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“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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2023-KMSRAJ51 की कलम से

क्यों कन्हैया?

Kmsraj51 की कलम से…..

Kyon Kanhaiya? | क्यों कन्हैया?

त्रिलोकी नाथ तुम, सकल अधिष्ठाता,
चराचर जगत के बस तुम ही रचयिया।
जन्म से निर्वाण पर्यन्त कष्ट ही कष्ट,
अपने भाग्य में क्यों लिखे कन्हैया?

जन्म कारा में, यमुना की जलधारा में
आकंठ पिता को क्यों था डुबाया?
कागासुर कभी शकटासुर गोकुल में,
पूतना जैसा हर संकट क्यों आया?

महिमा मंडन या दुख संसार की परिणति,
उद्देश्य जनार्दन था तुमने क्या ठाना?
या कुछ न था तुम्हारे भी हाथों में,
पर लोगों ने तो आपको ही प्रभु है माना।

वे रास लीला फिर विरह की पीड़ा,
राज पाया पर सुख कहां भोगा?
कंस, जरासंध फिर काल्यावन चढ़ाई,
कदम-कदम का कौतुक, अब क्या होगा?

महाभारत फिर निज कुल का खात्मा,
अंत समाधि में बहेलिए के हाथों हुआ निर्वाण।
कुल की स्त्रियां जब भिलों ने सताई,
तब क्यों बचाने न आए तुम ओ भगवान?

क्यों न जीता अर्जुन तब भीलों से,
महाभारत विजयी धनुर्धर सखा महान?
अर्जुन वहीं था, वही गांडीव था,
फिर क्यों न चले, तब वे धनुष – बाण?

सवाल कई हैं जहन में आज भी,
होनी बड़ी है कि आप प्रभु, या फिर इंसान?
विधि का लेखा ही सबसे बड़ा है क्या?
या तुम सबसे बड़ा भी, है कोई और ही भगवान?

यह निश्चित है कि सृष्टि संचालक,
नियंता रचैया है कोई न कोई जरूर।
जो हम ही होते स्वयंभू स्वयं तो,
क्यों होते फिर प्रकृति के हाथों यूं मजबूर?

याद करो प्रभु सहस्र विवाह अपने,
फिर भी प्रेम को तुमने क्यों न पाया?
राधा चाह कर भी क्यों एक न हो सकी?
यह सारा खेल तो हमारी समझ में न आया।

रामावतार में आकाश – पाताल खंगाले,
रावण से भिड़ कर भी सीता को पाया।
यहां तो हजारों विवाह कारा कर भी अपने,
आखिर, राधा रानी को क्यों था सताया?

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — क्यों कन्हैया? तुमने अपने भाग्य में जन्म से लेकर निर्वाण तक कष्ट ही कष्ट लिखें, आखिर मानवता को कौन सी सीख देने के लिए ये सब लीलाएं की? सभी का दुःख हरने वाले कान्हा खुद अपने जीवन में इतने कष्ट क्यों झेलते रहे प्रभु? क्या आपसे भी ऊपर कोई और शक्ति है, या ये सब आपकी ही रची अलौकिक लीला थी? जीवन पर्यन्त राधा रानी के प्रेम से भी वंचित रहे प्रभु तुम क्यों? आखिर ये कैसी अलौकिक लीला थी?

—————

यह कविता (क्यों कन्हैया?) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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अयोध्या।

Kmsraj51 की कलम से…..

Ayodhya | अयोध्या।

कण-कण वासी, अवध निवासी,
मानवता के त्राता, जगत के सुखदाता।
दानव – दुष्ट – दलन अवतारी,
श्रृष्टि सृजन सद्धर्म प्रभारी।
सहज शेष शारदा संग में,
भव – भय भन्जन जग हितकारी।

सरयू अमिय प्रदाता, श्रृष्टि जगत विख्याता,
मानवता के त्राता, जगत के सुख दाता।

बंदर संग मदारी भेषा,
दरस-परस शिव अति लवलेशा।
बाल सुलभ श्री राम दरस पा,
अति सुख पावे नर हरि भेषा।

समता मूलक ध्ताया त्रिपुर विनाशक ज्ञाता,
मानवता की त्राता, जगत के सुख दाता।

जल निधि वक्षस्थल पर धाये,
राम सेतु निर्माण कराये।
मर्कट बंदर भालू के संग,
लांघि समंदर लंका आये।

‘मंगल’ भाष्य विधाता, जीवन ज्योति प्रदाता,
मानवता के त्राता, जगती के सुख दाता।

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — जिस भूमि पर प्राचीन समय से ही महापुरुष तपस्या करते आये है, निष्काम उपासकों की पुण्य गाथा से कण – कण सुशोभित है प्राचीन पुरी अयोध्या धाम। महाबली हनुमान जी के आराध्य की नगरी अयोध्या धाम। सरयू नदी के तट पर प्राचीन पुरी अयोध्या धाम जहां जगत पिता श्री हरि खुद आये श्री राम रूप में, पूरी मानव जाती को मर्यादा व धर्म का सीख देने। दुष्टों का संहार कर, जगत में शांति की पुनः स्थापना कर, प्रेम, पवित्रता व त्याग के साक्षात रूप श्री राम। अयोध्या धाम पुनः विश्व में “वसुधैव कुटुम्बकम्” सनातन धर्म के मूल संस्कार को मानवों में भरने का कार्य करेगा।

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यह कविता (अयोध्या।) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली।

Kmsraj51 की कलम से…..

Healthy Lifestyle | स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली।

स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली का महत्व

स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली एक सुखद और उत्तम जीवन जीने का माध्यम है। यह हमारे शारीरिक, मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने में मदद करता है। सही आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, मानसिक शांति और सकारात्मक सोच इसे प्राप्त करने के महत्वपूर्ण घटक हैं।

सही आहार

स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली का पहला कदम सही आहार है। हमें प्रतिदिन विभिन्न प्रकार के पोषण से भरपूर आहार लेना चाहिए। फल, सब्जियां, पूरे अनाज, प्रोटीन और पर्याप्त मात्रा में पानी शरीर के लिए आवश्यक हैं। बेहतर है कि अच्छे से पका हुआ और फाइबर-युक्त आहार लें और तला-भुना खाना कम से कम लें या बिलकुल भी ना ले तो बहुत अच्छा।

नियमित व्यायाम

नियमित व्यायाम करना भी स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, मानसिक तनाव को कम करता है और बीमारियों से बचाव में मदद करता है। योग, ध्यान, चलना, दौड़ना या व्यायामशाला में कसरत करना विभिन्न विकल्प हो सकते हैं।

धूप में समय बिताना

धूप में समय बिताना विटामिन डी की आपूर्ति को बढ़ावा देता है और मनोबल को बढ़ावा देता है। सुरज की किरणों का संतुलित रूप से समय पर प्राप्त करने का प्रयास करें।

पर्याप्त नींद

नींद की पर्याप्त मात्रा मिलना भी आवश्यक है क्योंकि यह हमारे शरीर की पुनर्निर्माण क्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है। 7-8 घंटे की नींद लेने से हमारी मानसिक तथा शारीरिक स्थिति अच्छी बनी रहती है।

मानसिक शांति

मानसिक तनाव को दूर करने के लिए मानसिक शांति का भी महत्व है। योग, मेडिटेशन, प्रार्थना और सकारात्मक सोच इसमें मदद कर सकते हैं। समय-समय पर अपने मन की बातें एक दोस्त या परिवार के साथ साझा करना भी आरामदायक होता है।

सकारात्मक सोच

सकारात्मक सोच स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हमें सकारात्मक दृष्टिकोण रखकर जीवन के हर क्षेत्र में काम करना चाहिए। आत्म-संवाद और आत्म-मोटिवेशन की शक्ति स्वास्थ्य और खुशी को बढ़ावा देती है।

संक्षिप्त रूप में, स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली का पालन करने से हम अपने शरीर, मन और आत्मा को स्वस्थ और खुश रख सकते हैं। सही आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, मानसिक शांति और सकारात्मक सोच के साथ, हम जीवन का हर क्षण उत्साहित और सकारात्मक ढंग से आनंदित कर सकते हैं।


अच्छे स्वास्थ्य के लिए क्या खाये व क्या न खाएं?

अच्छे स्वास्थ्य के लिए सही आहार का महत्वपूर्ण योगदान होता है। आपका आहार आपके शरीर के स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव डालता है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि आप सही खाद्य सामग्री का सेवन करें और खराब आदतों से बचें। आपको अच्छे स्वास्थ्य के लिए सही आहार चुनने में मदद करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव—

सही आहार 

फल और सब्जियां: फल और सब्जियां पोषण का महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं। विभिन्न प्रकार के फलों और सब्जियों का सेवन करें ताकि आपको विभिन्न पोषण घटक मिल सके। पोषण युक्त फल और सब्जियां — पोषण से भरपूर फल और सब्जियां आपके स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। यहाँ कुछ पोषण युक्त फल और सब्जियों की सूची दी गई है:

फल: 

  • सेब: सेब में फाइबर, विटामिन सी, पोटैशियम और एंटिऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं।
  • केला: केले में पोटैशियम, विटामिन C, फाइबर और विटामिन B6 पाए जाते हैं, जो सही हृदय स्वास्थ्य और पाचन के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
  • अंगूर: अंगूर में एंटिऑक्सिडेंट्स, विटामिन C, विटामिन K और फाइबर होता है, जो सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं।
  • नारंगी: नारंगी विटामिन C का एक अच्छा स्रोत है और इम्यून सिस्टम को मजबूती प्रदान करने में मदद करता है।
  • पपीता: पपीता विटामिन C, विटामिन A, पोटैशियम और पाचन के लिए आवश्यक एंजाइम पेपेन का एक अच्छा स्रोत होता है।

सब्जियां:

  • पालक: पालक में आयरन, कैल्शियम, विटामिन K, विटामिन C और फाइबर होता है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं।
  • गाजर: गाजर विटामिन A का एक अच्छा स्रोत होता है, जो दृष्टि को बेहतर बनाने में मदद करता है।
  • ब्रोकली: ब्रोकली में फाइबर, विटामिन C, विटामिन K, फोलेट और एंटिऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
  • शिमला मिर्च: शिमला मिर्च में विटामिन C, विटामिन A और पोटैशियम होता है, जो सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं।
  • गोभी: गोभी में विटामिन C, विटामिन K, फाइबर और अन्य पोषण स्रोत होते हैं, जो वजन प्रबंधन और स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

याद रखें, कि यह तो सिर्फ कुछ ही फल और सब्जियों की सूची हैं, और अन्य फल और सब्जियां भी आपके स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं। अपने आहार में विविधता और संतुलन बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • पूरे अनाज: गेहूँ, चावल, जौ, बाजरा, आदि जैसे पूरे अनाज का सेवन करें।
  • प्रोटीन स्रोत: दूध, दही, पनीर, दालें और सोया प्रोटीन सेवन करने से मांसपेशियों का निर्माण होता है।
  • हेल्दी फैट्स: अखरोट, बादाम, मूंगफली, तिल, अवोकाडो और जैतून तेल जैसे हेल्दी फैट्स सेवन करें।
  • पर्याप्त पानी: दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीने का प्रयास करें।
  • फाइबर युक्त आहार: फाइबर से भरपूर आहार का सेवन करें, जैसे कि खाद्य समृद्धि, दलिया, ब्राउन चावल आदि।
  • अधिकतम अंतराष्ट्रीय खाद्य सामग्री से बचें: जंक फूड, सोडा, प्रोसेस्ड मीट, बिस्किट, चिप्स आदि को शामिल न करें अपने आहार में।

सावधानी से सेवन करें:

  1. आलस्यकारी आहार: ज्यादा मिठाई, बकरे का मांस, परांठे आदि का सेवन करने से बचें।
  2. अत्यधिक तले हुए खाने: तले हुए खानों का सेवन बढ़े हुए कैलोरी का कारण बन सकता है।
  3. अत्यधिक शक्कर और मिठाई: शक्करीय और मिठाई का अत्यधिक सेवन करने से डायबिटीज़, बेहद उच्च रक्तचाप आदि की समस्याएं हो सकती हैं।
  4. अधिक नमकीन और प्रोसेस्ड खाद्य: नमकीन और प्रोसेस्ड खाद्य सामग्री का सेवन कम करें, क्योंकि यह उच्च रक्तचाप के कारण बन सकते हैं।
  5. शराब और धूम्रपान: शराब और धूम्रपान के सेवन से बचें, क्योंकि यह आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
  6. अत्यधिक कैफीन: अत्यधिक कैफीन के सेवन से बचें, क्योंकि यह नींद को प्रभावित कर सकता है।

सही आहार चुनने में सतर्क रहें और विभिन्न पोषण स्रोतों से पर्याप्त मात्रा में पोषण प्राप्त करने का प्रयास करें। यदि आपको कोई विशेष स्वास्थ्य समस्या हो, तो आपको एक पेशेवर चिकित्सक से सलाह लेना उचित होगा।

♦ KMSRAJ51 – संपादकीय ♦

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— Conclusion —

  • “KMSRAJ51“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख में समझाने की कोशिश की है — स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। इसमें नियमित शारीरिक गतिविधियाँ जैसे कि योग, व्यायाम, ध्यान, और सही आहार लेना शामिल हैं। व्यायाम और योग से शरीर का विषाक्त बाहर निकलता है, मानसिक तनाव कम होता है और ऊर्जा स्तर बढ़ता है। सही आहार खाना भी महत्वपूर्ण है। फल, सब्जियाँ, पूरे अनाज, प्रोटीन, हेल्दी फैट्स, और पर्याप्त पानी पीना स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। नियमित खानपान से असमय में वजन बढ़ने का खतरा कम होता है और महत्वपूर्ण पोषण प्राप्त होता है। स्वस्थ मानसिकता भी जरूरी है। योग और ध्यान से मानसिक शांति बनी रहती है, तनाव कम होता है और मानसिक स्थिरता मिलती है। सही नींद, विश्राम, और मनोरंजन भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। तंबाकू और अधिक मात्रा में शराब की तरह की खराब आदतों से बचना भी जरूरी है। यह सभी उपाय स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली की नींव होते हैं और व्यक्ति को दीर्घायु और उत्तम जीवन की दिशा में मदद करते हैं।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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काशी कहां चली।

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Kashi Kahan Chali | काशी कहां चली।

काशी संसार सागर से पार उतारने वाली भक्ति भावन नगरी है। काशी समीचीन यथार्थ सुदृढ़ शोत्रसम्मत् सर्वसिद्धि तपोभूमि है। काशी में जहां मरणोपरांत भक्ति मुक्ति मिलती है वही काशी में किये पुण्य अथवा पाप कर्म भी अक्षुण्ण होते हैं। मानव यूं तो बुद्धिजीवी है, फिर काशी की गरिमा पर कहीं प्रश्नचिन्ह न लगे, आंच न आवे ऐसे कार्यो से भावुक हो लोग तमाम अनैतिक कार्यों में लिप्त नजर जाने क्यों लोग दिखते हैं। इससे साफ जाहिर है जन – जन में वैभव, पराक्रम मनस्विता और जीवट, ओजस् तेजस् की कमी कहीं न कहीं हमारे अंदर अवश्य ही प्रभावित कर रही है। फाल्गुन मास में बरसाने वृंदावन – मथुरा होली के माहौल में जब रंग विरंगे रंगों से सरावोर रहती है वहीं काशी, काशी में बाबा भोले भी इस सुअवसर से अछूते क्यों रह जायेंगे।

आमल एकादशी 

आमल एकादशी को भोले भी भाव विह्वल हो स्नान करते हैं, सप्रेम भरी होली-रंगभरी के रंग से सराबोर होते हैं साथ ही अतिविशिष्ट शृंगार भी कराते हैं। इन्हीं दिनों सिद्धि चक विधानानुसार धर्म के अष्ट चिन्ह के पूजा विधान में भी लिखा गया है—

कार्तिक फाल्गुन अषाढ़ के अंत अठ दिन माहि।
नन्दीश्वर श्वर जात है, हम पूजे इह ठाहिं॥

अर्थात् — जैन श्रावक उक्त मास के अंतम आठ दिन शुक्ल पक्ष की अष्टमी से पूर्णिमा तक काल्पनिक रूप में इन्द्र इन्द्राणी देवता का विधानपूर्वक पूजन, भजन भी होता है। जब काशी का वर्णन हम कर रहे हों, वहां शिवलिंग का वर्णन न हो तो काशी का वर्णन संभवतः अधूरा प्रतीत होता है। वैगे तो मनुष्यों द्वारा कुछ भी पूर्ण कर पाना समीचीन नहीं हैं।

निराकार पार ब्रह्म परमेश्वर

पूर्ण तो मात्र ब्रह्म है जो निराकार पार ब्रह्म है जो निराकार पार ब्रह्मपरमेश्वर ही है। हम जिस ज्योतिर्लिंग का वर्णन यहां करने जा रहे हैं वह वही है जो आपकी आत्मा का स्वरूप है। जब बच्चा मां के गर्भ में आता है तो वही अंडाकार रूप धारण करता है जिस आकार में शिवलिंग होता है। मरणोपरांत अग्नि दहन के समय भी शनैः शनैः पुनः उन्हीं स्वरूप में ही, यह मानवीय रूपाकाया पंच भूतात्मा पंचतत्व में विलीन हो जाता है। शिव आनन्ददाता हैं। जिस दिन आप शिव में लीन होंगे और गंगा के पावन जल से परिपूर्ण हो जायेंगे उस दिन से कुछ शेष नहीं बचा। द्वंद नहीं निर्द्वद हो जायेंगे। विलक्षणता की अनुभूति होनी स्वभावतः हो जायेगी।

काशी में स्त्रैण और नगरी पुरुष को खोजते फिरते रहते हैं शायद उन्हें ज्ञात नहीं शिव अर्धनारीश्वर है। बांवले से सड़कों गलियों ऐसे में देखते ही होगें। आप में भी द्वंद्व होना स्वाभाविक है ही, क्योकि यह जगत ही द्वंद्व से निर्मित है। तो आप भी दो होंगे ही। इतना तो अवश्य ही है। द्वैत से अद्वैत में पहुंचने के मार्ग की आकांक्षा में आपको उस शिवलिंग की अपने घर में उपासना करनी होगी। जिसके द्वारा आप निर्द्वद्व हो जाय। वह तभी संभव होगी जब मेक्सिमम ६ अंगुल की ही मूर्ति विधान सहित स्थापित करने परांत आप के अन्दर ध्यान योग प्राणायाम अथवा अन्यान्य विधाओं से विह्वल विकल अति आतुरता आनन्द हो, जिस समय उस अलौकिक बोध गुदगुदाहट आलिंगन सा परम आनंद मिल जाये आप अनुभूति करें, काशी की एक रेखा तक पहुंच रहा हूँ।

प्रथम पूज्य देवाधिदेव – भोले के सुपुत्र गौरी के लाल गणेश जी

हमें काशी का वर्णन करते समय प्रथम पूज्य देवाधिदेव भोले के सुपुत्र गौरी के लाल गणेश जी को नहीं भूलना होगा जिसकी प्रतिमूर्ति बड़ा गणेश में प्रतिष्ठापित है। बड़ा गणेश जी को भी हमें हर शुभ कार्य में प्रथम सादर याद करना चाहिए। यहां गणेश चतुर्थी के दिन सैलानियों की भीड़ स्वाभाविक हर्षानुभूति कराता है। गणेश जी के लिए यह भी कहना अतिशयोक्ति न होगी—

सुख समृद्धि का जब आयेगा नया दौर।
गणपति गजबदना को पूजेंगे लोग॥

यहीं; मंगल ने कहा है—

  • मांगो न और काहू से याचक बन काशी में चातुर्मास बिताय रहतु ना एकै द्वार लेत न हाय वहां सव तीरथराज देवगण चरवन लेत चबाय चहु और महिमा काशी में।
  • पंचाक्षरी मंत्र पढ़ महिमा तन की काशी त्रिलोचन लोचन कर्णघंटा घंटा बजत गिरजानन्दन शिवयाचक वनि हो काशी में।

आज हम अध्यात्म, नैतिकता, संस्कृति पश्चिम से लेते जा रहे हैं। हमें याद करना होगा स्वामी विवेकानन्द जी के मुख, मुखार परमार्थ तप, सेवा को भी, हमें याद करना होगा, स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी के उपदेशों को, कबीरदास के कर्मयोग, राजर्षि विश्वामित्र के ‘तप’ को, मीरा का प्रेम, राजा मान्धाता के ‘त्याग’ और राजा हरिश्चंद्र का ‘सत्य’, लक्ष्मीबाई के शौर्य को भी हमें नहीं भूलना होगा। आज काशी में ही क्या सारी पृथ्वी बोझ से दबी जा रही है। हमें मिटाना है काशी के साथ सारी धरती के क्लेश को?

गंगा में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है—

सद्भावना पूर्ण वातावरण का हम सब जन मिल निर्माण करें। काशी के हाथीघाट, शिवाला घाट वह स्थान है जहां राजा विजयानगरम् का हाथी आता था। इस घाट की बनावट ऐसी थी कि जो लोग तैरना नहीं जानते थे वे इस घाट पर कमर भर पानी में नहा सकते थे परंतु आज यहां कीचड़ का अम्बार रहता है इसलिए नहीं कि गंगा का बालू एकत्र हो गया है। बलात गंगा में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। चूंकि अंग्रेजों के समय में कस्साई बाड़ा के जो जानवरों का खून पहले गंगा जी में नहीं आता था आज खून शाम होते ही रंग बिरंगे रंगों में कभी लाल, कभी हरा, कभी बैगनी, कभी काला एवं मटमैले कलर की धार बन कर सम्वत् २०४६ से गंगा में अनवरत आ रहा है।

यही नहीं रंगाई के कारखानों का रंग एवं हजारों लीटर केमिकल तथा लगभग सौ लीटर खून डायरेक्ट गंगा में प्रतिदिन अनवरत बहाया जाता है। प्रतिदिन लोहता भिटारी के बीच बने नाले से भी केमिकल निरर्थक वरुणा नाले से होकर अनवरत वरुणा नदी में बहाया जा रहा है। वरुणा नदी भी उसे बेहिचक गंगा को अर्पित कर देती है। आज गंगा जी के दंडी घाट से गुलेरी घाट तक मनुष्य क्या बन्दर व गाय भी पानी पीने से दूर नहा सकने में भी हिचकिचाहट कर रहे हैं। इन घाटों को भैंसा घाट कहा जाय तो भी अतिशयोक्ति न होगी।

इस प्रकार वाराणसी के छः घाट उक्त प्रदूषण से जहां प्रभावित हैं वही राजेंद्र प्रसाद घाट, मर्णिकर्णिका घाट भी प्रदूषण से क्यों अछूता रह जाय। अस्सी घाट का पूछना ही क्या है। नाला द्वारा हजारों लीटर गन्दा पानी गंगा में बहाने से नगर निगम आखिर क्यों नहीं बाज आता। इससे साफ जाहिर होता है कि केंद्र अथवा राज्य द्वारा चलाई गई सफाई निर्मलीकरण योजना सफेद हाथी का सा रूप धारण कर रखा है। मणिकर्णिका, हरिश्चंद्र घाट से आज भी अधजले शव गंगा में बहाकर ही नहीं अपितु पशुओं के शव को गंगा में प्रवाह कर गंगा में हम सड़ान्ध क्यों पैदा कर रहे हैं? पुलिस प्रशासन भी मूक दर्शक आखिर क्यों बनी रहती है? ऐसे में अधिक अपराध के युग का श्रीगणेश भी इस दशक को कहने से लेखक नहीं चुकेगा। बशर्ते नाबालिग बच्चों का शव धार्मिक परम्परानुसार जल प्रवाह की अवधारणा जब तक नहीं बदलेगी। हम धार्मिक परम्परा का जिक्र कर रहे हैं तो धर्माचार्य का जो सत्य निष्ठा से आज का मानव जीव कल्यार्णाथ यज्ञ, हवन, पूजन, प्रवचन, हरिभजन, शिवअर्चन, चण्डी जाप, नाम जपन, भजन पर भी हमें जिक्र करना मुनासिब होगा। आप काशी में कम नहीं पायेंगे।

ज्ञान, भक्ति, अध्यात्म तीर्थों का भी तीर्थस्थल काशी है।

ज्ञान, भक्ति, अध्यात्म और सर्व प्रेम का प्रतीक यह तीर्थों का भी तीर्थ है। आध्यात्मिक, धार्मिक तथा भक्तिभाव प्रेरक धार्मिक सांस्कृतक लोक उन्नायक आयोजनों का यह तीर्थस्थल काशी है। काशी में नास्तिक विचारधारा से युक्त जो प्राणी आता है रमण भ्रमण करने, वह भी शिवमय हो रम जाता है। भोला भूदेवी, भवानी, भगवती, जगदम्बा में कारण शास्त्रों में वर्णित है।

भोला काशी परिक्षेत्र चौदह कोश में आने वाले प्राणी को रमणीय कर देते हैं। कारण स्पष्ट है। यहां प्रतिदिन गंगा में मणिकर्णिका घाट पर दो घड़ी उपरान्त दोपहर में समस्त देव गण देवलोक से स्नान करने आते ही रहते हैं। काशी में देवताओं का आना अनवरत समस्त युगों से रहा है तो क्या हिंदू/सिक्ख/इसाई अथवा मुसलमान जिनमें एक सा पंच तत्वों से बनी बुद्धि विवेक प्रभु ने दे रखी है, हम उस गंगा मां को जिसने देवलोक से हाहाकार कर हमारे पूर्वजों का तारंतार किया, कर रही है, हम पवित्र क्यों नहीं रख सकते हैं?

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख में समझाने की कोशिश की है — काशी जहां स्वयंभू भोलेनाथ माता पार्वती व गणपति सहित अनंत काल से विराजमान है। पतित पावनि माँ गंगा को अपनी जटाओ से धीरे-धीरे मध्यम जल धारा के रूप में मानव कल्याण के लिए छोड़ा है, लेकिन आज का मानव पतित पावनि माँ गंगा को बहुत ज्यादा प्रदूषित कर रखा है। अब भी सुधर जाओ और पतित पावनि माँ गंगा को स्वच्छ करो, इसे प्रदूषित करना बंद करो। ज्ञान, भक्ति, अध्यात्म और सर्व प्रेम का प्रतीक यह तीर्थों का भी तीर्थ है। आध्यात्मिक, धार्मिक तथा भक्तिभाव प्रेरक धार्मिक सांस्कृतक लोक उन्नायक आयोजनों का यह तीर्थस्थल काशी है। काशी में नास्तिक विचारधारा से युक्त जो प्राणी आता है रमण भ्रमण करने, वह भी शिवमय हो रम जाता है। भोला भूदेवी, भवानी, भगवती, जगदम्बा में कारण शास्त्रों में वर्णित है।

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यह लेख (काशी कहां चली।) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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मृत्युलोक के नाते।

Kmsraj51 की कलम से…..

Mrityulok Ke Naate | मृत्युलोक के नाते।

सदा प्यार अनुराग लुटाने वाले,
आज हमसे क्यों रूठे हैं।
यह दौर हमसे कहता है,
मृत्युलोक के सारे नाते झूठे हैं।

नेत्र की गहराई में झांका तो,
दृष्टिगत हुआ पानी गहरा।
उतार – चढ़ाव से जीवन चलता,
बतलाता हर इक की गाथा हहरा।
वेदना छुपी है मुस्कानों में,
सबके सपने टूटे हैं,
मृत्युलोक के सारे नाते झूठे हैं।

कदमों-कदमों पर खिंचीं रेखायें,
अश्रु – अश्रु पर बंधन है।
बेजुबान बेबसी के होंठों पर,
विहँसता रहता क्रंदन है।
हास्य-व्यंग्य आस मुक्त मधुर क्षण,
जाने किसने लूटे हैं,
मृत्युलोक के सारे नाते झूठे हैं।

मंजुल मनोरम गीत भ्रमर ने गाये,
मुकुलों ने अपने पराग लुटाये हैं।
देकर इक-दूसरे के प्राणों को,
भावात्मक तृप्ति दे संतुष्ट बनाये हैं।
वो सुधा बरसाने वाले,
ये रिश्ते-नाते अनूठे हैं,
मृत्युलोक के सारे नाते झूठे हैं।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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यह कविता (मृत्युलोक के नाते।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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थाती की बाती।

Kmsraj51 की कलम से…..

Thati Ki Bathi | थाती की बाती।

दु:ख लहरों में चिघाड़ती है,
नित इक नई विपदा सहती है।
चिंताओं में रहती हमेशा है,
ऐसे ही कथा कहती अपने उर की।

सदा छटपटा कर रोती है,
आँसुओं से आँचल धोती है।
सुख की नींद वह कहाँ होती है,
विकल उद्विग्न वह होती है।

दु:ख-दर्द संकट है,
रंज है आँखों में आकर ठहरा है।
हर इक श्वांसों पर मातम है,
क्षोभ अगाध का गहरा है।

दिवा-रात्रि मचलती रहती है,
करवंट वह बदलती रहती है।
रह-रहकर संभलती रहती है,
न जाने किस अग्नि में जलती है।

विश्व ने इसे क्या समझा है,
बस चंद लोगों का खेल समझा है।
जो समझा है अच्छा समझा है,
इस संस्कृति को कचरा समझा है।

जग जलेगा जब आहों में,
बदला लेगी उन नमकहरामों से।
गुजरेगी जब बर्बादी के राहों से,
कर लेना तब ताजपोशी गुनाहों से।

विश्व को हिला देगी उठकर,
विश्व को दिखा देगी जमकर।
विश्व को जता देगी,
विश्व को बता देगी।

बस इक सहारा हम ही हैं,
समस्त सृष्टि की सनातन हम ही हैं।
सनातन का डंका बजेगा,
सुर-धुन पर ही चलेगा।

हम वो पुरातन है समझायेगी,
कण-कण में सनातन बसायेगी।
जग और जग वालों के होंठों पर,
बस इक नाम ये ही आयेगी।

संस्कृति और संस्कारों की भूमि है,
पावन जिसका हर कण-कण है।
हृदय अंत: में इसको बस जाने दो,
हम भी इसके अंश पुराने हैं।

वक्त बावक्त हम कहां गिरे,
अब लौट चलें अपने साये में।
पहचान हमारी भारत भूमि है,
बसे जिसमें राम – कृष्ण है।

देवी दुर्गा के प्रचंडों में,
पूजी जाती जहाँ अबला नारी।
जह सर्वस्त्र के हम भटके पाही हैं,
कंठ-कंठ में बसी वेद वाणी है।

चलो रज चूम ले उस थाती का,
अंग गात मचल रहा।
उसकी छत्रछाया में जाने को,
भूमंडल का बस इक वही सहारा।

भारत भूमि ही है हमको प्यारा,
चलो समा जायें उस पावन में।
पवित्र कर लें अपने जीवन को,
पुण्य जहां बसता है।
पाप त्याग हमें वहीं जाना है,
सनातन ही पुरातन है।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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यह कविता (थाती की बाती।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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दौर।

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Daur | दौर।

वो छब्बीस थी,
और अब इंतजार सताईस का था।
वो दौर मौज मस्ती का था,
और अब ये दौर ज़ोर अजमाइश का था।

कहतें है इंतजार का फल मीठा होता है,
जो होता है वो ठीक ही होता है।
दिल यहां से जाने को भी नही कर रहा है,
पर एक वो भी है जो हमें बुला रहा है।

वो दौर अपनी मन मर्जी का था,
जब दो को वहां जाना हुआ था।
ये दौर उत्सुकता वाला है,
जब एक को यहां आना हुआ है।

ये दौर – दौर की बात है,
हर दौर का अपना मज़ा है।
हम हर दौर को गौर से जीते हैं,
बस यूं समझिए हम वो है जो,
पानी को भी अमृत समझ के पीते हैं।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जीवन के हर दौर में उतार-चढ़ाव आते रहते है, जब शरीर ऊर्जावान हो, तब सिर्फ सोचते ही न रहे, अच्छे कार्य करते रहे। उतावलेपन में कभी भी गलत कार्य ना करे। “कहतें है इंतजार का फल मीठा होता है” अगर आपके कर्म अच्छे है तो देर से ही सही आपको शांतिमय ख़ुशी मिलेगी। एक बात याद रखें की कोई भी दौर सदैव नही रहेगा, दौर बदलते रहेंगे, इसलिए कभी भी चिंतित व निराश होकर बैठ ना जाना, रुक ना जाना। जय माता दी!

—————

यह कविता (दौर।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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पहाड़ी कबता।

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Pahadi Kabata | पहाड़ी कबता।

हिमाचल मेरा देवताओं की धरती,
इंसानियत यहां के लोगों की कभी नहीं मरती।

जब लोगों ने की प्रकृति से ऐसी छेड़छाड़,
देखो आ गई हिमाचल में भी बाढ़।

उज्जड़ गए लोगों के ऐसे घर द्वार,
पड़ी प्रकृति की देखो ये कैसी मार।

अमीर गरीब का भेद हुआ खत्म,
सैलाब ने सब कुछ कर दिया भस्म।

लगे करने अब बाढ़ प्रभावितों की सेवा,
जय भी कहता है जरूर मिलेगा उनको जीवन में मेवा।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — हिमाचल आदिकाल से ही देवताओं की धरती है, इंसानियत यहां के लोगों की कभी भी नहीं मरती है। जब-जब इंसान ने की प्रकृति से ऐसी छेड़छाड़ की है तब-तब देखो आ गई हिमाचल में भी भयानक बाढ़। उज्जड़ गए लोगों के ऐसे घर द्वार सब बेचारे बेघर हुए, पड़ी प्रकृति की देखो ये कैसी मार। इस प्राकृतिक आपदा के बाद अमीर गरीब का भेद हुआ खत्म, सैलाब ने सब कुछ कर दिया भस्म। जो भी बाढ़ प्रभावितों की सेवा करता, जय भी कहता है जरूर मिलेगा उनको जीवन में उनके कर्म का अच्छा मेवा। जय माता दी!

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यह कविता (पहाड़ी कबता।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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निर्जीव से मोह।

Kmsraj51 की कलम से…..

Nirjeev Se Moh | निर्जीव से मोह।

समय की जरूरतों के हिसाब से,
एक निर्जीव चीज ने हर घर में,
प्रवेश ले लिया।

कुछ न होते हुए भी वो,
वो सब कुछ बन गया वो,
ऐसा मोहपाश दे दिया।

खा गया जो लोगों की भूख – प्यास,
अपनों से मिलने का प्यारा अहसास,
खुद से रिश्ता खास दे गया।

अखबार की उस खबर ने खो दिया होश,
जिसमें प्यारी बहना को भाई ने भर कर जोश,
मौत का ग्रास दे गया।

ये यंत्र जो आजकल की दुनिया पर हुआ भारी,
हर व्यक्ति को लगी इसकी भयानक बीमारी,
अपना नाम हर श्वास पर दे गया।

माना कि आधुनिकता की दौड़ में,
जरुरत इसकी जिंदगी के हर मोड़ पे,
ऐसा ये जोकर का ताश दे गया।

हम सजीवों पर क्यों हो रहा है इसका पहरा,
क्यों ज्यादा वक्त दिल निर्जीव मोबाइल पर ही ठहरा,
ये तन~मन का नाश दे गया।

निर्जीव को निर्जीव ही रहने दे हम,
प्यार सजीव रिश्तों से होने न पाए कम,
सजीवो से प्रेम ही जीने की आस दे गया।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जो जिवंत (सजीव) है प्यार उससे कभी भी कम ना हो ऐसा आदत होना चाहिए सदैव ही हम सबका। निर्जीव से मोह ठीक नही है, निर्जीव का उपयोग मात्र जरूरत तक ही सीमित रखें, निर्जीव के गुलाम ना बन जाये। आधुनिक युग में किसी भी टेक्नोलॉजी का उपयोग केवल अच्छे कार्य को करने के लिए करे। उसका कभी भी शैतानो की तरह दुरुपयोग ना करो। याद रखें – हर निर्जीव वस्तु के फायदे है तो उनसे नुकसान भी है, आप केवल फायदे के लिए सही तरीके से उपयोग करें, उसके गुलाम बनकर शैतान की तरह काम मत करो। इन निर्जीव वस्तुओं की वजह से आपसी प्रेम कम ना हो।

—————

यह कविता (निर्जीव से मोह।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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अपनी बला से।

Kmsraj51 की कलम से…..

Apni Bla Se | अपनी बला से।

सत्ता होती है बेकाबू तब तक,
जब तक जनता मदहोशी में सोती है।
इतिहास गवाह है धनवानों को कितनी,
पीड़ा गरीब और मजलूमों की होती है?

जनता जब जागेगी तो तभी सवेरा,
सत्ता भी तो तब काबू में आएगी।
यह गुड़ में जहर की शाजिस सत्ता,
जनता पर सदा – सदा ही आजमाएगी।

खामोश रह कर तो कोई बात न बनेगी,
मुद्दा तो जनता को अपना उठाना होगा।
लोकतन्त्र है भाई यह आजाद भारत का,
जनता को मत का बल तो दिखाना होगा।

हम करने चले हैं हुड़दंग ही बस नीरा,
मुद्दे की बात ही कहां कोई करता है?
जन सरोकारों की है चिन्ता ही किसको?
हर कोई निज स्वार्थ के खातिर लड़ता है।

देश डूबे तो वह अपनी बला से,
देश की किसको यहां चिन्ता है?
पक्ष – विपक्ष और जनता सबमें,
निज घोर स्वार्थ की ही हीनता है।

लाखों की लेते पगारें हैं अधिकारी,
फिर भी घूंस लेते भिखारी से फिरते हैं।
ठेकेदार को भी तो अपनी ही पड़ी है,
तभी तो पुल बनाते ही कई गिरते हैं।

जागो जनता गर जाग सको तो,
स्वार्थ की नींद को भगाना होगा।
वरना भ्रष्टाचार में डूबता देश है,
इसे मिलकर आज बचाना होगा।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — भटकी हुई नव पीढ़ी को फिर से राष्ट्रधर्म का पाठ पढ़ाना होगा, हर भारत वासी को अपने मत की शक्ति को समझना होगा। अपने निज स्वार्थ से ऊपर उठकर अपने राष्ट्र के हित में कदम उठाना होगा, ये आज़ाद भारत है भाई तुम्हें सही मांग के लिए आवाज उठाना होगा। जो गलत है उसको सबक सिखाने के लिए हम सबको आवाज तो उठाना होगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ सभी को मिलकर आवाज उठाना होगा। जागो जनता गर जाग सको तो, और स्वार्थ की नींद को भगा कर राष्ट्र हिट में अपने मत की शक्ति का सही प्रयोग करो तुम। मुफ्त के चक्कर में बिकना नही तुम वर्ना तुम्हारा अस्तित्व ही खत्म हो जायेगा, अब भी समय है जग जाओ, नहीं तो पछतावोगे।

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यह कविता (अपनी बला से।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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