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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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2024-KMSRAJ51 की कलम से

मतदान महादान।

Kmsraj51 की कलम से…..

Matdan Mahadan | मतदान महादान।

A strong government has to be formed with precious votes, Responsibility has to be fulfilled with wise decisions.

एक यज्ञ होने जा रहा है…
एक महापर्व आ रहा है…
सभी को ये त्यौहार मनाना है,
इस यज्ञ में आहुति डालने जाना है।

अथक प्रयासों का ये महामेला है,
मतदान का समय अलबेला है।

इस पुनीत कार्य में लगे हुए अनेक जन,
सभी लगा रहे अपना निस्वार्थ मन।

एक अधिकार मिला जो हमें मतदान का,
कर्तव्य निभाए हम अपने इस महादान का।

अनमोल मत संग एक सुदृढ़ सरकार बनानी है,
विवेकपूर्ण निर्णय से जिम्मेदारी निभानी है।

सारे काम छोड़ 25 मई को अपना धर्म निभाना,
मतदान के कर्तव्य संग वोट का अधिकार दिखाना।

एक सशक्त सरकार के बनाने में कर्तव्य ये तुम्हारा,
उन्नति की राह पर बढ़ता जाए भारत देश हमारा।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता एक यज्ञ और महापर्व की बात करती है, जिसमें सभी को भाग लेना है और अपने मतदान का अधिकार निभाना है। यह मतदान के महत्व और उसकी आवश्यकता पर जोर देती है, इसे एक पुनीत कार्य और महान प्रयास के रूप में वर्णित करती है। कविता में नागरिकों को मतदान के माध्यम से एक मजबूत सरकार बनाने और विवेकपूर्ण निर्णय लेने की जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया है। इसमें 25 मई को मतदान करने का आह्वान किया गया है, ताकि देश उन्नति और प्रगति के मार्ग पर अग्रसर हो सके।

—————

यह कविता (मतदान महादान।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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सरकारी स्कूल चलते हैं…।

Kmsraj51 की कलम से…..

Sarkari School Chalate Hain | सरकारी स्कूल चलते हैं…।

The importance of education to fulfill the dreams of children has been explained.

आओ चलो चलते है,
सरकारी स्कूल चलते हैं,
जहां सपने हमारे पलते हैं।

हौसलों की कमान लेकर,
पढ़ने का दिल में अरमान लेकर,
चलो सरकारी स्कूल चलते हैं।

सुबह की प्रात कालीन सभा से लेकर,
हाथो में अपने छोटों भाई बहनों का हाथ लेकर,
चलो सरकारी स्कूल चलते है।

योग, ध्यान और खेलों से शरीर को स्वस्थ बनाते है,
समय – समय पर बच्चों का चैकअप भी कराते हैं,
चलो सरकारी स्कूल चलते है।

अब ये भी तो सभी को हमें बताना है,
भांति – भांति के पकवान बच्चों को खिलाना है,
चलो सरकारी स्कूल चलते हैं।

केवल किताबी शिक्षा ही नहीं दोहराई हमने,
पुस्तकालय शिक्षा भी यहां पाई हमने,
चलो सरकारी स्कूल चलते हैं।

बाल वाटिका के भी छोटे – छोटे पुष्प यहां खिले है,
निपुण शिक्षक हमे केवल यहां मिले है,
चलो सरकारी स्कूल चलते है।

खेल – खेल में शिक्षा और संस्कार सिखाए जाते हैं,
अधिकार संग यहां बच्चों को कर्तव्य बताए जाते हैं,
चलो सरकारी स्कूल चलते हैं।

मजेदार गतिविधियों से बच्चों को निपुण बनाना है,
इतनी सुंदर शिक्षा से सभी बच्चों को सजाना है,
आओ कहो हमारे साथ,
हम को भी सरकारी स्कूल में जाना हैं।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता सरलता से सरकारी स्कूल की महत्वता को उजागर करती है। इसमें बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिए शिक्षा के महत्व को बताया गया हैं। वहाँ प्रदान की जाने वाली शिक्षा की विविधता और समावेशन को बढ़ावा दिया गया है। इसके अलावा, शिक्षा के साथ-साथ खेल, संस्कार, और देशभक्ति की शिक्षा भी उपलब्ध है। इस कविता के माध्यम से सरकारी स्कूल के महत्व को समझाया गया है और बच्चों को उनमें जाने के लिए प्रेरित किया गया है।

—————

यह कविता (सरकारी स्कूल चलते हैं…।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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Completely Ruined

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ Completely Ruined ♦

After death- what use are we to God. These questions kept reeling in his mind.Uncle… uncle… uncle Forster, do you know? Crown’s father passed away at 40, leaving him alone. Crown is too young, only 7 year old. He doesn’t know the meaning of death. He is sitting in the darkest corner of the darkened room, his face revealing nothing of what he thought and felt, neither crying for his father nor talking to anyone. Unfortunately, his mother left him and the city three years ago with her new husband and was about 150 km away from him when he was only 4 year old. Now he doesn’t even remember her well.. Now Crown has nobody in his family to look after him. Only Tommy a dog, his bosom friend- an animal.

The house was full of people-  relatives, friends, neighbours but he was alone. He maintained a distance from all. Nobody was in favour of Crown going to funeral or grave yard but his long cherished desire was to go to funeral to see the last rites of his father.

No one realized how serious the matter was? What would happen to the child… Crown. His father’s coffin lay in the adjacent room, the lid fastened forever over the tired, wistful countenance of the man who had meant so much to the boy. Crown was hungry and crying with no tears in his eyes but nobody asked him to have something to fill his empty stomach. Crown had become orphan. Big building- gardener everything was there except his father. Everybody used to feed him to please his father when he was alive but now everything changed. People were same but attitude different…. go of the world.

A small hearse was laid in at the gate and several able bodied men lifted the coffin and manoeuvred it into the carriage and slowly the crowd drifted away, those who didn’t have cars would have to walk the distance…. the cemetery was about one kilometre. Crown stared through the window. Only one loyal servant was there in the big house. When all had gone, Crown left the room stealthily but the gardener saw him so he returned to his room. The gardener was worried about his job. He would be out of job very soon. The boy would go to orphanage.

Any how Crown slipped out of the house by a back door and made his way to the cemetery following the crowd. The same road he used to take with his father during their evening walk. God has need of your father…. with these soothing words, father of the church had tried to console him but Crown was not satisfied. What need God had for his father! Thousands of men, women and children were put to rest in these neat and serrid rows, what could HE have wanted them for. After death- what use are we to God. These questions kept reeling in his mind.

In grave yard- the coffin was lowered down, deep down. Crown was surprised to see at how far down it seemed to go! Perhaps he would grow into a tree and escape that way from beneath the earth. One day same thing would happen to me, I shall grow into a flower, my seed will be carried by birds in different directions and I shall be free. Some people threw a handful of earth over the coffin before moving away. He stood there until they all had gone. He was alone, feeling very weak. He felt as if his father was beside him, patted him– This is the go of the world… my son. He wept like anything. His tears fell down on the tomb of his father where he was.

When he came back, his dog Tommy started wagging his tail, with empty stomach, when he slept with tears in his eyes, the servant gave him something to eat, he shared with Tommy. Tommy had also tears in his eyes, he slept beside Crown and patted him, saved Crown ‘s life from a big cobra. Tommy was bitten by cobra, he took his last breath next morning. Crown was sent to orphanage. Every thing was ruined in one day.

♦ Bhola Sharan Prasad – Sec – 150/Noida – Uttar Pradesh ♦

—————

  • “Bhola Sharan Prasad Ji“ has tried to explain in very simple words through this article in a beautiful way — The story revolves around a young boy named Crown who experiences the loss of his father at a tender age of seven. His father’s passing leaves him alone in the world, as his mother had left him years ago. Crown finds solace in his dog, Tommy, as his only companion. Despite the presence of relatives and friends after his father’s death, Crown feels isolated and disconnected from everyone. Crown’s desire to attend his father’s funeral reflects his longing for closure and understanding of death. However, the adults around him fail to grasp the depth of his emotions and overlook his need for support. As his father is laid to rest, Crown grapples with existential questions about life and death. After the funeral, Crown returns home to find solace in Tommy’s companionship. However, tragedy strikes again when Tommy sacrifices his life to save Crown from a cobra bite. With no one left to care for him, Crown is sent to an orphanage, marking the culmination of his loss and abandonment.

—————

This article (Completely Ruined) is the creation of “Bhola Sharan Prasad Ji”. For the readers of KMSRAJ51.COM. Your articles/poems reach deep into the heart in simple words and are life changing. I have full faith that your poems and articles will benefit the public. May your writing activity continue like this.

यह लेख (Completely Ruined) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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बेबस शिक्षक।

Kmsraj51 की कलम से…..

Bebas Shikshak | बेबस शिक्षक।

studied with great care, Without sleep, without yawning.

बड़े जतन से की पढ़ाई,
बिना नींद बिन जम्हाई।
बड़े शौक थे देंगे ज्ञान,
बढ़ेगा मान और सम्मान।

यही सोच ले भरी उड़ान,
मिली शिक्षा की कमान।
बन गया शिक्षक महान,
न रहा खुशी का ठिकान।

मिली जिम्मेदारी से हुआ रत,
बच्चों की पढ़ाई में हुआ मस्त।
सोचा था शिक्षा का करूंगा दान,
परिवार पर भी रखूंगा ध्यान।

बच्चों को मिले बेहतर शिक्षा बनाया लक्ष्य,
ईमानदारी से किए काम का मिला साक्ष्य।
काम से खुश एवम् संतुष्ट था,
काफी समय गुजर गया था।

अचानक शिक्षा विभाग में,
हुआ आमूलचूल परिवर्तन।
छात्र हित के नाम पर,
शिक्षक के काम पर।

शुरू हुई धमाचौकरी,
कठिन हुई अब नौकरी।
न होली, छठ न ही दिवाली,
सभी त्योहार अब खाली-खाली।

घर छूटा अपने छूटे, छूट गया समाज,
जीना दुर्लभ हो गया आज।
छात्र सह शिक्षक हो रहे बेरंग,
पढ़ाई तभी होगी जब होंगे संग।

आदेशालोक में पर्व त्योहार की छुट्टी हुई रद्द,
छुट्टी में भी शिक्षक स्कूल पहुंचे पढ़ाने गद्द।
जब बच्चे नहीं आयेंगे स्कूल,
शिक्षक क्या करेंगे जाकर स्कूल।

पढ़ाई लगातार हो अच्छी बात है,
रुचिकर हो ये गुणवत्तापूर्ण बात है।
कम समय में बेहतर ज्ञान,
होना चाहिए इसका भान।

पर्व त्योहार भी पढ़ाई का ही है पार्ट,
खुशनुमा माहौल में पढ़ाना भी है आर्ट।

जबर्दस्ती जब मुंह में न जाता खाना,
कैसे मिलेगा ज्ञान का खजाना।
नौकरी में ना कभी करना नहीं,
बेबस शिक्षक हूं कुछ कहना नहीं।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता शिक्षक के जीवन की एक दृष्टि प्रस्तुत करती है। शिक्षक ने अपने काम में समर्पित बलिदान दिया, लेकिन अचानक शिक्षा विभाग में परिवर्तन हो गया और उन्हें धमाचौकी झेलनी पड़ी। इसके बाद, उनकी जिंदगी में कई बदलाव आए, जैसे कि त्योहारों की छुट्टियों का रद्द होना और नौकरी की प्रतिस्पर्धा। फिर भी, उन्होंने पढ़ाई को महत्व दिया और अपने छात्रों की शिक्षा में समर्पित रहा। वे यह सिखाते हैं कि पढ़ाई केवल किताबों से ही नहीं, बल्कि प्रसन्नता और रुचि के साथ भी होती है। शिक्षक की भूमिका इस कविता में उजागर की गई है, जो समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण होती है।

—————

यह कविता (बेबस शिक्षक।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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संस्कार और विनम्रता।

Kmsraj51 की कलम से…..

Sanskaar Aur Vinamrata | संस्कार और विनम्रता।

Humility is the quality of being humble. Manners are the proper or polite way to behave in public. kmsraj51संस्कार और विनम्रता का अटूट संबंध है, संस्कार ही विनम्रता की जननी है। संस्कार के बिना जीवन मरूस्थल की तरह है, जहाँ संस्कार नहीं वहाँ अहंकार ही उत्पन्न होता है। संस्कार के भूलते ही अहंकार की उत्पत्ति हो जाती है, नदी कभी सूख जाती है, कभी विकराल रूप धारण कर लेती है, गाँव के गाँव नदी में समा जाती है। नदी को अपने प्रचंड प्रवाह पर घमंड हो जाना स्वाभाविक है, नदी मर्यादा भूल जाती है, यह भी भूल जाती है कि कभी उसकी सुखी रेत पर बच्चे गेंद खेलते हैं। नदी को अपने ताकत का अहंकार हो गया, वह सोचने लगा मैं पहाड़, मकान, पेड़, पशु और मानव को बहा कर कहीं भी ले जा सकता हूँ। बर्बाद करने की ताकत है मुझमे, एक दिन समुद से उसकी बहस हो गई क्योंकि अहंकार के कारण विनम्रता जा चुकी थी। गर्वीले अंदाज में मुस्कराते हुए समुद से कहा, बताओ, मैं तुम्हारे लिए क्या-क्या लाऊँ, मैं सर्व शक्तिमान हूं, मैं मकान, पेड़, पशु. मानव – जो तुम्हारी इच्छा हो, उसे लाकर तुम्हें समर्पित कर दूंगी।

संस्कार और विनम्रता समुद्र में कूट-कूट कर भरा था….. वह समझ गया, अहंकार के नशे में चूर है नदी, समुद ने बड़ी विनम्रता से बोला- अगर कुछ लाना ही चाहते हो तो थोड़ी सी घास उखाड़ कर ले आओ… मैं भी तो देखूँ – नदी ने हाँ कह दी। नदी पूरा जोर (शक्ति) लगाया पर छोटे-छोटे घास को उखाड़ न पाया, उसकी सारी जल शक्ति विफल हो गई। अंत में नदी मायूस होकर समुद्र के पास गया और बोला – मैं सब कुछ ला सकता, लेकिन घास नहीं क्योंकि घास झुक जाती है और मैं ऊपर से गुजर जाती हूँ। समुद्र ने मुस्कुराते हुए कहा- पहाड़, पेड़, कठोर होते हैं, आसानी से उखड़ जाते हैं लेकिन घास विनम्र होता है, वह झुकना जानता है, उसे प्रचंड आँधी, तूफान या जल का प्रचंड वेग कुछ नहीं बिगाड़ सकते। जिह्वा अंत तक साथ रहती है लेकिन दांत टूट जाते हैं, अभिमान फरिश्तों को भी शैतान बना देती है और विनम्रता इंसान को फरिश्ता बना देती है।

बीज़ की यात्रा पेड़ तक है, नदी की यात्रा सागर तक और मनुष्य की यात्रा परमात्मा तक, अहंकार एवं अभिमान विनाश की जननी है। प्रभु भक्ति से संस्कार जागृत होती है, जो लोग धर्म को मज़ाक समझते हैं उन्हें क्या मालूम प्रभु भक्ति कितना कठिन है। प्रभु चित्रगुप्त की नज़र से न कोई बचा है न कोई बच सकता है। उचित फल उचित समय पर अवश्य मिलता है, सदा वासना में लीन रहने वाले, दूसरों का अहित करने वाले और भगवान को न मानने वाले, दुष्कर्म में लिप्त रहने वाले, भले कुछ समय के लिए (पिछले जन्म के) कर्म के कारण सुखमय जीवन व्यतित कर लें, लेकिन उनके पापों का परिणाम अवश्य भोगना पड़ेगा।

सच्चे मन से भगवान का नाम लेने का कोई मुल्य नहीं होता, कलयुग में नाम ही जप लेना मोक्ष का द्वार खोल देता है। इंसान को विनम्र एवं संस्कारी बना देता है। एक बालक बड़ा ही जिद्दी स्वभाव का था, भगवान का नाम लेने में कोई दिलचस्पी नहीं। एक बार उसके पिताजी ने यज्ञ किया, वह बालक अपने को एक कमरे में बंद कर लिया, सभी पुजारी एवं अन्य विद्वान जन प्रयास करके थक गए, सभी असफल रहे। जब बालक स्वयं घर के बाहर निकला तो पुजारी जी ने कस कर उसकी कलाई पकड़ ली, असहनीय दर्द के कारण अनायास ही बालक के मुख से निकला- हे राम मुझे बचाओ, ये कैसी जबरदस्ती…….

……. पुजारी जी ने मुस्कुराते हुए कहा आज जो नाम लिए हो, इसकी कभी कीमत मत लगाना। कुछ समय बाद बालक की मृत्यु हो गई, यमराज ने भगवान चित्रगुप्त से पूछा… इसका पाप – पुण्य क्या है? प्रभु चित्रगुप्त ने कहा, यह कभी प्रभु का नाम नहीं लिया, किन्तु विपत्ति में एक बार राम का नाम लिया है। इसे क्या फल दिया जाए? बालक से ही पूछा गया,..वह मौन रहा। अब यमराज और प्रभु चित्रगुप्त व्याकुल हो कर उस बालक को ब्रह्मा जी के पास ले गए, ब्रह्मा जी भी कुछ नहीं बोले, फिर यमराज और भगवान चित्रगुप्त उस बालक को भगवान शिव के पास ले गए, वह भी कुछ नहीं बोले, फिर सभी विष्णु जी के पास गए… विष्णुजी मुस्करा दिए। एक बार नाम लेने का फल इस बालक को मिल गया, ब्रह्मा, विष्णु, महेश- तीनों का दर्शन हो गया।

झूठे आडंबर में न फंसकर केवल अपने इष्टदेव का नाम लेना ही सच्ची भक्ति है। पापकर्म से दूर रहना, किसी का अहित न करना, सदा दूसरों की मदद करना, नारी सम्मान करना, झूठ न बोलना, सत्कर्म करना ही सच्ची भक्ति है। ईर्ष्या, जलन, द्वेष से मुक्त रखना, विनम्र होना, संस्कार नहीं भूलना, पाखंड से दूर रहना ही मोक्ष का द्वार खोलता है। हर आदमी विद्वान नहीं हो सकता लेकिन विद्वान की संगत में रहकर, सत्य की राह पर चल कर, प्रभु को प्राप्त कर सकता है “मैं” से मुक्त होना ही मोक्ष है।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस Article के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह लेख संस्कार और विनम्रता के महत्व पर ध्यान केंद्रित करता है। संस्कार को विनम्रता की जननी माना गया है। बिना संस्कार के जीवन की तुलना मरुस्थल की होती है, जहां अहंकार ही उभरता है। अहंकार संस्कार भूलने के परिणाम से उत्पन्न होता है। यह लेख एक कहानी के माध्यम से इस विषय को प्रकट करता है, जिसमें नदी और समुद्र के बीच की बहस दर्शाई गई है। समुद्र ने विनम्रता की महत्वता को समझाया और अहंकार का त्याग किया। इससे पाठक को समझाया गया है कि विनम्रता और संस्कार की महत्वपूर्ण भूमिका है। लेखक ने भगवान के नाम लेने के महत्व को भी उजागर किया है, जो अहंकार को दूर करके विनम्रता को विकसित करता है। लेखक द्वारा बताए गए सिद्धांतों के माध्यम से पाठक को सच्ची भक्ति और मोक्ष की ओर प्रेरित किया जाता है।

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यह Article (संस्कार और विनम्रता।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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मेरे राम आए हैं।

Kmsraj51 की कलम से…..

Mere Ram Aae Hain | मेरे राम आए हैं।

He is the seventh and one of the most popular avatars of Vishnu. In Rama-centric traditions of Hinduism, he is considered the Supreme Being. Rama.

कण –कण में देखो,
भगवान श्री राम समाए हैं।
सबके मन देखो,
दर्शन के लिए ललचाए हैं।
बहुत वर्षों बाद देखो ,
आई है आज शुभ घड़ी,
देखो देखो अयोध्या में ,
आज फिर मेरे राम आए हैं।

गली गली सजी है,
आज फूलों से,
महक उठा है,
चमन – चमन,
दूर-दूर से दर्शन करने,
श्री राम लला के,
देखो आज ,
हम भी अयोध्या आए हैं।

जन-जन के मन में ,
राम बसते आए हैं।
सबके बिगड़े कामों को,
श्री राम बनाते आए हैं।
धन्य हो गया आज हर,
एक जनमानस,
देखो-देखो अयोध्या में,
आज फिर मेरे राम आए हैं।

दुल्हन जैसे सज गई है,
आज अयोध्या नगरी।
खुशियों से भरी हुई जैसे,
छलक गई है गगरी।
रोम रोम पुलकित ,
हो उठा है आज,
देखो – देखो अयोध्या में,
आज फिर मेरे राम आए हैं।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में कवि भगवान श्री राम के आगमन का जो दृश्य चित्रित कर रहे हैं, उसे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से भरा हुआ है। वे कह रहे हैं कि भगवान श्री राम सभी के हृदय में हैं और उनके दर्शन के लिए सभी लोग बेहद उत्कृष्ट भावनाओं से प्रेरित हैं। कवि आगे बढ़ते हैं और बताते हैं कि बहुत वर्षों के बाद फिर से एक शुभ घड़ी आई है, और आज अयोध्या में भगवान राम फिर से अपने भक्तों के बीच आए हैं। उनके आगमन से पूरा नगर सज गया है, हर गली-मोहल्ले में फूलों से भरा हुआ है। लोग दूर-दूर से आकर श्री राम लला के दर्शन करने के लिए उत्कृष्ट भावनाओं में लिपटे हैं और खुशी से भरे हुए हैं। कवि ने इस कविता के माध्यम से भक्ति, सांस्कृतिक समृद्धि, और समर्पण की भावनाएं सुंदरता से चित्रित की हैं, और व्यक्ति को अपने आत्मा की शुद्धि और धार्मिक अनुष्ठान की दिशा में प्रेरित करती हैं।

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यह कविता (मेरे राम आए हैं।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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आओ राम अब।

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Aao Ram Ab | आओ राम अब।

He is the seventh and one of the most popular avatars of Vishnu. In Rama-centric traditions of Hinduism, he is considered the Supreme Being. LORD Rama.

आओ राम अब लौट चले, फिर से अयोध्या धाम।
बहुतेरा हुआ अब छानी में, धारण करो निज स्थान॥

भविष्य भारत का तुम हो प्रभु , तुम ही हो वर्तमान।
अटकल यदा कदा आती रहेगी, संभालो अपना काम॥

भार धारा का हरो प्रभु तुम, बढ़ाओ भारत का मान।
अन्याय अनीति और अधर्म का, रहे न नामो निशान॥

भूली रीतियां और स्मृतियां, फिर से हो जाए उदयमान।
विश्व धारा पर परचम लहराए, कि हां लौट आए भगवा॥

धर्म ध्वजा धरती पर लहराए, धवल में हो प्रभु गुणगान।
स्वर्ग – पाताल में भेरी बजे, दसों दिशाओं में हो सम्मान॥

साकार हो वाल्मीकि – तुलसी का, राम राज्य भगवान।
संभालो सत्ता अब स्वयं प्रभु तुम, मिटा दो सब त्राहिमाम॥

आसुरी वृतियों के बाणासुर का, शत्रुघन से कराओ निदान।
अब बेवड़े के कहने पर मत लगना, रखना सीता का ध्यान॥

कहने वाले तो कहते हैं कई कुछ, तुम तो हो करुणा निधान।
मां के तप पर है हमे भरोसा, बेवड़ी बातों से न होना परेशान॥

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि इस कविता में भगवान राम के प्रति अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करते हैं और उनसे अब फिर से अयोध्या के धाम की ओर लौटने की प्रार्थना करते हैं। उन्हें पुनः से अपने आक्रमणकारियों और अन्य अधर्मी प्रवृत्तियों का सामना करना होगा और वे इस युग में भगवान के रूप में आगे बढ़कर भारत का मान बढ़ाने का कार्य सम्पन्न करें। कवि ने भविष्य में होने वाली चुनौतियों की चेतावनी भी दी है और भगवान राम को सम्भालने, धरती पर धरती का मान बढ़ाने, अन्याय और अनीति का खत्म करने के लिए प्रेरित किया है। कवि कहते हैं कि भूली रीतियों और स्मृतियों को फिर से जीवंत करना है और भगवा ध्वज को फिर से ऊँचा करना है। इसके साथ ही, भारत को उच्चतम मानवीय मूल्यों की प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनर्निर्मित करना है। कवि ने भगवान राम की कृपा और शक्ति की प्रार्थना की है ताकि वे स्वयं ही अपने भक्तों की सभी कठिनाइयों को दूर कर सकें और भारत को सुख, शांति और समृद्धि में ले जाएं।

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यह कविता (आओ राम अब।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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आए है श्री राम।

Kmsraj51 की कलम से…..

Aaye hai Shree Ram | आए है श्री राम।

आए है श्री राम।

He is the seventh and one of the most popular avatars of Vishnu. In Rama-centric traditions of Hinduism, he is considered the Supreme Being. Rama.

हे राम! आखिरकार,
तुम आ ही गए,
कितने युगों के बाद।

सफर त्रेतायुग से ,
कलयुग तक तुमने किया,
फिर भी हमने आस नही छोड़ी।

तुमने भी आने की,
अतृप्त नैनों की,
प्यास हमारी बुझाई।

हर युग में,
हर वर्ष की दिवाली पर,
बाट को संजोए रखा।

मन के हर दुख को,
श्री राम बन कर आओगे,
अपने आदर्शों से मिटाओगे।

आखिर हमे हमारे इंतजार का,
सुंदर फल सब्र का मिला,
जो कलयुग में फिर से,
अयोध्या तुम पधारे।

स्वागत में तेरे पलके बिछाए,
अयोध्या संग भारत भी,
दिवाली सा जगमगाए,
दीप रोशन हो गए।

हमारे श्री राम आए,
संग आदर्श भी लाए ,
ढोल, नगाड़े बजाओ।
श्री राम आए…
श्री राम आए…
श्री राम आए…।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवयित्री कहती हैं कि भगवान राम मन के हर दुःख को हर समय अपने साथी बनकर आते हैं और भक्तों को आदर्शों की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। अंत में, वे कहते हैं कि इंतजार का फल सब्र का होता है और कलयुग में फिर से भगवान राम अयोध्या में प्रकट होते हैं। उनके आगमन पर भक्तों ने आनंद में दीपों को जलाया, अयोध्या सजीवन हो गई और श्री राम के साथ भारत भी आनंदित हुआ। इसके साथ हे राम का स्वागत हुआ और सभी ने धूमधाम से उनका स्वागत किया।

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यह कविता (आए है श्री राम।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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कन्या पूजन।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kanya Poojan | कन्या पूजन।

Kanyā Pūjā or Kumārī Pūjā, is a Hindu holy ritual, carried out especially on the Ashtami (eighth day) and Navami (ninth day) of the Navaratri festival.

अधर्मी से भरा हुआ संसार,
दिखावा क्यूँ करता जालिम इंसान?
चाहे हो दुर्गा पूजा या हो कन्या पूजन,
नहीं मिले किसी अधर्मी को यह अधिकार।

होती है बलात्कार, अपहरण, हत्या,
बता दे कोई, क्या है बच्चियों का कसूर?
खिलती कलियों को मसल देना,
हैवानों, ये तेरा कैसा दस्तूर?

ग़र बेटा कुल दीपक,
तो बेटी बाप का गुरूर है।
आज न तो कल नाम रौशन कर,
इतिहास रचती जरूर है।
जो मन के रावण को मार सके,
राम वही बन पाएगा।

सीता को रावण के चंगुल से दूजा कौन बचाएगा?
नर में रावण बसता, शूर्पणखा नारी में,
आओ मन के रावण को, खुद ही मार भगाएं।
शूर्पणखा न बने कोई,
ऐसी अमृत वाणी बोलें और सिखाएं।

आ न, बान, शान की खातिर,
बच्चियों को मौत के घाट उतारते हैं।
इज्जत, ऊंच- नीच, धर्म के नाम पर,
ऑनर किलिंग करते हैं।
समाज भूखा है अधिकार का,
क्यूँ करते हैं लोग दिखावे का?
कन्या पूजन तो ढोंग और बहाना है।

रावण दहन तो हो गया,
दुर्योधन जांघों को ठोक रहा।
जब बेटियों को दहेज के खातिर जलाना है,
क्यूं करते कन्या पूजन, जिसे कल जलाना है?
दहेज के लोभी से पूछो,
यह हकीकत या अफ़साना है?

कन्या पूजन गर करते हो?
नारी का करो दिल से सम्मान।
वचन दो कन्याओं को,
कभी न होगा उनका अपमान।
राम, कृष्ण बनकर, पापियों से,
इस धरती को मुक्त कराना है।
सभी बेटियाँ रहे सुरक्षित,
सोचो, कन्याओं को कैसे बचाना है?

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

—————

  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में कन्या पूजन एक हिन्दू धार्मिक परंपरागत आचार है जो भारतीय समाज में प्रचलित है। इसे नवरात्रि के दौरान, विशेषकर नवमी तिथि को, कन्या-कुमारिकाओं की पूजा के रूप में किया जाता है। इस पर्व में कन्या-कुमारिकाओं की पूजा करने का उद्देश्य देवी दुर्गा की शक्ति को महसूस करना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना होता है। कविता में बेटियों के प्रति आत्मविश्वास बढ़ाने का आग्रह किया गया है और यह बताया गया है कि शक्तिशाली स्त्री समाज में सुरक्षित रह सकती है और बदलाव की ओर कदम बढ़ा सकती है। इसके अलावा, इसके माध्यम से समाज को अधर्म और अनैतिकता के खिलाफ उत्तरदाता बनाने की अपील की गई है।

—————

यह कविता (कन्या पूजन।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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