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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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You are here: Home / Archives for हिंदी कविताएँ

हिंदी कविताएँ

मैं हूँ जीभ।

Kmsraj51 की कलम से…..

Main Hoon Jeebh | मैं हूँ जीभ।

I am very soft, I always stay in the mouth, I come out sometimes. I am expert in tasting the taste, I make it clear in a moment.

हूँ बड़ी कोमल मुंह में रहती सदा,
बाहर भी निकलती हूँ यदा कदा।
स्वाद चखने में हूँ माहिर,
पल में कर देती हूँ जाहिर।

शब्दों को हूँ मैं सजाती,
दूसरों तक हूँ पहुंचाती।
कभी जोर से हूँ बोलती,
तो कभी मुंह में ही शब्द हूँ घोलती।

बचपन हो या हो बुढ़ापा,
मुझमें जोर होता है ज्यादा।
शरीर के रोगों को भी हूँ जताती,
दवा भी मुझे छू कर ही जाती।

कष्ट बहुत हूँ देती,
उलजलूल शब्द जब हूँ कहती।
बड़ाई भी होती है तब,
अच्छी बात करती हूँ जब।
नहीं है सम्भालना मुझे आसान,
जिसने सम्भाला बन गया वो महान।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता “जीभ” के गुणों और प्रभावों को दर्शाती है। जीभ एक कोमल अंग है, जो स्वाद चखने में माहिर होती है और शब्दों को सजाकर दूसरों तक पहुंचाती है। यह कभी जोर से बोलती है, तो कभी चुप भी रह जाती है। जीभ का प्रभाव बचपन से बुढ़ापे तक बना रहता है। यह न केवल भोजन का स्वाद पहचानती है, बल्कि शरीर में किसी रोग के संकेत भी देती है। दवाएं भी जीभ के संपर्क में आने के बाद ही शरीर में असर करती हैं। यहअच्छे और बुरे दोनों तरह के शब्दों का माध्यम बन सकती है। जब यह गलत शब्द कहती है, तो कष्ट देती है, लेकिन जब यह अच्छी बातें बोलती है, तो प्रशंसा भी पाती है। कवि अंत में कहते हैं कि जीभ को नियंत्रित रखना आसान नहीं होता, और जो व्यक्ति इसे संभालना सीख लेता है, वही सच्चे अर्थों में महान बनता है।

—————

यह कविता (मैं हूँ जीभ।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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घोर कलियुग आता है।

Kmsraj51 की कलम से…..

Ghor Kaliyug Aata Hai | घोर कलियुग आता है।

Where is the respect for small and big now? They molest small lives.

आज न रावण सीता हरण को,
छल – प्रपंच कोई अपनाता है।
आज न दुर्योधन भरी सभा में,
दुशासन से द्रौपदी का चीर हरवाता है।

आज न सीता को है कोई लक्ष्मण रेखा,
न पांडवों की होती है द्युत में कोई हार।
आज का रावण है विद्रूप और हत्यारा,
मासूम सीताओं का करता है बलात्कार।

छोटे – बड़े की रही कद्र कहां अब?
नन्ही सी जानों से करते हैं छेड़छाड़।
रावण – दुर्योधन भी होते जिंदा आज,
वे भी देते शायद इन लोगों को लताड़।

घटनाएं घटी है जो रामायण – महाभारत में,
उनसे भी बड़ी है आज की हर एक वारदात।
फिर भी न होता रामायण – महाभारत क्यों?
क्यों सरकारें कहती हैं काबू में सब हालात?

निर्दोष बेटी की निर्मम हत्या पर,
निर्दोष असहाय बाप पछताता है।
भागो भाई भागो हरि शरण में,
अब तो घोर कलियुग आता है।

राजा भूले राजधर्म सब के सब,
प्रजा अपना वोट बिकवाती है।
कर्म फल फिर भुगतते – भुगतते ,
जनता निगोडी बेबस पछताती है।

सुप्त जनमानस और लालची प्रवृत्ति,
जनता को ये दुर्दिन कष्ट दिखाते हैं।
धनवान बटोरते हैं सरमाया – वैभव,
सर्वहारा – गरीब ही पछताते हैं।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता व्यक्त कर रही है कि आजकल के समय में भी बुराई और अन्याय के उदाहरण मौजूद हैं। कविता में यह भी कहा गया है कि आज के समय में लोग नैतिकता और धर्म के प्रति उल्लंघन करते हैं, जैसे कि आपसी विश्वास और न्याय के मामले में। कविता का संदेश है कि हमें दुष्टाचार और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की आवश्यकता है और समाज में न्याय और नैतिकता की रक्षा करने का दायित्व है। कविता में यह भी कहा गया है कि समाज में जनता को जागरूक होना चाहिए और बुराई और अन्याय के खिलाफ खड़े होने के लिए तैयार रहना चाहिए। छोटे – बड़े की रही कद्र कहां अब? नन्ही सी जानों से करते हैं छेड़छाड़। रावण – दुर्योधन भी होते जिंदा आज, वे भी देते शायद इन लोगों को लताड़।

—————

यह कविता (घोर कलियुग आता है।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

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जमाने का दस्तूर।

Kmsraj51 की कलम से…..

Zamane Ka Dastoor | जमाने का दस्तूर।

Holding the helm of courage, you walk alone. Don't hold on to the hope that someone will sail your boat.

स्वार्थ से भरी दुनिया में, लगा इंसानों का मेला।
क्यूं किसी से निस्वार्थ की करें दिल कामना।

हौसलों की थामकर पतवार, तू तो चल अकेला।
कोई तेरी नाव पार लगाए, इस उम्मीद का हाथ न थामना।

तुझे कुछ कर गुजरना है तो सब छोड़ झमेला।
आंख खोल दुनिया देख, सब छंट जायेगा अंधेरा घना।

बुलंद कर रुतबा इतना, शरमाये वो जिसने शातिराना खेल खेला।
जीवन में फर्श से अर्श तक जाना है तो दिल पत्थर का बना।

खुद पर यकीन रख, आस्था रख रब में।
जिंदगी से दोस्ती निभाने का हुनर सब में।

कहां आता है……. रे मना!

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता में स्वार्थ और निस्वार्थ के मध्य की तुलना की गई है। यह कविता एक व्यक्ति को सोचने पर प्रोत्साहित करती है कि वह निस्वार्थता, साहस, और आस्था के साथ अपने लक्ष्यों की ओर बढ़े, चाहे वो किसी भी कठिनाइयों का सामना करें। इसके अलावा, कविता मनुष्य को अपने मार्ग पर दृढ़ रहने की सलाह देती है और उसे खुद पर और भगवान पर यकीन रखने का सुझाव देती है।

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यह कविता (जमाने का दस्तूर।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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सब कुछ बिकता है यहां।

Kmsraj51 की कलम से…..

Sab Kuch Bikta Hai Yaha | सब कुछ बिकता है यहां।

बिकता है यहाँ सब कुछ,
जो भी जहां में दिखता है।

जज़्बात से लेकर ईमान तक,
खुशियों से लेकर अरमान तक।

पानी से लेकर शुद्ध हवा तक,
सांस देने वाली हर दवा तक।

आसमान से लेकर इस जमीं तक,
कई बार रिश्तों की हँसी तक।

कली से लेकर फूल तक,
जल-अमृत व मंदिरों की धूल तक।

हँसी से लेकर मुस्कान तक,
मरने से जीने के अरमान तक।

कलयुग में…
सब कुछ बिकता है साहब!

बस नहीं मिलता तो खरीदार,
इन बेमुराद मिलने वाले अश्कों के।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में व्यक्त किया गया है कि आज के कलयुग में सब कुछ मानव जीवन में खरीद-बिक्री के रूप में प्रतिष्ठित हो गया है। जो भी हम जहां देखते हैं, वह सब बेचा जाता है, चाहे वह वस्त्र, जज्बात, ईमान, खुशियाँ, अरमान, पानी, हवा, दवाएँ, आसमान, धरती, रिश्ते, कलियाँ, फूल, जल, अमृत, या मंदिरों की धूल क्यों न हो। हाँ, इस सबके बावजूद, एक चीज़ नहीं मिलती – वो है बेमुराद अश्कों की मूल्यवान अद्यतन की मांग। इसके बगैर, जीवन का मतलब और भी कुछ हो सकता है, जैसे मरने से जीने के अरमान।

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यह कविता (सब कुछ बिकता है यहां।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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राखो चुंदरिया संवारि।

Kmsraj51 की कलम से…..

Rakho Chundaria Sanvaari | राखो चुंदरिया संवारि।

भीगल जाले मोर चुनरिया, छुपाये छिपे ना द्युति दागरी।
चूक चटक चंदा जो छिपा था, चुंदरी तो चटकार री॥

भीगल चुंदरी निखिल निचोड़ा, मोहन ज्यों सपने साथ री।
घट-घट खोजत नीक चुनरिया, पायो अपने पास री॥

इहै चुनरिया नहीं तुम्हारी, प्यारी-प्यारी यारी दुलारी।
जेते सुन्दर चुंदरी पायो, तेते ज्ञान, मान, ग्यान अगाध री॥

जा बुन लायो मोहन मोरे, मौन ज्यों महा भंडार री।
चुनरी चुरा चारो चौकछु रे, सूर्य चन्द्रमा जान्यो संसार रे॥

आंगन लाये पिया चुनरिया भीगी झीनी सारी।
गणपति गावत बीच बाजार, नीक चुनरिया नीक किनारी॥

रंगी चुनरिया को रंग निराला, मागत मधुवन मां नन्दलाल।
मंगल मंदिर बूझत न्यारी, देखत बारी – बारी – सारी॥

सोलह सी बंद चुंदरी चोखी, चार चौपटा नाग-पास री।
रंगना धूमिल चुंदरी चटकीली, राखो राजे इसे संवारि री॥

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — यह कविता मोहन (श्री कृष्ण) और उसकी प्यारी चुंदरी के प्रेम की कहानी को व्यक्त करती है। चुंदरी को धीरे-धीरे मोहन की प्यारी यारी और उसके ज्ञान के साथ मिल जाती है। मोहन की प्रेरणा से, वह चुंदरी अपने स्वामी के पास आती है और उसका साथ देती है, जैसे सूर्य और चंद्रमा समय-समय पर संसार को प्रकाशित करते हैं। चुंदरी का रंग निराला होता है और वह मंगल मंदिर की शोभा को बढ़ाती है, जैसे मधुवन में नन्दलाल के साथ खुशियों की गाथा। इस रूप में, चुंदरी को मोहन के प्रेम और उसकी भक्ति का प्रतीक माना जा सकता है।

—————

यह कविता (राखो चुंदरिया संवारि।) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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विधात्रि की माया।

Kmsraj51 की कलम से…..

Vidhatri Ki Maya | विधात्रि की माया।

रे मन तुझे रोकता हूँ,
क्षण-प्रतिक्षण तू क्युँ खिंचा जाता है।
मनःशक्ति जिसे समझता तू नारी,
इस जग में कब से उसका नाता है।

कुछ-कुछ यादों सा परिचित है,
सुध से बढ़ता अनुराग बड़ा।
रग-रग में कौन छिपा अपना,
रहता जिससे विराग बड़ा।

कैसी सुंदर यह नगरी,
कैसी इसकी सुलक्षण काया।
स्तुत्य है पावन यह धरती,
धन्य-धन्य है भरत भूमि की माया।

पहन-पहनावा शशिप्रभा का,
श्रृंगारित करती पिण्ड ग्रहों को।
निसर्ग हर्षोल्लातित हो खोली आँखें,
निहारती अपने स्वर्णिम संसार को।

झिलमिलाते विटपों पर जगमग पुष्प घनेरे,
गुच्छों – गुच्छों से भर जाते आम्र रसीले।
आलिंगन में लेकर नील गगन को,
कभी दृश्य कभी दर्पण बन जाते निराले।

कलरव करती कहीं कोकिला सारी,
उड़-उड़कर बैठती डाली-डाली।
चितचोर चंचल-सी तितलियाँ उड़ बैठती,
यह फूल डाली उस फूल डाली।

हरित वनों के उन्मुक्त कंठों से,
निर्झरी बन जाते झरने नाले।
घुल-घुलकर वादियों में चंद्रभूति-सी,
निर्मल गंगा की झिलमिल आले।

उतरती खेतों में स्वर्णिम आभा,
सींचकर साँझ सुनहली गाथा।
अनन्त की नील उपवन के बीच,
विहँस पड़ती प्रकृति दे अपना साथा।

बनैले शस्य भी तो पुलकित हर्षित,
समीरण में झूम रहे स्वच्छंद।
महामाया के अंग – अंग में भरा,
किरणित हो फूटता महा आनन्द।

मदमस्त हो देखती सृष्टि की ओर,
झंकृत करती उर के हर तार।
उमड़ पड़ते हृदय के उच्छवास,
अभिनंदित हे सृजक! तेरा व्यापार।

हे मातु तू धन्य;
नाना कुसुमों से सिंगारित कर उपवन,
निहारती वासा-व-लोक इसकी छवि न्यारी।
विविध सारंगों से सजी-धजी यह,
रंग-बिरंगी-सी सजी यह क्यारी।

बाँस है बबूल है कहीं-कहीं पर धूल है,
चहुँ ओर बिराजती बस हरियाली है।
कहीं कास है कहीं दूब है कहीं फूल से,
श्रृंगारित नदी नाल वरुणवास है।

नारी = मन की शक्ति

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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यह कविता (विधात्रि की माया।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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गाओ रे शुभ मंगल गीत रे!

Kmsraj51 की कलम से…..

Gao Re Shubh Mangal Geet Re | गाओ रे शुभ मंगल गीत रे!

सावन माह में गाओ मिलकर शुभमंगल गीत रे…।
भारतीय वैज्ञानिक कर आए चांद पर जीत रे…॥

पावन माह अगस्त की पावन तिथि तेईस बनी गवाह।
चंद्रयान 3 की सफलता से हर दिल ने किया वाह – वाह॥

हो गई है इसरो में इन भारतीयों की जश्न की जीत रे…।
भारत माता के लाल निभा आए रिश्तों की प्रीत रे…॥

चांद के दक्षिणी छोर पर ज्यों ही तिरंगा लहराने लगा।
हर हाथ देकर सलामी खुशी से हर दिल मुस्कराने लगा॥

चंद्रयान ने पद~चिन्हों को इस कदर चंद्रसतह पर अंकित किया।
जैसे हर भारतवासी ने — सौ वर्ष की उम्र को हो जिया॥

भारत माता के गौरव को वैज्ञानिकों ने चार चांद लगा दिए।
बिन दिवाली के ही जलने लगे घर~घर खुशी के दीए॥

विश्व में भारतीयों ने एक नया रच ही डाला इतिहास।
6:04 मिनट के पल को बना ही दिया बिलकुल खास॥

आज हर उस शख्सियत को भारतीयों का हार्दिक नमन।
जिनके अथक परिश्रम से धरती मां का चंदा मामा से हुआ मिलन॥

उन पांच की कार्यकारिणी ने विजयी विश्व का तिरंगा लहराया।
अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत के विश्व गुरु होने का परचम छपवाया॥

बधाई गाओ रे… मंगल गीत की… चंद्र जीत की…।
भारतमाता और चंदा मामा के प्रीत की बधाई गाओ रे…॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — अगस्त माह की पावन तिथि 23 को 6:04 मिनट के पल को बना ही दिया बिलकुल खास, विश्व में भारतीयों ने एक नया रच ही डाला इतिहास। चांद की दक्षिणी छोर पर तिरंगे की लहराने की तस्वीर जब दिखाई दी, जिससे हर भारतीय के दिल में गर्व और खुशी की भावना उत्तेजित होती है। चंद्रयान-3 ने चंद्रसतह पर पद-चिन्हों को अंकित करके यह संकेत दिया कि भारतवासियों ने भी विजय की उम्र जी ली है, जैसे उन्होंने सौ वर्ष की उम्र को जी लिया है। भारतीय वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 के माध्यम से भारत माता की गरिमा को बढ़ावा दिया है और घर-घर में खुशियों के दीप जलने लगे हैं। इस कविता में चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के साथ-साथ भारतीय वैज्ञानिकों की मेहनत, उनके संघर्ष और उनके योगदान का सम्मान किया गया है। वे पांच कार्यकारिणी सदस्यों द्वारा नेतृत्व किये गए हैं जिन्होंने भारत की महत्वपूर्ण स्थिति को दुनिया में प्रमोट किया है। इसके साथ ही, विश्व में भारतीय वैज्ञानिकों की गरिमा को बढ़ावा देने का यह एक महत्वपूर्ण कदम है। कविता के अंत में, सभी को चंद्रमा के प्रति जीत की बधाई देने की आवश्यकता है, और सबको इस उपलक्ष्य में गाने की आवश्यकता है। चंद्रमा की जीत की ओर एक मंगल गीत के रूप में सबको उत्साहित किया गया है, ताकि वे अपने योगदान से भारत की महत्वपूर्णता को और भी ऊंचाईयों तक पहुँचा सकें। आज हर उस शख्सियत को भारतीयों का हार्दिक नमन:, जिनके अथक परिश्रम से धरती मां का चंदा मामा से हुआ मिलन।

—————

यह कविता (गाओ रे शुभ मंगल गीत रे!) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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अपनी बला से।

Kmsraj51 की कलम से…..

Apni Bla Se | अपनी बला से।

सत्ता होती है बेकाबू तब तक,
जब तक जनता मदहोशी में सोती है।
इतिहास गवाह है धनवानों को कितनी,
पीड़ा गरीब और मजलूमों की होती है?

जनता जब जागेगी तो तभी सवेरा,
सत्ता भी तो तब काबू में आएगी।
यह गुड़ में जहर की शाजिस सत्ता,
जनता पर सदा – सदा ही आजमाएगी।

खामोश रह कर तो कोई बात न बनेगी,
मुद्दा तो जनता को अपना उठाना होगा।
लोकतन्त्र है भाई यह आजाद भारत का,
जनता को मत का बल तो दिखाना होगा।

हम करने चले हैं हुड़दंग ही बस नीरा,
मुद्दे की बात ही कहां कोई करता है?
जन सरोकारों की है चिन्ता ही किसको?
हर कोई निज स्वार्थ के खातिर लड़ता है।

देश डूबे तो वह अपनी बला से,
देश की किसको यहां चिन्ता है?
पक्ष – विपक्ष और जनता सबमें,
निज घोर स्वार्थ की ही हीनता है।

लाखों की लेते पगारें हैं अधिकारी,
फिर भी घूंस लेते भिखारी से फिरते हैं।
ठेकेदार को भी तो अपनी ही पड़ी है,
तभी तो पुल बनाते ही कई गिरते हैं।

जागो जनता गर जाग सको तो,
स्वार्थ की नींद को भगाना होगा।
वरना भ्रष्टाचार में डूबता देश है,
इसे मिलकर आज बचाना होगा।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — भटकी हुई नव पीढ़ी को फिर से राष्ट्रधर्म का पाठ पढ़ाना होगा, हर भारत वासी को अपने मत की शक्ति को समझना होगा। अपने निज स्वार्थ से ऊपर उठकर अपने राष्ट्र के हित में कदम उठाना होगा, ये आज़ाद भारत है भाई तुम्हें सही मांग के लिए आवाज उठाना होगा। जो गलत है उसको सबक सिखाने के लिए हम सबको आवाज तो उठाना होगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ सभी को मिलकर आवाज उठाना होगा। जागो जनता गर जाग सको तो, और स्वार्थ की नींद को भगा कर राष्ट्र हिट में अपने मत की शक्ति का सही प्रयोग करो तुम। मुफ्त के चक्कर में बिकना नही तुम वर्ना तुम्हारा अस्तित्व ही खत्म हो जायेगा, अब भी समय है जग जाओ, नहीं तो पछतावोगे।

—————

यह कविता (अपनी बला से।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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पर्यावरण और जल।

Kmsraj51 की कलम से…..

Environment And Water | पर्यावरण और जल।

आओ हम सब मिलकर पर्यावरण बचाएं,
काट रहे जो पेड़ों को इनको इसके लाभ बताएं।
उनको इसके महत्व के बारें समझाएं,
धरा पर हम पहले जैसी खुशहाली लाएं।

पेड़ काटकर – काटकर कारखानें बनाते है,
ऊँची – ऊँची इमारत बनाकर हवा, धूप को रोकते है।
जब हरियाली नहीं होगी धरा पर कैसे जी पाओगे,
कैसे अपने लिए ऑक्सीजन को एकत्रित कर पाओगे।

धरा जब हो जाएंगी बंजर शुद्ध हवा कहाँ से लाओगे,
बिन ऑक्सीजन के कैसे जीवित रह पाओगे,
जब हरियाली चारों तरफ जीवन में सुखी रह पाओगे।

पानी को व्यर्थ न बहाओ आगे जल को तरस जाओगे।
नदी, तालाब को दूषित न करें बीमारियों को पाओगे।
कूड़ा, करकट नदी में डाले तभी जल को बचा पाओगे,
नहीं तो एक दिन जल के लिए भी तरस जाआगे।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — पेड़ मिट्टी के कटाव को रोकने और पानी की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करते हैं। पेड़ भोजन, ईंधन और अन्य महत्वपूर्ण संसाधनों का स्रोत हैं। कागज का कम इस्तेमाल कर हम पर्यावरण पर अपने प्रभाव को कम कर सकते हैं। हमारे ग्रह के लिए एक स्थायी भविष्य सुनिश्चित करने के लिए पेड़ों को बचाना आवश्यक है। धरती पर जीवन के लिये जल सबसे ज़रुरी वस्तु है। यहाँ किसी भी प्रकार के जीवन और उसके अस्तित्व को ये संभव बनाता है। जीव मंडल में पारिस्थितिकी संतुलन को ये बनाये रखता है। पीने, नहाने, ऊर्जा उत्पादन, फसलों की सिंचाई, सीवेज़ के निपटान, उत्पादन प्रक्रिया आदि बहुत उद्देश्यों को पूरा करने के लिये स्वच्छ जल बहुत ज़रुरी है।

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यह कविता (पर्यावरण और जल।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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खाली समय।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ खाली समय। ♦

जब भी बैठिए खाली,
बजाइए जरूर ताली।
शरीर की करती रखवाली,
जैसे हो बाहर वाली।

जब मिले फुर्सत के क्षण,
ईश्वर का कर लो भजन।
मिलेगी मन को शांति,
ना रहेगा कोई भ्रांति।

जब मिले खाली के दो पल,
ऐसा कर जो सोचा हो बिता कल।
खुद से करें बात,
करें कुछ नया करामात।

आंखों को घुमाएं गोल गोल,
जैसे सूरज और चंदा गोल मटोल।
कोयल की निकाले बोली,
जैसे दे रहा हो कोई गाली।

हरकतें करें ऐसी,
दिल खुश हो जाए वैसी।
कभी उठक, कभी बैठक,
साथ में दीजिए आंखों को थोड़ी ठंडक।

आंखों में लगाइए काली,
जैसे हो सुरमा भोपाली।
एक मिनट के लिए हो जाओ मौन,
मिल जायेगा कुछ चैन।

चाय की चुस्की प्याली में,
नयन मटकाईये खाली में।
सिर खुजलाईए बाल खींचिए,
दाएं देखिए, बाएं देखिए।

अजब वाक्या याद कर,
मुस्कान बिखेरिए खुलकर।
खाली समय में भी काफी काम है,
नसीब में कहां लिखा आराम है।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जब हो फुरसत का समय प्रभु का भजन भी कर लिया करो। खाली समय में दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ बैठकर चाय पीते हुए कुछ फुरसत के पल बिता भी लिया करो, ना जाने कब ये शरीर साथ छोड़ दे, इसलिए प्रेम से दो शब्द बोल लिया करो सभी से। जब भी मिलो किसी से मुस्कुराते हुए मिलो और समय-समय पर ख़ुशी होने पर ताली भी बजा लिया करो मेरे यार। चार दिन की ज़िन्दगी है सभी से हँस बोलकर प्रेम से बिताया करो मेरे यार।

—————

यह कविता (खाली समय।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2022-KMSRAJ51 की कलम से, विवेक कुमार जी की कविताएं।, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: best hindi poems, Hindi Poems, Hindi Poems For Kids., Hindi Poems On Life, Leisure / फुरसत Hindi Poem by विवेक कुमार, poem on free time in hindi, Poem On Time in Hindi, poet vivek kumar poems, Poetry, vivek kumar poems, खाली समय, टाइम समय पर कविता, विवेक कुमार की कविताएं, हिंदी कविताएँ

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