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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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2021-KMSRAJ51 की कलम से

बिहार के लाल भारत के भाल।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बिहार के लाल भारत के भाल। ♦

बहुमुखी प्रतिभा के धनी, बिहार का लाल,
जिसने अपने कार्यों से किया, देश को निहाल।

जिरादेई के कमलेश्वरी, महादेव का सितारा,
अपने कर्मो से बढ़ाया, लोगों के सोंच का पिटारा।

सरल जीवन, ऊंचे विचार, यही था उनका व्यवहार,
सच्चाई और सादगी के, अवतार।

अंदर और बाहर का जीवन था, जिनका एक समान,
भारतवासी जिन्हें करते है, सदा नमन।

मध्यम परिवार से निकला, बिहार का बाबू,
जानते है नाम से जिन्हें, हम सब राजेंद्र बाबू।

बापू जिनके थे परम आदरणीय आदर्श,
मजबूत जिजीविषा ने पहुंचाया, उन्हें फर्श से अर्श।

शरीर था दुबला पतला, मगर फौलाद सा था मन,
आजादी के संग्राम में सक्रिय हो, निभाई भूमिका समान।

विलक्षण प्रतिभा एवं राष्ट्र प्रेम ने बनाया, उन्हें मनोयोगी,
प्रथम राष्ट्रपति सह संविधान के बने, सहयोगी।

भारत रत्न सम्मान ने बढ़ाया, उनका बल,
बिहार के थे लाल, भारत के बने भाल।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — डॉ. राजेंद्र प्रसाद की आज जयंती (Dr. Rajendra Prasad Jayanti) है। पूरा देश आज उनकी जयंती (Rajendra Prasad Birth Anniversary) के मौके पर उन्हें याद कर रहा है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म (Rajendra Prasad Birthday) 3 दिसंबर 1884 में बिहार के सीवान जिले के जीरादेई गांव में हुआ था। राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति (First President Of India) थे। वे भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में भी अपना योगदान दिया था। पूरे देश में अत्यन्त लोकप्रिय होने के कारण उन्हें राजेन्द्र बाबू (Rajendra Babu) या देशरत्न कहकर पुकारा जाता था। राजेंद्र प्रसाद एकमात्र नेता रहे, जिन्हें दो बार लगातार राष्ट्रपति पद के लिए चुना गया।

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यह कविता (बिहार के लाल भारत के भाल।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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बिरसा – जो महामना।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बिरसा – जो महामना। ♦

वाणी मेरी कलम की करे अवलोकन, विस्मित हो,
माने उपकार, बिरसा नाम के युगपुरुष ईशांश का।
प्रसक्त उद्यमी जो शोषक सत्ता का विनाश कामी,
महान रक्षक जो स्वाभिमानी आदिवासी अस्मिता का।
जल, जंगल, जमीं, भारत संस्कृति के दिव्यांश का…॥

दया से अश्रु-पूरित उन संगियों के क्षेम के हेतु जो,
जो जंगल से बेदखल, लड़ें भूख से, अंधकार-अभाव से।
शब्द उसके थे, ब्रह्म-वाक्य, बना विश्व-व्यक्तित्व वह,
नेतृत्व था मुक्तिबोधक, अरिभाव रख मिलें अन्याय से…॥

जिसका अभिमान था प्रकृति तत्व संरक्षण सदा,
जो भक्त जनसत्ता का, लाया आतंक शोषक प्राण में।
जिसके विभव से जाग्रत हुई जन – जाति- चेतना,
हुआ नव-राज्य गठन जिसके परम जय सम्मान में॥

पारित हुआ कानून, झुकी जब फ़रेबी सरकार थी,
मिली मुक्ति बेकारी से, बिरसा तभी बना भगवान।
अकाल, महामारी में, की सेवा बेमिसाल सतत,
बन पौराणिक, जीवनदानी, लेता वह संस्कार संज्ञान॥

अपूर्ण आज भी, अमर बिरसा का जीवन दर्शन है,
उद्योग युग में, विस्थापन का झेले दंश जब तक है।
अग्नि क्रांति भाव का रहे ज्वलित, संघर्ष संकल्पित हो,
आदि जन – ज्ञान संरक्षित हो, जन-गौरव प्रतिष्ठित हो॥

♦ प्रो• मीरा भारती जी – पुणे, महाराष्ट्र  ♦

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  • “प्रो• मीरा भारती जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से बताने की कोशिश की है — बिरसा मुंडा : शक्ति और साहस के परिचायक … स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतभूमि पर ऐसे कई नायक पैदा हुए जिन्होंने इतिहास में अपना नाम स्वर्णाक्षरों से लिखवाया। एक छोटी सी आवाज को नारा बनने में देर नहीं लगती बस दम उस आवाज को उठाने वाले में होना चाहिए और इसकी जीती जागती मिसाल थे बिरसा मुंडा। बिरसा मुंडा ने बिहार और झारखंड के विकास और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में अहम रोल निभाया। अपने कार्यों और आंदोलन की वजह से बिहार और झारखंड में लोग बिरसा मुंडा को भगवान की तरह पूजते हैं। बिरसा मुण्डा(Birsa Munda) ने मुण्डा विद्रोह पारम्परिक भू-व्यवस्था के जमींदारी व्यवस्था में बदलने के कारण किया। बिरसा मुण्डा ने अपनी सुधारवादी प्रक्रिया के तहत सामाजिक जीवन में एक आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने नैतिक आचरण की शुद्धता, आत्म-सुधार और एकेश्‍वरवाद का उपदेश दिया। उन्होंने ब्रिटिश सत्ता के अस्तित्व को अस्वीकारते हुए अपने अनुयायियों को सरकार को लगान न देने का आदेश दिया था।

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यह कविता (बिरसा – जो महामना।) “प्रो• मीरा भारती जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं से नई पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम मीरा भारती (मीरा मिश्रा/भारती) है। मैंने BRABU Muzaffarpur, Bihar, R.S College में प्राध्यापिका के रूप में 1979 से 2020 तक सक्रिय चिंतन और मनन, अध्यापन कार्य किया, आनलाइन शिक्षण कार्यक्रम से वर्तमान में भी जुड़ी हूं, मेरे द्वारा प्रशिक्षित बच्चे लेखनी का सुंदर उपयोग किया करते हैं। मैंने लगभग 130 कविताएं लिखी है, जिसमें अधिक प्रकाशित हैं, कई आलेख भी, लिखे हैं। दृढ़ संकल्प है, कि लेखन और अध्यापन से, अध्ययन के सामूहिक विस्तारण से समाज कल्याण – कार्य के कर्तृत्व बोध में वृद्धि हो सकती है। अधिक सकारात्मक परिणाम आ सकते हैं।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रथम चरण का लोकार्पण।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रथम चरण का लोकार्पण। ♦

दिनांक 13 दिसंबर 2021

तीर्थ यात्रा की परंपरा में काशी का विशेष महत्व है। काशी का पृथ्वी से संबंध नहीं है यह उचित उच्चतर लोक मंगल कारक है। काशी त्रिपुरारी की राज्य नगरी है। काशी क्षेत्र हर युग में रहता है। इसकी वाह्य स्वरुप में बदलाव होता रहता है परंतु इसका अस्तित्व हमेशा बना रहता है। इसका स्वरुप सतयुग में त्रिशूल आकार का, त्रेता युग में चंद्राकार का, द्वापर युग में रथ के आकार और कलयुग में शंख आकार रहता है। काशी गंगा के तट पर अवस्थित है। गंगा काशी विश्वनाथ धाम में उत्तर वाहिनी बहती चली आ रही है। गंगा प्राण वायु प्रदायनी हैं। भू-लोक पर जीव को जीवन दान देती हैं। गंगा प्राणियों का आश्रय दाता है। गंगा को धरती पर अपरा भी कहा जाता है। गंगा स्नान से स्वर्ग से धरा पर अवतरित माँ देवी गंगा मनुष्य जीव को पुण्य प्रदान करती हैं।

काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण दिनांक 13 दिसंबर को मान्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर कमलों से होने वाला है। इस आयोजन को भव्य काशी और दिव्य काशी के आयोजन स्वरूप किया गया है। इस अवसर पर विद्यालय में रंगोली, पेंटिंग, और प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा।

इस मौके पर 1 दिसंबर से 10 दिसंबर तक जिले में अनेक क्षेत्रों में विविध रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जा रहा है।

काशी विश्वनाथ धाम की परियोजनाएं

  • काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र का विस्तारीकरण। 
  • काशी हिंदू विश्वविद्यालय में चिकित्सकों और नर्सों के लिए हॉस्टल तथा धर्मशाला।
  • रमना, वाराणसी में 50 एम एल डी छमता का एस टी पी।
  • शहर में विभिन्न स्थानों पर सी सी टी वी कैमरा स्टालेशन और बनिया बार-बार का जीर्णोद्धार व वाहन पार्किंग।
  • काशी हिंदू विश्वविद्यालय हॉस्पिटल में आई यू सी टी ई भव्य।
  • काशी हिंदू विश्वविद्यालय में ही जोधपुर कालोनी व 80 फ्लैट। खिडकिया घाट का जीर्णोद्धार।
  • इसी के साथ कई वार्ड उनका विकास कार्य भी शामिल है।

स्मार्ट सिटी में वार्डों का विकास

  • गढ़वाली टोला वार्ड का विकास।
  • काल भैरव वार्ड का विकास।
  • कामेश्वर महादेव वार्ड का विकास।
  • राज मंदिर वार्ड का विकास।
  • जगबाडी वार्ड का विकास।
  • दशाश्वमेध वार्ड का विकास।

काशी विश्वनाथ धाम के आसपास के वार्डों का सौंदर्यीकरण का काम किया गया।

लोकार्पण के पहले शहर रंग रोगन

काशी विश्वनाथ धाम के प्रथम चरण के लोकार्पण के पहले गोदौलिआ से मैदागिन तक बनी हुई सड़क किनारे के भवनों को एक रंग में रंगने का काम किया।

संस्कृति विभाग की तरफ से आयोजित कार्यक्रम

  • बड़ा गणेश, सुनारपूरा लोटिया, 1 दिसंबर।
  • विष्णु मंदिर ललिता घाट और बृहस्पति मंदिर दशाश्वमेध घाट, 2 दिसंबर।
  • शीतला मंदिर शीतला घाट, और शैलपुत्री देवी, सरैया, 3 दिसंबर।
  • राम मंदिर खोजवा और राम मंदिर चौक से 4 दिसंबर।
  • बटुक भैरव कमच्छा और काल भैरव 5 दिसंबर।
  • मृत्युंजय महादेव मंदिर धारा नगर वह केदारनाथ मंदिर केदार घाट 6 दिसंबर।
  • बनकटी हनुमान मंदिर आनंद पार्क कौड़िया माई मंदिर कबीर नगर, 7 दिसंबर।
  • गोपाल मंदिर चौक खंभा और संकटा मंदिर चौक, 8 दिसंबर।
  • कामेश्वर महादेव मंदिर, कंदवा, और गैबी ए एकदिवसीय श्वरमंदिर छोटी गैवी, 9 दिसंबर।
  • अन्नपूर्णा मंदिर विश्वनाथ धाम और आदि केश्वरमंदिर राजघाट, 10 दिसंबर।
  • 11 दिसंबर को दुर्गा कुंड स्थित दुर्गा मंदिर में और संकट मोचन में भव्य भजन कीर्तन का कार्यक्रम समय 5:00 बजे से 7:00 बजे सायंकाल (शाम) में तय किया गया है।

लोकार्पण समारोह में — अनेक विचारधाराओं का समावेश।

13 दिसंबर 2021 ई. श्री काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण समारोह में देश की संपूर्ण सांस्कृतिक परंपरा और अनेक विचारधाराओं का समावेश होगा। काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण समारोह इतिहास का पहला ओ अवसर कहा जाएगा। जिसमें सनातन परंपरा के सभी धारा के संतों की मौजूदगी होगी। काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के अवसर पर राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता का संदेश पूरे विश्व को दिया जाएगा। यह भी एक कुंभ का आयोजन है यद्यपि हरिद्वार, प्रयाग, नाशिक में लगने वाले कुंभ में भी सनातन धर्म की सभी धारा के साधु संत और आम जनता इकट्ठा होती है। काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण में सनातन धर्म के सभी संप्रदाय और परंपरा के अनुयाई उपस्थित रहेंगे। इस कार्यक्रम में दक्षिण की परंपरा के वीर शैव और लिंगायत भी अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगे।

शिक्षा विभाग की तरफ से कार्यक्रम

दिसंबर मास में 1 दिसंबर से वाराणसी नगर के विद्यालय भी विविध कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे। इन कार्यक्रमों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, पेंटिंग का कार्यक्रम, प्रतियोगिता, नुक्कड नाटक, रंगोली प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता, चित्रकला, अंताक्षरी, चौपाई का श्लोक आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी।

आजादी के अमृत महोत्सव के तहत

आजादी के अमृत महोत्सव के तहत शहर – नगर के विद्यालयों में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। बाबा की धाम दिव्यांगों – बुजुर्गों के आने की व्यवस्था, श्री काशी विश्वनाथ धाम लोकार्पण के दौरान बुजुर्ग श्रद्धालुओं और विज्ञान कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के लिए विशेष प्रबंध किया गया। प्रवेश द्वार से लेकर निकास द्वार तक विशेष रैंप स्कलेटर बनाए गए। सुविधाओं को गंगा घाट, छत्ता द्वार, ढुंढ राज गणेश और नील कंठ द्वार से आने वाले सभी दिव्य गौर बुजुर्ग श्रद्धालुओं को बिना किसी प्रकार की परेशानी के बाबा विश्वनाथ जी का दर्शन करेंगे। जला सेन घाट से भी बाबा विश्वनाथ धाम में प्रवेश करने के लिए बुजुर्ग श्रद्धालु और दिव्यांग जनों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

व्हील चेयर व ई-रिक्शा की निशुल्क व्यवस्था

बाबा विश्वनाथ मंदिर प्रशासन की ओर से निशुल्क ई-रिक्शा और व्हील चेयर का इंतजाम किया गया है। बाबा धाम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के अनुसार बाबा के दर्शन के लिए आने वाले दिव्यांग – बुजुर्ग श्रद्धालुओं को मंदिर में सभी सुविधाएं प्रदान की जाएगी।

श्री काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण रवि योग और महासिद्धि योग के संजोग में, गणेश अथर्व शीर्ष और श्लोक के पाठ के बीच काशी विश्वनाथ धाम में उपस्थित होकर भारती प्रधानमंत्री मोदी जी लोकार्पण करेंगे। इस लोकार्पण के बाद गंगा की धारा से 5, 27, 730 वर्ग फीट तक का क्षेत्रफल श्रद्धालु के लिए आम हो जाएगा।

श्री काशी विगत परिषद के निर्देशानुसार संपूर्ण अनुष्ठान श्री राम जन्म भूमि पूजन की तरह ही जिम्मेदारी के साथ की जाएगी। इस अनुष्ठान को काशी के विद्वान कर्मकांडी ब्राह्मण ही संपन्न कराएंगे। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया जाएगा जो समस्त सनातन धर्मावलंबियों, साधु – संतों तथा आम जनता के लिए सुलभ होगा। भारत की सांस्कृतिक राजधानी काशी बनारस में बाबा विश्वनाथ जी देवताओं के आगमन की प्रसन्न मुद्रा में होते हैं और लोग कल्याण के लिए दुनियां के भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं। काशी विश्वनाथ धाम अपने आज कालीन इतिहास का गवाह बना।

सारे अतिक्रमण साफ हो जाने के बाद श्री बाबा विश्वनाथ धाम की मणिमालाएं लोग कल्याण के लिए बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आने वाले दर्शनार्थियों को सहज रुप से काशी विश्वनाथ धाम में काशी पुराधीपती के साथ शिव कचहरी, काशी खंडोक्त मंदिर के साथ 178 विग्रह के दर्शन का भी लाभ मिलेगा।

शिव भक्तों की सड़क किनारे नहीं लगेगी कतार –
काशी विश्वनाथ धाम ऐसा होगा प्रकार,
सड़क किनारे नहीं लगेगी अब कतार।
पौराणिक मान्यता युक्त पूर्ण रूप धाम,
शिवरात्रि और सावन भक्तों को महान॥

लाखों भक्त के एक साथ दर्शन विधान,
काशी में शिव लगाये जाम पर लगाम।
सुविधाओं का विशेष रखा गया ध्यान,
बाबा चौक का लोग करेंगे गुणगान।
शिव शोभा निरख निरख किया गान।
बाबा गणों संग करेंगे जगत कल्याण॥

चलो काशी चलें अभियान

बनारस की छवि बढ़ाएगा बाबा विश्वनाथ धाम, महीनों का होगा पूरे शहर में आयोजन। 13 दिसंबर को पहले चरण का होगा लोकार्पण, आगे की सभी कार्यक्रम में वर्चुअल शामिल होंगे पी एम। काशी पुराधिपति के दरबार का भव्य होगा लोकार्पण।

आओ चलें काशी विश्वनाथ धाम,
करें शिव शंकर जी का ध्यान।
सूने घर में जलने वाले दीपक की लौ सा ना जलो,
चलो काशी विश्वनाथ मंदिर धाम लोकार्पण करें।
जलो तो ऐसे जलो की दुनियां को खुशहाल करो,
सत्संग से मिले सुख के रम्य में रमण हों प्रकाशित करें॥

देव दीपावली की तर्ज पर दुनिया देखेगी लाइव लोकार्पण। काशी के सिवालय सजेंगे, विश्वनाथ दरबार में उस समय प्रधानमंत्री रहेंगे। सभी सरकारी भवनों को सजाया जाएगा, तैंतीस कोटि देवी देवताओं को मनाया जाएगा। देव लोक जैसे पुष्प वर्षाया जाएगा, सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम में कलाकारों को लाया जाएगा। काशी में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, काशी के पुनरोद्धार की जानकारी जन-जन तक पहुंचाएगी।

सांस्कृतिक आयोजन 13 दिसंबर से 12 जनवरी तक चलेगा। सोलह दिसंबर को उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्रियों को काशी में बुलाया जाएगा, प्रस्तावित कार्यक्रम पर मंत्रिमंडल विचार विमर्श करेगी। विश्वनाथ धाम के लोकार्पण को भव्य स्वरुप दिया जाएगा। काशी का भव्य, दिव्य, तेज, स्वरूप इतिहास बताने के लिए 100-100 पुरुष सौ – सौ महिलाओं को वालंटियर बनाया जाएगा। वालंटियर टीम को प्रशिक्षित किया जाएगा। काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण देश की प्रमुख संग क्योंकि उपस्थित में किया जाएगा। काशी विश्वनाथ कारीडोर में 19 भवन बनकर तैयार के संचालन की रुपरेखा तैयार की जाएगी। इस भवन में 14 जनवरी से सांस्कृतिक कार्यक्रम सहित अन्य कार्यक्रमों की श्रृंखला का आयोजन किया जाएगा।

मनुष्य भोग विलास और कामनाओं में अपने जीवन की आहुति दे देता है। इस जन्म में जिन भोग को भोग रहे हैं पिछले जन्म में ही उसे भोगा था अगले जन्म में भी उन्हें ही भोगेंगे। क्या हमारा जन्म इसलिए हुआ है। हमें उन जो पुरुष पर्वत की गुफाओं में बैठकर परम ज्योति का ध्यान करते हैं उनके आनंदाश्रुओं को पखेरू उनकी गोद में बैठ कर निर्भयता के साथ पीते हैं। हमें भगवान शंकर जो 14 भुवनों के स्वामी ब्रहमांड को अपने उदर में धारण करने वाले विष्णु, उनके सरण में जाने की आवश्यकता है।

एक रचना प्रस्तुत

भौतिकता का सुख तो क्षणभंगुर है,
संसार में सुंदरता की कमी नहीं है।
गर तुझे भवसागर से पार उतरना है,
वेद – स्मृति और पुराण ही पढ़ना है।

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में लगे पत्थर

सात प्रकार की पत्थरों से पूरे मंदिर परिसर को संवारा सजाया गया है। जिसमें बालेश्वर स्टोन, मकराना मार्बल, कोटा ग्रे नाईट और मेडोना स्टोन का इस्तेमाल प्रमुख रुप से अधिक किया गया है।

कार्यक्रम के लिए योगी आदित्यनाथ के निर्देश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने तीन दिवस के कार्यक्रम पर मोहर लगा दिया। इस मौके पर 12, 13 व 14 दिसंबर 2021 को पूरा काशी शहर रंगीन रोशनी से नहाएगा। रोशनी की सजावट गली से लेकर घाटो तक दिखेगी। इस कार्यक्रम को भव्य और दिव्य काशी का आयोजन बनाने के लिए अधिकारियों ने डिजिटल मैप तैयार कर लिया।

श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर लोकार्पण के दौरान तक काशी में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होता रहेगा। इसलिए चित्त! अब तू मोह को छोड़ और शीश पर अर्ध चंद्र धारण करने वाले भगवान शिव का ध्यान कर और चलकर गंगा के तट पर वृक्षों की छाया में विश्राम कर। जो मनुष्य ईश्वर के ध्यान में हैं, जिसे खाने-पीने, सोने पहनने-ओढ़ने की कोई चिंता नहीं होती है। जिनके मन में परम शांति का निवास होता है ऐसे व्यक्ति के लिए त्रिलोकी का राज भी तुच्छ लगता है।

एक रचना प्रस्तुत

जो मनुष्य सदाशिव की भक्ति में लीन रहते हैं,
जन्म – मरण का भय उनके हृदय ना बसते हैं।
मनोरथ पूर्ण करने वाली लक्ष्मी मिलती हैं,
परमपिता परमात्मा की अनुकंपा होती है।

काशी विश्वनाथ मंदिर सहित क्षेत्र के सत्तरह मंदिर जिसमें शामिल हैं उनमें से, जिसके प्रथम चरण का लोकार्पण 13 दिसंबर 2021 को शुभ मुहूर्तं में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के करकमलों द्वारा रवि योग में संपन्न होगा।

दूसरे चरण में धाम के शेष आठ मंदिरों के संरक्षण का काम किया जाना है। इस लोकार्पण समारोह के अनुष्ठान के मुख्य यजमान होंगे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी। इससे पहले प्रधानमंत्री गंगाजल माँ गंगा जी से लाकर बाबा विश्वनाथ जी का अभिषेक करेंगे।

काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण को विश्वव्यापी बनाने की तैयारी चल रही है। इस समारोह में शैव संप्रदाय के पीठाधीश्वरों को भी आमंत्रित किया जाना है। जिसमें कर्नाटक के लिंगायत, वीरशैव और तमिलनाडु के अधिनाम सहित उत्तर के सभी क्षेत्रों के संतों को शामिल करने की तैयारी की गई।

संत समाज को बाबा धाम में आने का निमंत्रण

महत्वपूर्ण, प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना काशी विश्वनाथ धाम को साकार करने के लिए होने वाले लोकार्पण के अवसर पर देश के अनेक क्षेत्रों से संत समाज को बाबा धाम में आने के लिए प्रधानमंत्री जी ने बाबा विश्वनाथ की तरफ से आमंत्रित किया।

इस लोकार्पण के अवसर पर संतो की उपस्थिति के लिए 25,000 संतो को काशी विश्वनाथ की पाती दी जानी है, जो संतो की थाती होगी। इस पाती के माध्यम से 13 दिसंबर 21 ई. को होने वाले लोकार्पण की जानकारी संतो के माध्यम से भव्य बाबा धाम का प्रचार, अपने अनुयायियों के बीच काशी आने का निमंत्रण, अनुयायियों के लिए भी दिया जा रहा है।

बाबा आदि विश्वेश्वर की स्थापना

काशी बनारस की गलियों में विराजमान आज विशेश्वर के 50 हजार वर्ग मीटर से ज्यादा में भव्य दरबार स्थापित किया जाना है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की पहल पर परिकल्पना की गई है।

संतो को भी जाने वाली पाती में लगभग 300 से ज्यादा भवनाें के अधिग्रहण और उसके लिए किए गए संघर्ष के साथ ही महादेव के दरबार का निर्माण पूरा करने तक की कहानी लिखी गई है। प्रधानमंत्री ने संत समाज को 13 दिसंबर से लेकर 12 जनवरी तक चलने वाले आयोजन की भी पूरी जानकारी होगी। पूरा प्रयास किया जा रहा है कि यह पाती सभी मठ मंदिर और संन्यासी तक पहुंचने का प्रयास किया गया है।

बाबा विश्वनाथ मंदिर का प्राचीन वैभव लौटा

काशी के बाबा विश्वनाथ जी के मंदिर की दीवारों पर सन 2008 में तत्कालीन एक वरिष्ठ अधिकारी की मनमानी की वजह से एनामेल पेंट से पेंट कर दिया गया था। जिसका उस समय संत व आम जनता द्वारा विरोध किया गया था। 12 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद बाबा के मंदिर की दीवारों को संरक्षित करने की कवायद शुरू हो चुकी है। लोगों को उम्मीद है कि काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रथम चरण के लोकार्पण के पूर्व ही पेंट को हटाकर दीवार को संरक्षित और सुशोभित कर दिया जाएगा।

इनामेल पेंट की पुताई की वजह से मंदिर के गर्भ गृह में लगे पत्थरों का क्षरण हो रहा था। दीवार में लगे चुनार के पत्थर खराब हो रहे थे। वाराणसी के मंडलायुक्त के अनुसार बाबा विश्वनाथ के मंदिर के जीर्णोद्धार और संरक्षण का काम किया जा रहा है। वाराणसी घर की सफाई का काम भी हो रहा है इस काम के लिए टाटा को लगाया गया है। उम्मीद है काशी विश्वनाथ मंदिर का प्राचीन वैभव लौटेगा। मंदिर के काम के लिए तत्परता, तनमयता त्याग, युद्ध स्तर पर काम करने की कोशिश की गई है।

बाबा विश्वनाथ मंदिर की दीवारों से एनामेल पेंट हटाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, राष्ट्रीय सांस्कृतिक संपदा संरक्षण अनुसंधान साला, तथा आई आई टी रुड़की की मदद ली गई, अनेक व्यवधानाें के उपरांत सन 2019 में iit रुड़की द्वारा मंदिर की दीवारों के संरक्षण के लिए काम शुरु किया लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से काम पूरा नहीं हो सका था। परंतु मंडलायुक्त वाराणसी के कथन अनुसार टाटा द्वारा कार्य पूरा किया जा सकेगा।

लोगों के दिलों में यह प्रश्न उठ रहे हैं कि आखिरकार माननीय प्रधानमंत्री जी मार्ग शीर्ष मास में और वह भी दिसंबर को काशी विश्वनाथ मंदिर धाम के प्रथम चरण का लोकार्पण का दिन क्यों चुना है। यह शुभ कार्य किसी और दिन भी किया जा सकता था। तो आपको बताना चाहेंगे जी कि मार्ग शीर्ष मास को अगहन मास के रूप में जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार सभी हिंदू महीनों का अपना विशेष महत्व है, परंतु उनमें से मार्गशीर्ष मास धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है। गीता में भगवान ने कहा है कि— मासानाम मार्ग शीर्यो यम॥

मार्गशीर्ष मास की प्रमुख विशेषताएं

  • सतयुग में देवो अगहन मास (मार्गशीर्ष मास) की प्रथम तिथि के दिन नया साल आरंभ किया।
  • कश्यप ऋषि द्वारा इसी दिन मन भावन, मनु हारी, सुंदर, सुखजीत, कश्मीर की रचना की थी।
  • मान्यता है जो के अनुसार सीमा स्नेह भगवान श्री राम और सीता जी का स्वयंवर रचा गया था।
  • मार्गशीर्ष मास में भगवान शिव और माता पार्वती का मिलन हुआ था ऐसी मान्यता है।
  • अगहन मास में पूर्णिमा को दत्तात्रेय की जन्म जयंती मनाई जाती है।
  • इसी मास में पूर्णिमा को चंद्रमा की पूजा की जाती है जिसका विशेष फल मिलता है।
  • मार्ग शीर्ष मास में विष्णु सहस्त्रनाम, भागवत गीता और गजेंद्र मोक्ष का पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है।
  • मार्गशीर्ष मास में ‘ओम दामोदराय नमः’ से गुरु और इस देव को प्रणाम करने से जीवन के अवरोध कष्ट दूर होते हैं।
  • मार्ग शीर्ष मास में भागवत ग्रंथ को देखने की विशेष महिमा है।अपने घर में भागवत को प्रणाम करना चाहिए।
  • मार्ग शीर्ष मास श्री कृष्ण का रूप माना गया है। भगवान श्री कृष्ण की पूजा कई रूपों में इस मास का पूजन करना फलदाई होता है।
  • मार्ग शीर्ष मास में शंख में तीर्थ स्थानों का जल भरकर पूजा स्थल पर मंत्र पढ़ते हुए देवताओं के ऊपर घुमाकर जल को दीवाल पर छिड़कने से घर की शुद्धि होती है, मन को शांति मिलती है और घर के लोगों को लाभ होता है। कष्ट निवारक है, कष्टाें से छुटकारा मिलता है।

रवि योग की महत्ता

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रवि योग शुद्ध शुभ कामना प्रदान करने वाला होता है। रवि योग योगिनी सूर्य की अभीष्ट सिद्धि, कृपा होने के कारण, समस्त कार्य पूर्ति करने वाला होता है। अनिष्ट को दूर करने वाला, निर्विघ्नं कार्य करने वाला, समस्त संकटों से सीधे तौर पर बचाने वाला, शुभ फल प्रदान करने वाला रवि योग है।

अगहन मास – मार्गशीर्ष मास क्यों कहलाता है?

इस मास में भगवान श्री कृष्ण की पूजा अर्चना अनेक रूपों में अनेक नाम से उसकी की जाती है इन्हीं रूपों में से एक रुप मार्ग शीर्ष श्री कृष्ण का ही रूप है।

प्राचीन मंदिर काशी विश्वनाथ धाम का शुभ लोकार्पण

13 दिसंबर को अद्वितीय अद्भुत भाग्यश्री काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण समारोह में शामिल होकर भारत के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी अगहन मास की दशमी तिथि को रवि योग में दिवस सोमवार को महा शिव जी योग समूह दोषों को नष्ट करने वाले समय में विद्युत समाज और संतो के बीच, सारे दोष से निवारक योग में, सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाले योग में, शिव का प्रिय काशी नगरी में, गंगा की धारा के किनारे स्थित, प्राचीन मंदिर काशी विश्वनाथ धाम का, शुभ लोकार्पण, समारोह में, प्रधानमंत्री जी करेंगे। जो देश हित में है। संसार का कल्याण करने वाला समय है।

शिव नगरी काशी में सिय – पिय मिलन उत्सव

प्राचीन नगरी काशी, अविनाशी नगरी काशी, मोक्ष प्राप्त करने वाली नगरी में श्री राम के आराध्य शिव की नगरी में, प्राचीन विद्यालय तत्कालीन संपूर्णानंद विश्वविद्यालय में, बाबा विश्वनाथ की ओर से आयोजित महोत्सव की शुरुवात 1 दिसंबर से 9 दिसंबर तक शंभू आनंद संस्कृत विश्वविद्यालय प्रांगण में सीताराम विवाह महोत्सव का आयोजन आयोजित किया गया है।

सूचनानुसार कार्यक्रम की रूपरेखा

  • श्री गौरी शंकर भगवान विवाह लीला, 1 दिसंबर 2021 की।
  • जय विजय लीला, 2 दिसंबर।
  • राम जन्म और बाल लीला, 3 दिसंबर।
  • सीता जी का जन्म, विश्वामित्र से अहिल्या उद्धार की लीला, 4 दिसंबर।
  • जनकपुर प्रवेश एवं नगर दर्शन की लीला, 5 दिसंबर।
  • सिय – पिय मिलन फुलवारी और धनुष यज्ञ, 6 दिसंबर।
  • हल्दी मटकोर व राम बारात शोभायात्रा, 7 दिसंबर।
  • सीताराम विवाह, 8 दिसंबर।
  • राम कलेवा का आयोजन।
  • भागवत कथा का अमृत पान।

अवि मुक्त काशी

भगवान शिव ही प्राणियों के सृष्टि कर्ता संचालक तथा संघार करता है। क्योंकि जिसकी दृष्टि मात्र से ही प्रकृति शैवीयाे गई तथा सृष्टि के समय तक व्यक्त सभा वाली यह प्रकृति गुणों से युक्त हो गई। विश्व उद्धार करने वाली यह शक्ति अतिथि अजा नाम से विख्यात है। शिव कल्याण रूप, आनंद मय अनंत अनादि और ज्ञान के ध्येय हैं । वह पार्वती जी से खुद कहते हैं कि … हम तुम दोनों का अभिन्न तेज जो है वही अवि मुक्त काशी है। ज्योतिर्लिंग तू हो और लिंगवान महेश्वर मै हूं। इसी को जागृत रूप काशी कहा गया है। अवि का अर्थ पाप है। और जो पाप मुक्त क्षेत्र है वह अविमुक्त नाम से प्रसिद्ध है। वही काशी है।

स्कन्द पुराण के अनुसार

काशी का पृथ्वी से संबंध नहीं है, यह स्वाइन उचित उच्चतर लोक है। यह क्षेत्र मोक्ष दायनी है। काशी त्रिपुरारि की कृपा की राज नगरी है। मोक्ष कामी सन्यासी भी अविमुक्त क्षेत्र का सेवन करते हैं। इस क्षेत्र में रहने वाला पापी भी नरक में नहीं जाता है। लेकिन जानबूझकर पाप करने वाले को शिव शंकर माफ नहीं करते हैं।

विश्वनाथ मंदिर में दर्शनार्थियों के लिए एक श्लोक

माता तु पार्वती देवी पिता देव महेश्वर:।
बांधवा: शिव भक्ताष्च स्वदेशो भुवन त्रयम॥

कहने का तात्पर्य है कि काशी होने की कश्ती कसौटी है। यदि काशी में हो तो अपने को सीमित दायरे से बाहर निकालो। केवल अपनी माता को ही माता ना मानो अपितु सारी स्त्रियों को माता मानो, धूप पार्वती स्वरुप करुणा की देवी हैं। सारे पुरुषों को पिता मानो, जो अपने आचरण से तुम्हें अनुशासित करते हैं, वह सब महेश्वर हैं। जो लोक को धारण करने वाले हैं। लोक मंगल में लगे हुए हैं। ये ही हमारे भाई बंधु हैं।

यदि ऐसा हुआ तो तुम्हारा व्यक्तित्व पृथ्वी और पाताल लोक पर ही नहीं परलोक तक चमकने वाला, छा जाने वाला होगा। तभी तो तुम असली काशी वासी बनोगे। मान्यता और पुराणों के अनुसार शिव जी ने कई युगों में अपने इस विस्तृत काशी के स्वरुप की प्रदक्षिणा की है। इसलिए कल्याण के निमित्त काशी की पवित्र भूमि की प्रदक्षिणा करने वाली है। भव्य दिव्य नगर काशी को बारंबार प्रणाम। भगवान श्री राम के इष्ट शिव शंकर को मेरा सादर प्रणाम। भगवान शंकर की प्रिय श्री राम, लखन भरत शत्रुघ्न सहित माता सीता जी को सादर प्रणाम करता हूं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख में समझाने की कोशिश की है — विश्व उद्धार करने वाली यह शक्ति अतिथि अजा नाम से विख्यात है। शिव कल्याण रूप, आनंद मय अनंत अनादि और ज्ञान के ध्येय हैं । वह पार्वती जी से खुद कहते हैं कि … हम तुम दोनों का अभिन्न तेज जो है वही अवि मुक्त काशी है। ज्योतिर्लिंग तू हो और लिंगवान महेश्वर मै हूं। इसी को जागृत रूप काशी कहा गया है। अवि का अर्थ पाप है। और जो पाप मुक्त क्षेत्र है वह अविमुक्त नाम से प्रसिद्ध है। वही काशी है।

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यह लेख (काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रथम चरण का लोकार्पण।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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कार्तिक पूर्णिमा स्नान।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ कार्तिक पूर्णिमा स्नान। ♦

नमन इस महा जीवन दिवस को करें,
सत भक्ति भाव से, कार्तिक पूर्णिमा को।
हों ध्यानमय, महत्तर कार्य, इस लग्न में,
तन-मन, विवेक स्नात हों, करें प्रवेशसदा।
पवित्र देवनदी में……॥

मानव – व्यक्तित्व सदा श्रेयस है, धरा पर,
त्रिवेणी है, जहाँ ज्ञानमय, मनोमय, आत्म –
तत्त्व कोष, सदा अमर – कोष रूप रक्षित।
लें संकल्प, रहे सुरसरि शुद्ध सदानीरा॥

मनकोष, प्राणकोष, ज्ञानकोष सुरसरि का,
स्रोत है, सतत आरोग्य, ज्ञान, जीवन-मोक्ष का।
तरंगिणी यह श्लोक है, प्रकृति – रक्षण का,
करें शोध हम, इसकी परिशुद्धि हेतु जो॥

देवनदी रहें, मातृत्व – भाव स्नेहिल, निर्मल,
तो कृतिका पूजन से शिव होते हर्षित होंगे।
अभयदानी, वह विश्व – जन कल्याण के ध्यानी,
विचरें जटा बिच गंग – सलिल पूत॥

ज्ञान दीप आज का, देवनदी शुद्ध रहें,
अनंत काल रहें, वह मोक्षदा धरा हेतु।
सुरसरि-जल में मिलन हो जन-भक्ति,
भाव की वारि का, जो सत्य हो, ‘पुष्कर’
लक्ष्य ‘पद्मक-योग’……॥

♦ प्रो• मीरा भारती जी – पुणे, महाराष्ट्र  ♦

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  • “प्रो• मीरा भारती जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से बताने की कोशिश की है — बुरी शक्तियों पर दैवी शक्तियों को जीत जब मिलता है, उस जीत की खुशी में सभी देवतागण द्वारा जो दीपक जलाकर अपनी खुशी जाहिर की जाती है वही देव दीपावली का महापर्व कहलाया। आओ हमसब मिलकर इस देव दीपावली महापर्व को सच्चे मन से मनाए। इस दिन ध्यान साधना करे, सच्चे मन से। अपने मन को शांत रखने के लिए इस देव दीपावली पर देशी घी से यज्ञ करे पूर्ण शांत मन से। देव दीपावली पर पुरे दिन अच्छे व सच्चे मन से ध्यान – साधना में रत रहे। पूर्ण शांत मन से ध्यान करने से, आपके आत्मा की सुषुप्त शक्तियां जागृत होने लगती। आत्मा की सुषुप्त शक्तियां जिस भी मनुष्य की जागृत हो जाती है, उसके लिए हर कार्य आसान हो जाता हैं।

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यह कविता (कार्तिक पूर्णिमा स्नान।) “प्रो• मीरा भारती जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं से नई पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम मीरा भारती (मीरा मिश्रा/भारती) है। मैंने BRABU Muzaffarpur, Bihar, R.S College में प्राध्यापिका के रूप में 1979 से 2020 तक सक्रिय चिंतन और मनन, अध्यापन कार्य किया, आनलाइन शिक्षण कार्यक्रम से वर्तमान में भी जुड़ी हूं, मेरे द्वारा प्रशिक्षित बच्चे लेखनी का सुंदर उपयोग किया करते हैं। मैंने लगभग 130 कविताएं लिखी है, जिसमें अधिक प्रकाशित हैं, कई आलेख भी, लिखे हैं। दृढ़ संकल्प है, कि लेखन और अध्यापन से, अध्ययन के सामूहिक विस्तारण से समाज कल्याण – कार्य के कर्तृत्व बोध में वृद्धि हो सकती है। अधिक सकारात्मक परिणाम आ सकते हैं।

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चुनावी मौसम।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ चुनावी मौसम। ♦

मौसम आया चुनावों का देखो,
हर दल जनता को लुभाते है।
लोक लुभवन घोषणा पत्र तो कभी,
विचित्र सा स्वप्न – डर दिखलाते हैं।

कुछ का बिगड़ा मिजाज है देखो,
मय – माया से वोट खरीदवाते हैं।
सत्ता हो हासिल जैसे भी कैसे,
साम, दाम, दंड, भेद सभी अपनाते हैं।

धिक्कार है ऐसी जनता को जो,
अपना जमीर बेच के खाती है।
किस्मत फोड़ के खुद ही अपनी,
क्यों कहती है? सत्ताएं हमें सताती हैं।

तब थे देखो हुए तुम मदमाते,
अब सत्ताएं भी हुई मदमाती हैं।
तुम ने लूटा इनसे तब थोड़ा – थोड़ा,
अब सब ये तुमसे पूरा करवाती हैं।

देश की हो गई है देखो हालत पतली,
जनता – सत्ता अदला-बदली ही चुकाती हैं।
कैसे सुधरेगी हालत देश की तब तक?
जब तक जनता खुद ही न जाग जाती है।

है किसी भी दल के नेता के यहां,
नेक न देखो कोई भी इरादे।
सत्ता को हथियाने के चलते सब,
करते हैं देखो हर वादे पे वादे।

यह रोग नहीं है मात्र ऊपर ही ऊपर,
इसकी गिरफ्त में है स्थानीय निकाय।
इलाज एक ही दुरुस्त है इसका बस,
कि कैसे ना कैसे जनता जाग जाए।

सवाल एक ही चूहे – बिल्ली के खेल में,
बिल्ली के गले में घंटी कौन लटकाए?
सबकी हो गई है फितरत एक सी आज,
कैसे न कैसे जान बचे तो लाख उपाए।

देश की किसी को न चिंता है आज,
हसरत है, मेरा तुम्बा पहले भर जाए।
फिर कोई जाति – धर्म मे बांटें हमको,
या फिर खुद ही अपना वोट बिकवाए।

चुनावी मौसम है भाई हाथ मार लो,
फिर क्या मालूम फसल आए न आए?
मतदान है महा पुण्य दान, ये इनको,
कौन समझाए ? कि इसे न बिकवाए।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — चुनाव नजदीक आते ही नेता लोग आने लगते है हमारे घर पर वोट मांगने, जितने के बाद नेता जी 5 वर्ष के लिए लापतागंज में लापता हो जाते है। एक बार भी भूल से भी नज़र नहीं आते नेता जी। और तो और जनता के पैसे पर ऐश करेंगे और हमे ही डराएंगे व धमकाएंगे, कोई कार्य नहीं करेंगे, बस अपना खज़ाना भरेंगे। अपनी 12 पीढ़ियों के लिए खज़ाना भरेंगे। इनके नज़रिये से जनता जाए भाड़ में अपना खज़ाना भरेंगे दबा के। जनता भी कुछ कम नही है, चंद पैसो के लिए अपने वोट को बेच देती है। उसके बाद सरकार को कोसती रहती है।

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यह लेख (चुनावी मौसम।) “हेमराज ठाकुर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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ये इश्क।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ ये इश्क।  ♦

सुना करते है ये इश्क तो होता है बहुत लाजवाब।
न किया तो सोचों खो दिया एक सुनहरा ख्वाब॥

सोचा चलो हम भी इश्क कर ही लेते है।
इस दिल को एक नया उपहार देते है॥

कुछ नियम तो नहीं, मालूम नही थे इसके हमको।
बस शिद्दत से चाहना होता है इश्क करो जिसको॥

हम करने लगे उसको दिल जान से प्यार।
बना लिया उसको रात – दिन का यार॥

दुनिया वाला इश्क दिल से आकर चला गया न जाने कब।
यूँ प्यार भरी नजरों से देखते ही रहें हमें सब॥

पर हम तो बहुत दीवाने हुए हो गए मस्ताने।
अपनी प्यारी कलम के इश्क में बन गए परवाने॥

सच कहूँ तो मुझें भी खबर न लगी ये हुआ कब।
मेरे इश्क ने इसको सच्ची प्रेमिका बना लिया अब॥

कुछ जुनून कुछ इश्क मेरा, मेरी कलम से।
मेरी मंजिल तक पहुँचा देगी, कसम से॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — एक सच्चे और अच्छे रचनाकार का पूर्ण प्रेम मात्र अपनी कलम और अपनी रचना से होती है। एक सच्चा रचनाकार अपनी रचनाओं से सभी दिलों में सच्चा व पवित्र सात्विक प्रेम जागृत करता है। इस संसार के प्रेम की बात करे तो… इश्क का मतलब क्या केवल दो जिस्मों का मिलन ही होता है या फिर कुछ और ? अगर सच कहु तो सच्चा इश्क वो होता है जिसमे दो आत्माओ का मन का तार जुड़ता है, पूर्ण मन से एक दूजे को समझते है। सच्चे इश्क में स्वार्थ का कोई स्थान नहीं होता है। बस होता है तो पूर्ण मन से प्रेम ही प्रेम। प्रेम का मतलब दो जिस्मों का मिलन नहीं होता, प्रेम का मतलब होता है पूर्ण मन से एक दूजे का सम्मान करना, रक्षा करना, ख्याल रखना।

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यह कविता (ये इश्क।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का शिलान्यास।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का शिलान्यास। ♦

25 नवंबर 2021

Noida International Airport / Jewar Airport

Noida International Greenfield Airport

बुद्धि जड़ता को हरने वाली होती है। बुद्धि ही मनुष्य की वाणी में सत्यता लाती है और मनुष्य को प्रतिष्ठा देकर अभ्युदय करती है। मान प्रतिष्ठा की वृद्धि करती है। पाप कर्म को हरती है। दशो दिशाओं में यश कीर्ति फैलती है।

वह मनुष्य शास्त्रों द्वारा अलंकृत शब्दों से विभूषित सुंदर वाणी बोलने वाला होता है। समाज को उपदेश देने वाला होता है। आश्रित के ऊपर उदारता रखता है। दया और क्षमा की भावना उसमें कूट कूट कर भरी रहती है। जिस व्यक्ति के अंदर क्षमा है उसे किसी कवच की आवश्यकता नहीं होती है। इसके विपरीत दुष्टों की संगत करने वालों को विषैले सर पाद पालने की आवश्यकता नहीं होती है।

जो व्यक्ति संकल्प शील, पूर्ण विश्वासी, परिस्थितियों से समझौता ना करने वाला, पुरुषार्थ से भरा हुआ, विघ्नों से जूझने वाला, होता है वह जो संकल्प उठा लेता है उसे हर हाल में पूरा करता है। यह भी कहा जाता है कि इस संसार में जो जन्म लेता है उसकी मृत्यु भी निश्चित रूप से होती है। लेकिन धन्य वही जो जन्म लेकर अपने कुल को गौरवान्वित करता है। तेजस्वी होता है।

इस संसार में कुछ ऐसे भी व्यक्ति है जो धनवान होने पर समस्त भूमंडल तृणवत समझते हैं। जब की कुछ ऐसे सत्य और निष्ठा वाले कठोर कदम उठाने वाले, तपी, मधुर वचन बोलने वाले, दयालु और समाज को नई दिशा देने वाले व्यक्ति होते हैं जो संयमी व्यक्ति होते हैं जिन्हें सभी में ईश्वर का रूप दिखता है।

बात कुछ और करना है।
25 नवंबर बृहस्पतिवार सन 2021 ई. समय 12:00 बजे दोपहर को जेवर में, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का शिलान्यास भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी के कर कमलों द्वारा हुआ। इस मौके पर माननीय जोतिरादित्य एम सिंधिया मंत्री, नागरिक विमानन भारत सरकार, नंद गोपाल गुप्ता नंदी मंत्री, नागरिक उड्डयन, राजनीतिक पेंशन, अल्पसंख्यक कल्याण, उत्तर प्रदेश की माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, उपमुख्यमंत्री आदरणीय केशव प्रसाद मौर्य, सांसद विधायक आज गाड़ी कर्मचारी की गरिमामय उपस्थिति में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट / जेवर एयरपोर्ट, गौतम बुद्ध नगर, का शिलान्यास हुआ। शिलान्यास का कार्य पूरा हो जाने के बाद दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, आगरा अलीगढ़ फरीदाबाद जैसी शहरों के साथ – साथ करोड़ों लोगों को इसका विशेष लाभ मिलता रहेगा।

उत्तर प्रदेश जिसे पहले पिछड़े प्रदेशों में गिना जाता रहा वहां योगी सरकार आने के बाद उत्तर प्रदेश को पांच इंटरनेशनल एयरपोर्ट मिल गया। जेवर में, नोएडा इंटर नेशनल एयरपोर्ट जिसका शिलान्यास हुआ वह एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा। भारत के प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी जी कुशीनगर एयरपोर्ट का उद्घाटन और पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का लोकार्पण अभी हाल में ही किया।

नोएडा हवाई अड्डे के शिलान्यास समारोह के दौरान अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश को वह मिल रहा जिसका वह हकदार था। पहले की सरकारों ने जनता को झूठे सपने दिखाए। इसका प्रभाव उत्तर प्रदेश पर पड़ा। उत्तर प्रदेश में पहले अभाव और अंधकार, अब अंतरराष्ट्रीय छाप छोड़ रहा है प्रदेश। उत्तर प्रदेश आज राष्ट्रीय हित ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय छाप छोड़ रहा है।

कनेक्टिविटी के क्षेत्र में नोएडा बेहतरीन मॉडल बनेगा

जेवर में प्रधानमंत्री ने दुनिया के चौथे सबसे बड़े हवाई अड्डे की नींव 25 नंबर को नोएडा हवाई अड्डे के नाम से रखी। इस मौके पर उन्होंने कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में 21 वीं सदी का भारत ने एक से एक बढ़कर कदम उठा रहा है। उत्तर प्रदेश राजस्व गेटवे के रूप में भरेगा।

उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी के क्षेत्र में नोएडा बेहतरीन मॉडल बनेगा। एयरपोर्ट शुरू हो जाने पर किसानों की उपज सामग्री और स्थानीय उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में आसानी से पहुंच सकेंगे। जो सब्जियां जल्द खराब हो जाती हैं वह भी चंद घंटो में विदेशी ग्राहक के पास तक पहुंच सकेंगी। इस एयरपोर्ट से मुरादाबाद के पीतल, सहारनपुर का फर्नीचर, आगरा का फुटवियर और पेठा उद्योग, सब कुछ सामान ए प्रतिस्पर्धा करने वाली हो जाएंगी।

उन्होंने कहा जिन प्रदेशों की सीमा समुद्र से मिलती है वहां बंदरगाह आर्थिक उन्नत का रास्ता होता है। परंतु उत्तर प्रदेश जैसी प्रदेशों के लिए जो समुद्र से दूर है इन राज्यों के लिए यही भूमिका एअरपोर्ट ही सही होती है। इसी एयरपोर्ट के बन जाने से उत्तर प्रदेश के साथ – साथ दिल्ली, हरियाणा, उतर उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और छत्तीसगढ़, झारखंड सहित अन्य राज्यों को भी लाभ होगा।

माननीय ज्योतिरादित्य सिंधिया नागरिक गुड्डन मंत्री के अनुसार जेवर मे बन रहे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, दिल्ली में पहले से स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को पीछे छोड़ देगा।

खास बात यह है कि यहां मेंटेनेंस, रिपेयरिंग ओवरहार्लिंग (एम आर ओ) सर्विस की सुविधा भी सुलभ होगी। जबकि अभी तक विमानों की मरम्मत के लिए पचासी फीसदी विमानों को भारत से बाहर विदेशों में मरम्मत के लिए भेजा जाता रहा है।
इसी एयरपोर्ट के बन जाने और यहां दी जाने वाली सुविधाओं की परियोजनाएं पूर्ण हो जाने पर विमान मरम्मत में होने वाला सारा खर्च भारत में ही रहेगा। यही प्रधानमंत्री जी के मेक इन इंडिया विजन भी है।

उत्तर प्रदेश में इंटरनेशनल एयरपोर्ट

  • नोएडा इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट / नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट / जेवर हवाई अड्डा
  • चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट / लखनऊ एयरपोर्ट
  • लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट / वाराणसी एयरपोर्ट
  • कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट / कुशीनगर एयरपोर्ट

उत्तर प्रदेश में एयरपोर्ट

  • नोएडा इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट / नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट / जेवर हवाई अड्डा
  • चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट / लखनऊ एयरपोर्ट
  • लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट / वाराणसी एयरपोर्ट
  • कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट / कुशीनगर एयरपोर्ट
  • आगरा एयरपोर्ट – Agra Airport
  • इलाहाबाद एयरपोर्ट (प्रयाग) – Allahabad Airport (Prayag)
  • बरेली एयरपोर्ट – Bareilly Airport
  • हिंडन एयरपोर्ट – गाजियाबाद
  • गोरखपुर एयरपोर्ट – Gorakhpur Airport
  • कानपुर एयरपोर्ट – Kanpur Airport

ऐतिहासिक कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ऐतिहासिक कदम उठाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं। उनका मानना है कि मेरा वनवासी, मेरा दलित, मेरा वंचित, इसको मुझे विकास की यात्रा में ऊपर लाना है। वह जिस समय गुजरात के मुख्यमंत्री रहे आदिवासियों के लिए 40 हजार करोड़ का वनबंधु पैकेज तैयार किया। गुजरात की आदिवासी क्षेत्र में कार्यरत लोग आज भी इस पर अभ्यास कर रहे हैं। गुजरात में मोदी ने कमाल कर दिखाया था। शहरी गरीबों के लिए भी बहुत काम किया था। युवा / युवकों में शक्ति का संवर्धन के हमेशा शक्ति प्रदान करते रहते हैं।

रोजगार के अवसर

  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बाद लोकल उत्पादन, और उपज, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पहुंचेगा जिससे अधिक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
  • लाखों लोगों को इससे रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।
  • एयरपोर्ट के साथ एयरो-सिटी के निर्माण की भी योजना है। इसमें भी लोगों को रोजगार के मौके प्राप्त होंगे।
  • प्रति वर्ष करीब सवा करोड़ लोगों का आवागमन होगा जिसका लाभ उत्तर प्रदेश को प्रत्यक्ष रुप से मिल मिलेगा।

जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने से उत्तर प्रदेश में देश के राज्यों में सर्वाधिक पांच इंटरनेशनल एयरपोर्ट वाला राज्य उत्तर प्रदेश हो जाएगा। उत्तर प्रदेश ,उत्तर भारत की सीमा क्षेत्र में स्थित लॉजिस्टिक गेटवे के रूप में प्रदेश यानी उत्तर प्रदेश ग्लोबल लॉजिस्टिक मैप पर उभर रहा है।

भारत में पहली बार इंटेग्रेटेड मल्टी मॉडल कार्गो हब एयरपोर्ट का निर्माण, लॉजिस्टिक लागत में कमी और समय की बचत होगी ऐसा बताया गया। इंटरनेशनल एयरपोर्ट होने से हॉस्पीटल की और टूरिज्म सेम टू बढ़ावा मिलेगा। एयरपोर्ट के साथ ग्राउंड ट्रांसपोर्टेशन सेंटर का भी विकास होगा, जिससे एयरपोर्ट तक रोड, रेल और मेट्रो की निरंतर कनेक्टिविटी बनी रहे। इस एयरपोर्ट का काम बस 2024 तक पूरा होने का लक्ष्य रखा गया।

आखिर उनकी वह कौन सी विशेषताएं हैं ……

आखिर उनकी वह कौन सी विशेषताएं हैं जिसे देखकर भारत ही नहीं संपूर्ण विश्व अपनी समस्याओं का हल निकालने के लिए उनके अंदर तलाश करते हैं। गुजरात में मुख्यमंत्री हुए उन्होंने गुजरात को आगे लाकर खड़ा कर दिया। एक बार जब मुख्यमंत्री रहे तो उन्होंने कहा था कि कश्मीर एक, भारत राज्य का राज्य में केंद्र सरकार हल नहीं कर पा रही है गुजरात, पाकिस्तान की सीमा से लगा हुआ है, गुजरात के लोगों के खिलाफ उसे किसी प्रकार की गलत नियत से आने की हिम्मत नहीं। जिस विकास का फंडा लेकर गुजरात में उन्होंने परचम लहराया उसी फंडा को लेकर उस पर चलकर पूरी भारत में विकास का परचम लहरा दिया। इसलिए उन्हें प्रगट पुरुष, सम्राट, संत पुरुष, तपस्वी, विश्लेषण से जनता उन्हें सम्मान पूर्वक नाम लेती है। रचनाकार कहता है —

………

एक गुजराती निज तप बल पर,
भारत को स्वर्ग बना डाला।
आतंकी और गद्दारों के सीने पर,
चढ़कर प्रगट पुरुष छाया।

उसने कसमें खाई मां की खाई थी,
धरा पे आतंकी नहीं आने देंगे।
समय समझ चुके भोले शंकर के,
मां पर दाग ना लगने देंगे।

जो भी सेना का अपमान करेंगे,
उनको अब नहीं छोड़ेंगे।
राष्ट्र से गद्दारी करने वालों की,
सीना पर जाकर बोलेंगे।

केसर की क्यारी में ऐसा कोई,
आतंकी नहीं पलने देंगे।
इसकी दुश्मनों को अब हमनें ,
अच्छे से पहचान लिया।

देश में गद्दारी करने वालों को,
सारा समाज जान लिया।
दिल्ली की धरती पर हमने,
गद्दारों को देखा था।
रस्साकसी है देवासुर संग्राम की,
जय श्री राम की।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख में समझाने की कोशिश की है — आखिर उनकी वह कौन सी विशेषताएं हैं जिसे देखकर भारत ही नहीं संपूर्ण विश्व अपनी समस्याओं का हल निकालने के लिए उनके अंदर तलाश करते हैं। गुजरात में मुख्यमंत्री हुए उन्होंने गुजरात को आगे लाकर खड़ा कर दिया। एक बार जब मुख्यमंत्री रहे तो उन्होंने कहा था कि कश्मीर एक, भारत राज्य का राज्य में केंद्र सरकार हल नहीं कर पा रही है गुजरात, पाकिस्तान की सीमा से लगा हुआ है, गुजरात के लोगों के खिलाफ उसे किसी प्रकार की गलत नियत से आने की हिम्मत नहीं। जिस विकास का फंडा लेकर गुजरात में उन्होंने परचम लहराया उसी फंडा को लेकर उस पर चलकर पूरी भारत में विकास का परचम लहरा दिया। इसलिए उन्हें प्रगट पुरुष, सम्राट, संत पुरुष, तपस्वी, विश्लेषण से जनता उन्हें सम्मान पूर्वक नाम लेती है।

—————

sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह लेख (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का शिलान्यास।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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नोएडा इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नोएडा इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट। ♦

Jewar Airport – जेवर हवाई अड्डा

नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, जिसे जेवर हवाई अड्डे और आधिकारिक तौर पर नोएडा अंतर्राष्ट्रीय ग्रीनफ़ील्ड हवाई अड्डे के रूप में भी जाना जाता है, उत्तर प्रदेश के गौतम बौद्ध नगर में जेवर शहर के पास एक निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है।

ये एयरपोर्ट दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 72 किलोमीटर दूर होगा। ये एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा और फर्स्ट नेट जीरो एमिशन एयरपोर्ट होगा, यानी की पूरी तरह से प्रदूषण से मुक्त होगा। अगर बात करें लोकेशन की तो ये आगरा से 130 किलोमीटर और दिल्ली से महज 72 किलोमीटर दूर होगा। इसकी ग्रेटर नोएडा से दूरी करीब 28 किलोमीटर है।

नाम: नोएडा इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट / जेवर एयरपोर्ट / नोएडा इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट
स्थान: जेवर, जिला – गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश, भारत (हिंदुस्तान, भारतवर्ष)
संचालक: यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (YIAPL) – (a SPV of Zurich Airport AG)
मालिक: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड – (NIAL)
सेवा: नई दिल्ली, नोएडा और ग्रेटर नोएडा
वेबसाइट: https://niairport.in/

नोएडा इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट (Noida International Greenfield Airport) इसलिए भी खास है क्योंकि नोएडा दिल्ली एनसीआर में आता है। दूसरी बात नोएडा निवेशकों की पहली पसंद बन गया है।

25 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने पश्चिमी उत्तर में मौजूद नोएडा में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का शिलान्यास किया। जेवर एयरपोर्ट एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है।

जेवर एयरपोर्ट दिल्ली NCR में इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट ( IGI) के बाद ये दूसरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा होगा। नोएडा एयरपोर्ट के बनने के बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर यात्रियों की भीड़ कम होगी। नोएडा एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद दिल्ली, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद, अलीगढ़ आगरा, और आसपास के शहरों के लोगों को फायदा मिलेगा।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की मौजूदगी में होने वाले एयरपोर्ट के शिलान्यास का पहला चरण 2023-24 में पूरा होगा। इसी के साथ ही उत्तर प्रदेश 5 अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट वाला देश का पहला राज्य होगा।

नोएडा इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का शिलान्यास

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का शिलान्यास करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘आप सभी को, देश के सभी लोगों को, उत्तर प्रदेश के भाई-बहनों को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की बहुत-बहुत बधाई। इसका बहुत बड़ा लाभ दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करोड़ों लोगों को होगा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कनेक्टिविटी की दृष्टि से भी एक बेहतरीन मॉडल बनेगा।

उन्होंने कहा कि ‘यहां आने जाने के लिए टैक्सी से लेकर मेट्रो और रेल तक हर तरह की कनेक्टिविटी होगी। आज देश में जितनी तेजी से एविएशन सेक्टर में वृद्धि हो रही है, जिस तेजी से भारतीय कंपनियां सैकड़ों नए विमानों को खरीद रही हैं, उनके लिए भी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की बहुत बड़ी भूमिका होगी। अब तो दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे भी तैयार होने वाला है। उससे भी अनेकों शहरों तक पहुंचना आसान हो जाएगा’।

पीएम मोदी ने कहा कि ‘यहां से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लिए भी सीधी कनेक्टिविटी होगी। यहां अलीगढ़, मथुरा, मेरठ, आगरा, बिजनौर, मुरादाबाद, बरेली जैसे अनेकों औद्योगिक क्षेत्र हैं। यहां सर्विस सेक्टर का बड़ा इकोसिस्टम भी है और एग्रीकल्चर सेक्टर में भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अहम हिस्सेदारी है। अब इन क्षेत्रों का सामर्थ्य भी बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा’।

पीएम मोदी ने कहा कि जेवर इंटरनेशनल मानचित्र में आ गया। किसान हो या व्यापारी, मजूदर या व्यवसायी हर किसी को इसका बहुत – बहुत लाभ मिलेगा।

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि – भारत के नागरिकों ने एक बदलते हुए भारत को देखा है। ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ को बनते देखा है। पीएम मोदी जी ने एक भारत, श्रेष्ठ भारत की कल्पना पूरी की है। उन्होंने कहा कि जेवर एयरपोर्ट से पश्चिमी यूपी का तेजी से विकास होगा।

सिंधिया ने कही बड़ी बात केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री (Civil Aviation Minister) ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी जेवर के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को देश के विमानन क्षेत्र के लिए बेहद अहम करार दिया है। सिंधिया ने कहा कि “जेवर एयरपोर्ट देश के विकास में अहम योगदान देगा। यह एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा। साथ ही इस एयरपोर्ट से एक लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा होंगी।”

यूपी की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम

जेवर एयरपोर्ट पर परिचालन शुरू होने के बाद इससे यूपी की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा मिलेगा। 6200 हेक्टेयर क्षेत्र में बन रहा यह एयरपोर्ट भारत का आधुनिकतम ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट होगा। शुरुआत में इस एयरपोर्ट की सालाना क्षमता 1.2 करोड़ यात्रियों की होगी। यूपी में जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद 16 एयरपोर्ट परिचालन में आ जाएंगे, जिससे राज्य के विमानन क्षेत्र के साथ ही अर्थव्यवस्था को भी बहुत फायदा पहुंचाएगा।

यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में कई औद्योगिक ईकाइयों का निर्माण प्रस्तावित है। ऐसे में एयरपोर्ट बनने से इन औद्योगिक ईकाइयों को भी फायदा पहुंचेगा। साथ ही इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

♦ संपादकीय ♦

—————

— Conclusion —

  • ये एयरपोर्ट दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 72 किलोमीटर दूर होगा। ये एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा और फर्स्ट नेट जीरो एमिशन एयरपोर्ट होगा, यानी की पूरी तरह से प्रदूषण से मुक्त होगा। अगर बात करें लोकेशन की तो ये आगरा से 130 किलोमीटर और दिल्ली से महज 72 किलोमीटर दूर होगा। इसकी ग्रेटर नोएडा से दूरी करीब 28 किलोमीटर है।

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श्रवण क्षेत्र अंबेडकर नगर।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ श्रवण क्षेत्र अंबेडकर नगर। ♦

खार ही खार जिसके हो मन में भरा,
पलटकर पूर्वांचल एक्सप्रेस वे देखे जरा।
राह में अकबरपुर प्रतीक्षा में है खड़ा,
बोलता है वह मीठी बोली मैं ही सदा॥

नफरतों को जो मन में छुपाए हुए हो,
दिल्ली से बलिया सुंदर सजाए बड़ा।
मुस्करा रहा आजमगढ़, मऊ देखकर,
गांव के लिंक अंबेडकर नगर देखकर॥

खैर पूछेगा पर जब सामने आएगा,
बाराबंकी, सुल्तानपुर, गाजीपुर से जाएगा।
आवाजाही की सुविधा सुंदर सुलभ,
जाम से अकबरपुर निजात पाएगा॥

एक दिन काम आएगी करामात यह,
फोरलेन सड़क सब जब हो जाएगी।
छोड़कर आदतों को सब अपनी बुरी,
रास्ते पर चलने जनता आ जाएगी॥

मेरे दिल ने कभी तो यह भी है चाहा,
परंपराओं को अपने सिर पर बिठाया।
शब्दों को मैंने भाव ओढ़े गहना बनाया,
लहराती सरयू तट पर लहरें नेक नियत लाया॥

कवि वाल्मीकि श्रवण क्षेत्र रामायण रच डाला,
श्रृंगी ऋषि का सेवा गंज क्षेत्र मन को भाने वाला।
फलाहारी बाबा का बसखारी में एक आश्रम आला,
रामबाग के संत अवध दास का आश्रम बड़ा निराला॥

मेरा योगी बांध रहा है गांव – गांव में टीले – पीले,
खारेपन को रोक रहा है और परोसता मीठी झीलें।
साकेत को सजाने की कसमें उसने संकल्पित कर ली,
मान रखोगे क्या उन सारे संकल्पों वचनों की॥

गोपाल बाग राजेसुल्तानपुर का पहले ही नाम पड़ा,
मलेक्ष काल में इसका नाम बदलकर सुल्तानपुर जड़ा।
इसके उत्तर में श्री श्री लल्लन ब्रह्मचारी जी का धाम है,
आश्रम घिनहापुर का देश में अपना एक स्थान है॥

जलालपुर के संत पलटू साहब का एक इतिहास है,
डगमगाती नाव कि यह आश्रम बड़ी दृढ़ पतवार है।
घन निशा में नसीरपुर की भुजिया माता दृष्टि देती,
भयंकर भंवर से निकाल कर जिंदगी सवार देती॥

सरयू, मड़हा, विसुई नदी अंबेडकर नगर में बहती है,
थिरुई, मझुई, तमसा नदी भी सबकी दु:ख हरती है।
स्थापत्य कला में अंबेडकर नगर जिला महान है,
हंसवर, मकरही – देवरिया स्टेट का दर्जा ज्ञानवान है॥

लोरपुर – रियासत और चाहोड़ा घाट मंदिर विद्यमान है,
प्राचीन इतिहास में इसका सुंदर और खूबसूरत नाम है।
29 सितम्बर 1995 में अंबेडकर नगर जिला नाम मिला,
तत्कालीन मुख्यमंत्री सुश्री मायावती का ह्रदय खिला,
1 जनवरी सन 1996 में आलापुर तहसील नाम दिया,
राज्यपाल मोतीलाल वोरा ने आकर शिलान्यास किया॥

भीटी, मसढ़ा, शुकुल बाजार, हंसवर के झील है,
चार झीलों से आक्षादित यह पसंद चारो धाम है।
डरबन, देव हट, गढवा और हंसवर जिसका नाम है,
चारों झीलों का पुनर निर्माण करना सरकार के काम है॥

डम डम डमरु बजा शिव बाबा सीमा सीहमई में,
शिव महिमा, शिव मंदिर, बारंबार पारा में गाते हैं।
संत गोविंद साहब जी का विश्व प्रसिद्ध मेला लगता,
अहिरौली गोविंद साहब मैं वर्ष में यह आता रहता॥

योगी सरकार ने अंबेडकर नगर पर ध्यान दिया,
राजकीय मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन प्लांट मिला।
सी एच सी जलालपुर में ऑक्सीजन प्लांट लगेगा,
जनपद ऑक्सीजन संकट से हमेशा दूर रहेगा॥

योगी जनपद में ट्रामा सेंटर का निर्माण करेंगे,
पी जी आई लखनऊ जाने से मरीज बचेंगे।
मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले, जिले में सजने लगे,
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज होने लगे॥

आयुष्मान कार्ड अंबेडकर नगर जिले में मिलने लगे,
मुफ्त इलाज की सुविधा पांच लाख की मिलने लगा।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना चलने लगा,
साढ़े छ: लाख कार्ड धारकों को मुफ्त अनाज मिलने लगा॥

वृद्धजन को वृद्धा पेंशन का पूरा लाभ दिया,
किसान को किसान पेंशन का खाता में भुगतान किया।
मेधावी छात्र – छात्राओं को वाजिफे का लाभ दिया,
ग्रामीण ढेरों में भी गरीबों को पक्का छत मिला॥

इतिहासकार जिले के गुण का करते सदा से गुणगान,
यहां के साहित्यकार रहे हैं बड़े – बड़े गुणवान।
जिले के पत्रकारों ने पत्रिका से छेत्र को प्रकाशित किया,
देश दुनिया के लिए रचयिता वाल्मीकि रामायण रचे॥

यहां के योगाचार्य करते रहते हैं योग का प्रचार,
भारत की संस्कृति को देश विदेश में बताते हैं धर्माचार्य!
प्रवक्ताओं कि इस क्षेत्र में लगी हुई है कतार,
अपने प्रवचन से ही लोगों में भरते हैं संस्कार॥

इस क्षेत्र के लेखकों ने अपनी लेखनी से रचा इतिहास,
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री विचारों का देते रहते विचार!
सत्य मार्ग पर चलने का भाव भरते हैं लोगों में संस्कार,
अयोध्या नगरी का लेखक करता सदा – सदा सत्कार॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — क्षेत्र अंबेडकर नगर के साथ – साथ उसके आस पास के सभी जिलों का व वहां के वर्तमान और इतिहास पर नजर डाला है। बहुत ही सरल शब्दो का प्रयोग करते हुए, विधि पूर्वक सभी मुख्य महान संतो से लेकर अच्छे कार्यों का वर्णन किया है। लगभग पूर्वांचल पर नजर डाला है। वर्तमान सरकार के द्वारा किये जा रहे अच्छे कार्यों का वर्णन भी बखूबी किया है।

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यह कविता (श्रवण क्षेत्र अंबेडकर नगर।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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देव पूर्णिमा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ देव पूर्णिमा। ♦

चली है नई हवा देव पूर्णिमा पर,
ठंडी हवा से लगा वसंत आया लगता है।
सभी जगह खुशनुमा माहौल है,
सर्द पूर्णिमा के साथ वसंत सा आया लगता है।

आओ ऐसी पूजा करे ठंड से,
भूख से, मौत न हो किसी की,
देव पूर्णिमा सर्द ऋतु के साथ बसंत आया लगता हैं।
चारों ओर माहौल में धुआं – धुआं सा छाया है।

इस धुएं को छांटने सर्द हवाओं के साथ,
बसंत सा आया लगता है।
जो महामारी फैली है संसार में चारों ओर,
इसे खत्म करने सर्द ऋतु में बसंत सा आया लगता है।

हरियाली छाई है सर्द मौसम में,
देव पूर्णिमा के साथ वसंत सा आया लगता है।
हर चेहरे पर खुशी की शमा जलती रहे विजयलक्ष्मी,
ये सर्द हवाओं के मौसम में वसंत आया लगता है।

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

—————

  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए समझाने की कोशिश की हैं — बुरी शक्तियों पर दैवी शक्तियों को जीत जब मिलता है, उस जीत की खुशी में सभी देवतागण द्वारा जो दीपक जलाकर अपनी खुशी जाहिर की जाती है वही देव दीपावली का महापर्व कहलाया। आओ हमसब मिलकर इस देव दीपावली महापर्व को सच्चे मन से मनाए। इस दिन ध्यान साधना करे, सच्चे मन से। अपने मन को शांत रखने के लिए इस देव दीपावली पर देशी घी से यज्ञ करे पूर्ण शांत मन से। देव दीपावली पर पुरे दिन अच्छे व सच्चे मन से ध्यान – साधना में रत रहे। पूर्ण शांत मन से ध्यान करने से, आपके आत्मा की सुषुप्त शक्तियां जागृत होने लगती। आत्मा की सुषुप्त शक्तियां जिस भी मनुष्य की जागृत हो जाती है, उसके लिए हर कार्य आसान हो जाता हैं।

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यह कविता (देव पूर्णिमा।) “विजयलक्ष्मी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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