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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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2021-KMSRAJ51 की कलम से

शैलपुत्री : माँ दुर्गा की पहली शक्ति की पावन कथा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शैलपुत्री : माँ दुर्गा की पहली शक्ति की पावन कथा। ♦

एक बार जब प्रजापति ने यज्ञ किया तो इसमें सारे देवताओं को निमंत्रित किया, भगवान शंकर को नहीं। सती यज्ञ में जाने के लिए विकल हो उठीं। शंकरजी ने कहा कि सारे देवताओं को निमंत्रित किया गया है, उन्हें नहीं। ऐसे में वहां जाना उचित नहीं है।

सती का प्रबल आग्रह देखकर शंकरजी ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी। सती जब घर पहुंचीं तो सिर्फ माँ ने ही उन्हें स्नेह दिया। बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव थे। भगवान शंकर के प्रति भी तिरस्कार का भाव है। दक्ष ने भी उनके प्रति अपमानजनक वचन कहे। इससे सती को क्लेश पहुंचा। वे अपने पति का यह अपमान न सह सकीं और योगाग्नि द्वारा अपने को जलाकर भस्म कर लिया।

इस दारुण दुःख से व्यथित होकर शंकर भगवान ने उस यज्ञ का विध्वंस करा दिया। यही सती अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्मीं और शैलपुत्री कहलाईं। पार्वती और हेमवती भी इसी देवी के अन्य नाम हैं। शैलपुत्री का विवाह भी भगवान शंकर से हुआ। शैलपुत्री शिवजी की अर्द्धांगिनी बनीं। इनका महत्व और शक्ति अनंत है।

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

—————

  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए समझाने की कोशिश की हैं — इस कथा के द्वारा माँ शैलपुत्री और भगवान शंकर जी के जीवन का उदाहरण देकर एक अच्छी पत्नी के कर्त्तव्य को समझाया है। एक अच्छी पत्नी के दिल में अपने पति के लिए सम्मान का क्या महत्व है, और अपने पति के सम्मान के लिए एक अच्छी पत्नी किसी भी हद तक जा सकती है। एक अच्छी पत्नी अपने पति के सम्मान के लिए किस हद तक त्याग कर सकती है।

—————

यह कविता (शैलपुत्री : माँ दुर्गा की पहली शक्ति की पावन कथा।) “विजयलक्ष्मी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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ना मांगा मैं धन दौलत।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ ना मांगा मैं धन दौलत। ♦

ना मांगा मैं धन दौलत,
ना मांगा तुमसे हार सनम।
ना मांगा मैं हीरे मोती,
ना कोई उपहार सनम।

एक तेरी बोली सुनने को,
हरदम मैं बेताब सनम।
दिन – रात सोते जाग बस,
देखूं तेरा ख़्वाब सनम।

क्यों गई ना पता मुझे,
थी क्या खता तू बता मुझे।
होगी कुछ मजबुरी फिर,
या नापसंद था बता मुझे।

तू अभागीन किस्मत की,
या मेरे प्यार की कमी सनम।
मेरे हंसते नैनों में,
क्यों छोड़ गई तू नमी सनम।

एक तेरे जाने से जानम,
गया मैं फिर से हार सनम।
नाम तेरा लेकर सब मुझको,
करते हैं दुत्कार सनम।
नाम तेरा लेकर सब मुझको,
करते हैं दुत्कार सनम….

♦ अमित प्रेमशंकर जी — एदला-सिमरिया, जिला–चतरा, झारखण्ड ♦

—————

Conclusion

  • “अमित प्रेमशंकर“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — एक प्यार करने वाला सदैव ही अपनी प्रेमिका से केवल सच्चा प्रेम ही चाहता है। जब भी इंसान किसी से बेहद प्यार करते, जो दिल के बहुत करीब होते है और वो अपना बनने वाला होता है, लेकिन अपना बनने से पहले ही हमसे दूर चला जाता है उस समय मन की क्या परिस्थिति, मन में क्या उथल – पुथल चलता है, इसका बहुत सटीक वर्णन किया है।

—————

यह कविता (ना मांगा मैं धन दौलत।) “अमित प्रेमशंकर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। आपकी ज्यादातर कविताएं युवा पीढ़ी को जागृत करने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

नाम: अमित प्रेमशंकर
पता: एदला – सिमरिया
जिला: चतरा (झारखण्ड)
सम्प्रति: कवि, गीतकार व ढोलक वादक।

प्रकाशित पुस्तकें: आत्म सृजन, काव्य श्री, एक नई मधुशाला १, एक नई मधुशाला २, भावों के मोती, व अक्षर पुरूष।
प्रकाशित रचनाएं: देश के अलग-अलग पत्र पत्रिकाओं मे लगभग दो सौ रचनाएं प्रकाशित व समय समय पर सामाचार पत्रों के माध्यम से पत्राचार।
विशेष: “सीता माता सी कोई नहीं” तथा “आज राम जी आएंगे” महाराष्ट्र के वरिष्ठ साहित्यकार श्री ओ. सी. पटले द्वारा पोवारी भाषा में अनुवाद।

प्राप्त सम्मान: काव्य श्री साहित्य सम्मान, आत्म सृजन साहित्य सम्मान, सरदार भगतसिंह साहित्य सम्मान, सुमित्रानंदन पंत कृति सम्मान, साहित्य कर्नल सम्मान, रैदास साहित्य सम्मान, द फेस ऑफ इंडिया सम्मान, दिल्ली युथ डेवलपमेंट से सम्मानित।
प्रकाशनार्थ: मन की धारा

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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इतिहास में मोदी को किस लिए जाना पहचाना जाएगा?

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ इतिहास में मोदी को किस लिए जाना पहचाना जाएगा? ♦

क्या आपके मन में भी ये प्रश्न चलता है की आखिर — इतिहास में मोदी को किस लिए जाना पहचाना जाएगा ?

भारत अनेकानेक व्यवस्था और शासन प्रशासन से कार्य करते हुए आगे बढ़ता चला आया। परंतु आज हम जिस प्रधानमंत्री के बारे में लिखने की सोच रहे हैं वह पहले मुख्यमंत्री के रूप में 15 वर्षों तक गुजरात का मुख्यमंत्री रहा। मुख्यमंत्री काल की व्यवस्था और विकास तथा उपलब्धियों के बारे में हम बाद में बताना चाहते हैं। अभी हाल में Facebook पर BBC की एक पोस्ट में यह पूछा गया कि मोदी को किस लिए लोग जानेंगे।

हम यहां बता देना चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी जी मानते है कि सपने देखने का हक़ सभी को है लेकिन सपने देखना सार्थक उसका है जो अपने सपने को हकीकत में बदलने का हिम्मत रखता है। इस प्रकार हकीकत में बदलने वाला भारत का नायक नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने अपने काल में क्या-क्या परिवर्तन किया उसका आम जनता पर या असर पड़ेगा यह सब बताने के लिए शुक्ष्म तरीके से हम आपके सामने उपस्थित हुए हैं।

संपूर्ण देश दुनिया के लोग पर्यावरण प्रदूषण से परेशान हैं वही भारत का प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत अभियान भारत में चलाकर देश को देश की जनता को जगाने का कार्य किया। यह सोच महात्मा गांधी ने सोचा था जिसे मोदी जी ने साकार रुप दिया। आसाम से कन्याकुमारी तक, उत्तर भारत से दक्षिण भारत तक। पूरी भारत को 15 अगस्त 2014 को लाल किले की प्राचीन से भारत के प्रधानमंत्री ने साकार होने का बिजन, कई तरह की योजनाओं का संकल्प लिया। 2 अक्टूबर 2014 को मोदी जी ने भारत को स्वच्छ करने का निर्णय महत्वपूर्ण लिया।

उन्होंने बाराणसी के अस्सी घाट पर स्थित प्राचीनकुड़ी के अंबार को अपनी हाथों से खुद खोद कर हटाने का कार्य प्रारंभ किया। सफाई का जो अभियान उन्होंने जगाया यदि ऐसा नहीं हुआ होता और 2014 के पहले कहीं कोरोना वायरस भारत में प्रवेश कर गया होता तो भारत में भयानक लोग मारे जाते। परंतु सौभाग्य था कि भारत में सफाई अभियान चल रहा था। नगर शहर सभी जगह स्वच्छ हो रहे थे।

गांव-गांव में शौचालय का निर्माण किया जा रहा था। लोग सौच करने शौचालय में जाया करते थे। रेलवे स्टेशनों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कार्यकाल के पहले लाइनों में गंदगी का अम्बार रहता था, जो आजकल साफ सुथरा दिखता है। Platform पर सफाई मशीनें लगा दी गई है चारों तरफ सभी नगर शहर प्लेटफार्म पर साफ सुथरा और चमचम करता हुआ स्टेशन दिखाई देता है।

सरकारी बैंकों के लोग चक्कर लगाया करती थी खाता खोलने के लिए दलालों के चक्कर में किसी तरह से खाता खुलवा मिलता था। न्यायालय का फैसला के लिए लोग चक्कर लगाया करते लोगों के जूते घिस जाते थे। खेती किसानी के लिए यूरिया खाद के लिए एक शहर से दूसरे शहर लोग किसी तरह से प्राप्त किया करते थे। सेना के साथ-साथ सभी कर्मचारी पूरे देश के अंदर खुश होकर दिखाई नहीं देते थे। जहां देखिए वही जिस प्रदेश में देखिए उस प्रदेश में ही घोटाला हो गया, घोटाला हो गया कि आवाज उठाती रही थी। सन 2014 में जनता ने पिछली सरकार से कुंभकर्ण की नींद से जगाने के लिए आगे आकर मोदी जी का भारत की जनता ने साथ दिया सहयोग किया।

उन्होंने अपने कार्यकाल में जो कार्य किए उन्हें हम सूक्ष्म रूप से प्रस्तुत करने का प्रयत्न कर रहा हूं …….

  • बिना जरूरी कानूनों का हटाया जाना।
  • आवश्यक नए कानून का निर्माण करना।
  • धारा 370 और 35 ए का खात्मा।
  • हलाला जैसी कुरीति को दूर करने का कानून बनाना।
  • तीन तलाक जैसी कुरीति का खात्मा।
  • राम मंदिर का निर्माण।
  • राम वन गमन परिपथ के लिए सहयोग।
  • विदेशों में भी मंदिर का निर्माण करना।
  • काशी का विस्तार।
  • सड़क, उनका विस्तार किया जाना।
  • ब्रिजों का निर्माण।
  • टनल का निर्माण/ विस्तार।
  • नई एम्स बनाया जाना।
  • हॉस्पिटल में ऑक्सीजन गैस की व्यवस्था करना।
  • हॉस्पिटल में प्रधानमंत्री योजना से ऑक्सीजन प्लांट लगाना।
  • कोरोना वैक्सीन का भारत में निर्माण किया जाना।
  • कोरोना महामारी से दुनियां को बचाने के लिए उन देशों को दवा का सप्लाई किया जाना।
  • कोरोना वैक्सीन अपने पड़ोसी देशों को भी देकर उनकी जान को बचाना।
  • भारतीय सीमा पर सड़कों का निर्माण करना।
  • सीमा पर टनल आदि का निर्माण करना।
  • भारत के अंदर हवाई अड्डे का निर्माण करना/विस्तार करना।
  • रेल लाइनों का विस्तार करना।
  • नई रेल का निर्माण करना।
  • नई रेल लाइन बिछाना।
  • नए मेट्रो रेल का चलाया जाना।
  • रोपवे का निर्माण कार्य कराना।
  • किसान क्रेडिट कार्ड का विस्तार करना।
  • किसानों को एक बरस में 6000 रुपये पेंशन के रूप सहयोग में देना।
  • किसान की खेती के लिए यूरिया खाद के कारखाने की व्यवस्था करना।
  • गरीब पेंशन की व्यवस्था करना।
  • बुजुर्ग पेंशन विधवा पेंशन आदि की व्यवस्था करना।
  • सबको गैस का चूल्हा उपलब्ध कराना।
  • गरीबों को गैस सिलेंडर देना।
  • जल परिवहन का चलाया जाना।
  • नदियों को जोड़ने की योजना, काम करना।
  • शौचालय का निर्माण कराया जाना।
  • गांव-गांव में शौचालय लिए अनुदान देना।
  • सड़क के किनारे शौचालय का निर्माण करना।
  • गरीबों को मुफ्त घर देना।
  • सबको पक्का घर की व्यवस्था की परिकल्पना।
  • घोटालेबाज पर, कड़ा कदम उठाना।
  • घर-घर गैस पहुंचाने की व्यवस्था करना।
  • पूरे भारत में गैस की किल्लत को दूर करना।
  • सभी नागरिकों का बैंक खाता खुलवाना।
  • डिजिटल पेमेंट की व्यवस्था करना।
  • ATM मशीनों को सुचारु रुप से काम करने का निर्देश देना।
  • गूगल का हिंदी करण (अनुवाद) आदि कराना।
  • विकिपीडिया का हिंदी करण।
  • Facebook का हिंदी करण आदि।
  • मनरेगा में सुधार करना।
  • भारत में ही मिसाइल बनाने का कार्य करना।
  • रिसर्च इंस्टीट्यूट का बढ़ाया जाना।
  • वैज्ञानिकों को विशेष सम्मान देना।
  • सेना को सम्मान देना उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति करना।
  • सेना को आवश्यकताओं के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार देना।
  • सेना को वन रैंक वन पेंशन की व्यवस्था करना, आदेश देना।
  • आत्मनिर्भर भारत पर कार्य करना। अमली जामा पहनाना।
  • भारत में ही लड़ाकू विमान का निर्माण करना।
  • भारत में ही Brand LOGO का निर्माण करना।
  • भारत में ब्रह्मोस, अग्नि मिसाइल का नया वर्जन तैयार करना। आगे भी शोध बढ़ाना।
  • DRDO द्वारा आकाश प्राइम मिसाइल को तैयार करना।
  • भारत में ही बने आकाश प्राइम मिसाइल को देश के कोने – कोने में तैनात करना।
  • सेना को भरपूर सहयोग देना।
  • स्वास्थ्य कर्मियों का सम्मान करना।
  • तीनों सेनाओं को मिल कर भी संयुक्त क्षमता प्रदान करना।
  • विश्व में भारत का है स्थान नाम यश आगे बढ़ाने का काम करना।
  • संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत के प्रधानमंत्री का भाषण हिंदी में देना।
  • भारत के प्रधानमंत्री का विश्व के अनेकों देशमुख द्वार सम्मानित किया जाना।
  • अभिव्यक्ति की आजादी देना।
  • अनरगल बयानबाजी करने वालों को भी अपनी बातों को रखने का अधिकार देना।
  • अमेरिका, रूस, फ्रांस, इजराइल Sea भारत की सुरक्षा के लिए ड्रोन, लड़ाकू विमान आदि सेना के Weapon मगाना आदि।

अभी इस लेखनी के कुछ अंश रूप में हमने नरेंद्र मोदी जी के कार्यों की, का वर्णन किया। बहस साधारण परिवार में जन्मे नरेंद्र मोदी जी ने भारत में राष्ट्र भक्ति के कारण, देश और समाज के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने भारत के उन तमाम नेताओं को यह बता दिया कि किस तरह से शासन सत्ता चलाया जा सकता है।

लोगों के कल्याण के लिए इस तरह से काम करना चाहिए। देश को आगे बढ़ने के लिए उसे आगे बढ़ाने के लिए तेज गति से काम करने की आवश्यकता होती है। जिसके अंदर जितनी क्षमता होती है वह उतना ही ज्यादा काम कर सकता है। यह भी सच है कि मनुष्य के अंदर सोचने की विचार कर सकने की अलग-अलग शक्ति होती है। परंतु यह भी सच है कि समय आपका इंतजार नहीं कर सकता जो समय पर चूक जाता है वह समय पुनः वापस नहीं आता। दुनिया तरक्की के मार्ग पर आगे बढ़ती जा रही हो, ऐसे में भारत कैसे पीछे रह सकता है यह सोच लेकर नरेंद्र मोदी जी ने मेहनत के साथ परिश्रम के साथ कार्य किया। जन भागीदारी और जन विश्वास को उन्होंने समझा सिथिल हो रही सरकार को उन्होंने जगाया।

प्राकृतिक संसाधनों की तरफ अपना ध्यान लगाया। देश की संस्थान को मजबूत करने का हर संभव प्रयास किया। धरोहर को सुसज्जित करने का प्रयास किया। महापुरुषों को उचित सम्मान देने का प्रयत्न किया।

उनका मानना था कि पहले धोने, शुद्ध होने के बाद ही पूजा पाठ कर सकते हैं। इसी भावना को लेकर उन्होंने पूरे देश में शौचालय की जरूरत को समझा। उन्होंने माना कि शरीर की शुद्धि बहुत जरूरी है। वह एक कुशल राजनीतिज्ञ व्यक्ति हैं जो अपने जीवन में राजनैतिक घटनाओं से परेशान कभी नहीं हुआ है। परेशानी की स्थिति में उनके तेवर कुछ अलग ही दिखाई देते हैं। कभी आक्रामक रवैया अपना लेते जाते हैं और कभी नरम। इतना सो तय है कि वह गलत बात को बर्दाश्त कम करते हैं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख में समझाने की कोशिश की है — नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी के द्वारा किये गए महान कार्यों का वर्णन किया है, इन कार्यों के लिए इतिहास में नरेंद्र मोदी जी को सदैव ही याद रखा जायेगा। चाहे वो तीन तलाक जैसी कुरीति का खात्मा की बात हो या धारा 370 और 35 ए का खात्मा। बिना जरूरी कानूनों का हटाया जाना और आवश्यक नए कानून का निर्माण करना। राम मंदिर का निर्माण या राम वन गमन परिपथ के लिए सहयोग। काशी का विस्तार हो, सड़क व ब्रिजों का निर्माण, उनका विस्तार किया जाना। इस तरह से बहुत सारे कार्यों के लिए इतिहास में नरेंद्र मोदी जी को सदैव ही याद रखा जायेगा। आओ हम सब मिलकर एक नए भारत के निर्माण में अपना अमूल्य सहयोग दे।

—————

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यह लेख (इतिहास में मोदी को किस लिए जाना पहचाना जाएगा ?) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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अम्बे शुभ प्रभात।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ अम्बे शुभ प्रभात। ♦

शुभ प्रभात, माँ ब्रह्मचारिणी,
पूजन जननी श्वेताम्बरा का।
युग प्रेरणा माँ तपस्विनी,
स्वयंप्रभा प्रिय स्वरूप इक।
हाथ जपत माल, बाम धरें॥

कमंडल, करें ज्ञान-विज्ञान,
साहित्य संवर्धन सतत।
नवदृष्टि जागृत करें,
तप: जल से मात।
प्रक्षालित करें, नव-मानव,
हृदय को……॥

तत्वज्ञान नि:स्वार्थ सेवा,
का दें भाव आज मात।
फल आराधन का, तप,
त्याग, वैराग्य, सदाचार।
संयम दें, लें अर्घ्य में,
स्वार्थ, मोह हर भारत,
समूह का……॥

नाम जिनका अपर्णा,
अशन करें धरा।
स्पर्शी बेलपत्र, निज
दुष्कर तप का।
लघु अंश दान करें,
माँ, युवा वर्ग चेतना को॥

तपबल से, अम्बे के
जीती भरत कन्याएं।
दृष्टि से अम्बे दें,
आशीष, जीवन।
निर्माण का, राष्ट्र सेवा,
से हों ऊर्जा भावित,
वे आज……॥

मुझे दो कमंडल, मैं,
इक सेविका आपकी।
ले खड्ग हाथ, विनाश,
कर कामना, असंयम,
अहंकार……॥

अम्ब ब्रह्मचारिणी,
तप भाव करें, संचार दें।
विवेक, कल्याण दीक्षा मंत्र,
इस महोत्सव को, लक्ष्य,
प्रेरित रखें सदा……॥

♦ प्रो• मीरा भारती जी – पुणे, महाराष्ट्र  ♦

—————

  • “प्रो• मीरा भारती जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से महानवरात्रि व माँ ब्रह्मचारिणी के बारे में बताने की कोशिश की है— महानवरात्रि के दूसरे दिन पूजा माँ ब्रह्मचारिणी स्वीकार करें। हे माँ तत्वज्ञान नि:स्वार्थ सेवा का दें भाव आज मात। फल आराधना का तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार संयम दें माँ। लें अर्घ्य में, स्वार्थ, मोह हर भारत, समूह का। माँ ब्रह्मचारिणी का आओ हम सब मिलकर पूजन करें।

—————

यह कविता (अम्बे शुभ प्रभात।) “प्रो• मीरा भारती जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं से नई पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम मीरा भारती (मीरा मिश्रा/भारती) है। मैंने BRABU Muzaffarpur, Bihar, R.S College में प्राध्यापिका के रूप में 1979 से 2020 तक सक्रिय चिंतन और मनन, अध्यापन कार्य किया, आनलाइन शिक्षण कार्यक्रम से वर्तमान में भी जुड़ी हूं, मेरे द्वारा प्रशिक्षित बच्चे लेखनी का सुंदर उपयोग किया करते हैं। मैंने लगभग 130 कविताएं लिखी है, जिसमें अधिक प्रकाशित हैं, कई आलेख भी, लिखे हैं। दृढ़ संकल्प है, कि लेखन और अध्यापन से, अध्ययन के सामूहिक विस्तारण से समाज कल्याण – कार्य के कर्तृत्व बोध में वृद्धि हो सकती है। अधिक सकारात्मक परिणाम आ सकते हैं।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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माँ शैलपुत्री का पूजन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ माँ शैलपुत्री का पूजन। ♦

महानवरात्रि की प्रथम पूजा,
माँ, स्वीकार करें, समुदाय,
की अर्पित लाल चुनरी,
झिलमिल, दिव्य, ज्ञान-दीप्त।

ग्रहण करें, दायित्व सर्व के,
आत्म – साधन का, चरणों में,
समेटें, जो सदा तप: पूत..
दुःख नाशिनी, माया – हारिणी,
पवित्र गंगाजल, सुवासित।

भावना के अभिदान से,
शीतल करें माँ जन मन को।
तव, प्रेम – तत्व, करें,
विह्वल, जन – आस्था को।

दें बन्धन, समरसता का न,
लक्ष्य हो, हमारा धन – यश व,
लौकिक संस्कार…

तव ज्ञान रुप स्पर्शी हवा,
करे अस्त बुराई का।
उदय हो प्रति ह्रदय प्रेम का,
सद्गुण, सम् – भाव का।

♦ प्रो• मीरा भारती जी – पुणे, महाराष्ट्र  ♦

—————

  • “प्रो• मीरा भारती जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से महानवरात्रि व माँ शैलपुत्री के बारे में बताने की कोशिश की है — महानवरात्रि की प्रथम पूजा माँ शैलपुत्री स्वीकार करें। समुदाय की अर्पित लाल चुनरी, झिलमिल, दिव्य, ज्ञान-दीप्त ग्रहण करें। दायित्व सर्व के आत्म-साधन का, चरणों में समेटें। जो सदा तप: पूत.. दुःख नाशिनी, माया – हारिणी, पवित्र गंगाजल, सुवासित माँ शैलपुत्री का आओ हम सब मिलकर पूजन करें।

—————

यह कविता (माँ शैलपुत्री का पूजन।) “प्रो• मीरा भारती जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं से नई पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम मीरा भारती (मीरा मिश्रा/भारती) है। मैंने BRABU Muzaffarpur, Bihar, R.S College में प्राध्यापिका के रूप में 1979 से 2020 तक सक्रिय चिंतन और मनन, अध्यापन कार्य किया, आनलाइन शिक्षण कार्यक्रम से वर्तमान में भी जुड़ी हूं, मेरे द्वारा प्रशिक्षित बच्चे लेखनी का सुंदर उपयोग किया करते हैं। मैंने लगभग 130 कविताएं लिखी है, जिसमें अधिक प्रकाशित हैं, कई आलेख भी, लिखे हैं। दृढ़ संकल्प है, कि लेखन और अध्यापन से, अध्ययन के सामूहिक विस्तारण से समाज कल्याण – कार्य के कर्तृत्व बोध में वृद्धि हो सकती है। अधिक सकारात्मक परिणाम आ सकते हैं।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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दुर्गा स्तुति।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ दुर्गा स्तुति। ♦

हे ! सिंह वाहिनी माँ दुर्गे,
दरश मुझे भी दे जाना।
शैलपुत्री अवतार ले कर,
वृष वाहन पर आ जाना।

तेरे वृषभारुणा रूप को,
शत – शत वन्दन है।
कृपा करो माँ तपचारिणी,
जग में भीषण क्रन्दन है।

कर में जो सिद्ध कमंडल है,
पावन जल छिड़का जाना।
हे ! सिंह वाहिनी माँ दुर्गे,
दरश मुझे भी दे जाना।

दश भुजाओं में शस्त्र लेकर,
चंद्रघंटा रूप धारा।
इसी रूप में अम्बे तूने,
दानव महिषासुर मारा।

सुधा कलश धात्री कूष्मांडा,
यश, आयुष माँ दे जाना।
हे ! सिंह वाहिनी माँ दुर्गे,
दरश मुझे भी दे जाना।

कमलासना है रूप पंचम,
पुत्र स्कंद की माता हो।
मनभावन माँ दर्शन तेरा,
मंगल, मोक्ष प्रदाता हो।

माँ कात्यायनी, महागौरी,
सिद्धि प्रदाता आ जाना।
हे ! सिंह वाहिनी माँ दुर्गे,
दरश मुझे भी दे जाना।

♦ वेदस्मृति ‘कृती’ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

—————

  • “वेदस्मृति ‘कृती’ जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — माता रानी के प्रत्येक रूपों का वर्णन करते हुए … माँ दुर्गा का स्तुति की है। माता रानी के प्रत्येक रूप व गुणों, शक्तियों और आसन, वाहन का मनोरम वर्णन किया है। ॥ प्रेम से बोलो जय माता दी ॥

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यह कविता (दुर्गा स्तुति।) ” वेदस्मृति ‘कृती’ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/गीत/दोहे/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई आई टी . शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक. समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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वे बड़े कष्ट में हैं।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ वे बड़े कष्ट में हैं। ♦

उनको कष्टों ने, घेर रखा है,
जब से सुने, बुलंदी, पे हम हैं।

उजाले की आस में दिन बिताते,
मार्ग में तम, वे बड़े कष्ट में हैं।

दुनिया का संकट, उन्हें घेरे बैठा,
मंदिर अयोध्या के, जब बन रहे हैं।

वे जीवित मृत, भला कौन बताए,
सच है या भ्रम, वे बड़े कष्ट में हैं।

जो कल तक थे, उन पर कटाक्ष करते,
आज उन्हीं के दर पे, बड़े कष्ट में हैं।

सर, सर में परिसर उनका, हैरानी का,
कहें ना कहें, वे बड़े परेशान हैं।

सभी जानते उठने में समय लगता,
उठाना है गिरे को, वे बड़े कष्ट में हैं।

विसर्जन के लिए करते हाय तौबा,
बुराई के विसर्जन, वे बड़े कष्ट में हैं।

दूसरों को बूढ़ा और कमजोर कहते,
तीतर बटोरते, वे बड़े कष्ट में हैं।

थका सा समंदर दिखता उन्हें अब,
सुव्यवस्था देख, वे बड़े कष्ट में हैं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — जब से सुना उन्होंने राम मंदिर निर्माण की सूचना वे बड़े कष्ट में हैं। दुनिया का संकट, उन्हें घेरे बैठा, मंदिर अयोध्या के, जब बन रहे हैं। वे जीवित मृत, भला कौन बताए, सच है या भ्रम, वे बड़े कष्ट में हैं। जो कल तक थे, उन पर कटाक्ष करते, आज उन्हीं के दर पे, बड़े कष्ट में हैं।

—————

sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (वे बड़े कष्ट में हैं।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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आत्मिक ऊर्जा से सृजन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ आत्मिक ऊर्जा से सृजन। ♦

आत्मिक ऊर्जा से सृजन,
ब्रह्मांड – ऊर्जा, देती।
निश्चयी संदेश,
एक सकारात्मक…
ऊर्जा, करती व्यक्त।

एक तड़पन, एक,
मूक, निराश संघर्ष।
अस्तित्व हेतु…
रचनाकार वह, जो,
चलाता, निज लेखनी।

कथ्य उसका है।
स्वविचार – तत्व, चेतना,
जो उसका समर है।
वह, केवल लेखक,
लिंग – भेद नहीं।

आत्मस्थ शब्द – ब्रह्म में,
भुवन को करता जो,
भव्य, उन्नत विचारों,
से वह, मात्र, लेखक,
न स्त्री, न पुरुष।

♦ प्रो• मीरा भारती जी – पुणे, महाराष्ट्र  ♦

—————

  • “प्रो• मीरा भारती जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से — एक सच्चा लेखक सदैव ही अपने आत्मिक ऊर्जा से लेखन का सृजन करता है। आत्मस्थ शब्द – ब्रह्म में, भुवन को करता जो, भव्य, उन्नत विचारों, से वह, मात्र, लेखक, न स्त्री, न पुरुष।

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यह कविता (आत्मिक ऊर्जा से सृजन।) “प्रो• मीरा भारती जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं से नई पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम मीरा भारती (मीरा मिश्रा/भारती) है। मैंने BRABU Muzaffarpur, Bihar, R.S College में प्राध्यापिका के रूप में 1979 से 2020 तक सक्रिय चिंतन और मनन, अध्यापन कार्य किया, आनलाइन शिक्षण कार्यक्रम से वर्तमान में भी जुड़ी हूं, मेरे द्वारा प्रशिक्षित बच्चे लेखनी का सुंदर उपयोग किया करते हैं। मैंने लगभग 130 कविताएं लिखी है, जिसमें अधिक प्रकाशित हैं, कई आलेख भी, लिखे हैं। दृढ़ संकल्प है, कि लेखन और अध्यापन से, अध्ययन के सामूहिक विस्तारण से समाज कल्याण – कार्य के कर्तृत्व बोध में वृद्धि हो सकती है। अधिक सकारात्मक परिणाम आ सकते हैं।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा तेरी जय हो।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा तेरी जय हो। ♦

शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा तेरी जय हो।
आया नवरात्र, मईया के सज गया दरबार है,
हर्षित हो रहा मन है, खिल उठा संसार है।
सजा है दरबार चलो अब, मईया के द्वार है,
नव रूपों में होगा अब, मातारानी का दीदार है॥

महिषासुर संहारनी, अष्ट भुजाओं वाली शक्ति स्वरूपा,
माँ जगदम्बा का, होता जय जयकार है॥

माँ पार्वती के नव रूपों को, कहते नवदुर्गा है,
विघ्न विनाशनी माँ तेरी, महिमा अपरम्पार है।
सृष्टि पर जब आए संकट, मां स्वयं आ जाती है,
दुष्टों का कर संहार, संकट दूर भागती है॥

माँ जगदम्बा को जग करता, हरदम हर पल याद है,
शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा का, होता जय जयकार है॥

माँ के नव रूपों का वर्णन करना, बड़ा ही मुश्किल काम है,
हर रूपों में उनकी महिमा का, होता अपना ही मान है।
पहले स्वरूप शैल पुत्री से, जग को परमात्मा का कराती दीदार है,
शिला, भू, समीर, अग्नि, नभ में, माँ करती स्वयं वास है,
शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा का, होता जय जयकार है॥

दूसरे रूप ब्रह्मचारिणी से, जग में चेतना जगाती है,
तीसरे रूप चंद्रघंटा से, वाणी का साज सजाती है।
चौथे रूप कूष्मांडा से, नर नारी में गर्भ की शक्ति भरती है,
पंचम रूप स्कंदमाता में, पुत्रवती माँ का दर्श दिखाती है।
शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा का, होता जय जयकार है॥

षष्ठ रूप कात्यायनी में भगवती कन्या की, बनी मात पिता है,
सप्तम रूप कालरात्रि से सब जड़ चेतन को, काल के गाल का देती संदेश है।
अष्टम रूप में माँ जगदम्बा, महागौरी के गौर वर्ण दर्शाती है।
नौवें रूप से माँ अपने साधक का ज्ञान से, परम सिद्धि का गुर सिखलाती है।
शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा का, होता जय जयकार है॥

जग कल्याणी माँ, तू ही जग की पालनहार है,
हम सभी मानव जन पर, तेरा ही उपकार है।
विवेक करता विनती माँ से, यही बारंबार है,
अमन चैन हो इस धरा पर, ऐसी दरस दिखा जा मां।
जीवनदायनी करुणा बरसाने वाली माँ, सदा तेरी जय हो॥

हर दिल में तेरा ही वास है, तेरी महिमा अपरम्पार है,
शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा का होता जय जयकार है॥

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा के नव रूपों, गुणों और शक्तियों का मनोरम सुन्दर वर्णन किया है। माँ जगदम्बा हर स्वरूप में, सदैव ही अपने भक्तों का कल्याण करती है। पाप नाशक, ध्यान पूर्वक जो भी पूजन करता शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा देवी का, जीवन उसका सुखदायी हो जाता। शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा देवी है बहुत ही दयालु अपने भक्तों पर सदैव ही माँ है बलिहारी। सच्चे मन से जो भी इंसान माँ के इस रूप का पूजन व भजन करता उसे जल्द ही सुख, समृद्धि ज्ञान – शक्ति भरपूर मिलता। आओ हम सब सच्चे मन से शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा देवी का पूजन व भजन करें।

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यह कविता (शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा तेरी जय हो।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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विंध्याचल धाम महान।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ विंध्याचल धाम महान। ♦

विंध्याचल में आदिशक्ति,
जगदंबा का स्थान है।
विंध्य गिरि ऊपर माई का,
बड़ा सुंदर धाम है॥

विंध्याचल माँ देवी मंदिर,
महाशक्ति पीठ है।
धर्मराज युधिष्ठिर स्तुति में,
मंदिर विराजमान है॥

इक्कावन शक्तिपीठ में प्रथम,
अंतिम शक्तिपीठ है।
गंगा तट स्थित यह मंदिर,
प्रधान शक्ति पीठ है॥

सृष्टि के आरंभ ऐसे ही,
विंध्याचल स्थान है।
सृष्टि के विस्तार की साक्षी,
माँ आदिशक्ति नाम है॥

पश्चिम ऊपर उत्तर मुखी,
ब्रह्मरूप देवी स्थान है।
संपूर्ण दिशाओं में स्थित,
अष्टभुजी विराजमान हैं॥

मनु – सतरूपा को निष्कंटक,
राज्य का आशीर्वाद दीं।
वंश वृद्धि और पद प्रतिष्ठा के,
शुभाशीष विस्तार की॥

दुष्ट कंस के बध की दिव्य,
भविष्यवाणी करती हैं।
दो गर्भ से निकल कर माता,
मृत्यु संदेश कंस को देती हैं॥

जो भक्त माता दरबार में,
जा सिर झुकाता है।
महाकाल के गाल से वह,
साधक बच जाता है॥

दुनिया में विविध तरह से पूजा,
बिंदेश्वर का विधान है।
कठिन घड़ी में माता रानी,
जी, करती कल्याण है॥

चूड़ी सिंदूर नारियल माला,
साधना – मंत्र विधान है।
हलवा पुरी और मिठाई,
माई का पकवान है॥

घंटा घड़ियाल शंख नगाड़ा,
शहनाई से जय घोष।
विंध्याचल धाम दर्शन पूजन,
आस्था वानों का काम॥

गंगा स्नान मां का जयकारा,
विंध्य धाम गुंजायमान।
विंध्य धाम की पर्वत मालाएं,
भक्तों का कर दी कल्याण॥

अष्ट भुजा औ काली खोह में,
हवन – यज्ञ श्रीमान।
संत महात्माओं का डेरा,
चाक – चौबंद इंतजाम॥

माता ‘मंगल’ तेरे धाम,
करता है तुझे प्रणाम।
है शीश तुम्हारे चरणो में,
मां तू करुणा निधान॥

माँ विंध्यवासिनी का मंत्र — ॐ ह्रीं महालक्ष्म्यै नमः

Mantra For Maa Vindhyavasini — Om Hreem Mahalakshmai Namah

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — माँ विंध्यवासिनी के स्वरूप गुणों और शक्तियों का बखूबी वर्णन किया है। इक्कावन शक्तिपीठ में प्रथम माँ विंध्यवासिनी अंतिम शक्तिपीठ है। गंगा तट स्थित माँ विंध्यवासिनी मंदिर, प्रधान शक्ति पीठ है। सृष्टि के आरंभ से ही, विंध्याचल स्थान है। सृष्टि के विस्तार की साक्षी माँ विंध्यवासिनी, माँ आदिशक्ति नाम है। पाप नाशक, ध्यान पूर्वक जो भी पूजन करता माँ विंध्यवासिनी देवी का, जीवन उसका सुखदायी हो जाता। माँ विंध्यवासिनी देवी है बहुत ही दयालु अपने भक्तों पर सदैव ही माँ है बलिहारी। सच्चे मन से जो भी इंसान माँ के इस रूप का पूजन व भजन करता उसे जल्द ही सुख, समृद्धि ज्ञान – शक्ति भरपूर मिलता। आओ हम सब सच्चे मन से माँ विंध्यवासिनी देवी का पूजन व भजन करें।

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यह कविता (विंध्याचल धाम महान।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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