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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिन्दी-कविता

योग ही जीवन है।

Kmsraj51 की कलम से…..

Yog Hi Jeevan Hai | योग ही जीवन है।

12 जनवरी 1863 को जन्मे नरेन्द्र दत्त,
कलकत्ता श्री विश्वनाथ दत्त जी के घर,
अंग्रेजी पढ़ाकर इनको,
पाश्चात्य सभ्यता में ढालना चाहा पर,
इन बातों से जीवन पर गहरा हुआ असर।

बचपन से ही तीव्र बुद्धि के कारण,
इनके जीवन पर हुआ ये असर,
परमात्मा को पाने की लालसा,
मन में कर गई घर,
इन बातों से जीवन पर गहरा हुआ असर।

ब्रह्म समाज में पहूंच गए,
वहां भी शांति न आई नज़र।
1884 में पिता की मृत्यु का हुआ ये असर,
अपने कंधों पर संभाला अब सारा घर,
इन बातों से जीवन पर गहरा हुआ असर।

शादी नहीं की इन्होने,
अतिथि सेवा करते थे ये,
स्वयं भूखे प्यासे रहकर,
परमहंस जी के पास गए सोच विचार कर,
इन बातों से जीवन पर गहरा हुआ असर।

परमहंस जी की कृपा से,
इनका हुआ आत्म सत्कार,
संन्यास लेने के बाद हुआ,
विवेकानंद जी नाम प्रखर,
इन बातों से जीवन पर गहरा हुआ असर।

अंत समय गुरुदेव जी,
कैंसर से हुए ग्रस्त,
उनकी सेवा में लग गए,
घर, भूख प्यास को त्याग कर,
इन बातों से जीवन पर गहरा हुआ असर।

25 वर्ष की आयु में गेरुआ वस्त्र धारण किया,
पुरे भारत को पैदल यात्रा कर नाप दिया,
1893 में शिकागो (अमेरिका) पंहूचे,
भारत के प्रतिनिधित्व बनकर,
इन बातों से जीवन पर गहरा हुआ असर।

उनकी बातों से यूरोप अमेरिका पर,
गहरा हुआ असर,
अध्यात्म विद्या, भारतीय दर्शन करवाया,
रामकृष्ण मिशन की शाखाएं फैलाकर,
इन बातों से जीवन पर गहरा हुआ असर।

देश देशांतरो में भारत का नाम किया,
योग गुरु की उपाधि पाकर,
दीन दुखियों की सेवा कर,
4 जुलाई 1902 को अमर हो गए,
अपनी देह त्याग कर,
इन बातों से जीवन पर गहरा हुआ असर।

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

—————

  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए; इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — जब तक कोई बात स्वयं प्रत्यक्ष न कर सको, तब तक उस पर विश्वास न करो–राजयोग यही शिक्षा देता है। सत्य को प्रतिष्ठित करने के लिए अन्य किसी सहायता की आवश्यकता नहीं।” स्वामी विवेकानंद का मत है कि योग का अनुशीलन भी ज्ञान की भाँति व्यवस्थित तरीक़े से होना चाहिए और इसमें तर्कशीलता का अवलम्बन करना चाहिए।

—————

यह कविता (योग ही जीवन है।) “विजयलक्ष्मी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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योग बनाए निरोग।

Kmsraj51 की कलम से…..

Yog Banaye Nirog | योग बनाए निरोग।

स्वच्छ वायु से स्वस्थ बने हर श्वास,
करे नियमित व्यायाम एवं योग अभ्यास।

तंदुरुस्त शरीर, संतुलित आहार,
सेहतमंद दिनचर्या, मंथन और विहार।

नित नियम से जो करे रोज़ प्राणायाम,
शांत चित्त मन से वो छूए सभी आयाम।

शरीर से आत्मा को जोड़ना ही योग है,
प्रकृति के गोद में मानव सदा निरोग है।

पठन – पाठन, मनन – चिंतन में सहायक योग है,
ध्यान केंद्रित कर स्वस्थ जीवन यापन ही योग है।

संतुलित होता मन, प्रफुल्लित रहता है तन,
व्यायाम करता पोषित मनन और चिंतन।

शुद्ध हवा धमनियों में उर्जा का संचार करती,
आसनों का अभ्यास उर भीतर चेतना भरती।

आदियोगी शिव शंभू है जनक योग के,
योग अभ्यास से मनुज सदा मुक्त रहे रोग से।

एसिडिटी, शर्करा, बीपी से छुटकारा दिलाये,
योग के आगे आधुनिकता भी फेल हो जाये।

लाइलाज बीमारियों का योग ने निदान किया,
योग के रूप में आदियोगी ने वरदान दिया।

साईटिका, स्लिप डिस्क को भी योग ने ठीक किया,
वजन का नियंत्रण भी अब योग करके सीख लिया।

फायदे योग अभ्यास के और कितने आप को गिनाये,
जब तक श्वास शेष है, नियमित योग करते जाये।

♦ नंदिता माजी शर्मा – मुंबई, महाराष्ट्र ♦

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  • “नंदिता माजी शर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — भाई अपने तन से मन से, दूर कुरोग करें। आओ योग करें। — योग कर्म है, योग धर्म है, · ऋषियों-मुनियों के निरोग जीवन का, योग ही तो एक मर्म है। सेहत का राज छिपा है योग में। जीवन का आनन्द रहना निरोग में।। छरहरी काया और शान्तिप्रद मन। हर रोज़ सुबह के समय योग करने के फायदे अनमोल है – यह हमारी पहली सांस को पुन: चक्रित करता है। योग का अभ्यास करने से शरीर किक-स्टार्ट होता है। ह्रदय रोग से बचाव करता है योग। दिमाग सदैव ही रहता है एक्टिव। बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता। योग के द्वारा सांसों को साध कर परमानन्द की अनुभूति किया जा सकता है। तन और मन को निरोग रखने के लिए प्रतिदिन योग करे।

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यह कविता (योग बनाए निरोग।) “नंदिता माजी शर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी मुक्तक/कवितायें/गीत/दोहे/लेख/आलेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

नाम – नंदिता माजी शर्मा

साहित्यिक नाम : नंदिता “आनंदिता”
लेखिका/डिजीटल अलंकरणकर्ता/कवियत्री/समाज सेविका 
संस्थापक/अध्यक्ष — कर्मा फाऊंडेशन
राष्ट्रीय सह-अध्यक्ष — साहित्य संगम संस्थान (पंजीकृत साहित्यिक संस्था)
अलंकरण प्रमुख — साहित्योदय(पंजीकृत साहित्यिक संस्था)
अलंकरण अधिकारी — अंतरराष्ट्रीय शब्द सृजन
प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष — साहित्य संगम संस्थान, (महाराष्ट्र इकाई)
जिला प्रभारी — एन.जी.टी.ओ
मीडिया प्रभारी — महाराष्ट्र शब्दाक्षर
मुख्य संपादक — दोहा संगम ( मासिक ई पत्रिका )
प्रधान संपादक — वंदिता ( मासिक ई पत्रिका )
मुख्य संपादक — महाराष्ट्र मल्हार ( मासिक ई पत्रिका )
प्रधान संपादक — आह्लाद मासिक ई-पत्रिका
प्रधान संपादक — अविचल प्रभा मासिक ई-पत्रिका

कई विधाओं में लेखन।

अनेक ई-पत्रिकाओं का सफल संपादन।
विभिन्न साहित्यिक मंचो और गोष्ठियों से ‘श्रेष्ठ रचनाकार’ ‘सर्वश्रेष्ठ रचनाकार’ इत्यादि अनेक सम्मान प्राप्त।
हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में स्वतंत्र लेखन।
०६ साझा – संग्रह ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज।
अनावृत संचालन हेतु लन्दन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
०१ साझा – संग्रह इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज।
०१ दिव्याक्षर ब्रेल साझा – संग्रह वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज।
हिंदी अकादमी, मुंबई द्वारा साहित्य भूषण सम्मान २०२३ से सम्मानित।

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योग दिवस।

Kmsraj51 की कलम से…..

Yog Divas | योग दिवस।

आओ हम सब मिलकर,
योग दिवस मनाते हैं।
सारे संसार में,
इसकी अलख जगाते है।

योग से हम बीमारी को,
दूर भगाते है।
सदियों पुराना योग का,
इतिहास यही पुरानी पद्धति है।

ऋषि मुनि ने भी इसे आगे बढ़ाया,
हम सब इसे विश्व में फैलाते हैं।
योग हमारी साधना,
इसकी हम आराधना करते हैं।

दुनिया में सबसे पहले,
भारत ने ही योग सिखाया है।
अद्भुत शक्ति योग्य ही,
भारत ने बतलाया है।

योग से होते अनेक फायदे,
योग को अपनाना है।
योग करने से ना कोई बीमारी,
पास आती, स्वास्थ्य उत्तम रहता है।

अनुलोम विलोम कपालभाति,
भ्रामरी योग लाभकारी है।
शक्तियों का सुंदर भंडार,
योग कर सक्रिय बनाना है।

जिसकी काया होती निरोगी,
जीवन उसका अच्छा है।
योग स्वास्थ्य को रखता स्वस्थ,
यह एक संजीवनी है।

इंद्रियों को रखता केंद्रित,
ईश्वर से होता परिचय है।
योग का हम करें प्रचार,
लोगों को स्वस्थ बनाना है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — सेहत का राज छिपा है योग में। जीवन का आनन्द रहना निरोग में।। छरहरी काया और शान्तिप्रद मन। हर रोज़ सुबह के समय योग करने के फायदे अनमोल है – यह हमारी पहली सांस को पुन: चक्रित करता है। योग का अभ्यास करने से शरीर किक-स्टार्ट होता है। ह्रदय रोग से बचाव करता है योग। दिमाग सदैव ही रहता है एक्टिव। बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता। योग के द्वारा सांसों को साध कर परमानन्द की अनुभूति किया जा सकता है। तन और मन को निरोग रखने के लिए प्रतिदिन योग करे।

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यह लेख (योग दिवस।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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30 मिनट का डेली डोज।

Kmsraj51 की कलम से…..

30 Minute Daily Dose | 30 मिनट का डेली डोज।

30 मिनट का डेली डोज,
भगाए हमारे सारे रोग।
योग का हमें मिला वरदान,
क्यूं न करें इसका निदान।

सूर्य नमस्कार का करें प्रयोग,
तन मन स्वस्थ हेतु करें उपयोग।
योग से जीवन होता निरोग,
यही है एक सुंदर संयोग।

शरीर को रखता चुस्त दुरुस्त,
बीमारी को जड़ से करता पस्त।
योग करें, भाई योग करें,
दूर सभी हम रोग करें।

आलस दूर भागता है,
तन स्वस्थ सुखी बनाता है।
चलो आज एक जन संदेश फैलाए,
बिजी लाइफ से कुछ समय बचाएं।

करें 30 मिनट का नित्य डेली डोज,
पास न फटकेगा कोई रोग।

जिसका आज शरीर है निरोग,
वही सुखी, ये जान ले लोग।
योग करें, भाई योग करें,
दूर सभी हम रोग करें।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — हर रोज़ सुबह के समय योग करने के फायदे अनमोल है – यह हमारी पहली सांस को पुन: चक्रित करता है। योग का अभ्यास करने से शरीर किक-स्टार्ट होता है। ह्रदय रोग से बचाव करता है योग। दिमाग सदैव ही रहता है एक्टिव। बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता। योग के द्वारा सांसों को साध कर परमानन्द की अनुभूति किया जा सकता है। तन और मन को निरोग रखने के लिए प्रतिदिन योग करे। आओ हम सब मिलकर, योग दिवस मनायें। पद्मासन हो वज्रासन हो, या हो चकरा आसन, ध्यानमग्न हो बैठ जायें, बिना करे प्राशन। आओ हम सब मिलकर योग दिवस मनायें।

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यह कविता (30 मिनट का डेली डोज।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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योग करो।

Kmsraj51 की कलम से…..

Yog Karo | योग करो।

भगवान शिव से जिसकी शुरुआत हुई,
हितकारी बन विश्व में फैला हुआ है।

करो तुम शुरुआत आज से ही,
सभी बीमारियों का तोड़ योग है।

महंगाई के युग में सस्ता एक साधन,
प्राचीन पद्धति योग जिसका नाम है।

करके योग रहो तुम सदा निरोग,
ना खर्चा, ना कोई नुकसान है।

योग स्वस्थ रहना हमें सिखाता,
योग फुर्तीला शरीर बनाता है।

मोटापा डरकर इससे भागता,
चमकाता हमारी काया है।

आज से ही शुरुआत तुम करो,
खुशियां जीवन में लाता है।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — हर रोज़ सुबह के समय योग करने के फायदे अनमोल है – यह हमारी पहली सांस को पुन: चक्रित करता है। योग का अभ्यास करने से शरीर किक-स्टार्ट होता है। ह्रदय रोग से बचाव करता है योग। दिमाग सदैव ही रहता है एक्टिव। बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता। योग के द्वारा सांसों को साध कर परमानन्द की अनुभूति किया जा सकता है। तन और मन को निरोग रखने के लिए प्रतिदिन योग करे।

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यह कविता (योग करो।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. ए. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।

सम्मान पत्र -180 ऑनलाइन सम्मान पत्र, चार बार BSF से सम्मानित, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सोसायटी से सम्मानित, नेहरू युवा केंद्र बाड़मेर से सम्मानित, शुभम संस्थान और विश्वास सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित, प्रज्ञा क्लासेस बाड़मेर द्वारा, आकाशवाणी से लगातार काव्य पाठ, सम्मानित, बीएसएफ में वेलफेयर के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने हेतु सम्मानित। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, प्रेसिडेंट ग्लोबल चेकर अवार्ड।

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योग।

Kmsraj51 की कलम से…..

Yog | योग।

अण्ड – ब्रह्माण्ड की महा विद्या है, योग जिसका नाम है।
यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान है॥
समाधि जिसकी चर्म अवस्था, जिसमें तत्व का ज्ञान है।
योग सिखाए जीव को भक्ति – मुक्ति और ब्रह्म ज्ञान है॥

मिथ्या जगत और ब्रह्म सत्य है, यही तो योग का सार है।
परम ब्रह्म ही शाश्वत है इस जग में, नश्वर यह संसार है॥
पीढ़ी दर पीढ़ी ले आना, इसे, यह गुरुओं का उपकार है।
निरोगी काया प्रभु की छाया सत है, बाकी सब विकार है॥

स्थूल जगत में रमता है भोगी, सूक्ष्म से योगी को प्यार है।
मैं और मेरा प्रभुत्व लालसा, यह तो नीरा ही अहंकार है॥
योगी को प्यार अंतर्जागत है, भोगी को तो बाह्य संसार है।
योग जगत की परा विद्या, इस पर ज्ञानी का अधिकार है॥

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आओ हम सब मिलकर, योग दिवस मनायें। पद्मासन हो वज्रासन हो, या हो चकरा आसन, ध्यानमग्न हो बैठ जायें, बिना करे प्राशन। आओ हम सब मिलकर योग दिवस मनायें। हर रोज़ सुबह के समय योग करने के फायदे अनमोल है – यह हमारी पहली सांस को पुन: चक्रित करता है। योग का अभ्यास करने से शरीर किक-स्टार्ट होता है। ह्रदय रोग से बचाव करता है योग। दिमाग सदैव ही रहता है एक्टिव। बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता। योग के द्वारा सांसों को साध कर परमानन्द की अनुभूति किया जा सकता है। तन और मन को निरोग रखने के लिए प्रतिदिन योग करे।

—————

यह कविता (योग।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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योग दिवस – 21 जून

Kmsraj51 की कलम से…..

Yog Divas June 21 | योग दिवस – 21 जून

आज 21 जून के अंक
अखिल संस्कृति के मनस – प्रवाह।
योग का यह सुंदर उद्देश्य,
जगाया जन चेतन मन चाह।

प्रेरणा का पावन उद्गार,
योग से होते सभी निरोग।
यही सम्यक संत विचार,
विश्व महिमा मंडित उद्योग।

पिलाते कटुता कूट स्नेह,
पढ़ाते मानवता का पाठ।
यही सम मिश्र अहिंसा सत्य,
काछते सब सेवा का ठाट।

राग – रंग संगम ‘मंगल’ भाव,
सुझा देते सबको यह राह।
योग का यह सुंदर उद्देश्य,
जगाया जन चेतन मन चाह।

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — हर रोज़ सुबह के समय योग करने के फायदे अनमोल है – यह हमारी पहली सांस को पुन: चक्रित करता है। योग का अभ्यास करने से शरीर किक-स्टार्ट होता है। ह्रदय रोग से बचाव करता है योग। दिमाग सदैव ही रहता है एक्टिव। बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता। योग के द्वारा सांसों को साध कर परमानन्द की अनुभूति किया जा सकता है। तन और मन को निरोग रखने के लिए प्रतिदिन योग करे।

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यह कविता (योग दिवस – 21 जून) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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गौरैया सबको भाये।

Kmsraj51 की कलम से…..

Gauraiya Sabko Bhaaye | गौरैया सबको भाये।

नीम डाल पर नाचूं गाऊं,
जीवन की बगिया महकाऊं।
घर आंगन में दाना चुगती,
चीं चीं करती सदा फुदकती।

बाज झपट्टा मार सके ना,
काठ नीड़ में करती मस्ती।
उठकर भोर पहर मैं धाऊं,
जीवन की बगिया महकाऊं।

भोर हुआ उठ जाओ बाबू ,
स्वस्थ रहो इठलाओ बाबू।
मात – पिता के प्यारे तुम हो,
सबका साथ निभाओ बाबू।

मंगलमय हो जीवन सबका,
यही सहारा सबसे पाऊं।
नीम डाल पर नाचूं – गाऊं,
जीवन की बगिया महकाऊं।

टंगा काठ का बना घोसला,
संरक्षण का बढ़ा हौसला।

कुशल क्षेम की बात न पूछो,
संरक्षण का यही सिलसिला।
गौरैया हूं सबको भाऊं,
नीम डाल पर नाचूं – गाऊं,
जीवन की बगिया महकाऊं।

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — गौरैया हमारे घर-आँगन का पक्षी है। यह ‘ची-ची’ करके बोलती है। गौरैया बहुत सामाजिक पक्षी होती हैं। वे आमतौर पर छतों, पुलों और पेड़ के खोखले में अपने घोंसले का निर्माण करते हैं। शहरों में तो ये इंसानों के घरों के खिड़की के ऊपर या फिर घरों के छत पर अपना घोसला बना लेते हैं। सवेरा होने पर इनका कलरव सुनाई देता है। धर्म पुराणों के अनुसार, गौरैया पक्षी साहस और सावधानी के प्रतीक के रूप में माना जाता है। यह पक्षी आपको जीवन की परेशानियों में साहस दिखाना सिखाता है। साथ ही खुशियों की अहमियत याद दिलाने के लिए ये पक्षी आपके जीवन में आते हैं। कुछ अन्य जानकारों का मानना है कि पक्षी घर में सद्भावना का संदेश लेकर आते है। वास्तु शास्त्र के मुताबिक गौरैया का मनुष्य जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। गौरैया जिस घर में अपना घोंसला बनाती है, वहां सभी तरह के वास्तु दोष दूर हो जाते हैं। घर की उत्तर दिशा और ईशान कोण में गौरैया अपना घोंसला बनाती है, तो यह अत्यंत शुभ होता है।

—————

यह कविता (गौरैया सबको भाये।) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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प्रेम अधूरा ही है।

Kmsraj51 की कलम से…..

Prem Adhoora Hee Hai | प्रेम अधूरा ही है।

प्रेम अन्त अभिलाषा है जीवन की,
पर मिला वह सबको अधूरा ही है।
राम – कृष्ण की कहानी को सुन लो,
उनमें भी कौन सा वह पूरा ही है?

यह रही दास्तां यूं ही है जीवन की,
हर युग में और हर जिंदगानी में।
राधा – कृष्ण का मेल हुआ कहां?
राम – सिया भी बिछुड़े नादानी में।

हुआ मुक्कमल न स्वपन किसी का,
प्रेम की चाहें ही सबकी अधूरी रही।
भले ही प्रेयसी राधा थी या सीता थी,
अधूरेपन की पीड़ा तो है सबने सही।

मूर्तिमान हुआ प्रेम किसका कहां है?
जिसकी अभिलाषा हम सब करते हैं।
अधूरा सा मिला है जो भी हम सबको,
उसे खोने से भी सब कितना डरते हैं?

जी लेते हैं जिंदगी हम पूरी हर रिश्तों में,
पर हर रिश्ते में देखे तो प्रेम अधूरा ही है।
कई – कई विवाहों से भी कहां प्यास बुझी?
अवतारों के जीवन में भी प्रेम कहां पूरा है?

जिन्दगी जद्दोजहद है प्रेम और वासनाओं की,
लोग सकून कहां किसी को यहां लेने देते हैं?
यह संसार तो है बीहड़ घाटी नित कर्मों की,
यहां अवतारों की भी परीक्षा लोग ले लेते हैं।

यह सच है कि प्रेम जरूरत है हर जीवन की,
भाषा प्रेम की पशु – पक्षी को भी समझ आती है।
जिन्दगी के तमाम उम्र के सिलसिले में हर सम्भव,
प्रेम के अधूरेपन का दर्द हमेशा सबको सताता है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — सच्चा प्रेम एक गहरा और निःस्वार्थिक भावना है जो दो व्यक्तियों के बीच संबंध को बांधती है। यह एक आत्मिक और उदार बन्धन है जो अपने आप को समर्पित करता है और एक-दूसरे के हित में संयम बनाए रखता है। सच्चा प्रेम अपने आप को व्यक्त करने और स्वयं को स्वीकार करने की क्षमता वाला होता है। सच्चा प्रेम कठिनाइयों, आपत्तियों और चुनौतियों के बावजूद टिकता है। यह दूसरे व्यक्ति को निर्मल रूप से स्वीकार करता है, उनकी गलतियों और कमियों के बावजूद उन्हें सच्चा प्यार करता है। सच्चा प्रेम समर्पित, आदर्शवादी, और सहानुभूतिपूर्ण होता है। सच्चा प्रेम आपके साथी की सफलता, खुशी और प्रगति के लिए चिंतित रहता है और उनके सपनों और उच्चतम OUTPUT की प्रोत्साहना करता है। यह समर्पण, विश्वास, सम्मान, संयम और सम्पूर्ण समर्पण का एक गहरा बंधन होता है। सच्चा प्रेम आपके और आपके साथी के बीच एक संतुलित और आनंदमय संबंध स्थापित करता है। यह सच है कि प्रेम जरूरत है हर जीवन की, भाषा प्रेम की पशु – पक्षी को भी समझ आती है। जिन्दगी के तमाम उम्र के सिलसिले में हर सम्भव, प्रेम के अधूरेपन का दर्द हमेशा सबको सताता है। जब भी करो प्रेम तो सच्चा प्रेम ही करो, वरना दिखावे के प्रेम करने का कोई फायदा नहीं है।

—————

यह कविता (प्रेम अधूरा ही है।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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क्रोध।

Kmsraj51 की कलम से…..

Anger | क्रोध।

क्रोध को दिल में,
थोड़ी जगह क्या दे दी,
उसने पूरा हक जमा लिया।
पहले बहुत खुश था,
अपनी छोटी कुटिया में।
उसने धक्का मार कर,
बाहर निकाल दिया।

आज पता चला उसने,
मेरा ज्ञान मुझसे छीना है।
जल रहा है दिल मेरा,
क्यूँ दर्द कर रहा सीना है।

जब से क्रोध ने पनाह ली,
बहुत दुखी – दुखी सा रहता हूं।
अब मैं सब का बुरा चाहता,
सबको अपशब्द कहता रहता हूं।

ईर्ष्या की अग्नि में,
खुद जलने वाला हूं।
मानसिक संतुलन खो बैठा,
मानों मैं बिना चाबी का ताला हूँ।
मुझे चांद का पता नहीं,
पर जुगनुओं की तलाश है।

समंदर घर के सामने,
प्यास बुझती नहीं।
दिल मेरा उदास है,
समंदर से मुझे क्या?
अधर सूखे हैं,
दिल में प्यास ही प्यास है।

अज्ञान भरा था,
मुझमें कूट कूट के।
क्रोध के कारण,
छलक रहा अभिमान था।
विवेकहीन बना दिया मुझे,
बस अपनी मूर्खता का ज्ञान था।

क्रोध, ईर्ष्या बर्बादी का,
मार्ग दिखाती हैं।
ए वो टुकड़ा है शीशे का,
जिसमें सारी दुनिया दिख जाती है।

तौबा कर ले दोनों से,
गर बनना है तुझे महान,
एक दिन शीश झुकाये गा,
तुझपे सारा हिन्दुस्तान।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

—————

  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जब हम गुस्से में होते हैं, तो हम होश खो देते हैं। पहला स्तर यह महसूस करना है कि क्रोध कभी भी कमियों को दूर नहीं कर सकता है। क्रोध की उग्र चेष्टाओं का लक्ष्य हानि या पीड़ा पहुँचाने के पहले आलंबन में भय का संचार करना होता है। जिस पर क्रोध प्रकट किया जाता है वह यदि डर जाता है और नम्र होकर पश्चात्ताप करता है तो उसे माफ़ कर देना चाहिए। क्रोध मानव के लिए हानिकारक है। क्रोध कायरता का चिह्न है। सनकी आदमी को अधिक क्रोध आता है। हम जब गुस्सा करते है, इससे हमारी ही सेहत खराब होती है। हमारे दिमाग की सोचने-समझने की शक्ति ख़त्म हो जाती है और शरीर में रक्त का बहाव भी तीव्र हो जाता है, इसलिए जब भी गुस्सा आये तो बिलकुल शांत हो जाये 5 मिनट्स तक, जिससे आपको और सामने वाले को कोई नुकसान नही होगा। कहते हैं कि क्रोध में आया व्यक्ति दूसरे का बाद में पहले खुद का नुकसान करता है। अल्बर्ट आइंस्टीन के अनुसार क्रोध या फिर कहें गुस्सा केवल मूर्खों के ब्रह्मांड में रहता है।क्रोध वह आंधी है, जिसके आने पर बुद्धि का दीपक बुझ जाता है। यदि क्रोध पर नियंत्रण न किया जाए तो वह जिस कारण उत्पन्न होता है, व्यक्ति को उससे कहीं ज्यादा हानि पहुंचा सकता है। किसी व्यक्ति को क्रोध आने पर चिल्लाने के लिए भले ही ताकत की जरूरत न पड़े लेकिन क्रोध आने पर चुप रहने के लिए बहुत ताकत की आवश्यकता होती है। किसी भी व्यक्ति का क्रोध तभी सही है, जब वह स्वयं पर कर रहा हो क्योंकि ऐसे क्रोध से स्वयं को बदलने की भावना पैदा होती है, परन्तु ऐसा क्रोध लोगों को कम ही आता है। जीवन में क्रोध से व्यक्ति के भीतर भ्रम पैदा होता है और भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है, जब बुद्धि व्यग्र होती है तब व्यक्ति का तर्क शक्ति नष्ट हो जाता है और जब तर्क शक्ति के नष्ट होते ही व्यक्ति का पतन होता है। कभी किसी व्यक्ति को क्रोध में उत्तर नहीं देना चाहिए, क्योंकि क्रोध व्यक्ति के विवेक को पूर्ण रूप से खा जाता है, जिसके बाद उसके भीतर अच्छे-बुरे को सोचने समझने की शक्ति समाप्त हो जाती है। प्यारे दोस्तों – क्रोध को त्याग कर सभी के साथ स्नेह भरा व्यवहार करें।

—————

यह कविता (क्रोध।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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