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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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2023-KMSRAJ51 की कलम से

सनातन, मीडिया और धीरेंद्र शास्त्री पर बवाल।

Kmsraj51 की कलम से…..

Ruckus on Sanatan media and Dhirendra Shastri | सनातन, मीडिया और धीरेंद्र शास्त्री पर बवाल।

यह कितनी विडम्बना है कि आज हर क्षेत्र में घपलाबाजी हो रही है। हद हो गई। नेता और अधिकारी मिलकर देश लूट रहे हैं। छोटे सरकारी कर्मचारी काम न कर के मात्र बैठ कर तनख्वाह ले कर देश लूट रहे हैं। या फिर घूंस ले कर लूट रहे हैं। देश के न्यायालयों में न्याय बिक रहा है। पत्रकार पैसों की लालच में सच को झूठ और झूठ को सच कहने पर तुले हैं। बड़ी विडम्बना है कि एक मात्र धर्म परेशान लोगों का सहारा बन कर रह गया था। वहां भी अब ढोंग पाखंड और नाटक होना शुरू हो चुका है। यही धर्म नेता यदि चमत्कार करता है तो सन्देह के घेरे में और यदि वह कुछ नहीं करता तो फिर वह निक्कमा है।

जनता को यदि सभी मामलों में परेशान कोई करता है तो वह है देश का जागरूक पत्रकार और प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया। बेचारी जनता जाए तो जाए पर कहां जाए।

  • दिक्कत हमे हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आदि धर्मों और इन धर्मों के लोगों से नहीं है। यदि इन धर्मों के लोग सच में अपने धर्म को ईमानदारी से मानते हैं और उसका दिल से पालन करते हैं तो वे किसी दूसरे धर्म को भी परेशान नहीं करते हैं।
  • पर यह जो धर्म के नाम पर धर्म परिवर्तन, लव जेहाद या अन्य कई प्रकार की घटनाएं घट रही है। बहु – बेटियों को अर्धनग्न फिल्मे दिखा कर अंग प्रदर्शन की सीख दी जा रही है। बच्चों को, युवा पीढ़ी को नशे की लत लगाई जा रही है। क्या ये सारी बातें ठीक है?
  • यूं हम कहने को तो सब खुद को सनातनी कहते हैं पर हम अपनी सनातनी सभ्यता और संस्कृति के प्रति कितने समर्पित है? क्या कदम उठाते हैं उनके संरक्षण के लिए हम?
  • कुछ नहीं न। बस अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं हम। ये जो लीव इन रिलेशनशिप की बीमारी हमारे देश में आ रही है, क्या यह सनातन धर्म के अनुसार सही है?
  • क्या समलैंगिक विवाह ठीक है? पशु बनाने पर तुले है मानव को आज। क्यों और किस लिए और कौन?

यह चर्चा भी की किसी पत्रकार ने ईमानदारी से? बस लोक आस्थाओं और विश्वासों पर विज्ञान का सहारा लेकर तर्क देना ही मीडिया का काम रह गया है। हम आज समाज को मानव समाज नहीं बल्कि पढ़ा लिखा आदि मानव समाज बनाने पर तुले हैं।

फर्क ये हैं कि आदिमानव कच्चा मांस खाता था और हम पक्का। वे पेड़ – पौधे की छाल से निज गुप्तांगों को ढकते थे और हम बिकनी और ब्रा से ढक रहे हैं। वे अपने लिए जंगलों में पूर्ण स्वतंत्र हो कर मनमाफिक तरीके से अपनी – अपनी शक्ति के बल पर जीते थे और हम आज मानव समाज में कुछ इन्ही गुणों के सहारे जीना चाह रहे हैं। रोक – टोक, नियम – धर्म कुछ चाहते ही नहीं है बस। पूर्ण स्वतंत्रता चाहते हैं।

  • क्या ऐसे मुद्दों पर और शालीनता, सदाचार, मानवता तथा सभ्य व्यवहार पर भी किसी पत्रकार ने बनाया कभी वीडियो? नहीं न? फिर काहे कि सच्ची पत्रकारिता?
  • सब अपने – अपने नम्बर बनाने वाली बात है। राजनैतिक पार्टियां तो वोट के लिए नौटंकी करती ही थी पर अब देश के नामी गिरामी पत्रकार भी यूं ही खेमों में बांट कर रह गए हैं।
  • एक खेमा भाजपा का गुण गाता है तो दूसरा भाजपा विरोधी दलों का। मैं यह नहीं कहूंगा कि मीडिया के संचालक या पत्रकार इनके हाथों बिक गए हैं। बल्कि मैं यह कहूंगा कि यह बदलते दौर की विडम्बना है जो हर इन्सान खुद को और अपनी बात को ही ठीक समझने लगे हैं।

समाज के पुराने नीति – नियमों को कोरा पाखण्ड और कोरी कल्पना सिद्ध करने पर उतारू है। मैं धीरेंद्र शास्त्री का न पक्षधर हूं और न ही किसी और धर्म नेता के पक्ष में और खिलाफ में हूं।

  • आज हिन्दी की क्या दुर्दशा है आजाद भारत में? क्या हिन्दी भारत की राष्ट्र भाषा नहीं होनी चाहिए? कौन पत्रकार इस मुद्दे को उठाता है? कौन इस बात पर वीडियो बनाता है?
  • समाचार की भारत में अधिकतर भाषा हिन्दी। नेताओं की वोट मांगने की भारत में सर्वाधिक नहीं बल्कि 100 प्रतिशत भाषा हिन्दी या उसकी उप भाषाएं (जब चुनाव जीत लिए तो फिर तो लग गए अंग्रेजी बोलने)।
  • फिल्मों की अधिकतर भाषा हिन्दी या हिन्दी की उप भाषाएं। फिर हिन्दी हिंदुस्तान की राष्ट्र भाषा क्यों नहीं?
  • क्यों अंग्रेजी को सर्वाधिक महत्व हर कार्यालय, न्यायालय या सरकारी संप्रेषण और उच्च शिक्षा भाषा माध्यम में दिया जा रहा है? क्यों हम अंग्रेजी को भारत की अघोषित राष्ट्र भाषा बनाने पर तुले हैं?
  • हमारी मत मारी गई है शायद। अंग्रेज भारत से कब के चले गए हैं पर हम आज भी बोलचाल, खान पान और रहन सहन की दृष्टि से उनकी गुलामी मानसिक रूप से कर रहे हैं।
  • मानना पड़ेगा कि मैकाले की बुद्धि सच में ही चालाक और तेज थी। यूं तो सभी राजनैतिक दल कहते हैं कि हमने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। पर किस लिए?
  • उन्ही के पदचिन्हों पर तो तुम सभी दल दशकों से राज कर रहे हैं। कौन सा परिवर्तन लाया है तुमने? वही जाति धर्म के नाम पर फूट डालो और शासन करो की भ्रष्ट राजनीति।
  • असली पत्रकार वही है जो अपने राष्ट्र, संस्कृति और सभ्यता को सुरक्षित रखने के लिए समाज को और युवा पीढ़ी को सचेत करेगा।

जनता के सामने सरकारों, अधिकारियों, व्यापारियों, भ्रष्टाचारियों और धर्म नेताओं तथा संस्कृति और सभ्यता के साथ छेड़खानी करने वालों का सच लाने का काम करने वाला पत्रकार सही मायने में सच्चा पत्रकार है। खैर छोड़िए। शायद मैं गलत हूं। क्योंकि मैंने कहा कि आज सभी को यह लगता है कि मैं जो कह रहा हूं या जो सोच रहा हूं, वही ठीक है। यह सिद्धांत मुझ पर भी तो लागू होता है।

पर यह सार्भौमिक सत्य है कि किसी भी राष्ट्र की सभ्यता और संस्कृति की सुरक्षा करना उस राष्ट्र के शासकों – प्रशासकों से कहीं ज्यादा उस राष्ट्र के बुद्धिजीवियों का काम होता है। क्योंकि बड़े यानी बुद्धिजीवी और जन आदर्श लोग जो व्यवहार करते हैं राष्ट्र के सामान्य जन उसी का आचरण करते हैं। इस बात की पुष्टि श्री कृष्ण जी भी गीता में कर चुके है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — हम आज समाज को मानव समाज नहीं बल्कि पढ़ा लिखा आदि मानव समाज बनाने पर तुले हैं। फर्क ये हैं कि आदिमानव कच्चा मांस खाता था और हम पक्का। वे पेड़ – पौधे की छाल से निज गुप्तांगों को ढकते थे और हम बिकनी और ब्रा से ढक रहे हैं। वे अपने लिए जंगलों में पूर्ण स्वतंत्र हो कर मनमाफिक तरीके से अपनी – अपनी शक्ति के बल पर जीते थे और हम आज मानव समाज में कुछ इन्ही गुणों के सहारे जीना चाह रहे हैं। रोक – टोक, नियम – धर्म कुछ चाहते ही नहीं है बस। पूर्ण स्वतंत्रता चाहते हैं।

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यह लेख (सनातन, मीडिया और धीरेंद्र शास्त्री पर बवाल।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

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वो त्रिवेणी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Vo Trivenee | वो त्रिवेणी।

हाल ही में मैंने एक त्रिवेणी का देखा संगम,
जिनके अथाह प्रेम को देख आँखें गई थम।

एक विशालकाय नीम की जड़ की कोटर में,
जैसे आश्रय लिया दो साथियों ने उनके घर में।

मैंने इस सुंदर नजारे को देखा जब पास से,
पीपल के घने पत्ते लहराये थे बड़े होने की आस में।

मेरी भी खुशी का जब कोई ठिकाना न रहा,
जब मैंने पीपल के नीचे बरगद भी देखा वहां।

इस त्रिवेणी को देख प्रफुल्लित हुआ मेरा दिल,
सोचा कैसे पेड़ों ने भी बनाया खुद को एक दूसरे के काबिल।

एक नीम के तने में दोनो वटवृक्षों ने ले ली पनाह,
प्रकृति का अनुपम नजारा देख मुँह से निकला वाह।

इस संगम को देख दिल ने सजदे में सिर झुकाया,
इन त्रिवेणी के इस मेल पर खूब प्यार आया।

हर वर्ष इस बसंती माह में खूब त्रिवेणी लगाएंगे हम,
फिर इस धरा पर प्राण-वायु बिल्कुल न होगी कम।

काश! इंसान भी इस बोलती प्रकृति के गुण सीख जाए,
अपने गुणों को बस मानवता की भलाई में लगाए।

प्रकृति तो पग-पग पर ही अच्छी सीख सिखलाये,
बशर्ते इंसान भी इनसे प्रेम का रिश्ता ही निभाए।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जब प्रकृति खुशनुमा होती है तो इंसानी मन भी प्रसन्न होती है। अपने चारों तरफ सबकुछ अच्छा – अच्छा लगता है। प्रकृति की हरियाली हर एक मन को मोह लेता है और एक अलग ही सुखमय शांति की अनुभूति कराता है प्रकृति। एक विशालकाय नीम की जड़ की कोटर में, जैसे आश्रय लिया दो साथियों ने उनके घर में। मैंने इस सुंदर नजारे को देखा जब पास से, पीपल के घने पत्ते लहराये थे बड़े होने की आस में। इस त्रिवेणी को देख प्रफुल्लित हुआ मेरा दिल, सोचा कैसे पेड़ों ने भी बनाया खुद को एक दूसरे के काबिल। एक नीम के तने में दोनो वटवृक्षों ने ले ली पनाह, प्रकृति का अनुपम नजारा देख मुँह से निकला वाह।

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यह कविता (वो त्रिवेणी।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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नाचती बसंती।

Kmsraj51 की कलम से…..

Dancing Basanti | नाचती बसंती।

चानी के फूल खिले, चांदनी मंगन,
सुधियों के दीप जले राहों में,
नाचती बसंती रही बाहों में।

रुनुन – झुनुन भनक उठी पायलिया पांव,
महमहायि रजनी गन्धा रजनी के गांव।

चंचल चित्त चहक उठा चाहों में,
नाचती बसन्ति रही बाहों में।

छुवन चाहे अरुणायी अधर को हिलोरे,
खग कुल के कलरव में नाच उठी भोर।

प्रीति पगे द्रम – दल के छाहों में,
नाचती बसन्ति रही बाहों में।

अलसाये नयनों से सुषमा निहार,
भक्त जुटे नवरात्रि माता के द्वार।

‘मंगल’ कुहांस घिरे राहों में,
नाचती बसन्ति रही बाहों में।

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — जब प्रकृति खुशनुमा होती है तो इंसानी मन भी प्रसन्न होती है। अपने चारों तरफ सबकुछ अच्छा – अच्छा लगता है। जब भी नवरात्री आती है भक्तों का उमंग उत्साह देखने लायक होता है, जैसे अभी सावन में शिव भक्तों का उमंग उत्साह देखने लायक देखने लायक है। प्रकृति की हरियाली हर एक मन को मोह लेता है और एक अलग ही सुखमय शांति की अनुभूति कराता है प्रकृति।

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यह कविता (नाचती बसंती।) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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पैगाम।

Kmsraj51 की कलम से…..

Message | पैगाम।

दिल चाहता है आज फिर एक पैगाम दे दूँ,
देश में एकता और भाई चारे से रहें।
कोई किसी का दुश्मन न हो सब आपस में प्रेम करें,
न कोई किसी से नफरत करें, न धर्म के नाम पर दंगे करें।

किसी का दबदबा न हो किसी पर, सब स्वतंत्र रहें,
न बहन, बेटियों को दहेज के नाम जलाया जाएं।
न बेटी के पिता को दहेज के लिये मजबूर किया जाएं,
नारियों पर जो हो रहें अत्याचारों पर रोक लगाई जाएं।

करवा रहें जो बाल श्रम, उनको कठोर सजा दी जाएं,
बेटियों को सहित कर उनको आत्मनिर्भर बनाया जाएं।
देश के लिए, युवाओं का आगे आने का अवसर दिया जाएं,
तभी हमारा देश विश्व गुरु बन पाएगा।
हर देशवासी को अपने देश पर नाज होगा,
यही मेरी लेखनी का थोड़ा सा प्रयास होगा।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — भारत की ये विविधताएँ एकता में बदल गई हैं, जिसने इस देश को विश्व का एक सुन्दर और सबल राष्ट्र बना दिया है। संपूर्ण विश्व में भारतीय संस्कृति की “अनेकता में एकता” चर्चा का और आश्चर्य का विषय रही है. पश्चिमी समाजशास्त्री आज भी अचंभित है कि इतने विशाल भू-भाग के निवासी मिल जुलकर कैसे रहते हैं। करवा रहें जो बाल श्रम, उनको कठोर सजा दी जाएं, बेटियों को सहित कर उनको आत्मनिर्भर बनाया जाएं। देश के लिए, युवाओं का आगे आने का अवसर दिया जाएं, तभी हमारा देश विश्व गुरु बन पाएगा। हर देशवासी को अपने देश पर नाज होगा, यही मेरी लेखनी का थोड़ा सा प्रयास होगा।

—————

यह लेख (पैगाम।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरे वतन की।

Kmsraj51 की कलम से…..

Mere Vatan Ki | मेरे वतन की।

मेरे वतन की माटी की खुशबू, सुबह – शाम जिसे जब आती है।
मन हो उठता है बाग – बाग सा, रूह होती तब मदमाती है।

यह भक्ति – मुक्ति की पावन धरा है, राम – कृष्ण को जनाती है।
गंगा – यमुनी तहजीबों को, यह भूमि खुद पर ही तो बहाती है।

धर्म अनेक यहां नाना भाषाएं, कई कुल कुनबे, कई जाति है।
सीधा सादा मानुष यहां का, विश्व पटल पर जिसकी ख्याति है।

दादुर, म्यूर, पपिहरा के शोर और कोयल काली मीठा जब गाती है।
भारत देश की धरती सचमुच, हर्षित हो फूली न तब समाती है।

शीतल पवन जब हवा के झोंको से, धूल धारा से अम्बर में उड़ाती है।
यूं लगता है मानो भारत की भूमि, मस्ती में होली का पर्व मनाती है।

रिमझिम बारिश की शीतल बूंदें, सिंचित करती यहां की जब माटी है।
उग आती है तब नाना फसलें, भारत की जनता उन्हे तब खाती है।

छा जाए कभी संकट के बादल तो, वीर बिरादरी सर अपना जब चढ़ाती है।
बुंदेले हर बोलों की भांति फिर गौरव गाथा, जनता उनकी तब गाती है।

प्रेम करुणा की प्रवाहक यह भूमि, हमेशा विश्व में शान्ति ही चाहती है।
नाहक इसको छेड़े जो कोई, फिर तो दुश्मन की ईंट से ईंट बजाती है।

जय बोलो भाई जय बोलो सब, मां भारती के पावन आंचल की।
जय बोलो भाई जय बोलो सब, उतर, दक्षिण, पश्चिम और पूर्वांचल की।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — धर धरा,धरती, वसुंधरा, भारत भूमि। ऐसी सबकी प्यारी, भारत भूमि। ॠषी मुनियों, संतो तपस्वीयों की तपोभूमि। ऐसी सबकी, प्यारी भारत भूमि। भारत की धरती, खेत, पहाड़, जंगल, झरने आदि तो उसके अंग हैं। हालांकि, वास्तव में भारतमाता तो भारत की सम्पूर्ण जनता ही हैं, जो पूरे देश में बसी हुई हैं। यह मातृभूमि हमारी जन्मभूमि है, अगर यह नहीं तो मनुष्य का कोई अस्तित्व नहीं होता। भारतभूमि की अनोखी सुंदरता को निहारने के लिए पर्यटक दूर देशो से आते है। मातृभूमि के साहित्य और संस्कृति पर ही हमारे संस्कार निर्भर करते हैं। मातृभूमि स्वर्ग के समान है और इसकी तुलना किसी अन्य स्थान से नहीं की जा सकती है। भारत को ‘माता’ कहकर संबोधित करने का श्रेय बंगला लेखक किरण चंद्र बनर्जी को भी जाता है। 1873 में इनके नाटक ‘भारत-माता’ में भारत के लिए ‘माता’ शब्द का प्रयोग किया गया था। आज़ादी से पहले बंगाल में दुर्गा पूजा लोगों को एकजुट करने और स्वराज (आजादी) पर चर्चा करने का एक माध्यम बनी हुई थी। भारत को मातृदेवी के रूप में चित्रित करके भारत माता या ‘भारतम्बा’ कहा जाता है। भारतमाता को प्राय नारंगी रंग की साड़ी पहने, हाथ में तिरंगा ध्वज लिये हुए चित्रित किया जाता है तथा साथ में सिंह होता है। जिन्होंने भी भारत माता के लिए अपनी जान न्योक्षावर की वो मर कर भी अमर हो गए। आजादी के समय भारत माता के लिए अपनी जान कुर्बान करने की लिए वीरों ने एक पल भी नहीं सोचा।

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यह कविता (मेरे वतन की।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

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सैन्य कार्रवाई।

Kmsraj51 की कलम से…..

Military Action | सैन्य कार्रवाई।

उत्तुंग शिखर नीरव हिमालय की वादियां,
भय खाकर कोलाहल से घबराती है।
ये टोली दर टोली भीड़ उमड़ती,
हिमालय में क्या करने आती है?

सरहदी सीमाओं को आज सजाने,
सैन्य टुकड़ियां धड़ाधड़ जाती है।
रोम – रोम में उनके रंगत निखरी,
स्वधर्म – हर्ष गर्व से चौड़ी छाती है।

सैनिक कहता दूसरे से प्रियवर,
चल, मां भारती हमें बुलाती है।
शौर्य सिमटता कदमों में उनके,
चंचल चालें तो है ही मदमती है।

मदहोश है ऐसे देश प्रेम से,
मानों, मित्र विवाह के बराती है।
गूंज उठती है घाटियां तब जब,
आवाजें उनकी झुंझलाती है।

थरराती है रूहें अरी की,
बुद्धि भी विक्षिप्त सी हो जाती है।
सीना ठोक जब वीर जवानों की ,
गर्जना रौरव – रौद्र मचाती है।

लहलाती श्यामल फैसले जैसे ,
मौसम के साथ, खेतों में उग आती है।
है वही नजारा सीमा पे आज तो,
यह भव्य भारत देश की माटी है।

लहू से सींचते वीर शहीद जब,
यह नए वीर तब उगाती है।
हिम्मत की ऊंचाई के आगे उनकी,
आज, बौनी हिमालय की घाटी है।

चट्टानी वक्ष, भुजदण्ड फौलादी,
हर इरादे पक्के और दिमागी है।
एक इंच न देंगे लूटने उनको,
सागर की तलहटी, चाहे गलवान की वादी है।

वे अपने देश में आजाद रहे,
हमें अपने देश की आजादी है।
आंख उठाने की जरूरत मत करना,
फिर तो हृदय विदारक बर्बादी है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — हमारी सेना विशाल और सशक्त है। जब भारतीय सेना वर्दी में हथियारों को लिए कदम से कदम मिलाकर एक साथ सीमा की ओर चलती है तो यह हमारे भारत की ताकत को दर्शाती हैं। भारतीय सेना देश की सीमाओं को सुरक्षित करके देश के भीतर शांति और सुरक्षा बनाये रखती है। भारत सरकार और उसके प्रत्येक भाग की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत सेना सदैव तत्पर रहती है। भारत सरकार को ताकत हमारी सेना के कारण ही मिलती है। भारतीय सेना कर्मी सभी प्रकार की साहसिक गतिविधियों में हमेशा आगे रहे हैं। साहसिक कार्य मुख्य रूप से सैन्य प्रशिक्षण का एक अनिवार्य हिस्सा है। यह इच्छाशक्ति, दृढ़ संकल्प, साहस और देश प्रेम भारत माता के सेवा का जूनून व ज़ज्बा है हर सैनिक के रगो में, जो उन्हें सदैव ही ऊर्जावान बनाये रखता है, चाहे गर्मी हो, बारिश हो या फिर सर्दी हो। भारतीय थल सेना का कार्य राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद की एकता सुनिश्चित करना, राष्ट्र को बाहरी आक्रमण और आंतरिक खतरों से बचाना और अपनी सीमाओं पर शांति और सुरक्षा बनाए रखना है।

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यह कविता (सैन्य कार्रवाई।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

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वेदना।

Kmsraj51 की कलम से…..

Pain | वेदना।

एक दिन ऐसा आएगा, हम तो चले जायेंगे।
कुछ को छोड़, सभी को याद बहुत आयेंगे।

ढूढ़ने वाले ढूंढते रहेंगे, पर हमें कहीं न ढूंढ पायेंगे।
ये मुराद कभी पूरी न होगी, कहीं भी न मिल पायेंगे।

मेरे सभी अजीज, अपनी दुनिया में मस्त रहेंगे।
हम किसी दूसरी दुनिया में खो जायेंगे।

कोई न रोक पायेगा, आने वाले आते रहेंगे।
जो आया इस जहां में, मुक़र्रर वक़्त पर जाते रहेंगे।

“भोला” का पथ सत्कर्म है, जीवन का यही मर्म है।
आना – जाना लगा रहेगा, यही कुदरत का क्रम है।

इससे मुक्ति मिल जायेगा, फिजूल वो भ्रम है।
भगवान के घर में, गुनाहगारों की शिनाख्त बाकी है।

थोड़ी इबादत राम, कृष्ण, चित्रगुप्त की कर लूं।
तू भी जा अब मस्जिद में, अज़ान तेरी बाकी है।

जाना हैं दोनों को भगवान के पास, तुझे भी मुझे भी।
गुज़ारिश है बन्दगी कर, जो साँसे बाकी है।

मिलना है ग़र प्रभु से, तो चलना है नेकी की राह पर।
आहत न हो कोई दिल, इसे अख़लाक़ कहते हैं।

मग फिरत के बाद, जन्नत मिल जाये।
इसे खुशकिस्मती, वो इत्तफाक कहते हैं।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — अन्‍य जीवों की तरह मनुष्य के प्राण संकट में नहीं होते तभी यह जीवन प्रभु स्मरण और भजन के लिए अनुकूल है। पर जीवों की वेदना से भी बड़ी वेदना मानव जन्म में तब होती है जब हम प्रभु के बनने का सुअवसर भी गवां देते है फालतू के कार्यों की वजह से। मानव जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते है, कभी भी एक जैसा समय लम्बे समय तक नहीं रहता हैं।

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यह कविता (वेदना।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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बरखा तेरा बरसना।

Kmsraj51 की कलम से…..

Barakha Tera Barsana | बरखा तेरा बरसना।

कभी धूप, कभी उमस भरे मौसम को सहना,
ऐसे में बारिश का आना, वाह! क्या कहना।

रात भर से काला आसमां जी भरकर रोता रहा ,
धरती ने इसके इन विरह के आंसुओं को सहा।

बयान करना चाह रहे ये आंसू अपनी खुशी को,
वनस्पति धुलकर लहलहा कर दर्शाती हंसी को।

कभी बारिश धीमी~धीमी तो कभी तेज होती,
किसी को चैन की नींद तो कोई आंख रात-भर रोती।

खैर, भोर होते~होते मौसम साफ हो गया,
धरती~आसमां का कहा~सुना माफ हो गया।

बादलों की गड़गड़ाहट रातभर डराती रही,
कुछ आंखें इनकी आवाज सुन कराहती रही।

किसी को तो रात भर खुशी नही इनके बरसने की,
कुछ दुख सजा देता ऐसे मौसम में भी तरसने की।

सुबह का मौसम धुला~धुला सा प्रतीत हुआ,
आसमां ने खुश होकर जमीं को प्रेम से छुआ।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — वर्षा ऋतु में कड़कड़ाती और चिलचिलाती धूप से निजात मिलता है। धरती पर पानी के मुख्य स्रोत जैसे नदियाँ, तालाब, झरने और कुँवों में वर्षा ऋतु के होने से पानी भर जाता है जिससे वातावरण में ठंडी हवाएँ चलने लगती है। वर्षा ऋतु के सुहाने मौसम के आने से गर्मी से इंसानों, जानवरों, जीव-जंतुओं एवं पेड़-पौधे सभी को राहत मिलती है। कड़कड़ाती गर्मी के बाद जून और जुलाई के महीने में वर्षा ऋतु का आगमन होता है और लोगों को गर्मी से काफी राहत मिलती है। वर्षा ऋतु एक बहुत ही सुहाना ऋतु है। वर्षा ऋतु आते ही लोगों में खासकर के किसानों में खुशियों का संचार हो जाता है। वर्षा ऋतु सिर्फ गर्मी से ही राहत नहीं देता है बल्कि यह खेती के लिए वरदान है।

—————

यह कविता (बरखा तेरा बरसना।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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आदिपुरुष।

Kmsraj51 की कलम से…..

Adipurush | आदिपुरुष।

कथा, पात्र, संवाद नहीं,
ना भाव भंगिमा दिखती है।
सौम्य सरल सीता मैया,
अर्धनग्न दशा में दिखती है।
क्या यही हनुमत की वाणी है?
क्या यही दशानन उस युग के?
क्या कर दिया रामायण को,
रे रावण तुम इस कलयुग के॥

मर्यादा पुरुषोत्तम को तुम,
शिष्टाचार रहित किया।
खून धर्म का कर तुमने,
संतों का खूब अहित किया।
निज स्वार्थ के खातिर सत्य को,
चले मिटाने सतयुग के।
क्या कर दिया रामायण को,
रे रावण तुम इस कलयुग के॥

हो अपराधी श्रीराम के,
क्षमा मांग लो सब होगा।
गर निकला तीर जो तरकस से तो,
निश्चित तेरा वध होगा।
कालनेमि क्यों बनने चले हो,
राघव के उस त्रेतायुग के।
क्या कर दिया रामायण को,
रे रावण तुम इस कलयुग के॥

♦ अमित प्रेमशंकर जी — एदला-सिमरिया, जिला–चतरा, झारखण्ड ♦

—————

Conclusion

  • “अमित प्रेमशंकर“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इजिस रामायण की कहानी को हम सब बचपन से सुनते आ रहे हैं उसका भद्दा मजाक आप फिल्म में देख पाएंगे। फिल्म में सबसे खराब हैं इसके डायलॉग। फिल्म में हनुमान जी भगवान राम का मैसेज लेकर लंका गए। मेघनाद उनकी पूछ में आग लगा कर पूछता है ‘जली!’ हनुमान जवाब देते हुए कहते हैं, ‘तेल तेरे बाप का, कपड़ा तेरे बाप का, और जलेगी भी तेरे बाप की’। इसके अलावा जब हनुमान लंका से वापस राम के पास पहुंचते हैं तो राम उनसे वहां के बारे में पूछते हैं। इसके जवाब में हनुमान कहते हैं- ‘बोल दिया, जो हमारी बहनों को हाथ लगाएंगे, उनकी लंका लगा देंगे।’

—————

यह कविता (आदिपुरुष।) “अमित प्रेमशंकर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। आपकी ज्यादातर कविताएं युवा पीढ़ी को जागृत करने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

नाम: अमित प्रेमशंकर
पिता: श्री द्वारिका प्रजापति

माता: श्रीमती रेखा देवी
पत्नी: श्रीमती संजू प्रेमशंकर

जन्मतिथि: १० मार्च १९९३
पता: ग्राम+पोस्ट – एदला
प्रखण्ड: सिमरिया
जिला: चतरा (झारखण्ड)
पिन: ८२५१०३

शिक्षा: स्नातक (हिंदी) विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग
सम्प्रति: कवि, गीतकार व ढोलक वादक।

प्रकाशित पुस्तकें: मन की धारा(एकल),आत्म सृजन, काव्य श्री, एक नई मधुशाला १, एक नई मधुशाला २, भावों के मोती, हमारी शान तिरंगा है व अक्षर पुरूष
प्रकाशित रचनाएं: देश के अलग-अलग पत्र पत्रिकाओं में लगभग दो सौ रचनाएं प्रकाशित व समय समय पर सामाचार पत्रों के माध्यम से पत्राचार।
विशेष: कविता “सीता माता सी कोई नहीं” तथा “आज राम जी आएंगे” महाराष्ट्र के वरिष्ठ साहित्यकार श्री ओ. सी. पटले द्वारा पोवारी भाषा में अनुवाद व दर्जनों हिन्दी, भोजपुरी गीत यूट्यूब पर मौजूद हैं जिसे अलग अलग गायक और गायिकाओं ने अपने स्वर से सजाया है।

प्राप्त सम्मान: काव्य श्री साहित्य सम्मान, आत्म सृजन साहित्य सम्मान, भावोन्नती साहित्य सम्मान, सरदार भगतसिंह काव्य लेखन सम्मान, सुमित्रानंदन पंत स्मृति सम्मान, साहित्य कर्नल सम्मान दो बार, रैदास साहित्य सम्मान,द फेस ऑफ इंडिया साहित्य सम्मान, राष्ट्र प्रेमी साहित्य सम्मान तथा दिल्ली साहित्य रत्न सहित अनेकों आनलाईन काव्य पाठ द्वारा ई-सम्मान पत्र शामिल है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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बादल।

Kmsraj51 की कलम से…..

Clouds | बादल।

हृदय क्षितिज में घर्राते बादल,
गर्जना छोड़, बरसात बरसा।
तृषित धारा के रोम-रोम की,
आज प्रिये तू , प्यास बुझा।

सुकून मिले अब विरहिणी को,
और न इसको यूं ही तड़पा।
सोया सपना अलसाई आंखें,
निज नेह से प्रिय तू , अब तो जगा।

है यौवन की पीड़ा, सावन- भादो की क्रीड़ा,
दादुर, मोर और पपीहरा के शोर।
मानस पटल पर आग लगी है,
दिल को लूट ले गया कोई, श्यामरा चोर।

कटे न कटती है रातें काली,
दिन, न सांझ, न कटती है भोर।
प्रेम की लगी है प्यास प्रिये अब,
रूप से रूह का रुख, करो इस और।

चंद लम्हों के मिलन से क्या होगा?
नीर नीरद का बह जाने दे।
मन की बातें मन मांझ रहे न,
रोक न मुझे, सब कह जाने दे।

दिन चार की है ये जिंदगानी सबकी,
कहने को हैं प्रिये, बहुतेरी बातें।
इक बार गुजरे दिन, जिंदगी के तो,
फिर बहुर न लौट के आते।

है जीवन वही जो दिल से जिया,
फिर न पछताना कि, अभी कुछ न किया।
आज माहौल प्रलय की मानिंद बना है,
कुछ हमने करा है, कुछ कुदरत ने किया है।

रह न जाए कुछ अधूरी बातें,
जीवन प्रिये अब थोड़ा है।
घनघोर घटा कुछ यूं न बरसाना,
जिन्होंने, सब्र – बांध ही तोड़ा है।

हो जाने दे रिमझिम बारिश,
बरसात तो प्रिय अब आनी है।
बिरह बदरी बन घुमड़ रहा है,
आत्म निवेदन – नेह का पानी है।

घनश्याम पिया के संदेशे ले – ले,
आती नीरद की जलधारा है।
कब तक, विरहिणी वेदना झेले?
यह जीवन कितना प्यारा है?

भीग जाने दे दिल के दरी खाने,
कलेजा भी ठंडा हो जाए।
मिल जाने दे नदी समंद में,
एक दूजे में प्रिये बस खो जाने दे।

सिर्फ गरजते मत रहना रे ओ बादल,
बरसात तो अब तू आने दे।
सदियों पुराना बिछड़ा यार,
रूह को अब तो तू पाने दे।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — प्यार एक खूबसूरत एहसास है। एक व्यक्ति जिसके पास प्यार भरा दिल है, वह हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहता है। वह हर किसी से प्यार करता है जैसे हम जो देते हैं वह हमें मिलता है। इसलिए, अगर हम प्यार देते हैं तो हमें बदले में प्यार मिलता है और यह हमारे जीवन को सुंदर बनाने की शक्ति रखता है। सच्चा प्यार रूह का रूह से होता है, और सच्चे प्यार में समय का बंधन नहीं होता है। सच्चे प्यार में दो जिस्म एक जान की कहानी होती है।

—————

यह कविता (बादल।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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