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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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2023-KMSRAJ51 की कलम से

सब कुछ बिकता है यहां।

Kmsraj51 की कलम से…..

Sab Kuch Bikta Hai Yaha | सब कुछ बिकता है यहां।

बिकता है यहाँ सब कुछ,
जो भी जहां में दिखता है।

जज़्बात से लेकर ईमान तक,
खुशियों से लेकर अरमान तक।

पानी से लेकर शुद्ध हवा तक,
सांस देने वाली हर दवा तक।

आसमान से लेकर इस जमीं तक,
कई बार रिश्तों की हँसी तक।

कली से लेकर फूल तक,
जल-अमृत व मंदिरों की धूल तक।

हँसी से लेकर मुस्कान तक,
मरने से जीने के अरमान तक।

कलयुग में…
सब कुछ बिकता है साहब!

बस नहीं मिलता तो खरीदार,
इन बेमुराद मिलने वाले अश्कों के।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में व्यक्त किया गया है कि आज के कलयुग में सब कुछ मानव जीवन में खरीद-बिक्री के रूप में प्रतिष्ठित हो गया है। जो भी हम जहां देखते हैं, वह सब बेचा जाता है, चाहे वह वस्त्र, जज्बात, ईमान, खुशियाँ, अरमान, पानी, हवा, दवाएँ, आसमान, धरती, रिश्ते, कलियाँ, फूल, जल, अमृत, या मंदिरों की धूल क्यों न हो। हाँ, इस सबके बावजूद, एक चीज़ नहीं मिलती – वो है बेमुराद अश्कों की मूल्यवान अद्यतन की मांग। इसके बगैर, जीवन का मतलब और भी कुछ हो सकता है, जैसे मरने से जीने के अरमान।

—————

यह कविता (सब कुछ बिकता है यहां।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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हम है चंद्रमा वाले।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hum Hai Chandrama Wale | हम है चंद्रमा वाले।

चंदा मामा हम आ गए,
भारतवासी छा गए।
हमारे वैज्ञानिक सारी
दुनिया को भा गए।

हम उन चार देशों में भी थे,
जो चंद्रमा पर गए थे।
हम संसार के उस देश के,
गौरवशाली नागरिक हैं,
जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर,
सबसे पहले पहुंचे है।

जापान, रूस, चीन,
अमेरिका देखते ही रह गए।
अब दुनिया को,
रहस्यों से अवगत कराएंगे।

भारत का परचम और
ग्रहों पर भी लहराएंगे।
दुनिया वाले,
देखते ही रह जायेंगे।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में व्यक्त किया गया है कि चंद्रमा के स्पेस मिशन के माध्यम से भारतवासियों ने अपने वैज्ञानिक और तकनीकी योगदान के साथ दुनिया के स्तर पर अपनी महत्वपूर्ण पहचान बनाई है। वे चार देशों को संदर्भित कर रहे हैं, जो चंद्रमा पर मानव अभियान का आयोजन कर रहे हैं। हम संसार के उस देश के गौरवशाली नागरिक हैं, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सबसे पहले पहुंचे है। कविता का समापन भारत के वैज्ञानिक प्रगति को और उनके अंतरिक्ष मिशन को संकेतित करता है, जो दुनिया भर के लोगों की नजरों में होगा।

—————

यह कविता (हम है चंद्रमा वाले।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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बरसो अब तो मेघ।

Kmsraj51 की कलम से…..

Baraso Ab Toh Megh | बरसो अब तो मेघ।

आओ-आओ क्षितिज तट पर,
छोड़ नभ आकाशगंगा को सेघ।
वरण करो स्वर्ण बूंद गंगा को,
घन बनकर बरसो अब तो मेघ।

घिर-घिर कर आओ,
चहुँ दिश छा जाओ।
बंद कर नयन अपने,
बूँदों से तृप्त कर जाओ।

भर दो निखिल रंगों से धरा को,
उज्जवल धवल नीरों को लाओ।
हे मेघ! बरसा के नेह,
प्रीति पवन के संग बह जाओ।

भीगे भुवन सारा पाकर नेह तुम्हारा,
निर्जन विजन को सुंदर कर जाओ।
अमृत सुधा का वर्षण कर तुम,
अतुल्य प्रीति देकर हरियाले हो जाओ।

भूले बिसरे क्षण की व्यथा वेदना,
पुष्कर अनंग पत्थर फूल जो खिन्न।
वरण करो स्वर्ण बूंद गंगा को,
घन बनकर बरसो अब तो मेघ।

घोष करो शंखनाद करो अपना,
सौम्य स्कन्ध बनकर घनमाली।
उड़े जैसे धरा पर तुरग शिरस वाली,
पुलकित हो प्रमुदित हो मराली।

खुले गगन में जड़ित अंध रस
वाताज बनकर तुम फिर-फिर आओ
वरण करो स्वर्ण बूंद गंगा को
घन बनकर बरसो बरस जाओ मेघ।

रिमझिम-रिमझिम झर-झरकर,
बरसो तुम रंग गगन से।
भीगे-भीगे से स्वप्नों से तुम,
स्वप्निल छटा बनकर आओ रे।

करे कल्पना मन तरंगों पर,
नर्तन करे मानव संसाधन।
वरण करो स्वर्ण बूंद गंगा को,
घन बनकर बरसो अब तो मेघ।

जय हो! जय हो! हे घनराज!
सज्जित करो रंजित शरासन को।
जोड़ो पुहुमी को गगन से,
भरो तुम आकंठ ताल तलैया को।

प्रियदत्ता करे आरती श्रुति तेरी,
निज अनुरंजन अनुराग बढ़ाये।
वरण करो स्वर्ण बूंद गंगा को,
घन बनकर बरसो अब तो मेघ।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह कविता (बरसो अब तो मेघ।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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राखो चुंदरिया संवारि।

Kmsraj51 की कलम से…..

Rakho Chundaria Sanvaari | राखो चुंदरिया संवारि।

भीगल जाले मोर चुनरिया, छुपाये छिपे ना द्युति दागरी।
चूक चटक चंदा जो छिपा था, चुंदरी तो चटकार री॥

भीगल चुंदरी निखिल निचोड़ा, मोहन ज्यों सपने साथ री।
घट-घट खोजत नीक चुनरिया, पायो अपने पास री॥

इहै चुनरिया नहीं तुम्हारी, प्यारी-प्यारी यारी दुलारी।
जेते सुन्दर चुंदरी पायो, तेते ज्ञान, मान, ग्यान अगाध री॥

जा बुन लायो मोहन मोरे, मौन ज्यों महा भंडार री।
चुनरी चुरा चारो चौकछु रे, सूर्य चन्द्रमा जान्यो संसार रे॥

आंगन लाये पिया चुनरिया भीगी झीनी सारी।
गणपति गावत बीच बाजार, नीक चुनरिया नीक किनारी॥

रंगी चुनरिया को रंग निराला, मागत मधुवन मां नन्दलाल।
मंगल मंदिर बूझत न्यारी, देखत बारी – बारी – सारी॥

सोलह सी बंद चुंदरी चोखी, चार चौपटा नाग-पास री।
रंगना धूमिल चुंदरी चटकीली, राखो राजे इसे संवारि री॥

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — यह कविता मोहन (श्री कृष्ण) और उसकी प्यारी चुंदरी के प्रेम की कहानी को व्यक्त करती है। चुंदरी को धीरे-धीरे मोहन की प्यारी यारी और उसके ज्ञान के साथ मिल जाती है। मोहन की प्रेरणा से, वह चुंदरी अपने स्वामी के पास आती है और उसका साथ देती है, जैसे सूर्य और चंद्रमा समय-समय पर संसार को प्रकाशित करते हैं। चुंदरी का रंग निराला होता है और वह मंगल मंदिर की शोभा को बढ़ाती है, जैसे मधुवन में नन्दलाल के साथ खुशियों की गाथा। इस रूप में, चुंदरी को मोहन के प्रेम और उसकी भक्ति का प्रतीक माना जा सकता है।

—————

यह कविता (राखो चुंदरिया संवारि।) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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विधात्रि की माया।

Kmsraj51 की कलम से…..

Vidhatri Ki Maya | विधात्रि की माया।

रे मन तुझे रोकता हूँ,
क्षण-प्रतिक्षण तू क्युँ खिंचा जाता है।
मनःशक्ति जिसे समझता तू नारी,
इस जग में कब से उसका नाता है।

कुछ-कुछ यादों सा परिचित है,
सुध से बढ़ता अनुराग बड़ा।
रग-रग में कौन छिपा अपना,
रहता जिससे विराग बड़ा।

कैसी सुंदर यह नगरी,
कैसी इसकी सुलक्षण काया।
स्तुत्य है पावन यह धरती,
धन्य-धन्य है भरत भूमि की माया।

पहन-पहनावा शशिप्रभा का,
श्रृंगारित करती पिण्ड ग्रहों को।
निसर्ग हर्षोल्लातित हो खोली आँखें,
निहारती अपने स्वर्णिम संसार को।

झिलमिलाते विटपों पर जगमग पुष्प घनेरे,
गुच्छों – गुच्छों से भर जाते आम्र रसीले।
आलिंगन में लेकर नील गगन को,
कभी दृश्य कभी दर्पण बन जाते निराले।

कलरव करती कहीं कोकिला सारी,
उड़-उड़कर बैठती डाली-डाली।
चितचोर चंचल-सी तितलियाँ उड़ बैठती,
यह फूल डाली उस फूल डाली।

हरित वनों के उन्मुक्त कंठों से,
निर्झरी बन जाते झरने नाले।
घुल-घुलकर वादियों में चंद्रभूति-सी,
निर्मल गंगा की झिलमिल आले।

उतरती खेतों में स्वर्णिम आभा,
सींचकर साँझ सुनहली गाथा।
अनन्त की नील उपवन के बीच,
विहँस पड़ती प्रकृति दे अपना साथा।

बनैले शस्य भी तो पुलकित हर्षित,
समीरण में झूम रहे स्वच्छंद।
महामाया के अंग – अंग में भरा,
किरणित हो फूटता महा आनन्द।

मदमस्त हो देखती सृष्टि की ओर,
झंकृत करती उर के हर तार।
उमड़ पड़ते हृदय के उच्छवास,
अभिनंदित हे सृजक! तेरा व्यापार।

हे मातु तू धन्य;
नाना कुसुमों से सिंगारित कर उपवन,
निहारती वासा-व-लोक इसकी छवि न्यारी।
विविध सारंगों से सजी-धजी यह,
रंग-बिरंगी-सी सजी यह क्यारी।

बाँस है बबूल है कहीं-कहीं पर धूल है,
चहुँ ओर बिराजती बस हरियाली है।
कहीं कास है कहीं दूब है कहीं फूल से,
श्रृंगारित नदी नाल वरुणवास है।

नारी = मन की शक्ति

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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यह कविता (विधात्रि की माया।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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गाओ रे शुभ मंगल गीत रे!

Kmsraj51 की कलम से…..

Gao Re Shubh Mangal Geet Re | गाओ रे शुभ मंगल गीत रे!

सावन माह में गाओ मिलकर शुभमंगल गीत रे…।
भारतीय वैज्ञानिक कर आए चांद पर जीत रे…॥

पावन माह अगस्त की पावन तिथि तेईस बनी गवाह।
चंद्रयान 3 की सफलता से हर दिल ने किया वाह – वाह॥

हो गई है इसरो में इन भारतीयों की जश्न की जीत रे…।
भारत माता के लाल निभा आए रिश्तों की प्रीत रे…॥

चांद के दक्षिणी छोर पर ज्यों ही तिरंगा लहराने लगा।
हर हाथ देकर सलामी खुशी से हर दिल मुस्कराने लगा॥

चंद्रयान ने पद~चिन्हों को इस कदर चंद्रसतह पर अंकित किया।
जैसे हर भारतवासी ने — सौ वर्ष की उम्र को हो जिया॥

भारत माता के गौरव को वैज्ञानिकों ने चार चांद लगा दिए।
बिन दिवाली के ही जलने लगे घर~घर खुशी के दीए॥

विश्व में भारतीयों ने एक नया रच ही डाला इतिहास।
6:04 मिनट के पल को बना ही दिया बिलकुल खास॥

आज हर उस शख्सियत को भारतीयों का हार्दिक नमन।
जिनके अथक परिश्रम से धरती मां का चंदा मामा से हुआ मिलन॥

उन पांच की कार्यकारिणी ने विजयी विश्व का तिरंगा लहराया।
अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत के विश्व गुरु होने का परचम छपवाया॥

बधाई गाओ रे… मंगल गीत की… चंद्र जीत की…।
भारतमाता और चंदा मामा के प्रीत की बधाई गाओ रे…॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — अगस्त माह की पावन तिथि 23 को 6:04 मिनट के पल को बना ही दिया बिलकुल खास, विश्व में भारतीयों ने एक नया रच ही डाला इतिहास। चांद की दक्षिणी छोर पर तिरंगे की लहराने की तस्वीर जब दिखाई दी, जिससे हर भारतीय के दिल में गर्व और खुशी की भावना उत्तेजित होती है। चंद्रयान-3 ने चंद्रसतह पर पद-चिन्हों को अंकित करके यह संकेत दिया कि भारतवासियों ने भी विजय की उम्र जी ली है, जैसे उन्होंने सौ वर्ष की उम्र को जी लिया है। भारतीय वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 के माध्यम से भारत माता की गरिमा को बढ़ावा दिया है और घर-घर में खुशियों के दीप जलने लगे हैं। इस कविता में चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के साथ-साथ भारतीय वैज्ञानिकों की मेहनत, उनके संघर्ष और उनके योगदान का सम्मान किया गया है। वे पांच कार्यकारिणी सदस्यों द्वारा नेतृत्व किये गए हैं जिन्होंने भारत की महत्वपूर्ण स्थिति को दुनिया में प्रमोट किया है। इसके साथ ही, विश्व में भारतीय वैज्ञानिकों की गरिमा को बढ़ावा देने का यह एक महत्वपूर्ण कदम है। कविता के अंत में, सभी को चंद्रमा के प्रति जीत की बधाई देने की आवश्यकता है, और सबको इस उपलक्ष्य में गाने की आवश्यकता है। चंद्रमा की जीत की ओर एक मंगल गीत के रूप में सबको उत्साहित किया गया है, ताकि वे अपने योगदान से भारत की महत्वपूर्णता को और भी ऊंचाईयों तक पहुँचा सकें। आज हर उस शख्सियत को भारतीयों का हार्दिक नमन:, जिनके अथक परिश्रम से धरती मां का चंदा मामा से हुआ मिलन।

—————

यह कविता (गाओ रे शुभ मंगल गीत रे!) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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अमृत महोत्सव।

Kmsraj51 की कलम से…..

Amrit Mahotsav | अमृत महोत्सव।

राष्ट्रधर्म का गौरव प्यारा, आज हम हैं देखो बढ़ाने चले।
आजादी का प्रतीक तिरंगा, आज घर -घर में हैं फहराने चले।

उत्तुंग शिखर हिमालय से लेकर, हिन्द महासागर तक फैला है।
अरुणाचल से गुजरात कच्छ तक, यह भारत देश ही फैला है।

दसों दिशाएं आलोकित जिसकी, है वीरता जिसके जर्रे- जर्रे में।
पुरुषार्थ छिपा है राष्ट्रप्रेम का, यहां जीवन यापन के हर ढर्रे में।

तिरंगा है यह खिलौना नहीं, हर रंग का लहदा भाव निराला है।
शौर्य, वीरता, शान्ति, समृद्धि, मध्य चक्र प्रतीक समय का डाला है।

वीर बलिदानियों की कुर्बानी की कहानी, तिरंगा याद दिलाता है।
इतिहास पढ़ा देता है वह बंदा, जो घर – घर तिरंगा फहराता है।

आजादी के दीवानों ने प्रणाहुतियों से, यज्ञ को सफल बनाया था।
गुलामी की बेडौल जंजीरों से, भारत को आजाद करवाया था।

इसे संभालना, जश्न मनाना, अब तो हमारे ही हिस्से में आया है।
मिलजुल कर देश को बढ़ाने का, गुर पुरखों ने हमें सिखाया है।

आजादी के अमृत महोत्सव की, पावन बेला भारत में आई है।
बच्चे से बूढ़े, अमीर – गरीब ने, यह बेला सबने ही तो मनाई हैं।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता में भारत की भूगोलिक विशालता को हिमालय से लेकर हिन्द महासागर तक का संकेत दिया गया है, और अरुणाचल से लेकर गुजरात-कच्छ तक का भारतीय देश का विस्तार दिखाया गया है। कविता में दिशाओं की प्रकारों को प्रकाशित करते हुए यह कहा गया है कि वीरता हर जगह है, और राष्ट्रप्रेम की भावना हर व्यक्ति के जीवन में छिपी होती है। तिरंगे को खिलौना नहीं मानने के साथ ही, इसके हर रंग के पीछे भावनाओं की गहराई दिखाई गई है। यह शौर्य, वीरता, शान्ति, समृद्धि को प्रतिष्ठित करता है और समय के चक्र का प्रतीक होता है। कविता में वीर बलिदानियों की कहानी और उनकी कुर्बानियों का स्मरण कराया गया है, और तिरंगे के द्वारा उनकी यादें ताजगी देती है। जो व्यक्ति अपने घर में तिरंगा फहराता है, वह इतिहास को पढ़ता है और विशेष बनता है। कविता में स्वतंत्रता संग्राम के दीवानों ने यज्ञ को सफलता प्राप्त की थी, और उन्होंने गुलामी की बेडौल जंजीरों को तोड़कर भारत को आजादी दिलाई थी। कविता में इसे संभालने और मनाने की जिम्मेदारी को उठाने की बात की गई है, और गुरु पुरुषों द्वारा दिए गए सिखाने के उपदेश का उल्लेख किया गया है। कविता आजादी के अमृत महोत्सव की पवित्र अवधि का स्वागत करती है, जिसमें बच्चे से बूढ़े, अमीर से गरीब, सभी ने इस महत्वपूर्ण घटना का आयोजन किया है।

—————

यह कविता (अमृत महोत्सव।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

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मैं हिमाचल हूं।

Kmsraj51 की कलम से…..

Main Himachal Hoon | मैं हिमाचल हूं।

मैं हिमाचल हूं,
हिमालय का सरताज हूं।
मैं टूटूंगा नहीं,
कितनी भी मुसीबत,
आ जाए मुझ पर,
मैं झुकूंगा नहीं।

मैं हिमाचल हूं…….
आखिर कितना खोखला करोगे मुझे,
कितनी मेरी अंतरात्मा को कटोचोगे,
कितने जख्म दोगे मुझे,
सब सहन करके फिर उठूंगा मैं।

मैं हिमाचल हूं…….
शिमला मनाली को
कितना कंक्रीट बनाओगे,
पैसों के चक्कर में
खुद को ही नुकसान पहुंचाओगे,
क्यूं कुदरत को बेबस कराते हो,
पर्यावरण का नुकसान कराते हो,
भोली भाली जनता के,
आशियानों को क्यों उजड़वाते हो,
मानव तुम अपनी,
करतूत से क्यों बाज़ नही आते हो,
अपने इस हिमाचल में,
फिर कैसे तुम सभ्य मानव कहलाते हो?

मैं हिमाचल हूं…….
हिमालय का सरताज हूं।
सब लोगों के प्यार का मोहताज हूं,
अपनी अनूठी प्राकृतिक छठा के लिए,
जाना जाता बेबाक हूं।

मैं हिमाचल हूं…….
मैं झुकूंगा नहीं।
अगर किसी ने मुझको बेवजह कुरेदा,
तो मैं विनाश करने से रुकूंगा नहीं।

मैं हिमाचल हूं…….
मैं शिव के सिर का ताज़ हूं।
अगर कोई मेरा सिंहासन डोलेगा,
तो फिर मानव त्राहिमाम त्राहिमाम बोलेगा।
चाहे हो फिर शिमला की शिवबौड़ी,
या मंडी का पंचवक्तावर,
अपने पास से तांडव रचाऊंगा।
पानी से ऐसी गंगा बहाऊंगा,
सारी सृष्टि को साथ ले जाऊंगा।

मैं हिमाचल हूं…….
मैं झुकूंगा नहीं।
मैं रुकूंगा नही,
मैं ठार नही ठानूंगा।
मैं रार नही मानूंगा,
हिम का मैं आंचल हूं,
मैं हिमाचल हूं।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता “मैं हिमाचल हूं” के रूप में हिमाचल प्रदेश की सुंदरता, प्राकृतिक सौंदर्य और साहित्यिक रूपरेखा का सुरुवातीकरण करती है। कविता के व्यक्तिगत व्याख्यानों के माध्यम से कवि हिमाचल प्रदेश की महत्वपूर्ण बातों को स्पष्ट करते हैं। कवि यहां बताते हैं कि वे हिमाचल प्रदेश के हैं, जिन्हें हिमालय का सर्वोत्तम अंश कह सकते हैं। उनका इरादा है कि वे कितनी भी मुश्किलों का सामना करने के बावजूद, किसी भी परिस्थिति में झुकने का नाम नहीं लेंगे। कवि के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि व्यक्ति को हिमाचल प्रदेश की सुन्दरता का सच्चा संदर्भ समझना चाहिए और उसे अपने कार्यों में इसका सही रूप से पालन करना चाहिए। कवि यह भी दिखाते हैं कि पर्यावरण के साथ कैसे सच्चा संबंध बनाया जा सकता है और उसके प्रति किसी के व्यवहार का क्या प्रभाव हो सकता है। इस कविता में कवि अपने प्राकृतिक धरोहर, अपनी मानवीयता और अपने जीवन के मूल्यों को प्रकट करते हैं। उनकी भावनाओं और विचारों के माध्यम से व्यक्ति को यह बताने का प्रयास किया जाता है कि हिमाचल प्रदेश की अनूठी पहचान क्या है और उसकी महत्वपूर्णता क्या है। कुल मिलाकर, “यह कविता हिमाचल प्रदेश के सौंदर्य, अद्भुतता और विविधता को महसूस करने का एक माध्यम है, साथ ही साहित्यिक दृष्टिकोण से भी यह एक महत्वपूर्ण कविता है।”

—————

यह कविता (मैं हिमाचल हूं।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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मौसमी तबाही।

Kmsraj51 की कलम से…..

Weather Disaster | मौसमी तबाही।

हिमाचल में फैली मौसमी तबाही,
पहाड़ों के पहाड़ ही दरक रहे हैं।
भूस्खलन कहीं बादलों का फटना,
पेड़ – पौधे और मकान सरक रहे हैं।

सड़के बन्द पैदल पथ भी हुए बन्द,
लोग बेघर हो कर अब तड़फ रहे हैं।
कई लोगों ने जान से ही हाथ धो डाले,
चीखतें हैं, “हे प्रभु! बड़े बुरे लटक रहे हैं।”

जुलाई – अगस्त 2023 की यह घटना,
लोगों के दिलों दिमाग को खटकाती है।
पुरखों की माने तो हर सौ साल के दौर में,
ऐसी कुदरती आफ़त हमेशा से ही आती है।

क्या माने? विज्ञान सही या ज्ञान सही,
या फिर पुरखों का अनुभव ही सच्चा है?
या फिर यह कुदरत का नियम है अपना?
या कि यह सब मानव निर्मित ही खता है?

सरकार बेबाक है, जनता भी परेशान है,
पक्ष – विपक्ष में है तीखी सी टोका-टोकी।
व्योवृद्ध कहते हैं, विपदा में एकजुट रहो,
क्यों सेंक रहे हैं आफ़त में सियासी रोटी?

सत्ता विपक्ष के सब नेता नित दौड़े हैं,
पीड़ितों की खैर – खबर सब लेते हैं।
यही सामाजिक चलन है जमाने का,
बाकी घरबार तो कौन बना कर देते हैं?

आए न मुसीबत दुश्मन को भी ऐसी,
हर जुबान से लोग यही बतियाते हैं।
पुरखों की माने तो यह मौके का डर है,
बाद में लोग फिर से दया धर्म भुलाते हैं।

कुछ भी कहो, यह सनातन सच है कि ,
कुदरत के आगे हम सब थोथे बौने हैं।
यह मेरा – तेरा, मैं बड़ा और वह छोटा,
सब मानुषी खेल झूठे और घिनौने हैं।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — हिमाचल में फैली चारो तरफ मौसमी तबाही, पहाड़ों के पहाड़ ही दरक रहे हैं। भूस्खलन कहीं बादलों का फटना, पेड़ – पौधे और मकान सरक रहे हैं। सड़के बन्द पैदल पथ भी हुए बन्द, लोग बेघर हो कर अब तड़फ रहे हैं। कई लोगों ने जान से ही हाथ धो डाले, चीखतें हैं, “हे प्रभु! बड़े बुरे लटक रहे हैं।” पुरखों की माने तो हर सौ साल के दौर में, ऐसी कुदरती आफ़त हमेशा से ही आती रही है। याद रखें – व्योवृद्ध कहते हैं, विपदा में एकजुट रहो। आए न मुसीबत दुश्मन को भी ऐसी, हर जुबान से लोग यही बतियाते हैं। कुछ भी कहो, यह सनातन सच है कि कुदरत के आगे हम सब थोथे बौने हैं। यह मेरा – तेरा, मैं बड़ा और वह छोटा, सब मानुषी खेल झूठे और घिनौने हैं।

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यह कविता (मौसमी तबाही।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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नागचंद्रेश्वर मंदिर।

Kmsraj51 की कलम से…..

Nagchandreshwar Mandir | नागचंद्रेश्वर मंदिर।

उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर।

भारतवर्ष के कोने-कोने में अलग-अलग शहरों नगर में मंदिर – मूर्ति हैं। चाहे जिस क्षेत्र में आपका कोई भी शहर, नगर, ऐसा नहीं होगा जिसमे मंदिर ना हो। परंतु उज्जैन एक ऐसा शहर है जहां पर भगवान नाग चंद्रेश्वर मंदिर है इस मंदिर की खास बात यह है कि इस मंदिर का कपाट केवल नाग पंचमी सावन मास की शुक्र पंचमी तिथि को ही खुलता है — सिर्फ साल में एक दिन।

भगवान शिव के आभूषण स्वरुप नागदेव की पूजा होती है। इस दिन दरवाजे पर नाग देवता की मूर्ति लगाई जाती है गाय का दूध और धान का लावा घर के हर कमरे में छिलका जाता है। मस्तक पर केसर चंदन लेप किया जाता है। यह सारी क्रियाएं सुबह स्नान करके घर की औरतें करती हैं।

मंदिरों का शहर उज्जैन

महाकाल का नगर उज्जैन को कौन नहीं जानता उज्जैन को मंदिरों के शहर के धाम नाम से जाना जाता है। उज्जैन शहर की गली-गली मोहल्ले-मोहल्ले में मंदिर स्थित है। उन्हीं मंदिरों में से एक विशेष मंदिर नागचंद्रेश्वर मंदिर है जो महाकाल मंदिर में अवस्थित है। नागचंद्रेश्वर मंदिर की आभा निराली है। यहां भी नागपंचमी को त्यौहार मनाया जाता है जबकि सम्पूर्ण भारतवर्ष में नागपंचमी का त्यौहार सावन मास की शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है।

नाग पंचमी के दिन औरतें नाग देवता की पूजा अर्चना करती हैं। ऐसा माना जाता है कि नाग देवता मनुष्य की रक्षा करते हैं। सनातन संस्कृति में नाग देवता का पूजन करने का विधान प्राचीन काल से प्रचलन में चलता चला रहा है। नाग पंचमी के दिन नागों की पूजा का विधान है। पुनः गाय के दूध से स्नान कराया जाता है। इस दिन नाग पूजन के साथ ही भगवान शिव की पूजा रुद्राभिषेक करने से कालसर्प दोष खत्म हो जाता है। और राहु केतु के अशुभ दोष दूर हो जाते हैं।

वर्ष में केवल 24 घंटे के लिए खुलने वाला मंदिर

24 घंटे नागपंचमी के दिन भारतवर्ष में एक मात्र खुलने वाला मंदिर उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर है जो उज्जैन में महाकाल मंदिर के तीसरे भाग में विद्यमान है। नागचंद्रेश्वर मंदिर, यह नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा उज्जैन के लिए नेपाल से लाई गई थी। यह प्रतिमा बहुत पुरानी है इस प्रतिमा के बारे में कहा जाता है कि यह प्रतिमा 11 वीं सदी की प्रतिमा है। खास बात तो यह है कि इस प्रतिमा में शिव – पार्वती अपने पूरे परिवार के साथ विराजमान है। शिव परिवार के ऊपर नाग देवता फन फैलाएं हुए हैं। इस तरह की प्रतिमा के बारे में खासकर उज्जैन में चंद्रेश्वर मंदिर उज्जैन के अलावा अन्यत्र कहीं भी नहीं है। ऐसी प्रतिमा देखने को भी नहीं मिलती है।

दुनिया का यह इकलौता मंदिर उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर है जहां शिव सपरिवार सांपों की शय्या पर विराजमान हो। मान्यता अनुसार सांपों के राजा तक्षक ने भगवान शिव को मनाने के लिए घोर तपस्या की। उनकी कठिन तपस्या से खुश होकर भगवान भोलेनाथ तक्षक नाग को अमरत्व का वरदान दिया वरदान प्राप्त करने के बाद से ही तक्षक राज ने भगवान शिव के सानिध्य में वास करना शुरु कर दिया।

उज्जैन के महाकाल मंदिर के आस पास प्राचीन काल से ही घोर जंगल था। इस क्षेत्र को महाकाल वन उपवन के रुप ने जाना जाता था। नाग देवता को महाकाल में वास करने के पीछे उनकी मनसा रही होगी कि एकांत में विघ्न न हो!

शायद यही कारण था कि नाग चंद्रेश्वर मंदिर नाग देवता के रहने के स्थान पर बना। नाग चंद्रेश्वर मंदिर का कपाट बार-बार नहीं, “वर्ष में एक दिन खुलता है।” वह भी सावन की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी के दिन, नाग दर्शन को खुलता है। नाग पंचमी के दिन ही उनका दर्शन होता है। मेला लगता है सुदूर से लोग दर्शन के लिए आते हैं।

समय और परंपरा के अनुसार मंदिर का कपाट बंद कर दिया जाता है। बाकी के दिनों में चंद्रेश्वर के सम्मान में प्राची परंपरा अनुसार मंदिर बंद ही रहता है। भगवान चंद्रेश्वर जी की त्रिकाल पूजा की जाती है। काल पूजा करने का विधान प्राचीन काल से चला रहा है।

त्रिकाल पूजा अलग-अलग समय में होती है।
पहली मध्यान रात में महा निर्माणी होती है।

दूसरी पूजा नाग पंचमी के दिन दोपहर के समय शासन प्रशासन द्वारा करायी जाती है।
तीसरी पूजा नाग पंचमी की शाम को भगवान महाकाल की पूजा के बाद मंदिर समिति द्वारा की जाती है।

पहले की भांति रात्रि 12:00 बजे भगवान चंद्रेश्वर के मंदिर का कपाट पुनः एक वर्ष के लिए बंद कर दिया जाता है।

ओम् नागेश्वराए नमः

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख में समझाने की कोशिश की है — दुनिया का यह इकलौता मंदिर उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर है जहां शिव सपरिवार सांपों की शय्या पर विराजमान हो। मान्यता अनुसार सांपों के राजा तक्षक ने भगवान शिव को मनाने के लिए घोर तपस्या की। उनकी कठिन तपस्या से खुश होकर भगवान भोलेनाथ तक्षक नाग को अमरत्व का वरदान दिया वरदान प्राप्त करने के बाद से ही तक्षक राज ने भगवान शिव के सानिध्य में वास करना शुरु कर दिया। 24 घंटे नागपंचमी के दिन भारतवर्ष में एक मात्र खुलने वाला मंदिर उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर है जो उज्जैन में महाकाल मंदिर के तीसरे भाग में विद्यमान है। नाग पंचमी के दिन औरतें नाग देवता की पूजा अर्चना करती हैं। ऐसा माना जाता है कि नाग देवता मनुष्य की रक्षा करते हैं। सनातन संस्कृति में नाग देवता का पूजन करने का विधान प्राचीन काल से प्रचलन में चलता चला रहा है। नाग पंचमी के दिन नागों की पूजा का विधान है। इस दिन नाग पूजन के साथ ही भगवान शिव की पूजा रुद्राभिषेक करने से कालसर्प दोष खत्म हो जाता है। और राहु केतु के अशुभ दोष दूर हो जाते हैं।

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यह लेख (नागचंद्रेश्वर मंदिर।) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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