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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिंदी कविता

उसका आशियाना।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ उसका आशियाना। ♦

आज उसके जमीन पर पांव नही वो खुशी से बहक रही थी।
अपने बच्चों की आवाज़ से खुशबू जैसी महक रही थी॥

खुश भी क्यों न हो कुछ समय पहले मातृत्व का सुख उसने पाया।
उसको लगे ऐसे जैसे सारा संसार उसका हो आया॥

सारा दिन दोनो अपने बच्चों का पेट भरने के लिए भटकते।
दिन भर मेहनत की चक्की में वो पिसते॥

तब कही जाकर वो अपने नन्हें – मुन्नों का पेट भरते।
फिर मुँह में निवाला दे अपने बच्चों के संग प्रेम करते॥

पर ये सच ही कहा गया है कि …..

इस जमाने से दूसरों की खुशियाँ बर्दाश्त नही होती।
फूलों को कुचल कर क्यूँ राह में शूल बोती॥

एक दिन किसी जालिम ने अपने लिए उनका घर उजाड़ा था।
बेघर किया उनको उन नन्हें मासूमों ने किसका क्या बिगाड़ा था॥

जिन बच्चों का पेट भरने के लिए सामान वो लाये थे।
वो तो अब इस दुनिया को छोड़ कर हो गए पराये थे॥

उनके बड़े होने पर न जाने कितने अरमान सजाये थे।
पर उन्हीं आँखों में अथाह सागर जितने आँसू भर आये थे॥

चीत्कार कर उठा ह्रदय देख कर दृश्य ऐसा।
मातम फैल गया था उनके परिवार में एक ऐसा॥

अब वो फिर गिनती में चार से हो गए दो।
आँसू भी सूख गए थक गए उनके नैन रो॥

एक शून्य भाव से दोनों ही एक दूसरे को धीरज बंधा रहे थे।
फिर ऐसा लगे जैसे आसमान फिर पानी लेने जा रहे थे॥

उस घोसलें के तिनके उनके बच्चों की तरह ही इधर – उधर बिखरे थे।
पेड़ की सभी टहनियां और पत्ते अपनी बदहाली की कहानी कह रहे थे॥

क्योंकि किसी ने पेड़ों की कटाई कर बनाना अपना आशियाना।
पर पूछे उनसे क्यूँ – उजाड़ दिया तुमने हमारा घराना॥

तुम ही हमें बताओं कि हम परिन्दें कहाँ पर जाए।
अपना दुखड़ा हम किसको जाकर इस कदर सुनाए॥

हमने कब रोका तुम्हें, तुम अपना घर शौक से बनाओ।
पर हम बेजुबान के, आशियाने कहीं पर तो दे जाओ॥

हमारी इस दुखभरी पीड़ा को समझ लेना तुम सब।
हमारा सुंदर कलरव होगा तभी तुम्हारे बच्चों की खुशियाँ होगी सब॥

आओं हम इंसान समझे इन बेजुबान पक्षियों की पीड़ को।
जहाँ कहीं पर जगह मिले बनाये इनके नीड़ को॥

एक प्रेम अपने ह्रदय में इन परिंदों के प्रति भी जगाये।
दाना, पानी, घोंसला देकर इन्हें भी जीवन-दान दे पाए॥

अधिक से अधिक पौधों को इस धरा के गर्भ में रोप दे।
बचाये इस प्रकृति की सुंदरता को प्राकृतिक आपदाओं के प्रकोप से॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इंसान आधुनिकता और अपने ऐशो आराम के लिए इस कदर अंधा हो गया की उसने पक्षियों के लिए उनका आशियाना पेड़ तक को नहीं छोड़ा। अपने ऐशो आराम के लिए पक्षियों का घर उजाड़ता गया, एक बार भी उसने नहीं सोचा की इन बेजुबानों का भी इस प्रकृति व पृथ्वी पर पूरा हक़ हैं । ये प्रकृति व पृथ्वी केवल इंसानो का नहीं है, इन पक्षियों का भी हैं। अब भी समय हैं संभल जाओ और जितना ज्यादा हो सके प्रत्येक वर्ष पेड़ लगावो और उस पेड़ की तब तक देखभाल करो जब तक वह पेड़ अपना ख़ुराक पृथ्वी से खुद न लेने लगे। जब पेड़ होंगे तब पक्षियों उनका आशियाना मिल सकेगा और वो अपना घोसला बना सकेंगे पुनः, तब कही जाकर इन पक्षियों के मधुर आवाज फिर से सुनाने को मिलेंगे हम सभी को। आवो हम सब मिलकर ये संकल्प ले कि प्रत्येक वर्ष जरूर पेड़ लगाएंगे।

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यह कविता (उसका आशियाना।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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गर्मी की छुट्टी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ गर्मी की छुट्टी। ♦

गर्मी की छुट्टियों का सबको इंतजार रहता था,
शाम को खेलना कूदना याद आता है।

खेलते थे दोस्तों के साथ मस्ती करते थे,
उन छुट्टियों जैसी ख़ुशी कहीं नहीं मिलती थी।

सब भाई बहन इकट्ठा होकर खूब मस्ती करते थे,
नानी के घर जाकर दूध मलाई खाते थे।

दोपहर में सब कैरम, लूडो, साँप सीढ़ी खेला करते थे,
शाम को सब लोग आइसक्रीम खाने जाते थे।

लस्सी, बेल का शरबत, छाछ बड़े मजे से पीते थे,
रात को नानी, दादी से कहानी सुना करते थे।

आज सब बड़े, बच्चे मोबाइल पर समय बिताते है,
पहले के समय में, आज बहुत बदलाव आया।

अब बच्चे मोबाइल और वीडयो पर गर्मी की छुट्टी बिताते है,
सब खेल बदल गए बच्चो के टीवी पर समय पास करते है।

सब कुछ बदला अब नये युग का जन्म हुआ,
गर्मी की छुट्टी के वो दिन कभी वापिस नहीं आएंगे।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — ये लंबी छुट्टीयां, स्कूल और अध्ययन से राहत दिलाती है। आराम करने, खेल का आनंद लेने और कुछ मजेदार और रचनात्मक गतिविधियों का अभ्यास करने का यह सबसे अच्छा समय होता है अपने दोस्तों और भाई बहनों के साथ। गर्मी की छुट्टी आनंद लेने, मस्ती औऱ आराम करने जैसे पर्याप्त मनोरंजक अवसरों को अपने साथ लाता है। लेकिन अब के समय में पहले जैसा वह खेलकूद और मस्ती भरी शरारतें कहाँ रही। अब तो सभी अपने-अपने मोबाइल में ही गेम भी खेलते है और मोबाइल पर ही समय बिताते हैं।

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यह कविता (गर्मी की छुट्टी।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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सुन ले पुकार चलो शिक्षा के द्वार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ सुन ले पुकार चलो शिक्षा के द्वार। ♦

जीवन है अनमोल, नहीं है इसका कोई तोल,
बिन शिक्षा जीवन का, नहीं है कोई मोल।
शिक्षा से ही मिलता है जग में, मान और सम्मान,
इसी से मिलता है हमें, जीवन का हर ज्ञान।
शिक्षा बिन अधूरा, हम सब का जीवन,
अगर जीवन को बनाना है धारदार,
सुन लें पुकार चलो शिक्षा के द्वार॥

सारे काम छोड़कर, चलना है स्कूल,
गांठ ये बांध लो, होकर के कूल।
जीवन है अपना, जीना है सपना,
उन सपनों की भरने उड़ान।
शिक्षा ही है बस एक गहना, बात मेरी मान,
अगर जीवन को बनाना है धारदार,
सुन ले पुकार चलो शिक्षा के द्वार॥

ओ मछली पकड़ने वालों, ओ बिन मतलब,
भटकने वालों, बात अब ये मान लो।
शिक्षा के महत्व को पहचान लो,
जीवन संवर जायेगा, इससे नाता जोड़ लो।
शिक्षा का अधिकार मिला है, बात ये जान लो,
अगर जीवन को बनाना है धारदार,
सुन लें पुकार चलो शिक्षा के द्वार॥

सूबे सह राष्ट्र के सभी अभिभावकगण से,
आरजू विनती विवेक की है आज से।
जब शिक्षा ही घरद्वार तो फिर कैसी तकरार,
सारे काम छोड़कर, ज्ञान के मंदिर में बच्चों को खुद पहुंचाए जरूर।
हर हाल में बच्चों को भेजिए स्कूल, बिलकुल टेंशन भूल,
अगर बच्चे के जीवन को बनाना है धारदार,
सुन लें पुकार चलो शिक्षा के द्वार॥

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — शिक्षा मनुष्य के अंदर अच्छे विचारों को भरती है और अंदर में प्रविष्ठ बुरे विचारों को निकाल बाहर करती है। शिक्षा मनुष्य के जीवन का मार्ग प्रशस्त करती है। यह मनुष्य को समाज में प्रतिष्ठित करने का कार्य करती है। इससे मनुष्य के अंदर मनुष्यता आती है। शिक्षा हमें विभिन्न प्रकार का ज्ञान और प्रैक्टिकल कौशल को प्रदान करती है। यह सीखने की एक निरंतर, धीमी और सुरक्षित प्रक्रिया है, जो हमें ज्ञान प्राप्त करने में मदद करती है। यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जो हमारे जन्म के साथ ही शुरु हो जाती है और हमारे जीवन के साथ ही खत्म होती है। ज्ञान धन सदैव ही हमारी मदद करती है, चाहे परिस्थिति, काल व जगह कैसी भी हो। शिक्षा लोगों के मस्तिष्क को बड़े स्तर पर विकसित करने का कार्य करती है।

—————

यह कविता (सुन ले पुकार चलो शिक्षा के द्वार।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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आओ मिलकर चलें स्कूल।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ आओ मिलकर चलें स्कूल। ♦

नन्हें नन्हें कदमों से,
चहलकदमी करते हुए।
प्रकृति की अनुपम बेला में,
भरकर चेहरे पर मुस्कान।
सपनों का संग करके ध्यान,
साथियों संग एक होकर।
सब कुछ जाओ तुम भूल,
आओ मिलकर चलें स्कूल॥

घर से निकले,
आशा संग उमंग लिए।
चारों तरफ बजती शिक्षा की धुन,
यही है इसका सबसे बड़ा गुण।
कुछ बनने की अब चली पवन,
साथियों संग एक होकर।
सब कुछ जाओ तुम भूल,
आओ मिलकर चलें स्कूल॥

चलो ज्ञान का दीप जलाएं,
मिलकर हमसब हाथ बढ़ाएं।
कदम से कदम मिलाएं,
एक एक कर संग हो जाएं।
शिक्षा का अलख जगाएं,
साथियों संग एक होकर।
सब कुछ जाओ तुम भूल,
आओ मिलकर चलें स्कूल॥

हेमा आओ, रानी आओ,
पुन्नू आओ, साक्षी आओ।
हम भी आएं तुम भी आओ,
संग मिलकर अब एक हो जाओ।
मीना मंच और बाल संसद संग,
सब मिलकर गाएं एक ही धुन।
स्कूल चले स्कूल चले स्कूल चले हम,
आओ मिलकर चलें स्कूल॥

जज्बा और विश्वास लिए,
कंधे पर बस्ते का बोझ लिए।
निकल पड़े होकर निडर,
पाने की चाहत ने आखिर।
दिया शिक्षा का अनुपम वरदान,
साथियों संग एक होकर।
सब कुछ जाओ तुम भूल,
आओ मिलकर चलें स्कूल॥

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — बचपन स्कूल और हम बच्चे व हमारा बचपन। बचपन का उमंग व जोश – उत्साह के साथ सबकुछ भूलकर नन्हें नन्हें कदमों से चहलकदमी करते हुए, प्रकृति की अनुपम बेला में भरकर चेहरे पर मुस्कान, सपनों का संग करके ध्यान, साथियों संग एक होकर, आओ मिलकर हमसब चलें स्कूल। कदम से कदम मिलाकर सत्यता का पाठ पढ़ने-पढ़ाने हम बच्चे मन के सच्चे अपने नन्हें नन्हें कदमों से चहलकदमी करते हुए आओ मिलकर हमसब चलें स्कूल।

—————

यह कविता (आओ मिलकर चलें स्कूल।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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बस भी करो अब।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बस भी करो अब। ♦

रक्त – रंजित इस धरा को यारो, अब तो धुल जाने दो।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का राज, अब तो खुल जाने दो।

परे समझ के आज हुआ है, सच जनता को समझाना।
क्यों चाहते विश्व धुरंधर, परमाणु जंग में जग ले जाना?

जल उठेगा जर्रा – जर्रा, उग न सकेगा अन्न का दाना।
हिरोसिमा और नागाशाकी, दुनियां पूरी को न बनाना।

मोह ममता की हदें तोड़कर, चाहते हैं निर्मम बन जाना?
हथियारों के व्यवसाय से, क्यों चाहते हैं जग को चलाना?

स्वार्थ, सनक या शक्ति परीक्षण, चाहते क्या गुल खिलाना?
साम्राज्यवाद या सीमा संरक्षण, आखिर चाहते क्या जताना?

दूषित हवा से धूमिल गगन, क्यों चाहते हैं प्रदूषण फैलाना?
नई पीढ़ी को क्यों चाहते हैं, जहरीला गैसीय जहर खिलाना?

लूली – लंगड़ी संताने होगी, मानव मंद बुद्धि और रोगी होगा।
कुरूप से बनमानुष पैदा होंगे, जीएगा वही जो योगी होगा।

बन्द करो यह हथियारी तमाशा, सबको शान्ति से जीने दो।
परमाणु विनाश का विष मत बांटो, प्रेम पीयूष को पीने दो।

बस भी करो अब हुआ बहुतेरा, होश में आकर रहम करो।
नफरतों के बॉक्से खाली करो, उनमें मोहब्त की मेहर भरो।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — जिस तरह से इस समय दुनिया का माहौल चल रहा है, अगर सभी एक दूसरे के ऊपर बम और मिसाइल यूँ ही दागते के लिए आमादा हो गए और दाग दिया तो जल उठेगा जर्रा – जर्रा, उग न सकेगा अन्न का दाना। हिरोसिमा और नागाशाकी, दुनियां पूरी को न बनाना। नहीं तो रोने के आलावा कुछ भी ना बचेगा। दूषित हवा से धूमिल गगन को क्यों चाहते हैं प्रदूषण फैलाना? नई पीढ़ी को क्यों चाहते हैं, जहरीला गैसीय जहर खिलाना?

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किताब।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ किताब। ♦

बचपन में ही किताबों से,
मुलाक़ात हो जाती है।
सबसे प्यारा और अच्छा,
उपहार होती है किताबें।

घर के अलमारी के
कोने में रहती है किताबें।
कुछ न लेती ज्ञान का,
पाठ पढ़ाती है किताबें।

किताबों में संसार और
अल्फाजों का प्यार है।
धर्म, वेदों ,सभ्यता,
संस्कृति का भंडार है।

देश, समाज, परिवार के
भविष्य का सर्जनहार है।
सब तरह ज्ञान का पाठ,
पढ़ाती है ये किताबें।

विद्या और अध्यापक की,
साथी होती है किताबें।
अकेलेपन की अच्छी,
दोस्त होती है किताबें।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — किताब इंसान की सच्ची मित्र होती है, बिना कुछ लिए किताबें सदैव ही हमारी सहायता करती रहती हैं। 100 दोस्तों से अच्छा एक अच्छी किताब होती है। ज्ञान सदैव ही इंसान का साथ देती है, चाहे वह समय कैसा भी हो। ज्ञान ज़िन्दगी के हर मोड़ पर आपका साथ निभाएगा चाहे परिस्थिति कैसी भी हो। किताबों को अपनी ज़िन्दगी का जरूरी हिस्सा बना लो, तुम्हारी ज़िन्दगी निखार जाएगी।

—————

यह कविता (किताब।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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जिंदगी अगर किताब होती।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जिंदगी अगर किताब होती। ♦

जिंदगी अगर किताब होती,
हम उसके पन्नो को पढतें।

कब हम अपने अरमान पूरे करेंगे,
जीवन में हर रंग को कैसे भरेंगे।

कौन सा रिश्ता जीवन भर साथ निभायेगा,
कब हम खुश होंगे कब उदास होंगे।

फाड़ देते उन पन्नों को जो हमें रुलाता,
उन पन्नो को हम लिखते जिससे हमें खुशी मिलेगीं।

हमने जीवन में क्या खोया – क्या पाया,
एक पन्ना में समाज और देश के भविष्य की बातें।

महामारी से हम कब तक मुक्त होंगे ये पन्ना भी होता,
एक – एक पल की हम खुशी को कैसे बाँटते।

कैसे खत्म होगी जिंदगी यह पता करने का,
पन्ना होता, जिंदगी अगर एक किताब होती।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवयित्री ने कल्पना किया है की अगर जिंदगी अगर किताब होती तो, जीवन के हर एक एक्ट में हम अपने अनुसार रंग भरते। जीवन के हर अवस्था का पन्ना होता जिसे हम समय समय पर पढ़ लेते, और उसी अनुसार अपने कार्य करते। कुछ भी गड़बड़ होने से पहले ही, सतर्क हो जाते। हर कार्य सही समय पर सही तरीके से पूर्ण कर पाते। कौन सा रिश्ता जीवन भर साथ निभायेगा और कब हम खुश होंगे कब उदास होंगे यह जान पाते। फाड़ देते हम उन पन्नों को जो हमें रुलाता व उन पन्नो को हम लिखते जिससे हमें खुशी मिलेगीं। कैसे खत्म होगी यह जिंदगी यह पता करने का भी एक पन्ना होता, जिंदगी अगर एक किताब होती तो कितना अच्छा होता।

—————

यह कविता (जिंदगी अगर किताब होती।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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काशी में देव विग्रह का वीडियोग्राफी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ काशी में देव विग्रह का वीडियोग्राफी। ♦

न्यायालय के आदेश पर,
ज्ञानवापी परिसर का सर्वे।
सीनियर डिवीजन सिविल,
जज रवि कुमार दिवाकर।

वीडियो ग्राफी के आदेश में,
कमीशन कार्रवाई सीमा तक।
अदालत ने कहा कमीशन,
कार्रवाई आदेश हमने दिया है।

श्रृंगार गौरी और देव विग्रह से,
सबूत सुरक्षित रखा जाएगा।
काशी के ज्ञानवापी मस्जिद में,
देवताओं के साक्ष संकलित होंगे।

अंजुमन इंतजा मियां का कहना,
मस्जिद! गैर मुस्लिम घुसने न देंगे।
अधिवक्ता आयुक्त कमीशन,
10 मई को रिपोर्ट दाखिल करें।

6 मई 2022 को दोनों पक्षों को,
कमीशन कार्रवाई सूचित किया।
अधिवक्ता आयुक्त साक्ष को,
सुरक्षित स्थान पर उसे रखेंगे।

मिश्रित आबादी वाले क्षेत्र में,
फोर्स मौके पर एलर्ट जारी है।
भीड़ – भाड़ रोकने के लिए,
पूरा इंतजाम यहां किया गया।

कानून व्यवस्था को प्रभावित,
करने वालों पर सख्ती होगी।
जनता से शांति बनाने के लिए,
पुलिस अपील कर रही दिखी।

सुप्रीम कोर्ट आदेश पालन में,
माइक रिपोर्ट हाईकोर्ट रद्द किया।
विश्व में बढे प्रदूषण नियंत्रण –
न्यायालय ने निज आदेश दे दिया।

प्राचीन विश्वनाथ के अवशेषों को,
एकत्रित सबकुछ किया जाएगा।
मंदिर के उत्तर पश्चिम दिशा में,
दूर-दूर तक जबकि बने बंकर है।

दक्षिण दिशा में भी मंदिर के,
सड़क पार वर्ग विशेष के बंकर है।
पुलिस आयुक्त के निगाह ने,
जुड़ा नहीं सुरक्षा के अंदर है।

अधिकांश लोगों से बात करने पर,
उनको कोई आपत्ति नहीं बताया।
धर्म के ठेकेदारों ने ही केवल,
इस आदेश का विरोध जताया है।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — 6 मई 2022 को दोनों पक्षों को कमीशन कार्रवाई सूचित किया। अधिवक्ता आयुक्त साक्ष को सुरक्षित स्थान पर उसे रखेंगे। प्रश्न हमारा यह है मुस्लिम संप्रदाय से की अगर काशी के ज्ञानवापी मस्जिद में कुछ भी गलत नहीं है तो फिर ये आपत्ति क्यों? आखिर क्या छिपाने की कोशिश कर रहे है ये? इनको तो खुश होना चाहिए, की सत्य बाहर आ रहा हैं। जो सत्य है उसे तो बाहर आना ही चाहिए। वह डर रहे है की प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं होती हैं। उनके डर का मुख्य कारण यही हैं। सत्य तो बाहर आएगा ही चाहे ये लाख कोशिश कर ले, विरोध करने की या रोकने की। सभी को शांतिपूर्ण तरीके से कोर्ट की कारवाही को होने देना चाहिए।

—————

sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (काशी में देव विग्रह का वीडियोग्राफी।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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विरह की दुनिया।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ विरह की दुनिया। ♦

ये संसार भी अजब गजब बातों का मेला।
भीड़ में रहकर भी हर इंसान है अकेला॥

जग एक है पर इसमें दुनिया बसी अनेक।
अपना एक अलग ही संसार बसाए है हरेक॥

कहीं खुशी, कहीं सपनों की, कहीं दुनिया गम की।
कहीं हँसी की, कहीं आँसुओं से आँखें नम की॥

कहीं अरमानों की, कहीं जज्बातों की।
कहीं पर शबाब में डूबी रातों की॥

इच्छाओं की माया नगरी का कितना सुंदर रूप।
जो पल – पल बदले अपने कितने स्वरूप॥

आओं एक ऐसी दुनिया की बात बताते है।
जिसकी मंजिल नही फिर क्यूँ राह बनाते है॥

यहाँ विरह का संसार बिल्कुल ही निराला।
रोने की पुकार नही लगा जुबाँ पर ताला॥

विरह की वेदना तो इंसान को खाये।
जब दुख सहा भी न जाये, कहा भी न जाये॥

जब दिल में बसी हो विरह की वेदना।
क्यूँ खत्म हो जाये सब अंतर्मन की चेतना॥

जो चांदनी हर वक्त रही शीतलता बरसाये।
अब वही नागिन जैसी डसने को आये॥

आँखों में हो जाता आसुंओ का बसेरा।
न जाने कहाँ खो जाता खुशी का सवेरा॥

विरह से तो फूलों की भी बदले बहार।
खुशी भी दिखाए फिर अपने नखरे हजार॥

जब विरह बिछोड़े का दिल में समाये।
सारी दुनिया ही बेमानी हो जाये॥

सबसे ज्यादा विरह की अग्नि वो तड़पाये।
जब इंसान पास रहकर भी दूर हो जाये॥

सच ही है जो हर पल नजर आए हसीन।
नजरिया ही बदल जाये जब दिल हो गमगीन॥

विरह की अग्नि दिल को पल-पल झुलसाय।
फिर किसी जल से ये बुझने न पाए॥

बस ऐसे विरह को तो रब ही दूर करे।
जब मिलन के किसी अहसास को दिल से भरे॥

कभी ये बिछोड़ा किसी के जीवन में न आये।
जो भूख – प्यास की सुध – बुध दे भुलाये॥

विरह को अपनी जिंदगी में न बसाना इस कदर।
काट डाले जो इंसान की खुशियों के पर॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आजकल के मानव एक ही परिवार में रहते हुए भी सभी परिवार के सदस्य एक दूजे से काफी दूर हो गए हैं। मोबाइल इंटरनेट की वर्चुअल दुनिया में इस कदर डूब गए हैं की उनके आसपास क्या हो रहा है उन्हें बिलकुल भी नही पता हैं। आधुनिकता के दौड़ में इस कदर अंधे हो गए है की सही व गलत का फर्क भी नही कर पाते, काम वासना के वशीभूत होकर अपना, परिवार का व समाज और अपने देश का सर्वनाश कर रहे हैं। अगर इसी तरह चलता रहा तो एक सदी के अंदर ही – संस्कार, संस्कृति व सभ्यता, सत्य कर्म, धर्म बिलकुल ही ख़त्म हो जायेगा। सब के सब धर्मभ्रष्ट व कर्मभ्रष्ट, विकारी हो जायेंगे। चारों तरफ पूरी पृथ्वी पर त्राहिमाम-त्राहिमाम होगा, सभी मन से पूर्ण अशांत होंगे। अब भी समय हैं हे मानव सुधर जाओ वर्ना, पछताने के अलावा कुछ भी नहीं बचेगा।

—————

यह कविता (विरह की दुनिया।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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कामना।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ कामना। ♦

कामना – पिपासा द्वितीय।

पात रहा श्रीहत पिंडज, अब्धि में निराश्रित,
मेघ पलक में अस्तित् था, रश्मियों का संङ्घात।
कृति का अभिषंङ्ग दिवस, से कर रहा छल छंद,
पुष्पप्रिये का स्नेह संहृति, हो चला अब बंद।

चढ़ रही थी श्यामता कंजई दिगंत से हीन,
मिलता अन्त्य विक्रांत द्युतिमा कंचन दीन।
यह अनाढ्य संधान रहा जोग इक दया लोक,
रंज भर विजन आगार से छूटते थे कोक।

मनुज अभी तक चिंतन करते थे लगाये ध्यान,
कृत्य के संवाद से ही भर रहे थे कान।
यहाँ सदन में इकट्ठे थे करण दावेदार,
मोहना कीलाल या शस्य का होने लगा संञ्चार।

नूतन पिपासा खींच लाती पाहुन का संकेत,
विचल रहा था सुगम प्रभुत्व युक्त उत्तम रुचि समेत।
ताकते थे बाहुल – शाख से उत्कंठा संसृष्ट,
मानव अचंभित यथार्थ प्रारब्ध का खेले अंदु – अवेष्ट।

अर्थ : कंजई = मिट्टी का रंग, द्युतिमा= प्रकाश, कोक= चकवा,
मोहना= घास, कीलाल= जानवर, शस्य= अन्न,
बाहुल = आग, अंदु= बंधन,

आगे…

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल`“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — किसान अच्छी फसल से अच्छे पैदावार के लिए सदैव ही कामना करता है। मौसम के मार से डरते हुए, सदैव ही प्रभु से यही प्रार्थना करता है की फसल तैयार होने तक कोई भी प्राकृतिक आपदा न आये प्रभु, हम आपके बच्चे है हम पर दया करे, कोई गलती हुई हो हमसे तो, हमें क्षमा करें। क्योकि हम अपने परिवार के साथ – साथ और भी मनुष्यों का पेट भरने का कार्य कर रहे है दिन रात एक कर। जहां एक ओर किसान चिंतित भी है तो वहीं दूसरी तरफ प्रभु का ध्यान भी कर रहा हैं। प्रभु सदैव ही सभी का अच्छा ही करते है, सभी को अपने – अपने कर्मो का भुगतान तो करना ही हैं।

—————

यह कविता (कामना – पिपासा द्वितीय) “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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