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“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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short poem in hindi

मानव जन्म हुआ मेरा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मानव जन्म हुआ मेरा। ♦

मैं कोई विद्वान नहीं,
विद्वता का पाठ पढ़ाऊ।
कोई मैं अज्ञानी नहीं,
अज्ञानी में अज्ञानी कहाउं।

सिंधु में सानी नहीं,
ज्ञानियों में ज्ञानी नहीं।
सिंह में शानी नहीं,
दानियों में दानी नहीं।
और मेरे देंह – गेह में,
बैठी अशांत भी नहीं।

मैं ध्रुव भी नहीं,
जो वन गमन करूं।
मैं राम नहीं हूं कि,
राक्षसों का वध करूं।

मैं कृष्ण भी नहीं ज्यों,
गोपियों को बंसी सुनाऊं।
वृंदावन में उनके संग,
मिल रास लीला रचाऊं।

महाराजा पृथु नहीं कि,
मेरी पृथ्वी स्तुति करें।
मैं ऋषि संकादि नहीं कि,
महाराजा पृथु सा उपदेश करें।

महाराज पुरंजन नहीं कि,
शिकार खेलने से रानी कुपित होंगी।
मैं राजर्षी भरत भी नहीं,
की मृग योनि को पाऊंगा।
और ऋषि अंगिरा पुत्र कहाउं,
ब्राह्मण कुल जन्म पाऊंगा।

मैं महिंद्र भी नहीं कि,
ब्रह्म हत्या ले बिकाऊ।
मैं चित्रकेतु भी नहीं,
कि विषपान करूं।
वामन भगवान भी नहीं,
तीन पग में ब्रह्माण्ड नापूं।

मैं योग माया भी नहीं,
कि कंस बध भविष्यवाणी करूं।
प्रलंबसुर – अधसुर नहीं,
की उद्धार की सोचूं।
और सुदर्शन शंख चूर्ण नहीं,
जो उद्धार के लिए सोचूं।

मैं अक्रूर जी नहीं कि,
ब्रज यात्रा पर जाऊं।
श्री कृष्ण की स्तुति में,
अपने को लगाऊं।
उद्धव जी की ब्रज यात्रा,
का वर्णन लोगों को सुनाऊं।

और ऋषि अंगिरा पुत्र कहाऊं,
ब्राह्मण कुल में जन्म पाऊं।
मैं इंद्र भी नहीं हूं,
ब्रह्मा हत्या लेकर बिताऊं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – साधारण मानव के बारे में बताया है बहुत सारे उदाहरण देकर। जीवन साधारण हो लेकिन उत्तम हो, विकार से मुक्त हो, तो अच्छा। शांत, पवित्र जीवन हो। ज्ञान और शील हो, मन शांत व पवित्र हो, आपका। किसी को दुःख न दे, तो अच्छा।

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यह कविता (मानव जन्म हुआ मेरा।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

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भारत की वीरांगनाएँ।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ भारत की वीरांगनाएँ। ♦

आओ सुनाऊँ गाथा तुमको भारत की ललनाओं की।
रण कौशल में माहिर थीं ऐसी वीरांगनाओं की।
हरगिज़ भूल नहीं सकते हम चेनम्मा के बलिदान को।
ठुकरा दिया था पल में उसने अंग्रेज़ों के फरमान को।

स्वाभिमानी चेनम्मा से फ़ौज ब्रिटिश की चिढ़ गयी थी।
दुर्गा सम कित्तूर की रानी अंग्रेज़ों से भिड़ गयी थी।
रणभूमि कितने अंग्रेज़ों का में उसने काम तमाम किया।
शूरता से लड़ते – लड़ते निज जीवन का बलिदान दिया।
आओ सुनाऊँ गाथा………

याद करो तुम सन सत्तावन की उस भीषण चिंगारी को।
गोरे भी कायल थे जिसके उस तलवार दुधारी को,
दुर्गा सम थी वो समरभूमि में लक्ष्मीबाई नाम था।
शूरवीरता देख के जिसकी दुश्मन भी हैरान था।

दोनों हाथों में लीं तलवारें बच्चे को भी साथ लिया।
टूट पड़ी शत्रु सेना पर दुश्मन को हाथों हाथ लिया।
आओ सुनाऊँ गाथा………

एक था शासक अलाउद्दीन जो चाचा का हत्यारा था।
उत्तर से दक्षिण तक उसने आतंक खूब मचाया था।
निर्मम, निर्दयी, अत्याचारी क्रूरता का पर्याय था।
उसके सैन्य बल के आगे हर कोई असहाय था।

नीच इरादे लेकर अपने वो चित्तौड़ में आया फिर,
राजपूत पद्मिनियों ने उसे अच्छा मज़ा चखाया फिर,
आओ सुनाऊँ गाथा तुमको………

युद्ध कला नहीं आती थी पुण्यमयी वो नारी थी।
देशभक्ति और स्वामिभक्ति उसकी जग से न्यारी थी।
शोणित तलवार लिये हाथ में बलबीर कक्ष में आया जब,
उदय सिंह की शय्या पर उसने अपना लाल सुलाया तब,

ऋणी रहेगा इतिहास सदा पन्ना ने जो काम किया।
राजधर्म की रक्षा हेतु अपना ही सुत वार दिया।
आओ सुनाऊँ गाथा तुमको भारत की ललनाओं की।
रण कौशल में माहिर थीं ऐसी वीरांगनाओं की।

♦ वेदस्मृति ‘कृती’ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

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  • “वेदस्मृति ‘कृती’ जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों में – वीरांगनाओं के शौर्य और वीरता से भरे जीवन गाथा को कविता के रूप में प्रस्तुत किया है। हमारा भारत देश वीरांगनाओं की भूमि है। इस कविता के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को वीरांगनाओं के शौर्य और वीरता से भरे जीवन गाथा को समझने में आसानी होगी। अपनी वीर माता रानी चेनम्मा, लक्ष्मीबाई, पद्मिनि, पन्ना जी के शौर्य और वीरता को जान और समझ पाएंगे।

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यह कविता (भारत की वीरांगनाएँ।) ” वेदस्मृति ‘कृती’ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई आई टी . शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक. समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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माँ सरयू बहुत महान।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ माँ सरयू बहुत महान। ♦

माँ सरयू बहुत महान।
यहां घूमते थके ना राम।
जिह्वा पर बस एक ही नाम,
राम राम बस राम ही राम।

तीनो लोक करें गुणगान।
हे माँ सरयू तुझे प्रणाम।

राम – कथा सरयू के तीर,
कहता – सुनता होता वीर।
सुखमय उसका जीवन होता।
वह होता धीर – गंभीर।

पीता सदा वह राम मैं जाम,
हे माँ ! सरजू तुझे प्रणाम।

भोले बाबा औघड़ दानी।
सृष्टि में कोई नहीं है शानी।
शिव भक्तों से जो भी उलझे।
हो जाती उसकी खत्म कहानी।

शिव भक्ति मिले बिन मोल औ दाम।
हे माँ ! सरजू तुझे प्रणाम।

शिव – संग शक्ति, शक्ति से किरपा,
प्रतिपल हो सुलभ आशीष।
सभी का शुभ चाहता चले जो,
रण में होता वही है बीस।

नाम न होवे कभी नाम।
हे माँ ! सरयू तुझे प्रणाम।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – माँ सरयू नदी के महत्व को बताया है, प्रभु श्री राम से माँ सरयू के जुड़ाव का वर्णन किया हैं। शिव और शक्ति के महत्व को समझाया है। प्रभु श्री राम के जीवन में शिव और शक्ति का क्या महत्व था यह भी बताया है।

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रानी दुर्गावती।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ रानी दुर्गावती। ♦

पंद्रह सौ चौबीस में जन्मी, वो चन्देलों की शान थी।
कालिंजर राजा की बेटी, वो इकलौती संतान थी।

दुर्गाष्टमी अवतरण दिवस, दुर्गा का ही अवतार थी।
थर्रायी मुग़लों की सेना ऐसी भीषण ललकार थी।

बचपन से ही दुर्गावती ने सीखीं सारी युद्ध कलाएँ।
तलवारबाज़ी, तीरंदाज़ी, घुड़सवारी आदि विद्याएँ।

संग्राम शाह की थी पुत्र वधू , गढ़ मंडला की रानी थी।
झुकी नहीं वो मुग़लों के आगे, राजपूत स्वाभिमानी थी।

युवावस्था में खोया पति को, बेटा केवल पाँच साल का,
दलपत शाह के स्वर्गवास से गढ़ मंडला का बुरा हाल था।

ऐसी संकट की बेला में भी, धैर्य नहीं खोया अपना।
मंडला पर कब्ज़ा करने का किया चूर मुग़लों का सपना।

गोंडवाना पर हमला करने सुलतान मालवा से आया।
दुर्गावती ने किया पराजित, सेना सहित उसे भगाया।

सोलह वर्षों के सुशासन में, प्रजा हित के ही काम किये।
कुँए, बावड़ी, मठ इत्यादि के खूब उन्होंने निर्माण किये।

जाना उन्हें साधारण नारी, असफ खान ने हमला बोला।
शौर्य पराक्रम देख के उनका दुश्मन का मनोबल डोला।

ह्रदय से ममतामयी रानी, रण में चंडी सी हुंकार।
शत्रु सेना भय से काँपी सुनी जब तलवारों की टंकार।

रण कौशल देख के उनका शत्रु ऐसे चकित हैरान हुए।
अबुल फज़ल के अकबरनामा में, खूब उनके गुणगान हुए।

♦ वेदस्मृति ‘कृती’ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

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  • “वेदस्मृति ‘कृती’ जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों में रानी दुर्गावती जी के शौर्य और वीरता से भरे पूर्ण जीवन गाथा को कविता के रूप में प्रस्तुत किया है। इस कविता के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को रानी दुर्गावती जी के शौर्य और वीरता से भरे पूर्ण जीवन गाथा को समझने में आसानी होगी। अपनी वीर माता रानी दुर्गावती जी के शौर्य और वीरता को जान और समझ पाएंगे।

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यह कविता (रानी दुर्गावती।) ” वेदस्मृति ‘कृती’ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई आई टी . शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक. समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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बंजर जमीं पे भी।

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♦ बंजर जमीं पे भी। ♦

अदाओं में उसके सवालात होगी।
निगाहों में उसकी करामात होगी।
बच के कहाँ जायेगा तेरा आशिक।
मुझको यकीं है मेरी मात होगी।

सोचा ना था ये भी हालात होगी।
सरेआम रूसवा यूँ जज्बात होगी।
किसी और के पहलू में सिमटकर।
मेरी जां यूँ तुमसे मुलाकात होगी।

निशाने पे हाँ अब मेरी जात होगी।
खतरे में धर्म भी और औकात होगी।
वर्षों से सोया समाज भी जागेगा।
बहुत जल्द ये भी तिलस्मात होगी।

तोहमत की बौछार, आघात होगी।
बाकी सभी मसलों पे बात होगी।
है कौन बेवफा किसने वादा निभाया।
ये सवाल टालकर जश्न की रात होगी।

करूँ चिर प्रतीक्षा मैं दरख्वास्त होगी।
वो एक बार कह दे कि फिर प्रात होगी।
बदलेगा पहलू, पहेली और मौसम।
सुध! बंजर जमीं पे भी बरसात होगी।

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है – जीवन में कितना भी उतार चढ़ाव आए, कितनी भी विपरीत परिस्थिति आए यूँ ही घबराकर रुकना नहीं, एक न एक दिन फिर जीवन में बरसात होगी।

—•—•—•—

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यह कविता (बंजर जमीं पे भी।) “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: चली जाती है।
  • जरूर पढ़े: अच्छा लगता है।

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अना की बात।

Kmsraj51 की कलम से…..

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♦ अना की बात। ♦

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एक आम आदमी ही हूँ फकीर मत समझो।
मेरी बातों को पत्थर की लकीर मत समझो।
जुबां ही है कभी – कभी फिसल भी जाती है।
सीधी बात दिल पे लगती है, तीर मत समझो॥

दिल से दिमाग निकालकर कभी गले लगाओ।
मुहब्बत का मजबूत धागा हूँ जंजीर मत समझो।
मैं झुक के नफरत की ऊँची दीवार गिरा देता हूँ।
मेरे पास है आँसू, तुम खुद को अमीर मत समझो॥

जमाने का बड़प्पन है, एहतराम भी करता है।
मैं कोई नानक, बुल्लेशाह नहीं, पीर मत समझो।
बात कुछ खास नहीं, तजुर्बा – साफगोई की है।
तुम मुझे शाह, तकी मीर या कबीर मत समझो॥

सुलझे हुए लोग मुझे बेहतर समझते हैं शायद।
गलतफहमी है, शम्स हूँ मैं, शमसीर मत समझो।
सियासतदानों सा मुझे बेवजह उलझाओ मत।
अना की बात है, मसला-ए-कश्मीर मत समझो॥

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, कविता के माध्यम से बहुत ही सुंदर वर्णन किया है कि प्राकृतिक सुंदरता के साथ रियल व आम इंसान के गुणों को समझाने की कोशिश की हैं।

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यह कविता “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: स्वाद बदलना होगा।
  • जरूर पढ़े: क्या-क्या देखें।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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खुद की कदर।

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♦ खुद की कदर। ♦

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सबके दिलों पे असर करने लगा हूँ।
कुछ के तो मन में घर करने लगा हूँ।
ये कोई मौसम का जादू नहीं है दोस्त।
आजकल खुद की कदर करने लगा हूँ।

तितलियों के पीछे क्यूँ भागना, भगाना।
बेहतर है अपना ही छोटा बाग लगाना।
तितली आए या न आए, खुशबू आएगी ही।
थोड़ा कम में ही गुजर बसर करने लगा हूँ।
आजकल…..

महफिल में अब हम दिखाई नहीं देते।
बदकिस्मती की कभी दुहाई नहीं देते।
शौक और जरूरत के बीच का रास्ता,
बनाकर, अकेला ही सफर करने लगा हूँ।
आजकल…..

चाक पे मिट्टी से कुछ गढ़ा नहीं था।
ककहरे से ऊपर कभी चढ़ा नहीं था।
दूसरों की लिखावट ही पढ़ते रहे थे।
अब मन को थोड़ा साक्षर करने लगा हूँ।
आजकल…..

वो मेरे पास खुद ही चल के आने लगा।
देश, भेष बदल के, संभल के आने लगा।
सच्ची इबादत कभी बेकार नहीं जाती।
अपने पे यकीन, सबर करने लगा हूँ।
आजकल खुद की कदर करने लगा हूँ।

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, कविता के माध्यम से बहुत ही सुंदर वर्णन किया है कि खुद की कद्र करना मतलब स्वयं को अंदर से सकारात्मक रखना हैं। अपने जीवन में अगर वाकई में आप आगे बढ़ना चाहते हैं तो खुद की क़द्र करना सीखें।

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यह कविता “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

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दुधारी तलवार।

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♦ दुधारी तलवार। ♦

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अरसों बाद आप पे भी कल छाई कोई खुमारी थी।
जमीं पे उतरने की अच्छी योजना, तैयारी थी।
नामुराद डूबे आज, आपकी भी रायशुमारी थी।
मजबूरन नाचीज ने समंदर में कस्ती उतारी थी॥

लहरों में कल रात गजब की लोच और फनकारी थी।
साहिल को लीलने की ललक थी, बेकरारी थी।
डूबना तो तय था सो खुशी से रहबर डूब गया।
कल की रात समंदर पे भी इश्क़ की मस्ती भारी थी॥

हम तमाशाई भी थे चुप रहने की लाचारी थी।
वही मुवक्किल, मुंसिफ, वही गवाह सरकारी थी।
सारे सबूत तो वैसे मेरे ही पक्ष में दिख रहे थे।
लेकिन रूप के आगे मेरी किस्मत, बुद्धि हारी थी॥

अदा और अना के बीच यदा कदा जंग जारी थी।
मैं ही क्यूँ हर बार हारूँ? इस बार उस की बारी थी।
यकीन नहीं हो रहा था ये हकीकत है या ख्वाब।
पहली बार “मुहब्बत है” वो भी खुल के स्वीकारी थी॥

महज नहीं कजरारी आँखें वो तलवार दुधारी थी।
लबों की लरजिश पे फिदा, कायनात भी जुवारी थी।
पर तुमनें मुझे शिकस्त देकर सिकंदर बना दिया।
तुम्हारा तसव्वुर ही अब तक मेरी ज़रदारी थी॥

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, कविता के माध्यम से दुधारी तलवार का उदहारण देकर प्यार के उतार-चढ़ाव व लुका छिपी का
    बहुत ही सुंदर वर्णन किया है।

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साँस तो लेने दो।

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♦ साँस तो लेने दो। ♦

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तसल्ली से सुनेंगे सारी बात, साँस तो लेने दो।
अभी तो लंबी बची है रात, साँस तो लेने दो।
मुद्दतों बाद दिल का यूँ बेकाबू होना लाजिमी है।
पर एक साथ इतने सवालात, साँस तो लेने दो॥

मौसम से मिलकर व्यूह, साजिशें रची गई है।
बेमौसम का तूफान, बरसात, साँस तो लेने दो।
बाँध सब्र का टूट गया तो बाढ़ बहा ले जायेंगी।
तिसपर बिजली की खुराफात, साँस तो लेने दो॥

रजनीगंधा, बेला, मोगरा क्यूँ इतराये, शरमाये है।
पायल, चूड़ी, कंगन का घात, साँस तो लेने दो।
नजरों का चौतरफा वार जरा संभलने तो दो।
कहीं बिगड़ ना जाए हालात, साँस तो लेने दो॥

बारी-बारी पट खोलो जज्बातों आकांक्षाओं की।
एक-एक को देना है सौगात, साँस तो लेने दो।
अंग-अंग के तेवर तीखे, उग्र और उच्छृंखल हैं।
मंजूर है मुझको अपनी मात, साँस तो लेने दो॥

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, कविता (साँस तो लेने दो) के माध्यम से जज्बातों, आकांक्षाओं व धैर्य का बहुत ही मनोरम सुंदर वर्णन किया है। बहुत ही लम्बे समय के बाद मिलन होने पर नारी की मन की भावनावों को दर्शाया हैं।

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मान भी लो।

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♦ मान भी लो। ♦

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हर दिन न होंगे एक जैसे हालात मान लो।
तुम्हारी भी होगी उनसे मुलाकात मान लो।
आप खामख्वाह चाँद की जिद पकड़ बैठी।
जमीं पे भी हुआ करती है करामात मान लो॥

दिल का दरवाजा कभी बन्द मत करना।
मेहफिल में बढ़ती है ताल्लुकात मान लो।
गुप्तगू और राब्ता का दौर ये चलता रहे।
बावस्ता रफ्ता-रफ्ता, बनती है बात मान लो॥

सभी नजारे नहीं होते हैं अपने काम के।
काली भी नहीं होती सारी रात मान लो।
ठहरे हुए पानी में सड़ांध आने लगती है।
जरुरी है कंकड़ का भी खुराफात मान लो॥

नामुराद साहिल से गले मिलने से पहले।
सहता है समंदर के कई आघात मान लो।
नजरिया बदलने से भी किस्मत बदलता है।
ले आओ नया कागज़, कलम, दावात मान लो॥

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, कविता के माध्यम से प्यार-भरी मन के भावनाओं का बखूबी बहुत ही गहराई से कम शब्दों में सुंदर वर्णन किया हैं।

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  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

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