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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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2021-KMSRAJ51 की कलम से

रोजगार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ रोजगार। ♦

आयो मंगल आनंद भयो,
चाहूं ओर बाज्यो बधाई।

रघुवर वर्षों ईंट पाथार,
प्राण अनेकों गवायो।

तरु हिंदून आनंदित हित,
लगतय पौध मुरझाई।

गाल बगावत देश प्रीति,
तकि चूर भयो चतुराई।

झूठे झगड़े मंच मुहल्ले,
पेट की आग दिखाई?

चढ़ परवान भयंकर क्षोभ,
कौवा घर रोटी भाई।

वी टेक एम टेक गैंग मैन,
का ट्रेन में आग लगाई।

सबै गली गल चौर करत,
एम वी ए झाड़ू चलाई?

बरसी अब की रोजगार,
खेल अनेकों गौं समझाई।

आयु मंगल आनंद भयो,
चाहूं ओर बजी बधाई।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — रोजगार के नाम पर जो अफवाह है उसकी सच्चाई को बया किया है। कुछ राजनीतिक लोग इतना ज्यादा गिर गए है की वह आये दिन देश विरोधी हरकते कर रहे है, इनके मन में देश प्रेम से ज्यादा गद्दारी भरा हुआ है। इनके सारे बयान और कार्य देश विरोधी हो रहे है। इनका बस चले तो देश के सभी व्यवस्था को ठप कर दे। इनका इरादा हर तरफ कोहराम मचाने का है।

—————

sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (रोजगार।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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विकास मार्ग पर चला उत्तर प्रदेश।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ विकास मार्ग पर चला उत्तर प्रदेश। ♦

जब से योगी सरकार उत्तर प्रदेश में आई,
लोकतंत्र की खुशियों में बहार लेकर छाई।
महाविद्यालय राज्य महाविद्यालय नये खुलवाई,
इंजीनियरिंग कॉलेज, आई टी आई खूब बढ़वाई॥

जब से योगी सरकार उत्तर प्रदेश में आई,
इंटर कॉलेजों का भाग्य जग गया तब से।
कस्तूरबा कॉलेज फल फूल रहा है कब के,
शिक्षा व्यवस्था में भारी परिवर्तन दिया दिखाई॥

योगी सरकार जब से उत्तर प्रदेश में आई,
महिलाओं की मान सम्मान में चार चांद लगाए।
पीएसी और पुलिस की बटालियन बनवाई,
जबरन धर्म परिवर्तन पर बलकर रोक लगाई॥

योगी सरकार उत्तर प्रदेश में खुशियां लेकर आए,
महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान बढ़ाये।
रोमियो स्क्वाड गठन कराकर सुधार कराई,
स्वास्थ्य विभाग की महिलाओं के प्रति कानून बनाई॥

इंटरनेशनल एयरपोर्ट टर्मिनल विकास किया,
प्रदेश की हवाई पट्टी का जगह – जगह विस्तार किया।
नए – नए एयरपोर्ट संचालित कराकर प्रदेश में,
रक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया॥

मनरेगा में करोड़ों मजदूरों को बढ़ाकर सरकार ने,
मजदूर और गरीबों के महत्वपूर्ण काम किया।
भेदभाव रहित 800000 नौकरिया दिये,
योगी सरकार जब से उत्तर प्रदेश में है आई॥

वायु प्रदूषण कम करने के लिए खूब प्रयास किया,
प्रदेश में चल रहे अवैध बूचड़खाने को बंद किया।
पूरे प्रदेश में पारंपरिक तरीके से वृक्ष लगवाया,
सोलर एनर्जी के कार्यक्रम को खूब चलाया॥

गंगा को निर्मल रखने के लिए जागरूकता फैलाया,
ऑर्गेनिक खेती करने के लिए मुहिम चलाया।
गौ आधारित खेती करवा कर किसानों की आय बढ़ाया,
जल और थल मार्ग से यात्रा करा के जनता को जगाया॥

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाया,
आशा कार्यकर्तियों को उचित मानदेय दिलाई।
सांप्रदायिक शौचालय गांव – शहर में बनवाया,
योगी सरकार जब से उत्तर प्रदेश में आई॥

किसानों की खुशहाली के लिए अनेक योजना लाई,
सरल फसली ऋण बैंकों से उपलब्ध कराई।
हर किसान ने किसान क्रेडिट कार्ड बनवाई,
जब से उत्तर प्रदेश में योगी सरकार आई॥

प्रधानमंत्री सम्मान निधि पूरे प्रदेश में लागू कराई,
किसानों की फसलों का उचित मूल्य दिलवाई।
निरंतर किसानों को बिजली उपलब्ध कराई,
योगी सरकार जब से उत्तर प्रदेश में है आई॥

जल संरक्षण का कार्यक्रम प्रदेशभर चलाएं,
गंगा के तट पर भी घोषणा गोष्ठयां करवाई।
महिलाओं को बैंक सखी बना सम्मान दिलाई,
पूर्वांचल की जब से योगी सरकार है आई॥

उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी का तोफा दिलाई,
फैक्ट्री और कारखाना बढ़ाने की योजना बनाई।
अवैध प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने का काम हुआ,
बंद सड़क आंखें खुली खुशहाली का माहौल बना॥

गुंडे और माफियाओं को लाल किला दिखलाये,
भ्रष्टाचारियों के ऊपर कठोर कदम उठाये।
ई टेंडरिंग के माध्यम से प्रदेश को आगे बढ़ाये,
नौजवान में कला कौशल का प्रशिक्षण कराये॥

गांव में दुग्ध सहकारी समितियों का क्रियान्वयन कराये,
पशुओं के संरक्षण के लिए विविध योजना लाये।
स्मारकों की सुरक्षा के लिए कदम बढ़ाए,
योगी आदित्यनाथ जी जब से प्रदेश सरकार में आए॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — योगी सरकार जब से उत्तर प्रदेश में है आई है तब से उत्तर प्रदेश में क्या – क्या मुख्य कार्य हुआ है उसका जिक्र किया है जैसे – महाविद्यालय राज्य महाविद्यालय, इंजीनियरिंग कॉलेज, आई टी आई नये खुलवाई, महिलाओं की मान सम्मान में चार चांद लगाए। अलग से पीएसी और पुलिस की बटालियन बनवाई, जबरन धर्म परिवर्तन पर बलकर (बलपूर्वक) रोक लगाई। महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान बढ़ाये। रोमियो स्क्वाड गठन कराकर सुधार कराई, स्वास्थ्य विभाग की महिलाओं के प्रति कानून बनाई। और भी बहुत सारे कार्य किये। आओ हम सब मिलकर पुनः उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनाएं।

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यह कविता (विकास मार्ग पर चला उत्तर प्रदेश।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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दुनिया का प्यारा – राष्ट्र का दुलारा – काशी का बना सहारा – सांसद हमारा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ दुनिया का प्यारा – राष्ट्र का दुलारा – काशी का बना सहारा – सांसद हमारा। ♦

चर्चित लोकप्रिय नेता जननायक के रूप में उभरे नरेंद्र मोदी की कीर्ति जनता के हृदय में सहानुभूति जगाती रही। अधिकांश लोग नरेंद्र मोदी को राष्ट्र धारक और जननायक के रूप में देखने लगे। घर में आर्थिक अभावों के कारण भी वह किसी पर बोझ बन कर नहीं जीना चाहते थे। जीवन में बहुत सारी परेशानियां आई उन्हें काटते झाड़ते जीवन का रास्ता खोजा और अपने संपूर्ण हाथ बल से परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए क्षितिज पर पहुंचे।

सारी दुनिया से मेल मिलाप करके वसुधैव कुटुंबकम का नारा लेकर विश्व बंधुत्व के लिए अलख जगाई। आज दुनिया उनकी ओर टकटकी लगाए देख रही है। यात्रा के बहुआयामी पड़ाव और उसके इस पद की स्वीकार्यता भारतीय समाज और लोकतंत्र की गौरव पूर्ण उपलब्धियों में से हैं।

संघर्षों के बाद यह ऊंचाई प्राप्त।

श्री नरेंद्र मोदी जी को अब्राहम लिंकन और एपीजे अब्दुल कलाम की तरह से संघर्षों के बाद यह ऊंचाई प्राप्त हुए। राष्ट्रीय निर्माण की उनके सपने और योजना में हम सभी भागीदार होकर भारत को फिर से सोने की चिड़िया जैसा बना सकते हैं। भारत में महान स्वप्न दृष्टा के रूप में भरनी वाले वास्तव उत्कृष्ट क्षमता हिंदी सपनों में व्याप्त है। गुजरात के उत्थान के उपरांत राष्ट्र निर्माण के लिए आगे आने वाले व्यक्ति के धनी विकसित मानसीकता का लिए हुए संपूर्ण विश्व पर अपनी छाप छोड़ने का काम किया।

स्वास्थ्य, शिक्षा सशक्तिकरण।

स्वास्थ्य, शिक्षा सशक्तिकरण के इस युग में टेक्नॉलाजी और विज्ञान में गहन रुचि रखने वाले कर्मयोगी की भांति कुशलता पूर्वक नेतृत्व करने की क्षमता रखते हैं। हिंदी साहित्य हृदय के अंदर धारण करने वाले प्रबल आशावादी होने के साथ – साथ वास्तविक आबादी और आदर्शवादी भी हैं। माता – पिता के प्रति उनकी चिंता और संस्कारों का उनके ऊपर उत्तम प्रभाव रखता है।

नरेंद्र मोदी ने अपने जीवन का निर्माण धरा से गुरुदेव तक जुड़ते हुए किया है। धरती के प्रति उनकी आस्था है वह धरा से जुड़े हुए इंसान है। यह सूझ – बूझ को ही विशेष महत्व देते हैं। अभाव में रहने के बावजूद उनका कहना था कि हमारे पिता और माता जी कभी अपने को निर्धन नहीं मानते।

स्मरण शक्ति के धनी।

अपनी ईमानदारी और परिश्रम के बल पर हुआ पूरे परिवार का भरण पोषण करने वाले रहे हैं। स्मरण शक्ति के धनी प्रतिभावान व्यतीत स्वयं सेवक राष्ट्र भावना लिए हुए भारत की धरती पर विचरण करते हुए सूर्य की किरणों की भांति चमकते हुए सितारे है मोदी जी।

मोदी जी के राजनीतिक उपलब्धियों पर प्रकाश डालें तो सन 2001 से 2013 तक मुख्यमंत्री काल में तमाम उपलब्धियां देश विदेश से प्राप्त हुआ है जिनका जिक्र इस आलेख में नहीं करेंगे।

पहले 25 अक्टूबर 2021 को काशी वासियों को 5189 करोड़ रुपए की 28 परियोजनाओं की सौगात जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के हाथों से लोकार्पित होने हैं उन परियोजनाओं की सूची प्रस्तुत करता हूं।

इन 28 परियोजनाओं से काशी ही नहीं पूरा पूर्वांचल के माध्यम से पूरे प्रदेश का विकास होगा। 25 अक्टूबर 2021 को राजा तालाब के मेहदी गंज रिंग रोड किनारे आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी की जनसभा का आयोजन है जिनमें परियोजना का लोकार्पण कार्यक्रम है।

काशी से 5189 करोड़ की सौगात का लोकार्पण —

  • काशी हिंदू विश्वविद्यालय में धनराज गिरि हास्टल ब्लाक निर्माण ₹• 28.78 (२८.७८) करोड़।
  • काशी हिंदू विश्वविद्यालय अगर हॉस्टल 200 सिटिंग रूम का निर्माण ₹• 28.78 (२८.७८) करोड़।
  • काशी हिंदू विश्वविद्यालय राजपूताना ग्राउंड में छात्र गतिविधि केंद्र ₹• 27.82 (२७.८२) करोड़।
  • विवेकानंद हॉस्पिटल के पीछे आवासीय अपार्टमेंट का निर्माण ₹• 40 (४०) करोड़।

रोड निर्माण (Road Construction) —

  • वाराणसी गोरखपुर एन एच – 28 (२८), ₹• 3509.14 (३५०९.१४) करोड़।
  • वाराणसी से विरनों गाजीपुर तक 72.15 किलोमीटर राजमार्ग।
  • राजा तालाब से वाजिदपुर हरहुआ मार्ग रिंग रोड फेज – 2 (२), ₹• 1011.29 (१०११.२९) करोड़।
  • छावनी से पड़ाव तक सड़क चौड़ीकरण ( वाराणसी) ₹• 18.66 (१८.६६) करोड़।
  • गोदौलिया से दशाश्वमेध घाट तक पर्यटन विकास लागत ₹• 10.78 (१०.७८) करोड़।

पुल (Bridge) —

  • वाराणसी के सेतु कोनिया सलारपुर वरुणा नदी पुल ₹• 26.21 (२६.२१) करोड़।
  • राजघाट से मालवीय पुल तक विकास कार्य ₹• 2.74 (२.७४) करोड़।
  • कालका धाम सेतु (बाबरपुर, कपसेठी, भदोही मार्ग) पुल कालिका धाम ₹• 19.14 (१९.१४) करोड़।

घाट (Pier) —

  • साढ़े ग्यारह घाटों का पुनरुद्धार ₹• 10.78 (१०.७८) करोड़।
  • शूलटंकेश्वर घाट का पर्यटन विकास कार्य ₹• 1.66 (१.६६) करोड़।
  • मारकंडेय महादेव घाट कैंची में गंगा नदी के तट पर घाट का निर्माण ₹• 5.14 (५.१४) करोड़।
  • गंगा गोमती संगम स्थल कैथी में संगम घाट का निर्माण ₹• 10.66 (१०.६६) करोड़।

कुंड / तालाब (Cistern/Pond) —

  • आठ कुंडों का सुंदरीकरण व संरक्षण कार्य ₹• 18.96 (१८.९६) करोड़।
  • चकरा तालाब का सुंदरीकरण व संरक्षण ₹• 2.59 (२.५९) करोड़।

नदी का चैनेलाइजेशन (Channelization of river) —

  • वरुणा नदी के चैनेलाइजेशन और नदी का विकास कार्य ₹• 201.66 (२०१.६६) करोड़।

मंडी (Mandi/Market) —

  • लाल बहादुर शास्त्री हाल और सब्जी मंडी बढ़िया का नवीनीकरण का कार्य ₹• 8.22 (८.२२) करोड़।

हॉस्पिटल (Hospital) —

  • आराजी लाइन के भादारसी में 50 बेड एक गीत आसमान हॉस्पिटल का निर्माण ₹• 6.41 (६.४१) करोड़।

पार्किंग (Parking) —

  • सर्किट हाउस परिसर में अंदर ग्राउंड पार्क का निर्माण लागत ₹• 26.77 (२६.७७) करोड़।
  • टाउन हॉल अंडर ग्राउंड पार्किंग और संरक्षण ₹• 23.31 (२३.३१) करोड़।

पशुधन एवं कृषि (Livestock and Agriculture) —

  • राजकीय पशुधन एवं कृषि क्षेत्र आराजी लाइन नवीनीकरण ₹• 1.70 (१.७०) करोड़।

औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Area) —

  • चांदपुर और औद्योगिक क्षेत्र में आंतरिक अवस्थापना विकास कार्य ₹• 10.85 (१०.८५) करोड़।

गौ आश्रय केंद्र (Cow shelter center) —

  • बायो CNG प्लांट शहंशाहपुर गौ आश्रय केंद्र लागत ₹• 23 (२३) करोड़।

सीवर लाइन (Sewer Line) —

  • रामनगर में 10 एम एल डी एस टी पी और इंटर सेप्टर सीवर लाइन लागत ₹• 72.91 (७२.९१) करोड़।

हाल (Hall) —

  • स्वर्गीय गिरजा देवी सांस्कृतिक संकुल चौका घाट बहुउद्देशीय हाल का उन्नयन कार्य लागत ₹• 6.94 (६.९४) करोड़।
  • कैंट स्टेशन पर ड्यूटी सुविधा के लिए वी आई पी लाउज निर्माण ₹• 1.5 (१.५) करोड़।

माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा लोकार्पित की जाने वाली परियोजनाओं की सूची से कुछ परियोजनाओं को बाहर किया गया है इसमें जंगम बाड़ी राजमंदिर और दशाश्वमेध वार्ड में स्मार्ट सिटी के तहत कराए गए काम का लोकार्पण अगले महीने होने की संभावना है।

मेहंदी गंज, वाराणसी में होने वाली प्रधानमंत्री जी की जनसभा को पूर्ण रूप से एस पी जी के कब्जे में रखा गया। वहां हेली पैड का निर्माण किया गया जिसपर प्रधानमंत्री सहित कई हेली का0 उतारने की व्यवस्था की गई।

भाषण (Speech) —

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने मेंहदी गंज के मैदान में मंच से घाटी बनारसी अंदाज में अपना संबोधन शुरू किया। उन्होंने भाषण की शुरुआत हर हर महादेव के नारे से की। प्रधानमंत्री का जय घोष सुनते ही पंडाल में जनता भी हर हर महादेव का नारा लगाने लगी। पूरा पंडाल और आसपास डमरु के निनाद और हर-हर महादेव के नारे से गूंज उठा। आवाज आकाश में बुझने लगी चारों तरफ हर हर महादेव गूंजने लगा। प्रधानमंत्री जी को जनता से इजाजत मांगने पड़ी कि अब मैं बोलूं!

प्रधानमंत्री जी ने कहा काशी के सभी बंधु एवं भगिनी लोगन के प्रणाम बा ………!
दीपावली, देव दीपावली, अन्नकूट, भैया दूज और प्रकाश उत्सव आवे वाले डाला छठ की आप सब लोगन के बहुत – बहुत शुभकामना।

इस शुभ अवसर पर उन्होंने 64000 करोड़ रुपए की pm आयुष्मान हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन का शुभारंभ किया। इसके जरिए देश के कोने कोने में इलाज के लिए पूरा सिस्टम विकसित किया जाएगा। रिसर्च संस्थानों को सशक्त बनाया जाएगा। इस सिस्टम को विकसित बनाने के बाद बीमारियों का पता लगाना आसान हो जाएगा। इसके अलावा 600 जिलो में क्रिटिकल केयर के लिए बेड तैयार होंगे।आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का माहौल बनेगा।

नए मेडिकल कॉलेज के उद्घाटन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के 70 साल में देश को जीतने डाक्टर नहीं मिले आने वाले 10 – 12 साल में उतने ही और डाक्टर मिलने जा रहे हैं।

लोकल फार वोकल का नारा।

उन्होंने कहा कि अभाव से आगे बढ़ना ही भारत की पहचान है। अपने संसदीय क्षेत्र काशी कों पदार्पण 28 बार के 28 वें लोकार्पण समारोह में काशी को सौगात देने के साथ एक बार फिर लोकल फार वोकल का नारा बुलंद किया। उन्होंने कहा सिर्फ इसे दीयों तक ही सीमित ना रखी जाए। जिसमें हमारे देश वासियों का पसीना लगा है, जिसके उत्पादन में मेरे देश की मिट्टी की सुगंध है, वह मेरे लिए लोकल है।

कलाकारों, कारीगरों और कपड़े के जादूगरी बिखेरने वाले गुण करूं।

यदि हमारी आदत बन जाएगी देश की निर्मित चीजों को खरीदने की। उससे उत्पादन भी बढ़ेगा और रोजगार भी। गरीबों को काम भी मिलेगा और काम हम सब मिलकर कर सकते हैं। यह पूरा क्षेत्र कलाकारों, कारीगरों और कपड़े के जादूगरी बिखेरने वाले गुण करूं के लिए जाना जाता है।

सरकारी प्रयास से पांच सालों में वाराणसी में खादी और कुटीर उद्योग के उत्पादन में 60% और बिक्री में 90 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा एक बार मैं फिर देशवासियों से आग्रह करूंगा कि वह अपनी यहां देश की बनी हुई वस्तुओं का प्रयोग करने पर ध्यान दें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी पहली बार 7 नवंबर 2014 को पहली दौरे पर बड़ा लालपुर मेरी फिसलटी सेंटर और टेक्सटाइल सेंटर की सौगात से बनारस के विकास को गति देने की शुरुआत की थी। हर एक दौड़ी में उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी को हजारों करोड़ की सौगात के साथ जनता से मिलते रहे।

एक छोटी सी रचना प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा हूं —

“जिसके अंदर प्रभु वास,
महाराज मांधाता सा हाथ।
हरिश्चंद्र सा त्याग भरा हो,
वह काशी को देता सौगात।

लोकार्पण के साथ-साथ,
मन में शिव का ध्यान।
विश्व बंधुत्व भावना जिसकी,
जन जन का रखता मान।

त्रिदेवों का जिसके सर हाथ,
उसकी बुद्धि में धरा उद्धार।
निकला करने आया उपकार,
जैसा चाहे वह करी विचार।”

प्रधानमंत्री ने कहा आज मैं काशी की धरती से 130 करोड़ देशवासियों को, हिंदुस्तान के कोने-कोने को, हिंदुस्तान के शहर को, हर किसी को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। काशी आध्यात्मिक के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी एक अहम केंद्र है। काशी सहित संपूर्ण पूर्वांचल के किसान की उपज को देश विदेश के बाजार तक पहुंचाने के लिए बीते साल में सुविधाएं विकसित गई है।

काशी में परियोजनाओं की सौगात देकर 2014 ई. में अस्सी घाट से स्वच्छता अभियान की शुरुआत और बड़ा लालपुर मेरे फिसलती सेंटर की नींव रखी थी।

इसी प्रकार सन 2015 ईस्वी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय ट्रामा सेंटर को देश को समर्पित किया था। इसकी साथ 45 हजार करोड़ रुपए की भवन डेवलपमेंट की शुरुआत की। सन 2016 ईस्वी में पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर सेंटर, हॉस्पिटल की आधारशिला रखी। सन 2018 ई. में 900 करोड रुपए की काशी के विकास कार्यों का तोहफा दिया। सन 2019 ईस्वी में काशी श्री काशी विश्वनाथ धाम की आधारशिला रखी और 15 जुलाई 2021 के दौरान प्रधानमंत्री ने 1500 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया था।

दीपावली से पहले आई आई टी काशी हिंदू विश्वविद्यालय में साथ और शिक्षकों को बड़ी सौगात दी। छात्र हॉस्टल, छात्र गतिविधि केंद्र और शिक्षकों के लिए आवासीय अपार्टमेंट का लोकार्पण भी मेहदी गंज, सभा स्थल से प्रधानमंत्री जी ने किया। प्रधानमंत्री के सभा स्थल के पास ही राष्ट्रीय राजमार्ग वक्त इससे संबंधित प्रोजेक्ट की प्रदर्शनी लगाई गई थी।

कोनियां बरुना नदी पर पुल का उद्घाटन होने से आवागमन के लिए यह मार्ग खुल गया, जिसे लगभग 25 से अधिक गांवों को विशेष लाभ हुआ। जिन गांवों को इसका विशेष लाभ होगा उसमें बरियासनपुर, रमना, कमौली, रमचंदीपुर, गोबरहा, दीनापुर, शंकरपुर, सलारपुर, मोकलपुर आदि गांव शहर से सीधे जुड़ जाएंगे।

रामनगर में लंबे समय से ही जल – मल समस्या से जनता गुजर रही थी। नगर महा-पालिका रामनगर से निकलने वाले जल – मल को गंगा में गिरने से समस्या दूर होगी। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगने के बाद ही बरखा शोधन कर पानी को सिंचाई के कार्य में लिया जाएगा। और कचरा से खाद का निर्माण किया जाना है। जैसे रामनगर की जनता को राहत मिल सकती है।

शहंशाहपुर में बायो CNG गैस प्लांट लगने से पास के किसानों से गोबर खरीदा जाएगा। जिससे किसानों का आर्थिक लाभ होगा। इस प्लांट से CNG गैस बनाई जाएगी साथ ही खाद भी तैयार किया जाएगा। जैविक खाद प्रयोगशाला के साथ जैविक खाद प्रशिक्षण की सुविधा भी उपलब्ध कराया गया।

इन सभी परियोजना के केंद्र में प्रधानमंत्री द्वारा काशी में प्रथम आगमन पर पूर्वांचल के साथ उपचार होती रही है उसको इनमें रखकर बहुत बड़ा कार्य हुआ है और आगे भी इस तरह के कार्य होने की संभावनाएं हैं। ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री जी के मिशन में पूर्वांचल का भी अपना एक महत्व पूर्ण स्थान है। पूर्वांचल को उन्होंने महत्व दिया है। भारत को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम बढ़ रहा है।

ज़रूर पढ़ें — इतिहास में मोदी को किस लिए जाना पहचाना जाएगा?

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख में समझाने की कोशिश की है — नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी के द्वारा किये गए पूर्वांचल के विकास के महान कार्यों का वर्णन किया है, इन कार्यों के लिए इतिहास में नरेंद्र मोदी जी को सदैव ही याद रखा जायेगा। ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री जी के मिशन में पूर्वांचल का भी अपना एक महत्व पूर्ण स्थान है। पूर्वांचल को उन्होंने महत्व दिया है। भारत को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम बढ़ रहा है। दुनिया का प्यारा – राष्ट्र का दुलारा – काशी का बना सहारा – सांसद हमारा। काशी का विस्तार हो, सड़क व ब्रिजों का निर्माण, हॉस्पिटल का निर्माण हो, उनका विस्तार किया जाना। इस तरह से बहुत सारे कार्यों के लिए इतिहास में नरेंद्र मोदी जी को सदैव ही याद रखा जायेगा। आओ हम सब मिलकर एक नए भारत के निर्माण में अपना अमूल्य सहयोग दे।

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यह लेख (दुनिया का प्यारा – राष्ट्र का दुलारा – काशी का बना सहारा – सांसद हमारा।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने की जरूरत।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने की जरूरत। ♦

किसी भी देश के गौरव के वैभव की गाथा यदि समग्र रूप से कोई गा सकता है तो वह है उस देश की राष्ट्रभाषा का स्वरूप। बड़े खेद के साथ कहना पड़ता है कि हमारे भारत देश की आज दिन तक कोई राष्ट्रभाषा निर्धारित ही नहीं हो सकी। भारत देश को आजाद हुए आज 7 दशक से ज्यादा समय हो चुका है परंतु इस देश की विडंबना देखिए कि अभी तक हम इस देश के गौरव का गुणगान करने वाली इसकी मातृ भाषा हिंदी को न्याय नहीं दिला सके।

हिंदी भाषा को राजनीति का शिकार बना दिया।

सन 1949 में अगर इस दिशा में कार्य कुछ हुआ भी तो वह भी अधूरा ही हुआ। भारत के अधिकतर लोगों द्वारा बोली जाने वाली और समझी जाने वाली हिंदी भाषा को राजनीति का शिकार बना दिया गया और इसे इस देश की अपनी भाषा होने के बावजूद विदेशी भाषा अंग्रेजी के समकक्ष भारत की मात्र राजभाषा ही स्वीकार किया गया।

यह सत्य किसी से छुपा नहीं है कि जब आर्यवर्त या जंबूद्वीप की राष्ट्रभाषा संस्कृत हुआ करती थी तो इस देश का अपना एक समृद्ध साहित्य था और उस भाषा में लिखित नाना प्रकार की विधाओं के ज्ञान विज्ञान थे। उस भाषा के बल पर भारत विश्व गुरु की उपाधि से सुसज्जित था।

उस समस्त ज्ञान-विज्ञान का लाभ मात्र भारतवासी ही नहीं लेते थे बल्कि उनका लाभ प्राप्त करने के लिए हयुत्संग और फाह्यान जैसे लोग विदेशों से भारत के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। समय बदला ,परिस्थितियां बदली, भारत पर हूणों,मंगोलों,डचों,तुर्कों, अफगानों आदि ने अपने आक्रमण किए।

भारत के इस गौरवशाली वैभव को धीरे-धीरे तोड़ने मरोड़ने की कोशिश।

भारत के इस गौरवशाली वैभव को धीरे-धीरे तोड़ने मरोड़ने की कोशिश की गई। 1000 ईसवी के आसपास शौरसेनी और अर्धमाग्धी अपभ्रांशों से विकसित हिंदी का स्वरूप स्वतंत्र रूप से साहित्यिक क्षेत्र में दिखने लगा। साहित्य संदर्भों में प्रयोग होने वाली यही भाषाएं बाद में विकसित होकर आधुनिक भारतीय आर्य भाषाओं के रूप में अभिहित हुई।

इस बीच भारत में मुगलों का आगमन हुआ। मुगल भारत में स्थाई रूप से बस गए। इससे पूर्व के आक्रमणकारी आक्रमण करते रहे और यहां से पुनः स्वदेश लौटते रहे। परंतु मुगल शासकों ने जिस तरह से भारतीय राजनीति को अपने हाथों में ले लिया, उससे भारत में अपभ्रंशों से विकसित एवं पलवित होने वाली हिंदी का स्वरूप हिंदुस्तानी में बदल गया।

यह सच है कि 1000 ईसवी के आसपास डिंगल पिंगल का बोलबाला भारतीय साहित्य में रहा हिंदी साहित्य का आदिकाल अधिकतर इसी दौर का है। मध्यकाल तक भक्ति साहित्य का वैभव हिंदी की विभिन्न उप भाषाओं ने कुछ यूं सुसज्जित कर दिया कि उसे चाह कर भी हम सदियों तक भुला नहीं सकते।

मिश्रित भाषा।

रीतिकाल तक आते-आते मुगल शासकों की शासकीय कामकाज की भाषा अरबी फारसी होने के कारण भारतीय जनमानस की आमजन भाषाएं उसमें मिश्रित हो गई जिस मिश्रित भाषा को हिंदुस्तानी का नाम दिया गया। जो भारतीय जनमानस की भाषा अपना एक राष्ट्रीय नया स्वरूप तैयार कर रही थी उसने एक नया मोड़ ले लिया। अर्यवर्त या जंबूद्वीप की राष्ट्रभाषा संस्कृत का प्रभाव धीरे- धीरे क्षीण होने लगा और हिंदुस्तानी ने अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया। जो हिंदी शौरसेनी और अर्धमाग्धी से 1000 ईस्वी के आसपास विकसित हुई थी उसको राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं मिल सका।

हिन्द – यूरोपीय भाषा।

हिन्द – यूरोपीय भाषा परिवार से होती हुई हिंदी – ईरानी, हिन्दी – आर्य, संस्कृत, केंद्रीय क्षेत्र (हिन्दी), पश्चिमी हिंदी , हिंदुस्तानी और खड़ी बोली से हिंदी का रूप लेने वाली वर्तमान हिंदी भाषा लगभग 18वीं शताब्दी में मूलतः अस्तित्व में आई। इस नव विकसित हिंदी भाषा के स्वरूप को देवनागरी में ही लिखा जाने लगा जो संस्कृत की मानक लिपि थी और है।

भारतेंदु और द्विवेदी युग।

भारतेंदु और द्विवेदी युग ने इस नव विकसित भाषा को और दृढ़ता प्रदान की। हिंदी भारतीय साहित्य की एक मानक भाषा उभर कर सामने आई। भारतीय जनमानस की इस भाषा ने धीरे – धीरे भारत के अधिकतर प्रांतों में अपना अधिकार जमाया। इस बीच भारत में शासन कर रहे अंग्रेजों ने भी अपनी राष्ट्रीय भाषा अंग्रेजी के प्रचार – प्रसार में भारत में कोई कसर नहीं छोड़ी।

पुरातन वैदिक गुरुकुल परंपरा को खंडित कर नवीन शिक्षा नीति।

1936 में लार्ड मैकाले ने भारत की पुरातन वैदिक गुरुकुल परंपरा को खंडित कर नवीन शिक्षा नीति को इस उद्देश्य से स्थापित किया कि भारत के लोगों को न तो ठीक से हिंदी समझ में आ सके और न ही अंग्रेजी ही समझ में आ सके। अपने शासन को चलाने के लिए उन्हें सस्ते लिपिकों की जरूरत थी, जिन्हें तैयार करने में वे लगभग सफल भी हुए।

धीरे – धीरे तथाकथित अंग्रेजी शिक्षित भारतीयों के भीतर भी अंग्रेजी का ऐसा भूत सवार हुआ कि थोड़ी बहुत अंग्रेजी जान लेने के बाद वह अपने आपको अंग्रेजी का विद्वान समझने लगे और जो हिंदी बोलने वाला आम भारतीय था उसको तुच्छ एवम हेय समझने लगे। यह चलन भारत के आजाद होने तक इतना बढ़ गया था कि सरमायादार लोग दूर देशों में जाकर के अपने बच्चों को अंग्रेजी की तालीम लेने के लिए भेजने लगे।

फिर वे चाहे हिंदू थे या मुस्लिम। इस प्रक्रिया में सभी अपने देश की मातृभाषा हिंदी के वजूद को स्थापित करना ही भूल गए, जबकि भारत की आजादी के वक्त तक हिंदी में बहुत कुछ लिखा जा चुका था जो भारत के गौरव गान के लिए किसी भी दृष्टि से कम नहीं था। इस दृष्टि से शायद 1949 में हिंदी को राष्ट्रभाषा स्वीकार करने की मुहिम तेज हुई थी परंतु वहां हिंदी को पुनः राजनीति की भेंट चढ़ा दिया गया और हिंदी को मात्र राजभाषा का दर्जा दिया गया।

इसके पीछे साजिश शायद यह भी रही हो कि भारत के जो तथाकथित अंग्रेजी शिक्षित लोग मानसिक रूप से अभी भी अंग्रेजों के गुलाम ही थे, उन्होंने जानबूझकर यह चालाकी की हो कि हिंदी जानने और बोलने वाले लोगों के ऊपर राज करने के लिए यदि अंग्रेजी भाषा को हिंदी के समकक्ष रखा जाए तो अच्छा रहेगा। उससे उन तथाकथित अंग्रेजी शिक्षित सरमायादारों की संतानें भारत की हिंदी भाषी जनता पर शासन करती रही और भारत की हिंदी भाषी आम जनता उनकी सेवा करती रही।

भले ही अंग्रेज भारत से चले गए थे परंतु अंग्रेजी के मानसिक रूप से गुलाम ये भारतीय अंग्रेज लंबे समय तक भारत की इस हिंदी भाषी जनता को मूर्ख बनाने में कामयाब रहे। अब यदि यह कहा जाए कि आप की बात अतिशयोक्ति हो गई है तो मैं स्पष्टीकरण जरूर देना चाहूंगा।

क्यों राजभाषा होने के बावजूद भी भारत की न्यायिक व्यवस्थाओं के पत्राचार, राजस्व विभाग सम्बन्धी पत्राचार और चिकित्सीय व्यवस्था संबंधित शिक्षा प्रणाली हिंदी भाषा में न की गई? क्या यह एक सोचा समझा षड्यंत्र नहीं था? या फिर इसलिए कि आम जनमानस की जन भाषा में यदि इन व्यवस्थाओं की बातों को लिख दिया जाएगा या पढ़ा दिया जाएगा तो फिर तथाकथित अंग्रेजी शिक्षित लोग और उनकी संतान लोगों को मूर्ख बनाने में कामयाब कैसे हो पाएगी? उनकी रोजी रोटी कैसे चल पाएगी?

खैर कुछ भी हो, आज परिस्थितियां कुछ और ही है। आज हिंदी सिर्फ भारत के ही अधिकतर क्षेत्र में नहीं बोली जाती परंतु वैश्विक धरातल पर इसने अपनी एक विशेष पहचान बना ली है। इसलिए आज यह बहुत जरूरी हो जाता है कि हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया जाए। यह सिर्फ आधारहीन एवं तथ्य से हटकर बात नहीं है बल्कि इसके पीछे एक बहुत लंबी – चौड़ी तथ्यपरक बातों की सूची है: —

  1. 2011 की भारतीय जनगणना के अनुसार भारत की 57.1% जनता हिंदी को बोल और समझ सकती है। जिसमें 43.63% भारतीयों ने तो हिंदी को अपनी मातृभाषा ही घोषित किया है। यह एक प्रबल आधार है कि भारत की अधिकतर जनता हिंदी बोलती है और समझती है। इस दृष्टि से हिंदी को अब भारत की राष्ट्रभाषा घोषित कर देना चाहिए ताकि भारत का आम नागरिक वैधानिक, प्रशासनिक, कार्मिक, व्यवहारिक और शैक्षिक आचार – विचारों को अपनी भाषा में प्राप्त कर सकें।
  2. हिंदी भाषा बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, जम्मू और कश्मीर के साथ – साथ उत्तर प्रदेश तथा दिल्ली आदि जनसंख्या बाहुल्य क्षेत्रों की मात्र संपर्क भाषा ही नहीं है बल्कि वाच बाहुल्य के साथ – साथ यहां इन क्षेत्रों की रोजमर्रा की व्यवसायिक भाषा भी है।
  3. आज हिंदी सिर्फ भारत में ही नहीं बोली जाती है परंतु भारत के साथ-साथ कई अन्य देशों में भी इसे बोलने और समझने वालों की संख्या कम नहीं है। एक आंकड़े के मुताबिक हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बोली जाने वाली भाषाओं में दूसरा दर्जा प्राप्त है। आज हिंदी पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव, मंयांमार, इंडोनेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, चीन, जापान, ब्रिटेन, जर्मनी, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, मारीशस, यमन, युगांडा, त्रिनाड एण्ड टोबैगो, कनाडा, अमेरिका तथा मध्य एशिया आदि कई देशों में बोली जाती है और समझी जाती है। यदि देखा जाए तो आज हिंदी लगभग 80 करोड से ज्यादा लोगों के द्वारा बोली और समझी जाती है।
    — इन देशों में से चीन में 6, जर्मनी में 7, ब्रिटेन में 4, अमेरिका में 5, कनाडा में 3, रूस, इटली, हंगरी, फ्रांस और जापान में 2 – 2 विश्वविद्यालयों में आज हिंदी पढ़ाई जाती है। एक आंकड़े के मुताबिक लगभग 150 के करीब – करीब विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आज हिंदी को पढ़ाया जा रहा है। ऐसे में भारत को हिंदी को अपनी राष्ट्रीय भाषा घोषित करने में आखिर दिक्कत ही क्या है? भारत से बाहर के लोग आज हिंदी में कई सत्संग और अध्यात्म की चर्चाएं सुनने और समझने भारत में आते हैं और भारत से बाहर हमारे हिंदी भाषी मनीषियों को हिंदी में सत्संग और चर्चा परिचर्चा करने के लिए अपने देशों में ले जाते हैं। बहुत से विदेशी लोग बाहर से आकर भारत में भी हिंदी को समझने और जानने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में निश्चित है की हिंदी में कुछ तो खास है जो इसे समझने की और जानने की इतनी लालसा गैर हिंदी भाषी लोगों में भी निरंतर बढ़ती जा रही है। फिर भारतवासी और भारत की राजनीतिक शक्तियां क्यों हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने से परहेज कर रही है?
  4. पाठकों की जानकारी के लिए यह भी बताना उचित समझ रहा हूं कि आज सरकार हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनाने के लिए तो प्रयास कर रही है परंतु अपने देश में हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा देने की ओर कोई भी ठोस कदम ठीक से नहीं उठाया जा रहा है।वैसे यूनेस्को की 7 भाषाओं में हिंदी पहले से ही शामिल है, परंतु फिर भी सरकार का इसे संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनाने के लिए प्रयास निरंतर जारी है।
  5. इतना ही नहीं विश्व आर्थिक मंच की गणना के अनुसार हिंदी विश्व की 10 शक्तिशाली भाषाओं में से एक है। यह बात भी अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक आचार व्यवहार की दृष्टि से हिंदी को राष्ट्रभाषा का सम्मान देने की पैरवी पुरजोर करती है। यदि हिंदी को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की भाषा में मानक रूप प्राप्त हो जाता है तो निश्चित ही भारत के व्यापार एवं आर्थिक मोर्चों में भी हिंदी अपनी अहम भूमिका निभाएगी। परंतु इसके लिए हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा देना बहुत ही जरूरी है।
  6. एथ्नोलॉग के अनुसार हिंदी विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। यह बात भी हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा बनाने के लिए प्रबल सहयोग करती है। यह बात उन तथाकथित अवधारणाओं का भी खंडन करती है कि ‘अंग्रेजी विश्व की भाषा है, इसलिए इसे महत्व देना जरूरी है। हिन्दी तो कहीं स्टैण्ड ही नहीं करती।’इतना ही नहीं हिंदी व संस्कृत की लिपि को संगणकीय टंकण प्रणाली में वैज्ञानिक लिपि भी सिद्ध कर लिया गया है। ऐसे में हिन्दी को भारत में यूं नकारना कहीं से भी ठीक नहीं है।
  7. इधर आबूधाबी में हिंदी को 2019 में अपने वहां न्यायालय की तीसरी भाषा घोषित कर दिया गया है। परंतु एक भारत है कि अपने ही देश की मातृभाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा देने के मामले में संजीदगी नहीं दिखा रहा है।

कई बातें हैं जो हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की जरूरत को स्पष्ट करती है।

ऐसी कई बातें हैं जो हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की जरूरत को स्पष्ट करती है परंतु यह सब भारत की राजनीतिक शक्तियों की इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है। आज भारतवासियों की हालत यह हो गई है कि भले ही हम अंग्रेजी में एम ए क्यों ना हो परंतु जब बात करने की बारी हो तो वह हिंदी में ही की जाती है। यह जरूर है कि कुछ लोग अपना रौब झाड़ने के लिए उस हिंदी में अंग्रेजी मिक्स कर देते हैं परंतु वह खिचड़ी न ही तो ठीक से हिंदी का मान – सम्मान कर पाती है और न ही तो अंग्रेजी का। बात यह नहीं है कि हमें अंग्रेजी से नफरत है।

अंग्रेजी को भी पढ़ा जाना चाहिए और समझा जाना चाहिए। हर भाषा का मान – सम्मान करना हमारे देश की संस्कृति रही है परंतु किसी भी देश के उत्थान एवं विकास के लिए उस देश की अपनी राष्ट्रभाषा का होना नितांत आवश्यक होता है। देश कितनी भी तरक्की कर लें, परंतु जब तक उसके पास अपनी राष्ट्रभाषा नहीं है तब तक उस तरक्की का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

Conclusion:

अपने राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास को ही न भूल बैठे।

कहीं ऐसा न हो कि हम हिंदी का तिरस्कार करते – करते अपने राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास को ही भूल बैठे। यदि हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की जरूरत नहीं है तो फिर क्यों वे सारे कारोबार हिंदी में किए जाते हैं जिनसे राष्ट्रीय खजाने में निरंतर बढ़ोतरी होती रहती है।

उदाहरण के लिए फिल्मी कारोबार हिंदी में ही किया जाता है। आम जनमानस से संपर्क साधने के लिए राजनीतिक पार्टियां हिंदी में ही अपनी बातचीत करती है।अधिकतर समाचार पत्र – पत्रिकाएं तथा चैनल सब हिन्दी में ही कार्य करते हैं। बस हिंदी में अगर कुछ होता नहीं है तो वह सरकारी कार्यालयों का पत्राचार नहीं होता है। न जाने क्यों इतना महत्व सरकारी पत्राचार में अंग्रेजी को दिया जाता है जब कि हिंदुस्तान आज आजाद हो चुका है।

हमारे भारत के जन समुदाय में एक ट्रेंड सा बन चुका है कि पड़ोसी का बच्चा अंग्रेजी स्कूल में पढ़ने जा रहा है तो मैं भी अपने बच्चे को अंग्रेजी स्कूल में ही पढ़ाऊंगा। भले ही वह वहां कुछ सीखे या न सीखे परंतु सोसाइटी की नकल करना हमारी आदत बन गई है। जबकि सत्य यह है कि बच्चा जो कुछ अपनी मातृभाषा में सीखता है वह किसी दूसरी भाषा में नहीं सीख सकता परंतु एक हम है कि अपनी जिद पर अड़े हुए हैं।

हां वर्तमान सरकार ने एक मेहरबानी जरूर की है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में अंग्रेजी को पांचवी तक मात्र एक विषय के रूप में पढ़ाने का प्रावधान किया है न कि माध्यम के रूप में। परंतु क्या हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाए बिना इस प्रकार के प्रयासों का भी कोई महत्व सिद्ध हो सकेगा या नहीं? इस बात पर हमें आत्म चिंतन और मंथन करने की नितांत आवश्यकता है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — अंग्रेजो से आजादी के इतने वर्षों बाद भी हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा की मान्यता आधिकारिक रूप से क्यों दर्ज नही हुआ, हिंदी को उसका सम्मान क्यों नहीं मिला? हिन्दी राष्ट्रभाषा के महत्व, गुणों और प्रभाव को बताया है। हिन्दी हर भारतीय के दिल से निकलने वाली भाषा हैं। हिन्दी भाषा दिल को दिल से जोड़ने का कार्य करती है। एकलौती हिन्दी भाषा ही है जिसमे अपनापन है दुनिया की किसी भी अन्य भाषा अपनापन का स्थान नहीं।

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यह लेख (हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने की जरूरत।) “हेमराज ठाकुर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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करवा चौथ और चाँद।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ करवा चौथ और चाँद। ♦

करवा चौथ व्रत से पहले दिन बाजारों की देखो शान,
मेहंदी लगवाने बैठी है सुहागिनें बाजार में लार-पतार।

साड़ी, सूट और लंहगा, चूनी लाल, हरे रंग से दुकानों की बढ़ा रहे हैं शान,
बाजार शोभा लगती है न्यारी जैसे स्वर्ग से अप्सरा है आई उतर।

अगले दिन सुबह सरगी खाकर व्रत का करती है अनुष्ठान,
सारा दिन कुछ न खाकर भजन कीर्तन से मौज मस्ती करती है सारी।

सज – संवर कर कथा सुनती है सास के चरणों में दिल कर अर्पन,
शिव – पार्वती और गणेश की पूजा कर फिर करती है आरती सारी।

सबको खिला – पिला कर राह तके चांद की लगा टकटकी आसमान,
ए चांद कहां छुपे हो इक झलक दिखला जाओ सुहागिनें करती है गुहार।

इक चांद पलकों में है इक बादलों में लुका – छिपी कर करता है परेशान,
ए – चांद – चांदनी को चंद लम्हे करो अर्पण सुहागिनें उतारे आरती तिहारी।

कहां छिपे हो निर्मोही दर्शन की बाट लिए थक गए हैं हमारे नयन,
चांद का दिल पसीज आता है सुन सुहागिनों की पुकार।

खुश हो सुहागिनें सारी चांद की करती है पूजा अर्चना पति के संग,
पति के हाथों से जल ग्रहण करती है चांद की आरती उतार।

हां पिया ही तो है उसकी खुशियों का सारी भू-धरा और असमान,
लंबी आयु की दुआ मांगे भावुकता से हो भाव विभोर।

उसके लिए तो बस पिया ही है दुनिया में दोनो जहान,
करवाचौथ का व्रत है सभी सुहागिनों का प्यारा – प्यारा त्यौहार।

॥ आप सभी बहनों को करवाचौथ पर — हार्दिक शुभकामनाएं ॥

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

—————

  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए समझाने की कोशिश की हैं — पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते को और अधिक मजबूती देने वाले पर्व करवा चौथ के बारे में विस्तार से बताया है। तेरी चंद्र कलाओं से भी सुंदर, सजने का इनका सलीका होगा। चाँद और नारी के गुणों व पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार का सुंदर मधुर वर्णन किया है। पति-पत्नी एक दूसरे के पूरक होते है इसलिए संगनी का आधार, पिया का गुरुर, बनाता संबंध मजबूत। एक दूसरे का कर सम्मान, अर्धनारीश्वर यही कराता भान, जीवन संगनी के प्यार से संघर्षमय जीवन, हो जाता आसान।

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यह कविता (करवा चौथ और चाँद।) “विजयलक्ष्मी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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चौथ के चाँद।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ चौथ के चाँद। ♦

प्रिय चौथ के चाँद,

हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मैं आपका तहे दिल से धन्यवाद प्रदान करती हूं। कि कार्तिक माह की चतुर्थी को यदि उषा की स्वर्णिम किरणे जीवन के अनंत रूपों की पर्याय हैं। तो निशाकर की शीतलता और पवित्र किरणें एक बार फिर मेरे जीवन में प्रेम का उदय कर रही है। तो इसलिए एक बार फिर से तहे दिल से धन्यवाद प्रदान करती हूं।

अब आप यह प्रश्न मत उठाना कि पहले क्या जीवन में प्रेम नहीं था। प्रेम था, प्रेम है, प्रेम रहेगा। लेकिन आप की उपस्थिति में मुझे मेरा चाँद अति प्रिय लगता है। आप तो जानते ही हैं ना कि एक स्त्री का जीवन कितना भागदौड़ वाला होता है। अगर पूरे वर्ष में से एक दिन वह इत्मीनान से अपने चाँद का दीदार करना चाहती है। तो उसके लिए आपकी उपस्थिति अति आवश्यक है। परस्पर विश्वास, त्याग और समर्पण को आप की शीतल छाया में और भी मजबूती मिलती है। और हां सुनो देह की सुंदरता को तो सभी निहारते हैं।

लेकिन आज तो मेरी रूह नवयौवन के भाँति श्रृंगार कर फिर से दुल्हन जो बनती है उसके लिए आपका शुक्रिया। ना जाने पूरे वर्ष कितने ही ऐसे पूरे और अधूरे वादे होते हैं जो प्रेम की रंगीन छाया में पलना चाहते हैं।

लेकिन किन्ही कारणों वश वह पूरे नहीं हो पाते हैं ऐसे ही कुछ पूरे ओर अधूरे वादों को मैं आज आपकी चांदनी किरणों से बांधकर अपने चाँद के समक्ष उर में समाहित कर उन्हें समर्पण की दहलीज़ पर रखूंगी। और विश्वास की रंगीन मौली में बांधकर उन्हें मन की चौखट पर नजरबट्टू के साथ टाँग दूँगी ताकि उसे किसी की भी नजर न लगे। औऱ हाँ जब सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक मेरे निर्जल व्रत को जब आप कि शीतल छाया में मेरा चाँद मेरे अधरों को अमृत रूपी जल से तृप्त करता है तो वो वह मात्र मेरी प्यास ही तृप्त नहीं करता करता अपितु मेरी आत्मा तक को संतृप्त कर देता है।

जिस प्रकार मेहंदी का अर्थ “रंग” नहीं “रचना” होता है ठीक उसी प्रकार करवाचौथ सिर्फ एक साधारण व्रत न होकर सृष्टि की सर्वोत्तम रचनाओं को एक करने का पवित्र बंधन होता है।

जो अपने सुहाग की लंबी उम्र के लिए प्रतिपल कामना करता है।
हे चौथ! के चांद बस आपसे यही कामना है आप अपना स्नेह व प्यार सभी करवाओ पर बनाये रखे और सप्त-पदी के संकल्प को सात जन्मों के साथ वाले इस अनुष्ठान को पूरा करना का सभी को सामर्थ्य प्रदान करे।

बस एक अंतिम बात थोड़ा जल्दी निकल आना॥
॥ शुभ करवा चौथ ॥

♦ कविता पाल जी – नई दिल्ली ♦

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  • “कविता पाल जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए उदाहरण के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — स्त्री (नारी) और प्रकृति अनंत ऊर्जा से संपन्न है। स्त्री की गोद में उत्थान और पालन होता है नई पीढ़ी का। पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते को और अधिक मजबूती देने वाले पर्व करवा चौथ के बारे में विस्तार से बताया है। तेरी चंद्र कलाओं से भी सुंदर, सजने का इनका सलीका होगा। चाँद और नारी के गुणों व पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार का सुंदर मधुर वर्णन किया है। पति-पत्नी एक दूसरे के पूरक होते है इसलिए संगनी का आधार, पिया का गुरुर, बनाता संबंध मजबूत। एक दूसरे का कर सम्मान, अर्धनारीश्वर यही कराता भान, जीवन संगनी के प्यार से संघर्षमय जीवन, हो जाता आसान।

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यह लेख (चौथ के चाँद।) ” कविता पाल जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/गीत/दोहे/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए, माता रानी की कृपा से।

नाम : कविता पाल
शिक्षा : पुस्तकालय विज्ञान में D.LIS, B.LIS, और M.LIS
PG Diploma in YOGA.

शौक : अध्यापन, लेखन, समाज सेवा द्वारा महिलाओं की स्थिति में जागरूकता लाना।

— अपने बारे में कुछ शब्द साहित्यिक गतिविधियां काव्य लेखन, गद्य लेखन एवं फेसबुक के विभिन्न साहित्यिक समूहों में सक्रिय सहभागिता रहती है अतः सक्रिय लेखक सम्मान एवं पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं।
— मेरे द्वारा फेसबुक पर अनमोल अल्फाज नामक पेज का संचालन भी किया जाता है। जिसका एकमात्र उद्देश्य समाज में मेरी कविताओं द्वारा महिलाओं एवं अन्य क्षेत्र में जागरूकता का कार्य करना है।

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करवा चौथ।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ करवा चौथ। ♦

भले सारी दुनिया के लिए आम हूँ मैं,
मगर कोई है जिसके लिए ख़ास हूँ मैं।
लगाई है मेंहदी उनके नाम की आज मैंने,
जिनकी धड़कनों में बसा अहसास हूँ मैं।

मेरा दिन भर भूखे रहना उनके लिए सजा है,
किन्तु मेरे लिए इस भूख का अपना मज़ा है।
ये मेरे निश्चल प्रेम की अभिव्यक्ति का है ढंग,
इसलिए मेरी रजा में ही शामिल उनकी रजा है।

मेरा दिन भर कुछ न खाना – पीना भाता नहीं उन्हें,
अपने तर्कों से बार – बार व्रत की समीक्षा वो करते हैं।
शाम ढलते ही टकटकी लगाकर देखते हैं आसमान को,
मुझसे ज़्यादा आतुरता से चाँद की प्रतीक्षा वो करते हैं।

सुहागिनों के गजरे को छूकर बयार महक जाती है,
देख सँवरी सजनी सजना की तबियत बहक जाती है।
चूड़ी खनके, पायल छनके, माथे पर दमके बिंदिया,
पंछी सम कलरव कर सनम की चाहत चहक जाती है।

♦ वेदस्मृति ‘कृती’ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

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  • “वेदस्मृति ‘कृती’ जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस मुक्तक/कविता में समझाने की कोशिश की है — पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते को और अधिक मजबूती देने वाले पर्व करवा चौथ के बारे में विस्तार से बताया है। तेरी चंद्र कलाओं से भी सुंदर, सजने का इनका सलीका होगा। चाँद और नारी के गुणों व पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार का सुंदर मधुर वर्णन किया है। पति-पत्नी एक दूसरे के पूरक होते है इसलिए संगनी का आधार, पिया का गुरुर, बनाता संबंध मजबूत। एक दूसरे का कर सम्मान, अर्धनारीश्वर यही कराता भान, जीवन संगनी के प्यार से संघर्षमय जीवन, हो जाता आसान। सुहागिनों के गजरे को छूकर बयार महक जाती है, देख सँवरी सजनी सजना की तबियत बहक जाती है।

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यह मुक्तक/कविता (करवा चौथ।) ” वेदस्मृति ‘कृती’ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी मुक्तक/कवितायें/गीत/दोहे/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई आई टी . शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक. समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार। ♦

पति पत्नी का प्यार, जीवन का है आधार,
प्यार और सम्मान से जग में मिलता मान।
दोनों का त्याग, समर्पण और विश्वास, इसे बनाया आगढ़,
संगनी का आधार, पिया का गुरुर, बनाता संबंध मजबूत।
पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार, यही है करवाचौथ त्योहार॥

कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को आता, पावन दिन हरबार,
शिव पार्वती की जिसपर कृपा है होती, वही मनाता त्योहार।
सौभाग्यवती सुहागिन को ही मिलता, ये मौका अधिकार,
पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य, सौभाग्य की कामना करती अपार।
पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार, यही है करवाचौथ त्योहार॥

दो शब्दों का संगम है हमारा यह महात्योहार,
करवा यानी मिट्टी के बर्तन, चौथ यानी चतुर्थी।
सच्चे मन से जो यह रखता, व्रत का उपवास,
करवा माता उसे है देती, सदा सुहागन का वरदान।
पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार, यही है करवाचौथ त्योहार॥

व्रत करने वाली स्त्री का सूर्योदय से इसका होता आगाज,
निराहार नहीं निर्जला उपवास से मिलता, सार्थक फल बेमिसाल।
ॐ शिवायै नमः से पार्वती का, ॐ नमः शिवाय से शिव का,
ॐ सोमाय नमः से छुपे चंद्र का, होता है दीदार।
पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार, यही है करवाचौथ त्योहार॥

छुपे चांद का पिया संग सजनी, करती है इंतजार,
चांद भी इस दिन भाव दिखलाते, लेते सब्र का इम्तहान।
आंखों में सजनी का पिया के प्रति देखकर प्यार,
द्रवित हो चंद्रदेव देते दर्शन, जग को अपरम्पार।
पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार, यही है करवाचौथ त्योहार॥

सब्र का होता बेड़ा पार, चंद्रदेव का होता दीदार,
संगनी संग पिया के चेहरे पर उभरती, मंद-मंद मुस्कान।
चंद्रदेव का दर्शन कर, हर संगनी पिया का छलनी से करती दीदार,
पिया के हाथों जल ग्रहण कर, पूरा होता व्रत महान।
पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार, यही है करवाचौथ त्योहार॥

यह त्योहार एक दिन का ही नहीं, जन्मोजनम के प्यार का,
एहसास दिलाता, दोनों के संबंध को करता और प्रगाढ़।
एक दूसरे का कर सम्मान, अर्धनारीश्वर यही कराता भान,
जीवन संगनी के प्यार से संघर्षमय जीवन, हो जाता आसान।
पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार, यही है करवाचौथ त्योहार॥

विवेक का सभी पतियों से निवेदन है इस बार,
पत्नी का निश्छल प्रेम और विश्वास की डोर का, करें हम सम्मान।
जीवन रूपी पावन कच्चे डोर को पक्का कर,
अपनी संगनी को दे प्यार का, भरोसा एवं विश्वास।
पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार, यही है करवाचौथ त्योहार॥

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते को और अधिक मजबूती देने वाले पर्व करवा चौथ के बारे में विस्तार से बताया है। तेरी चंद्र कलाओं से भी सुंदर, सजने का इनका सलीका होगा। चाँद और नारी के गुणों व पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार का सुंदर मधुर वर्णन किया है। पति-पत्नी एक दूसरे के पूरक होते है इसलिए संगनी का आधार, पिया का गुरुर, बनाता संबंध मजबूत। एक दूसरे का कर सम्मान, अर्धनारीश्वर यही कराता भान, जीवन संगनी के प्यार से संघर्षमय जीवन, हो जाता आसान।

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यह कविता (पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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पावन रिश्ता।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ पावन रिश्ता। ♦

कार्तिक की चतुर्थी पर…
ए चाँद देख लेना तेरा नूर भी फीका होगा।

तेरी चंद्र कलाओं से भी सुंदर,
सजने का इनका सलीका होगा।

पर तेरी चाँदनी का ही दर्श पाने के बाद,
आएगी सबको अपने चाँद की याद।

तेरे दर्श की शीतलता,
रिश्तों में मिठास भर जायेगी।

तेरा दीदार ही सुहागिनों की,
माँग प्यार से भर जाएगी।

मेहंदी का शगुन होगा, कलाइयाँ,
रंग-बिरंगे चूड़ियों पर इतरायेगी।

होगी सिंदूरी मांग, गजरे की कलियां,
भी अपनी सुगंध बिखेर जाएगी।

पावन कथा सुन सूर्य को,
भी जल अर्पित कर देगी।

इसकी किरणें भी सबके जीवन में,
खुशियों का उजाला भर देगी।

बस प्रेम … प्रीत कर ले,
पावन रिश्ते में बसेरा।

सबके वैवाहिक जीवन में,
हो सुखों का सवेरा…।

श्रृंगार तो हो बस हमसफ़र की,
प्रीत का, तो क्या कहने।

पर सोने पर सुहागा होता,
जब पत्नी प्यार और विश्वास के पहने गहने।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से — पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते को और अधिक मजबूती देने वाले पर्व करवा चौथ के बारे में विस्तार से बताया है। तेरी चंद्र कलाओं से भी सुंदर, सजने का इनका सलीका होगा। चाँद और नारी के गुणों व पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार का सुंदर मधुर वर्णन किया है।

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यह कविता (पावन रिश्ता।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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वह चिल्लाता!

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ वह चिल्लाता! ♦

वह चिल्लाता! (व्यंग्य)

आंखों में सरसो फूल रहे हैं जब से,
आधा तीतर, आधा बटेर बुलाते तब से?

मानो उन पर आसमान टूट पड़ता,
जहां राष्ट्र – भक्ति की बातें चलती।

आसमान पर थूकना चाहते वही,
आस्तीन के सांप पाल बैठे कहीं?

उल्टी गंगा बहाना चाहता जो भी,
संदेह और अंगुली उठाता है वही।

एड़ी चोटी का पसीना एक किया कभी,
उल्टी माला फेर रहा है कौन अजी?

ओखली में सिर ना डालें लोग कहीं,
ऐसी – तैसी करने उतरे उनकी सभी।

कंगाली में आटा गीला ना होवे,
कागज काला करने से कलम बचालें।

जाति – मजहब से सैनिक दूर रहता,
इसलिए वह राष्ट्रभक्त कहलाता।

खुशहाली देखकर जो मुरझा जाता,
बुरी आत्मा से जाकर हाथ मिलाता।

आफत विपत्तियों को समझ न पाता,
बदनाम करने की केवल युक्ति बनाता।

निर्दोष को दोषी करार दे चिल्लाता,
चाहता अशुभ पर अंदर से घबराता।

भाग दौड़ में मात्र अशुभ फल मिलता,
जानबूझकर मुसीबत घर ले कर आता।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस व्यंग्य में समझाने की कोशिश की है — कुछ राजनीतिक लोग इतना ज्यादा गिर गए है की वह आये दिन देश विरोधी हरकते कर रहे है, इनके मन में देश प्रेम से ज्यादा गद्दारी भरा हुआ है। इनके सारे बयान और कार्य देश विरोधी हो रहे है। इनका बस चले तो देश के सभी व्यवस्था को ठप कर दे। इनका इरादा हर तरफ कोहराम मचाने का है।

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यह व्यंग्य (वह चिल्लाता!) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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