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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिंदी कविता

कच्चे धागे की प्रीत।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ कच्चे धागे की प्रीत। ♦

श्रावण मास की पूर्णिमा, एक पावन त्यौहार ले आई।
अटूट प्रीत, विश्वास व आस्था का एक और उपहार ले आई॥

रक्षाबंधन की प्रचलित है, ऐसी ऐतिहासिक कहानियाँ।
जो सुनते आए हम, अपने पुराण कथाओं की जुबानियाँ॥

एक कच्चा धागा अपने अंदर समाहित किए, सागर जितना प्यार।
एक भरोसा, निश्छल प्रेम से, दो आत्माओं को बांधे ये त्यौहार॥

भगवान विष्णु बलि की भक्ति से प्रसन्न होकर, भक्त के घर रहने आए भगवान।
फिर मां लक्ष्मी व्याकुल हो बलि को राखी बांध, हरि को ले आई बैकुंठ धाम॥

चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने भी, अपनी प्रजा की रक्षा के लिए हुमायूं को राखी भेजी।
तब हुमायूं ने भी उनकी राज्य की रक्षा कर, बहन की प्रीत दिल में सहेजी॥

जब इंद्राणी ने भी अपने पति की दानवों से रक्षा की, बांधकर रेशम का धागा।
फिर इंद्र के मस्तक पर, विजय श्री का तिलक लागा॥

महाभारत में शिशुपाल के वध से, जब श्री कृष्ण की उंगली से रक्त बहा था।
तब द्रोपदी ने साड़ी के पल्लू का अंश बांधकर, श्री कृष्ण को धर्म भाई कहा था।

एक बार यमदेव कई बरस तक, अपनी बहन यमुना से नहीं मिलने आए।
तब यमुना ने भी, प्यारी आंखों से नीर बहाए॥

फिर गंगा ने अपने भाई को, मिलने के संदेश पहुँचाये।
आकर बहन को प्यार से मिलकर, यमुना को अमृतत्व दे जाए॥

यह त्यौहार रक्षा – कवच के नाम से भी, अक्सर जाना जाए।
इस कच्चे धागे में तो, दो पावन आत्माओं का बंधन माना जाए॥

जब कच्चे धागे की प्रीत बसती चली जाए, ऐसा ही यह पर्व पावन।
सारी खुशियां देकर अब, रुखसत हो जाएगा सावन॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

मेरे सभी प्रिय पाठकों आप सबको तहे दिल से रक्षाबंधन पर्व पावन की शुभकामनाएं।-KMSRAJ51

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से भाई बहन के पवित्र प्रेम और रक्षा वचन से भरपूर पवित्र पर्व रक्षाबंधन का वर्णन किया है। भाई बहन एक दूजे के सच्चे मित्र भी है जन्म – जन्मांतर तक। रक्षाबंधन – भाई और बहन के प्रेम को दिखाता एक पवित्र पर्व।

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यह कविता (कच्चे धागे की प्रीत।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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अफगान में तालीबानी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ अफगान में तालीबानी। ♦

ऑफगान शासन में 1992 से 2001 तालिबान कायम रहा,
पाकिस्तान ने तालिबान का जन्म भी अफ़गान तालिबान से हुआ।
अफगान पर पंजशेर घाटी छोड़ कर – कब्जा लिया,
अफगान और पाकिस्तानी, तालिबान एक सिक्के के दो पहलू॥

कहते तो है कि इसमें शियाओं की फ़ौज अधिक होती,
जिसने गजनी चौक से अपनी बहनों को लुटते हुए देखी थी।
शिया हजारा नेता अब्दुल अली मजारी की प्रतिमा तोड़ा,
वतन के लिए लड़ने वाली महिला गवर्नर सलीमा मजारी को बंधक बना लिया॥

ऐसा मंजर वहां छाने लगा है, लगता देखकर इंसानियत भूल गया है,
जलालाबाद से आम जनता पर गोलियां बरसा कर मारा जा रहा॥

अफगान के गजनी चौक पर कभी हिंदू लड़कियां नीलाम होती,
आम सड़क पर आज मुस्लिम लड़कियों की बोली लगती।
कहते है ईश्वर की जुबान में आवाज नहीं होती है,
कहा ढाने वालों पर दुखी बौछार खड़ी होती है॥

काबुल हवाई अड्डे के बाहर जुटी भीड़ पर आतंकियों ने फायर किया,
जिसमे कई पत्रकार और आम आदमी घायल हुआ।
अफगान में चारों तरफ महिलाओं के पोस्टर पर कालिख लीपी,
अमेरिका का साथ देने वाले लोगों के मुंह पर कालीख पोती॥

तालिबान के खिलाफ पंज शेरघाटी से जनता सड़क पर उतरी,
उधर अमेरिकी हथियारों का जखीरा तालिबान के हाथ पड़ी।
कुंदूर एयरपोर्ट पर अमेरिकी गाड़ियों का जखीरा इकट्ठा किया,
टैंक टॉप ड्रोन विमान आदि सभी को तालिबान हथिया लिया॥

उधर पाकिस्तान – तालिबान आतंकियों को जेल से छोड़ रहा,
पांच बरस से बंद आतंकी महमूद रसूल को छोड़ दिया!
पाकिस्तानी विशेषज्ञों का कहना यह है कि पाकिस्तान में भी,
यही आतंकी गुट लंबे समय से पाक में पाकिस्तान से लग रहा था॥

अफगान के अजेय पंज शेरघाटी से, अमरूल्लाह सालेह ने बिगुल बजाया।
कार्यवाहक राष्ट्रपति गनी के विदेश, भाग जाने के बाद, खुद को बताया॥

अफगानी सुरक्षा एजेंसी के दफ्तर में, तालिबानियों ने तोड़फोड़ मचाया।
हथियारों के बल पर दफ्तर और घरों में लूट पाट मचाया,
बच्चियों के साथ बर्बरता की कोशिश करते सामने आया॥

तालीबानी शासक जब अपना पूरा शासन चलाएंगे,
अफगान में शरिया क़ानून थोपने वाले सख्त कानून लाएंगे।
हत्या के दोषियों को सार्वजनिक रुप से फांसी पर लटकाएंगे,
आरोपियों के अंग – भंग करने का नजारा देखने में आएंगे॥

पुरुषों में दाढ़ी रखना अनिवार्य कर दिया जाएगा,
महिलाओं को बुर्के में ढक कर पूरा शरीर रखनी होगी।
10 साल से ऊपर की बच्चियों को स्कूल जाने पर रोक होगा,
मानवाधिकार का सरेआम उल्लंघन होता दिखेगा?

पाकिस्तानी जो आज खुश हो रहे उनको भी दंश सहना होगा,
उनको अपनी देश में भी सरिया का पालन करना होगा।
गरीबों की शोषण के खिलाफ जनता को लड़ना होगा,
अपनी वतन की हिफाजत के लिए सबको मिलकर बढ़ना होगा॥

कौन अच्छे शिया सुन्नी समुदाय इस पर विचार करना होगा,
कठोर रुढ़िवादी रुख को अपनाने वालों को बदलना होगा।
दुनिया में हो शांति कायम, इस पर मिलकर काम करना होगा,
विश्व बंधुत्व हो कायम, के लिए सबको मिल आगे बढ़ना होगा॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में — वर्तमान समय में तालिबान के लड़ाकों या यूँ कहे इंसानियत के दुश्मन आतंकवादियों द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा और उनकी बर्बरता लूट, बलात्कार, हत्या, और खून खराबा को दर्शाया है।

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यह कविता (अफगान में तालीबानी।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें: अफगानी – दुर्दशा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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अफगानी – दुर्दशा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ अफगानी – दुर्दशा। ♦

दुनिया सारी मौन खड़ी,
तालिबानी – अफ़गान चढे!
माता – बच्चे – बहना सारी,
दहशत के माहौल में है पड़े।

अफरा-तफरी चारों तरफ,
अफगान के नागरिकों काे,
बुरे समय में नामी हस्तियां,
काबुल छोड़कर भाग रही।

महिला मेकर सारा करीमी,
फिल्मी मेकर जान बचाने की,
दुनिया से गुहार लगाने लगी,
कौन करेगा मदद दुखी सभी।

अफगानी है, के साथ वहां,
दुर्व्यवहार किया जा रहा!
मदद करो – मदद करो मेरी,
चारों तरफ हाहाकार मचा।

मानवता सारी नो – नो चुकी,
अफगानी लड़कियां दिखी।
तालिबानी सेना लडाके उनको,
उठा, उठा कर लेकर जा रहे।

मनमानी करते हैं उनके साथ,
बच्चियां बिल्कुल यही कह रहीं।
विरोध गर उनका कोई करता,
उनकी आंखे वह सब नोच रहे।

नन्हें – नन्नी बच्चे भूखे – प्यासे,
दूध पीने के लिए वह नहीं पा रहे।
उनकी जान बचेगी अथवा नहीं,
आगे बढ़कर कोई नहीं आ रहा।

अफ़गानी बैंक में भारी खड़ी,
पैसा आया था अपना पाने को!
हाथ खड़ा कर दिए बैंक सभी,
दिल थाम सारी जनता खड़ी।

भाग रहा था सारा समाज हित,
अपनी अपनी जान बचाने को!
कुछ अमरीकी विमान पर चढ़े,
लापरवाही, से गिर धरा मर गए।

नागरिकों को नहीं बचाने वाला है?
अफगानी सेना नतमस्तक वाली।
पहले ही तालीबानी अवस्था देखी,
उनका अत्याचार जनता थी सहती।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में — वर्तमान समय में तालिबान के लड़ाकों या यूँ कहे इंसानियत के दुश्मन आतंकवादियों द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा और उनकी बर्बरता लूट, बलात्कार, हत्या, और खून खराबा को दर्शाया है।

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यह कविता (अफगानी – दुर्दशा।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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सावन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ सावन। ♦

आया सावन
अति मनभावन
पड़ गए झूले
अमुआ की डाल पे
चल सखि झूलें
नभ तक ले – लें
पींगे सँभाल के।

आया सावन —
करतल करके
वृक्षों के पात भी
मिल बूँदों से
ख़ुश हो कर के
करते हैं बात भी।

आया सावन —
प्यासी धरती
सूखे हैं गात भी
जल बिन तरसी
बदली बरसी
जल की सौग़ात दी।

आया सावन —
बम-बम भोले
गूँजे शिव द्वार पे
शंकर भोले
सारे बोलें
तू पालनहार रे।

आया सावन —
चूनर धानी
धरती ने ओढ़ ली
बरखा रानी
करे मनमानी
सागर से होड़ की।

आया सावन —
काग़ज़ कश्ती
पानी में डाल के
छोड़ के सुस्ती
मिलकर मस्ती
करते हैं बाल रे।

आया सावन —
साजन सजनी
हाथों में हाथ ले
अपनी अपनी
प्रेम प्रीत की
करते हैं बात रे।

आया सावन —
जंगल – जंगल
नाचे हैं मोर रे
नभ से थल तक
केवल जल-जल
नदियों का शोर रे।
आया सावन,
अति मनभावन।

♦ वेदस्मृति ‘कृती’ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

—————

  • “वेदस्मृति ‘कृती’ जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों में समझाने की कोशिश की हैं – सावन के मौसम में धीमी – धीमी बारिश का होना, प्रकृति का खूबसूरत दृश्य, झूला-झूलना, हर तरफ हरियाली ही हरियाली, पृथ्वी पर चारो ओर प्रकृति का सुन्दर नज़ारा नजर आती है। मन खुशियों में झूमता है जैसे मोर मस्त होकर नाचता हैं।

—————

यह गीत/कविता/आर्टिकल (सावन।) ” वेदस्मृति ‘कृती’ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/गीत सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई आई टी . शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक. समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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प्रातः उठ हरि हर को भज।

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♦ प्रातः उठ हरि हर को भज। ♦

प्रातः उठ हरि हर को भज लो,
धरती का अभिनंदन कर लो।
उल्लसत मनसे बंदन कर लो,
मुक्त कंठ में चंदन धर लो॥

निर्मल पानी गुनगुन पी लो,
चाय की चुस्की रुक कर ले लो।
लिखनी ले साहित्य लिख लो,
प्रातः उठ हरि हर भज लो॥

नित्य – क्रिया में निवृत्ति हो,
गंगा जल ले काया धो लो।
धूप – दीप ले प्रभु से बोलो,
प्रातः उठकर आंखें खोलो॥

पेपर आया उसको पढ़ लो,
देश दुनिया की खबर ले लो।
दूरदर्शन से – मेल कर लो,
प्रातः उठ हरि विनती कर लो॥

भूखा – नंगा जो भी भेजा,
झोली सबकी भर के दे दो।
कोई खाली हाथ न जाये,
प्रातः उठकर प्रभु से बोलो॥

कभी न गलती हरि करने दो,
स्वच्छ हृदय मन भरने को।
अपना हमको प्रभु बना लो,
प्रातः उठ हरिहर को जप लो॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में बताया है, सुबह उठकर आपका नित्य क्रिया कर्म, का क्या क्रम होना चाहिए। जिससे आपका हर एक कार्य शांति पूर्वक, सही समय पर पूर्ण हो जाये।

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यह कविता (प्रातः उठ हरि हर को भज।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें: पृथु का प्रादुर्भाव।

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हार्दिक शुभकामनाएं – नीरज चोपड़ा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हार्दिक शुभकामनाएं – नीरज चोपड़ा। ♦

खिलते कंवल की तरह, तू राष्ट्रीय पहचान बन गया।
नीरज तू अपने नामानुरूप खिल कर, देश की शान बन गया॥

तूनें तो, एक गौरवमय इतिहास ही रच डाला।
बचपन से शौकीन, पकड़ हाथ में भाला॥

कभी अपने दर्द की भी, तूनें नही की परवाह।
सदैव सपनों को हकीकत में बदलने की, भरी आह॥

बना है तू देश का प्रहरी, अपने स्वप्न को भी शिखर तक पहुचाया।
एक नमन तेरे मात-पिता को, जिनका सीना आज गर्व से भर आया॥

कोटिशः सादर वंदन तेरे गुरु को, जिसने अपने शिष्य के नाम का परचम लहरवाया।
तूनें भी शिष्य-गुरु की परंपरा को रख कायम, गुरु का मान बढ़ाया॥

हार्दिक बधाइयां नीरज चोपड़ा तुम्हें, तू बन गया आज बुलंदी के आसमाँ का सितारा।
इस गौरवमय दिन के लिए, हर भारतीय का दिल ऋणी रहेगा तुम्हारा॥

हार्दिक बधाइयां💐हार्दिक बधाइयां॥

भारत के स्टार जैवलीन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक में 87.58 मीटर दूर भाला फेंककर गोल्ड मेडल पर अपना कब्जा जमाया है। भारत के पिछले सौ साल के इतिहास में यह ट्रैक एंड फील्ड में पहला ओलंपिक मेडल है। ट्रैक एंड फील्ड में गोल्ड मेडल जीतकर नीरज ने अपना नाम ओलंपिक इतिहास में सुनहरे अक्षरों से दर्ज करवा लिया है।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा को तहे दिल से हार्दिक शुभकामनाएं दी है, गौरवमयी इतिहास रचने के लिए।

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यह कविता (हार्दिक शुभकामनाएं – नीरज चोपड़ा।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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भारत में भूतहा जगह कहां और कौन?

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♦ भारत में भूतहा जगह कहां और कौन? ♦

भारत में भूत-ही जगह देखने जब जाइए,
नियम और कानून का पालन करते हुए जाइए।
आप जब स्थानीय आदेश पर चलोगे अगर,
तो पर्यटन का आनंद मिलता रहेगा मंगल॥

पुणे का शनिवार बाड़ा किला है पुराना महान,
बाजीराव पेशवा से जुड़ा हुआ है यह स्थान।
हॉन्टेड माना जाने वाला इस किले के अंदर,
मना किया जाता है सूरज डूबने के बाद जाना॥

राजस्थान के अलवर में स्थित भानगढ़ का किला,
बहुत ही सुंदर सुहाना लेकिन किला है डरावना।
कहते 17 वीं सदी में इसका निर्माण हुआ था,
भूतिया गतविधियों से विद्यमान यह किला है।
सूरज डूबने के बाद शाम से यहां इंट्री बंद रहती,
यहां चाहे कोई राजनीतिक जाए या आए विद्वान॥

मुंबई के कोलाबा में स्थित है मुकेश मिल्स,
देश की 10 हॉन्टेड जगहों में यह शामिल हिल।
फिल्मों की शूटिंग के लिए मशहूर है मिल,
भूतों की कहानियां से भरपूर है सबका दिल॥

राजस्थान से 18 किलोमीटर दूरी पर स्थित गांव,
कुलधरा गांव में कभी 600 परिवार रहते थे।
सुना था रसोई के बाद यहां भी कोई नहीं रहता,
रातों रात गांव छोड़ कर लोग कहीं चले गये॥

हैदराबाद का गोलकुंडा फोर्ट का 13 वीं सदी में निर्माण हुआ,
इस फोर्ट में रानी तारामती की आत्मा रात में चलती है।
जिसको पति के साथ यहां दफनाया गया था,
डांस करती और डांस करने की आवाज आती॥

बृज राजभवन पैलेस कोटा राजस्थान में स्थित,
लगभग 180 वर्ष पुराना बताया जाता रहा है।
पैलेस को 18 सौ अस्सी में हेरिटेज होटल बना दिया गया,
हेरिटेज होटल में एक ब्रिटिश मेजर बर्टन का भूत रहता है।
ब्रिटिश मेजर बर्टन को सन 1857 में ही मारा गया था,
मेजर को भारतीय सिपाहियों ने हीं मारा था॥

दार्जिलिंग का डाव हिल, कुर्सियांग इलाका,
प्राकृतिक खूबसूरती में बहुत ही मशहूर है।
स्थानीय लकड़ हारो का कहना है कि यहां,
बिना सिर वाला एक लड़का टहलता रहता है।
यह इलाका भुतहा अनुभव से भरा हुआ है,
जंगल में लकड़ी काटने वालों ने सिर विहीन लड़का देखा॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में भारत के सभी मुख्य भूतहा जगह के बारे में बताने की कोशिश की है जो काबिले तारीफ है। भारत में भूत-ही जगह देखने जब जाइए, नियम और कानून का पालन करते हुए जाइए। आप जब स्थानीय आदेश पर चलोगे अगर, तो पर्यटन का आनंद मिलता रहेगा मंगल॥

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यह कविता (भारत में भूतहा जगह कहां और कौन?) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

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हस्तिनापुर नरेश परीक्षित।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हस्तिनापुर नरेश परीक्षित। ♦

युधिष्ठिर द्रोपदी आदि से अनुमति लेकर,
श्री कृष्ण ने द्वारिका पुरी का किया प्रस्थान।
आंखों से ओझल हो जाने पर श्री कृष्ण के,
प्रेम जनित उत्कंठा के पर बस अर्जुन गुणवान॥

अभिन्न निर्दयता और प्रेम व्यवहार लिए,
याद पर याद आती रही वहीं बारंबार उन्हें।
शरीर प्राण से रहित होती तो मृत्यु होती सुने,
परंतु श्री कृष्ण वियोग में संसार अप्रिय दिखता उन्हें॥

उन्हीं के सानिध्य में देवताओं और इंद्र को भी,
जीत कर अग्नि देव को खांडव वन दान किया।
अनु जय भीम सेना ने उन्हें की शक्ति सेवा कर,
अभिमानी जरासंध का भी वध था किया॥

जिन राजाओं को जरासंध ने बंदी था बनाया,
उन्हीं बहुत राजाओं को भगवान ने मुक्त कराया।
जिन – जिन दुष्टों ने भरी सभा में महारानी,
द्रोपदी को छूने का साहस रहा किया॥

आंखों में बिखरे आंसू भरकर तब द्रोपदी,
श्री कृष्ण के चरणों में जा गिरी पड़ी।
उस घोर अपमान का बदला लेने को,
भगवान श्री कृष्ण ने प्रण तब था ठाना॥

मन खडयंती दुर्योधन में आकर वन वास में,
ऋषि दुर्वासा ने हमें दुष्कर संकट में डाला था।
बचे पात्र की शाक की एक पत्ती के भोग,
लगाकर श्री कृष्ण ने हम सबको पता उबारा॥

भगवान के प्रताप से युद्ध में भी हमने आकर,
पार्वती सहित शंकर को आश्चर्य में डाला।
युद्धभूमि खुश होकर शंकर ने अस्त्र पशुपति प्रदान किया,
तरह-तरह के अस्त्र-शस्त्र लोक पालों ने हमें दिया॥

श्रेष्ठ पुरुष मुक्ति पाने को जिन चरणों का सेवन करते!
उन्होंने दुर्लभ और दुस्तर कार्यों को भी सरल बना डाला॥

युद्ध क्षेत्र में वही हमारे रथी बने रहे,
गांडीव धनुष और बाण बहुतेरे पर,
जबकि अस्त्र – शस्त्र सब सधे हैं मेरे,
फिर भी आज रथी मैं अर्जुन हूं॥

बड़े-बड़े राजा कल तक जो सिर झुकाते थे,
श्री कृष्ण के बिना वही सब सार शून्य हो गये।
युद्ध क्षेत्र में उनकी दी गई शिक्षाएं सभी हमको,
तब – तक शांति करने वाली होती थी॥

श्री कृष्ण के चरण कमलों का चिंतन करने से,
अर्जुन की चित्तवृत्ति जब निर्मल होने लगी,
भक्ति में गण के प्रवाह, प्रबल प्रवाह मंथन ने,
अर्जुन के सारे विकारों को बाहर कर डाला॥

बुद्ध क्षेत्र के भगवान श्री कृष्ण का उपदेश,
गीता – ज्ञान पुण्यस्मरण के साथ आया पाले।
जन्म मृत्यु रूपी संसार से मुख्य मुड़ता गया,
अपने को श्रीकृष्ण में लगाते हुए चला, लगाते हुए चला॥

लोक सृष्टि के भगवान श्री कृष्ण ने,
यादव शरीर से पृथ्वी का भार उतारा।
उसी मनुष्य के शरीर का उन्होंने,
पृथ्वी से परित्याग कर डाला॥

इधर पृथ्वी पर कलयुग ने आकर पांव पसारा,
देख महाराज युधिष्ठिर ने महाप्रस्थान का निश्चय कर डाला।
सहित समान गुणों से युक्त पौत्र परीक्षित को,
समुद्री से गिरी हस्तिनापुर का राजा बना डाला॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में बताया हैं की — किस तरह सभी देवी देवताओं ने महाराजा परीक्षित को तरह-तरह के अस्त्र-शस्त्र प्रदान किया। हस्तिनापुर नरेश परीक्षित के जीवन पर सटीक प्रकाश डाला है। अर्जुन का श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति और प्रेम को दर्शाया हैं।

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यह कविता (हस्तिनापुर नरेश परीक्षित।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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आज न जाने क्यों?

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ आज न जाने क्यों? ♦

आज न जाने क्यों मेरे हर हौसले है, यूं बेबजह पस्त हुए?
इस दुनियां में हर आदमी, क्यों बेपरवाह और व्यस्त हुए?

आज है फुरसत नहीं यहां, किसी को किसी से बतियाने की।
रही तहजीब नहीं है शेष अब, किसी में किसी को मनाने की।

जो रूठ गया सो रूठ गया, फिर करता ही कोई बात नहीं।
अरे भाई सुलह भी तो रास्ता है, हर बात का हल तलाक नहीं।

नेमत है यह जिन्दगी खुदा की, यूं ही तो कोई इतेफाक नहीं।
सौदे जिन्दगी के हैं ये दोस्त, कोई सड़कों पर बिछी खाक नहीं।

बुजुर्गों की अब सुनता ही कौन है? युवा नशों में है खो गए।
चोर – उचक्के घूम रहे हैं खुले आम आज, कोतवाल है सो रहे।

ऊपर से नीचे तक है फैल गया, देखो तो आज भ्रष्टाचार यहां।
आदमी से आदमी का रिश्ता है स्वार्थ का, रहा कहां अब प्यार यहां?

खौलता है देख के खून तो अपना, यह लूटपाट होती खुले आम, में।
चाहकर भी न कर पाता हूं इच्छित कुछ, फंस जाता हूं बने विधान में।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बताया है की “आजकल के युवाओं का जीवन किस राह पर भटक रहा है, उनको खुद ही नही मालूम। उनके अनियंत्रित भटकते हुए जीवन का कोई किनारा नहीं।” ये कैसा समय चल रहा है जहां खुले आम लूटपाट होती है। चोर – उचक्के घूम रहे हैं खुले आम आजकल, कोतवाल है सो रहे।

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यह कविता (आज न जाने क्यों?) “हेमराज ठाकुर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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जीवंत भाषा में ग्राही शक्ति।

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♦ जीवंत भाषा में ग्राही शक्ति। ♦

जीवंत भाषा का उत्तम लक्षण,
उसकी ग्राही का शक्ति होती है।
विशेषता के अनुरूप औरों से,
जितना अधिक ग्रहण कर लेते।

दूरगामी प्रभाव उसका प्रांजल।
हिंदी ने ग्रहण करने की दिशा में,
उदासीनता कभी नहीं दिखाई।
जब भी जैसे जरूरत पड़ी उसने,
अपनी भाषा शक्ति समृद्धि बढ़ाई।

विभिन्न भाषाओं की शब्द शैली,
यात्रा लंबी चलकर कदम बढाई।
ज्यों ज्ञान – विज्ञान विस्तृत होता,
हिंदी की शक्ति यदि और बढ़ती।

ग्रहण शीलता से संपन्नता आती,
हिंदी साहित्य के और काम बाकी।
चिंतन मनन में कमी न हो उदासी,
ज्ञान दर्पण के क्षेत्र में बढ़े देश वासी।

हिंदी साहित्य का बढ़ाया ज्ञान,
संस्कृत का अधिकांश ही दान।
शब्द शैली पद रचना व व्याकरण,
हिंदी अलंकार से अलंकृत होती।

भाषा संस्कृत संकुचित सीमा से पार,
जनता के विशाल क्षेत्र में जब आई!
भाषा की सहजता का प्रयोग प्रश्न,
जनता के अनरूप करने की पाई।

माना कि शासन प्रशासन शिक्षा का,
हिंदी करण तेजी से आगे बढ़ रहा है।
विस्तार के अनुकूल शब्द भंडार भरे
अनिवार्यता का अभाव भी खल रहा।

दुनियां ने ज्ञान विज्ञान की दौड़ में,
तेजी से विस्तार की रफ्तार बढ़ाया।
हिंदी शब्द भंडार में बहुलता मूल्य,
विरासत में पैतृक सम्पत्ति से पाया।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में — हिंदी भाषा के गुणों और महत्व को बताते हुए अन्य भाषाओं में इसकी उपयोगिता को बताया है, चाहे वो संस्कृत की भाषा को निखारने की बात हो या अन्य भाषा की। हिंदी भाषा में जो अपनापन है वो दुनिया के किसी भी अन्य भाषा में नही है।

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यह कविता (जीवंत भाषा में ग्राही शक्ति।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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