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2023-KMSRAJ51 की कलम से

हरियाली तीज।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hariyali Teej | हरियाली तीज।

माह श्रावण, शुक्ल पक्ष की तृतीया को पर्व हरियाली तीज आया।
अंकुर फूटेंगे अब तो हरे-भरे पौधों के, इसने सुप्त बीजों को जगाया।

आओं जानें, ये हरियाली तीज क्यूँ कहलाये।
यही तो आकर, सब त्योहारों के बीज बिखेर जायें।

फिर प्रकृति ओढ़ ले, धानी चुनरिया बहार की।
महिलाओं के मयूर मन नाचें, खुमारी छाए प्यार की।

माँ पार्वती-शिवजी की आराधना कर, सुहागिनें व्रत करती हैं।
मांग में सुहाग की लंबी उम्र, सौभाग्यवती का सिंदूर भरती हैं।

तन पुलकित, मन आनंदित, ए तीज! आने पर तेरे।
आ अब लगा दे सुहागिनों की मेहंदी, हाथों के मुहाने पर मेरे।

सावन के आते ही, तेरे आने को सब बाट निहारें।
इस रुत पिया बोले, बस हम तो है तुम्हारें।

हरी-भरी कांच की चूड़ियाँ सज आयें, अब इन कलाइयों में।
लाकर कोथली बढ़ आएँ, प्यार बहन-भाइयों में।

शाखाओं पर पड़े झूलें भी, झूम-झूम कर गुहार लगाये।
ए हरियाली तीज! तेरे आगमन से चहुँ ओर, प्रीत-प्यार ही समाये।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — माँ पार्वती-शिवजी की आराधना कर, सुहागिनें व्रत करती हैं। मांग में सुहाग की लंबी उम्र, सौभाग्यवती का सिंदूर भरती हैं। तन पुलकित, मन आनंदित, ए तीज! आने पर तेरे। आ अब लगा दे सुहागिनों की मेहंदी, हाथों के मुहाने पर मेरे। हरियाली तीज, एक प्रमुख हिन्दू त्योहार, जो प्रायः श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा मनाया जाता है और इसका मुख्य उद्देश्य पतिव्रता सुधा की भक्ति और पतिव्रता धर्म का पालन करना होता है। हरियाली तीज का नाम इसकी हरा-भरा प्राकृतिक आवाज के आधारित होता है, जिसमें पर्यावरण की हरियाली का आभास होता है। इस दिन महिलाएं हरिद्वार, गंगा तट, उत्तराखंड के मंदिरों में जाती हैं और गंगाजल से स्नान करती हैं। महिलाएं सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं और विशेष रूप से तरह-तरह की गायन, नृत्य और खेल-कूद के आयोजन करती हैं। हरियाली तीज का आयोजन खुशियों और उत्साह के साथ होता है, जहां महिलाएं हरियाली रंगीन वस्त्र पहनती हैं और खुशी के गीत गाती हैं। इस त्योहार का एक और महत्वपूर्ण पहलू बरसाती ऋतु के आगमन की सूचना देना है, जिससे किसान वर्ग अपनी खेती की तैयारियों में लग जाते हैं। समग्र रूप से, हरियाली तीज एक उत्सवपूर्ण और धार्मिक त्योहार है, जो महिलाओं को शक्ति, समर्पण और पतिव्रता धर्म के माध्यम से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।

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यह कविता (हरियाली तीज।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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ज्ञानवापी षंड-धा।

Kmsraj51 की कलम से…..

Gyanvapi Shand-dha | ज्ञानवापी षंड-धा।

श्रृंगार गौरी जी की साधना के साधक शिव,
विविध प्रभाव छापे ‘ज्ञानवापी’ धाम हो।
जिनकी उपासना को महिमा बखाने जग,
नन्दीश्वर संग जो विराजे आठो याम हो।
काल – काल महाकाल ताल ठोंक खड़े हैं जो,
सदर अदालत दिया सर्वे प्रोग्राम हो।
भेष, निसून सर्वे हित अधिवक्ता चले,
नामित हुये थे सर्वे हित जो जो नाम हो।

कला कृतियों में का फोटोग्राफी लिया जाने लगा,
नोंक-झोंक होने लगा दोनों पक्षकार में।
बात पर बात बढ़ती ही गयी दोनो ओर,
सर्वे काम रोक दिया गया तकरार में।
नंदी महराज सामने मिला था शिवलिंग,
मिल गये बाबा शोर हुआ इजहार में।
मूर्तियों को तोड़ रखा गया तहखाने में था,
ताला नहीं खोला गया ही इन्तजार में।

टूटी मूर्तियाँ मिली अंधेरे में विराजमान,
उसकी रिकार्डिंग हुयी बैटरी प्रकाश में।
मिट्टी डाली नमी मिली दस दिन पहले की,
राज खुला पक्ष और विपक्ष बीच क्रास में।
लोम हर्षक घटना न घट पायी दुनो ओर,
पुलिस प्रशासन साथ दिया इतिहास में।
चुनके दिवाल जो छिपाये माता गौरी जी को,
‘मंगल’ मनाने लगे आस्था के सुभाष में।

जांच टीम संग दोनों पक्षकार साथ रहे,
सुबह दोपहरी से काम को निभाया था।
तहखाना इमेज में बनी जो दीवार रही,
वो श्रृंगार गौरी श्री मूर्ति को छिपाया था।
स्वेत सीमेंट तहखाने में मिला जो भी,
सद्व्यवहार भंग हुआ जो निभाया था।

मंगल’ मुरीद बीच तालमेल हुआ नहीं,
हताशा होने लगी साथ जो भी आया था।
सदी पन्द्रहवीं मूर्ति मिली तहखाने में जो,
भग्नावशेष का भण्डारण वहाँ भाया था।
यत्र-तत्र बिखरे हुए थे मूर्ति चारों ओर,
कुछ सही मूर्तियों को वहां पर छुपाया था।

फोटोग्राफी ली गयी करीने से सजा के इसे,
महमूद औरंगजेब मलवा बनाया था।
सर्वे ऑफ इण्डिया करेगी पहचान इसे,
न्याय प्रिय सर्वे का आदेश जो सुनाया था।

मिले हुए मलबे को छान रही सर्वे टीम,
सत्य दफनाया गया मलबे के ढेर में।
उजागर होते तथ्य कागज पे लाया गया,
बसते में बन्द करवाया गया देर में।

हाल ही में पेंटिंग तहखाने में हुयी है मिली,
किस सदी का है मुल्ला उलझाये फेर में।
कोर्ट के आदेश पर फिर जांच होगा क्योंकि,
दनुज प्रभाव सत्य छ्लें ना अहेर में।

कुछ कला कृतियाँ है कह रही लोगों से,
प्राचीन मूर्तियाँ दबा दी गयी तोड़ कर।
फोटो लिया जाने लगा बरामदा खम्भों का है,
रोशनी नीलाम हुयी शिव – धाम तोड़ कर।

रानी ग्वालियर बनवायी वहाँ मण्डप थी,
रास्ता सुरंग का है बना हुआ जोड़ कर।
कहा गया रामनगर किले में जा मिलता है,
राजघाट पुरातत्व में भी बना जोड़कर।

ताला खुला मिला तहखाने के दो कमरों का,
समय पाबंद सर्वे किया गया उसका।
देव परिसर की दुकाने सभी बन्द रहीं,
पाँव पयादे राहियों पर ध्यान जिसका।

तीसरे भी कमरे का ताला तोड़ा गया वहाँ,
चौथे कमरे का दरवाजा कहाँ खिसका।
अन्दर की चुनी गयी दीवारों के पीछे क्या है,
तोड़ने का न्यायिक आदेश नहीं उसका।

गुम्बद तालाब की भी रिकार्डिंग हु‌यी वहाँ,
साठ पैसठ परसेन्ट हुवा काम है।
देखने को शान्ति काशी वासियों में मिली अहा,
अधिवक्ता आयुक्त टीम भी ललाम हैं।

न्यायालय न्याय प्रिय काम को सराहें, लोग,
फर्स तोड़ जाँच हो तो सच खुले आम है।
‘मंगल’ मनावें लोग, देवता रमन्ते जहाँ,
मुल्ला कठमुल्ला छेड़ रहें, शिव-धाम है।

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — श्रृंगार गौरी जी की साधना के साधक शिव, विविध प्रभाव छापे ‘ज्ञानवापी’ धाम हो। जिनकी उपासना को महिमा बखाने जग, नन्दीश्वर संग जो विराजे आठो याम हो। काल – काल महाकाल ताल ठोंक खड़े हैं जो, सदर अदालत दिया सर्वे प्रोग्राम हो। नंदी महराज सामने मिला था शिवलिंग, मिल गये बाबा शोर हुआ इजहार में। मूर्तियों को तोड़ रखा गया तहखाने में था, ताला नहीं खोला गया ही इन्तजार में। टूटी मूर्तियाँ मिली अंधेरे में विराजमान, उसकी रिकार्डिंग हुयी बैटरी प्रकाश में। मिट्टी डाली नमी मिली दस दिन पहले की, राज खुला पक्ष और विपक्ष बीच क्रास में। मिले हुए मलबे को छान रही सर्वे टीम, सत्य दफनाया गया मलबे के ढेर में। उजागर होते तथ्य कागज पे लाया गया, बसते में बन्द करवाया गया देर में। “सत्य छुपाये नहीं छुपता।”

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यह कविता (ज्ञानवापी षंड-धा।) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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कहानी पूर्वोत्तर की।

Kmsraj51 की कलम से…..

Story of Northeast | कहानी पूर्वोत्तर की।

पूर्वोत्तर के जवानों को देखो, क्या से क्या होने आए हैं?
जिन हाथों में किताबें होनी थी, उन्होंने हथियार उठाए हैं।

यह समुदायों की जाति दुश्मनी है, या किसी ने ये लड़ाए हैं?
बेखौफ दरिंदगी दिखाते हैं, निर्वस्त्र घुमाई जाती बेटी मांएं हैं।

सीमा गांव की सरहद बनी है, गभरु हिफाजत में लगाए हैं।
आगजनी और मारधाड़ ने, नागा, मैतेई, कूकी सभी डराए हैं।

दहशत है चारों ओर वहां पर, सुख – चैन सभी का छीना है।
ऐसे भयावह वातावरण में, बड़ा मुश्किल किसी का जीना है।

यहां सियासत घनी है, वहां आक्रोशित बेबस आगजनी है।
मीडिया में नीरे सवाल उठे हैं, आखिर सरकारें क्यों बनी है?

इस्तीफे की मांग है, पक्ष – विपक्ष में हो रही है बस थिपाथोपी।
झुलसती हमेशा जनता है, सियासतदान तो सेंकेंगे ही रोटी।

यह आज नहीं कई बार हुआ है, हर राज में होता आया है।
इतिहास गवाह है, दो के झगड़े में, तीसरे ने लाभ उठाया है।

आओ मिलकर बैठे हम सब, प्यार प्रेम से बात सुलझाते हैं।
सम्पत्ति विवाद में औरों को घुसाना, वे तो बात उलझाते हैं।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — मणिपुर में मुख्य रूप से मैतई, कुकी और नगा जाति रहते हैं। नगा और कुकी को पहले से ही आदिवासी का दर्जा मिला हुआ है, लेकिन 1949 में मैतेई से यह दर्जा छीन लिया गया था। इसके बाद से ही मैतेई समुदाय के लोग इसकी मांग कर रहे थे। जिसे लेकर दोनों समुदायों के बीच हिंसक झड़प हो रही है। यह आज नहीं कई बार हुआ है, हर राज में होता आया है। इतिहास गवाह है, दो के झगड़े में, तीसरे ने लाभ उठाया है। आओ मिलकर बैठे हम सब, प्यार प्रेम से बात सुलझाते हैं, सम्पत्ति विवाद में औरों को घुसाना, वे तो बात उलझाते हैं।

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यह कविता (कहानी पूर्वोत्तर की।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

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आफता औली बरखा।

Kmsraj51 की कलम से…..

Afta Auli Barkha | आफता औली बरखा।

घरा रेयो जुगती ने,
राती दहां सौंदे दुबकी ने,
रहयो थोड़े से चुस्त,
नही ता बड़ा कुछ पई जाना पौने पुगत।

अंबरा ते बरने लगीरी आफत,
रूड़ने लगीरे सा बरखा ते।
डाल रुख कन्ने फाट,
कल्ले दहाँ जांदे किती खा जो,
कने जरूर लई जाएंओ अपने जागत।

एबकी बार पता नी क्या सोचीरा परमेसरे,
एड़ा दड़ा दड़ लाइरा बरखा रा दड़कया,
एड़ा लगीरा तियां जे एकी कडछियां,
बाटिए देने सारे निपटा।

कर रहम ओ परमेसर हूण,
तेरे सारे बच्चे, तेरी रची री सृष्टि सारी।
कैं लाईरे तरसाने तैं हूण,
करी दो ए आफता औली बरखा बंद हूण।
सब लोक रहो सुखी फेरी,
तायीं गाने सारेयां लोका तेरे गुण।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — ये बदरा तेज कड़क-कड़क कर बिजली तड़कने के साथ जोरदार मूसलाधार बारिश से तबाही मचा है सब ओर। ये जो आफत की बारिश आयी है चारों तरफ पानी ही पानी भरा है तेज वर्षा के कारण हे प्रभु अब इसे बंद करो तुम पर ही हम सबको विश्वास है। हम जानते है की ये मानवों के कुकर्मों और प्रकृति से खिलवाल का ही नतीज़ा है। तेज मूसलाधार वर्षा से पूरा जलमग्न हो गया ये पहाड़ी प्रदेश, सभी दुखी व परेशान है। हमसब तेरे ही बच्चें है प्रभु हम पर रहम करो और अब इस तेज वर्षा को बंद करो प्रभु, जिससे जनजीवन सामान्य हो सके।

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यह कविता (आफता औली बरखा।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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क्या भरोसा।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kya Bharosa | क्या भरोसा।

मानव मानव को मार सकता है,
मानव मानव का नरसंहार कर सकता है।
मानव मानव को डुबो सकता है,
पर मानव मानव का बेड़ा सिर्फ,
ऊपर वाला ही पार कर सकता है।

देख हालात हिमाचल के,
जय क्यों तू इतना इतराता है।
क्या भरोसा है इस जीवन का,
सिर्फ ऊपर वाला ही जाने,
इन सांसों के पल पल का कितना नाता है।

सच में ही यह कलयुग है,
जो सोचा ही नहीं अब वह हो सकता है।
किसने सोचा था हमारा पहाड़ी राज्य भी,
एक दिन जलमग्न हो सकता है।

जय भी कर रहा अरदास प्रभु से दिन-रात,
अब तू ही हमको बचा सकता है।
डर के मारे दिन रात सहम रहे अब लोग,
प्रकृति की भयंकर मार को,
अब सहन नहीं कर पा रहे लोग।
अब सिर्फ तुझ पर ही है एक भरोसा,
तू ही डर को भगाकर ,
अच्छे दिन ला सकता है अच्छे दिन ला सकता है।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — सच में ही यह घनघोर कलयुग है, जो सोचा ही नहीं था अब वह हो रहा है, किसने सोचा था हमारा पहाड़ी राज्य हिमाचल भी एक दिन जलमग्न हो सकता है। आखिर मानव ने जो प्रकृति से छेड़छाड़ की उसका दंड तो मिलना ही था उसे किसी न किसी आपदा रूप में, कर्म का फल तो मिलेगा ही। अब तो केवल प्रभु पर ही विश्वास है हम सबको अरदास प्रभु से दिन-रात करते हमसब अब तू ही हमको बचा सकता है। डर के मारे दिन रात सहम रहे अब लोग। प्रकृति की भयंकर मार को अब सहन नहीं कर पा रहे लोग। अब सिर्फ तुझ पर ही है एक भरोसा, तू ही डर को भगाकर, अच्छे दिन ला सकता है प्रभु।

—————

यह कविता (क्या भरोसा।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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77वां स्वतंत्रता दिवस!

Kmsraj51 की कलम से…..

77th Independence Day | 77वां स्वतंत्रता दिवस!

KMSRAJ51.COM »  के…

सभी पाठकों को तहे दिल से 77वां स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं!

राष्ट्र प्रेम हमें अपने देश के प्रति अपनाए गए गहरे स्नेह और समर्पण की महत्वपूर्णता को समझाता है। यह हमें याद दिलाता है कि हमें अपने देश के उच्चतम हित को सर्वोपरि रखना चाहिए और समृद्धि और सामर्थ्य के साथ उसके विकास में योगदान करना चाहिए। राष्ट्र प्रेम और स्वतंत्रता दिवस हमें एक मजबूत, एकता में बँधने वाले और स्वतंत्र भारत की दिशा में प्रतिबद्ध रहने की प्रेरणा प्रदान करते हैं। यह दिन देशभक्ति और राष्ट्रीय गर्व की भावना को महसूस कराता है और लोग विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारे पूर्वजों ने कितनी संघर्षशीलता और बलिदान के बाद हमें आजादी दिलाई थी। राष्ट्र प्रेम और स्वतंत्रता दिवस भारतीय जनता के लिए महत्वपूर्ण और गर्व की बात है।

भारतीय स्वतंत्रता दिवस का महत्वपूर्ण अंश उन समर्पित वीरों की याद को समर्पित है जिन्होंने अपने जीवन की आहुति देकर देश को स्वतंत्र कराया। इस दिन को गौरवपूर्ण और श्रद्धांजलि भरे भावनाओं के साथ मनाना चाहिए, ताकि हम अपने इतिहास के महान परिप्रेक्ष्य में गर्व महसूस कर सकें और स्वतंत्रता के महत्व को समझ सकें।

भारत माता की जय! — वन्दे मातरम्!

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राष्ट्र प्रेम।

Kmsraj51 की कलम से…..

Rashtra Prem | राष्ट्र प्रेम।

सच्चा प्रेम-भाव ही देश के प्रति, राष्ट्र-प्रेम कहलायें,
जब तेरे कर्मों से, देश की उन्नति एक कदम अग्रसर हो जायें।

बना लीजिए देश-भक्ति को अपने ह्रदय का दर्पण,
सच्चा भाव, भारत-माता के चरणों में कर दो अर्पण।

माना महान देशभक्त, शहीद, शूरवीर न कहला पायें हम,
पर उनके रास्ते की धूल तो, बन जाये हम।

तुम्हारा हर नेक भाव, सदकर्म ही राष्ट्र-भक्ति बन जाएं।
जब बूँद पड़े समुन्द्र में, तो सागर ही कहलाये।

क्षेत्र चाहे जो भी चुनों, बशर्ते भारत – माँ हमें तो तेरी शान बढ़ानी है,
तेरी शौहरत, शौर्य का रुतबा बुलंद हो, बस वही तेरे नाम की मधुर तान सुनानी है।

कलम की ताकत ने तो, सदैव ही अपना जलवा दिखाया इस जग में,
लेखनी से ह्रदय-पटल पर छप कर, समा जाए रग-रग में।

लेखनी से हम विश्व-बंधुत्व को कायम रखने में एक कदम आगे बढ़ाए,
कलम से लोगों के ह्रदय-पटल पर अंकित हो ऐसा, जो भारत-माता के प्रेम को ही दर्शाए।

समय आ गया, उजागर कर दो अब, अपने राष्ट्र-प्रेम के भावों को,
कुछ छाप छोड़े ऐसी कि आने वाली पीढ़ी भी, प्यार करें उन राहों को।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — राष्ट्र प्रेम हमें अपने देश के प्रति अपनाए गए गहरे स्नेह और समर्पण की महत्वपूर्णता को समझाता है। यह हमें याद दिलाता है कि हमें अपने देश के उच्चतम हित को सर्वोपरि रखना चाहिए और समृद्धि और सामर्थ्य के साथ उसके विकास में योगदान करना चाहिए। राष्ट्र प्रेम और स्वतंत्रता दिवस हमें एक मजबूत, एकता में बँधने वाले और स्वतंत्र भारत की दिशा में प्रतिबद्ध रहने की प्रेरणा प्रदान करते हैं। यह दिन देशभक्ति और राष्ट्रीय गर्व की भावना को महसूस कराता है और लोग विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारे पूर्वजों ने कितनी संघर्षशीलता और बलिदान के बाद हमें आजादी दिलाई थी। राष्ट्र प्रेम और स्वतंत्रता दिवस भारतीय जनता के लिए महत्वपूर्ण और गर्व की बात है।

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यह कविता (राष्ट्र प्रेम।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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स्वतंत्रता दिवस।

Kmsraj51 की कलम से…..

Independence Day | स्वतंत्रता दिवस।

आओ मिलकर आजादी का जश्न मनाएं,
स्वतन्त्रता दिवस को घर-घर में दीप जलाएं।
जिन्होंने जान गंवाए आजादी के खातिर,
उन वीरों की गाथा गाएं,
आओ मिलकर ये पर्व मनाएं।

हिंदुस्तान के घर-घर में तिरंगा फहराएं,
सभी भाई मिलकर, भारत माँ की लाज बचाएं।
आओ मिलकर आजादी का जश्न मनाएं,
सब मिलकर ऐसा माहौल बनाएं,
जालिमों को डर लगे, ऐसी हम सबक सिखाएं।

ऐसे भारत का निर्माण करें,
फिर से सोने की चिड़िया कहलाए,
आओ मिलकर आजादी का जश्न मनाएं।
देश के खातिर मर मिटने का,
अभिमान हो सब में, समता, समानता,
भाइचारे का स्वाभिमान हो सब में।

दिल में बसता नर-नारी का,
सम्मान हो सब में।
तेरे हाथ में हो तिरंगा,
बस केवल इंसान बनो।
भारत माँ की शान बनो,
आओ मिलकर गाथा गाएं,
आजादी का जश्न मनाएं।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

—————

  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — भारतीय स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हमें अपने पूर्वजों के बलिदान को सलामी देनी चाहिए। यह एक महत्वपूर्ण दिन है जब हम उन महान योद्धाओं का सम्मान करते हैं, जिन्होंने अपने जीवन की आहुति देकर हमारे देश को स्वतंत्रता दिलाई। इस दिन हमें याद दिलाना चाहिए कि हमारी स्वतंत्रता को हासिल करने के लिए लाखों लोगों ने अपने प्राणों की बलिदानी की थी। वीर शहीदों की शौर्य और बलिदान ने हमें यह सिखाया है कि देश के लिए आत्मसमर्पण और समर्पण की आवश्यकता होती है। भारतीय स्वतंत्रता दिवस हमें एक सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। हमें अपने कर्तव्यों के प्रति पक्षपात और साहस से पूरी तरह समर्पित रहना चाहिए, ताकि हमारे देश की प्रगति में हमारा योगदान हो सके। इस दिन को याद करके हमें अपने देश के प्रति अपने आदर्शों के प्रति पुनः समर्पित होने का संकेत मिलता है। हमें अपने देश के विकास और समृद्धि में यथाशक्ति सहयोग करने का आदर्श मिलता है, ताकि हमारे महान पूर्वजों का बलिदान सच्चे आदर्शों का पालन करते हुए उनका सम्मान कर सकें।

—————

यह कविता (स्वतंत्रता दिवस।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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मेरा देश महान।

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Mera Desh Mahan | मेरा देश महान।

स्वतंत्रता दिवस की बेला आयी जश्न मनाते है,
दिल हर्षित हुआ सब मिलकर खुशी मनाते है।
तीन रंगों से बना हमारा प्यारा झंडा तिरंगा है,
इन रंगों में रंगकर भारत देश को अखंड बनाना है,
तिरंगे की शान की खातिर दुनियां से लड़ जाना है।

केसरिया शौर्य, हरा सम्रद्धि, शवेत शान्ति प्रतीक है,
अशोक चक्र देता सबको एकता का संदेश है।
वीरों की शहादत को कोई न भूल पाया है,
उन वीरों को हम आज शत-शत नमन करते है,
तिरंगे की शान की खातिर सरहद पर बैठे है।

दुश्मन भाग जाते वीर अपना शौर्य दिखाते है,
भारत हमारा देश तिरंगा हमारी शान है।
विश्व में तिरंगा ऊंचा रहें, हिंदुस्तानी की शान है,
सारे विश्व में मेरा भारत महान और विशाल है,
सत्य, अहिंसा, प्रेम का यह विश्व शांति का दूत है।

गुरुग्रंथ साहिब, रामायण, गीता और कुरान है,
विभिन्न संस्कृतियों का यह देश हमारा हिंदुस्तान है।
देवी, देवताओं को होता पूजन गंगा का संगम है,
परिधान भिन्न हो एकता का परिचायक है,
यह मेरा हिंदुस्तान है, यह मेरा हिंदुस्तान है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — मेरा देश, भारत, विविधता, समृद्धि और एकता का प्रतीक है। यह एक समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर धारण करता है जिसमें अनेक जातियाँ, भाषाएँ और धर्म आपसी सामंजस्य के साथ रहते हैं। यहाँ की विविधता एक मजबूत एकता का प्रमुख कारण है। भारत की धरती पर प्राचीन सभ्यताओं का अद्वितीय इतिहास है, जो उसकी महानता का प्रमाण है। यहाँ के महान वैज्ञानिक, विचारक और कलाकार ने विश्व को प्रेरित किया है। भारतीय संस्कृति ने सदियों तक ज्ञान और धार्मिकता का संवर्धन किया है। मेरा देश अपने सुंदर प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक स्थलों, धार्मिक स्थलों और विविध फेस्टिवलों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की मिलनसार जीवनशैली और परंपराएँ इसे विशेष बनाती हैं। समाज में सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में कदम बढ़ाते हुए, हमारा देश अब आर्थिक और सामाजिक माध्यमों में सुधार की ओर अग्रसर है। समर्पण, साहस और महान आत्मा ने इसे महान बनाया है। मेरा देश, भारत, विश्व में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और आगे भी उन्नति की राह में अग्रसर रहेगा।

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यह कविता (मेरा देश महान।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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सोच।

Kmsraj51 की कलम से…..

Thinking | सोच।

उस दिन राम किसी लंबी यात्रा से अपने घर लौटा था। राम ने जैसे ही दरवाजा खटखटाया बेटा जल्दी से दरवाजा खोलने आया और एकदम से अपने पापा के बैग से अपने लिए मिठाई ढूंढने लगा। बेटे ने ना तो पापा के चरण स्पर्श किए और ना ही हाल-चाल पूछा। क्योंकि बेटा अभी 5 साल का है इसलिए पापा ने भी ज्यादा परवाह न की। घर के अंदर बेटी ने भी पापा को नमस्ते की और कहा पापा मेरे लिए क्या लाए हैं? पापा ने भी बैग खोलते हुए उसको बताया कि उसके लिए कपड़े लाए हैं। पापा ने अपनी मां के चरण स्पर्श किए और मां ने आशीर्वाद देते हुए कहा कि शाबाश मुझे तुम पर गर्व है।

इसके बाद राम की धर्मपत्नी ने ना तो राम को पानी के लिए पूछा, ना चाय के लिए पूछा, क्योंकि शाम को लगभग 8:00 का समय था, राम अभी अपने कपड़े बदल ही रहा था कि उसकी पत्नी ने उसे कहा थोड़ी सी सब्जी बची है, बाकी अगर खाना, खाना है तो खाना बना लो, बाकियों के लिए भी खाना बना लो, मैं खाना नहीं बनाऊंगी। राम को एकदम से गुस्सा आया और उसने कहा कि मैं इतनी दूर से आया हूं ना तो तुम मेरे लिए चाय के लिए पूछ रही हो, ना पानी के लिए। सीधे ही हुक्म लगा रही हो कि अपने लिए खाना बना लो, बाकी के लिए भी खाना बना लो, यह कहां का न्याय है?

राम की पत्नी तपाक से बोली तुमने कहा मेरा हाल चाल पूछ लिया मैं बीमार हूं, मेरे बारे में कोई नहीं सोचता है, जबकि ऐसा नहीं था वह पता नहीं किस बात के लिए नाराज थी। राम ने कपड़े बदल कर कुर्सी पर बैठकर सोचा कि आखिर आदमी किसके लिए कमाता है, किसके लिए वह दिन भर इधर-उधर दौड़ भाग करता है और अगर आदमी कमा भी लेता है तो अपने साथ क्या लेकर जाएगा?

आखिरकार राम ने अपने मन को शांत किया और चुपचाप रसोई घर में जाकर बहुत सारे प्रश्न लेकर खाना बनाने की तैयारी करने लग पड़ा। तभी राम की बीवी रसोई में आती है और अपनी आंखों से आंसू टपकाते हुए आटा गूंथने में लग जाती है जबकि राम ने कहा कि कोई बात नहीं, तुम अगर बीमार हो तो तुम आराम करो, मैं खाना बना लूंगा। लेकिन राम की बीवी ने आनन-फानन में आटा गूथ ली और चपाती भी बना दी। उधर राम ने सब्जी बना दी और सबने खाना खाया और थोड़ा माहौल शांत हुआ लेकिन राम के मन में उठे प्रश्नों का जवाब राम को कहीं नहीं मिल पाया?

एक तरफ राम की मां थी जो राम को आशीर्वाद देते हुए कहा कि शाबाश बेटा मुझे तुम पर गर्व है और दूसरी तरफ राम की धर्मपत्नी थी जिसने मुबारकबाद देने की बजाय हुकुम चलाना शुरु कर दिया कि तुम यह करो, तुम वह करो, तुम ऐसा नहीं करते हो, तुम वैसा नहीं करते हो? या औरत ही है जो मन भी है और बीवी भी है लेकिन सच में दिन-रात का फर्क है। कोई मां अपने परिवार के लिए दिन रात ही सोचती रहती है तो कोई मां ऐसी भी है जो सिर्फ और सिर्फ अपने तक ही सीमित है? सब सोच-सोच का फर्क है।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लघु कथा के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — “एक मां ही है जो अपने परिवार के लिए दिन रात ही सोचती रहती है” तो कोई मां ऐसी भी है जो सिर्फ और सिर्फ अपने तक ही सीमित है? ये सब सोच-सोच का फर्क है। भारतीय संस्कृति में माँ सदैव ही अपनों का हित चाहती है, और एक माँ ही है जो बिना किसी स्वार्थ के सबका ध्यान रखती है, भले ही खुद कितना भी कष्ट झेलती है फिर भी गुस्सा नही करती है, लेकिन आजकल की कुछ लड़कियों को क्या हो गया है जो अपनी निज संस्कार व फर्ज को भूलती जा रही है, ये कैसी सोच है इनकी? खैर एक बात याद रखे की मानव जीवन की तीन मुख्य जरूरतें है, अच्छा खाना, अच्छा पहनने को कपडा और रहने के लिए मकान, इन्हीं जरूरतों के लिए आदमी कार्य करता है जिससे उसके परिवार का जरुरत पूर्ण होता रहे। इसके बदले वह सिर्फ दिल का प्रेम व सहानुभूति के दो शब्द चाहता है अपनों से।

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यह लघु कथा (सोच।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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