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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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TU NA HO NIRASH KABHI MAN SE .....

मत करो हतोत्साहित अपने शब्दों से -A Message To All- !!


kmsraj51 की कलम से …..
PEN KMSRAJ51-PEN



“मत करो हतोत्साहित अपने शब्दों से ……आने वाली नयी पीढ़ी को ,
वो भी करेंगे कुछ ऐसा एक दिन…. जिसे देखेगा ज़माना ….पकड़ती हुई नयी सीढ़ी को ॥”


future

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हम भाग्यशाली है ~ We are lucky !!


kmsraj51 की कलम से …..
luck

^^ हम भाग्यशाली है ^^

जीवन एक सफर हैं
जहां हैं पहाड़ भी नदी नाले भी
जहां फुलवारी भी है जंगल भी
जहां खुशी भी है गम भी
जहां दुख भी है सुख भी
जहां सूरज रोज उगता है
जंहा चंद्रमा भी उगता हैं
जहां हम कठपुतली है
क्या स्वार्थ था भगवान् का
क्या स्वार्थ था मम्मी का
क्या स्वार्थ था पापा का
जो हमें संसार में लाये
हमें पढ़ाने लिखाने में
कोई कसर नहीं छोड़ी
क्या स्वार्थ था भारत माँ का
जो हमें इस पावन मिटटी पर
जन्म लेने का मौक़ा दिया
जंहा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने
जन्म लेकर इस मिटटी को
सदा सदा के पावन कर गए
आगे हमें देखना जरुरी हैं
क्यों मैं निस्वार्थ हो नहीं सकता
फिर सोचेंगे कौन ज्यादा
या कौन कम स्वार्थी हैं !!!!!
——– प्रेमचंद मुरारका

I am grateful to Mr. “प्रेमचंद मुरारका”,for sharing this inspirational poetry.


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लड़की को मत समझो बेकार।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ लड़की को मत समझो बेकार। ϒ

poems on girls…

लड़की को मत समझो बेकार।
लड़की को मत समझो बेकार।
इसके बिना है अधूरा हर परिवार।।

बहन बनकर जिसने है …
हर भाई को प्यार से सम्भाला।

बेटी बनकर जिसने है भरा …
हर बाप के दिल में खुशियों का उजाला।।

फ्रेंड बनकर समझाया जिसने।
शादी कर के दूसरा घर चलाया भी इसने।।

लड़की न होती तो आज माँ न होती।
माँ न होती तो आज जननी कौन होती?

जीना बस लड़को का नही है अधिकार।
लड़की से ही है खुश हर परिवार।।

लड़की को मत समझो बेकार।
इसके बिना है अधूरा हर परिवार।।

Stop Living In The Past, Spend Time In Future.
“अतीत में रहना बंद करो, भविष्य में समय व्यतीत करें।”

_____

♥ मनहूस या लाड़ली।… जरूर पढ़े।

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Krishna Mohan Singh(KMS)
Editor in Chief, Founder & CEO
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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।~Kmsraj51

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cymt-kmsraj51

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought to life by. By doing this you Recognize hidden within the buraiya ensolar radiation and encourage good solar radiation to become themselves.

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAJ51

 

 

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Happiness !!


kmsraj51 की कलम से …..
happiness

खुशियां

मुझे थोड़ी सी खुशियां मिलती हैं
और मैं वापस आ जाता हूं काम पर
जबकि पानी की खुशियों से घास उभरने लगती है
और नदियां भरी हों, तो नाव चल पड़ती है दूर-दूर तक।

वहीं सुखद आवाजें तालियों की
प्रेरित करती है नर्तक को मोहक मुद्राओं में थिरकने को
और चांद सबसे खूबसूरत दिखाई देता है
करवां चौथ के दिन चुनरी से सजी सुहागनों को

GIRL-HAPPY

हर शादी पर घोड़े भी दूल्हे बन जाते हैं
और बड़ा भाई बेहद खुश होता है
छोटे को अपनी कमीज पहने नाचते देखकर

एक थके हुए आदमी को खुशी देती है उसकी पत्नी
घर के दरवाजे के बाहर इंतजार करती हुई
और वैसी हर चीज हमें खुशी देती है
जिसे स्वीकारते हैं हम प्यार से।


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Krishna Mohan Singh
Founder & CEO

About kmsraj51(KMS)

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सफलता के लिए ज़रूरी है Focus !!

kmsraj51 की कलम से …..
SUCCESSSuccess Key

यह पोस्ट गोपाल मिश्रा द्वारा प्रस्तुत है…..

सफलता के लिए ज़रूरी है Focus !

ऐसा क्यों होता है कि कई बार सब कुछ होते हुए भी हम वो नहीं कर पाते जिसको करने के बारे में हमने सोचा होता है ….दृढ निश्चय किया होता ……खुद को promise किया होता है कि हमें ये काम करना ही करना है …चाहे जो हो जाए ….!!!

“सब कुछ होते हुए” से मेरा मतलब है आपके पास पर्याप्त talent, पैसा , समय , या ऐसी कोई भी चीज जो उस काम को करने के लिए ज़रूरी है ; होने से है .

2009-10 में मैंने अपने दोस्तों के साथ मिल कर Bodhitree Consulting Group (BCG) की शुरुआत की थी , इसके अंतर्गत हमने कुछ Personality Development ओर Quizzing से related programs भी किये , जो काफी पसंद किये गए ,….पर within 6-7 months BCG को बंद करना पड़ा .

आज जब मैं इस बारे में सोचता हूँ कि आखिर BCG क्यों unsuccessful रहा …तो मुझे ऐसी कोई वजह नहीं दिखती जो इस ओर इशारा करे की हमारे team में Talent, Time , या पैसे की कमी थी ….हमारे अन्दर जोश भी काफी था ….पर फिर भी हम इस venture को successful नहीं बना पाए .

तो आखिर वजह क्या थी ?


Focus-to-Succeeed-150x150Focus On Your Goal


वजह थी FOCUS.

चूँकि BCG शुरू करने का initiative मेरा ही था इसलिए मुझे इसपर पूरी तरह से अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहिए था …..पर मैं उस वक़्त अपनी Tata Aig की जॉब में इतना अधिक involve था कि मैं BCG पर focus नहीं कर पाया …और सबकुछ होते हुए भी हम इसे सफल नहीं बना पाए .

यह एक शाश्वत सत्य है कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में हम जिस चीज पर ध्यान केन्द्रित करते हैं उस चीज में आश्चर्यजनक रूप से विस्तार होता है . इसलिए सफल होने के लिए हमें अपने चुने हुए लक्ष्य पर पूरी तरह से focussed होना होगा ; और तभी हम उसे हकीकत बनते देख पायेंगे .

Focus करने का क्या अर्थ है ?

एक idea लो . उस idea को अपनी life बना लो – उसके बारे में सोचो उसके सपने देखो , उस idea को जियो . अपने दिमाग , muscles, nerves, शरीर के हर हिस्से को उस आईडिया में डूब जाने दो , और बाकी सभी ideas को किनारे रख दो . यही सफल होने का तरीका है , यही वो तरीका है जिससे महान लोग निर्मित होते हैं .

Friends, उपरोक्त कथन Swami Vivekananda के हैं और मुझे लगता है कि Focus शब्द को शायद ही इससे अच्छे ढंग से समझा जा सकता है .

इस कथन में जहाँ स्वामी जी ने किसी एक आईडिया को अपनाना आवश्यक बताया है वहीँ दूसरी तरफ इस दौरान अन्य ideas को किनारे रखने के लिए भी कहा है. और सही मायने में यही है Focussed होना.

Focus करता क्या है ?

आपने बचपन में lens ज़रूर use किया होगा ….lens देखने में तो एक साधारण कांच का टुकड़ा लगता है …पर जब हम उसे कागज़ के किसी एक हिस्से पर focus करते हैं तो थोड़ी देर में वो कागज़ जलने लगता है …..

Focus चीजों को संभव बनाता है ….जब आप भी अपने goal पर focused रहते हैं तो मार्ग में आने वाली बाधाएं जल कर ख़ाक हो जाती हैं , आपका रास्ता साफ़ हो जाता है , और आप अपना goal achieve कर पाते हैं . Focus आपको सिर्फ यह नहीं बताता कि करना क्या है , यह भी बताता है कि क्या नहीं करना है .Focus आपको आपके goal से बांधता ही नहीं , आपको बेकार की चीजों में बंधने से बचाता भी है .

मैं हमेशा से सोचता था की मुझे कुछ बड़ा achieve करना है . मेरे लिए बड़े का अर्थ कभी lucrative jobs और अधिक पैसे कमाना नहीं रहा है, हालांकि मैं भी financially abundant होना चाहता हूँ … पर मेरे लिए जो काम बड़ा है वो है अधिक से अधिक लोगों का जीवन बेहतर बनाना . और कुछ हद्द तक मैं ऐसा अपनी NGO Kartavya के through कर पाया …पर वो मेरे लिए satisfactory नहीं था . इसीलिए जब मैंने AchhiKhabar.Com(AKC) की शुरआत की तभी मैंने ठान लिया था की अब मैं अपना पूरा focus इसी एक चीज पर रखूँगा , और तब तक रखूँगा जब तक मैं इसमें सफल नहीं हो जाता , इस दौरान मैं किसी और चीज पर ध्यान नहीं दूंगा …यहाँ तक की अपनी NGO की तरफ भी , और ना ही अपनी जॉब में exceptional होने की कोशिश करूँगा , अब मेरा एक ही लक्ष्य होगा AKC को अपनी पहली major Success Story बनाना . और आज इसे Worl’d Most Read Hindi Blog* बना कर मैं कुछ हद्द तक सफल भी हुआ हूँ , पर अभी भी मैं इसे major success नहीं कह सकता , इसमें कुछ और समय लगेगा. 🙂

क्या Focused रहना आसान है ?

नहीं , पिछले डेढ़ साल में AKC पर अपना focus बनाये रखने के लिए मैंने बहुत सी चीजों को ना कहा है ; including better job opportunities, foreign travel breaks, other promising income generating ideas, etc. Friends, अगर आपको कुछ World Class करना है तो आपको पूरी तरह से उस काम में डूबना होगा और तब तक लगे रहना होगा जब तक की आप अपने efforts को physical reality में तब्दील होते हुए ना देख लें .बीच में बहुत सारे distractions आयेंगे ; पर उस वक़्त आपको अपना focus नहीं loose करना है ….और ऐसा तभी संभव होगा जब आप अपने काम या idea में पूरी तरह से believe करते हैं . इस मुश्किल समय में जब mind में self doubt आने लगता है तब आपका belief system ही आपको distract होने से बचा सकता है . इसलिए काम शुरू करने से पहले ही आप उस पर अच्छी तरह से सोच विचार कर लीजिये , in fact आप अपने friends को आपको उस idea या plan को लेकर challenge करने के लिए भी कह सकते हैं . और अगर कोई भी तर्क -वितर्क आपकी आईडिया को लेकर आपके अन्दर doubt डालता है तो आप उस पर पुनः विचार कर सकते हैं . कुछ शुरू करने से पहले आपका अपने काम के successful होने पर believe करना बहुत ज़रूरी है आगे यही आपके FOCUS को उस पर बनाये रखने में मदद करेगा .

तो क्या focus करने का ये मतलब है कि हम और कोई काम करे ही नहीं ?

नहीं , आप और काम करते हुए भी अपना focus किसी एक चीज पर बनाये रख सकते हैं . For example: Mahendra Singh Dhoni Railways में TTE की job करते थे पर फिर भी उनका focus cricket था . आप रोज TV पर कितने ही singers और dancers को देखते हैं , वो भी और लोगों की तरह पढने जाते हैं या job करते हैं पर उनका focus तो singing या dancing होता है . इसी तरह मैंने आपके साथ World’s Youngest CEO , Suhas Gopinath की story share की थी , पढाई करते वक़्त भी उनका focus अपनी company establish करने का था ; और इसी एकाग्रता के दम पर उन्होंने छोटी सी उम्र में multi million dollar company खड़ी कर दी.

देखिये , जब तक आपके मन का काम आपको financially support नहीं करने लगता तब तक कुछ ना कुछ तो करते रहना होगा ….पर ध्यान देने की बात ये है कि आपको और चीजों को सिर्फ करना है …पर आपने अपने लिए जो Goal decide किया है उसे achieve करने के लिए आपको उसमे डूबना है , और यही आपकी success और failure के बीच का सबसे बड़ा differentiator होगा.

इतना याद रखिये कि अपने जीवन में एक normal focussed व्यक्ति एक talented unfocussed व्यक्ति से कहीं ज्यादा achieve कर सकता है . और सच पूछिए तो अगर हमने इस अनमोल जीवन को छोटी – मोटी चीजें करने में ही बिता दिया तो हमारे life की कोई value नहीं रहेगी …..हमारी अपनी नज़रों में भी ….इसलिए बड़े लक्ष्य बनाइये और उस पर focussed होकर उसे achieve करिए ….तभी जीने का असली मजा है .

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Post inspired by AKC. I am grateful to Mr. Gopal Mishra & AKC (http://www.achhikhabar.com/) Thanks a lot !!



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क्या बनना चाहेंगे आप : Fault Finder या Solution Seeker ?

kmsraj51 की कलम से …..
SOLUTION

यह पोस्ट गोपाल मिश्रा द्वारा प्रस्तुत है …..


बात बहुत पुरानी है , 13-14 साल पुरानी ….मैं Gorakhpur से Lucknow या शायद Lucknow से Gorakhpur जा रहा था …train मुसाफिरों से भरी हुई थी , गप लड़ाने वालों के ठहाकों और चाय -समोसा बेचने वालों के शोर के बीच एक तीखी आवाज़ कान के पर्दों को लगभग चीरते हुए मुझसे टकराई ….”सरकार चोर है. ”

और उसके बाद ऐसी लाइनों की झड़ी सी लग गयी ,क्या युवा , क्या अधेड़ और क्या बुजुर्ग हर एक व्यक्ति system को कोसने में लग गया …मैं वहीँ बैठा ये सब सुन रहा था , कुछ देर सुनता रहा , पर किसी को positively बात ना करते देख मुझसे रहा नहीं गया और मैं भी discussion में शामिल हो गया .

मैंने कहा , “ system तो हमी लोगों से बना है , अगर ये गड़बड़ है तो इसे ठीक भी हमी को करना होगा .”
“ हम कैसे ठीक कर सकते हैं , हमारे हाथ में क्या है , ये तो सरकार की जिम्मेदारी है …” ’ उधर से जवाब आया और ऐसे करते-करते बात बहस में बदल गयी …जहाँ तक मुझे याद है मेरी last lines कुछ ऐसे थीं ….”आप नहीं बदल सकते तो न सही मैं बदलूँगा system को …”

Friends, भारत में Fault Finders की कमी नहीं है …करोड़ों हैं …ज़रुरत तो Solution Seekers की है …किसी समस्या को देखकर उसे लगातार कोसना आपको part of problem बना देता है , and in fact ऐसा करके आप problem को बढाते ही हैं घटाते नहीं …so never be a part of problem try to be a part of solution.

क्या होता है जब हम Fault Finding में लगे रहते हैं ?

हम negative सोचते हैं , अपनी energy का गलत इस्तेमाल करते हैं , अपने life में और भी अधिक stress और tension attract करते हैं और सबसे बड़ी चीज हम fault को fault ही रहने देते हैं.

क्या होता है जब हम Solution Seeking में लगे रहते हैं ?

हम positive सोचते हैं , अपनी energy का सही इस्तेमाल करते हैं ,अपनी life में और भी अधिक happiness और self satisfaction attract करते हैं और सबसे बड़ी चीज हम fault को fault नहीं रहने देते उसका solution निकाल लेते हैं .

तो फिर क्या बनना पसंद करेंगे आप Fault Finder या Solution seeker?

फैसला आसान है , हर कोई यही कहेगा की वो solution seeker बनना पसंद करेगा . पर ये बोलने जितना आसान नहीं है . कोई बरसो से fault finding में लगा हो तो ये चीज उसकी habit में आ जाती है .

तो सबसे पहले आप ऐसा करिए की खुद को observe करिए , कहीं ये संक्रमण आपके अन्दर तक तो नहीं फ़ैल गया है , कहीं आप चाय में चीनी कम होने जैसी छोटी सी fault से लेकर चीनीयों की घुसपैठ जैसी गंभीर समस्या तक हर जगह fault ही तो नहीं find करते रहते ???

अब आपको इस संक्रमण को दूर करना होगा , आप इसे कई तरीकों से कर सकते हैं :

For instance जैसे ही आपको लगे कि आपने fault finding चालू कर दी है तो topic को नयी दिशा देते हुए उसके solution के बारे में बात करना शुरू कर दीजिये …. “ सरकार निठल्ली है , भला चीन कैसे हमारी सीमा में घुस सकता है …., हमें अपनी सीमा पर और सैनिक लगाने चाहिए और satellite से नज़र रखनी चाहिए …हमें International community में भी lobbying करनी चाहिए …”
आप मन ही मन ये निश्चय कर सकते हैं कि आज से आप हर एक चीज, हर एक situation चाहे वो कितनी बुरी ही क्यों न हो कुछ न कुछ अच्छा खोज कर दिखायेंगे…
अगर आदत कुछ ज्यादा ही लग गयी है तो आप अपनी फाल्ट फाइंडिंग को लिमिट भी कर सकते हैं…मैं हर रोज अधिक से अधिक तीन बातों पर negatively बात करूँगा..कोटा पूरा होते ही मैं सिर्फ और सिर्फ positive aspects पर फोकस करूँगा….and so on …
Well, हो सकता है कि “ fault finding” आपको आम सी बात लगे , और आप इसे seriously न लें पर यकीन जानिये अगर आप इससे suffer कर रहे हैं तो ये आपके personal development में एक बहुत बड़ा bottleneck है …क्योंकि जब आप अपने mind को fault find करने के लिए train कर देते हैं तो वो सिर्फ सरकार और देश की ही नहीं आपकी अपने लाइफ की भी fault गिनाता रहता है , आप ना जाने कब औरों को कोसते -कोसते खुद को भी कोसने लगते हैं …और इसी का बिगड़ा हुआ रूप depression में बदल जाता है ….मैं आपको डरा नहीं रहा , बस alert कर रहा हूँ , Fault Finder नहीं Solution Seeker बनिए …क्योंकि हर कोई यही चाहता है …आपका देश , आपकी company , आपकी family और आपका inner -self हर कोई यही चाहता है ….so don’t be a Fault Finder be a Solution Seeker.

All the best 🙂

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कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत ?

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत ? ϒ
morning yoga

Early to bed and early to rise makes a man healthy wealthy and wise

Hi friends,

हममें से ज्यादातर लोगों ने कभी ना कभी ये कोशिश ज़रूर की होगी कि रोज़ सुबह जल्दी उठा जाये. हो सकता है कि आपमें से कुछ लोग कामयाब भी हुए हों, पर अगर majority की बात की जाये तो वो ऐसी आदत डालने में सफल नहीं हो पाते. लेकिन आज जो article मैं आपसे share कर रहा हूँ इस पढने के बाद आपकी सफलता की probability निश्चित रूप से बढ़ जाएगी. यह article इस विषय पर दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़े गए लेखों में से एक का Hindi Translation है. इसे Mr. Steve Pavlina ने लिखा है . इसका title है “How to become an early riser.“. ये बताना चाहूँगा कि इन्ही के द्वारा लिखे गए लेख ”20 मिनट में जानें अपने जीवन का उद्देश्य ” का Hindi version इस ब्लॉग पर सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले लेखों में से एक है.

तो आइये जानें कि हम कैसे डाल सकते हैं सुबह जल्दी उठने की आदत.

कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत?

It is well to be up before daybreak, for such habits contribute to health, wealth, and wisdom.
-Aristotle

सूर्योदय होने से पहले उठाना अच्छा होता है , ऐसी आदत आपको स्वस्थ , समृद्ध और बुद्धिमान बनती है .

-अरस्तु

सुबह उठने वाले लोग पैदाईशी ऐसे होते हैं या ऐसा बना जा सकता है ? मेरे case में तो निश्चित रूप से मैं ऐसा बना हूँ . जब मैं बीस एक साल का था तब शायद ही कभी midnight से पहले बिस्तर पे जाता था . और मैं लगभग हमेशा ही देर से सोता था. और अक्सर मेरी गतिविधियाँ दोपहर से शुरू होती थीं .

पर कुछ समय बाद मैं सुबह उठने और successful होने के बीच के गहरे सम्बन्ध को ignore नहीं कर पाया , अपनी life में भी . उन गिने – चुने अवसरों पर जब भी मैं जल्दी उठा हूँ तो मैंने पाया है कि मेरी productivity लगभग हमेशा ही ज्यादा रही है , सिर्फ सुबह के वक़्त ही नहीं बल्कि पूरे दिन . और मुझे खुद अच्छा होने का एहसास भी हुआ है . तो एक proactive goal-achiever होने के नाते मैंने सुबह उठने की आदत डालने का फैसला किया . मैंने अपनी alarm clock 5 am पर सेट कर दी …

— और अगली सुबह मैं दोपहर से just पहले उठा .

ह्म्म्म…………

मैंने फिर कई बार कोशिश की , पर कुछ फायदा नहीं हुआ .मुझे लगा कि शायद मैं सुबह उठने वाली gene के बिना ही पैदा हुआ हूँ . जब भी मेरा alarm बजता तो मेरे मन में पहला ख्याल यह आता कि मैं उस शोर को बंद करूँ और सोने चला जून . कई सालों तक मैं ऐसा ही करता रहा , पर एक दिन मेरे हाथ एक sleep research लगी जिससे मैंने जाना कि मैं इस problem को गलत तरीके से solve कर रहा था . और जब मैंने ये ideas apply कीं तो मैं निरंतर सुबह उठने में कामयाब होने लगा .

गलत strategy के साथ सुबह उठने की आदत डालना मुश्किल है पर सही strategy के साथ ऐसा करना अपेक्षाकृत आसान है .

सबसे common गलत strategy है कि आप यह सोचते हैं कि यदि सुबह जल्दी उठाना है तो बिस्तर पर जल्दी जाना सही रहेगा . तो आप देखते हैं कि आप कितने घंटे की नीद लेते हैं , और फिर सभी चीजों को कुछ गहनते पहले खिसका देते हैं . यदि आप अभी midnight से सुबह 8 बजे तक सोते हैं तो अब आप decide करते हैं कि 10pm पर सोने जायेंगे और 6am पर उठेंगे . सुनने में तर्कसंगत लगता है पर ज्यदातर ये तरीका काम नहीं करता .

ऐसा लगता है कि sleep patterns को ले के दो विचारधाराएं हैं . एक है कि आप हर रोज़ एक ही वक़्त पर सोइए और उठिए . ये ऐसा है जैसे कि दोनों तरफ alarm clock लगी हो —आप हर रात उतने ही घंटे सोने का प्रयास करते हैं . आधुनिक समाज में जीने के लिए यह व्यवहारिक लगता है . हमें अपनी योजना का सही अनुमान होना चाहिए . और हमें पर्याप्त आराम भी चाहिए .

दूसरी विचारधारा कहती है कि आप अपने शरीर की ज़रुरत को सुनिए और जब आप थक जायें तो सोने चले जाइये और तब उठिए जब naturally आपकी नीद टूटे . इस approach की जड़ biology में है . हमारे शरीर को पता होना चाहिए कि हमें कितना rest चाहिए , इसलिए हमें उसे सुनना चाहिए .

Trial and error से मुझे पता चला कि दोनों ही तरीके पूरी तरह से उचित sleep patterns नहीं देते . अगर आप productivity की चिंता करते हैं तो दोनों ही तरीके गलत हैं . ये हैं उसके कारण :

यदि आप निश्चित समय पे सोते हैं तो कभी -कभी आप तब सोने चले जायेंगे जब आपको बहुत नीद ना आ रही हो . यदि आपको सोने में 5 मिनट से ज्यादा लग रहे हों तो इसका मतलब है कि आपको अभी ठीक से नीद नहीं आ रही है . आप बिस्तर पर लेटे -लेटे अपना समय बर्वाद कर रहे हैं ; सो नहीं रहे हैं . एक और problem ये है कि आप सोचते हैं कि आपको हर रोज़ उठने ही घंटे की नीद चाहिए , जो कि गलत है . आपको हर दिन एक बराबर नीद की ज़रुरत नहीं होती .

यदि आप उतना सोते हैं जितना की आपकी body आपसे कहती है तो शायद आपको जितना सोना चाहिए उससे ज्यादा सोएंगे —कई cases में कहीं ज्यादा , हर हफ्ते 10-15 घंटे ज्यदा ( एक पूरे waking-day के बराबर ) ज्यादातर लोग जो ऐसे सोते हैं वो हर दिन 8+ hrs सोते हैं , जो आमतौर पर बहुत ज्यादा है . और यदि आप रोज़ अलग -अलग समय पर उठ रहे हैं तो आप सुबह की planning सही से नहीं कर पाएंगे . और चूँकि कभी -कभार हमारी natural rhythm घडी से मैच नहीं करती तो आप पायंगे कि आपका सोने का समय आगे बढ़ता जा रहा है .

मेरे लिए दोनों approaches को combine करना कारगर साबित हुआ . ये बहुत आसान है , और बहुत से लोग जो सुबह जल्दी उठते हैं , वो बिना जाने ही ऐसा करते हैं , पर मेरे लिए तो यह एक mental-breakthrough था . Solution ये था की बिस्तर पर तब जाओ जब नीद आ रही हो ( तभी जब नीद आ रही हो ) और एक निश्चित समय पर उठो ( हफ्ते के सातों दिन ). इसलिए मैं हर रोज़ एक ही समय पर उठता हूँ ( in my case 5 am) पर मैं हर रोज़ अलग -अलग समय पर सोने जाता हूँ .

मैं बिस्तर पर तब जाता हूँ जब मुझे बहुत तेज नीद आ रही हो . मेरा sleepiness test ये है कि यदि मैं कोई किताब बिना ऊँघे एक -दो पन्ने नहीं पढ़ पाता हूँ तो इसका मतलब है कि मै बिस्तर पर जाने के लिए तैयार हूँ .ज्यादातर मैं बिस्तर पे जाने के 3 मिनट के अन्दर सो जाता हूँ . मैं आराम से लेटता हूँ और मुझे तुरंत ही नीद आ जाति है . कभी कभार मैं 9:30 पे सोने चला जाता हूँ और कई बार midnight तक जगा रहता हूँ . अधिकतर मैं 10 – 11 pm के बीच सोने चला जाता हूँ .अगर मुझे नीद नहीं आ रही होती तो मैं तब तक जगा रहता हूँ जब तक मेरी आँखें बंद ना होने लगे . इस वक़्त पढना एक बहुत ही अच्छी activity है , क्योंकि यह जानना आसान होता है कि अभी और पढना चाहिए या अब सो जाना चाहिए .

जब हर दिन मेरा alarm बजता है तो पहले मैं उसे बंद करता हूँ , कुछ सेकंड्स तक stretch करता हूँ , और उठ कर बैठ जाता हूँ . मैं इसके बारे में सोचता नहीं . मैंने ये सीखा है कि मैं उठने में जितनी देर लगाऊंगा ,उतना अधिक chance है कि मैं फिर से सोने की कोशिश करूँगा .इसलिए एक बार alarm बंद हो जाने के बाद मैं अपने दिमाग में ये वार्तालाप नहीं होने देता कि और देर तक सोने के क्या फायदे हैं . यदि मैं सोना भी चाहता हूँ , तो भी मैं तुरंत उठ जाता हूँ .

इस approach को कुछ दिन तक use करने के बाद मैंने पाया कि मेरे sleep patterns एक natural rhythm में सेट हो गए हैं . अगर किसी रात मुझे बहुत कम नीद मिलती तो अगली रात अपने आप ही मुझे जल्दी नीद आ जाती और मैं ज्यदा सोता . और जब मुझमे खूब energy होती और मैं थका नहीं होता तो कम सोता . मेरी बॉडी ने ये समझ लिया कि कब मुझे सोने के लिए भेजना है क्योंकि उसे पता है कि मैं हमेशा उसी वक़्त पे उठूँगा और उसमे कोई समझौता नहीं किया जा सकता .

इसका एक असर ये हुआ कि मैं अब हर रात लगभग 90 मिनट कम सोता ,पर मुझे feel होता कि मैंने पहले से ज्यादा रेस्ट लिया है . मैं अब जितनी देर तक बिस्तर पर होता करीब उतने देर तक सो रहा होता .

मैंने पढ़ा है कि ज्यादातर अनिद्रा रोगी वो लोग होते हैं जो नीद आने से पहले ही बिस्तर पर चले जाते हैं . यदि आपको नीद ना आ रही हो और ऐसा लगता हो कि आपको जल्द ही नीद नहीं आ जाएगी , तो उठ जाइये और कुछ देर तक जगे रहिये . नीद को तब तक रोकिये जब तक आपकी body ऐसे hormones ना छोड़ने लगे जिससे आपको नीद ना आ जाये.अगर आप तभी bed पे जाएँ जब आपको नीद आ रही हो और एक निश्चित समय उठें तो आप insomnia का इलाज कर पाएंगे .पहली रात आप देर तक जागेंगे , पर बिस्तर पर जाते ही आपको नीद आ जाएगी . .पहले दिन आप थके हुए हो सकते हैं क्योंकि आप देर से सोये और बहुत जल्दी उठ गए , पर आप पूरे दिन काम करते रहेंगे और दूसरी रात जल्दी सोने चले जायेंगे .कुछ दिनों बाद आप एक ऐसे pattern में settle हो जायेंगे जिसमे आप लगभग एक ही समय बिस्तर पर जायंगे और तुरंत सो जायंगे .

इसलिए यदि आप जल्दी उठाना चाहते हों तो ( या अपने sleep pattern को control करना चाहते हों ), तो इस try करिए : सोने तभी जाइये जब आपको सच -मुच बहुत नीद आ रही हो और हर दिन एक निश्चित समय पर उठिए .

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

∗ निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

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कब तक करते रहेंगे हेल्थ को अनदेखा ?


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Helalth-is-Wealth-150x150Do you really believe health is wealth?


Friends कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिसे हम जानते हैं कि हमें करना चाहिए पर फिर भी हम नहीं करते . उन्ही में से एक है . “अपनी सेहत पर ध्यान देना .”

हम कहते हैं “Health comes first” , पर हकीकत में हम इसे last preference देते हैं .
हम कहते हैं “Health is wealth”, पर जीते ऐसे हैं मानो “Wealth is health”

हममें से 95% लोग ऐसा ही करते हैं ; और मैं भी उन्ही 95% लोगों में हूँ या कह सकते हैं कि तीन दिन पहले तक था ..जो अपनी health पर ध्यान नहीं देते …. पर अब मैं 5% ध्यान देने वालों के group में jump करना चाहता हूँ . शुरुआत तीन दिन पहले की है , पिछले तीन दिनों से मैं सुबह उठ कर exercise कर रहा हूँ … इसे जारी रख पाऊँ ऐसी उम्मीद करता हूँ , और आज publicly इस बारे में बता कर शायद मैं इस दिशा में और भी मजबूती से बढ़ पाउँगा … let’s see!!!

और ऐसा नहीं है कि ये पहली बार शुरू किया है … पहले भी कई शुरुआत कर चुके हैं पर कुछ दिनों बाद आप जानते ही हैं क्या होता है …. और कैसे नहीं जानेंगे आपके साथ भी तो यही होता आया है … 🙂

पर मैं इस बार पीछे नहीं हटने वाला , अपनी daily routine में मैं exercise को ज़रूर include करूँगा और तब तक करूँगा जब तक ये brush करने या रोज नहाने जितना आम ना हो जाये …मेरी habit में ना आ जाये …

तो इसके लिए मैं क्या करने वाला हूँ ; इस बारे में बताता हूँ पर उससे पहले आइये समझने की कोशिश करते हैं कि हम अपनी health को ignore क्यों करते रहते हैं :

क्योंकि हमें प्यास लगने पे कुआँ खोदने की आदत है :

अधिकतर लोग बिजली बिल / टेलीफोन बिल कब जमा करते हैं ….last day पर … जब तक काम सर पर नही आ जाता हम उसे टालते रहते हैं … और यही health के साथ भी होता है ….. चूँकि अभी हमारी health normal है , इसलिए हमे इस और ध्यान देने की कोई urgency नहीं लगती , लगता है सब ठीक ही तो है , फिर अभी walk पे जाने की , jogging करने की क्या जल्दी है कुछ दिन बाद शुरू कर सकते हैं … but as we all know ऐसा हम कई सालों से सोचते आ रहे हैं, पर करते कभी नहीं .

हम सोचते हैं बुरी चीजें दूसरों के साथ ही हो सकती हैं :

Health के case में हम अपना बुरा कभी नहीं सोचते …. हाँ और चीजों में खूब बुरा सोच लेते हैं पर सेहत के मामले में हम अलग हैं …य़े जानते हुए भी की करोड़ों Indian diabetic हैं हम कभी नहीं सोचते की हमारी lazy lifestyle की वजह से हमें भी diabetes हो सकता है … हम इस ओर गलती से भी ध्यान नहीं देते कि अगर लाखों लोगों को young age में ही दिल की बीमारी हो रही है तो कल को हमें भी हो सकती है …मानो हम man नहीं superman हों !!!

हम सोचते हैं कि बाद में भी ध्यान दे दिया तो काम चल जायेगा :

पर ऐसा नहीं है , पहले तो ये “बाद ” जल्दी आता नहीं है , और दूसरा जिस वक़्त हम health को postpone करते जाते हैं उसी वक़्त हम bad health या बीमारी को advance करते जाते हैं . यानि हम खुद को समझा तो लेते हैं कि बाद में cover कर लेंगे पर जिस तरह school में शुरू से पढाई से जी चुराने वाला student कभी अंत में पढ़ कर 100% score नहीं कर पाटा , उसी तरह कोई इंसान सालों तक ignore करने के बाद अंत में ध्यान देने पर 100% health नहीं पा सकता , इसलिए हमे आज से ही इस direction में ध्यान देना चाहिए .

क्योंकि हमारा environment ऐसा है :

अगर आप सुबह walk पर जाएं तो आपको ज्यादातर old age people, या मोटापे से परेशान लोग ही दिखेंगे …ये वो हैं जिन्हे प्यास लग चुकी है , उनकी life में health issues आ चुके हैं …पर जो young हैं …अभी healthy हैं वो नदारद हैं … हमारा कोई दोस्त jogging पे नहीं जाता , gym के दर्शन नहीं करता इसलिए अगर हम नहीं करते तो क्या बुरा करते हैं ….friends, health पर ध्यान न देना दरअसल एक बीमारी है पर चूँकि 95% लोग बीमार हैं इसलिए इसे ही normal life मान लिया गया है …. पर as you know सच्चाई कुछ और ही है !

Well, अब मैं अपना plan बताता हूँ :

बड़ा simple है ; मैंने decide किया है कि मैं सुबह fresh होने के बाद का 30 minute exercise को दूंगा .

फिर चाहे मैं 6 बजे उठूँ या 9 बजे …ज़ब भी उठूंगा 30 minute health को दूंगा …. हम ब्रश के साथ भी तो यही करते हैं , isn’t it? क्या कोई ऐसा भी है जो देर से उठने पर brush नहीं करता …. सभी करते हैं … जब उठते हैं तब करते हैं … और वही मैं exercise के साथ करूँगा ….

इसमें क्या challenges आ सकते हैं ?

इससे मैं office के लिए late हो सकता हूँ …. मेरी आज plan की गयी blog post कल के लिए postpone हो सकती है …अखबार पढ़ने में gap हो सकता है …but let it be… हम हमेशा कहते हैं सेहत से बढ़कर कुछ नहीं , सेहत है तो दौलत है , and all that gyan … पर दिक्कत ये है कि सिर्फ कहते हैं practically कभी apply नहीं करते , इस बार मैं करने जा रहा हूँ …. मैं अपने आसपास मौजूद बीमार लोगों को देख रहा हूँ और मैंने इस बार अंदर से महसूस किया है कि “healthy” रहने से बड़ा और कोई asset हो ही नहीं सकता …

एक छोटी सी कहानी सुनाता हूँ …

एक सेठ था ,वो दिन- रात business बढ़ाने में लगा रहता था , उसका goal था कि उसे शहर का सबसे अमीर आदमी बनना है . धीरे -धीरे उसने ये goal पूरा भी कर लिया , इस कामयाबी की ख़ुशी में उसने एक शानदार घर बनवाया। गृह प्रवेश के दिन उसने एक बहुत बड़ी पार्टी दी और जब सारे मेहमान चले गए तो वो अपने कमरे में सोने के लिए गया .

वो जैसे ही बिस्तर पर लेटा एक आवाज़ उसके कानो में पड़ी ,

” मैं तुम्हारी आत्मा हूँ … और अब मैं तुम्हारा शरीर छोड़ कर जा रही हूँ !!”

सेठ सकते में आ गया और बोला , ” अरे तुम ऐस नहीं कर सकती, तुम चली जाओगी तो मैं तो मर जाऊँगा …देखो मैंने कितनी बड़ी कामयाबी हांसिल की है… तुम्हारे लिए करोड़ों रूपये का घर भी बनवाया है … इतनी सुख -सुविधाएं तुम्हे कहीं नहीं मिलेंगी … यहाँ से मत जाओ …”

आत्मा बोली , ” मेरा घर तो तुम्हारा शरीर था …. पर करोड़ों का घर बनवाने के चक्कर में तुमने इस अमूल्य शरीर का ही नाश कर डाला ,…तुम ठीक से चल नहीं पाते …ऱात को तुम्हे नींद नहीं आती … तुम्हारा दिल भी कमजोर हो चुका है …. तनाव की वजह से ना जाने और कितनी बीमारियों का घर बन चुका है तुम्हारा शरीर …… तुम ही बताओ क्या तुम ऐसे किसी घर में रहना चाहोगे जहाँ चारो तरफ गंदगी हो … जिसकी छत टपक रही हो …. जिसके खिड़की -दरवाजे टूटे हों …., नहीं चाहोगे ना !!! …. इसलिए मैं भी ऐसी जगह नहीं रह सकती ….”

और ऐसा कहते हुए आत्मा सेठ के शरीर से निकल गयी …और सेठ की मृत्यु हो गयी .

Friends, ये कहानी बहुत से लोगों की हकीकत है … मैं ये नहीं कहता की आप अपने goals pursue मत करिये , पर मैं ये ज़रूर कहूंगा कि जो भी करिये Health को सबसे ऊपर रखिये …. नहीं तो सेठ की तरह goal achieve कर लेने के बाद भी अपनी success को enjoy नहीं कर पाएंगे .

अंत में Swami Vivekananda के एक quote से अपनी बात ख़तम करना चाहूंगा …

“You will be nearer to heaven through football than through the study of the Gita.
तुम गीता का अध्ययन करने के बजाये फ़ुटबाल के जरिये स्वर्ग के ज्यादा निकट होगे .”

… गीता पढ़िए …. पर फ़ुटबाल खेलना मत भूलिए …. अपने goal के पीछे दौड़िये पर अपनी health को पीछे मत छोड़िये ….

All the best! 🙂

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7 Habits जो बना सकती हैं आपको Super Successful !!


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7-Habits-of-Highly-Effective-People-Hindi7 Habits of Highly Effective People

7 Habits जो बना सकतीं हैं आपको Super Successful

आपकी ज़िन्दगी बस यूँ ही नहीं घट जाती. चाहे आप जानते हों या नहीं , ये आपही के द्वारा डिजाईन की जाती है. आखिरकार आप ही अपने विकल्प चुनते हैं. आप खुशियाँ चुनते हैं . आप दुःख चुनते हैं.आप निश्चितता चुनते हैं. आप अपनी अनिश्चितता चुनते हैं.आप अपनी सफलता चुनते हैं. आप अपनी असफलता चुनते हैं.आप साहस चुनते हैं.आप डर चुनते हैं.इतना याद रखिये कि हर एक क्षण, हर एक परिस्थिति आपको एक नया विकल्प देती है.और ऐसे में आपके पास हमेशा ये opportunity होती है कि आप चीजों को अलग तेरीके से करें और अपने लिए और positive result produce करें.

Habit 1 : Be Proactive / प्रोएक्टिव बनिए

Proactive होने का मतलब है कि अपनी life के लिए खुद ज़िम्मेदार बनना. आप हर चीज केलिए अपने parents या grandparents को नही blame कर सकते . Proactive लोग इस बात को समझते हैं कि वो “response-able” हैं . वो अपने आचरण के लिए जेनेटिक्स , परिस्थितियों, या परिवेष को दोष नहीं देते हैं.उन्हें पता होताहै कि वो अपना व्यवहार खुद चुनते हैं. वहीँ दूसरी तरफ जो लोग reactive होते हैं वो ज्यादातर अपने भौतिक वातावरण से प्रभावितहोते हैं. वो अपने behaviour के लिए बाहरी चीजों को दोष देते हैं. अगर मौसम अच्छा है, तोउन्हें अच्छा लगता है.और अगर नहीं है तो यह उनके attitude और performance को प्रभावित करता है, और वो मौसम को दोष देते हैं. सभी बाहरी ताकतें एक उत्तेजना की तरह काम करती हैं , जिन पर हम react करते हैं. इसी उत्तेजना और आप उसपर जो प्रतिक्रिया करते हैं के बीच में आपकी सबसे बड़ी ताकत छिपी होती है- और वो होती है इस बात कि स्वतंत्रता कि आप अपनी प्रतिक्रिया का चयन स्वयम कर सकते हैं. एक बेहद महत्त्वपूर्ण चीज होती है कि आप इस बात का चुनाव कर सकते हैं कि आप क्या बोलते हैं.आप जो भाषा प्रयोग करते हैं वो इस बात को indicate करती है कि आप खुद को कैसे देखते हैं.एक proactive व्यक्ति proactive भाषा का प्रयोग करता है.–मैं कर सकता हूँ, मैं करूँगा, etc. एक reactive व्यक्ति reactive भाषा का प्रयोग करता है- मैं नहीं कर सकता, काश अगर ऐसा होता , etc. Reactive लोग सोचते हैं कि वो जो कहते और करते हैं उसके लिए वो खुद जिम्मेदार नहीं हैं-उनके पास कोई विकल्प नहीं है.
ऐसी परिस्थितियां जिन पर बिलकुल भी नहीं या थोड़ा-बहुत control किया जा सकता है , उसपर react या चिंता करने के बजाये proactive लोग अपना time और energy ऐसी चीजों में लगाते हैं जिनको वो control कर सकें. हमारे सामने जो भी समस्याएं ,चुनतिया या अवसर होते हैं उन्हें हम दो क्षेत्रों में बाँट सकते हैं:


Circles

1)Circle of Concern ( चिंता का क्षेत्र )

2)Circle of Influence. (प्रभाव का क्षेत्र )

Proactive लोग अपना प्रयत्न Circle of Influence पर केन्द्रित करते हैं.वो ऐसी चीजों पर काम करते हैं जिनके बारे में वो कुछ कर सकते हैं: स्वास्थ्य , बच्चे , कार्य क्षेत्र कि समस्याएं. Reactive लोग अपना प्रयत्न Circle of Concern पर केन्द्रित करते हैं: देश पर ऋण , आतंकवाद, मौसम. इसबात कि जानकारी होना कि हम अपनी energy किन चीजों में खर्च करते हैं, Proactive बनने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

Habit 2: Begin with the End in Mind अंत को ध्यान में रख कर शुरुआत करें.

तो , आप बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं? शायद यह सवाल थोड़ा अटपटा लगे,लेकिन आप इसके बारे में एक क्षण के लिए सोचिये. क्या आप अभी वो हैं जो आप बनना चाहते थे, जिसका सपना आपने देखा था, क्या आप वो कर रहे हैं जो आप हमेशा से करना चाहते थे. इमानदारी से सोचिये. कई बार ऐसा होता है कि लोग खुद को ऐसी जीत हांसिल करते हुए देखते हैं जो दरअसल खोखली होती हैं–ऐसी सफलता, जिसके बदले में उससे कहीं बड़ी चीजों को गवाना पड़ा. यदि आपकी सीढ़ी सही दीवार पर नहीं लगी है तो आप जो भी कदम उठाते हैं वो आपको गलत जगह पर लेकर जाता है.

Habit 2 आपके imagination या कल्पना पर आधारित है– imagination , यानि आपकी वो क्षमता जो आपको अपने दिमाग में उन चीजों को दिखा सके जो आप अभी अपनी आँखों से नहीं देख सकते. यह इस सिधांत पर आधारित है कि हर एक चीज का निर्माण दो बार होता है. पहला mental creation, और दूसरा physical creation. जिस तरह blue-print तैयार होने केबाद मकान बनता है , उसी प्रकार mental creation होने के बाद ही physical creation होती है.अगर आप खुद visualize नहीं करते हैं कि आप क्या हैं और क्या बनना चाहते हैं तो आप, आपकी life कैसी होगी इस बात का फैसला औरों पर और परिस्थितियों पर छोड़ देते हैं. Habit 2 इस बारे में है कि आप किस तरह से अपनी विशेषता को पहचानते हैं,और फिर अपनी personal, moral और ethical guidelines के अन्दर खुद को खुश रख सकते और पूर्ण कर सकते हैं.अंत को ध्यान में रख कर आरम्भ करने का अर्थ है, हर दिन ,काम या project की शुरआत एक clear vision के साथ करना कि हमारी क्या दिशा और क्या मंजिल होनी चाहिए, और फिर proactively उस काम को पूर्ण करने में लग जाना.
Habit 2 को practice मेंलाने का सबसे अच्छा तरीका है कि अपना खुद का एक Personal Mission Statement बनाना. इसका फोकस इस बात पर होगा कि आप क्या बनना चाहते हैं और क्या करना चाहते हैं.ये success के लिए की गयी आपकी planning है.ये इस बात की पुष्टिकरता है कि आप कौन हैं,आपके goals को focus में रखता है, और आपके ideas को इस दुनिया में लाता है. आपका Mission Statement आपको अपनी ज़िन्दगी का leader बनाता है. आप अपना भाग्य खुद बनाते हैं, और जो सपने आपने देखे हैं उन्हें साकार करते हैं.


Habit 3 : Put First Things First प्राथमिक चीजों को वरीयता दें

एक balanced life जीने के लिए, आपको इस बात को समझना होगा कि आप इस ज़िन्दगीमें हर एक चीज नहीं कर सकते. खुद को अपनी क्षमता से अधिक कामो में व्यस्त करने की ज़रुरत नहीं है. जब ज़रूरी हो तो “ना” कहने में मत हिचकिये, और फिर अपनी important priorities पर focus कीजिये.
Habit 1 कहतीहै कि , ” आप in charge हैं .आप creator हैं”. Proactive होना आपकी अपनी choice है. Habit 2 पहले दिमाग में चीजों को visualize करने के बारे में है. अंत को ध्यान में रख कर शुरआत करना vision से सम्बंधित है. Habit 3 दूसरी creation , यानि physical creation के बारे में है. इस habit में Habit 1 और Habit 2 का समागम होता है. और यह हर समय हर क्षण होता है. यह Time Management से related कई प्रश्नों को deal करता है.

लेकिन यह सिर्फ इतना ही नहीं है. Habit 3 life management के बारे में भी है—आपका purpose, values, roles ,और priorities. “प्राथमिक चीजें” क्या हैं? प्राथमिक चीजें वह हैं , जिसको आप व्यक्तिगत रूप से सबसे मूल्यवान मानते हों. यदि आप प्राथमिक कार्यों को तरजीह देने का मतलब है कि , आप अपना समय , अपनी उर्जा Habit 2 में अपने द्वारा set की गयीं priorities पर लगा रहे हैं.

Habit 4: Think Win-Win हमेशा जीत के बारे में सोचें

Think Win-Win अच्छा होने के बारे में नहीं है, ना ही यह कोईshort-cut है. यहcharacter पर आधारित एक कोड है जो आपको बाकी लोगों सेinteract और सहयोग करने के लिए है.
हममे से ज्यादातर लोग अपना मुल्यांकन दूसरों सेcomparison और competition के आधार पर करते हैं. हम अपनी सफलता दूसरों की असफलता में देखते हैं—यानि अगर मैं जीता, तो तुम हारे, तुम जीते तो मैं हारा. इस तरह life एकzero-sum game बन जाती है. मानो एक ही रोटी हो, और अगर दूसरा बड़ा हिस्सा ले लेता है तो मुझे कम मिलेगा, और मेरी कोशिश होगी कि दूसरा अधिक ना पाए. हम सभी येgame खेलते हैं, लेकिन आप ही सोचिये कि इसमें कितना मज़ा है?
Win -Win ज़िन्दगी कोco-operation की तरह देखती है, competition कीतरह नहीं.Win-Win दिल और दिमाग की ऐसी स्थिति है जो हमेंलगातार सभी काहित सोचने के लिए प्रेरित करती है.Win-Win का अर्थ है ऐसे समझौते और समाधान जो सभी के लिए लाभप्रद और संतोषजनक हैं. इसमें सभी खाने को मिलती है, और वो काफी अच्छाtaste करती है.
एक व्यक्ति या संगठन जोWin-Win attitude के साथ समस्याओं को हल करने की कोशिश करता है उसके अन्दर तीन मुख्य बातें होती हैं:
Integrity / वफादारी :अपनेvalues, commitments औरfeelings के साथ समझौता ना करना.
Maturity / परिपक्वता : अपनेideas औरfeelings को साहस के साथ दूसरों के सामने रखना और दूसरों के विचारों और भावनाओं की भी कद्र करना.
Abundance Mentality / प्रचुरता की मानसिकता :इस बात में यकीन रखना की सभी के लिए बहुत कुछ है.
बहुत लोग either/or केterms में सोचते हैं: या तो आप अच्छे हैं या आप सख्त हैं. Win-Win में दोनों की आवश्यकता होती है. यह साहस और सूझबूझ के बीचbalance करने जैसा है.Win-Win को अपनाने के लिए आपको सिर्फ सहानभूतिपूर्ण ही नहीं बल्कि आत्मविश्वाश से लबरेज़ भी होना होगा.आपको सिर्फ विचारशील और संवेदनशील ही नहीं बल्कि बहादुर भी होना होगा.ऐसा करनाकि -courage और consideration मेंbalance स्थापित हो, यहीreal maturity है, और Win-Win के लिए बेहद ज़रूरी है.

Habit 5: Seek First to Understand, Then to Be Understood / पहले दूसरों को समझो फिर अपनी बात समझाओ.

Communication लाइफ की सबसे ज़रूरी skill है. आप अपने कई साल पढना-लिखना और बोलना सीखने में लगा देते हैं. लेकिन सुनने का क्या है? आपको ऐसी कौनसी training मिली है, जो आपको दूसरों को सुनना सीखाती है,ताकि आप सामने वाले को सच-मुच अच्छे से समझ सकें? शायद कोई नहीं? क्यों?
अगर आप ज्यादातर लोगों की तरह हैं तो शायद आप भी पहले खुद आपनी बात समझाना चाहते होंगे. और ऐसा करने में आप दुसरे व्यक्तिको पूरी तरह ignore कर देते होंगे , ऐसा दिखाते होंगे कि आप सुन रहे हैं,पर दरअसल आप बस शब्दों को सुनते हैं परउनके असली मतलब को पूरी तरह से miss कर जाते हैं.

सोचिये ऐसा क्यों होता है? क्योंकि ज्यादातर लोग इस intention के साथ सुनते हैं कि उन्हें reply करना है, समझना नहीं है.आप अन्दर ही अन्दर खुद को सुनते हैं और तैयारी करते हैं कि आपको आगे क्या कहना है,क्या सवाल पूछने हैं, etc. आप जो कुछ भी सुनते हैं वो आपके life-experiences से छनकर आप तक पहुचता है.
आप जो सुनते हैं उसे अपनी आत्मकथा से तुलना कर देखते हैं कि ये सही है या गलत. और इस वजह से आप दुसरे की बात ख़तम होने से पहले ही अपने मन में एक धारणा बना लेते हैं कि अगला क्या कहना चाहता है. क्या ये वाक्य कुछ सुने-सुने से लगते है?
“अरे, मुझे पता है कि तुम कैसा feel कर रहे हो.मुझे भी ऐसा ही लगा था.” “मेरे साथ भी भी ऐसा ही हुआ था.” ” मैं तुम्हे बताता हूँ कि ऐसे वक़्तमें मैंने क्या किया था.”
चूँकि आप अपने जीवन के अनुभवों के हिसाब से ही दूसरों को सुनते हैं. आप इन चारों में से किसी एक तरीके से ज़वाब देते हैं:
Evaluating/ मूल्यांकन:पहले आप judge करते हैं उसके बाद सहमत या असहमत होते हैं.
Probing / जाँच :आप अपने हिसाब से सवाल-जवाब करते हैं.
Advising/ सलाह :आप सलाह देते हैं और उपाय सुझाते हैं.
Interpreting/ व्याख्या :आप दूसरों के मकसद और व्यवहार को अपने experience के हिसाब से analyze करते हैं.
शायदआप सोच रहे हों कि, अपनेexperience के हिसाब से किसी सेrelate करने में बुराई क्याहै?कुछsituations में ऐसा करना उचित हो सकत है, जैसे कि जब कोई आपसे आपके अनुभवों के आधार पर कुछ बतानेके लिए कहे, जब आप दोनों के बीच एकtrust कीrelationship हो. पर हमेशा ऐसा करना उचित नहीं है.

Habit 6: Synergize / ताल-मेल बैठाना

सरल शब्दों में समझें तो , “दो दिमाग एक से बेहतर हैं ” Synergize करने का अर्थ है रचनात्मक सहयोग देना. यह team-work है. यह खुले दिमाग से पुरानी समस्याओं के नए निदान ढूँढना है.

पर ये युहीं बस अपने आप ही नहीं हो जाता. यह एक process है , और उसी process से, लोग अपनेexperience और expertise को उपयोग में ला पाते हैं .अकेले की अपेक्षा वो एक साथ कहीं अच्छाresult दे पाते हैं. Synergy से हम एक साथ ऐसा बहुत कुछ खोज पाते हैं जो हमारे अकेले खोजने पर शायद ही कभी मिलता. ये वो idea है जिसमे the whole is greater than the sum of the parts. One plus one equals three, or six, or sixty–या उससे भी ज्यादा.

जब लोग आपस में इमानदारी से interact करने लगते हैं, और एक दुसरे से प्रभावित होने के लिए खुले होते हैं , तब उन्हें नयी जानकारीयाँ मिलना प्रारम्भ हो जाता है. आपस में मतभेद नए तरीकों के आविष्कार की क्षमता कई गुना बढ़ा देते हैं.

मतभेदों को महत्त्व देना synergy का मूल है. क्या आप सच-मुच लोगों के बीच जो mental, emotional, और psychological differences होते हैं, उन्हें महत्त्व देते हैं? या फिर आप ये चाहते हैं कि सभी लोग आपकी बात मान जायें ताकि आप आसानी से आगे बढ़ सकें? कई लोग एकरूपता को एकता समझ लेते हैं. आपसी मतभेदों को weakness नहीं strength के रूप में देखना चाहिए. वो हमारे जीवन में उत्साह भरते हैं.

Habit 7: Sharpen the Saw कुल्हाड़ी को तेज करें

Sharpen the Saw का मतलब है अपने सबसे बड़ी सम्पत्ति यानि खुद को सुरक्षित रखना. इसका अर्थ है अपने लिए एक प्रोग्राम डिजाईन करना जो आपके जीवन के चार क्षेत्रों physical, social/emotional, mental, and spiritual में आपका नवीनीकरण करे. नीचे ऐसी कुछ activities केexample दिए गए हैं:

 Physical / शारीरिक :अच्छा खाना, व्यायाम करना, आराम करना
 Social/Emotional /:सामजिक/भावनात्मक :औरों के ससाथ सामाजिक और अर्थपूर्ण सम्बन्ध बनाना.
 Mental / मानसिक :पढना-लिखना, सीखना , सीखना.
 Spiritual / आध्यात्मिक :प्रकृति के साथ समय बीताना , ध्यान करना, सेवा करना.

आप जैसे -जैसे हर एक क्षेत्र में खुद को सुधारेंगे, आप अपने जीवन में प्रगति और बदलाव लायेंगे.Sharpen the Saw आपको fresh रखता है ताकि आप बाकी की six habits अच्छे से practice कर सकें. ऐसा करने से आप challenges face करने की अपनी क्षमता को बढ़ा लेते हैं. बिना ऐसा किये आपका शरीर कमजोर पड़ जाता है , मस्तिष्क बुद्धिरहित हो जाता है, भावनाए ठंडी पड़ जाती हैं,स्वाभाव असंवेदनशील हो जाता है,और इंसान स्वार्थी हो जाता है. और यह एक अच्छी तस्वीर नहीं है, क्यों?

आप अच्छा feel करें , ऐसा अपने आप नहीं होता. एक balanced life जीने काअर्थ है खुद कोrenew करने के लिए ज़रूरी वक़्त निकालना.ये सब आपके ऊपरहै .आप खुद को आराम करकेrenew कर सकते हैं. या हर काम अत्यधिक करके खुद को जला सकते हैं . आप खुद को mentallyऔर spiritually प्यार कर सकते हैं , या फिर अपने well-being से बेखबर यूँ ही अपनी ज़िन्दगी बिता सकते हैं.आप अपने अन्दर जीवंत उर्जा का अनुभव कर सकते हैं या फिर टाल-मटोल कर अच्छे स्वास्थ्य और व्यायाम के फायदों को खो सकते हैं.

आप खुद को पुनर्जीवित कर सकते हैं और एक नए दिन का स्वागत शांति और सद्भावके साथ कर सकते हैं.या फिर आप उदासी के साथ उठकर दिन को गुजरते देख सकतेहैं. बस इतना याद रखिये कि हर दिन आपको खुद को renew करने का एक नया अवसरदेता है, अवसर देता है खुद को recharge करने का. बस ज़रुरत है Desire (इच्छा),Knowledge( ज्ञान)और Skills(कौशल) की.

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Post inspired by AKC. I am grateful to Mr. Gopal Mishra & AKC (http://www.achhikhabar.com/) Thanks a lot !!


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कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ~ सकारात्मक विचारों का समूह ~ Great Thoughts of KMSRAJ51 in Hindi !!

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** कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ~ सकारात्मक विचारों का समूह ….. **

:: Imp. Note :: ** ~ गहराई से सोचना प्रत्येक शब्द ~ **


** मेरे(kmsraj51) कुछ व्यक्तिगत सकारात्मक विचारों का समूह …..

** अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखना …..

** हमेशा मन को शांत रखना …..

** दिमाग को हमेशा अनुसंधान में लगाये रखना …..

** हमेशा (सदैव) अन्य लोगों से अपनी सोच को अलग रखना …..

** हमेशा अपनी मन की कमजोरी को दूर रखना …..

** हमेशा आंतरिक आत्मा की (आत्मा के अंदर की आवाज) आवाज सुनो …..

** हमेशा ईस सूत्र का उपयोग करें …..

….. कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश = सफलता

** आपके जीवन में हमेशा खुशी मिलेगी …..

** आपका कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ….. मैं एक शुद्ध आत्मा हूँ!! …..

** ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ओम शांति!! ~ ओम साईराम!!

** ~ kmsraj51 – (my personal picture/photo) ~ **

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