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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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2021-KMSRAJ51 की कलम से

जीवन और धैर्यशीलता।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जीवन और धैर्यशीलता। ♦

ना घबराना अंधियारे से,
ना डर कर पथ से भटकना,
धैर्य सहनशीलता के सब्र से,
ऐ मानव तू आगे बढ़ना,
जीत कभी तो पाएगा,
तू जीत कभी तो पाएगा॥

अपने जीवन से थकना ना तू,
हृदय में हौसला रख जीतने का तू,
विषम परिस्थितियों से,
लड़कर भी जीत जाएगा,
जीत कभी तो पाएगा,
तू जीत कभी तो पाएगा॥

नियमों के कदमों से,
श्री राम जैसा धैर्य रख,
सहनशीलता, मर्यादा के साथ चल तू,
मंजिल को अवश्य पाएगा,
जीत कभी तो पाएगा,
तू जीत कभी तो पाएगा॥

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

—————

  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — जीवन में कितना भी उतार चढ़ाव आये, कितनी भी समस्या आये कभी भी धैर्य व सहनशीलता छोड़ना मत। धैर्य व सहनशीलता से हर समस्याओं से बाहर निकल जाएंगे।

—————

यह कविता (जीवन और धैर्यशीलता।) “विजयलक्ष्मी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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कल्याण सिंह।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ कल्याण सिंह। ♦

राम मंदिर आंदोलन के बड़े चेहरे के रूप में कल्याण सिंह का नाम रोशन किया जाएगा। जबकि राम मंदिर आंदोलन में लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी और कल्याण सिंह की मुख्य भूमिका थी। पूरे देश के लोगों ने इस आंदोलन में अपनी भागीदारी दर्ज कराई।

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री के रूप में जून 24, 1991 में कल्याण सिंह ने शपथ ली। उन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री बनने पर मंत्रिमंडल के साथ सीधे अयोध्या पहुंचकर राम लला का कैबिनेट के साथ दर्शन – पूजन किया और शपथ ली कि हम राम जन्म भूमि अपने जीते जी बनाने का पूरा प्रयास करूंगा।

जन्म व देहावसान।

कल्याण सिंह का जन्म 5 जनवरी सन 1932 में, अलीगढ़ में अतरौली तहसील के महोली नाम गांव के एक किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा दीक्षा काल में ही संग परिवार से अपना नाता जोड लिया। उनका देहावसान लखनऊ के पी• जी• आई• में शनिवार 21 अगस्त 2021 को हुआ। कल्याण सिंह का 89 वर्ष का कार्य-काल खुशी और गम से भरा हुआ था, संघर्षों से लड़ते हुए आगे बढ़ते रहे। उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में उन्हें जननायक के रूप में स्वीकारा गया।

मुख्यमंत्री के रूप में।

वह उत्तर प्रदेश में दो बार मुख्यमंत्री के रूप में शासन सत्ता की बाग डोर, उनके हाथ में जनता ने दी। कल्याण सिंह – दिल से राजनीति करने वाले नेताओं में से एक प्रमुख भूमिका निभाई। कल्याण सिंह के समय भी विरोधी लाबी बयान बाजी करती रही और वह उसका जवाब अपनी तरह से लोगों को दिया।

विश्व हिंदू परिषद और राम जन्म भूमि यज्ञ समिति द्वारा सामने जो 89 – 90 ई• के दौरान जब आंदोलन तेज बारिश अक्टूबर 1990 को कार सेवा करने की घोषणा हो गई। मंदिर मुक्ति घोषणा से जनता दल और भाजपा के बीच खटास पैदा हो गया।

राम मंदिर — कार सेवा आंदोलन।

उधर मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के मुलायम सिंह यादव जी थे उन्होंने पुरजोर धन से कार सेवा रोकने की अपनी घोषणा कर दी। उन्होंने एलान किया कि अयोध्या में परिंदा भी पर नहीं मार सकता। जगह जगह पूरी उत्तर प्रदेश में बैरी गेटिंग कर दी गई। राम मंदिर के लिए सभा पर रोक लगा दिया गया।

मीटिंग करने वालों को गिरफ्तार किया जाने लगा। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह आदि लोग प्रमुख रुप से कार्य कर रहे थे। कल्याण सिंह मंदिर के पक्ष में थे इसलिए उन्होंने आर-पार का शंखनाद कर दिया।

प्रदेश की सड़कों पर नारे लगने लगे ” कल्याण सिंह कल्याण करो, मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करो। ” कल्याण सिंह ‘कल्याण करो मंदिर का निर्माण करो’ उत्तर प्रदेश ही नहीं संपूर्ण भारत से राम भक्तों का आना अयोध्या जी तरफ कूच करना पुरजोर तरह से शुरु यद्यपि इसके पहले भी पूरे देश के राम लला की दर्शन के लिए लोगों का आना जाना लगा रहता था।

राम भक्त झुंड के झुंड दक्षिणी भारत से भी आते और दर्शन करके संकल्प ले कर कि “हम अयोध्या फिर आएंगे मंदिर यही बनाएंगे।” का संकल्प ले कर अपने प्रदेश चले जाते थे।

बैठक राष्ट्रीय कार्यकारिणी की।

सन 1989 – 90 के दौरान हमारी एक बैठक राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अयोध्या में हुई थी, जिसमें हमने देखा कि आए वो यही कहते हुए दर्शन पूजन के बाद जाते थे। उन्हीं दिनों सड़क पर नारे लग रहे थे, मुलायम सिंह ने कल्याण सिंह को हिंदू नेता के रुप में उभरता हुआ देखकर उन्हें गिरफ्तार करवा लिया।

अयोध्या में कार सेवकों के ऊपर गोलिया चलवा दी। सरकारी आंकड़े के अनुसार बहुत ही कम कार सेवक मारे गए दिखाया गया। जबकि हजारों की संख्या में कार सेवक मारे गए, आम जनता का कहना है कि सरयू नदी की धारा लाल हो कर बह रही थी।

क्रांतिकारी फैसले।

जनता में भारी आक्रोश था, लोग मुलायम सिंह की सत्ता व राजनीति से नाराज थे। चुनाव हुआ और 1991 कल्याण सिंह सत्ता में आए। कल्याण सिंह फैसलों के लिए काफी चर्चित हुए। उन्होंने जोत बही के रूप में किसानों का न सिर्फ उनकी जमीन का स्थाई मूल दस्तावेज उपलब्ध कराया बल्कि विरासत की समय सीमा तय करनी जैसे क्रांतिकारी फैसले भी लिए।

अयोध्या नहीं, कार सेवकों के ऊपर गोली न चलने और ढांचा को यथा स्थिति मैं बनाए रखने का संकल्प लिया था सुरक्षा देने का शपथ पत्र न्यायालय को भी दिया था, इसलिए उन्होंने अंत में मंदिर का ढांचा देने के बाद पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले लिया।

अधिक प्रभावी रूप में।

कल्याण सिंह मंडल – कमंडल से अधिक प्रभावी थे। हिंदू के कभी वह प्रमुख चेहरा के रूप में जाने जाते थे। अजीब पिछड़ी जात की पहचान थे। भारतीय जनता पार्टी में आरक्षण की नीति कैसे लागू हो इसके रणनीतिकार भी थे। पिछड़ी जात की आरक्षण दिलाने के माहिती थे। कल्याण सिंह मैं का अहंकार भी हो गया था। उसी अहंकार के कारण उन्होंने पार्टी के भीष्म पितामह कहे जाने वाले अटल जी से टकरा गए।

वह ईमानदार सिद्धांत वादी, मुद्दों पर आने वाले और जनता की नब्ज पकड़ने वाले मुख्यमंत्री के रूप में जाने जाते थे। राम मंदिर का ढांचा देखने के बाद उनको अपनी सरकार के बर्खास्त होने का दंश झेलना पड़ा, परंतु कार सेवकों के ऊपर गोली ने चलाने की वजह से उन्हें किसी भी प्रकार का सरकार जाने का मलाल नहीं था।

कारसेवक वापस आए — पर गोली नहीं चलवाऊंगा।

अजय ध्यानी 6 दिसंबर 1992 को जब मंदिर का ढांचा गिरा उस समय प्रधानमंत्री भारत सरकार माननीय P. V. Narasimha Rao जी थे। दिल्ली से गृहमंत्री यशवी चौहान का फोन आया था। प्रधानमंत्री के निजी सचिव ने Faizabad के कमिश्नर से फोन करके केंद्रीय बलों को बढ़ाने के बात कही थी।

उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने कहा था कि कार सेवक वापस आए पर गोली नहीं चलवाऊंगा। मंदिर का ढांचा गिरने से Narasimha राव जी और कल्याण सिंह जी आहत हो गए। लोगों को विश्वास ही नहीं था कि कार सेवक मंदिर का ढांचा ढहा देंगे।

देश दुनिया से आए हुए कार सेवक पूरी अयोध्या और आसपास के जिलों में पहले से आये हुए थे, कहां जाता है कि वह ढांचा तक पहुंचने का प्रयास कर रहे थे। केंद्रीय रिजर्व पुलिस और स्थानीय पुलिस कार सेवकों को नियंत्रित करने भी लगी हुई थी।

हुजूम हनुमानगढ़ी की तरफ बढ़ रहा था कि एक व्यक्ति आया और वहां पर मौजूद बस को बड़ी तेजी के साथ लेकर सारे बंधनों को तोड़ते हुए मंदिर के पास पहुंचा। कल्याण सिंह जी सन 2002 के चुनाव से पार्टी छोड़ देने की वजह से भारतीय जनता पार्टी को बारी नुकसान उठाना पड़ा।

प्रभु श्री राम का जन्म स्थान पर भव्य और दिव्य मंदिर निर्माण।

लेकिन वह 2004 में पुनः पार्टी में शामिल होने की घोषणा की। कल्याण सिंह जी का कहना था हमें जीवन में कुछ और नहीं चाहिए हमारी भगवान राम से अगाध श्रद्धा भक्ति है। उन्हें पूरा विश्वास था कि प्रभु श्री राम का जन्म स्थान पर भव्य और दिव्य मंदिर निर्माण एक दिन अवश्य होगा।

कल्याण सिंह को कठोर शासक और दिल के नरम नेता के रूप में जाना पहचाना जाता रहेगा।

विश्व हिंदू परिषद की कोई ऐसी योजना हो तो उन्हें बताना चाहिए ऐसा कल्याण सिंह का मानना था। इसलिए उन्हें इस बात का हमेशा दुःख कराता था हमे धोखे में रखा गया। सन 2004 में कल्याण सिंह फिर भाजपा में शामिल हुए परंतु 2009 में उन्होंने फिर पार्टी छोड़ दिया और निर्दलीय सांसद के रूप में एटा जिले से चुनाव मैदान में उतर आए।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से कल्याण सिंह जी के जीवन व उनके कार्यकाल पर प्रकाश डाला है। मुख्य रूप से उन्हें श्री राम जन्म स्थान मंदिर के महत्वपूर्ण फैसले के लिए सदैव ही याद किया जायेगा।

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यह लेख (कल्याण सिंह।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें: अफगानी – दुर्दशा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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पाहन से मुलाकात।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ पाहन से मुलाकात। ♦

एक दिन एक पाहन से
हुई थी मुलाक़ात।
उसने कहीं उस दिन,
मुझसे अपने मन की बात।
पूछा उसने मुझसे…
कुछ नाराज़गी से —

“क्यों करते हो तुलना हमारी
तुम कठोर हृदय मनुज से ?”

ये अपमान है हमारा
मेरी समझ से,
क्योंकि —
हम तो संगीत के राग
से ही पिघल जाते हैं।
कोई तराश दे तो,
मूर्ति में ढल जाते हैं।

हम दिखते हैं कठोर,
किन्तु मन में नहीं चोर।
दुर्ग और भवनों में,
आलीशान इमारतों में,
मेरे पारिवारिक सदस्य
जड़ें है कई गुम्बदों में।

सुनी हैं मैंने सच्ची दास्तानें,
मनुष्य की कुटिलता की।
दौलत, सत्ता के लोभ,
अपनों के कत्ल और क्रूरता की।

पाषाण नहीं करते ऐसा,
फिर हम पर ये आरोप कैसा ?

तुम्हारे ह्रदय जितने कठोर नहीं हैं हम।
घाती, कपटी, कुटिल चोर नहीं हैं हम।
देखो, सुनो जाकर अपने टी वी पर,
कैसे मनुज की वजह से मनुज मर रहा है।
मेरा ह्रदय तोसे कहते हुए भी पिघल रहा है।

और भी बहुत कुछ कहा उसने,
एक पत्थर ने सामने मेरे …
कटु सच का पुलिन्दा रख दिया।
और किस कदर मनुष्य होने पर
मुझे शर्मिंदा कर दिया।

♦ वेदस्मृति ‘कृती’ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

—————

  • “वेदस्मृति ‘कृती’ जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों में समझाने की कोशिश की हैं — पत्थर का उदाहरण देकर बताया है की आजकल के पत्थर दिल मनुष्य से तो लाख गुना अच्छा पत्थर है। सुनी हैं मैंने सच्ची दास्तानें मनुष्य की कुटिलता की। दौलत, सत्ता के लोभ, अपनों के कत्ल और क्रूरता की। पाषाण नहीं करते ऐसा, फिर हम पर ये आरोप कैसा ?

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यह कविता(पाहन से मुलाकात।) ” वेदस्मृति ‘कृती’ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/गीत सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई आई टी . शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक. समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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आज की जरूरत।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ आज की जरूरत। ♦

वैचारिक लेख —

वर्तमान में भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में एक भयानक महामारी ने अपना तांडव पुरजोर मचाया है। इस चपेट में विश्व का बड़े से बड़ा देश अपनी समस्त ताकतों को विफल-सा हुआ पा रहा है। ऐसे में जब हररोज हजारों लोग काल के गाल में समाते जा रहे हैं तो डर भला किसे नहीं लगेगा।

बस डर नहीं रहे हैं तो कुछ सर फिर लोग और दिल्ली के निजामुद्दीन के मरकज में जमा हुई तब्बलिकी जमात। शायद उन्हें मृत्यु ने मानव जाति के विनाश का जिम्मा सौंपा हो या फिर यह उनके जहन जनित उस अल्लाह की शरणागति का मनमुखी खुरापात है जो किसी पवित्र धार्मिक ग्रंथ में नहीं मिलता है।

अब लीजिए आप पवित्र कुरान शरीफ़ को या फिर इस्लाम धर्म के जो चार पवित्र ग्रंथ माने जाते हैं “पवित्र इंजील, जबूर, तोरात और स्वयं पवित्र कुरान मजीद।” इनमें कहीं कोई जमाती यह सिद्ध कर दें कि वहाँ खुदा की ऐसी आज्ञा है कि किसी को जानबूझ कर मारने या फिर अनजाने में मारने से अल्लाह खुश होता है।

तो मैं मान जाऊंगा कि जिहाद जैसी, जो सोच इन लोगों ने अपनाई है और अपने अनुयायियों को भी उसका अनुसरण करने को कहते हैं; वह सच में ही वाजिब है। पर शर्त है कि यह सिद्ध करने के लिए ‘देवबंध’ जैसी संस्थाओं की स्वयंभु सोच का हवाला न दिया जाए।

मक्का की पवित्र दरगाह की मूल सामग्री का ही सहारा लिया जाए। कोई खुदा, अल्लाह, गॉड, वाहे गुरु, तीर्थंकर या भगवान किसी के प्राणों को लेने की बात नहीं करता है। चाहे वह किसी भी धर्म का क्यों न हो। हाँ यदि कोई करता है तो वह भगवान हो – ही नहीं सकता। क्योंकि किसी को काल के सिवा कोई मारने वाला शैतान कहलाता है भगवान नहीं।

चलो लगे हाथों जिहाद समझ लें। जेहाद पाक कुरान में अंकित है और वह सिर्फ़ मुस्लिम समुदाय के लोगों के ही करने की नहीं है बल्कि समूचे मानव प्राणी को करनी चाहिए।

जिहाद का मतलब संघर्ष करने से है न की साज़िश और खून खराबा करने से। पवित्र कुरान कहता है कि जो लोग तुझे उस एक खुदा की इवादत से भटका कर किसी दूसरे की उपासना करने को मजबूर भी करता है तो उसका प्रभाव भले ही कितना ऊंचा हो, तू उसकी नहीं मानना।

तू अपने धर्म के लिए अपनी जान दे देना पर दूसरों को कष्ट मत देना। अब इन्होंने इसका अर्थ उल्टा ले लिया कि अपना धर्म बचाने के लिए दूसरों की जान ले लेना पर अपने धर्म को बचाए रखना। असल में ऐसा तो हजरत मुहम्मद साहब बयाँ ही नहीं करते।

अब रही धर्म की बात तो यह भी हमें समझना होगा कि धर्म क्या होता है और अध्यात्म क्या होता है? धर्म असल में किसी समुदाय या समाज के सामाजिक जीवन के जीने के तौर – तरीके का नाम है और अध्यात्म आत्मा और परमात्मा के मूल तत्व को जानने का नाम है।

दरअसल हुआ यूं कि लोग धर्म को ही अध्यात्म समझ बैठे। फिर चाहे वह हिन्दू धर्म की बात हो या फिर कोई और धर्म की बात हो। इसीलिए हर धर्म के नियंताओं ने अपने-अपने धर्म के संचालन हेतु किसी नियम का आगाज किया और उन्हें किसी ग्रंथ की सूरत दे दी। यह सच है कि वे नियंता पवित्र भावी थे और उन्होंने उन्हीं ग्रंथो में अध्यात्म को भी भर दिया। यह महज समाज को अनुशासन में बांधने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था।

अगर यूं कहा जाए कि “धर्म अध्यात्म का शरीर है और अध्यात्म उस देह की आत्मा तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। यह बात यहाँ से भी प्रमाणित होती है कि खुदा, भगवान, रब्बा कहो या प्रकृति, उसने तो समूचे जीव जगत को उत्पन किया।”

जब मानव प्राणी के अलावा किसी जीव जगत का कोई सामाजिक नियम ही नहीं है तो मानव का ही क्यों? शायद इसलिए कि उसमें बुद्धि है और वह भी इस प्रकार से उस बनाने वाले ने मानव में डाली कि सब के सब उसे एक बराबर प्रयोग नहीं कर पाते।

हमने इतिहास पढ़ा। जहाँ यह बताया जाता है कि असल में मानव पशुओं से विकसित हो कर बना है। वह भी पहले आदिमानव के रूप में असभ्य और पशु तुल्य जीवन जीता था। जैसे-जैसे उसने बौद्धिक विकास किया तो सभ्यता अस्तित्व में आई और धीरे-धीरे धर्म, समुदाय तथा संस्कृति चलन में आई। इन प्रमाणों को आधार माने तो, तो भी सिद्ध होता है कि धर्म मानव द्वारा स्थापित किया गया एक सामाजिक नियम है और कुछ नहीं।

प्रभु को पाना है तो उसके लिए धर्म की नहीं बल्कि अध्यात्म की ज़रूरत पड़ती है। आप निजी स्कूल में पढ़े या सरकारी में। बात एक ही है क्योंकि उद्देश शिक्षा प्राप्त करना है। वह दोनों जगह मिल जाएगी। मेरे कहने का भाव यह है कि धर्म कोई भी बुरा नहीं है। वे सभी समाज को सुंदर और पुष्ट करने की बृहद संस्थाएँ हैं।

इन्हे विकृत कुछ स्वयंभु धर्म के ठेकेदारों और कुछ राजनीतिक सरोकारों वाले लोगों द्वारा निज स्वार्थ साधने के चलते किया है। बेचारी साधारण जनता उनके बहकावे में आस्थाओं के मकड़ जाल में फंस कर बंध जाती है।

यह किसी धर्म विशेष की बात नहीं है। यह सभी धर्मों की दशा है। हिन्दू धर्म को ही ले लीजिए। हमारे तो यहाँ लोग पढ़-लिख कर भी अनपढ़ो की-सी बात करते हैं। किसी से पूछे कि —

  • हिन्दू धर्म के मूल ग्रन्थ कौन है?
  • पुराणों के नाम क्रमवार बताओ?
  • षड्दर्शन कौन-कौन से हैं?
  • 9 श्रुतियों और स्मृतियों को क्रमवार बताओ?

सब कन्नी काटते हैं। बस हम हिन्दू हैं। इस धर्म का अता पता चाहे कुछ भी न हो। और देखो, यह पूछे कि यह हिन्दू धर्म है क्या? वैदिक धर्म तो सनातन धर्म तथा आर्य धर्म की बात करता है। जिसमें वसुधैव कुटुंबकम की बात होती है। फिर यह हिन्दू धर्म कहाँ से और कैसे निकला? जैन, सिख जैसे धर्म कहाँ से निकले और क्यों?

इन बातों का सही तथा प्रामाणिक ज्ञान 95% लोग नहीं दे सकते। पर है हम फिर भी हिन्दू। तो सिद्ध हुआ कि धर्म असल में एक भीड़ का नाम ही रह गया है और कुछ नहीं। सबसे बड़ा धर्म मानव धर्म है, जिससे ये दुनियाँ के सारे धर्म निकले हैं। पर उसे मानने को कोई तैयार नहीं है।

सभी संतों और ज़िंदा महात्माओं ने चीख-चीख कर इसका प्रचार किया, जिन्होंने असल में जिहाद की। पर मानी किस ने। यह दुनियाँ अपने ही रसूख के लिए जीती है और इसमें मारा जाता है हमेशा गरीब, मजलूम तथा सर्वहारा और असहाय वर्ग।

कोरोना विदेशों से लाने वाले।

हाल ही में सफदर गंज की हालत आप सबने देखी। कोरोना विदेशों से लाने वाले वही रसूखदार लोग थे जिन्होंने अपनी कमाई का तो आधे से ज़्यादा पैसा विदेशों में ही ख़र्च कर दिया होता है, उल्टा हमारी गाढ़ी कमाई को भी वे सरकारी खर्चे से वहाँ उड़ाते आए हैं।

जो ये सुबह कमाते हैं और शाम को खाते हैं। ये लोग हमारे देश की फैक्ट्रियों और कारखानों में काम करने वाले वह लोग हैं, जो अपनी सुविधा बेच कर देश की अर्थव्यवस्था को संभालते हैं।

क्या कोरोना संकट में इनकी समस्याओं को दरकिनार करना उचित था। विदेशों में फंसे भारतीयों को, जो करोना पीड़ित भी थे; उन्हें लाने के लिए सरकार के पास प्लान हैं और सुविधा भी। पर अपने देश के निर्दोष लोगों की आंखों के आंसू पोंछने के लिए कुछ भी नहीं।

खैर ये लोग तो सदियों से इसी पीड़ा से गुजर रहे हैं और गुजरते रहेंगे। सताएँ और तमाम सियासी पार्टियों तो इस वक़्त भी सियासत करने से बाज नहीं आ रही है, जब विश्व व्यापी संकट सिर पर मंडरा रहा है। किसे मालूम कल क्या हो? पर ये है कि ख़ुद को खुदा समझते हैं।

इस गफलत भरे माहौल में यदि ये स्वयं सेवी संगठन और धार्मिक संगठन सामने न आते तो सरकारों की सारी हेकड़ी निकल जाती। अब आप कहेंगे कि ये दोगली बातें क्यों? एक ओर तो धर्म पर चोट करता है और दूसरी ओर उसी की प्रशंसा। नहीं भाई यह मानव धर्म की प्रशंसा है। जो हमें हमारे पुरखों ने और संतों ने विरासत में दिया था और एक हम है कि उस महा-पुनीत भाव बोध को भी अपनी रसुखता की भेंट चढ़ाने पर तुले हैं।

अब रही जमात की बात। तो बता दू कि जमात के द्वारा किया गया वाकया असल में एक अमानवीय कृत्य था। फिर चाहे वह जाने अनजाने कैसे भी हुआ हो। यह मायने नहीं रखता। मायने रखता है परिणाम। दीन बांटने वाले ही अगर नफ़रत बांटने लगे तो उस धर्म और समाज का क्या होगा? उस पर कुछ तथाकथित मानवतावादियों की भी अपनी एक जमात है, जो इस नाज़ुक घड़ी में इस घटना से पूरे मुस्लिम समाज को जोड़ने पर तुली हैं।

वे ये नहीं समझते कि इस समाज में भी सभी लोग एक जैसे नहीं है। बहुत से ऐसे भी मुस्लिम पैरोकार है जो हिन्दू-मुस्लिम की भावना से ऊपर उठ कर मानव धर्म की बात करते हैं। इस पूरे मामले में उन्हें क्यों घसीट रहे हो? यहाँ भी ध्रुवीकरण और मजहबवाद की बू आती है।

तो फिर मैं क्यों न कहूँ कि पूरे फसाद की जड़ धर्म ही है। यदि ये अलग-अलग धर्म न होते तो यह सब न घटता। यह सब सदियों से होता आ रहा है। पहले साम्राज्यवाद के नाम पर तो आज धर्मवाद के नाम पर।

मैं धर्मों का विरोधी नहीं हूँ। मैं विरोधी हूँ तो इन धर्मो की व्यवस्थाओं और सरकारी तंत्र की स्वार्थपरता का। सरकारें चाहें तो यह झगड़ा ही सदा को समाप्त हो सकता है। पर वे ऐसा नहीं करना चाहती। ऐसा करने से उनकी राजनीति नहीं चल पाएगी।

यह भारत है साहब। यहाँ कोई भी इमोशनली ब्लैकमेल हो ही जाता है बस। सरकारें ऐलान करें कि किसी भी धर्म या समुदाय के बच्चों को सरकारी शिक्षा ही लेनी होगी। कोई भी धर्म या समुदाय अपनी निजी पाठशाला नहीं चलाएगा। धर्म को लेकर की जाने वाली पढ़ाई भी स्कूलों में ही होगी। जो उलंघन करता है तो उसे सजा दी जाएगी। तो सारे फसाद बंद हो जाएंगे। पर नहीं, उन्हें तो निजीकरण से अपने चहेतों को लाभ पहुँचाना है। बस फिर उसी की आड में दूसरे लोग भी अपना उल्लू साधने में कामयाब हो जाते हैं।

बच्चों को मुफ्त और सरकारी गुणवत्ता युक्त शिक्षा क्यों नहीं मिल रही है?

सरकारें और सियासी पार्टियाँ तो उल्टा सरकारी अध्यापकों को बदनाम करने पर तुली रहती है और बेचारा समाज उनकी बातों में आ कर असलियत भूल जाता है। ज़रा सोचो भाई कि क्या आजादी के 70 साल बाद भी हमारे बच्चों को मुफ्त और सरकारी गुणवत्ता युक्त शिक्षा क्यों नहीं मिल रही है?

जिसका प्रावधान करने की बात संविधान में की गई है। क्यों गरीब का बेटा या बेटी अमीरों या हुक्मरानों के बच्चों की तरह अच्छी शिक्षा नहीं ले पा रहे हैं? क्योंकि यह एक बड़ी चालाकी है। ताकि इन्हीं के बेटे बड़े-बड़े पदों पर बने रहे और हमारे आजाद गुलाम। यह पूर्ण सत्य है।

आज दुनियाँ के उच्च शैक्षिक धरातल पर भारत की सरकारी शिक्षा प्रणाली की सुविधाओं को रखा जाए तो हम शायद कहीं खड़े ही न हो पाएंगे। कई बदलाव हर सरकारों में करवाए गए। पर सब आंकड़ों और कागजों में। क्योंकि इन स्कूलों में किसी बड़े आला अधिकारी या नेता के अपने बच्चे नहीं पढ़ते हैं। सब ख्याली घोड़े।

सब को बराबर लाने के लिए पूरे देश में एक ही पाठ्यक्रम होना चाहिए और सभी नागरिकों को सरकारी स्कूलों में ही बच्चे पढ़ाने के सरकारी आदेश होने चाहिए। संविधान में संशोधन पर संशोधन किए जा रहे हैं तो क्या यह नहीं हो सकता?

एक शिक्षा एक पाठ्यक्रम।

अब आप कहेंगे कि इस से क्या होगा? एक शिक्षा एक पाठ्यक्रम से गरीब-अमीर सबके बच्चों को समान शिक्षा मिलेगी और बराबर ज्ञान मिलेगा। उससे बड़े से बड़ी सरकारी सेवा में गरीबों के मेहनती बच्चे पहुँच जाएंगे और पूरे राष्ट्र की विचारधारा भी एक बनेगी।

जिससे ये जमात जैसी घटनाएँ नहीं घटेगी। ये सभी धार्मिक संगठन हो, पर धर्म की शिक्षा सरकार के अधीन हो। सरकार तय करें कि किस धर्म के लोगों और बच्चों को कैसी धार्मिक शिक्षा देनी है। नहीं तो हम सब लोग इन ठेकेदारों के यहाँ यूं ही लूटते रहेंगे। भारत में पहले भी धर्म गुरु राजदरबार के ही सदस्य होते थे।

अब तो धर्म के क्षेत्र में ऐसी बाढ़ आ गई है कि जिसे भी अच्छे से बोलना और गाना-बजाना या डराना – धमकाना आ गया, वहीं स्वयंभु धर्मगुरु बन जाता है। न कोई परीक्षा और न ही कोई रोक-टोक। न हींग लगे न फिटकरी रंग चोखे का चोखा।

मैं यह नहीं कहता कि सभी धर्म गुरु निकम्मे हैं। पर सवाल तो उठते हैं। जैसे ग़लत किया जमातियों ने उंगली उठी पूरे मुस्लिम समाज पर। मेरा तो मानना है कि सभी ज्योतिष, अध्यात्म, वास्तु और योग जैसे गूढ़ विषय स्कूलों में पढ़ाए जाने चाहिए और वे भी मुफ्त। तभी निरीह जनता लूटने से बचेगी और इस तरह की आफतों से भी बचेगी, जो आज आई है।

हमें बच्चों को मानव बनाना है न की किसी धर्म का पैरोकार या महज़ कोई कर्मचारी और अधिकारी। वे बने, पर पहले वह एक मानव बने। आज ज़रूरत है सर्व धर्म समभाव की। यह भारत को ही नहीं, पूरी दुनियाँ को समझना होगा।

आज हमें मशीनी – इंजीनियरों से ज़्यादा मानवता के इंजीनियरों की ज़रूरत है। यह महामारी चाहे मानव मस्तिष्क की खोपड़-वाजी हो या फिर किसी दैवी शक्ति का प्रकोप। चाहे फिर प्रकृति की विडम्बना हो। पर हर दृष्टि से कहीं न कहीं इस सब के लिए मानव की अमानवता जिम्मेवार है। अतः आज ज़रूरत है तो मानव को मानव बनाने की है।

सब जानते हैं कि चीन के बुहान से यह रोग दुनियाँ के कोने-कोने तक फैल गया। क्या इसके पीछे भी अमानवीयता का हाथ नहीं है? क्यों विश्व समुदाय के सामने यह बात चीन ने समय पर नहीं रखी? क्यों चीन अन्य देशों की यात्रा अपने लोगों से करवाता रहा, जबकि वह जानता था कि यह एक जानलेवा और लाइलाज घातक बीमारी है।

हम नहीं जानते कि यह चीन की चाल थी या फिर कोई प्राकृतिक घटना। परन्तु विश्व मानवतावादी दृष्टिकोण तो चीन को भी होना चाहिए था। वहीं नहीं रुकी यह गाड़ी। उस पर कई देशों के जमाती टूरिस्ट वीजा पर भारत घूमने आते हैं और यहाँ अपने ही धर्म को शर्मसार कर दिया। क्या फिर भी मानवता का पाठ स्कूलों में पढ़ाने के विपक्ष में खड़े होंगे हम? यह विश्व समुदाय को गहनता से सोचने की ज़रूरत है आज।

पूरे विश्व में ही धार्मिक शिक्षा को सरकारों को अपने हाथों में लेना चाहिए।

वरना भविष्य में इस के और भी गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। मैं तो कहता हूँ कि पूरे विश्व में ही धार्मिक शिक्षा को सरकारों को अपने हाथों में लेना चाहिए। भले ही उसके लिए सरकारें जनता की राय समय – समय पर लेती रहे। तभी यह भीड़ तंत्र राह पर आएगा। वरना यह पीढ़ी दर पीढ़ी यूं ही घटता जाएगा।

भले ही आज जान पर बन आई है, इसलिए लोग डाक्टरों को भगवान कहने लगे हैं। कहना भी चाहिए। पर असल में सबसे ज़्यादा ज़रूरी समाज को सही शिक्षा देना है। अगर शिक्षा का विकेंद्रीकरण और दोहरी व्यवस्थाएँ न रोकी गई तो भविष्य में डॉक्टर भी हाथ खड़े कर देंगे।

कुदरत या खुदा अपनी ओर से कुछ नहीं करता है। वह हमारे ही कर्मो को कई गुना बढ़ा कर हमें वापिस करती / करता है। किसी घाटी के बीच डाली जाने वाली आवाज़ ज्युं उल्टा हमारे ही कानों में कई गुना बढ़ कर प्रतिध्वनि के रूप में लौट आती है, उसी प्रकार कर्म भी लौटते हैं।

असल में सारे फसाद की जड़ कौन है?

इसलिए अच्छे कर्म करने की सीख जब तक न दी गई, तब तक अच्छे कर्म की उम्मीद रखना भी बेईमानी है। अब आप समझ गए होंगे कि असल में सारे फसाद की जड़ कौन है। सरकारें हैं कि इसका ठीकरा उसके सिर और उसका ठीकरा इसके सिर पर फोड़ती रहती है। अपनी गलती मानने को न पक्ष तैयार है और न विपक्ष। अब मेरे एक मित्र का कहना है कि ये मुस्लिम साले गद्दार है। ये मोदी जी से जलते हैं, इसलिए इन्होंने ऐसा किया। इन्हे तो गोली मार देनी चाहिए।

वह बेचारा भाजपाई है और उसके विरोध में दूसरे मित्र ने कहा कि हां-हाँ, जो तुम सोचते हो और बोलते हो वहीं सही है और सच भी वहीं होता है। माना कि ये जमाती साज़िश रच गए। तेरे मोदी जी की सरकार कहाँ सोई हुई थी। कहाँ थी खुफिया एजेंसियाँ। क्या वे सिर्फ़ और सिर्फ़ विरोधी पार्टियों की खुफिया जानकारी में ही लगा के रखी है? वे देश के लिए होती है जनाब किसी व्यक्ति या पार्टी की खुशामद के लिए नहीं। वह बेचारा कांग्रेसी था।

भाजपाई ने उसका दोष केजरीवाल के सर मढ़ दिया। यह तो राज्य सरकार को देखना चाहिए था। कांग्रेसी ने जबाव दिया कि पढ़ कल का अखबार। देख आपकी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता शांत कुमार का बयान। वे कहते हैं कि इस मामले में चूक दोनों सरकारों ने की है। पर उनकी सुनता कौन है।

आपके तो यहाँ गुजराती जोड़ी की दादागिरी चलती है और भी बहुत कुछ वे अनापशनाप कह गए। सब यहाँ लिख पाना संभव नहीं है। यहाँ गुटवाजियों की बू आ रही थी। तो मुझे लगा कि असल में यह भीड़ तंत्र ही सारे फसाद की जड़ है। यदि आदमी दिमाग़ के बजाए दिल से पढ़ जाए तो सब ठीक हो जाएगा। पर अफसोस यह होगा कैसे?

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बताया है की — कोरोना संकट के समय पर भी इस्लामिक धार्मिक संगठन की जानबूझकर लापरवाही क्या ठीक था? याद रखे – सबसे बड़ा धर्म मानव धर्म है। “हमें बच्चों को मानव बनाना है न की किसी धर्म का पैरोकार या महज़ कोई कर्मचारी और अधिकारी। आज हमें मशीनी – इंजीनियरों से ज़्यादा मानवता के इंजीनियरों की ज़रूरत है।” यदि आदमी दिमाग़ के बजाए दिल से पढ़ जाए तो सब ठीक हो जाएगा। पर अफसोस यह होगा कैसे?

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यह वैचारिक लेख (आज की जरूरत।) “हेमराज ठाकुर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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कच्चे धागे की प्रीत।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ कच्चे धागे की प्रीत। ♦

श्रावण मास की पूर्णिमा, एक पावन त्यौहार ले आई।
अटूट प्रीत, विश्वास व आस्था का एक और उपहार ले आई॥

रक्षाबंधन की प्रचलित है, ऐसी ऐतिहासिक कहानियाँ।
जो सुनते आए हम, अपने पुराण कथाओं की जुबानियाँ॥

एक कच्चा धागा अपने अंदर समाहित किए, सागर जितना प्यार।
एक भरोसा, निश्छल प्रेम से, दो आत्माओं को बांधे ये त्यौहार॥

भगवान विष्णु बलि की भक्ति से प्रसन्न होकर, भक्त के घर रहने आए भगवान।
फिर मां लक्ष्मी व्याकुल हो बलि को राखी बांध, हरि को ले आई बैकुंठ धाम॥

चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने भी, अपनी प्रजा की रक्षा के लिए हुमायूं को राखी भेजी।
तब हुमायूं ने भी उनकी राज्य की रक्षा कर, बहन की प्रीत दिल में सहेजी॥

जब इंद्राणी ने भी अपने पति की दानवों से रक्षा की, बांधकर रेशम का धागा।
फिर इंद्र के मस्तक पर, विजय श्री का तिलक लागा॥

महाभारत में शिशुपाल के वध से, जब श्री कृष्ण की उंगली से रक्त बहा था।
तब द्रोपदी ने साड़ी के पल्लू का अंश बांधकर, श्री कृष्ण को धर्म भाई कहा था।

एक बार यमदेव कई बरस तक, अपनी बहन यमुना से नहीं मिलने आए।
तब यमुना ने भी, प्यारी आंखों से नीर बहाए॥

फिर गंगा ने अपने भाई को, मिलने के संदेश पहुँचाये।
आकर बहन को प्यार से मिलकर, यमुना को अमृतत्व दे जाए॥

यह त्यौहार रक्षा – कवच के नाम से भी, अक्सर जाना जाए।
इस कच्चे धागे में तो, दो पावन आत्माओं का बंधन माना जाए॥

जब कच्चे धागे की प्रीत बसती चली जाए, ऐसा ही यह पर्व पावन।
सारी खुशियां देकर अब, रुखसत हो जाएगा सावन॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

मेरे सभी प्रिय पाठकों आप सबको तहे दिल से रक्षाबंधन पर्व पावन की शुभकामनाएं।-KMSRAJ51

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से भाई बहन के पवित्र प्रेम और रक्षा वचन से भरपूर पवित्र पर्व रक्षाबंधन का वर्णन किया है। भाई बहन एक दूजे के सच्चे मित्र भी है जन्म – जन्मांतर तक। रक्षाबंधन – भाई और बहन के प्रेम को दिखाता एक पवित्र पर्व।

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यह कविता (कच्चे धागे की प्रीत।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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अफगान में तालीबानी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ अफगान में तालीबानी। ♦

ऑफगान शासन में 1992 से 2001 तालिबान कायम रहा,
पाकिस्तान ने तालिबान का जन्म भी अफ़गान तालिबान से हुआ।
अफगान पर पंजशेर घाटी छोड़ कर – कब्जा लिया,
अफगान और पाकिस्तानी, तालिबान एक सिक्के के दो पहलू॥

कहते तो है कि इसमें शियाओं की फ़ौज अधिक होती,
जिसने गजनी चौक से अपनी बहनों को लुटते हुए देखी थी।
शिया हजारा नेता अब्दुल अली मजारी की प्रतिमा तोड़ा,
वतन के लिए लड़ने वाली महिला गवर्नर सलीमा मजारी को बंधक बना लिया॥

ऐसा मंजर वहां छाने लगा है, लगता देखकर इंसानियत भूल गया है,
जलालाबाद से आम जनता पर गोलियां बरसा कर मारा जा रहा॥

अफगान के गजनी चौक पर कभी हिंदू लड़कियां नीलाम होती,
आम सड़क पर आज मुस्लिम लड़कियों की बोली लगती।
कहते है ईश्वर की जुबान में आवाज नहीं होती है,
कहा ढाने वालों पर दुखी बौछार खड़ी होती है॥

काबुल हवाई अड्डे के बाहर जुटी भीड़ पर आतंकियों ने फायर किया,
जिसमे कई पत्रकार और आम आदमी घायल हुआ।
अफगान में चारों तरफ महिलाओं के पोस्टर पर कालिख लीपी,
अमेरिका का साथ देने वाले लोगों के मुंह पर कालीख पोती॥

तालिबान के खिलाफ पंज शेरघाटी से जनता सड़क पर उतरी,
उधर अमेरिकी हथियारों का जखीरा तालिबान के हाथ पड़ी।
कुंदूर एयरपोर्ट पर अमेरिकी गाड़ियों का जखीरा इकट्ठा किया,
टैंक टॉप ड्रोन विमान आदि सभी को तालिबान हथिया लिया॥

उधर पाकिस्तान – तालिबान आतंकियों को जेल से छोड़ रहा,
पांच बरस से बंद आतंकी महमूद रसूल को छोड़ दिया!
पाकिस्तानी विशेषज्ञों का कहना यह है कि पाकिस्तान में भी,
यही आतंकी गुट लंबे समय से पाक में पाकिस्तान से लग रहा था॥

अफगान के अजेय पंज शेरघाटी से, अमरूल्लाह सालेह ने बिगुल बजाया।
कार्यवाहक राष्ट्रपति गनी के विदेश, भाग जाने के बाद, खुद को बताया॥

अफगानी सुरक्षा एजेंसी के दफ्तर में, तालिबानियों ने तोड़फोड़ मचाया।
हथियारों के बल पर दफ्तर और घरों में लूट पाट मचाया,
बच्चियों के साथ बर्बरता की कोशिश करते सामने आया॥

तालीबानी शासक जब अपना पूरा शासन चलाएंगे,
अफगान में शरिया क़ानून थोपने वाले सख्त कानून लाएंगे।
हत्या के दोषियों को सार्वजनिक रुप से फांसी पर लटकाएंगे,
आरोपियों के अंग – भंग करने का नजारा देखने में आएंगे॥

पुरुषों में दाढ़ी रखना अनिवार्य कर दिया जाएगा,
महिलाओं को बुर्के में ढक कर पूरा शरीर रखनी होगी।
10 साल से ऊपर की बच्चियों को स्कूल जाने पर रोक होगा,
मानवाधिकार का सरेआम उल्लंघन होता दिखेगा?

पाकिस्तानी जो आज खुश हो रहे उनको भी दंश सहना होगा,
उनको अपनी देश में भी सरिया का पालन करना होगा।
गरीबों की शोषण के खिलाफ जनता को लड़ना होगा,
अपनी वतन की हिफाजत के लिए सबको मिलकर बढ़ना होगा॥

कौन अच्छे शिया सुन्नी समुदाय इस पर विचार करना होगा,
कठोर रुढ़िवादी रुख को अपनाने वालों को बदलना होगा।
दुनिया में हो शांति कायम, इस पर मिलकर काम करना होगा,
विश्व बंधुत्व हो कायम, के लिए सबको मिल आगे बढ़ना होगा॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में — वर्तमान समय में तालिबान के लड़ाकों या यूँ कहे इंसानियत के दुश्मन आतंकवादियों द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा और उनकी बर्बरता लूट, बलात्कार, हत्या, और खून खराबा को दर्शाया है।

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यह कविता (अफगान में तालीबानी।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें: अफगानी – दुर्दशा।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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आधुनिक हिंदी के दिशा नायक निराला।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ आधुनिक हिंदी के दिशा नायक निराला। ♦

निराला जी के संबंध में कोई स्वतंत्र समीक्षा पुस्तक नहीं लिखी मिली।
समीक्षात्मक मूल्यांकन करने वाले प्रमुख आलोचक पंडित राम चंद्र शुक्ल और नंद दुलारे वाजपेयी जी ही रहे।

निराला जी के काव्य वैशिष्ट्य और उपलब्धियों पर समीक्षा विचार छायावादी की भांति की गई।

नंद दुलारे वाजपेयी जी सुमित्रानंदन पंत को पसंद करते थे, पंडित शुक्ल या अन्य कवि उन्हें काव्य की कृतियों में वैसा नहीं भाते हैं।
फिर भी कवि की अभिव्यंजन पद्धति से समीक्षा प्रारंभ किया, निराला जी के नाद सौंदर्य पर और अधिक ध्यान दिया।

उनकी प्रगीत मुक्तको में संगीतात्मकाता पाया,
उन्होंने संगीत को काव्य के निकट लाने का प्रयास किया।
उनकी पद्य योजना पहुंच में जटिल दिखाई देती है,
समस्त पद विन्यास कवि की कार्यशैली की विशेषता है॥

काव्य में विषम चरण छंदों का प्रयोग,
काव्य की तीसरी विशेषता रही है।
काव्य दृष्टि से शुक्ला नहीं यह स्वीकारा,
बहु स्पर्श नी प्रतिभा निराला मौजूद है।
शैली और सामाजिक मूल्यों के क्षेत्र में,
निराला आदर्श मान्यता बंधन नहीं स्वीकार किया॥

उनके भाषा में व्यवस्था की कमी और पद योजना का अर्थ व्यंजन दुर्बल माना।
फिर भी उनकी विद्रोही भावना और जगत के विविध प्रस्तुत रूपों आदि को लेकर चलने वाली काव्य प्रतिभा के महत्व को, उदासीन भाव से ही सही स्वीकार किया।

निराला जी के काव्य वैशिष्ट्य और काव्य प्रतिभा की तरफ वाजपेयी ने जगत का ध्यान आकृष्ट किया।
विश्लेषण और मूल्यांकन में आलोचक की कठिनाई को वाजपेयी जी ने शुरुआत में ही कह दिया।

कवि के व्यक्तित्व और उसके निर्माण में ऐसी सूक्ष्म शब्दों का प्रयोग मिलता है,
जिसका विश्लेषण हिंदी की वर्तमान धारणा ने विशेष कठिन क्रिया वाजपेयी जी ने बताया।

पंडित नंद दुलारे जी की समीक्षा अनुसार निराला जी, हिंदी काव्य की प्रथम दार्शनिक कभी और सचेत कलाकार हैं।

निराला जी के विकास के मूल में भावना की अपेक्षा बुद्धि तत्व की प्रधानता है।
जो उनके स्वछंद छंदो, से दिखाई पड़ता है।
उनके काव्य में परंपरा के प्रति, गहरा विद्रोह झलकता है।

छंदोबद्ध संगीतात्मक रचनाओं के द्वारा, निराला जी के काव्य का दूसरा चरण शुरू होता है। बौद्धिकता पर नियंत्रण, भावना युक्त रचना, कला सृष्टि का स्वरुप देने में समर्थ हैं।

निराला जी के काव्य के विकास का तीसरा चरण, गीतिका काव्यों में परिलक्षित होता है। काव्य में विराट बौद्धिक चित्रों के स्थान पर रम्मय आकृतियां अधिक मिलती है।

ऐसा परिवर्तन, निराला के काव्य में, बुद्धि तत्व के कलात्मक परिपक्वता की दिशा में आगे ले जाना है।

शुक्ल जी की मत का खंडन करते हुए, पंडित नंद दुलारे वाजपेयी जी ने कहा।

सार्थक शब्द सृष्टि, प्राढ़ सशक्त पद विन्यास और संगीतात्मकता, निराला जी की हिंदी कविता को प्रमुख देन बताया। शब्द संगीत परखने और व्यवहार में लाने,
में निराला जी आधुनिक हिंदी के दिशा नायक हैं बताया।
— ( साभार हिं. सा. का बृहद इतिहास )

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस Article में समझाने की कोशिश की है की, “पंडित नंद दुलारे वाजपेयी जी ने कहा — सार्थक शब्द सृष्टि, प्राढ़ सशक्त पद विन्यास और संगीतात्मकता, निराला जी की हिंदी कविता को प्रमुख देन बताया। शब्द संगीत परखने और व्यवहार में लाने में निराला जी आधुनिक हिंदी के दिशा नायक हैं बताया।”

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यह लेख (आधुनिक हिंदी के दिशा नायक निराला।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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अफगानी – दुर्दशा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ अफगानी – दुर्दशा। ♦

दुनिया सारी मौन खड़ी,
तालिबानी – अफ़गान चढे!
माता – बच्चे – बहना सारी,
दहशत के माहौल में है पड़े।

अफरा-तफरी चारों तरफ,
अफगान के नागरिकों काे,
बुरे समय में नामी हस्तियां,
काबुल छोड़कर भाग रही।

महिला मेकर सारा करीमी,
फिल्मी मेकर जान बचाने की,
दुनिया से गुहार लगाने लगी,
कौन करेगा मदद दुखी सभी।

अफगानी है, के साथ वहां,
दुर्व्यवहार किया जा रहा!
मदद करो – मदद करो मेरी,
चारों तरफ हाहाकार मचा।

मानवता सारी नो – नो चुकी,
अफगानी लड़कियां दिखी।
तालिबानी सेना लडाके उनको,
उठा, उठा कर लेकर जा रहे।

मनमानी करते हैं उनके साथ,
बच्चियां बिल्कुल यही कह रहीं।
विरोध गर उनका कोई करता,
उनकी आंखे वह सब नोच रहे।

नन्हें – नन्नी बच्चे भूखे – प्यासे,
दूध पीने के लिए वह नहीं पा रहे।
उनकी जान बचेगी अथवा नहीं,
आगे बढ़कर कोई नहीं आ रहा।

अफ़गानी बैंक में भारी खड़ी,
पैसा आया था अपना पाने को!
हाथ खड़ा कर दिए बैंक सभी,
दिल थाम सारी जनता खड़ी।

भाग रहा था सारा समाज हित,
अपनी अपनी जान बचाने को!
कुछ अमरीकी विमान पर चढ़े,
लापरवाही, से गिर धरा मर गए।

नागरिकों को नहीं बचाने वाला है?
अफगानी सेना नतमस्तक वाली।
पहले ही तालीबानी अवस्था देखी,
उनका अत्याचार जनता थी सहती।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में — वर्तमान समय में तालिबान के लड़ाकों या यूँ कहे इंसानियत के दुश्मन आतंकवादियों द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा और उनकी बर्बरता लूट, बलात्कार, हत्या, और खून खराबा को दर्शाया है।

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यह कविता (अफगानी – दुर्दशा।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें: अफगान में तालीबानी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

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सावन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ सावन। ♦

आया सावन
अति मनभावन
पड़ गए झूले
अमुआ की डाल पे
चल सखि झूलें
नभ तक ले – लें
पींगे सँभाल के।

आया सावन —
करतल करके
वृक्षों के पात भी
मिल बूँदों से
ख़ुश हो कर के
करते हैं बात भी।

आया सावन —
प्यासी धरती
सूखे हैं गात भी
जल बिन तरसी
बदली बरसी
जल की सौग़ात दी।

आया सावन —
बम-बम भोले
गूँजे शिव द्वार पे
शंकर भोले
सारे बोलें
तू पालनहार रे।

आया सावन —
चूनर धानी
धरती ने ओढ़ ली
बरखा रानी
करे मनमानी
सागर से होड़ की।

आया सावन —
काग़ज़ कश्ती
पानी में डाल के
छोड़ के सुस्ती
मिलकर मस्ती
करते हैं बाल रे।

आया सावन —
साजन सजनी
हाथों में हाथ ले
अपनी अपनी
प्रेम प्रीत की
करते हैं बात रे।

आया सावन —
जंगल – जंगल
नाचे हैं मोर रे
नभ से थल तक
केवल जल-जल
नदियों का शोर रे।
आया सावन,
अति मनभावन।

♦ वेदस्मृति ‘कृती’ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

—————

  • “वेदस्मृति ‘कृती’ जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों में समझाने की कोशिश की हैं – सावन के मौसम में धीमी – धीमी बारिश का होना, प्रकृति का खूबसूरत दृश्य, झूला-झूलना, हर तरफ हरियाली ही हरियाली, पृथ्वी पर चारो ओर प्रकृति का सुन्दर नज़ारा नजर आती है। मन खुशियों में झूमता है जैसे मोर मस्त होकर नाचता हैं।

—————

यह गीत/कविता/आर्टिकल (सावन।) ” वेदस्मृति ‘कृती’ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/गीत सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई आई टी . शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक. समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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प्रातः उठ हरि हर को भज।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ प्रातः उठ हरि हर को भज। ♦

प्रातः उठ हरि हर को भज लो,
धरती का अभिनंदन कर लो।
उल्लसत मनसे बंदन कर लो,
मुक्त कंठ में चंदन धर लो॥

निर्मल पानी गुनगुन पी लो,
चाय की चुस्की रुक कर ले लो।
लिखनी ले साहित्य लिख लो,
प्रातः उठ हरि हर भज लो॥

नित्य – क्रिया में निवृत्ति हो,
गंगा जल ले काया धो लो।
धूप – दीप ले प्रभु से बोलो,
प्रातः उठकर आंखें खोलो॥

पेपर आया उसको पढ़ लो,
देश दुनिया की खबर ले लो।
दूरदर्शन से – मेल कर लो,
प्रातः उठ हरि विनती कर लो॥

भूखा – नंगा जो भी भेजा,
झोली सबकी भर के दे दो।
कोई खाली हाथ न जाये,
प्रातः उठकर प्रभु से बोलो॥

कभी न गलती हरि करने दो,
स्वच्छ हृदय मन भरने को।
अपना हमको प्रभु बना लो,
प्रातः उठ हरिहर को जप लो॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में बताया है, सुबह उठकर आपका नित्य क्रिया कर्म, का क्या क्रम होना चाहिए। जिससे आपका हर एक कार्य शांति पूर्वक, सही समय पर पूर्ण हो जाये।

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यह कविता (प्रातः उठ हरि हर को भज।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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