शास्त्र।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शस्त्र या शास्त्र। ♦

यूक्रेन को अब पक्ष नहीं प्रक्षेपास्त्र चाहिये,
बर्बाद बहकती दुनियां को ब्रम्हास्त्र चाहिये।
उन्माद की लहर उठी है सभ्य देशों में,
सबको अपना घर, सुरक्षित राष्ट्र चाहिये।

सब अपना हित साध रहे बारुदी गंध में,
किसी को लाशें किसी को दानपात्र चाहिये।
पश्चिम वालों सीखो कुछ हम हिंदुस्तानी से,
जो सदा कहा है शस्त्र से पहले शास्त्र चाहिये।

♦ सीरी और अलेक्सा। ♦

वर्षों विकास करते रहे लड़ने-मरने के लिए,
चाँद का माथा चूम लाशों पे उतरने के लिए।
जिन हाथों में कलम, किताबें, कंघी होनी थी,
खंजर लिए घूम रहे हैं कत्ल करने के लिए।

जिस यूरोप पे गर्व होता था आज शर्मशार है,
तय करना कठिन है कौन असली गुनाहगार है।
यू एन, सीरी और एलेक्सा सब बेबस हैं आज,
हे ईश्वर! ये कैसा मानवता का बलात्कार है।

सभ्यता का अंत है या मानसिक दिवालियापन,
इंसानियत देख रही है पाषाण युग का आगमन।
मिसाइलों से ये मसले कभी हल नहीं होंगे, भेजो,
शायरों, कवियों को जिनके पास होता प्रेम धन।

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है – अत्यधिक घमंड चाहे व्यक्तिगत हो या राष्ट्रीय सदैव ही सर्वनाश का कारण बनता है। अभी जो माहौल रूस यूक्रेन संघर्ष युद्ध का चल रहा है, यह युद्ध पूरी दुनिया के लिए हानिकारक है। संस्कृत का बहुत प्रसिद्ध लघु सूत्र है “अति सर्वत्र वर्जयेत्” जिसका हिंदी शब्दार्थ है कि “अति करने से हमेशा बचना चाहिए”, अति का परिणाम हमेशा हानिकारक होता है। वास्तव में अति किसी भी चीज की अच्छी नही होती। इस सूत्र की जांच-परख हम स्वयं अपने घरों में बैठकर कर सकते हैं, कहीं दूर जाने की आवश्यकता नही। गुड़ की एक छोटी सी ढेली का स्वाद सबको अच्छा लगता है लेकिन उसी गुड़ के एक छोटे से टुकड़े को बड़े टुकड़े में बदल कर उसका रस-पान किया जाय तो वही शरीर में विकार उत्पन करता है। एक गुब्बारे में अगर हम उसकी क्षमता से ज्यादा हवा भरने की कोशिश करेंगे तो परिणाम कोई सुखद नही मिलेगा बल्कि दुःख देने वाला ही मिलेगा। यूक्रेन भी आज इसी “अति” का शिकार हो रहा है।

—•—•—•—

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यह कविता (शस्त्र या शास्त्र।) “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: चली जाती है।
  • जरूर पढ़े: अच्छा लगता है।

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कच्चा मकान।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ कच्चा मकान। ♦

वो शख्स परेशान है मेरी उड़ान से,
गहरी है जिसकी दोस्ती उस आसमान से।
घर तो उनका बड़ा है शानदार महलों सा,
परिंदे क्यूँ खुश हैं मेरे कच्चे मकान से।

उसे ये भी शिकायत है मैं हँसता बहुत हूँ,
बगावत की बू आती है मेरे बयान से।
साजिशें बहुत करता है मेरा सर झुकाने की,
पर हार जाता है वो मेरी ईमान से।

कागज की कश्ती भला कब तक लड़ेगी,
उफनती दरिया से गरजते तूफान से।
यही सोचकर तो छोड़ दी सब कुछ मैने,
एक अना नहीं जाती हमारे दरम्यान से।

सुर्खियों से इतर कभी देखिये बुनियाद भी,
वाकिफ नहीं हैं आप मेरी दास्तान से।
तेज रोशनी में साहिब भूल गए हैं शायद,
हीरा भी निकलता है कोयले की खान से।

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है – इस संसार में छोटी से छोटी चीज़ भी समय आने पर बड़े काम की होती है। जहां सुई की जरूरत है वहां तलवार काम नही आती। अहंकार इतना भी न करे की आपका अहंकार आपको ही अंत में ले डूबे। समय और प्रकृति में इतना ताकत है की कोयले को भी हीरे में परिवर्तित कर देता है। इसलिए अपने धन और दौलत या शक्ति का ज्यादा दिखावा व अहंकार न करें। अपने अंदर के इंसानियत को न मारे, अपने अंदर के दया व करुणा को बाहर आने दे। जहां तक हो सके एक दूसरे की मदद करे सदैव।

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यह कविता (कच्चा मकान।) “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: चली जाती है।
  • जरूर पढ़े: अच्छा लगता है।

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तृतीय विश्व युद्ध सिरहाने?

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ तृतीय विश्व युद्ध सिरहाने? ♦

एक जिद्दी सिरहाने आया,
अपनी गाथा फुल ही गाया।
नींद से जागो यही बताया,
दुनिया को नया सीख सिखाया।

एक युद्ध सिरहाने आया,
पहले युद्ध का याद दिलाया।
दूसरे युद्ध में तबाही बताया,
दुनिया को नई दिशा दिखाया।

एक तबाही फिर सिर उठाई,
भागी जनता पर देश दिखाई।
रीफूजियों का बढ़ रहा रेला,
दुनिया देख रही सब खेला?

बिखरी लाशें मौन माहौल,
बेसुध जख्मी दुनिया झोल।
भूल गया बड़े बड़ों का बोल,
कोई बोला विश्वयुद्ध का बोल।

हृदय में उसने नफरत पाली,
क्यों जीनियस से पंगा ले ली।
घमंड में तबाही गोली – बोली,
दुनिया बड़ा पिटारा खोली?

आसमान के बीच आरती पक्षी,
परदेस में जाकर शरण ले ली।
घरों में सहमे हीय में बूढ़े – बच्चे,
दुनिया मीटिंग करती रही दिखी।

गुड्डे की विभीषिका युद्ध में फंसा,
बिखर रही जिंदगी वह तो हंसा!
बड़बोली बोलकर वह तो फंसा,
दुनिया की दृष्टि कैसी, कैसे दशा।

राक्षस राज रावण से राक्षस बोले,
पास पर्याप्त हथियार विश्वास करें।
युद्ध में आप नागों को परास्त किया,
आप अपने आप में विशाद ना करें।

बहुसंख्यक कैलाश शिखर निवासी,
कुबेर को युद्ध में अपने बस में किया।
यक्षों से गिरे कुबेर को भी आपने,
मारकाट मचा कर बस में कर लिया।

यक्ष सेना विचलित कर बंदी बनाया,
कैलाश शिखर से विमान छीन लाए।
वर पाकर शक्तिशाली हो गए दानव,
उनका मान मर्दन आपने ही किया।

दानवों को अपने अधीन करके आपने
प्राप्त माया भी आपने प्राप्त कर ली।
आप ने वरुण के बलवान पुत्रों को भी,
चतुरंगिणि सेना युद्ध में परास्त किया।

आपने बहुत बड़े-बड़े वीरों को मारा,
राम पर विजय पाना कौन बड़ी बात।
रावण के घमंड का राम किए विनाश,
लंका पर विजय घमंड का सर्वनाश।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — अत्यधिक घमंड चाहे व्यक्तिगत हो या राष्ट्रीय सदैव ही सर्वनाश का कारण बनता है। अभी जो माहौल रूस यूक्रेन संघर्ष युद्ध का चल रहा है, यह युद्ध पूरी दुनिया के लिए हानिकारक है। संस्कृत का बहुत प्रसिद्ध लघु सूत्र है “अति सर्वत्र वर्जयेत्” जिसका हिंदी शब्दार्थ है कि “अति करने से हमेशा बचना चाहिए”, अति का परिणाम हमेशा हानिकारक होता है। वास्तव में अति किसी भी चीज की अच्छी नही होती। इस सूत्र की जांच-परख हम स्वयं अपने घरों में बैठकर कर सकते हैं, कहीं दूर जाने की आवश्यकता नही। गुड़ की एक छोटी सी ढेली का स्वाद सबको अच्छा लगता है लेकिन उसी गुड़ के एक छोटे से टुकड़े को बड़े टुकड़े में बदल कर उसका रस-पान किया जाय तो वही शरीर में विकार उत्पन करता है। एक गुब्बारे में अगर हम उसकी क्षमता से ज्यादा हवा भरने की कोशिश करेंगे तो परिणाम कोई सुखद नही मिलेगा बल्कि दुःख देने वाला ही मिलेगा। यूक्रेन भी आज इसी “अति” का शिकार हो रहा है।

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यह कविता (तृतीय विश्व युद्ध सिरहाने?) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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सत्य के राही शिव।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ सत्य के राही शिव। ♦

शिव ही सत्य की ज्योत है,
उनके बिना न कोई होत है।
जीवन संघर्ष रूपी प्याला है,
नीलकंठ ने पिया विष का प्याला है।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

कहा जाता इन्हे सृष्टि के रचनाकार,
ऐसे निराले है हमारे भोले कलमकार।
इनके नाम में ही छुपा है जीवन का सार,
इसी से हम सभी का होगा बेड़ा पार।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

शिव के नाम से दिनचर्या होती आसान,
बढ़ता जग में आन बान और शान।
अन्याय के खिलाफ जो, लड़ना सिखाए,
सत्य के पथ पर हमें चलना।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

दिल और दिमाग के द्वंद से, आत्मनियंत्रण कराए,
खुद को नियंत्रित करने का ज्ञान।
शिव अपने महायोगी रूप से सिखलाते,
शांतचित रहने का सलीका तमाम।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

त्रिशूल और डमरू, धन और संपदा का सूचक,
सिखलाता भौतिकवाद के पीछे तू न भाग।
विष का कर पान, नीलकंठ ने विश्व को दिया,
नकारात्मकता छोड़, सकारात्मकता का संकेत सरेआम।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

शिव अपनी इच्छा को परे रख, दिया संदेश,
इच्छाएं होती जुनून, करती सर्वनाश।
अर्धनारीश्वर शिव पार्वती रूप से,
पत्नी को दिलाया मान और सम्मान।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

हाथ में धारित त्रिशूल बताता,
न कर हावी, न खुद पर घमंड।
महायोगी रूप बताया, पर न मोहमाया में,
नटराज रूप से मिलता, नृत्य की है सीख।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

मेरे प्रिय पाठकों आपको सपरिवार तहे दिल से महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं।–KMSRAJ51

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — ज्ञान और बुद्धि के बिना ये जीवन किसी काम का नहीं। भगवान शिव के करोड़ों भक्त महाशिवरात्रि (Mahashivratri) का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से भगवान शिवजी की चार पहर की पूजा-अर्चना करते हैं, महादेव उनकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते है। इस दिन भगवान शिव जी को प्रसन्न करने के लिए भक्तों को सच्चे मन से दिन व रात में शिवपुराण का पाठ करना चाहिए। जो भी भक्त सच्चे मन से इस दिन भोलेनाथ की पूजा-अर्चना व ध्यान करता है उसकी सभी तरह की मनोकामना पूर्ण होती है। महाशिवरात्रि मतलब पावन रात्रि वह रात्रि जिसमे अपने सम्पूर्ण विकारों को जलाकर भष्म कर भगवान शिवजी से सर्व सद्गति प्राप्त करने की रात्रि। आओ हम सब मिलकर सच्चे मन से महापर्व महाशिवरात्रि को मनाए।

—————

यह कविता (सत्य के राही शिव।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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तुझें बजानी होगी डमरू की मधुर तान।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ तुझें बजानी होगी डमरू की मधुर तान। ♦

भोलेबाबा आ गया तेरे पूजन का पावन त्यौहार।
तू सुन कर ही जाना भक्तों की करुण पुकार॥

तेरे जयकारे को सुनने को कितने हम तरसे।
अब तो तेरी मधुर डमरू की धुन ही बरसे॥

हेभोलेनाथ! गंगा-माँ जो समाई है जटाओं में तेरी।
बरसा दे पावन जल इसका हो जाये सुविचारों की फेरी॥

तेरा त्रिशूल करें त्रिदोष पापों का नाश समूल।
हे भोलेबाबा सब माफ कर जाना हमारी भूल॥

हे जटाधारी तेरा भोलापन सब भक्तों को ही भाए।
विषपान कर तू इस ब्रह्मांड को अमृत बरसाए॥

सुमधुर नृत्य होता जब डमरू-संग तेरा।
ब्रह्मांड में होता तब नवजीवन का सवेरा॥

बहुत तरसे भक्तों के नयन भोले अब दर्शन दो।
शिवलिंग पर दूध-जल अभिषेक से तू प्रसन्न हो॥

भक्ति से खुश होकर तू सबके दुख लेता हर।
सुर-असुर सबको ही तू प्रसन्न हो दे जाए वर॥

बसंत ऋतु में तेरा आगमन दिल को हर्षाये।
तेरे स्वागत में प्रकृति भी पुष्पों को बरसाए॥

दिलों के श्रद्धा-सुमन स्वीकार कर धरा को पावन कर जाना।
डमरू की मधुर तान पर प्रसन्नता बरसाने वाला नृत्य करते आना॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — भगवान शिव के करोड़ों भक्त महाशिवरात्रि (Mahashivratri) का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से भगवान शिवजी की चार पहर की पूजा-अर्चना करते हैं, महादेव उनकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते है। इस दिन भगवान शिव जी को प्रसन्न करने के लिए भक्तों को सच्चे मन से दिन व रात में शिवपुराण का पाठ करना चाहिए। जो भी भक्त सच्चे मन से इस दिन भोलेनाथ की पूजा-अर्चना व ध्यान करता है उसकी सभी तरह की मनोकामना पूर्ण होती है। महाशिवरात्रि मतलब पावन रात्रि वह रात्रि जिसमे अपने सम्पूर्ण विकारों को जलाकर भष्म कर भगवान शिवजी से सर्व सद्गति प्राप्त करने की रात्रि। आओ हम सब मिलकर सच्चे मन से महापर्व महाशिवरात्रि को मनाए।

—————

यह कविता (तुझें बजानी होगी डमरू की मधुर तान।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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अपने मत पर करो विचार!

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ अपने मत पर करो विचार! ♦

जगह – जगह छलियों का बढ़ रहा है रेला,
पूर्वांचल में आ आकर करना चाहते हैं खेला।
महाराष्ट्र में साधु के साथ क्या हुआ था देखा,
जगह जगह लग रहा है लोगों का बड़ा मेला।

यूक्रेन हालत देख वहां के राष्ट्रपति की सुनो बात,
सभी नागरिकों को लड़ने को क्यों बोल रहे आज!
पाकिस्तान और चीन आंख गड़ाए है आज,
कल तक थलसेना को मजबूत करता देश।

वर्तमान परिस्थिति वायुसेना मजबूत करना आज,
तुम्हारा एक वोट देश के लिए कीमती है आज।
देश को बचाने के लिए आप खड़े हैं क्या आज,
या जन विनाश के लिए आपका वोट है बताएं आप।

जगह जगह पर मेरे भाइयों का बढ़ रहा है प्रभाव,
पूर्वांचल में बुद्धिजीवी का क्या हो गया है अभाव।
जगह जगह सी उत्तर प्रदेश में आ रहे झमेले बाज,
आपकी शांति सद्भाव पर करना चाहते कुठाराघात।

पूर्वांचल के विकास पर करना चाहते हैं लोग प्रहार,
आपको करना चाहते हैं लोग यहां जार – जार!
बुद्धि शक्ति पहरा आप अपने में मस्त विकास,
सबको पहचान कर, आप अपना मत करो विचार।

आपके प्रदेश में इस बार फिर अगर अंधेरा आएगा,
सैकड़ों मुबारक तुंहारा अंधेरा नहीं छठ पाएगा।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — आपका वोट आपका सुरक्षित भविष्य निर्धारित करेगा, याद रखें अपना वोट सोच समझ कर प्रदेश हित और राष्ट्र हित को ध्यान में रख कर दे। कही ऐसा ना हो जाए की गलत व्यक्ति और गलत पार्टी को वोट देकर आपका भविष्य सदैव के लिए अंधकारमय और असुरक्षित हो जाए। वर्तमान की घटनाओं से सबक ले (अफगानिस्तान और तालिबान तथा यूक्रेन और रूस की घटना) याद रखें – राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है। वतन हमारी आन हमारा सम्मान है उस मां को हमारा सलाम वंदे मातरम् …वंदे मातरम् …वंदे मातरम्॥

—————

sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (अपने मत पर करो विचार!) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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आप सभी का प्रिय दोस्त

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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बस लिखना है।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बस लिखना है। ♦

मैं कवि हूं कविताएं लिखता हूं, सुनाता हूँ,
मेरी लेखनी बेबाक कुछ न कुछ कह जाएगी।
लोगों की सम्पत्ति संजोकर भी ढह जाएगी,
मेरी लेखनी की ज़ुबान थाती बन कर रह जाएगी।

लोग लगे हैं सब धन दौलत ही बटोरने,
मैं भाव, कल्पना और शब्द बटोरता हूं।
लोग लगे हैं औलादों को विरासत छोड़ने,
मैं सदियों दर सदियों भाव छोड़ता हूं।

बिकती है इस दुनियां में राख भी आज,
लकड़ियों के मुकम्मल जल जाने के बाद।
पर विडम्बना देखिए इस दुनियां में जनाब,
बिकती नहीं तो सिर्फ कवियों की किताब।

मैं निराश नहीं हूं खुद की बदहाली के ख्याल से,
मुझे समाज के भटक जाने का डर सता रहा है।
है नहीं मेरा कोई खून का रिश्ता इस दुनियां से,
फिर भी मुझे इसकी चिन्ता का घुन खा रहा है।

है नहीं याद यहां अपनी चौथी पीढ़ी के पुरखे किसी को,
फिर भी आदमी भगवान के होने पर सवाल उठा रहा है।
निकम्मी सोच की दात देनी होगी, है याद नहीं पुरखे ही,
तो क्या फिर तुम्हारा खानदान हवाओं से ही आ रहा है।

यकीन मानिए साहब भूल जाएगी बाप को भी दुनियां,
गर जीने का और आगे बढ़ने का यही… तरीका रहा।
मैं रहूं या न रहूं इस दुनियां में तब ए मेरे अजीज दोस्तो,
मेरी ओर से निशानी हर अल्फाज मेरा तुम्हें लिखा रहा।

सिर्फ बुद्धि – धन के बल पर ही इठलाना इतना,
ए जमाने! खुद ही बता कि जायज कितना है?
हवा में उड़ने वाले हर परिंदे को भी तो आखिर में,
थक हार कर किसी न किसी शाख पर टिकना है।

पड़ता नहीं है कोई फर्क मुझे किसी के सुनने,
या न सुनने से, मुझे कौन सा महान दिखना है?
कवि हूं मैं प्रत्यक्ष द्रष्टा समाज की हर घटना का,
इसी लिहाज से ही तो मुझे सच बस लिखना है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — एक कवि व लेखक सदैव ही सत्य को लिखने की कोशिश करता है वह भी बिना किसी दबाव के। इस संसार के लोग तो धन संपत्ति को इकट्ठा करने में ही सारा जीवन बिता देते है और अंत समय में उनके साथ कुछ भी नहीं जाता है। माना की एक कवि व लेखक के पास धन संपत्ति कम होती है दुनिया की नज़र में, लेकिन एक कवि / लेखक की लेखनी (मेरी लेखनी की ज़ुबान थाती बन कर रह जाएगी।) सदैव के लिए उसे अमर कर जाएगी। विडम्बना तो देखिये की आजकल के लोग लगे हैं सब धन दौलत ही बटोरने में। मैं भाव, कल्पना और शब्द बटोरता हूं। लोग लगे हैं औलादों को विरासत छोड़ने में, आने वाली पीढ़ी के लिए, मैं सदियों दर सदियों भाव छोड़ता हूं। “आजकल की पीढ़ी को नहीं याद यहां अपनी चौथी पीढ़ी के पुरखे किसी को, फिर भी आदमी भगवान के होने पर सवाल उठा रहा है। निकम्मी सोच की दात देनी होगी, है याद नहीं पुरखे ही, तो क्या फिर तुम्हारा खानदान हवाओं से ही आ रहा है।” आजकल की पीढ़ी आधुनिकता के नाम पर भूलते जा रहे है अपनी ही प्राचीन संस्कृति, संस्कार व सभ्यता को। याद रखें- हवा में उड़ने वाले हर परिंदे को भी तो आखिर में, थक हार कर किसी न किसी शाख पर टिकना है।

—————

यह कविता (बस लिखना है।) “हेमराज ठाकुर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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समय।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ समय। ♦

समय कहता मैं तुम्हारे साथ हूँ,
समय की चाल निरन्तर चलती है।

यह पल में अनेक रूप बदलता,
दुख दर्द और सुख का साथी बनता।

रोज अपने नए रंग, रूप दिखाता,
सब इसकी मर्जी से चलता।

अपना हर पल का महत्व बताता,
ये कभी रुकता नहीं थकता नहीं।

बस निरतंर ही चलता जाता हूँ,
इसके महत्व को अगर समझोगे।

जीवन में अपने लक्ष्य हासिल करोगे,
सारे काम समय पर ही होते।

चाहे हम कितने भी उत्त्सुक हो,
होगा काम समय के आने पर ही।

इसलिए समय के महत्व को समझे,
समय कहता मैं तुम्हारे साथ हूँ।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — एक बात सदैव ही – याद रखें ….. समय का प्रबंधन वास्तव में जीवन का प्रबंधन है। यह दरअसल घटनाओं के क्रम को नियंत्रित करना है। समय का प्रबंधन का अर्थ है, इस बात पर नियंत्रण करना कि आप अगला कार्य कौन सा करेंगे, और आप हमेशा अपना कार्य चुनने के लिए स्वतंत्र होते हैं। महत्वपूर्ण और महत्वहीन के बीच विकल्प चुनने कि आपकी काबिलियत, जिंदगी और काम-धंधे में आपकी सफलता तय करने वाली अहम कुंजी हैं। असरदार और उत्पादक लोग खुद को इस बात के लिए अनुशासित कर लेते हैं कि वे सबसे महत्वपूर्ण कार्य से ही दिन कि शुरुआत करें। मैं हूँ समय बता देता हूं, किसी के लिए भी मैं नहीं रुकता हूँ। वक़्त कभी नहीं रुकता सदैव चलता रहता है। कभी खुशी दे जाता है, तो कभी ग़म। “किसी महत्वपूर्ण कार्य को शुरू और पूरा करने के बारे में सोचने भर से ही आप प्रेरित हो जाते हैं। इससे आपको टालमटोल छोड़ने में मदद मिलती हैं।”

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यह कविता (समय।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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  • है तो नववर्ष।
  • मोह।
  • अपना धर्म सबसे उत्तम।
  • ठंडी व्यार।
  • रिश्तों को निभाना सीखो।
  • तंत्र, मंत्र और तत्व ज्ञान में अंतर।
  • मित्र।

KMSRAJ51: Motivational Speaker

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शिक्षा में क्रांति अभी बाकी है।

दो वक्त की रोटी।

उन्नत बिहार, उज्ज्वल बिहार।

योग दिवस – 2026

निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।

बात वक्त की।

तिरंगा का करें सम्मान।

एक सफर।

बाल विवाह – एक अभिशाप।

क्या बदलाव लायेगा नया साल।

है तो नववर्ष।

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