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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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poem in hindi

मेरा ईश्वर से विश्वास उठने ही लगा था कि।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मेरा ईश्वर से विश्वास उठने ही लगा था कि। ♦

बचपन से सुनती आयी हूँ कि –
पत्ता भी नहीं हिलता ‘उसकी ‘ ( प्रभु की )
मर्ज़ी के बिना ….
फिर भी इंसान रह नहीं पाता अपनी
ख़ुदगर्ज़ी के बिना…
वर्तमान दौर में ये अटूट विश्वास
हिलने लगा था।

‘रब’ है ही नहीं, ऐसा ही लगने लगा था।
सारे मीडिया यंत्र दहाड़ रहे हैं,
मृत्यु के मंजर पर गला फाड़ रहे हैं।

अब लोग ईश्वर की मर्ज़ी से
या आयु पूरी होने पर नहीं मरते।
ईश्वर उनके प्राण नहीं हरते।
अब तो ख़ुदा कोई नया आ गया है,
जिसे विप्लव मौत का बहुत भा गया है।

ये भी सुना था और पढ़ा था बचपन से:
‘हर सौ वर्ष में एक महामारी फैलती है धरा पर-
जो निगल लेती है असंख्य ज़िंदगियाँ’।
और वसुन्धरा का हरापन –
जैसे चेचक, हैज़ा, टीबी इत्यादि।

कुछ अतीत की हैं महामारियाँ,
सभी प्राणघातक बीमारियाँ –
असंख्य जानें चली जातीं थीं।
फिर टीके बनते थे,
जो बच जाते थे उनको लगते थे।

फिर से वही दौर आ गया है-
फ़र्क़ ये है कि पहले टी वी नाम का
मूर्ख बक्सा नहीं था – इसलिए
जिन्हें वो रोग हो गया वे रोग से मर जाते थे।

कम से कम बाक़ी अफ़वाहों और भय से,
से बच कर सुरक्षित रह जाते थे।

जनसंख्या हज़ारों में थी – सैंकड़ों मरते थे।
जब जनसंख्या लाखों में हो गयी तो हज़ारों मर गये।
अब करोड़ों में है तो लाखों मर रहे हैं,
पर अब आविष्कारों के दुरुपयोग से।

रोगी रोग से और निरोगी रोग के भय,
से मर रहे हैं/ जो बचे हैं वो भी डर रहे हैं।
ईश्वर की भूमिका तो समाप्त हो चली है।
नये ईश्वर से अब ये सौग़ात ए मौत मिली है।

अब सबकी मृत्यु का ज़िम्मेदार या तो ‘प्रभु
कोरोना’ है या फिर देवी असुविधाएं या देवी दुर्व्यवस्थाएँ।

न उम्र न कोई अन्य रोग न लापरवाही,
कुछ बुद्धिजीवी यही चर्चा रोज़ कर लेते हैं।
एक दूसरे को चिन्ता की डोज़ दे कर,
कुछ देर सरकारों को कोस लेते हैं।

संवेदनशीलता दिखाने का सबसे सरल,
और टिकाऊ तरीक़ा है बुद्धिविलास।
और फिर सामर्थ्य अनुसार वाणी विलास,
बहुत से गुरू, शिक्षक सकारात्मक ज्ञान देते हैं।

गिलास आधा ख़ाली है के स्थान पर गिलास,
आधा भरा है ऐसा कहना सिखलाते हैं।

ताकि सकारात्मकता आये,
तो समाचार- कोविड से इतने **** मर गये ,
इसके स्थान पर इतने ***** बच गये।
क्यों नहीं कह सकते ?

अर्थात् गिलास आधा भरा है ये क्यों नहीं कह सकते ?
आख़िर बचने वाले मरने वालों से तो ज़्यादा हैं न।

ये भी कहेंगे- पर अभी नहीं-
कोविड ख़त्म होने के बाद अपने भाषणों में,
हाई – फ़ाई होटल के कमरों में ‘मोटिवेशनल स्पीच’ में
ये दौर जब चला जायेगा-

तब सकारात्मक संदेशों के वृक्ष पर,
उदाहरणों का बौर आयेगा।
जिनका स्रोत इस नकारात्मकता से ही तो आयेगा।
तब ये सबको बहुत भायेगा।

ख़ैर – मुझे इस राजनीति में नहीं पड़ना,
बस भरोसा भगवान पर कैसे लौटा ये है कहना।
तो – मुझे भी लगने लगा था कि
ईश्वर नाम की कोई सत्ता नहीं है अब।

पड़ोस के एक वृद्ध के बारे में पता चला तब,
कि वे क़रीब एक साल से मृत्यु की गोद में पल रहे हैं –
और अभी तक यमराज को छल रहे हैं-
आयु अस्सी के आसपास है।

प्राणघातक रोग से ग्रस्त हैं,
घर के लोग भी अब उनसे त्रस्त हैं।

कोरोना पॉजिटिव भी हो गये थे,
अपने आप नेगेटिव भी हो गये।
हॉस्पिटल वो जा नहीं सकते,
डॉ ० घर पर आ नहीं सकते।

जाँच रिपोर्ट के अनुसार उन्हें न दवा
बचा सकती है न दुआ।
पर वो अब तक बचे हुए हैं।
परिवार पर बोझ से लदे हुए हैं।
अपनों की ही ज़िल्लत सह रहे हैं।

जिन्हें खिलाया था गोद में वही,
‘कब मरेंगे ‘ मुँह पर कह रहे हैं।

ये बात मैंने अपनी एक मित्र को बतायी,
उसने भी मुझे एक ऐसी ही घटना बतायी।
धीरे – धीरे मुझे ऐसे बहुत से लोग मिले,
जो अनेकों रोगों से थे घिरे।

महीनों से कटे वृक्ष की तरह बिस्तर पर थे गिरे-
पर प्रभु कोविड भी कुछ न कर सके।
तब कहीं जा कर मेरा खोया विश्वास लौट आया।
और फिर मैंने ईश्वर की मर्ज़ी को सर नवाया 🙏🏼
ईश्वर की सत्ता पर भरोसा जताया।

♦ वेदस्मृति ‘कृती’ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

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  • “वेदस्मृति ‘कृती’ जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों में समझाने की कोशिश की हैं – कोरोना महामारी के आने से कैसे इंसानी जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। कैसे इंसान के अंदर से इंसानियत खत्म हो गया। कोई भी किसी की भी मदद नहीं कर रहा है। रोगी रोग से और निरोगी रोग के भय से मर रहे हैं, जो बचे हैं वो भी डर रहे हैं।

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यह कविता/आर्टिकल (मेरा ईश्वर से विश्वास उठने ही लगा था कि।) ” वेदस्मृति ‘कृती’ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई आई टी . शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक. समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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मेरा मन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मेरा मन। ♦

घड़ी दो घड़ी तो मेरे पास भी बैठ।
कभी खामोश कभी उदास भी बैठ।
तितलियों सा बेफिक्र डोलते रहते हो।
कभी परेशान कभी हताश भी बैठ।
आसमान में उड़ते रहते चिड़ियों सा,
सबके खेत में घुस जाते हो नदियों सा।

अपने पराये, लोकलाज का कोई शर्म नहीं।
ठहर क्यूँ नहीं जाते, ऐ मन, सदियों सा।
नजर लग जाएगी थक के कभी तू ,
मेरे पहलू में आ बदहवास भी बैठ
घड़ी दो घड़ी…..

मत भूल ये अपना गाँव नहीं शहर है।
जमाने की टेढी, तुम ही पे नजर है।
सभी को खबर है तेरी दिलनवाजी का।
तुमको ही अपनी नही कोई खबर है।
पर्दे का थोड़ा तो लिहाज लाजिमी है।
कभी नाउम्मीद, हो निराश भी बैठ।
घड़ी दो घड़ी…..

पंथी, ग्रंथी औ पुजारी, महापौर का,
तू मेरा ही है या है किसी और का।
तन-स्पंदन में भी कभी मिलते नहीं।
तू इसी दौर का है या है उस दौर का।
बता तुझे ला दूंगा सारे खेल खिलौने।
ला दूंगा तुझको जमीं आकाश भी बैठ।
घड़ी दो घड़ी…..

बीच – बीच में लंबी ताजी साँसें लो सुस्ता लो।
कभी – कभी अपने घर का भी रस्ता लो।
मेहमान नवाजी, आवारगी कुछ दिन ही अच्छी।
वतन वापसी का विकल्प भी बावस्ता लो।
रोज दीवान-ए-आम तू जाया करता है।
आज हृदय के साथ दीवान-ए-खास भी बैठ।
घड़ी दो घड़ी…..

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है – मन के यूँ उमड़ने – घुमड़ने की प्रक्रिया को समझाने की कोशिश की है। मन से संवाद किया है, सभी को खबर है तेरी दिलनवाजी का तुमको ही अपनी नही कोई खबर है। मेरे पहलू में आ बदहवास भी बैठ घड़ी दो घड़ी।

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यह कविता (मेरा मन।) “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: चली जाती है।
  • जरूर पढ़े: अच्छा लगता है।

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तोते में जान।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ तोते में जान। ♦

मुहब्बत की यूँ इब्तिदा नजर आती है।
उसकी सूरत में मुझे माँ नजर आती है,
दिल ये मानने को हरगिज राजी नहीं।
उसकी ना – ना में भी हाँ नजर आती है।

मेरे नाम पे उसकी भी नजर झुक जाती।
थोड़ी – थोड़ी वो भी मेहरबां नजर आती है।
वो जो नहीं भी कहती मैं समझ जाता हूँ।
आँखें आईना ही नहीं जुबां नजर आती है।

जबसे मन नें नजरिया, लिबास बदला है।
बहुत खूबसूरत ये दुनियाँ नजर आती है।
खुद से भी लंबी गुप्तगू होने लगी है अब।
साँसों में एक दरिया रवां नजर आती है।

ये दुनियाँ कहती है कि तू बावरा हो गया है।
मुझे ये दुनियाँ बावरा, दरमियाँ नजर आती है।
हो सकता है कि वो ठीक भी कह रहे हों,
पर मुझे बारहा ये उल्टा चश्मा नजर आती है।

मतलब साफ है कि हमें इश्क़ हो गया है।
आशिकों को और कुछ कहाँ नजर आती है।
अब समझ में आ रहा, क्यों किसी को खुदा,
और एक तोते में अपनी जाँ नजर आती है।

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है – प्यार के दौरान मन में उमड़ने वाले भावनावों को सरल शब्दों में बयां किया है। किस-किस तरह के विचार मन में उमड़ने लगते है, यह भी समझाने की कोशिश की हैं।

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यह कविता (तोते में जान।) “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

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दीप जलाना होगा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ दीप जलाना होगा। ♦

घर – घर दीप जलाना होगा।
अंधेरा दूर भगाना होगा।
आसमान ही टूट पड़ा है,
कंधा सबको लगाना होगा।

माना विपदा बहुत बड़ी है।
जिंदगी सहमी डरी खड़ी है।
नागवार मुश्किल वक्त है।
मानव अस्त-व्यस्त, त्रस्त है।

इन्सां इन्सां को लील रहा है।
बचे खुचे को छील रहा है।
हवा में ऐसी जहर घुली है।
राजा रंक की पोल खुली है।

जंग जारी है, जंग जीतेंगे।
गर रहे एकजुट संग, जीतेंगे।
थोड़ी त्याग, तपस्या थोड़ी,
सबको ही कर जाना होगा।
घर – घर दीप जलाना होगा।

बंद करो जनसभा ओ धरना।
कुंभ, समागम, चुनाव लड़ना।
आपदा में भी अवसर ढ़ूढ़ना।
भेष बदल भाईयों को लूटना।

लाशों पे भी राजनीति, छी छी,
मुनाफाखोर आयोग, समिति, छी छी।
साँसें दो, उच्छवास दो हमें।
महफूज हूँ, एहसास दो हमें।

मेरे हिस्से की हवा चाहिये।
रोटी मत दो, दवा चाहिये।
मेरी जरुरत फिर तुझे होगी।
सत्ता को भी धमकाना होगा।
घर – घर दीप जलाना होगा।

किसकी कम या ज्यादा गलती।
साँस नहीं इस बात से चलती।
ये वक्त नहीं दोषारोपण का,
मेरी, तेरी, छिद्रान्वेषण का।

अब तो कहना, अनुशासन मानो।
कौन, कहाँ, क्या, कब, पहचानो।
वरना समूल ही मिट जाएगा।
इक प्यादा से पिट जाएगा।

जागो, उठो, अब भी संभलो।
कुछ दिन भीड़ मे मत निकलो।
साहस, विश्वास, सहयोग से बढ़के।
वैद्य न कोई, समझाना होगा।
घर – घर दीप जलाना होगा।

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है – जीवन में कितना भी उतार चढ़ाव आए, कितनी भी विपरीत परिस्थिति आए यूँ ही घबराकर रुकना नहीं, एक न एक दिन फिर से जीवन में खुशियों की बरसात होगी। किसकी कम या ज्यादा गलती। साँस नहीं इस बात से चलती। ये वक्त नहीं दोषारोपण का एक दूसरे पर।

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यह कविता (दीप जलाना होगा।) “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
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  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
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आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

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सोच रे मानव।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ सोच रे मानव। ♦

हे मूर्ख इंसान, तू सत्य की खोज कर।
जग में असत्य बढ़ाने पर मत शोर कर।

कौन है तू,क्या हस्ती तेरी, क्या वजूद तेरा।
जब विचारों का इंकलाब आएगा,
कहाँ होगा, अस्तित्व महफूज तेरा।

क्यों डूबा है, खुद को भगवान बनाने में।
इस शक्ति को एक क्षण भी,
नही लगेगा तुझें मिटाने में।

तुझें मालिक ने बार-बार इशारा देकर,
कोई कसर न छोड़ी, तुझें चेताने में।
कोई कमी बाकी न रही तुझें समझाने में।

जिस कर्म से जग में हताशा और निराशा हो।
उस कर्म को तज दे मनुष्य,
जिससे कलयुगी इंसान की परिभाषा हो।

युगों से देखी नही क्या तुमनें,
इस रब की लाठी तो, बेआवाज होती है।

तू देखता रह जायेगा, ये इंसाफ कर देगी,
क्योंकि इसकी हर बात राज होती हैं।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – किस तरह से आज का इंसान सत्य से दूर, नाना प्रकार के विकर्म कर रहा है। अहंकार-वश स्वयं को भगवान् बनाने में लगा है। वह भूल गया है जब इस रब की लाठी पड़ती है, तो उसमे आवाज़ नही होती। अभी भी समय है तू सुधर जा इंसान, वर्ना तेरे पास पछताने के अलावा कुछ नहीं बचेगा।

—————

यह कविता (सोच रे मानव।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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बंजर जमीं पे भी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बंजर जमीं पे भी। ♦

अदाओं में उसके सवालात होगी।
निगाहों में उसकी करामात होगी।
बच के कहाँ जायेगा तेरा आशिक।
मुझको यकीं है मेरी मात होगी।

सोचा ना था ये भी हालात होगी।
सरेआम रूसवा यूँ जज्बात होगी।
किसी और के पहलू में सिमटकर।
मेरी जां यूँ तुमसे मुलाकात होगी।

निशाने पे हाँ अब मेरी जात होगी।
खतरे में धर्म भी और औकात होगी।
वर्षों से सोया समाज भी जागेगा।
बहुत जल्द ये भी तिलस्मात होगी।

तोहमत की बौछार, आघात होगी।
बाकी सभी मसलों पे बात होगी।
है कौन बेवफा किसने वादा निभाया।
ये सवाल टालकर जश्न की रात होगी।

करूँ चिर प्रतीक्षा मैं दरख्वास्त होगी।
वो एक बार कह दे कि फिर प्रात होगी।
बदलेगा पहलू, पहेली और मौसम।
सुध! बंजर जमीं पे भी बरसात होगी।

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है – जीवन में कितना भी उतार चढ़ाव आए, कितनी भी विपरीत परिस्थिति आए यूँ ही घबराकर रुकना नहीं, एक न एक दिन फिर जीवन में बरसात होगी।

—•—•—•—

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यह कविता (बंजर जमीं पे भी।) “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: चली जाती है।
  • जरूर पढ़े: अच्छा लगता है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

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कागद पे आखर आओ अंकित करें।

Kmsraj51 की कलम से…..

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♦ कागद पे आखर आओ अंकित करें। ♦

दुस्साहस करने वालों की खोज खबर लें।
कोरे कागद पे आखर आओ अंकित करें।

•••

स्कन्द पुराण में उल्लिखित है श्री राम जन्म स्थान।
कितनी दूरी है और कहाँ अमुक स्थान।

जिला जज ने दिया फैसला वर्ष था अट्ठारह सौ छियासी।
हिंदुओं को पूजा करने की मिली इजाजत विधि सम्मत अविनाशी।

जन्म स्थान राम चबूतरा मुस्लिम पक्ष ने किया स्वीकार।
जब उन्होने कर लिया खूब गहन विचार।

जिलानी ने कहा उन्नीस सौ उनचास से पहले पूजा का नहीं है सबूत।
जस्टिस बोबरे ने पूछा वहाँ नमाज का कब रहा वजूद।

बाबर विध्वंसक था उसे न्याय संगत कैसे मानें।
मस्जिद खाली स्थान पर बनी, इसे कैसे जानें।

सिया वक्फ बोर्ड ने, नहीं दी कोई चुनौती।
सुन्नी वक्फ बोर्ड से विवाद हो गई एकलौती।

ब्रिटिस काल में था मिला पूजा करने का अधिकार।
सन उन्नीस सौ उनचास में, जैन के अनुसार।

जैन ने कहा हवाई अड्डे पर नमाज हो तो वहाँ कब्जा होगा।
विवादित स्थल पर नमाज के लिए जाना कब अच्छा होगा।

सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष का आया यही बयान।
उसने मान लिया ‘राम चबूतरा ही है राम जन्म स्थान’।

सबकी दलील सुनकर सर्वोच्च न्यायालय ने दिया अपना निर्णय।
कि ‘राम जन्म भूमि वही है यह बात है तय’।

पाँच एकड़ अलग जमीन मुस्लिमों को सरकार दे।
और सरकार से वह जमीन मुस्लिम पक्ष पा ले।

इस तरह हुआ पाँच सौ साल के विवाद का समापन।
क्योंकि एक मत से पांचों जजों ने बनाया अपना मन।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – “श्री राम जन्म भूमि” विवाद में समय – समय पर होने वाले विवाद और उतार चढ़ाव, उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के सुप्रीम फैसले को क्रमबद्ध तरीके से कम शब्दों में कविता के रूप में पिरोकर सब कुछ समझाया है। इस कविता के माध्यम से आने वाली पीढ़िया “श्री राम जन्म भूमि” विवाद और सुप्रीम कोर्ट के सुप्रीम फैसले को समझ पाएंगे।

—————

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यह कविता (कागद पे आखर आओ अंकित करें।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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दुधारी तलवार।

Kmsraj51 की कलम से…..

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♦ दुधारी तलवार। ♦

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अरसों बाद आप पे भी कल छाई कोई खुमारी थी।
जमीं पे उतरने की अच्छी योजना, तैयारी थी।
नामुराद डूबे आज, आपकी भी रायशुमारी थी।
मजबूरन नाचीज ने समंदर में कस्ती उतारी थी॥

लहरों में कल रात गजब की लोच और फनकारी थी।
साहिल को लीलने की ललक थी, बेकरारी थी।
डूबना तो तय था सो खुशी से रहबर डूब गया।
कल की रात समंदर पे भी इश्क़ की मस्ती भारी थी॥

हम तमाशाई भी थे चुप रहने की लाचारी थी।
वही मुवक्किल, मुंसिफ, वही गवाह सरकारी थी।
सारे सबूत तो वैसे मेरे ही पक्ष में दिख रहे थे।
लेकिन रूप के आगे मेरी किस्मत, बुद्धि हारी थी॥

अदा और अना के बीच यदा कदा जंग जारी थी।
मैं ही क्यूँ हर बार हारूँ? इस बार उस की बारी थी।
यकीन नहीं हो रहा था ये हकीकत है या ख्वाब।
पहली बार “मुहब्बत है” वो भी खुल के स्वीकारी थी॥

महज नहीं कजरारी आँखें वो तलवार दुधारी थी।
लबों की लरजिश पे फिदा, कायनात भी जुवारी थी।
पर तुमनें मुझे शिकस्त देकर सिकंदर बना दिया।
तुम्हारा तसव्वुर ही अब तक मेरी ज़रदारी थी॥

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, कविता के माध्यम से दुधारी तलवार का उदहारण देकर प्यार के उतार-चढ़ाव व लुका छिपी का
    बहुत ही सुंदर वर्णन किया है।

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  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: स्वाद बदलना होगा।
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दूसरी तस्वीर।

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♦ दूसरी तस्वीर। ♦

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सड़कों पर मजदूर और मजबूर नहीं चल रहे।
भारत माता की सच्ची तस्वीर चल रही है।
चल रहा है प्राण हिम्मत, हौसलों, जज्बों की।
खून-पसीने की मिसाल-ए-तासीर चल रही है।
सड़को पर…..

यही पाँव है भारती में धड़कन स्पंदन लाता है।
यही वो हाथ है जो जठराग्नि, क्षुधा बुझाता है।
इन्हीं के साँसों से चूल्हे, कारखाने चलते हैं।
उच्छवासों से ऊर्जस्वित तिरंगा लहराता है।
लहू, दाग-धब्बों से माँ की सूरत हुई कुरूप।
और टी०वी० पे स्वच्छ भारत की तकरीर चल रही है।
सड़कों पर…..

बदन पे नहीं वसन पेट सट गए आँत से।
घर से बेघर मालिक ही, निष्कासित जमात से।
निकल पड़े हैं पीठ पे लादे कर्ज जिंदगी का।
नंगे पैर अकेले लड़ने, जग से, हालात से।
बूंद-बूंद, दाने-दाने को हो मोहताज तिरस्कृत।
इंसानियत के गर्दन पे शमसीर चल रही है।
सड़कों पर…..

सत्ता और व्यवस्था में कोई सांठ गांठ सी हो गई है।
साधनों और संसाधनों का बंदरबांट सी हो गई है।
धृतराष्ट्र, कुंभकर्ण बन रहे क्यूँ इनके रक्षक ही।
प्रजा नरक में ठेले जा रहे मार काट सी हो गई है।
चार साल के बाद इन्हीं के पास आओगे याचक सा।
अभी तो “अच्छे दिन” की अच्छी नज़ीर चल रही है।
सड़कों पर…..

सुनते थे भारत अर्पण और तर्पण की भूमि है।
राष्ट्र के लिए स्व, सर्वस्व समर्पण की भूमि है।
पर जो दृश्य करुण, दारुण, भयावह सामने है।
शर्मनाक लगता है निर्दयी, बंजर जन की भूमि है।
“छप्पन इंची सीना वाले” घर भी देखो अपना।
“चौकीदार” के पाँव में भी जंजीर चल रही है।
सड़कों पर…..

जिसके श्रम की घुट्टी महलों में किलकारी भरती है।
जिनकी अंगुलियां छू के सरकारें बनती बिगड़ती है।
वही नराधम, भिक्षुक बन यूँ बिलख रहा है आज।
जैसे कोई बेटी गरीब बाप के घर से बिछड़ती है।
कलियुग में किंचित ये अग्निपरीक्षा ही तो है।
देव-दीन में बहस बड़ी गंभीर चल रही है।
सड़कों पर…..

खुदा के बंदे खौफ खाओ ये इंतिहा है हिकारत की।
रोटी दो, छप्पड़-छाया दो, कुछ दो मूल्य शराफत की॥

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने बहुत ही सुंदर, सरल शब्दों में “मजदूर या मजबूर” मजदूर के कठिन जीवन को दर्शाया है कविता के माध्यम से।

—•—•—•—

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  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2021-KMSRAJ51 की कलम से, शैलेश कुमार मिश्र-शैल जी की कवितायें Tagged With: hindi poetry, maulik kavita in hindi, mazdoor poem in hindi, poem in hindi, poem on migrant workers in hindi, poem on workers in hindi, poetry on workers, shramik diwas par kavita, shramiko par kavita, किसान का दर्द कविता, किसान पोएम इन हिंदी, दूसरी तस्वीर, मजदूर का दर्द कविता, मौलिक कविता इन हिंदी, शैलेश कुमार मिश्र-शैल जी की कवितायें

“मातृ दिवस” – ममता की माँ सूरत…।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ ममता की माँ सूरत…। ϒ

⇒ Mother Nature of Mamta.

🙂 “मातृ दिवस” – ममता की माँ सूरत…।

माँ! माँ है माँ होती।
ममता की माँ सूरत।
धरा पर माँ एक सूरज।
खुद ही है माँ पलती।
बच्चा भी है पालती॥

बच्चे को वह सुधारती।
गर्भ में धारण करती।
बच्चा संवार कर रखती।
निज रक्त मज्जा -पालती।
स्तन के दूध पिलाती॥

हल्राती -दुलराती,
है प्यार उसे दिखाती।
वह साथ में सुलाती।
रात भर जाग बिताती,
विस्तार गीले रह जाती॥

खुद भूखे रहकर भी –
बच्चे को दूध पिलाती।
सूखे बिस्तर – लिटाती।
माँ – माँ ही कहलाती
मजदूरी भले कर लाती॥

नन्हकी – नन्हका खिलाती।
देती मति – मतिमान।
मगण – मगज पिरोती।
मगन मन ही मन होती।
मखतूली – पहनाती॥

‘मंगल’ भावना भारती।
बच्चे को भाति दुलराती।
माँ! माँ है माँ होती।
ममता की माँ सूरत।
धरा पर माँ एक सूरज॥

शब्दार्थ:- मति-बुद्धि | मतिमान- बुद्धिमान | मगण – चालाकी | मगज- दिमाग | मखतूली-काले रेशम का धागा |

शुभकामनाओं के साथ।

∇ सुखमंगल सिंह – ♥
——♦——
सुखमंगल सिंह जी।
हम दिल से आभारी हैं सुखमंगल सिंह जी के प्रेरणादायक कविता (“मातृ दिवस” – ममता की माँ सूरत…।) हिन्दी में Share करने के लिए।

सुखमंगल सिंह जी के लिए मेरे विचार:

♣ “सुखमंगल सिंह जी” ने कविता के माध्यम से मां के गुणाें, त्याग और पालना का खुले मन से वर्णन किया हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविता छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविता काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

  • हिंदी कहानी – निरंतर प्रयास जरूर पढ़े।
_____

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Krishna Mohan Singh(KMS)
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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।~Kmsraj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought to life by. By doing this you Recognize hidden within the buraiya ensolar radiation, and encourage good solar radiation to become themselves.

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAJ51

 

 

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