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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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hindi poetry

दीप जलाना होगा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ दीप जलाना होगा। ♦

घर – घर दीप जलाना होगा।
अंधेरा दूर भगाना होगा।
आसमान ही टूट पड़ा है,
कंधा सबको लगाना होगा।

माना विपदा बहुत बड़ी है।
जिंदगी सहमी डरी खड़ी है।
नागवार मुश्किल वक्त है।
मानव अस्त-व्यस्त, त्रस्त है।

इन्सां इन्सां को लील रहा है।
बचे खुचे को छील रहा है।
हवा में ऐसी जहर घुली है।
राजा रंक की पोल खुली है।

जंग जारी है, जंग जीतेंगे।
गर रहे एकजुट संग, जीतेंगे।
थोड़ी त्याग, तपस्या थोड़ी,
सबको ही कर जाना होगा।
घर – घर दीप जलाना होगा।

बंद करो जनसभा ओ धरना।
कुंभ, समागम, चुनाव लड़ना।
आपदा में भी अवसर ढ़ूढ़ना।
भेष बदल भाईयों को लूटना।

लाशों पे भी राजनीति, छी छी,
मुनाफाखोर आयोग, समिति, छी छी।
साँसें दो, उच्छवास दो हमें।
महफूज हूँ, एहसास दो हमें।

मेरे हिस्से की हवा चाहिये।
रोटी मत दो, दवा चाहिये।
मेरी जरुरत फिर तुझे होगी।
सत्ता को भी धमकाना होगा।
घर – घर दीप जलाना होगा।

किसकी कम या ज्यादा गलती।
साँस नहीं इस बात से चलती।
ये वक्त नहीं दोषारोपण का,
मेरी, तेरी, छिद्रान्वेषण का।

अब तो कहना, अनुशासन मानो।
कौन, कहाँ, क्या, कब, पहचानो।
वरना समूल ही मिट जाएगा।
इक प्यादा से पिट जाएगा।

जागो, उठो, अब भी संभलो।
कुछ दिन भीड़ मे मत निकलो।
साहस, विश्वास, सहयोग से बढ़के।
वैद्य न कोई, समझाना होगा।
घर – घर दीप जलाना होगा।

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है – जीवन में कितना भी उतार चढ़ाव आए, कितनी भी विपरीत परिस्थिति आए यूँ ही घबराकर रुकना नहीं, एक न एक दिन फिर से जीवन में खुशियों की बरसात होगी। किसकी कम या ज्यादा गलती। साँस नहीं इस बात से चलती। ये वक्त नहीं दोषारोपण का एक दूसरे पर।

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यह कविता (दीप जलाना होगा।) “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: चली जाती है।
  • जरूर पढ़े: अच्छा लगता है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

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जगत जननी का परित्याग।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जगत जननी का परित्याग। ♦

पता क्या जगत जननी सीता को,
फिर जंगल में जाना होगा।
घनी पश्चिम की पहाड़ी के जंगल में,
जीवन उन्हें बिताना होगा।

श्रीराम के निर्मल देह पर,
मृग – चर्म जूट जटाएं फाहरेंगी।
हवन चंदन गंध व दहकते,
गुगल से ऋचाएं होंगी।

रथ साथ सारथी पुत्रवत लखन,
घने जंगल में छोड़ेंगे।
जिसने अपने जीवन में,
सीता के मुख नहीं देखे होंगे।

पर विधाता का लिखा लिखनी,
कौन मिटा सकता है यहां।
वहीं विश्व विख्यात विधाता,
सीता को जंगल पहुंचा सकता जहां।

धैर्य – धर्म की मूर्ति मई कल्याणी तुम,
खंडित व्यक्तित्व लिए विलख रही।
सच कहूं प्रिय! मेरी सीते!
मैं राम तत्वों का आदर्श लिए थक रहा।

विवश हूं प्रजा की बात पर,
धर्म की मर्यादा और राज पाठ पर।
स्वयं दंड दूंगा मैं अपने आप को,
धर्म की धात्री तुम अयोध्या राज की।

लोका पवाद में घिरा अवध की,
शाम मंत्रणा राज लखन से बोले राम।
राजा का राज्य पर निष्ठा निर्विवाद,
विधि के विधान पर किसका अधिकार।

संकल्पों का विकल्प नहीं होता,
वैराग्य धर्म बन वासी मेरी नियति।
विकल्प केवल सीता का परित्याग,
प्रिये मेरी अभिन्न अंग हो, ना होना खिन्न।

मेरी निर्णय को कहना ना तू कठोर,
सीता कल निर्वासन का है भोर।
अभिषेक करेगी तेरी वन्य भोर,
संदेशवाहक दिल से निकलेगा चोर।

रथारूढ़ जाना गंगा तट पर लेकिन,
उद्घाटित अभी करना ना भेद गूढ़।
लक्ष्मण राम के मंत्रणा परिपूर्ण,
आरण्य निकट सीते को छोड़ना तुम।

देना धो आंचल का उभरा कालुष्य,
रूधने लगा कहते कंठ राम।
बिकट लगा उस संध्या का गुंजा शूल,
कर प्रणाम अस्ताचल ढल गया सूर्य।

छलक उठे लक्ष्मण के भरे नैन,
थरथर कांप उठा धरती का स्वर्ग मौन।
देख रहा मौन रहकर राजमहल,
धार सरयू की हुई स्तब्ध अंतर्मन।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – जगत जननी माता सीता जी का परित्याग, करते समय श्री राम जी के मनःस्थिति का खूबसूरत वर्णन किया है। माता सीता जी से श्री राम जी कहते है “धैर्य – धर्म की मूर्ति मई कल्याणी तुम खंडित व्यक्तित्व लिए विलख रही। सच कहूं प्रिय! मेरी सीते! मैं राम तत्वों का आदर्श लिए थक रहा। विवश हूं प्रजा की बात पर धर्म की मर्यादा और राज पाठ पर। स्वयं दंड दूंगा मैं अपने आप को धर्म की धात्री तुम अयोध्या राज की।”

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यह कविता (जगत जननी का परित्याग।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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मैं धीर भरी सुख की बदली।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मैं धीर भरी सुख की बदली। ♦

मैं धीर भरी सुख की बदली।
बदली दुनिया मैं भी बदली।

हो पीर भले चाहे जितनी।
जीना अब मैंने सीख लिया।
जो शूल बिछे पथ में मेरे,
वो शूल हटाना सीख लिया।

कंटक पथ पर, उर साहस भर।
मासूम कली मैं चल निकली।
मैं धीर भरी सुख ………
बदली दुनिया मैं ………

नैनों से चाहे नीर बहे।
हिय से अनुराग बहाती हूँ।
यूँ ही नहीं मैं इस सृष्टि की,
अनुपम रचना कहलाती हूँ।

असुरों का वध करने को अब,
खुद आयुध लेकर चल निकली।
मैं धीर भरी सुख ……..
बदली दुनिया मैं ……..

नीरव नीरस गृह को मैं ही,
मधुर सुरों से भर देती हूँ।
निर्जीव खड़ी दीवारों की,
जड़ता सारी हर लेती हूँ।

कण – कण घर का महके ऐसे,
मानो सुवासित बयार चली।
मैं धीर भरी सुख ……..
बदली दुनिया मैं ………

केवल भीतों के आयत से,
होता है निर्मित सदन नहीं।
गृहलक्ष्मी बन कर आ जाऊँ।
बस जाता है फिर भवन वहीं।

मंगल गायन उत्सव पूजा,
लगती हैं सको बहुत भली।
मैं धीर भरी सुख की ……..
बदली दुनिया मैं ………..

हो जाऊँ मैं पल भर ओझल।
अनुपस्थिति मेरी बहुत खले।
दृष्टि पड़े जब भी मुझ पर तो,
मुख पर सबके मुस्कान खिले।

केवल मेरे होने से ही।
सूरत सबकी है खिली – खिली।
मैं धीर भरी सुख की बदली।
दुनिया बदली मैं भी बदली।

औरों की गलती पर मैंने,
अब नीर बहाना छोड़ दिया।
नभ तक परचम फहराया है।
धारा का रुख़ ही मोड़ दिया।

निज सक्षमता के बल पर ही,
लाचारी पीछे छोड़ चली।
मैं धीर भरी सुख की बदली।
दुनिया बदली मैं भी बदली।

♦ वेदस्मृति ‘कृती’ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

—————

  • “वेदस्मृति ‘कृती’ जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों में समझाने की कोशिश की हैं – “नारी तू नारायणी” एक नारी से ही घर का रौनक है, वही है जो हरेक हालात, में घर को व घर के सभी सदस्यों का देखभाल करती हैं। “नीरव नीरस गृह को मैं ही मधुर सुरों से भर देती हूँ, निर्जीव खड़ी दीवारों की जड़ता सारी हर लेती हूँ। हो जाऊँ मैं पल भर ओझल, अनुपस्थिति मेरी बहुत खले, दृष्टि पड़े जब भी मुझ पर तो, मुख पर सबके मुस्कान खिले।”

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यह कविता (मैं धीर भरी सुख की बदली।) ” वेदस्मृति ‘कृती’ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई आई टी . शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक. समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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चपला अपने आंगन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ चपला अपने आंगन। ♦

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तम मलिक अंचल में घना।
कलपना मेघा चपला चंचला।

संवेदना अभिव्यक्ति सब मौन।
बेर कदली संग निभाता कौन।

निर्वाधित अधिकार उसमें सना।
कातर स्वरों के राग से जो बना।

शिष्टता सम गामिनी मैं कौन ?
‘मंगल’ स्वर लहरी बजती मौत।

जग – क्रंदन नव वंदन।
मन नभ पुलकित आंगन।

समता सुंदर अभिनंदन।
स्मृतियां करती अंकन।

मधु समीर मलाई चंदन।
उपवन किसलय आलिंगन।

सौरभ प्रदेश में परिवर्तन।
चपला चमकी घर आंगन।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – मेघाच्छादित वर्षा, बिजली कड़कने की आवाज हो, वर्षा का पृथ्वी से आलिंगन हो। कितना खूबसूरत मनोरम दृश्य हैं। हर तरफ खुशिया ही खुशिया।

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यह कविता (चपला अपने आंगन।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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भारत की वीरांगनाएँ।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ भारत की वीरांगनाएँ। ♦

आओ सुनाऊँ गाथा तुमको भारत की ललनाओं की।
रण कौशल में माहिर थीं ऐसी वीरांगनाओं की।
हरगिज़ भूल नहीं सकते हम चेनम्मा के बलिदान को।
ठुकरा दिया था पल में उसने अंग्रेज़ों के फरमान को।

स्वाभिमानी चेनम्मा से फ़ौज ब्रिटिश की चिढ़ गयी थी।
दुर्गा सम कित्तूर की रानी अंग्रेज़ों से भिड़ गयी थी।
रणभूमि कितने अंग्रेज़ों का में उसने काम तमाम किया।
शूरता से लड़ते – लड़ते निज जीवन का बलिदान दिया।
आओ सुनाऊँ गाथा………

याद करो तुम सन सत्तावन की उस भीषण चिंगारी को।
गोरे भी कायल थे जिसके उस तलवार दुधारी को,
दुर्गा सम थी वो समरभूमि में लक्ष्मीबाई नाम था।
शूरवीरता देख के जिसकी दुश्मन भी हैरान था।

दोनों हाथों में लीं तलवारें बच्चे को भी साथ लिया।
टूट पड़ी शत्रु सेना पर दुश्मन को हाथों हाथ लिया।
आओ सुनाऊँ गाथा………

एक था शासक अलाउद्दीन जो चाचा का हत्यारा था।
उत्तर से दक्षिण तक उसने आतंक खूब मचाया था।
निर्मम, निर्दयी, अत्याचारी क्रूरता का पर्याय था।
उसके सैन्य बल के आगे हर कोई असहाय था।

नीच इरादे लेकर अपने वो चित्तौड़ में आया फिर,
राजपूत पद्मिनियों ने उसे अच्छा मज़ा चखाया फिर,
आओ सुनाऊँ गाथा तुमको………

युद्ध कला नहीं आती थी पुण्यमयी वो नारी थी।
देशभक्ति और स्वामिभक्ति उसकी जग से न्यारी थी।
शोणित तलवार लिये हाथ में बलबीर कक्ष में आया जब,
उदय सिंह की शय्या पर उसने अपना लाल सुलाया तब,

ऋणी रहेगा इतिहास सदा पन्ना ने जो काम किया।
राजधर्म की रक्षा हेतु अपना ही सुत वार दिया।
आओ सुनाऊँ गाथा तुमको भारत की ललनाओं की।
रण कौशल में माहिर थीं ऐसी वीरांगनाओं की।

♦ वेदस्मृति ‘कृती’ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

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  • “वेदस्मृति ‘कृती’ जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों में – वीरांगनाओं के शौर्य और वीरता से भरे जीवन गाथा को कविता के रूप में प्रस्तुत किया है। हमारा भारत देश वीरांगनाओं की भूमि है। इस कविता के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को वीरांगनाओं के शौर्य और वीरता से भरे जीवन गाथा को समझने में आसानी होगी। अपनी वीर माता रानी चेनम्मा, लक्ष्मीबाई, पद्मिनि, पन्ना जी के शौर्य और वीरता को जान और समझ पाएंगे।

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यह कविता (भारत की वीरांगनाएँ।) ” वेदस्मृति ‘कृती’ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई आई टी . शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक. समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

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रानी दुर्गावती।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ रानी दुर्गावती। ♦

पंद्रह सौ चौबीस में जन्मी, वो चन्देलों की शान थी।
कालिंजर राजा की बेटी, वो इकलौती संतान थी।

दुर्गाष्टमी अवतरण दिवस, दुर्गा का ही अवतार थी।
थर्रायी मुग़लों की सेना ऐसी भीषण ललकार थी।

बचपन से ही दुर्गावती ने सीखीं सारी युद्ध कलाएँ।
तलवारबाज़ी, तीरंदाज़ी, घुड़सवारी आदि विद्याएँ।

संग्राम शाह की थी पुत्र वधू , गढ़ मंडला की रानी थी।
झुकी नहीं वो मुग़लों के आगे, राजपूत स्वाभिमानी थी।

युवावस्था में खोया पति को, बेटा केवल पाँच साल का,
दलपत शाह के स्वर्गवास से गढ़ मंडला का बुरा हाल था।

ऐसी संकट की बेला में भी, धैर्य नहीं खोया अपना।
मंडला पर कब्ज़ा करने का किया चूर मुग़लों का सपना।

गोंडवाना पर हमला करने सुलतान मालवा से आया।
दुर्गावती ने किया पराजित, सेना सहित उसे भगाया।

सोलह वर्षों के सुशासन में, प्रजा हित के ही काम किये।
कुँए, बावड़ी, मठ इत्यादि के खूब उन्होंने निर्माण किये।

जाना उन्हें साधारण नारी, असफ खान ने हमला बोला।
शौर्य पराक्रम देख के उनका दुश्मन का मनोबल डोला।

ह्रदय से ममतामयी रानी, रण में चंडी सी हुंकार।
शत्रु सेना भय से काँपी सुनी जब तलवारों की टंकार।

रण कौशल देख के उनका शत्रु ऐसे चकित हैरान हुए।
अबुल फज़ल के अकबरनामा में, खूब उनके गुणगान हुए।

♦ वेदस्मृति ‘कृती’ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

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  • “वेदस्मृति ‘कृती’ जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों में रानी दुर्गावती जी के शौर्य और वीरता से भरे पूर्ण जीवन गाथा को कविता के रूप में प्रस्तुत किया है। इस कविता के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को रानी दुर्गावती जी के शौर्य और वीरता से भरे पूर्ण जीवन गाथा को समझने में आसानी होगी। अपनी वीर माता रानी दुर्गावती जी के शौर्य और वीरता को जान और समझ पाएंगे।

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यह कविता (रानी दुर्गावती।) ” वेदस्मृति ‘कृती’ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई आई टी . शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक. समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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बंजर जमीं पे भी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बंजर जमीं पे भी। ♦

अदाओं में उसके सवालात होगी।
निगाहों में उसकी करामात होगी।
बच के कहाँ जायेगा तेरा आशिक।
मुझको यकीं है मेरी मात होगी।

सोचा ना था ये भी हालात होगी।
सरेआम रूसवा यूँ जज्बात होगी।
किसी और के पहलू में सिमटकर।
मेरी जां यूँ तुमसे मुलाकात होगी।

निशाने पे हाँ अब मेरी जात होगी।
खतरे में धर्म भी और औकात होगी।
वर्षों से सोया समाज भी जागेगा।
बहुत जल्द ये भी तिलस्मात होगी।

तोहमत की बौछार, आघात होगी।
बाकी सभी मसलों पे बात होगी।
है कौन बेवफा किसने वादा निभाया।
ये सवाल टालकर जश्न की रात होगी।

करूँ चिर प्रतीक्षा मैं दरख्वास्त होगी।
वो एक बार कह दे कि फिर प्रात होगी।
बदलेगा पहलू, पहेली और मौसम।
सुध! बंजर जमीं पे भी बरसात होगी।

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है – जीवन में कितना भी उतार चढ़ाव आए, कितनी भी विपरीत परिस्थिति आए यूँ ही घबराकर रुकना नहीं, एक न एक दिन फिर जीवन में बरसात होगी।

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यह कविता (बंजर जमीं पे भी।) “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: चली जाती है।
  • जरूर पढ़े: अच्छा लगता है।

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गांव।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ गांव। ♦

जन्म भर की घटनाएं एक – एक कर याद आती है।
सामने आकर घटनाएं अपना रूप दिखाती है।
कभी – कभी कश्मीर की बादी की भी याद आती है।
सद्भावना यात्रा की वह याद दिलवाते हुए आगे बढ़ जाती है।

घूम घुमाकर इधर – उधर मन हमको ले जाता है।
वापस आकर खेलन अहिरौली रानी मऊ आता है।
गांव की दक्षिण में सताई भैया की द्वार पर दिह बाबा स्थान है।
तीन तरफ से उसके जौ – गेहूं का हरा – भरा सिवान है।

गांव की पश्चिम तरफ समय माता का एक स्थान है।
नवरात्र में गांव की औरतें वहां करती धार और जलदान हैं।
माता दरबार की राशि में अगल बगल पिक्चर बंजर वान है।
का बीज हो गई उस पर गांव के ही तथाकथित महान है।

उत्तर दिशा में गांव के कालिका का दिव्य स्थान है।
आसपास उनके पेड़ – पौधों से भरा हुआ बागवान है।
उसके उत्तर में हायर सेकंडरी स्कूल महान है।
जहां से पढ़कर निकले थे, बड़े – बड़े विद्वान है।

हायर सेकेंडरी स्कूल के पास प्राइमरी पाठशाला विद्यमान है।
कक्षा तीन से पांच की पढ़ाई का मेरा यह राजस्थान है।
बाग बगीचे में मिलता है अच्छा खासा महुआ आम है।
सतवा सक्रांति पर वह आता, चटनी बनाने को काम है।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – गांव की सादगी सुंदरता व प्रेम को कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया है। प्रकृति की सुंदरता हो, मंदिरों की खूबसूरती हो, या पेड़ पौधों का जिक्र हो, स्कूल हो, बाग बगीचे से मिलने वाला अच्छा खासा महुआ आम हो जिससे चटनी मस्त बनती है। वाह कितनी खूबसूरती से एक-एक कर वर्णन किया है। जैसे अभी-अभी की बात हो, जिवंत यूँ ही सबकुछ सामने चित्र रूप में घूमने लगता है।

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यह कविता (गांव।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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दूसरी तस्वीर।

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♦ दूसरी तस्वीर। ♦

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सड़कों पर मजदूर और मजबूर नहीं चल रहे।
भारत माता की सच्ची तस्वीर चल रही है।
चल रहा है प्राण हिम्मत, हौसलों, जज्बों की।
खून-पसीने की मिसाल-ए-तासीर चल रही है।
सड़को पर…..

यही पाँव है भारती में धड़कन स्पंदन लाता है।
यही वो हाथ है जो जठराग्नि, क्षुधा बुझाता है।
इन्हीं के साँसों से चूल्हे, कारखाने चलते हैं।
उच्छवासों से ऊर्जस्वित तिरंगा लहराता है।
लहू, दाग-धब्बों से माँ की सूरत हुई कुरूप।
और टी०वी० पे स्वच्छ भारत की तकरीर चल रही है।
सड़कों पर…..

बदन पे नहीं वसन पेट सट गए आँत से।
घर से बेघर मालिक ही, निष्कासित जमात से।
निकल पड़े हैं पीठ पे लादे कर्ज जिंदगी का।
नंगे पैर अकेले लड़ने, जग से, हालात से।
बूंद-बूंद, दाने-दाने को हो मोहताज तिरस्कृत।
इंसानियत के गर्दन पे शमसीर चल रही है।
सड़कों पर…..

सत्ता और व्यवस्था में कोई सांठ गांठ सी हो गई है।
साधनों और संसाधनों का बंदरबांट सी हो गई है।
धृतराष्ट्र, कुंभकर्ण बन रहे क्यूँ इनके रक्षक ही।
प्रजा नरक में ठेले जा रहे मार काट सी हो गई है।
चार साल के बाद इन्हीं के पास आओगे याचक सा।
अभी तो “अच्छे दिन” की अच्छी नज़ीर चल रही है।
सड़कों पर…..

सुनते थे भारत अर्पण और तर्पण की भूमि है।
राष्ट्र के लिए स्व, सर्वस्व समर्पण की भूमि है।
पर जो दृश्य करुण, दारुण, भयावह सामने है।
शर्मनाक लगता है निर्दयी, बंजर जन की भूमि है।
“छप्पन इंची सीना वाले” घर भी देखो अपना।
“चौकीदार” के पाँव में भी जंजीर चल रही है।
सड़कों पर…..

जिसके श्रम की घुट्टी महलों में किलकारी भरती है।
जिनकी अंगुलियां छू के सरकारें बनती बिगड़ती है।
वही नराधम, भिक्षुक बन यूँ बिलख रहा है आज।
जैसे कोई बेटी गरीब बाप के घर से बिछड़ती है।
कलियुग में किंचित ये अग्निपरीक्षा ही तो है।
देव-दीन में बहस बड़ी गंभीर चल रही है।
सड़कों पर…..

खुदा के बंदे खौफ खाओ ये इंतिहा है हिकारत की।
रोटी दो, छप्पड़-छाया दो, कुछ दो मूल्य शराफत की॥

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने बहुत ही सुंदर, सरल शब्दों में “मजदूर या मजबूर” मजदूर के कठिन जीवन को दर्शाया है कविता के माध्यम से।

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About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: स्वाद बदलना होगा।
  • जरूर पढ़े: क्या-क्या देखें।

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अन्नदाता – किसान…।

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ϒ अन्नदाता – किसान…। ϒ

अन्नदाता

Farmer poetry in hindi

खून पसीने की फिर वही कहानी…..

झुलस रहा है बदन धूप में,
आखों में आशाएं भी है,
सर पर है मटियाला साफा,
पैरों में गरीबी साये भी है।

दूर तलक दिखते खेत है,
सूरज उनको तपाये भी है,
सूखे से भयभीत है किसान,
जो कर्ज में खुद को दबाए भी है।

जब बादल घिरते आसमान में,
लेती अँगड़ाई जब पुरवाई भी है,
मिट्टी में रहती नमी उस पल,
तब दिखती खेतों में हरियाली भी है।

प्याज से सूखी रोटी खाते है,
गीत वो सावन के गाते है,
श्रम से सींचे खेत है उन्होंने,
अनाज दूसरे छीन ले जाते है।

भूखे परिवार का पेट है भरते,
बेटी ब्याहने की चिंताएं भी है,
दो रोज का आराम मयस्सर नहीं,
खुद को पसीने में नहलाये भी है।

रक्षक सरकारी प्रताड़ित है करते,
साहूकार खूब धमकाते भी है,
चुनावों में जब बात है होती,
तब मन में जगती अभिलाषाएं भी है।

फिर छा जाता है वही अंधेरा,
होती फिर वही निराशा भी है,
खून पसीने की फिर वही कहानी,
वही किसान की पीड़ा भी है।

मौसम आते रूप बदल- बदल,
कुछ कुछ होती बरसाते भी है,
बच्चों की पढ़ाई दिन-रात सताती,
जीवन में काली घटाएं भी है।

जिम्मेदारियों का बोझ है सर पर,
दम तोड़ती सुख की लालसाएं भी है,
वह लाचार किसान है भारत का,
खादी और खाकी उनको सताए भी है।

आलस जरा न उसमें रहता ,
कष्टों के बीच वह मुस्कुराए भी है,
फिर क्यों बेबस है किसान आज ,
जो फाँसी को गले लगाये भी हैं।

©- डॉ मुकेश कुमार, – दिल्ली। ∇

♥ शिक्षक (हिंदी विषय) और मेंटोर शिक्षक रा. रा.क्षेत्र दिल्ली ♥

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हम दिल से आभारी हैं ♥ डॉ मुकेश कुमार – जी के प्रेरणादायक हिन्दी कविता “किसान” साझा करने के लिए।

About Dr. Mukesh Kumar – डॉ मुकेश कुमार जी के शब्दाें में –

लेखन – विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में।
रुचि: – कविता, कहानी, समीक्षा, शैक्षिक मुद्दों और समसामयिक मुद्दों आदि पर लिखना।
पिछले 19 वर्षों से साहित्य सेवा में अपनी भागीदार।
हिंदी साहित्य से जुड़े लेखकों एवं उनकी रचनाओं को पढ़ना।

योग्यता – पी. एच. डी. ♦ एम. एड. ♦ जे.आर. एफ.
शोध विषय – (पी. एच. डी.) विद्यासागर नोटियाल : व्यक्तित्व एवं कृतित्व,

शोध विषय : एम. एड
(बहुभाषिकता एवं अधिगम : नई युक्तियाँ सामग्रियां और संभावनाएं)

डॉ मुकेश कुमार जी के लिए मेरे विचार: 

♣ “डॉ मुकेश कुमार जी” ने कविता के माध्यम से खून पसीने की फिर वही कहानी, अन्नदाता किसान के मेहनती जीवन की कड़वी सच्चाई – “किसान”, का सुंदर वर्णन किया है। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविताऐं छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

♥••—••♥

ϒ यह कविता जरूर पढ़े – मजदूर…। ϒ

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought to life by. By doing this you Recognize hidden within the buraiya ensolar radiation, and encourage good solar radiation to become themselves.

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAJ51

 

 

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Filed Under: डॉ मुकेश कुमार कि कवितायें, हिन्दी-कविता Tagged With: farmer poetry in hindi, hindi poetry, Poetry by Dr. Mukesh Kumar, poetry in hindi, अन्नदाता, खून पसीने की फिर वही कहानी, डॉ मुकेश कुमार कि कवितायें

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