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“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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2023-KMSRAJ51 की कलम से

पुनः सनातन लाना होगा।

Kmsraj51 की कलम से…..

Punah Sanatan Lana Hoga | पुनः सनातन लाना होगा।

आओ मिलकर बीजते हैं बीज,
इस धरती पर सनातन का।
भटकी हुई नव पीढ़ी को फिर से,
पढ़ाते हैं पाठ पुरातन का।

जहां थी मान मर्यादाएं घनी,
अभाव में भी संतोषी आत्म था।
इस मानव समाज के बच्चे-बच्चे में,
कूट – कूट के अध्यात्म था।

सम दृष्टि थी हर मानव की,
दिखता हर घट में परमात्म था।
तन – बदन में शालीन वस्त्र थे,
सामाजिक नियम पुरातन था।

न जाति थी, न धर्म थे कोई,
न ही नर-नारी में कोई लड़ाई थी।
पूरी धरती शान्ति से,
वसुधैव कुटुंबकम के भाव में समाई थी।

दुरात्म भाव ने आ के धरा पर,
मानव से मानव लड़ाया था।
सुख – शान्ति, चैन और भाईचारा,
हम सबसे दूर भगाया था।

दुरात्म भाव को दूर भगाओ,
पाठ यह सबको पढ़ाना होगा।
अंध आधुनिकता को कर के पीछे,
पुनः सनातन लाना होगा।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — भटकी हुई नव पीढ़ी को फिर से पढ़ाते हैं पाठ पुरातन सनातन संस्कृति का जिससे सभी मानव जन्म को सार्थक बना सके। सनातन में न जाति थी, न धर्म थे कोई, न ही नर-नारी में कोई लड़ाई थी। पूरी धरती शान्ति से वसुधैव कुटुंबकम के भाव में समाई थी। पुनः सनातन लाना होगा। इस मानव समाज के बच्चे-बच्चे में कूट – कूट के अध्यात्म था। सनातन की उत्पति – सनातन किसी एक लेखक या दार्शनिक या किसी ऋषि के विचारों की बस उपज नहीं है, यह तो अनादि काल से प्रवाहमान और विकासमान रहा। विश्व के सभी धर्मों से सबसे पुराना सनातन धर्म है। मान्यता है कि वैदिक धर्म जिसमें परमात्मा को साकार और निराकार दोनों रुपों में पूजा जाता है । ये वेदों पर आधारित धर्म है।

—————

यह कविता (पुनः सनातन लाना होगा।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: hemraj thakur, hemraj thakur poems, Hinduism In Hindi - kmsraj51, Sanatan dharma sarvopari, पुनः सनातन लाना होगा, पुनः सनातन लाना होगा - हेमराज ठाकुर, सनातन धर्म की उत्पति, सनातन धर्म पर कविताएं, सनातन धर्म पर श्लोक, सनातन संस्कृति पर कविता हिंदी में, सनातन हिन्दू धर्म, हेमराज ठाकुर, हेमराज ठाकुर की कविताएं

उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद।

Kmsraj51 की कलम से…..

Novel Samrat Munshi Premchand | उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद।

हिंदी और उर्दू के महानतम,
भारतीय लेखकों में, जिसने,
हिंदी साहित्य का प्रकाश फैलाया।
नमन मुंशी प्रेमचंद जी को,
जिनका नाम इस लेखनी में,
उच्च शिखर पर आया।

लेखनी में अपनी जिसने,
एक आम आदमी के,
हर वर्ग के दुखों को समेटा।
हर दृष्टि से पारिवारिक, सामाजिक,
राजनैतिक पहलुओं को साहित्य में लपेटा।

लेखक प्रेमचंद अपनी कथाओं,
कहानियों में खुद ही पात्र बनाए।
तभी आज भी वो अपनी कथा,
कहानियों में जीवंत नजर आए।

दलित, किसानों, गरीबों का,
लेखक मसीहा बनकर आए।
कल्पना नहीं कोई, सीधे ही,
दिल की भावनाओं से जुड़ जाये।

साहित्य में मुंशी प्रेमचंद ने,
हिंदी और उर्दू की पताका है लहराई।
लोकनाट्य व नौटंकी को दोबारा,
स्थापित करने में अहम भूमिका है निभाई।

वो तो आधुनिक हिंदी,
कहानी के पितामह कहलाये।
अपनी लेखनी से, उपन्यास सम्राट,
की उपाधि से सज आये।

साहित्य के मील का पत्थर भी,
महान सम्राट प्रेमचंद जी कहलाये।
उनको शत-शत नमन करके,
आओं, हम उनके साहित्य मील का,
एक सूक्ष्म कंकड़ ही बन जाये।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — प्रेमचंद का जन्म वाराणसी के निकट, लमही नाम के गांव में 31 जुलाई, 1880 को हुआ था। प्रेमचंद के पिताजी मुंशी अजायब लाल और माता आनन्दी देवी थी। मुंशी प्रेमचंद जी का मूल नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। इन्होंने अपने प्रिय मित्र मुंशी दयानारायण निगम के सुझाव पर अपना नाम धनपतराय की जगह प्रेमचंद रखा और इसी नाम से कहानियों और उपन्यासों के रूप में अपने विचारों और भावों को अभिव्यक्ति दी। उन्होंने सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, निर्मला, गबन, कर्मभूमि, गोदान आदि लगभग डेढ़ दर्जन उपन्यास तथा कफन, पूस की रात, पंच परमेश्वर, बड़े घर की बेटी, बूढ़ी काकी, दो बैलों की कथा आदि तीन सौ से अधिक कहानियाँ लिखीं। उनमें से अधिकांश हिन्दी तथा उर्दू दोनों भाषाओं में प्रकाशित हुईं। प्रेमचंद को मुंशी प्रेमचंद के नाम से जाना जाता है जो कि एक सचेत नागरिक, संवेदनशील लेखक और सकुशल प्रवक्ता थे।

—————

यह कविता (उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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बदरा को आमंत्रण।

Kmsraj51 की कलम से…..

Invitation To Clouds | बदरा को आमंत्रण।

दे दी हमने झुके विकल नैनों से,
आमंत्रण घनेरे जल भरे बदरा को।
बढ़े कदमों को रोकने लगे,
धूमिल अर्दित विगत जीवन दर्पण में।

साँझवाती से अँगना में,
सुहागन बनी रात घनेरी।
प्राण – प्रिये को सम्मुख पाकर,
छलक पड़ी निर्मोही आँखों में।

नम पलकों पर आकर बिखर गई,
न जाने कितनी झूठी कसमें।
सिमट गई शर्वरी के पहरों से,
मीलों लम्बी दूरी जुग सहमों में।

पल भर को भूल गईं साँसें भी,
पैरों में बँधी इस मजबूरी को।
बहका जीवन लगा सिसकने,
सहसा आकर गुम यादों में।

मौन समर्पण की ज्वाला में,
द्रवित हुई कामनाशक्ति हमारे।
उद्बोधित उर के भाव बावरे,
पी लूँ पहले अपने अश्रु हमारे।

भुलाने को आये हैं ये सारे,
धर नये रूप चितवन के उसने।
आते – जाते हर इक मोड़ पर,
निज चित्त विश्वास को खोए हमने।

राहों पे लगते हैं इसलिए,
अपने भी साये पराये से।
और जलता है मेरा तन-मन,
पाकर आमंत्रण नयनों से।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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यह कविता (बदरा को आमंत्रण।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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अहंकार।

Kmsraj51 की कलम से…..

Ego | अहंकार।

मतभेद तो होगा मेरे भाई,
पर संवाद होना चाहिए।
न तेरी जुबान बंद रहे न मेरी,
हर हाल में वार्तालाप होना चाहिए।

त्याग कर अहंकार, खटखटाते रहो,
खोल दो बंद दिल के दरवाजे।
कुछ हो या ना हो, सोचों मत,
आत्मीयता का एहसास होना चाहिए।

न तेरी जुबान बंद हो, ना मेरी,
हर हाल में वार्तालाप होना चाहिए।
चुप रहने की आदत छोड़ दो,
मन की बात कहना अनिवार्य होना चाहिए।

न तेरी जुबान बंद रहे, ना मेरी,
हर हाल में वार्तालाप होना चाहिए।
अहम है जहर, दिलों के बीच में न आ जाए,
रिश्ते बड़े नाजुक हैं।

बचाने का प्रयास होना चाहिए,
न तेरी जुबान बंद रहे, ना मेरी।
हर हाल में वार्तालाप होना चाहिए,
आ रही दिवाली एवं चित्रगुप्त पूजा।

गले मिलकर, त्यौहार मनाने का,
दिल से विचार होना चाहिए।
न तेरी जुबान बंद रहे, ना मेरी,
हर हाल में वार्तालाप होना चाहिए।

मुझसे कोई भाई रूठ ना जाए,
अपनों का साथ छुट ना जाए।
मनाने का रिवाज होना चाहिए,
न तेरी जुबान बंद रहे, ना मेरी,
हर हाल में वार्तालाप होना चाहिए।

दिल की तमन्ना तुम क्या जानो,
हर भाई के चेहरे पर मुस्कान होना चाहिए,
हर हाल में वार्तालाप होना चाहिए।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

—————

  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — अहंकार को त्यागकर आपसी प्रेम सद्भाव बना रहे, सभी मिलजुलकर एक दूसरे की मदद करें। याद रखें — अहंकार की वजह से जीवन की ऊर्जा एक निश्चित स्तर पर ठहर जाती है। अहंकार न उर्जा को घटने देता है न बढ़ने देता है। क्योंकि, ऊर्जा के घटने या बढ़ने में उसे अपना नाश नजर आता है। अहंकार तन, मन, बुद्धि और भावना, सब जगह जकड़न पैदा करता है।

—————

यह कविता (अहंकार।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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तुम क्या हिन्द बनाएंगे।

Kmsraj51 की कलम से…..

Tum Kya Hind Banaenge | तुम क्या हिन्द बनाएंगे।

अंग्रेजी को बढ़ावा देने वालो, तुम क्या हिन्द बनाएंगे?
तुम्हारी रग-रग से वाकिफ हम, पछुआ रीत बढ़ाएंगे॥

हिन्दुस्तान में रह कर जो भी, हिन्दी की बात चलाएंगे।
राष्ट्र हित के रथ को असल में, वही ही सही चलाएंगे॥

अब जाग चुका है हर भारतवासी, कितना बुद्धू बनाएंगे?
हिन्दी में कर भाषण अपना, अंग्रेजी का जाल बिछाएंगे॥

वे चले गए हैं सैंतालीस के, जिनकी भाषा तुमको प्यारी है।
पचहत्तर सालों में न भूले उनको, वाह! जी कैसी यारी है?

अब तो छोड़ो मोह पछुआ से, राष्ट्र की बात को आगे करो।
जाति धर्म के बिखरे मानकों में, प्रेम – एकता के धागे भरो॥

भाषा वैविध्य का लाभ उठाकर, भारत को न परेशान करो।
राम कृष्ण की जाया भूमि, इस पर कुछ तो एहसान करो॥

संस्कृति सभ्यता की लुटिया डुबाने में, न यारो सहयोग करो।
निज राष्ट्र का गौरव उन्नत कर, राष्ट्र की रीत का भोग करो॥

मौंसी के घर की ठाठ में खोकर, मां का यूं न तिरस्कार करो।
मां तो मां ही होती है जी, कुछ तो लाज शर्म स्वीकार करो॥

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — राष्ट्र धर्म ही हमारे लिये तो सर्वोपरि है। राष्ट्र आराधना सबसे बड़ी ईश भक्ति है।। राष्ट्र धर्म से हमारी तो सांसे चल रही है। अंग्रेजी को बढ़ावा देने वालो भला तुम सब क्या हिन्द बनाएंगे? हम सब तुम्हारी रग-रग से वाकिफ है, तुम आगे भी पछुआ रीत बढ़ाएंगे। हम सभी अब जानते है की हिन्दुस्तान में रह कर जो भी, हिन्दी की बात चलाएंगे, असल में राष्ट्र हित के रथ को वही सही चलाएंगे। अब जाग चुका है हर भारतवासी, कितना बुद्धू बनाएंगे? हम सभी को, अब हिन्दी में कर भाषण अपना, अंग्रेजी का जाल बिछाएंगे। कितनी शर्म की बात है वे तो चले गए हैं सैंतालीस के ही, जिनकी भाषा तुमको अभी तक प्यारी है। पचहत्तर सालों में न भूले उनको, वाह! जी कैसी यह यारी है? अब तो छोड़ो प्यारे मोह पछुआ से और राष्ट्र की बात को आगे कर, जाति धर्म के बिखरे मानकों में, प्रेम – एकता के धागे भरो व आगे बढ़ो। भाषा वैविध्य का लाभ उठाकर, भारत को न परेशान करो। राम कृष्ण की जाया भूमि, इस पर कुछ तो एहसान करो तुम। संस्कृति सभ्यता की लुटिया डुबाने में, न यारो सहयोग करो और निज राष्ट्र का गौरव उन्नत कर, राष्ट्र की रीत का भोग करो प्यारों।मौंसी (अंग्रेजी) के घर की ठाठ में खोकर, मां का यूं न तिरस्कार करो। मां तो मां ही होती है जी, कुछ तो लाज शर्म स्वीकार करो। जय हिन्द!

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यह कविता (तुम क्या हिन्द बनाएंगे।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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बरखा बहार।

Kmsraj51 की कलम से…..

Barkha Bahar | बरखा बहार।

बीत रहे पलछिन के तौर तरीके,
आने वाले आज की पहली फुलबहारें।
घटा छटा घिर-घिर आ रही,
मन की चंचलता को प्रतिपल बढ़ा रही है।
पुरवा पवन की दुहाई है,
पछवा बयार की अब विदाई है।

अंब पावस का गली-गली डंका बज रहा,
शम्पाओं का शोर है सुदामन का जोर है।
पयोजन्मा की वाहिनी आगे-आगे है,
श्वेत – श्याम और काले-काले हैं।
रिझते हैं कहीं-कहीं और कहीं निराले हैं,
कहीं क्षत्रप की तरह छा जाते।

एक टुकड़ी आती गरज-बरस कर जाती,
दूसरी वाहिनी बना छावनी गोले अंब का बरसाती।
आते जाते फिर घूम कर चले आते,
सिंगार सजा चंचला दामिनी का।
निहार-निहार विहार कर देखते सूने आँगन का,
चलती जैसे पवन की परछाँईं।

अक्षित करते पुष्कर ताल तलैईया के,
मेघराज गरज – गरज कर धरणि का।
पल-पल अपने आभा का रूप दिखला कर
बदली में फिर कहीं छुप जाते।
हँसकर मुँह चिढ़ाते तपन की,
इठलाते हर्षाते दूर क्षितिज पर।

कभी कुम्हलाते कभी खिल-खिल जाते,
ये बरखा के बादल पल भर में,
उमस गर्मी को दूर भगाते।
नवयौवना से मचल कर चलते,
अँगड़ाई ले-लेकर मन की अगन बढ़ाते।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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यह कविता (बरखा बहार।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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आयुर्वेद का उपयोग करने के 10 कारण।

Kmsraj51 की कलम से…..

10 Reasons To Use Ayurveda | आयुर्वेद का उपयोग करने के 10 कारण।

आयुर्वेद क्या है?

आयुर्वेद एक प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति है जो शरीर, मन, और आत्मा के संतुलन को सुधारने और स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्राकृतिक तरीके से उपचार करती है। यह भारतीय संस्कृति और वैदिक शास्त्रों में प्रत्येक पहलू, विशेषतः आयुर्वेदीय ग्रंथ ‘चरक संहिता’, ‘सुश्रुत संहिता’, ‘अष्टांग हृदय’, और ‘अष्टांग संग्रह’ में विवरणित है।

आयुर्वेद विश्वास के अनुसार, हर व्यक्ति में तीन दोष या शारीरिक भावों का संतुलन होता है – वात, पित्त, और कफ। अगर ये तीनों दोष संतुलित रहते हैं, तो व्यक्ति स्वस्थ रहता है। लेकिन इनमें से किसी एक या अधिक दोषों का असंतुलन होने पर विविध रोग उत्पन्न हो सकते हैं।

आयुर्वेद में विभिन्न उपचार प्रणालियों का उपयोग किया जाता है, जैसे कि:

  1. आहार और पौष्टिक तत्वों का उपयोग करके रोगों का उपचार।
  2. जड़ी-बूटियों, पौधों, और वनस्पतियों से बने औषधियों का उपयोग।
  3. रसायन, धार्मिक विधियों, और योग आसनों का उपयोग शरीर के और मन के संतुलन को सुधारने के लिए।
  4. पंचकर्म चिकित्सा विधि, जो शरीर की शुद्धि के लिए उपयुक्त है।
  5. स्वदेशी और प्राकृतिक उपचारों का प्रचलन करना।

आयुर्वेद का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को संतुलित और स्वस्थ जीवन जीने के लिए संदेहात्मक और पूर्वजन्म के अनुभवों पर आधारित सामग्री का उपयोग कर उपचार करना है। यह चिकित्सा पद्धति शरीर, मन, और आत्मा के बीच संतुलन को स्थायी रूप से सुधारने का प्रयास करती है और व्यक्ति को स्वस्थ और समृद्ध जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है।

औषधीय पौधे और जड़ी बूटियां

आयुर्वेद में कई जड़ी-बूटियों का उपयोग रोगों के उपचार में किया जाता है। नीचे कुछ जड़ी-बूटियों के नाम दिए गए हैं:

  1. अश्वगंधा (Ashwagandha)
  2. ब्राह्मी (Brahmi)
  3. गुडूची (Guduchi)
  4. शतावरी (Shatavari)
  5. अर्जुन (Arjuna)
  6. तुलसी (Tulsi)
  7. नीम (Neem)
  8. बिल्व (Bilva)
  9. खीरा (Kheera)
  10. कूटकी (Kutki)
  11. विदारिकंद (Vidarikand)
  12. मुलेठी (Mulethi)
  13. हरीतकी (Haritaki)
  14. बहेरा (Bahera)
  15. अमला(आंवला) (Amla)
  16. धतकी (Dhataki)
  17. गोखरू (Gokhru)
  18. गुग्गुल (Guggul)
  19. जीरक (Jeerak)
  20. जलपूरी (Jalapuri)
  21. कुलत्थ (Kulath)
  22. मांजिष्ठा (Manjishtha)
  23. पिप्पली (Pippali)
  24. पुनर्नवा (Punarnava)
  25. दारुहल्दा (Daruharidra)
  26. पशनभेद (Pashanbhed)
  27. वासा (Vasa)
  28. विदंग (Vidang)
  29. अरण्डी (Arandi)
  30. सोमवल (Somavalli)
  31. नागरमोथा (Nagarmotha)
  32. सर्पगंधा (Sarpagandha)
  33. गुडूची (Guduchi)
  34. सफेद मूसली (Safed Musli)
  35. चिरायता (Chirayata)
  36. काली मिर्च (Kali Mirch)
  37. निम्बू (Nimbu)
  38. पुदीना (Pudina)
  39. विदारी (Vidari)
  40. कुटज (Kutaj)
  41. लोध्र (Lodhra)
  42. स्थाली (Stahli)
  43. सोनाखड़ी (Sonakhadi)
  44. सारिवा (Sariva)
  45. द्राक्षा (Draksha)
  46. कृष्ण तुलसी (Krishna Tulsi)
  47. तेज पत्ता (Tej Patta)
  48. अमृता (Amrita)
  49. रामा तुलसी (Rama Tulsi)
  50. मोचरस (Mochras)
  51. जलनीम (Jalneem)

कृपया ध्यान दें कि जड़ी-बूटियों के उपयोग से पहले विशेषज्ञ वैद्य या चिकित्सक की सलाह लेना अनिवार्य है। वे आपके रोग के लिए उचित उपचार का सुझाव देंगे।

आयुर्वेदा अमृत की तरह क्यों है?

प्राचीनता: आयुर्वेद भारतीय चिकित्सा पद्धति में सबसे प्राचीन और विश्वसनीय चिकित्सा पद्धतियों में से एक है। इसका इतिहास हजारों वर्षों से भी पुराना है और वेदों और पुराणों में भी उल्लेख किया गया है। आयुर्वेद प्राकृतिक उपचारों का प्रचलन करता है जो जड़ी-बूटियों, पौधों, मिश्रण, और आयुर्वेदीय औषधियों से बने होते हैं। इन्हें बनाने के लिए केवल प्राकृतिक सामग्री का प्रयोग होता है, जो साधारणतः दुष्प्रभाव नहीं देती।

आयुर्वेद, भारतीय परंपरागत चिकित्सा पद्धति है जिसे हजारों वर्षों से प्रयोग किया जा रहा है। यह चिकित्सा पद्धति शरीर, मन, और आत्मा के संतुलन को सुधारने और रोगों को रोकने और उन्हें ठीक करने के लिए प्राकृतिक तरीके से उपचार करती है। आयुर्वेद को अपनाने के कुछ मुख्य कारण हैं:

  1. पूर्ण चिकित्सा पद्धति: आयुर्वेद शारीरिक, भावनात्मक, और आध्यात्मिक स्तर पर रोगों के कारणों को समझती है और इन्हें पूर्णता से ठीक करने का प्रयास करती है।
  2. प्राकृतिक चिकित्सा: आयुर्वेद नेचुरल और प्राकृतिक उपायों का प्रयोग करती है, जो साधारणतः दुष्प्रभाव नहीं देते हैं।
  3. व्यक्ति-विशेष चिकित्सा: आयुर्वेद व्यक्ति के प्रकृति और प्रकृति के अनुसार चिकित्सा विधि का चयन करती है, जिससे उपचार की प्रभावीता बढ़ती है।
  4. संतुलन को सुधारना: आयुर्वेद शरीर, मन, और आत्मा के बीच संतुलन को सुधारती है, जिससे रोगों के उत्थान को रोका जा सकता है।
  5. रोगों के प्राकृतिक उपचार: आयुर्वेद बीमारियों के उपचार के लिए जड़ी-बूटियों, औषधि पौधों, मिश्रण, रसायन, धार्मिक विधियों, और योग आसनों का उपयोग करती है।
  6. शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य: आयुर्वेद शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को समान महत्व देती है, जिससे संपूर्ण चिकित्सा के लाभ मिल सकें।
  7. निरोगी जीवनशैली: आयुर्वेद नियमित और स्वाभाविक जीवनशैली के पालन को प्रोत्साहित करती है, जिससे बीमारियों का सामान्य जन्मना और उनका बढ़ना कम होता है।
  8. विश्वास की गहराई: आयुर्वेद को भारतीय संस्कृति में विश्वास की गहराई से जोड़ा गया है, और इसे लोग एक सतत और सुरक्षित उपचार विकल्प के रूप में देखते हैं।
  9. दुर्वास्तुप्रतिवाद: आयुर्वेद को दुर्वास्तुप्रतिवाद यानी नैदानिक चिकित्सा के अनुसार काम करने की दृष्टि से भी मान्यता मिलती है।
  10. ब्रह्मांड के साथ समन्वय: आयुर्वेद में ब्रह्मांड और मानव शरीर के बीच सम्बंध को ध्यान में रखते हुए उपचार किया जाता है।

यह कुछ कारण हैं, जिनके कारण लोग आयुर्वेद को अपना रहे हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि — आयुर्वेद के उपयोग से पहले एक विशेषज्ञ वैद्य या चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है।

♦ KMSRAJ51 – संपादकीय ♦

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— Conclusion —

  • “KMSRAJ51“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस Article में समझाने की कोशिश की है — आयुर्वेद भारतीय चिकित्सा पद्धति में सबसे प्राचीन और विश्वसनीय चिकित्सा पद्धतियों में से एक है। इसका इतिहास हजारों वर्षों से भी पुराना है और वेदों और पुराणों में भी उल्लेख किया गया है। आयुर्वेद प्राकृतिक उपचारों का प्रचलन करता है जो जड़ी-बूटियों, पौधों, मिश्रण, और आयुर्वेदीय औषधियों से बने होते हैं। इन्हें बनाने के लिए केवल प्राकृतिक सामग्री का प्रयोग होता है, जो साधारणतः दुष्प्रभाव नहीं देती। आयुर्वेद, भारतीय परंपरागत चिकित्सा पद्धति है जिसे हजारों वर्षों से प्रयोग किया जा रहा है। यह चिकित्सा पद्धति शरीर, मन, और आत्मा के संतुलन को सुधारने और रोगों को रोकने और उन्हें ठीक करने के लिए प्राकृतिक तरीके से उपचार करती है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

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भ्रमर गुंजार।

Kmsraj51 की कलम से…..

Bhramar Gunjar | भ्रमर गुंजार।

भ्रमर तुम्हारे गुंजारों पर,
फूल-फूल हंसे कलियां मुस्कायी।
पंकज के पंखुड़ियों में तुम,
बंद हुये रजनी जब आई।

रजनी भर दुःख झेला तुमने,
रश्मि रथी जब नभ में छाई।
छिप गये तारे नभ में सारे,
उषा लली चिड़ियां चहकायी।

मुंह धोकर जल-पान कि ये सब,
उठ गये बाल युवा नर – नारी।
बांध पीठ पर बस्ता बालक,
पढ़ने की सब की तैयारी।

भौंरे सहगामी बन मधु-रस,
चूस सुमन से छत्ता भरते।
शहद बना जीवन हित ‘मंगल’,
दिनभर दौड़ लगाते रहते।

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — भ्रमर(भौरे) दिन – रात एक करके जी-तोड़ मेहनत करती है, एक फूल से दूसरे फूल पर, फिर तीसरे फूल पर जाती है, इस तरह से वह अनगिनत फूलों पर जाती है और उन फूलों से थोड़ा – थोड़ा रस लेकर अपने छत्ते में इकट्ठा करती है। इतनी कड़ी मेहनत के बाद तब कही जाकर मधु बनता है, जो हम सभी को बहुत पसंद हैं। भ्रमर(भौरे) से हमें यह सीख मिलती है की कठिन से कठिन मेहनत करने से कतराना व घबराना नहीं चाहिए। हम सभी को हर परिस्थिति से डटकर सामना करना चाहिए।

—————

यह कविता (भ्रमर गुंजार।) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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जागृत का एक दिन।

Kmsraj51 की कलम से…..

A Day Of Awakening | जागृत का एक दिन।

सम्मुख तेरे प्राण वान हूं,
या निष्प्राण हूं क्या बतलाऊं।
जागृति दर्पण के सम्मुख मैं,
क्या देखूं क्या देख न पाऊं।

फिर भी देखो उस महात्मा को,
नीरव में रसना – अर्पण है।
स्वर से स्वर का सम्मेलन ही,
प्राणवान जागृत दर्पण है।

जहां अनुत्तरित प्रश्न वहीं पर,
मिथ्या जगत का स्वप्न बड़ा है।
एक दिवस उठकर दौडूंगा,
नापूंगा जो जहां जड़ा है।

कलम उठा लिखने बैठूंगा,
अपनी गौरव गाथा को।
सबको दिखा सकूं दर्पण में,
संस्कृति और सभ्यता को।

धरती से नवम मंडल तक मैं,
दीपक ज्योति जलाऊंगा।
ज्ञान ध्यान से कबीर जैसा,
‘मंगल’ दरश कराऊंगा।

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — हम सब जानते है की इस मिथ्या जगत की सभी चीजें नाशवान है सब नष्ट हो जायेगा एक दिन, फिर क्यों इन नाशवान चीजों के लिए कभी किसी को तकलीफ़ दे। अपने कर्म ऐसे करते चले की सभी को प्रेरणा मिले अच्छा-अच्छा कर्म करने का। कभी भी कोई ऐसा कार्य न करें की आपके कार्य से किसी को दुःख पहुंचे। एक लेखक अपनी कलम से अपने देश की महान संस्कृति और सभ्यता को दिखाने की कोशिश करता है। धरती से नवम मंडल तक का दर्शन कराता है अपनी लेख से लेखक। अपना जन्म, अपने जननी, व जन्मभूमि राष्ट्र के लिए सच्चे मन से समर्पित करें।

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यह कविता (जागृत का एक दिन।) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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आफत की बारिश।

Kmsraj51 की कलम से…..

Rain Of Disaster | आफत की बारिश।

हिमाचल की प्राकृतिक,
शान है देखो कितनी निराली।
अरे ओ मानव तूने यहां भी,
ये कैसी साजिश रच डाली।

बना – बना के बड़ी – बड़ी इमारतें,
सब नदी नालों की राहें रोक डाली।
तभी तो हो रही ये आफत की बारिश आज,
त्राहि – त्राहि कर रहा मेरा शिमला,
मंडी, कुल्लू हो या फिर हो मनाली।

क्यों कर रहे हो पहाड़ों से,
छेड़छाड़।
बना – बना के सुरंगे,
सारी ज़मीन खोखली कर डाली।

अभी तो रुक जाओ,
बीस साल बाद देखना मेरा प्रकोप।
जब बह जायेंगे सारे भवन,
बनकर कंकड़ पत्थर।
तो फिर मनाना सिर पर,
दोनों हाथ रखकर तुम शोक।

अभी भी संभल जाओ,
मत बिगाड़ो संतुलन पहाड़ों में।
है तुम सब से मेरी भी ये गुजारिश,
वरना हर साल ऐसे ही आती,
रहेगी ये आफत की बारिश।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — “हिमाचल की प्राकृतिक शान है देखो कितनी निराली। अरे ओ मानव तूने यहां भी, ये कैसी साजिश रच डाली।” चारों तरफ पानी पानी, हर तरफ तबाही ही तबाही है। जो अपने आवेश में सबकुछ, ख़त्म करने पर अड़ी है। पर आज उसे भी अपना, अस्तित्व बचाने की पड़ी है। आफत की बारिश से हुई तबाही का मंजर अभी भी खौफनाक नजर आता है। बादल फटने की वजह से आसमान से जब अचानक तबाही बरसने लगे तो लोग हक्का-बक्का रह गए। जब तक वे संभलने या सुरक्षित स्थानों में जाने का प्रयास करते, तब तक मूसलाधार बारिश का कहर अपनी चरम पर पहुँच चुका था। “हे मानव अभी भी संभल जाओ और मत बिगाड़ो संतुलन पहाड़ों में, है तुम सब से मेरी भी ये गुजारिश, वरना हर साल ऐसे ही आती रहेगी ये आफत की बारिश।” जय माता दी!

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यह कविता (आफत की बारिश।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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