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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिंदी कविता

विकास मार्ग पर चलें!

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ विकास मार्ग पर चलें! ♦

उसने आगे आकर हमें सुनाया,
उत्तर देने के लिए मंगल आया।
हम शांति प्रदर्शक सबको भाया,
सद्भाव की हमने अलख जगाया।

वह कहता है पूराने संबंध छोड़ो,
हम हैं हमसे ही नया नाता जोड़ो।
भारत सदा बैलेंस करके चलता है,
शांतिदूत बन सबकी रक्षा करता।

रक्षा हजारों पर अपनी निर्भरता,
खत्म करने की वह हमसे कहा।
यह पता वह कितना साथ देगा,
वह तो अपनी देखी देखा करता।

तेल और हथियार देने को बोला,
दुनिया पर भरोसा करने से रोका?
खुद उकसा वे पर विश्वास करता,
अपने आप विचार किया करता।

एक अपने मंच से सचिव ने कहा,
ऊर्जा व वस्तुएं हमारे हित ने नहीं।
अपनी आवश्यकता है नहीं छोड़ा,
हमने तो सबसे अच्छा नाता जोड़ा।

मित्र देश के संबंध बिगाड़ने की कहा,
पुराने समझौते को टालने को कहा।
खुद ही महान नई मित्रता बनाता रहा,
आगे आकर चौध राणा चलाता रहा।

भारत संयुक्त राष्ट्र संघ में भी अपना,
निष्पक्ष बयान दुनिया को दे डाला।
मानव के लिए जांच की कह डाला,
अमन चैन की राह सुझाव दे डाला।

उसके गले नहीं उतरती बात हमारी,
भला सबका, यही हमने बता डाला।
दोनों पक्षों को शांति संदेश सुनाया,
संयम बरतने के लिए हमने बताया।

सुंदर सुगम मार्ग प्रशस्त किया जाता,
उपदेशों की तरफ ध्यान दिया जाता।
दुनिया में प्रदूषण पर रोक लग जाता,
विकास मार्ग का रास्ता खुल जाता।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — दोस्त वही अच्छा जो अच्छे समय के साथ – साथ बुरे समय में भी साथ ना छोड़े। ऐसी दोस्ती का क्या करना? जो मात्र अपना ही फायदा देखे सदैव? ऐसे दोस्त से अच्छा है की, दोस्ती ही ना हो, हमे तो वही दोस्त चाहिए जो सदैव हमारा साथ दे ऐसे दोस्त के साथ ही कंधे से कन्धा मिलाकर चले। ऐसे दोस्त से दुरी ही भली है जो जरूरत पर साथ ही ना दे, उम्मीद पर कभी खरा ही ना उतरे, जो सदैव ही केवल अपने बारे में सोचे। हमारे लिए ऐसा ही दोस्त सही है जो सुख – दुःख में सदैव ही हमारे साथ खड़ा रहे।

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sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (विकास मार्ग पर चलें!) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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बेचैन उर – व्यथा वसुंधरा की।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बेचैन उर – व्यथा वसुंधरा की। ♦

लिख डाला वृत्तांत धरा की, पर न आस न छूटी,
अंधियारी मिटाने को, तेरे द्वार आकर खड़ी।

है दीप्त मन भी, उतावला फिर मन भी,
कैसे पूर्ण करें हम, कोई राज नहीं है।

क्षिति की गोद में, बिलख रहें सब,
दूर खड़ा नभ भी, आँसू बहा रहा तब।

तृष्णा से तड़पता दिल, विह्वल सा दिख रहा है,
छटपटाहट जिगर की, सबको दिखला रहा है।

असिताङ्ग खड़ी है, अँधेरों ने आज घेरा है,
तिमिर मिटाने को, रोहिताश्व से लड़ा है।

प्रदीप अंतस् का, जलाने चला हूं,
उल्लास अपनी सब में, छितराने चला हूं।

कथा-कहानी सुनाने को, बेचैन बहुत हूं मगर,
हर घड़ी आतुर हो, कटिबद्ध खड़ा हूं।

जब साथ सकारे मिल जायें, गगन को झुका लूँगा,
कोई साथ दे दे तो मुझे, जलधि को सुखा लूँगा।

लगी दाढ़ा उर में मेरे, उसे और धधका लूंगा,
इस विश्व का गरल, कंठ में अपने समां लूंगा।

सांध्य – सवेरे मैं, वीणा के तान लगा कर,
आलाप अगर अधूरा होगा, तो राग विरह के गा लूंगा।

ऋतु की अगुवाई में, धरती का श्रृगांर कर जाऊं,
व्यथा-कथा वसुधा की, तालिस पत्र पर लिख जाऊं।

ऋषियों की तरह अडिग हो, चंद श्लोक लिख जाऊं,
व्याकुल वसुंधरा की व्यथा, कागज पर उकेर जाऊं।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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  • “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल`“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — ग्लोबल वार्मिंग की वजह से अंटार्कटिक में बर्फ बहुत तेजी से पिघल रही है और वहां फिर इतनी बर्फ नहीं जम पाएगी। इस प्रक्रिया की गति को धीमा करने के लिए वातावरण से कार्बन निकालने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। ऑस्ट्रेलिया की एक जलवायु वैज्ञानिक और न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय में रिसर्च फेलो जोई थॉमस ने कहा, “हम पश्चिमी अंटार्कटिक में जो बर्फ की चादर देख रहे हैं कि उसके पिघलने की शुरुआत हो चुकी है। एक बार हम एक विशेष सीमा रेखा तक पहुंच गए तो फिर हमारी तमाम कोशिशों के बावजूद इसे पिघलने से नहीं रोका जा सकता।” अगर अब भी मानव जाति नहीं सुधरी तो परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे। कम से कम अब तो समझों पेड़ लगाना और उसकी देखभाल करना जरूरी हैं, नहीं तो इस पृथ्वी पर कोई भी जीव नहीं बचेगा। आओ हम सब मिलकर एक संकल्प ले की प्रत्येक वर्ष एक पेड़ जरूर लगाएंगे, और उसका अच्छे से देखभाल भी करेंगे।

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यह कविता (बेचैन उर – व्यथा वसुंधरा की।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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बेखबर जिंदगी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बेखबर जिंदगी। ♦

जिंदगी के रंग भी बदलते है,
कभी हम बेखबर जिंदगी से,
अनजान सफर की ओर चल देते है।
जिंदगी में कभी ख़ुशी कभी गम।

जीवन की राह में कभी सहज होते,
हर पल खुशी हो यह जरूरी नहीं।
दुख भी जिंदगी का रूप ही है,
जिंदगी में जो चाहा वो मिले,
ये भी कोई जरूरी नहीं है।

जिंदगी भी एक किताब होती,
जिनके पन्ने हम पढ़ पाते।
कब क्या कैसे होगा घटित,
सबको खबर होती बेखबर जिंदगी की।

खाली हाथ आये जीवन में,
खाली ही हाथ जाना भी है।
फिर क्यो हम भागदौड़ में लग रहे,
कुछ अच्छे कर्म करे जीवन में।

जो हमेशा हमें याद करें,
मोह में बांधकर जिंदगी को।
दुख दर्द को इस पीड़ा को सहते है,
अन्त समय मे जिंदगी बेखबर होती है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जो कर्म इंसान करता है वहीं कर्म उसके नाम को इस संसार में जीवित रखते है। इस संसार में सभी खाली हाथ ही आये थे और खाली हाथ ही जाना भी हैं, तो जब तक जीवन हैं अच्छे कार्य ही करें। सदैव ही आपकी यही कोशिश हो की आपकी वजह से कभी भी किसी को किसी भी तरह की कोई तक़लीफ़ न हो। जहां तक हो सके लोगों की मदद करते चले और अच्छा सोचे व अच्छा कार्य करें। एक बात मेरी याद रखें — जिंदगी में किसी से भी स्नेह रखें मोह नहीं, क्योकि जहां मोह होता है वहां बंधन होता है और वही बंधन आपको दर्द देता है। श्रीमद्भागवत गीता के अठारहवें अध्याय में है की “नष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा” अर्थात: जब तक इंसान मोह को नहीं त्यागता है तब तक उसे सुख और सद्गति नहीं मिलती हैं।

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यह कविता (बेखबर जिंदगी।) “पूनम गुप्ता जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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पृथ्वी को बुखार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ पृथ्वी को बुखार। ♦

पृथ्वी को बुखार आ रहा है,
समुद्र में ज्वार भाटा खा रहा।
जल स्तर नौ इंच बढ़ गया है,
तेज धूप आसमान तप रहा।

चंदा मामा की शीतल छीना,
कल कारखाने से धुआं उठा।
जीव जंतु पर पड़ रहा प्रभाव,
ग्लोबल वार्मिंग के ही आसार।

दुनिया का मौसम बिगड़ रहा है,
अंटार्कटिका में बर्फ पिघल रहा।
पूर्व- उत्तर भारत में बढा तापमान,
पृथ्वी को कर रहा है हलकान।

युद्ध थोपने का हो रहा एलान,
महाबली की कोशिश फरमान।
दुनियां का परमाणु पर विचार,
जीव जंतु का भी होगा संघार।

अर्थ लाभ पर केवल विचार,
संपन्न देशों का हो रहा प्रहार।
मानवता का हो रहा है संहार,
डग खोजते शरणार्थी लाचार।

क्रमश: ताप में वृद्धि हो रही,
हिम ग्लेशियर पिघल रहा है।
तापमान तेजी से चढ़ रहा है,
दुनिया आगे क्यों नहीं बढ़ा।

कारण! का पहचान करना होगा,
समस्या का निदान करना होगा।
बन कटाई से रोक लगाना होगा,
पर्वत का संरक्षण करना होगा।

हानिकारक गैस पर करें नियंत्रण,
पौधों का भी रोपड़ करना होगा।
मिलकर संयुक्त प्रयास करने होंगे,
ग्लोबल वार्मिंग से हम तभी बचेंगे।

प्रदूषण फैलाने वाले साधन पर,
करना पड़ेगा पूर्ण रूप से कार्य।
तभी सफल होगा भरा प्रयास,
ग्लोबल वार्मिंग बहुत खतरनाक।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — ग्लोबल वार्मिंग की वजह से अंटार्कटिक में बर्फ बहुत तेजी से पिघल रही है और वहां फिर इतनी बर्फ नहीं जम पाएगी। इस प्रक्रिया की गति को धीमा करने के लिए वातावरण से कार्बन निकालने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। ऑस्ट्रेलिया की एक जलवायु वैज्ञानिक और न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय में रिसर्च फेलो जोई थॉमस ने कहा, “हम पश्चिमी अंटार्कटिक में जो बर्फ की चादर देख रहे हैं कि उसके पिघलने की शुरुआत हो चुकी है। एक बार हम एक विशेष सीमा रेखा तक पहुंच गए तो फिर हमारी तमाम कोशिशों के बावजूद इसे पिघलने से नहीं रोका जा सकता।” अगर अब भी मानव जाति नहीं सुधरी तो परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे। कम से कम अब तो समझों पेड़ लगाना और उसकी देखभाल करना जरूरी हैं, नहीं तो इस पृथ्वी पर कोई भी जीव नहीं बचेगा। आओ हम सब मिलकर एक संकल्प ले की प्रत्येक वर्ष एक पेड़ जरूर लगाएंगे, और उसका अच्छे से देखभाल भी करेंगे।

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यह कविता (पृथ्वी को बुखार।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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लड़ाने वाले तो लड़ा गए।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ लड़ाने वाले तो लड़ा गए। ♦

नफरतों की आंधियां थम जाने दो,
आ जाने दो प्रेम की शीतल बयार।
बदल जाने दो अब आवोहवा को,
छट जाने दो युद्धिय मेघों को यार।

रक्तिम रंग से रंजित धरा को,
कर लेने दो जीवन का श्रृंगार।
मौत का खेल बहुतेरा हो लिया,
उग जाने दो अब पावन प्यार।

लड़ाने वाले तो लड़ा गए तुम्हें,
मकसद ही जिनका लड़ाना था।
तबाही तो तुम्हारी करा गए भाई,
उन्हे तो उल्लू सीधा करवाना था।

दो घरों के झगड़े में ओ बंधू!
भला पड़ता ही अब कौन है?
खाली बातें ही करते हैं लोग,
पड़ोसी भी रहते बस मौन है।

हां! निज घर की अस्मत के खातिर,
लड़ना भिड़ना भी तेरी मजबूरी था।
पर आग लगाने वाले मद मित्रों की,
कुटिल चालों को भांपना जरूरी था।

अपने ही घर को फूंक के पगले,
आग सेंकना तो निपट नादानी है।
अपनी ऐंठ में निर्दोष जनता को,
बेवजह मरवाना भी बेईमानी है।

कोसेगी कई पीढ़ियां तुमको, क्या;
निर्मित ढांचा ढहाना समझदारी थी ?
पुरखों की गढ़ी हर नींव उखाड़ डाली,
जनता भी बेवजह ही क्यों मारी थी?

सनक ही सनक में दो दिग्गजों ने,
क्यों लड़ी खूंखार खूनी लड़ाई थी?
जमाना तो पूछना छोड़ेगा नहीं जी,
आखिर ऐसी भी क्या नौबत आई थी?

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — रूस – यूक्रेन युद्ध का अब छठवां सप्ताह चल रहा है, लड़ाने वाले तो लड़ा गए, इस युद्ध से दोनों देशों को अधिक नुक़सान झेलना पड़ रहा है, जहां एक तरफ रूस हमले को रोक नही रहा है, वही दूसरी तरफ यूक्रेन हार मानने को तैयार नहीं हो रहा। इस युद्ध से सबसे ज्यादा तकलीफ वहां की आम जनता को हो रही हैं। कोसेगी कई पीढ़ियां तुमको, क्या; निर्मित ढांचा ढहाना समझदारी थी ? पुरखों की गढ़ी हर नींव उखाड़ डाली, जनता भी बेवजह ही क्यों मारी थी?

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यह कविता (लड़ाने वाले तो लड़ा गए।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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नवरात्रि की पावन बेला आई।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नवरात्रि की पावन बेला आई। ♦

बधाई हो! बधाई हो!

मंगल गीत गाओं, शुभ मंगल घड़ी आई।
सुख बरसाने नवरात्रि की पावन बेला आई॥

भक्तों, चैत्र माह में प्रतिपदा से सब माँ की पावन जोत जगा लो।
जगजननी माँ से फिर तुम मुहमांगी मुरादें पा लो॥

खूब तेरे नाम की मस्ती में हम झूमेंगे।
तेरी पावन चरण-रज को ही हम चूमेंगे॥

माँ, तेरा ये पावन पर्व सबकी झोली भर जायेगा।
इस जग के सारे संकटों को हर जायेगा॥

माँ, बस तेरे ही नाम की प्रेम – धुन हमें लगी रहें।
दिन – रात भक्तों के दिल में ये नवरात्रि सजी रहें॥

माँ तेरे सच्चे दरबार से सबकों हार्दिक बधाई।
तेरे आगमन से ही नववर्ष की बेला आई॥

कुमकुम के पगों से, हर भक्त के घर तू आएगी।
आओ माँ, तेरे आगमन का हर शह मंगल – गीत गायेगी॥

मंगल – गान से अम्बे माँ तेरा आगमन होगा।
तेरे वरहस्त से जीवन का सुंदर चमन होगा॥

माँ, तेरे जैसा अनुपम, अद्वितीय सौंदर्य और कहाँ।
तेरे रूप की ज्योति से होता है रोशन ये जहां॥

हे अष्ट भुजा दात्री, तेरी अनेक कलाएं इन हस्तों में रची।
तेरे हार श्रृंगार से ही ये दुनिया आज अनुपम सजी॥

तेरी लाल चुनरी लाल चोला सदैव ही करता कमाल दाती।
तू इस रूप में जब देने पर आती, दे जाती बेमिसाल तू दाती॥

सिंहासन पर विराजमान जो आज अनोखा रूप तेरा।
हे विश्व विनोदिनी माँ! सारा ब्रह्माण्ड झुकें तुझकों कोटिशः वन्दन मेरा॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — नवरात्र के प्रथम दिन छोटी देवकाली मंदिर में मां भगवती की आराधना और पूजन की जाती है। मां भगवती के आशीर्वाद से ही सभी मनोकामना पूर्ण होती है। पहले दिन छोटी देवकाली मंदिर में माता के शैलपुत्री स्वरूप का दर्शन किया जाता है। माता के 9 रूपों को देवताओं ने अपने-अपने शस्त्र देकर महिषासुर को वध करने का निवेदन किया। शस्त्र धारण करके माता शक्ति संपन्न हो गई। कहते हैं कि नौ रूपों को प्रकट करने का क्रम चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होकर नवमी तक चला। इसीलिए इन 9 दिनों को चैत्र नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। हे विश्व विनोदिनी माँ! सारा ब्रह्माण्ड झुकें तुझकों कोटिशः वन्दन मेरा।

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यह कविता (नवरात्रि की पावन बेला आई।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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हिन्दू नववर्ष – आयो रे नवरात्रि।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हिन्दू नववर्ष – आयो रे नवरात्रि। ♦

शुभ मंगल गीत गाओ गुञ्जार करो भू-गगन को,
मैया की अगुवानी को आतुर नैना।
पर्ण-पलास पुष्पो से उसको सजाओ,
नववर्ष के नव दिन रहेगी मैया।
झूम-झूमकर गीत गाओ,
शुभ दिन आया है नवरात्रि का,
मंगलचारी गीत गाओ झूमों नाचो गाओ॥

शुभ आगमन है माँ का शुभ आगमन है,
मंजरित है आम की बगिया।
बाग – बहार रंगीली कलियों की निखार बनके,
रंगो – अबीरों से सज के सिंह पे सवार होके,
आई माता रानी, आजा मेरी मैया आजा।
शुभ आगमन है, माँ तेरा शुभ आगमन है,
मंगलचारी गीत गाओ झूमों नाचो गाओ॥

नवरात्री में आई नवदुर्गा नव रूप धरे,
हर रूप की महिमा अपनी।
जो शब्दों से बखान न हो सके,
कलश पर विराजे लक्ष्मी मैया।
संग-संग विराजे गणपति राजे,
पहली शैलपुत्री हिमराज सुता कहलाती।
दूसरी ब्रह्मचारिणी दुखियों की दुखहारिणी हो तुम॥

तीसरा रूप मैया का चंद्रघंटा कहलाये,
खल – अधम प्रकम्पित होते सारे।
चौथा रूप मैया का कुष्मांडा कहलाये,
पुलकित करती हर्ष – उल्लास जगाये।
पांचवी शक्ति स्कन्दन माता कहलाये,
शिव पुत्र कार्तिकेय के संग पूजी जाये।
छठवीं शक्ति मैया कात्यायनी हो तुम॥

ऋषिराज कात्यान की सुता बन आई,
सातंवा रुप है तेरा मैया कालरात्रि का।
दुर्जनों की विनाशक बन आई,
आठवां रूप महागौरी कहलाये।
अमोघ फलदायिनी तमाम कल्मष धोती मैया,
नौवीं मैया सिद्धिदात्री कहलाती।
सुख समृद्धि और मोक्ष की माता बन आई,
आई नवरात्रि हिन्दू नववर्ष ले आई।
मंगलचारी गीत गाओ झूमों नाचो गाओ॥

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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  • “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल`“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — Hindu Calendar Vikram Samvat 2079, 2 अप्रैल, शनिवार से चैत्र नवरात्रि शुरू होने जा रहे हैं और इसी के साथ नया हिंदू वर्ष नवसंवत्सर 2079 भी आरंभ हो जाएगा। हर वर्ष चैत्र प्रतिपदा शुक्ल पक्ष को हिंदू नववर्ष प्रारंभ होता है। चैत्र का महीना हिंदू नववर्ष का पहला महीना होता है। इसका प्रारंभ सम्राट विक्रमादित्य ने किया था, जो चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरु होता है। इस बार 02 अप्रैल को हिंदू नववर्ष 2079 या विक्रम संवत 2079 का प्रारंभ होगा। हिंदू नववर्ष को विक्रम संवत, नव संवत्सर, गुड़ी पड़वा, उगाड़ी आदि नामों से भी जाना जाता है। विक्रम संवत के प्रथम दिन से ही बसंत नवरात्रि का प्रारंभ होता है, जो चैत्र नवरात्रि के नाम से लो​कप्रिय है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरुपों मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कूष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना करते हैं और मां दुर्गा का आह्वान करते हैं। नवरात्रि के नौ दिनों का व्रत रखा जाता है। पारण के साथ इसका समापन करते हैं। हालांकि जो लोग पूरे 9 दिन व्रत नहीं रहते हैं, वे प्रथम दिन और दुर्गाष्टमी के दिन व्रत रखते हैं।

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यह कविता (हिन्दू नववर्ष – आयो रे नवरात्रि।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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नववर्ष मंगलमय हो।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नववर्ष मंगलमय हो। ♦

आप सभी को नव वर्ष विक्रम संवत 2079 की हार्दिक शुभकामनाएं।

हे! मेरे भगवन,
रिद्धि देना, सिद्धि देना।
हृदय में ज्ञान देना,
चित्त में ध्यान देना।
अभय वरदान देना,
हे! मेरे भगवन…..।

चारों ओर साधना,
अराधना, तप देना।
सच्चाई का पथ देना,
हे! मेरे भगवन…..।

वंश में वृद्धि देना,
हृदय में ज्ञान देना।
दुःख दूर करना,
सुख भरपूर देना,
हे! मेरे भगवन…..।

सज्जन को हित देना,
दुश्मन को प्रीत देना।
जग में जीत देना,
माया, निरोगी काया देना,
हे! मेरे भगवन…..।

मान- सम्मान देना,
शांति का वरदान देना।
भक्ति, शक्ति देना,
हे! मेरे भगवन…..।

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

—————

  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए समझाने की कोशिश की हैं — Hindu Calendar Vikram Samvat 2079, 2 अप्रैल, शनिवार से चैत्र नवरात्रि शुरू होने जा रहे हैं और इसी के साथ नया हिंदू वर्ष नवसंवत्सर 2079 भी आरंभ हो जाएगा। हर वर्ष चैत्र प्रतिपदा शुक्ल पक्ष को हिंदू नववर्ष प्रारंभ होता है। चैत्र का महीना हिंदू नववर्ष का पहला महीना होता है। इसका प्रारंभ सम्राट विक्रमादित्य ने किया था, जो चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरु होता है। इस बार 02 अप्रैल को हिंदू नववर्ष 2079 या विक्रम संवत 2079 का प्रारंभ होगा। हिंदू नववर्ष को विक्रम संवत, नव संवत्सर, गुड़ी पड़वा, उगाड़ी आदि नामों से भी जाना जाता है। विक्रम संवत के प्रथम दिन से ही बसंत नवरात्रि का प्रारंभ होता है, जो चैत्र नवरात्रि के नाम से लो​कप्रिय है।

—————

यह कविता (नववर्ष मंगलमय हो।) “विजयलक्ष्मी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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सबको बाँटो नववर्ष की बधाई।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ सबको बाँटो नववर्ष की बधाई। ♦

आई जो नूतन वर्ष की ये पावन बेला।
समय बना जाए बस सबका अलबेला।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

आज कितनी शुभघड़ी है ये आई।
सब ओर फैलेगी अब तो बस रोशनाई।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

सतयुग में इसी दिन से सृष्टि का हुआ आगाज।
पावन ग्रंथ खोलते है इसका राज।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

हिन्दू नववर्ष चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा को आये।
सनातन धर्म सदैव अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाये।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

वैष्णों के आगमन पर नवरात्रि की धूम मचेगी।
धरा भी माँ से मिलने दुल्हन सी सजेगी।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

सब नए बही-खातों का आज होगा शुभारम्भ।
विवाह, समारोह के दिनों का भी होगा आरंभ।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

प्रकृति भी कहती रंगीन फूलों से भरकर हाथ अपने।
हे सर्वस्व तू पूरे करना इंसानों के सुंदर सपने।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

हे सर्वशक्तिमान, तू ही सब जगह विध्यमान।
इस धरा को दे जाना खुशियों का वरदान।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

अपनी भारतीय संस्कृति में लीन होकर गुनगुनाये।
नवपीढ़ी को इस नूतन वर्ष का गुण बताये।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

हे मेरे आराध्य!
सुन लेना अबकी बार भी ये करुण पुकार।
बरसा देना बस अपनी ममता का प्यार।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

नववर्ष में बरसे तेरी कृपा का इतना नूर।
अन्न, धन, जल के भंडार करना भरपूर।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

घर मे पाँच घी के दिये जलाकर तेरा स्वागत करेगें हम।
नववर्ष तू खुशियाँ बरसाते आना छम-छम।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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नव संवत्सर आया री।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नव संवत्सर आया री। ♦

नव संवत्सर आया ओ आली! नव संवत्सर है आया री!
बसन्त मनभावन, चित लुभावन, आनंदोत्सव छाया री॥

हरे -भरे हर खेत – खलियान, वन – उपवन में फुलवारी है।
नील शुभ्र नभ सूरज जी उजियाली, मनमोहक मनुहारी है॥

यह भारतवर्ष के नव वर्ष आगमनोत्सव की हरियाली है।
भिनभिनाते भौंवरे, मधुमक्खियां, तितलियां भी मतवाली हैं॥

नव अंकुरित कोमल पात सब, तरुवर के स्वागत करते हैं।
मुक्त हुए सर्दी के कुंठित रक्तकण, बूढ़ों में स्फूर्ति भरते हैं॥

पश्चिम का नहीं भारत का संवत्सर, खुशियां ले के आता है।
देश को ही नहीं पूरी दुनियां को, नव वर्ष का अर्थ बताता है॥

खिलखिलाते बाल – वृद्धों के चेहरे, पर्यावरण भी हर्षाता है।
भारतवर्ष का यह वर्षोत्सव, सच में खुशहाली को लाता है॥

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — Hindu Calendar Vikram Samvat 2079, 2 अप्रैल, शनिवार से चैत्र नवरात्रि शुरू होने जा रहे हैं और इसी के साथ नया हिंदू वर्ष नवसंवत्सर 2079 भी आरंभ हो जाएगा। हर वर्ष चैत्र प्रतिपदा शुक्ल पक्ष को हिंदू नववर्ष प्रारंभ होता है। चैत्र का महीना हिंदू नववर्ष का पहला महीना होता है। इसका प्रारंभ सम्राट विक्रमादित्य ने किया था, जो चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरु होता है। इस बार 02 अप्रैल को हिंदू नववर्ष 2079 या विक्रम संवत 2079 का प्रारंभ होगा। हिंदू नववर्ष को विक्रम संवत, नव संवत्सर, गुड़ी पड़वा, उगाड़ी आदि नामों से भी जाना जाता है। विक्रम संवत के प्रथम दिन से ही बसंत नवरात्रि का प्रारंभ होता है, जो चैत्र नवरात्रि के नाम से लो​कप्रिय है।

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यह कविता (नव संवत्सर आया री।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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  • सुबह का संदेश।

KMSRAJ51: Motivational Speaker

https://www.youtube.com/watch?v=0XYeLGPGmII

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निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।

बात वक्त की।

तिरंगा का करें सम्मान।

एक सफर।

बाल विवाह – एक अभिशाप।

क्या बदलाव लायेगा नया साल।

है तो नववर्ष।

मोह।

अपना धर्म सबसे उत्तम।

ठंडी व्यार।

रिश्तों को निभाना सीखो।

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