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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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2021-KMSRAJ51 की कलम से

शिक्षक की महानता।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शिक्षक की महानता। ♦

ए दिल, तुझें आज जिसकी महानता पर लिखना, वो तो है सर्वोपरि।
चला जो भी इनके पद्चिन्हों पर, जिंदगी बनी उनकी सोने जैसी खरी॥

आलौकित पथ करता हमारा, ये तो वो पुंज-प्रकाश का।
बुलंदी के सितारें चमकते हैं जिस पर, वो पटल आकाश का॥

जिनके ज्ञान के भंडार में छिपी, धरा के गर्भ जैसी गहराई।
जिसने समझा इनको, उन्होंने अपनी विजय-पताका लहराई॥

कभी ये बन कर माली, अवगुणों के कांटो को दूर कर गुणों के फूल खिलायें।
अपने प्यारे उपवन की महक से, ये सारा जहान सुगन्धित बनायें॥

जब ये परखने पर आए, तो एक परिपक्व जौहरी बन जाता है।
घिस-घिस कर पत्थर को भी, हीरा सा चमकाता है॥

हर किसी की जिंदगी में इनकी छवि, एक अलग ही रुतबा पाती है।
इनकी अनुपम – गाथा तो हर शह को, संगीतमय बनाती है॥

ये ऐसा अदभुत कलाकार, जिसके गुणों को सुनाया न जा सके।
इसकी खूबियों के समक्ष हम केवल, ये शीश झुका सके॥

आओं! आज इनके दिये संस्कारों को, अपने जीवन में उतार ले।
अपने सद्कर्मों से नाम रोशन कर जायें, बस यही गुरु-दक्षिणा का उपहार दे॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

मेरे सभी प्रिय पाठकों आप सभी को — KMSRAJ51.COM — की तरफ से तहे दिल से शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं।

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से शिक्षक और छात्र के दिव्य व पवित्र तथा उन्नत सम्बन्ध को बताया है। एक अच्छे शिक्षक और अच्छे छात्र के गुणों को समझाने की कोशिश की है। छात्र जीवन किसी भी इंसान के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है, पुरे जीवन का आधार स्तम्भ होता है छात्र जीवन। अपने सद्कर्मों से नाम रोशन कर जायें अपने गुरुजन का बस यही गुरु-दक्षिणा का उपहार दे हम इस शिक्षक दिवस पर।

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यह कविता (शिक्षक की महानता।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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शिक्षक दिवस पर दोहे।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शिक्षक दिवस पर दोहे। ♦

ऑनलाइन पढ़ा रहे, कैसा आया काल।
बच्चे तो सब मस्त हैं, शिक्षक हैं बेहाल॥ – 1

नित शरारत नयी करें, गायब बारम्बार।
दण्डित कर सकते नहीं, शिक्षक हैं लाचार॥ – 2

पढ़ने का तो नाम है, खेल करें सब शिष्य।
पल दो पल के बाद ही, दिखे नया परिदृश्य॥ – 3

जब से शिक्षण जगत में, पनपा भ्रष्टाचार।
ज्ञान दीप की लौ बुझी, शिक्षा अब व्यापार॥ – 4

दिन प्रतिदिन घट रही, शिक्षक की पहचान।
सीमित शिक्षक दिवस तक, शिक्षक का सम्मान॥ – 5

शिक्षक पुष्प पलाश सम, औषध से अनुबंध।
जिसकी जितनी ग्राह्यता, उतनी भरे सुगंध॥ – 6

अमरशक्ति के पुत्र सभी, अभिमानी मतिमंद।
विष्णुदत्त से गुरु मिले, बहा ज्ञान मकरंद॥ – 7

उत्तम गुरु सानिध्य से, मूरख बने सुजान।
पंचतंत्र सी कृति मिली, हुआ जगत कल्यान॥ – 8

ज्ञान क्षितिज पर छा रहा, अमावस सा अंधकार।
लागू हों नव नीतियाँ, लौटे फिर उजियार॥ – 9

अनुचित शिक्षण दे रहा, मानवता पर घाव।
गुरुकुल पद्धत का पुनः , हो अब प्रादुर्भाव॥ – 10

नीति वचन गायब हुए, शिक्षण हुआ अशुद्ध।
बालक फिर कैसे बनें, अब्दुल, नानक, बुद्ध॥ – 11

विद्युतीय हैं श्यामपट, गूगल शिक्षण स्रोत।
झलक दिखा कर लुप्त हों, बच्चे ज्यों खद्योत॥ – 12

अब गरीब का बच्चा उच्च शिक्षा नहीं ले पा रहा।
क्योंकि अब तो शिक्षा हो गया है नोट छापने वाला व्यापार॥

♦ वेदस्मृति ‘कृती’ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

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  • “वेदस्मृति ‘कृती’ जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए दोहे के रूप में समझाने की कोशिश की हैं — आजकल कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई की क्या स्थिति है? जब से शिक्षण जगत में पनपा है भ्रष्टाचार। ज्ञान दीप की लौ बुझी, अब तो शिक्षा हो गया है व्यापार। अब वह समय कहीं खो गया जहां बच्चों को दिया जाता था प्रैक्टिकल ज्ञान। अब गरीब का बच्चा उच्च शिक्षा नहीं ले पा रहा क्योंकि अब तो शिक्षा हो गया है नोट छापने वाला व्यापार।

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यह दोहे (शिक्षक दिवस पर दोहे।) ” वेदस्मृति ‘कृती’ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/गीत/दोहे/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई आई टी . शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक. समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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जीवन और संघर्ष।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जीवन और संघर्ष। ♦

जब इंसान पैदा होता है,
जीवन में संघर्ष का पड़ाव शुरू होता है।
अनबोल बच्चा दूध के लिए रोता है,
यही से संघर्ष का दौर शुरू होता है॥

बड़ा होने पर संघर्षों का रुप बदल जाता है,
इंसान चुनौतियों का सामना करता है।
जीवन की नैया पार कर जाता है,
जीत की खुशी में फूला नहीं समाता है॥

संघर्ष के साथ ने व्यक्तित्व का निर्माण होता है,
तब कहीं जाकर समाज में स्थान मिलता है।
मां – बाप का मन हर्षित हो जाता है,
संघर्षों के साथ बेटा – बेटी आफिसर बन जाता है॥

संघर्षों के साथ जो कर्तव्यों का निर्वहन करता है,
जीवन रस के साथ इंसान का जीवन सार्थक हो जाता है।
विजयलक्ष्मी है कहती ए-इंसान संघर्षों से क्यों घबराता है,
अंत में संघर्ष करते हुए ही इंसान भगवान के चरणों में जगह पाता हैं॥

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

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  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — जब इंसान जन्म लेता है तब से ही उसके जीवन में संघर्ष शुरू हो जाता है और यह संघर्ष अंतिम श्वास तक चलता है।

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यह कविता (जीवन और संघर्ष।) “विजयलक्ष्मी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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दिल खोल।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ दिल खोल। ♦

अपना सपना – हकीकत दिखी दिल खोलकर,
चलना – फिरना लिखना – पढ़ना तोल कर।
सोच – समझ सुरक्षित संबल का शोध कर,
साथ – आए साथ – निभाएं दिल खोलकर॥

अक्षर – अक्षर और निक्षर पढ़ते खोज कर,
अनछुए, पहलू – उजागर करें सोचकर।
चल- चल, पद – छंद सुच्चरित लय जोड़कर,
घातक – प्रतिघात रहित विश्वास – खुलकर॥

ताना – बाना, माना – जाना छोड़ कर,
चलना – संभलना सदा रिश्ता जोड़कर।
बिरहा – कजरी – रसिया रचिये सोचकर,
सोहर – सुहाग – सावन सुनाएं खोजकर॥

बेबसी – बेचैनी में खुलकर चर्चा कर,
स्वछंद खग – सम उन्मुक्त प्रेम रस भर।
गीत – गोविंद की पदावली वा सूर,
भाव – भाषा, कल्पना लिख लें भरपूर॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — जीवन में परिस्थिति अनुकूल हो या विपरीत हो, सदैव ही कोई भी निर्णय दिल से ले, दिल खोल कर चर्चा करें।

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यह कविता (दिल खोल।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें: पृथु का प्रादुर्भाव।

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राम नाम की महिमा अपार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ राम नाम की महिमा अपार। ♦

राम चेतना – राम प्रेरक,
नाम सर्वव्यापी हैं।
आदर्श भरा – चरित्र खरा,
श्री राम अविनाशी है।

अभिमान मर्दक – दुष्ट नाशक,
राम सुखद राशि वाले है।
साकार धाम – अयोध्या धाम,
अयोध्या अविनाशी है।

निराकार राम – साकार राम,
राम नाम में मुक्ति है।
राम ब्रह्म – परमार्थ रूप,
सृष्टि का पालन करता है।

राम का नाम जो भी जपता है,
भवसागर से पार उतरता है।
राम शक्ति – राम भक्ति योग,
सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है।

दैहिक – दैविक – भौतिक ताप,
राम नाम से फटक नहीं पाते है।
हनुमान की पूजा जो भी करता,
वह राम नाम का सुख पाता है।

राम नाम मधुर – मनोहर छवि,
तुलसी दोहावली में गाते हैं।

‘रा’ शब्द विश्व व्यापक है,
‘म’ शब्द ईश्वर वाचक है।
यानी लोक मंगल का ईश्वर जो,
वही राम कहलाता है।

रमा के साथ जो रमण करता,
उसी को राम कहा जाता है।
सहस्त्रों नामों से जो फल मिलता,
वह राम के नाम से मिलता है।

भगवान शिव जी पार्वती से बोले,
मैं निरंतर राम में रमण करता हूं।
परम मनोहर श्री राम नाम ही है,
सुमुखी! सहस्त्रनाम के समान है।

श्री राम के ही प्रताप से वाल्मीकि,
एक डाकू से आदि कवि कहलाए।

परमार्थ की – मोक्ष की आशा जो,
कोई भी व्यक्ति मन से करता है।
राम नाम जप के बिना उसे भी,
प्राप्ति असंभव सा ही लगता है।

द्वापर में दान से जो फल मिलता,
कलयुग में राम नाम से मिलता है।
सूर्य, चंद्रमा, अग्नि और वायु सब,
राम नाम की शक्ति से चलते हैं।

भगवान राम अपने भक्तों का,
सभी रोग – शोक दूर करते हैं।

शुभ काम में भक्तों को लगाकर ,
सौभाग्य और समृद्धि बढ़ाते हैं।
घी, तिल, खीर से जो हवन करता,
मनवांछित कामना – पूर्ति करते हैं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में बताया है, राम नाम के महत्व व महिमा को और राम का नाम लेने से जीवन में क्या-क्या फायदे होते है।

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यह कविता (राम नाम की महिमा अपार।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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नारी : इच्छा शक्ति ज्ञान शक्ति कर्म शक्ति।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नारी : इच्छा शक्ति ज्ञान शक्ति कर्म शक्ति। ♦

सार —

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।
या देवी सर्वभूतेषु सृष्टि-रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

नारी अपने आप में शक्ति है। वह चाहे किसी भी प्रकार की हो जैसे सृजन शक्ति, सहन शक्ति, इच्छा शक्ति, ज्ञान शक्ति, वैराग्य शक्ति, श्रृंगार शक्ति, समर्पण शक्ति, श्रद्धा, भक्ति, त्याग शक्ति, आसक्ति, प्रेम, समर्पण और इन सब को यथार्थ रूप प्रदान करने के लिए सबसे बड़ी शक्ति, “कर्म शक्ति”।

शिव और शक्ति की कथा के बारे में कौन नहीं जानता? हमारे भारतवर्ष में “यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमंते तत्र देवता” इस उक्ति का पालन अनादि काल से ही होता चला आ रहा है। नारी का एक माँ का रूप सबसे सुंदर, आकर्षक, प्रेममय और अनुकरणीय होता है। मेरा ऐसा मानना है कि नारी केवल एक माँ बनकर ही पूर्णता को प्राप्त कर लेती है।

नारी केवल मनुष्य रूप में ही पूजनीय नहीं है अपितु संपूर्ण नारी जाति चाहे वह धरती मां हो या किसी अन्य प्रजाति की भी, सदैव ही अग्रगण्य होती है क्योंकि वह जन्म और पालन पोषण में अपना सर्वस्व त्याग देती है। हमारा पूरा जीवन ही स्त्री जाति पर निर्भर करता है, एक माँ के विभिन्न स्वरूपों पर निर्भर करता है, यदि हम यह कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

हमारी सृष्टि का प्रारंभ शक्ति से होता है, हमारे अस्तित्व से यानी जन्म से होता है। जन्म एक माँ ही दे सकती है ( हालांकि बीज तत्व, पुरुषत्व की भूमिका को नकारा नही जा सकता ) उसके बाद भरण पोषण का कार्य धरती मां पर निर्भर करता है, अन्नपूर्णा द्वारा किया जाता है, विद्या की देवी और अन्य सभी कलाओं की देवी भी स्त्री जाति यानी सरस्वती मां है, और पूरा जीवन लक्ष्मी मां की कृपा से चलता है तथा मृत्यु के बाद मां गंगा या पुन: धरती मां की गोद में ही हम समा जाते हैं।

यानी
“जीवन से पहले, जीवनपर्यंत और जीवन उपरांत”

तीनों ही स्थितियों में मां की भूमिका, नारी जाति की भूमिका अग्रगण्य है, वंदनीय है, अनुकरणीय है, अभिनंदनीय है। परंतु यह भी सत्य है कि बिना पुरुष के हर नारी अधूरी है। उसे जीवन के हर मोड़ पर पुरुष की आवश्यकता है, उसके आलंबन की आवश्यकता है, इस शाश्वत सत्य को नकारा नहीं जा सकता।

परिचय —

नारी इस चराचर जगत की धुरी है या यूं कहा जाए कि यह जगत जिस पर आश्रित है वह आधार, वह आलंबन स्वयं धरती मां ही है जो नारी का ही एक स्वरूप है, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

हमारा अस्तित्व, हमारे जन्म से आरंभ होता है। जीवन होगा तो सब बातें होंगी। यदि अस्तित्व और जीवन ही नहीं होगा तो कुछ भी संभव नहीं है। तो हम आरंभ से ही आरंभ करते हैं, यानी सृजन, निर्माण से यानि जन्म से। जन्म के लिए मां यानी नारी का होना अपरिहार्य है। जैसे कि पहले भी कहा जा चुका है कि नारी का पूर्ण रूप एक मां का होता है और जन्म प्रक्रिया में हम बीज तत्व यानि “पुरुषत्व” को नकार नहीं सकते। यहाँ मैं स्वरचित कविता की दो पंक्तियां कहना चाहूंगी —

“मां है तो कृष्ण है, राम है, बलराम भी है, क्योंकि मां के बिना असंभव, इंसान तो क्या भगवान भी है।”

इस पृथ्वी पर अवतरित होने के लिए स्वयं सृष्टि के रचयिता विष्णु भगवान को भी माँ के गर्भ की आवश्यकता हुई क्योंकि जन्म प्रक्रिया बिना माँ के असम्भव है। भगवान के बाद नारी वो शक्ति है जो —

“मौत की गोद में जाकर जिंदगी को जन्म देती है”।

आज नारी हर क्षेत्र में कामयाब है। पौराणिक काल से लेकर आज तक हमारे पास इतने जीवंत उदाहरण हैं कि हम इस सत्य को नकार नहीं सकते।

इच्छाशक्ति — Willpower

जब तक नारी अपने मन में किसी बात का संकल्प नहीं लेती तो – उसे कोई भी अपने स्वार्थ हेतु झुका सकता है। परंतु एक बार जब उसने अपनी इच्छा शक्ति को जागृत कर लिया और कोई काम करने की ठान ली, कोई संकल्प ले लिया तो संसार की कोई भी ताकत उसे अपने फैसले से हटा नहीं सकती।

इसी इच्छा शक्ति के बल पर सभी कार्यों की रूपरेखा तैयार की जाती है, जैसे कोई भी कार्य “मनसा, वाचा, कर्मणा” के आधार पर पूर्ण माना जाता है अर्थात किसी भी कार्य को करने के लिए पहले मन में विचार आता है, फिर उस कार्य को करने की ‘इच्छा शक्ति’ जागृत होती है। फिर वाणी से उसे संसार के सामने रखा जाता है और अंत में कार्यक्रम ‘कर्मशक्ति’ के द्वारा उसे यथार्थ का रूप प्रदान किया जाता है।

इच्छा हमारी शक्ति का केंद्र बिंदु है। इसी को आधार मानकर बछेंद्री पाल, अनीता कुंडू, संतोष यादव आदि ने एवरेस्ट की चोटी को भी झुका दिया। उन्होंने दुनिया को यह दिखा दिया कि यदि नारी चाहे तो उसके हौसले पर्वतों से भी बुलंद और तटस्थ होते हैं। इन्हीं बुलंद इरादों को लेकर ये विश्व में अपना नाम रोशन करती आ रही हैं।

ज्ञान शक्ति — Knowledge Power

ज्ञानशक्ति को इच्छा शक्ति का दूसरा पड़ाव माना जा सकता है क्योंकि जब तक कुछ सीखने की इच्छा मन में नहीं होगी तो किसी भी प्रकार का ज्ञान हासिल नही किया जा सकता।

साहित्य और कला के क्षेत्र में भारतीय नारी ने ज्ञान और कला की शक्ति को सजीव प्रमाण प्रदान किया है, जिनमें प्रमुख हैं – लता मंगेशकर,आशा भोंसले, मधुबाला, वैजन्ती माला, अरुंधति राय, सरोजिनी नायडू, महादेवी वर्मा, गिरिजा देवी, परवीन सुल्ताना, नालिनी कामलिनी, आदि ऐसी कितनी ही बड़ी हस्तियां हैं जिन्होंने साहित्य और कला के क्षेत्र में विश्व में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।

कोई भी कला तो बिन नारी के पूर्ण हो ही नही सकती, यदि यूं कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी क्योंकि साहित्य में, कला में, चित्रों में, नृत्य में, गीत में, संगीत में, अभिनय में, भक्ति में, प्रेम में, त्याग में, समर्पण आदि, इन सब में यदि “नारी” को हटा दिया जाए तो हमारे पास कुछ भी नहीं बचेगा।

एक बार आप कल्पना करके देखें कि मीराबाई, अहिल्याबाई, राधा, देवकी मां, यशोदा मां, कौशल्या, सुमित्रा, केकई, सीता, उर्मिला इत्यादि इन नारी पात्रों को यदि अपने इतिहास से, अपने साहित्य से निकाल दिया जाए तो न हीं कृष्ण कथा का सौंदर्य बचेगा और ना ही राम काव्य का ही स्वरुप कायम रह पायेगा।

यानि जिस प्रकार एक घर, एक परिवार नारी के बिना पूर्ण नहीं हो सकता, एक मां के बिना पूर्ण नहीं हो सकता, क्योंकि नारी जब मां बनती है तभी वह पूर्ण होती है, तथा परिवार का निर्माण भी तभी होता है, जब घर में संतान का जन्म होता है। इस के संदर्भ में पुन: स्वरचित कविता की दो पंक्तियां कहना चाहूंगी कि —

“मां है तो परिवार है, संस्कार है, क्योंकि माँ में ही तो ममता है, प्यार है दुलार है।”

इच्छा शक्ति, प्राण शक्ति है। इसी इच्छा शक्ति को अपना आलंबन बनाकर सावित्री अपने सतीत्व के बल पर अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से भी वापस ले आई थी। एक नारी के धर्म में, उसकी निष्ठा में, उसके प्रेम में बहुत अधिक ताकत होती है। सती अनुसूया ने इसी बल को ढाल बनाकर सूर्य को भी उदय होने से रोक दिया था।

कर्म शक्ति — Karmic Force / Work Power

इच्छा शक्ति और ज्ञान शक्ति को जहां यथार्थ रूप प्राप्त होता है उसे कर्म शक्ति कहते हैं। इसी के आधार पर सभी कार्यों में सफलता प्राप्त की जा सकती है। कर्म शक्ति में तो नारी का कोई सानी ही नही है। वह अकेली ही माँ दुर्गा की भांति एक ही समय में दस काम कर सकती है।

नारी हर रूप में एक शक्ति है। वह पुरुष को जन्म देती है, उसका पालन करती है (एक मां के रूप में) आजीवन उसका साथ देती है (एक पत्नी के रुपमें) जिम्मेदार बनाती है, सोचने का नजरिया बदलती है, (एक बेटी के रूप में) और जीवन को आलंबन देती है (पुत्र वधू के रूप में)।

— यानी जीवन के हर पड़ाव में, हर रिश्ते में वह सशक्त है।

जब हम समाज निर्माण की बात कर रहे हैं, भारतवर्ष की बात कर रहे हैं, स्त्रियों के शौर्य की बात कर रहे हैं तो भारतीय इतिहास में स्वतंत्रता आंदोलन में नारियों की भूमिका की बात को कैसे छोड़ा जा सकता है। इस आंदोलन में रानी लक्ष्मीबाई, चेनम्मा, सावित्रीबाई फुले, अरुणा आसफ अली, दुर्गाबाई, सुचेता कृपलानी, विजयलक्ष्मी पंडित इन सबके नाम स्वर्ण अक्षरों से अंकित है। इन सब नारियों ने न केवल स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया अपितु समाज के उत्थान के लिए भी उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया।

समाज हम सब लोगों से ही मिलकर बना है, और जिसमें हमें ऐसे कार्य करने चाहिए कि अधिक से अधिक जन कल्याण हो सके, चाहे वह किसी भी क्षेत्र में हो शिक्षा के, स्वास्थ्य के, खेलों के, सांस्कृतिक आदि।

यानी समाज को हर दृष्टि से सक्षम और सफल बनाना है तो उसमें उसके सभी क्षेत्रों में बराबर उन्नति करनी होगी। लोगों को आम जनता को ऊपर उठाने की बात करनी होगी। यदि हम लोगों में मानवीय गुणों, सांस्कृतिक चेतना मातृभूमि के प्रति प्रेम, समर्पण आदि के भाव जागृत कर पाते हैं तो यह एक उत्कृष्ट कृत्य बन जाता है क्योंकि एक व्यक्ति से ही समाज का निर्माण होता है।

सकारात्मक अभिप्रेरणा —

यदि प्रत्येक व्यक्ति और भावी पीढ़ी यदि सही सोच वाली है, अच्छे विचारों वाली है, सकारात्मक अभिप्रेरणा से प्रेरित है तो वह समाज प्रगति के पथ पर सदैव अग्रसर बना रहता है, और इन सब में एक नारी की भूमिका सर्वोपरि है क्योंकि एक परिवार को बनाने में नारी का स्थान सर्वोच्च है और परिवार समाज की प्राथमिक इकाई है।

जब इतने महान कार्य नारी द्वारा किए जा सकते हैं तो नारी उत्थान की संकल्पना अनिवार्य तत्व बन जाती है और वर्तमान परिदृश्य में इनका मूल्यांकन इन आधारों पर किया जा सकता है कि इतने महान कार्य करने वाली नारी राष्ट्र निर्माण का कार्य बखूबी कर सकती है एवं राष्ट्र निर्माण में सक्रिय सार्थक भूमिका अवश्यंभावी रूप से निभा सकती है और निभाती ही चली आ रही है।

यहां हम कमला नेहरु, श्रीमती इंदिरा गांधी, शीला दीक्षित, सुषमा स्वराज, स्मृति इरानी, मीरा कुमार, वसुंधरा राजे, सुमित्रा महाजन, निर्मला सीतारमण आदि इन सबका नाम ले सकते हैं। यहाँ हमने केवल भारतीय नारी की बात की है इसके अतिरिक्त पूरे विश्व में तो ऐसे अनगिनत उदाहरण मौजूद हैं। ये सब कर्म शक्ति का उदाहरण कहे जा सकते हैं।

निष्कर्ष — Conclusion

निष्कर्षत: यही कहा जा सकता है कि इच्छा शक्ति, ज्ञान शक्ति, कर्म शक्ति के द्वारा समाज निर्माण में नारी की भूमिका सर्वोपरि है। वह निर्माण, पालन और मुक्ति तीनों की हेतु भूता सनातनी देवी के समान है।

एक तरह से वह ‘त्रिदेव’ यानि ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का कार्य अकेले ही करती है क्योंकि जिस प्रकार ब्रह्माजी सृष्टि के ‘रचयिता’ माने गए हैं (नारी सृजनकर्ता है) विष्णु जी पालनहार (नारी और धरती माँ ही हम सबका भरण, पोषण करती है) और शिवजी विनाशक या संहारक। [(यहां हम विनाश के स्थान पर मुक्ति का प्रयोग कर रहे हैं माँ गंगा मुक्ती प्रदान करती है) क्योंकि मां कभी भी विनाशक नहीं हो सकती। एक पुत्र कुपुत्र हो सकता है परंतु एक माता कभी कुमाता नहीं हो सकती।]

“कुपुत्रो जायते क्वचिदपि कुमाता न भवति।”
— (श्री दुर्गा सप्तशती)

इस प्रकार जीवन का कोई भी क्षेत्र हो वहां नारी जाति ने अपना लोहा मनवाया ही है। वर्तमान युग में भी ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां स्त्रियों की सक्रिय, सार्थक भागीदारी ना हो और वह सफल ना हुई हो।

इतिहास में भी किसी भी क्षेत्र में नारी की सफलता पर प्रश्नचिन्ह नहीं लगाया जा सकता। और वास्तव में ही ‘नारी नारायणी’ है। उसका पूरा जीवन चुनौतियों से भरा होने के बावजूद वो तटस्थ खड़ी है एक और आने वाली चुनौती का सामना करने के लिए।

फिर भी मुस्कुरा कर अपना जीवन व्यतीत करती है तथा सबके लिए अपने अरमानों का हमेशा से ही बलिदान करती आयी है। इस पृथ्वी पर ऐसा कोई जीव नही जिसका संघर्ष जीवन से पहले यानि जन्म लेने से पहले ही आरंभ हो जाता हो या यूं कहें कि जन्म के लिए संघर्ष शुरू हो जाता हो एक माँ के लिए भी और एक बेटी के लिए भी ( दोनो ही नारी जाति )।

इससे अधिक और क्या कहना है कि सब जानते हुए भी नारी ने अपना वर्चस्व कायम रखा है तथा विश्व में तो क्या अंतरिक्ष में भी अपना नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित कर इतिहास बनाया है।

और आगे भविष्य में भी ऐसी ही उम्मीद की जा सकती है क्योंकि —

” माना कि पुरुष बलशाली है, पर जीतती हमेशा नारी है,
सांवरिया के छप्पन भोग पर सिर्फ एक तुलसी भारी है”।

हमारा साहित्य समाज को न केवल ज्ञान, बोध और मूल्य प्रदान करता है अपितु एक चिंतन की दिशा भी प्रदान करता है ताकि हम सभी यथासंभव प्रयास कर सके जिससे कि भारतीय मूल्य, भारतीय सभ्यता एवम संस्कृति, भारतीय साहित्य का विश्व में सदैव उच्चस्थ स्थान बना रहे तथा भारत पुन: “जगदगुरु” (विश्वगुरु) की उपाधि ग्रहण करे वो भी अपने अक्षय साहित्य, विशुद्ध सभ्यता एवं अलौकिक संस्कृति के बल पर।

इन्ही शुभकामनाओं के साथ — शुभमस्तु।

ज़रूर पढ़ें — साहित्य समाज और संस्कृति।

♦ डॉ विदुषी शर्मा जी – नई दिल्ली ♦

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  • ” लेखिका डॉ विदुषी शर्मा जी“ ने अपने इस लेख से, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है — नारी अपने आप में शक्ति है। वह चाहे किसी भी प्रकार की हो जैसे सृजन शक्ति, सहन शक्ति, इच्छा शक्ति, ज्ञान शक्ति, वैराग्य शक्ति, श्रृंगार शक्ति, समर्पण शक्ति, श्रद्धा, भक्ति, त्याग शक्ति, आसक्ति, प्रेम, समर्पण और इन सब को यथार्थ रूप प्रदान करने के लिए सबसे बड़ी शक्ति, “कर्म शक्ति”।

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यह लेख (नारी : इच्छा शक्ति ज्ञान शक्ति कर्म शक्ति।) “डॉ विदुषी शर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख / कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम डॉ विदुषी शर्मा, (वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर) है। अकादमिक काउंसलर, IGNOU OSD (Officer on Special Duty), NIOS (National Institute of Open Schooling) विशेषज्ञ, केंद्रीय हिंदी निदेशालय, उच्चतर शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार।

ग्रंथानुक्रमणिका —

  1. डॉ राधेश्याम द्विवेदी — भारतीय संस्कृति।
  2. प्राचीन भारत की सभ्यता और संस्कृति — दामोदर धर्मानंद कोसांबी।
  3. आधुनिक भारत — सुमित सरकार।
  4. प्राचीन भारत — प्रशांत गौरव।
  5. प्राचीन भारत — राधा कुमुद मुखर्जी।
  6. सभ्यता, संस्कृति, विज्ञान और आध्यात्मिक प्रगति — श्री आनंदमूर्ति।
  7. भारतीय मूल्य एवं सभ्यता तथा संस्कृति — स्वामी अवधेशानंद गिरी (प्रवचन)।
  8. नवभारत टाइम्स — स्पीकिंग ट्री।
  9. इंटरनेट साइट्स।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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प्रगीत और संगीत तत्व।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ प्रगीत और संगीत तत्व। ♦

साहित्य और संगीत का वांछनीय संबंध,
साहित्यकार की पद शैली में सदा रहती।
पद साहित्य – परंपरा पीछे छूटने पर भी,
साहित्यकार – संबंध में संगीत बना रहता॥

मानव भावानुभूति का सहज साधन संगीत,
प्रगीतों में निश्चल विद्यमान रहती अनुभूति।
अपने ही चरम ऐश्वर्य को प्राप्त करता,
जब वह सांगीतिक वैभव से परिपुष्ट होता॥

गायन वादन नृत्य को आदर प्रदान करती,
प्रेमानुभूति अभिव्यक्ति की संचित सुविधा दी।
तत्कालीन कविता में इतिवृत्तात्मकता और,
रचनात्मकता – रस आत्मकता काव्य होता॥

रीति काल की ध्रुपद धमार शैली सशक्त रही,
जो पर्याप्त रूप से पीछे छूटने लगी।
दादरा – ठुमरी – ख्याल इत्यादि में श्रृंगारिक,
शैली से प्रगीतकारों ने नाता तोड़ा॥

प्रगीत काव्य में प्रथम ग्राम – गीत और,
लोकगीत का भावनात्मक प्रमुख स्थान है।
दोनों हमारी संस्कृति और भावनात्मक,
अक्षर भंडार – कलापरक मूल संगीत उत्सव है॥

सोहर, घोड़ी, बन्नी, सुहाग, सावन सुमधुर गीत,
लोकाचार व्यवहार सामाजिक अवदान है।
पुरुषों द्वारा भी ग्राम गीतों की रचना होती,
अधिकांश गीतों की रचना स्त्रियां रचती॥

बिरहा कजरी रसिया आदि गीतों की रचना,
पुरूषों द्वारा रचा और गाया जाता है।
राग – ताल और शास्त्रीय जकड़ बंदी इनमें,
कला परक विशेषता का प्रतिबंध कम होता॥

यह गीत प्रायः कहरवा, दादरा जैसे हल्की,
लोकधुन, चलती हुई घुन पर आधारित होती।
जब कला परक संगीत – श्रृंगार से नियमन होता,
लोकगीत ही नूतन रूप – रंग में मिलता॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में बताया है, साहित्य और संगीत का सम्बन्ध आरंभिक समय से ही है। साहित्य और संगीत एक दूसरे के पूरक है। जब कला परक संगीत – श्रृंगार से नियमन होता, लोकगीत ही नूतन रूप – रंग में मिलता।

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यह कविता (प्रगीत और संगीत तत्व।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें: पृथु का प्रादुर्भाव।

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आओ कान्हा – तेरा स्वागत है।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ आओ कान्हा – तेरा स्वागत है। ♦

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को, विष्णु जी के आठवें अवतार ने जन्म लिया।
कान्हा के जन्म के अलौकिक दिव्य प्रकाश ने, संसार को उजाले से भर दिया॥

भगवान भी भक्तों की आस्था, भक्ति व प्रीत में झूमते चले आए।
माता देवकी- वासुदेव की यह संतान, नंद-यशोदा के प्यारे कहलाए॥

जब-जब अपने पांव पसारे ब्रह्मांड में, इस अधर्म ने।
तब-तब अवतार अवतरित हुए इस भू पर, शौर्य बढ़ाया धर्म ने॥

द्वारकाधीश की लीला से, भला अब तक कौन है? अपरिचित।
जिन्होंने धर्म युद्ध में गुंजाया गीता उपदेश, हुए सब कर्मफल से परिचित॥

गहरी हुंकार भरी, जब-जब धर्म ने, काल भी थर्राया है।
पाप कर्म की अधिकता का अंत करने, भगवान ही अवतरित हो आया है॥

तेरे आगमन को मथुरा वृंदावन के मंदिर भी जैसे पूनम की चांदनी से नहाए।
लगे ऐसा मानो ब्रह्मांड का अनुपम सौंदर्य, इस धरती पर उतर आए॥

जब मयूरपंख धारण कर तू, अपनी मुरली की सुरीली धुन सुनाए।
ब्रह्मांड में चहुँ ओर, खुशियों के फूल बिखर जाए॥

हे कृष्णा! तेरी भक्ति में लीन गोपी बन सब दिल, मस्त होकर झूमेंगे मन बावरें।
नैनो के अश्रु जल से पाक कर-आस्था, श्रद्धा के फूल बिछा कर, तेरी राह निहारें बस सावरें॥

स्वागत है तेरा चले आओ हे! कान्हा, इस धरा को फिर से स्वर्ग बनाने।
हम तो भावविभोर हैं तेरे जन्मदिवस की जन्माष्टमी मनाने॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से श्री कृष्ण जी के जन्म उत्सव व अद्भुत लीलाओं का सुंदर मनभावन वर्णन किया है। तुमने ही धर्म युद्ध में गुंजाया गीता उपदेश, हुए सब कर्मफल से परिचित।

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यह कविता (आओ कान्हा – तेरा स्वागत है।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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2021 में अफगानिस्तान पर एक नजर।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ 2021 में अफगानिस्तान पर एक नजर। ♦

अमेरिका की सेना को वहां से अपने वतन जाते ही,
तालीबानी, अफगानिस्तान पर धावा बोल दिया।
अपने जंग को बुलंदी पर ले जाने के लिए,
तालिबान ने भारत के बनाए हेरात में बाध,

‘सलमा बाध’ पर नापाक हमला किया।
मुकाबले में अफगान सैनिकों ने हथियार डाल दिया।
भारत – अफगानिस्तान मैत्री की पहचान है सलमा बाध,
अफगानी हजारों परिवारों को बिजली मिलती बाध बनने से।

लगभग 2000 एकड़ खेती का जल प्रबंध करता है सलमा बाध,
तालीबानी हमले का पाकिस्तानी आतंकियों ने साथ दिया।
सरकारी मीडिया पर भी हमला करता है, तालिबान,
अलकायदा और पाकिस्तान आतंकी का काम।

जुम्मे की नमाज के समय में मीडिया निदेशक,
‘दावा खान’ को मार गिराया,
उनके फिराक में रहे तालिबानी।
औरत और बच्चों को भी निशाना बनाया।
मई 20, 2021 को और उन्मत्त होकर सामने आया।

निदेशक की हत्या से दुखी हो, आम जनता आगे आई।
दर्जनों नगर शहर में तालीबानी मार डाला।
अफगानी सेना हवाई जहाज से बम बरसाया,
हवाई हमले से तालिबानी बंकर नष्ट किया।
इस हमले में सैकड़ों तालीबानी, हालात किया,
तालिबान ने 50 को घायल व दर्जनों नागरिकों को मारा।

अमेरिकी सेना ने कतर स्थित मध्य कमान से 8 अगस्त को मोर्चा संभाला,
राष्ट्रपति के आदेश पर जवानों ने बांबर से बम बरपाया।
जिसमें अलकायदा के लगभग 200 आतंकी घटनास्थल पर ढेर हुए,
अमेरिका ने कहा ‘अफगान हमने छोड़ा है, तालिबान नहीं छोड़ेंगे।’

बी – 52, एसी ३० बम बरसक विमान की मदद से तालिबानी बंकर नष्ट किया,
अमरीकी हस्तक्षेप से तालीबान का भारी मात्रा में गोला बारुद नष्ट हुआ।
अपने देश की हालत देख अफ़ग़ान विदेश मंत्री हनीफ ने,
एस .जयशंकर भारतीय विदेश मंत्री से बात किया।

अगस्त 2021 में सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष जी के ,
समक्ष अफगान को लेकर बाद उठाने की अपील की।
भारत और अफ़गान के लोगों में एक नई उम्मीद जगी,
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संघ ने, संघर्ष पर चिंता व्यक्ति किया।

पेंटागन के प्रवक्ता जान किर्बी ने पाकिस्तानी,
सेना प्रमुख बाजवा से बात किया,
अमेरिकी रक्षा मंत्री डायड आस्टीन भी,
अफगान सुरक्षा स्थिति पर चिंता व्यक्त करते कहा।

पाकिस्तान प्रयोजीत सुरक्षित पनाहगार,
असुरक्षा और अस्थिरता का कारण बना,
तालिबान को पाकिस्तान ही सुरक्षित,
पनाहगार देकर मदद कर रहा है।

संयुक्त राष्ट्र विश्व निकाय की मानवीय संस्थान,
बिगड़ते हालात पर चिंता व्यक्त किया,
अपर महासचिव मार्टिन ग्रिफिथ्स ने कहा,
अफगानी बच्चे, माताएं पुरुष मुश्किल में हैं।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संघ ने चिंता व्यक्त करते हुए,
संघर्ष विराम करने को कहा !
वहां डर के माहौल में जीना पड़ रहा,
और महिलाओं के अस्तित्व का खतरा बना हुआ है।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख में — वर्तमान समय में तालिबान के लड़ाकों या यूँ कहे इंसानियत के दुश्मन आतंकवादियों का अफ़गान के ज़मीन पर ज़ुल्म, लूटपाट, क्रूरता, हत्या, व आधारभूत संरचना के तहस नहस को दर्शाया हैं।

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यह लेख (2021 में अफगानिस्तान पर एक नजर।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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खड़ा हो रहा है अफगानी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ खड़ा हो रहा है अफगानी। ♦

अफगान के पांच जिलों से तालिबानियों को खदेड़ दिया,
काबुल में, अमरीकी इनामी हक्कानी तालिबान से जा मिला।

अहमद मसूद के बुलावे पर, खालिद अमीरी आया,
अफ़गान के पंजशीर घाटी में आकर मसूद से मिला।

पंजशीर से अफगानी राष्ट्रभक्त मिलकर,
अफगान के चार जिले को तालिबान से मुक्त करा लिया।

पंजशीर के शूरवीरो ने ‘अंद्राब’ से देश विरोधियों को पकड़ा,
जिसमें दो तालिबानी सहीत वहां चार पाकिस्तानी मिला।

मोस्ट वांटेड अमेरिका के सैंतीस करोड़ का इनामी,
तालिबान का सुरक्षा इंचार्ज सामने आया – खलील हक्कानी।

‘खिंजन’ जिला को भी पंजशीर के बहादुरों ने आजाद कराया,
उधर तालिबानियों ने बुजुर्ग व्यक्ति के ऊपर कोड़ा बरपाया।

पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी करजई का सगा भाई,
हशमत गनी करजई ने तालिबानी से जा मिला।

बेल्जियम का हवाई जहाज काबुल के एयर वेश से वापस गया,
बेल्जियम के नागरिक हवाई अड्डे के खराब स्थिति से नहीं आये।

पूर्व राष्ट्रपति अफगान से भागकर यू• ए• ई• में शरण ली,
जिसने अफगानी की आवाम को भी धोखा दी।

और एक विमान काबुल से नागरिकों को लेकर भारत आया,
हिंडन एयर बेस गाजियाबाद पर सुरक्षित पहुंचाया।

पंजशीर पर तालिबान ने धावा बोलकर चढ़ाई का असफल प्रयास किया,
जो पंजशीर के आगे घुटने टेक दिए, दर्जनों तालिबानी मारे गये।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में — वर्तमान समय में तालिबान के लड़ाकों या यूँ कहे इंसानियत के दुश्मन आतंकवादियों का अफ़गान के पंजशीर घाटी से अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह के नेतृत्व में डटकर तालिबान के लड़ाकों का सामना कर रहे हैं।

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यह कविता (खड़ा हो रहा है अफगानी।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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