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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिंदी कविता

बाबा साहेब को नमन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बाबा साहेब को नमन। ♦

बाबा साहेब को नमन जो सविंधान निर्माता कहलाये।
अप्रैल 14 को भारत रत्न भीमराव की अम्बेडकर जयंती मनाये॥

एक ऐसे समाज में कोहिनूर हीरा चमका।
जिसके तेज से फिर पूरा देश ही दमका॥

शिक्षा की एक सच्ची राह दिखाई जिसने।
सबमें मानव-धर्म की अलख जगाई उसने॥

दिव्य आकाश का जो चमकता सितारा बना।
बस ऐसा ही डॉ भीमराव शिक्षा का प्यारा बना॥

जिन्होंने अपने ह्रदय में केवल एक ही बात ठानी।
शिक्षा को सर्वोपरि मान सुप्त जन-चेतना जगानी॥

उम्रभर किताबों को ही रखा सच्चा दोस्त बनाये।
दिखा दिया दुनिया को शिक्षा में ही सर्वगुण समाये॥

शिक्षा-ज्ञान ही मानवता के सब गुण भर जाए।
भेदभाव के अवगुण का तिमिर हर ले जाये॥

धन्य थे इनके मात-पिता जो शिक्षा को माने वरदान।
सिखलाया जिन्होंने पढ़-लिख कर बनो देश की शान॥

शिक्षित बन संगठित रहकर करो संघर्ष यही उनका प्रिय ये नारा।
शिक्षा से ही देश-विदेश में पूजनीय भीमराव प्यारा॥

शिक्षा के इस आलौकिक मन्त्र से अपने दिलों को जगमगाये।
कोटिशः वन्दन से श्रद्धा-पुष्प अर्पित कर आज ये दिवस मनाये॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — भीमराव रामजी आम्बेडकर (14 अप्रैल, 1891 – 6 दिसंबर, 1956), डॉ॰ बाबासाहब आम्बेडकर नाम से लोकप्रिय, भारतीय बहुज्ञ, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, और समाजसुधारक थे। उन्होंने दलित बौद्ध आन्दोलन को प्रेरित किया और अछूतों (दलितों) से सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया था। श्रमिकों, किसानों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन भी किया था। वे स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि एवं न्याय मन्त्री, भारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माताओं में से एक थे। बाबासाहब आम्बेडकर जी ने शिक्षा को ही सदैव सर्वोपरि माना और शिक्षा के दम पर सब कुछ करके दिखाया।

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यह कविता (बाबा साहेब को नमन।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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विश्वास।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ विश्वास। ♦

अगर हो विश्वास तेरे मन में,
पत्थर भी भगवान नजर आएगा।
विश्वास की डोर अगर हो मजबूत,
विष का प्याला भी अमृत बन जाएगा।

विश्वास का बीज जो बोया तूने,
ये कमाल का फल दे जाएगा।
जीवन सफल होकर फिर तेरा,
जीवन में सिर्फ प्यार नजर आएगा।

बन कर बिगड़ जाते हैं कुछ रिश्ते,
जहां विश्वास कायम नहीं रहेगा।
कितना भी तुम यहां जोर लगा लो,
बिन विश्वास प्रेम कभी नहीं मिलेगा।

विश्वास ही सत्य का मूल रूप बन,
तुझे वास्तविक सत्य दर्शन कराएगा।
बिछाने दो राहों पर अनगिनत कांटे,
विश्वास तेरा उसे फिर फुल बना जाएगा।

मुसीबतों का पहाड़ टूटने तो जीवन में,
जब विश्वास अगर तेरे मन मंदिर में रहेगा।
हर मुसीबत तेरी फिर रूह मोड़कर,
जीवन में खुशियों का एक मोड़ लाएगा।

♦ अजय नायर जी – कोच्चि, केरल ♦

—————

• Conclusion •

  • “अजय नायर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — विश्वास अर्थात: वह धारणा जो मन में किसी भी व्यक्ति के प्रति उसके लिए सद्भाव, हितैषिता, सत्यता, दृढ़ता आदि अथवा किसी सिद्धांत आदि की सत्यता अथवा उत्तमता का ज्ञान होने पर होती है। किसी के गुणों आदि का निश्चय होने पर उसके प्रति उत्पन्न होनेवाला मन में भाव। विश्वास के मुख्य रूप ये हैं – आत्म-विश्वास या आत्म-प्रभावकारिता, गलत आत्मविश्वास, व्यवहारिक विश्वास, भावनात्मक विश्वास, आध्यात्मिक आत्मविश्वास। आपका विश्वास ही आपका भविष्य तय करता हैं।

—————

यह कविता (विश्वास।) “अजय नायर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम अजय नायर है। मैं एक प्राइवेट मल्टीनेशनल कंपनी में पब्लिक रिलेशन ऑफीसर के पद पर चेन्नई में कार्यरत हूं। मुझे लिखने का शौक बचपन से रहा। १५ (15) वर्ष की आयु में हमने पहली कविता “दोस्त” इस नाम से लिखी जो पहली बार अखबार में प्रकाशित हुई। तब से आज तक करीबन ३५०० (3500) से अधिक कविता / गजल/ बाल कविताएं/ शेरो शायरी लिखी है। जो की भारत के सभी अखबारों में अब तक प्रकाशित हुई है। साहित्य संगम संस्थान के सभी मंचो से हमें श्रेष्ठ रचनाकार, श्रेष्ठ टिप्पणी कार, श्रेष्ठ विषय प्रवर्तक आदि सम्मानों से सम्मानित किया गया है। काव्य गौरव सम्मान, कलम वीर सम्मान, गौरव सम्मान, मदर टेरेसा सम्मान, बेस्ट ऑथर सम्मान, आदि सम्मान अलग अलग साहित्य जगत से प्राप्त हुआ है। हमारी पहली शेरो शायरी की पुस्तक का प्रकाशन संकल्प पब्लिकेशन द्वारा २०२१ (2021) में हुआ है। जो की सरल सुगम हिंदी भाषा में लिखा हुआ है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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माँ का श्रृंगार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ माँ का श्रृंगार। ♦

नव रूपों में सजती है माँ,
करके सोलह श्रृंगार।

आँखों मे है अंजन,
सोहे माथे पर बिंदी।
ललाट पर है सिंदूर,
बालों में मोगरे का फूल।

जिसे देख हुआ मन प्रफुल्लित,
गले में सोने का हार।
लाली साजे उनके अधर पर,
कान में सोहे कर्ण फ़ूल।

लाल लाल चूड़ी हाथों में,
हाथ की उंगली में मुंदरी साजे।
मेंहदी लगे दोनों हाथों में,
जिसे देखकर मन होय विभोर।

कमरबंद है उनकी कमर में,
महावर लगे पैरों में बिछिया पायल।
लाल चुनरी ओढे माता रानी,
रूप ही निखरा जाए।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — नव रूपों में सजती है माँ, करके सोलह श्रृंगार। सम्पूर्ण दिव्य रूप माँ का न्यारा। सर्व शक्ति संपन्न माता रानी सदैव ही अपने भक्तों को सुख समृद्धि देती हैं। माँ का स्वरूप निराला दिव्य अलौकिक। माता के 9 रूपों को देवताओं ने अपने-अपने शस्त्र देकर महिषासुर को वध करने का निवेदन किया। शस्त्र धारण करके माता शक्ति संपन्न हो गई। कहते हैं कि नौ रूपों को प्रकट करने का क्रम चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होकर नवमी तक चला। इसीलिए इन 9 दिनों को चैत्र नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। हे विश्व विनोदिनी माँ! सारा ब्रह्माण्ड झुकें तुझकों कोटिशः वन्दन मेरा।

—————

यह कविता (माँ का श्रृंगार।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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वरदान – प्राणवान वसुंधरा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ वरदान – प्राणवान वसुंधरा। ♦

केंद्रीय तत्व अस्तित्व विधान का,
सकार जीवन अग्नि यज्ञ समान।

हुताशन अजस्त्र प्रेरणा है,
शिक्षा समृद्धि प्रतिभा और विज्ञान।

आत्मसात करती दिव्य प्रबल प्रभाव संधान,
कौटुंबिकता सहृदयता शब्द और उदान।

नभमंडल का करता शुद्ध सद्गुण दैवी समान,
अनुगमन करता इहलोक का ज्ञान।

सामूहिक उत्कर्ष की सशक्त साधन पहचान,
यज्ञाग्नि की आहुति से सद्भावों का होता आविर्भाव।

अग्नि की दीपशिखा पर होता विषम दबाव,
प्रसस्त ऊर्ध्व उद्वेग से उत्ताल अग्निशिखा समान।

नाश कर भय प्रलोभन विषम का ताप,
संकल्प जिजीविषा मनोबल का करे उत्थान।

पांचजन्य उष्णता ऊर्जा और प्रकाश,
सदृश पावक पवित्र दाहक समान।

वायु रूप बनकर जड़-चेतन को करें प्रकाशवान,
गुप्त शत्रु का भेदने, करे धूमल मरुत समान।

श्लोकों की ध्वनि के गुंजन का ही विधान,
स्वाहा प्रचंड प्रभाव है स्वधा उसका संहार।

यज्ञाग्नि से लोक – परलोक सुधरे,
प्राणवान वसुंधरा के लिये है वरदान।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल`“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — हम सभी जानते है की भगवान ने अपने अंश से पंचतत्व यानि पृथ्वी, आकाश, वायु, अग्नि और जल का समावेश कर मानव देह की रचना की और उसे सम्पूर्ण योग्यताएं व शक्तियां भी देकर इस संसार में स्वच्छतापूर्वक जीवन बिताने के लिए भेजा है। पृथ्वी तत्त्व यानि जड़ तत्त्व, यह तत्व अनंत सहनशीलता को दर्शाता है व इस तत्त्व से मनुष्य अन्न, धन, धान्य से सम्पूर्ण होता है। इसमें विकार जब उत्पन्न होता है तब इंसान स्वार्थी हो जाता हैं। जल तत्व यानि शीतलता प्रदान करने वाला तत्व। इसमें मिलावट होने पर इसकी सौम्यता कम हो जाती है। अग्नि तत्व, विचार शक्ति में निर्णय करने में सहायक होता है विचारों के भेद अंतर को परखने वाली शक्ति को सरल सुचारु रूप प्रदान करता है। जब इसमें विकार आता है तब इंसान की सोचने समझने की शक्ति का ह्रास होने लगता है, और इंसान गुस्से वाला होकर अपना ही सर्वनाश करता है। वायु तत्व, मानसिक ऊर्जा तथा स्मृति शक्ति की क्षमता को पोषण प्रदान करता है। अगर इसमें विकार आ जाए तो इंसान की स्मरण शक्ति कम होने लगती है। आकाश तत्व, शरीर में आवश्यकतानुसार संतुलन को बनाए रखने का कार्य करता है। जब इसमें विकार आता है तब इंसान शारीरिक संतुलन खोने लगता है। जप, कीर्तन, भजन, यज्ञ-हवन, ध्यान साधना से मनुष्य का इस लोक के साथ-साथ परलोक भी सुधर जाता हैं।

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यह कविता (वरदान – प्राणवान वसुंधरा।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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विकास मार्ग पर चलें!

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ विकास मार्ग पर चलें! ♦

उसने आगे आकर हमें सुनाया,
उत्तर देने के लिए मंगल आया।
हम शांति प्रदर्शक सबको भाया,
सद्भाव की हमने अलख जगाया।

वह कहता है पूराने संबंध छोड़ो,
हम हैं हमसे ही नया नाता जोड़ो।
भारत सदा बैलेंस करके चलता है,
शांतिदूत बन सबकी रक्षा करता।

रक्षा हजारों पर अपनी निर्भरता,
खत्म करने की वह हमसे कहा।
यह पता वह कितना साथ देगा,
वह तो अपनी देखी देखा करता।

तेल और हथियार देने को बोला,
दुनिया पर भरोसा करने से रोका?
खुद उकसा वे पर विश्वास करता,
अपने आप विचार किया करता।

एक अपने मंच से सचिव ने कहा,
ऊर्जा व वस्तुएं हमारे हित ने नहीं।
अपनी आवश्यकता है नहीं छोड़ा,
हमने तो सबसे अच्छा नाता जोड़ा।

मित्र देश के संबंध बिगाड़ने की कहा,
पुराने समझौते को टालने को कहा।
खुद ही महान नई मित्रता बनाता रहा,
आगे आकर चौध राणा चलाता रहा।

भारत संयुक्त राष्ट्र संघ में भी अपना,
निष्पक्ष बयान दुनिया को दे डाला।
मानव के लिए जांच की कह डाला,
अमन चैन की राह सुझाव दे डाला।

उसके गले नहीं उतरती बात हमारी,
भला सबका, यही हमने बता डाला।
दोनों पक्षों को शांति संदेश सुनाया,
संयम बरतने के लिए हमने बताया।

सुंदर सुगम मार्ग प्रशस्त किया जाता,
उपदेशों की तरफ ध्यान दिया जाता।
दुनिया में प्रदूषण पर रोक लग जाता,
विकास मार्ग का रास्ता खुल जाता।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — दोस्त वही अच्छा जो अच्छे समय के साथ – साथ बुरे समय में भी साथ ना छोड़े। ऐसी दोस्ती का क्या करना? जो मात्र अपना ही फायदा देखे सदैव? ऐसे दोस्त से अच्छा है की, दोस्ती ही ना हो, हमे तो वही दोस्त चाहिए जो सदैव हमारा साथ दे ऐसे दोस्त के साथ ही कंधे से कन्धा मिलाकर चले। ऐसे दोस्त से दुरी ही भली है जो जरूरत पर साथ ही ना दे, उम्मीद पर कभी खरा ही ना उतरे, जो सदैव ही केवल अपने बारे में सोचे। हमारे लिए ऐसा ही दोस्त सही है जो सुख – दुःख में सदैव ही हमारे साथ खड़ा रहे।

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यह कविता (विकास मार्ग पर चलें!) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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बेचैन उर – व्यथा वसुंधरा की।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बेचैन उर – व्यथा वसुंधरा की। ♦

लिख डाला वृत्तांत धरा की, पर न आस न छूटी,
अंधियारी मिटाने को, तेरे द्वार आकर खड़ी।

है दीप्त मन भी, उतावला फिर मन भी,
कैसे पूर्ण करें हम, कोई राज नहीं है।

क्षिति की गोद में, बिलख रहें सब,
दूर खड़ा नभ भी, आँसू बहा रहा तब।

तृष्णा से तड़पता दिल, विह्वल सा दिख रहा है,
छटपटाहट जिगर की, सबको दिखला रहा है।

असिताङ्ग खड़ी है, अँधेरों ने आज घेरा है,
तिमिर मिटाने को, रोहिताश्व से लड़ा है।

प्रदीप अंतस् का, जलाने चला हूं,
उल्लास अपनी सब में, छितराने चला हूं।

कथा-कहानी सुनाने को, बेचैन बहुत हूं मगर,
हर घड़ी आतुर हो, कटिबद्ध खड़ा हूं।

जब साथ सकारे मिल जायें, गगन को झुका लूँगा,
कोई साथ दे दे तो मुझे, जलधि को सुखा लूँगा।

लगी दाढ़ा उर में मेरे, उसे और धधका लूंगा,
इस विश्व का गरल, कंठ में अपने समां लूंगा।

सांध्य – सवेरे मैं, वीणा के तान लगा कर,
आलाप अगर अधूरा होगा, तो राग विरह के गा लूंगा।

ऋतु की अगुवाई में, धरती का श्रृगांर कर जाऊं,
व्यथा-कथा वसुधा की, तालिस पत्र पर लिख जाऊं।

ऋषियों की तरह अडिग हो, चंद श्लोक लिख जाऊं,
व्याकुल वसुंधरा की व्यथा, कागज पर उकेर जाऊं।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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  • “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल`“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — ग्लोबल वार्मिंग की वजह से अंटार्कटिक में बर्फ बहुत तेजी से पिघल रही है और वहां फिर इतनी बर्फ नहीं जम पाएगी। इस प्रक्रिया की गति को धीमा करने के लिए वातावरण से कार्बन निकालने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। ऑस्ट्रेलिया की एक जलवायु वैज्ञानिक और न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय में रिसर्च फेलो जोई थॉमस ने कहा, “हम पश्चिमी अंटार्कटिक में जो बर्फ की चादर देख रहे हैं कि उसके पिघलने की शुरुआत हो चुकी है। एक बार हम एक विशेष सीमा रेखा तक पहुंच गए तो फिर हमारी तमाम कोशिशों के बावजूद इसे पिघलने से नहीं रोका जा सकता।” अगर अब भी मानव जाति नहीं सुधरी तो परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे। कम से कम अब तो समझों पेड़ लगाना और उसकी देखभाल करना जरूरी हैं, नहीं तो इस पृथ्वी पर कोई भी जीव नहीं बचेगा। आओ हम सब मिलकर एक संकल्प ले की प्रत्येक वर्ष एक पेड़ जरूर लगाएंगे, और उसका अच्छे से देखभाल भी करेंगे।

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यह कविता (बेचैन उर – व्यथा वसुंधरा की।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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बेखबर जिंदगी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बेखबर जिंदगी। ♦

जिंदगी के रंग भी बदलते है,
कभी हम बेखबर जिंदगी से,
अनजान सफर की ओर चल देते है।
जिंदगी में कभी ख़ुशी कभी गम।

जीवन की राह में कभी सहज होते,
हर पल खुशी हो यह जरूरी नहीं।
दुख भी जिंदगी का रूप ही है,
जिंदगी में जो चाहा वो मिले,
ये भी कोई जरूरी नहीं है।

जिंदगी भी एक किताब होती,
जिनके पन्ने हम पढ़ पाते।
कब क्या कैसे होगा घटित,
सबको खबर होती बेखबर जिंदगी की।

खाली हाथ आये जीवन में,
खाली ही हाथ जाना भी है।
फिर क्यो हम भागदौड़ में लग रहे,
कुछ अच्छे कर्म करे जीवन में।

जो हमेशा हमें याद करें,
मोह में बांधकर जिंदगी को।
दुख दर्द को इस पीड़ा को सहते है,
अन्त समय मे जिंदगी बेखबर होती है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जो कर्म इंसान करता है वहीं कर्म उसके नाम को इस संसार में जीवित रखते है। इस संसार में सभी खाली हाथ ही आये थे और खाली हाथ ही जाना भी हैं, तो जब तक जीवन हैं अच्छे कार्य ही करें। सदैव ही आपकी यही कोशिश हो की आपकी वजह से कभी भी किसी को किसी भी तरह की कोई तक़लीफ़ न हो। जहां तक हो सके लोगों की मदद करते चले और अच्छा सोचे व अच्छा कार्य करें। एक बात मेरी याद रखें — जिंदगी में किसी से भी स्नेह रखें मोह नहीं, क्योकि जहां मोह होता है वहां बंधन होता है और वही बंधन आपको दर्द देता है। श्रीमद्भागवत गीता के अठारहवें अध्याय में है की “नष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा” अर्थात: जब तक इंसान मोह को नहीं त्यागता है तब तक उसे सुख और सद्गति नहीं मिलती हैं।

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यह कविता (बेखबर जिंदगी।) “पूनम गुप्ता जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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पृथ्वी को बुखार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ पृथ्वी को बुखार। ♦

पृथ्वी को बुखार आ रहा है,
समुद्र में ज्वार भाटा खा रहा।
जल स्तर नौ इंच बढ़ गया है,
तेज धूप आसमान तप रहा।

चंदा मामा की शीतल छीना,
कल कारखाने से धुआं उठा।
जीव जंतु पर पड़ रहा प्रभाव,
ग्लोबल वार्मिंग के ही आसार।

दुनिया का मौसम बिगड़ रहा है,
अंटार्कटिका में बर्फ पिघल रहा।
पूर्व- उत्तर भारत में बढा तापमान,
पृथ्वी को कर रहा है हलकान।

युद्ध थोपने का हो रहा एलान,
महाबली की कोशिश फरमान।
दुनियां का परमाणु पर विचार,
जीव जंतु का भी होगा संघार।

अर्थ लाभ पर केवल विचार,
संपन्न देशों का हो रहा प्रहार।
मानवता का हो रहा है संहार,
डग खोजते शरणार्थी लाचार।

क्रमश: ताप में वृद्धि हो रही,
हिम ग्लेशियर पिघल रहा है।
तापमान तेजी से चढ़ रहा है,
दुनिया आगे क्यों नहीं बढ़ा।

कारण! का पहचान करना होगा,
समस्या का निदान करना होगा।
बन कटाई से रोक लगाना होगा,
पर्वत का संरक्षण करना होगा।

हानिकारक गैस पर करें नियंत्रण,
पौधों का भी रोपड़ करना होगा।
मिलकर संयुक्त प्रयास करने होंगे,
ग्लोबल वार्मिंग से हम तभी बचेंगे।

प्रदूषण फैलाने वाले साधन पर,
करना पड़ेगा पूर्ण रूप से कार्य।
तभी सफल होगा भरा प्रयास,
ग्लोबल वार्मिंग बहुत खतरनाक।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — ग्लोबल वार्मिंग की वजह से अंटार्कटिक में बर्फ बहुत तेजी से पिघल रही है और वहां फिर इतनी बर्फ नहीं जम पाएगी। इस प्रक्रिया की गति को धीमा करने के लिए वातावरण से कार्बन निकालने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। ऑस्ट्रेलिया की एक जलवायु वैज्ञानिक और न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय में रिसर्च फेलो जोई थॉमस ने कहा, “हम पश्चिमी अंटार्कटिक में जो बर्फ की चादर देख रहे हैं कि उसके पिघलने की शुरुआत हो चुकी है। एक बार हम एक विशेष सीमा रेखा तक पहुंच गए तो फिर हमारी तमाम कोशिशों के बावजूद इसे पिघलने से नहीं रोका जा सकता।” अगर अब भी मानव जाति नहीं सुधरी तो परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे। कम से कम अब तो समझों पेड़ लगाना और उसकी देखभाल करना जरूरी हैं, नहीं तो इस पृथ्वी पर कोई भी जीव नहीं बचेगा। आओ हम सब मिलकर एक संकल्प ले की प्रत्येक वर्ष एक पेड़ जरूर लगाएंगे, और उसका अच्छे से देखभाल भी करेंगे।

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यह कविता (पृथ्वी को बुखार।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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लड़ाने वाले तो लड़ा गए।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ लड़ाने वाले तो लड़ा गए। ♦

नफरतों की आंधियां थम जाने दो,
आ जाने दो प्रेम की शीतल बयार।
बदल जाने दो अब आवोहवा को,
छट जाने दो युद्धिय मेघों को यार।

रक्तिम रंग से रंजित धरा को,
कर लेने दो जीवन का श्रृंगार।
मौत का खेल बहुतेरा हो लिया,
उग जाने दो अब पावन प्यार।

लड़ाने वाले तो लड़ा गए तुम्हें,
मकसद ही जिनका लड़ाना था।
तबाही तो तुम्हारी करा गए भाई,
उन्हे तो उल्लू सीधा करवाना था।

दो घरों के झगड़े में ओ बंधू!
भला पड़ता ही अब कौन है?
खाली बातें ही करते हैं लोग,
पड़ोसी भी रहते बस मौन है।

हां! निज घर की अस्मत के खातिर,
लड़ना भिड़ना भी तेरी मजबूरी था।
पर आग लगाने वाले मद मित्रों की,
कुटिल चालों को भांपना जरूरी था।

अपने ही घर को फूंक के पगले,
आग सेंकना तो निपट नादानी है।
अपनी ऐंठ में निर्दोष जनता को,
बेवजह मरवाना भी बेईमानी है।

कोसेगी कई पीढ़ियां तुमको, क्या;
निर्मित ढांचा ढहाना समझदारी थी ?
पुरखों की गढ़ी हर नींव उखाड़ डाली,
जनता भी बेवजह ही क्यों मारी थी?

सनक ही सनक में दो दिग्गजों ने,
क्यों लड़ी खूंखार खूनी लड़ाई थी?
जमाना तो पूछना छोड़ेगा नहीं जी,
आखिर ऐसी भी क्या नौबत आई थी?

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — रूस – यूक्रेन युद्ध का अब छठवां सप्ताह चल रहा है, लड़ाने वाले तो लड़ा गए, इस युद्ध से दोनों देशों को अधिक नुक़सान झेलना पड़ रहा है, जहां एक तरफ रूस हमले को रोक नही रहा है, वही दूसरी तरफ यूक्रेन हार मानने को तैयार नहीं हो रहा। इस युद्ध से सबसे ज्यादा तकलीफ वहां की आम जनता को हो रही हैं। कोसेगी कई पीढ़ियां तुमको, क्या; निर्मित ढांचा ढहाना समझदारी थी ? पुरखों की गढ़ी हर नींव उखाड़ डाली, जनता भी बेवजह ही क्यों मारी थी?

—————

यह कविता (लड़ाने वाले तो लड़ा गए।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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Filed Under: 2022-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता, हेमराज ठाकुर जी की कविताएं। Tagged With: hemraj thakur poems, kavi hemraj thakur poems, russia ukraine war, रूस यूक्रेन युद्ध, लड़ाने वाले तो लड़ा गए, हेमराज ठाकुर, हेमराज ठाकुर की कविताएं

नवरात्रि की पावन बेला आई।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नवरात्रि की पावन बेला आई। ♦

बधाई हो! बधाई हो!

मंगल गीत गाओं, शुभ मंगल घड़ी आई।
सुख बरसाने नवरात्रि की पावन बेला आई॥

भक्तों, चैत्र माह में प्रतिपदा से सब माँ की पावन जोत जगा लो।
जगजननी माँ से फिर तुम मुहमांगी मुरादें पा लो॥

खूब तेरे नाम की मस्ती में हम झूमेंगे।
तेरी पावन चरण-रज को ही हम चूमेंगे॥

माँ, तेरा ये पावन पर्व सबकी झोली भर जायेगा।
इस जग के सारे संकटों को हर जायेगा॥

माँ, बस तेरे ही नाम की प्रेम – धुन हमें लगी रहें।
दिन – रात भक्तों के दिल में ये नवरात्रि सजी रहें॥

माँ तेरे सच्चे दरबार से सबकों हार्दिक बधाई।
तेरे आगमन से ही नववर्ष की बेला आई॥

कुमकुम के पगों से, हर भक्त के घर तू आएगी।
आओ माँ, तेरे आगमन का हर शह मंगल – गीत गायेगी॥

मंगल – गान से अम्बे माँ तेरा आगमन होगा।
तेरे वरहस्त से जीवन का सुंदर चमन होगा॥

माँ, तेरे जैसा अनुपम, अद्वितीय सौंदर्य और कहाँ।
तेरे रूप की ज्योति से होता है रोशन ये जहां॥

हे अष्ट भुजा दात्री, तेरी अनेक कलाएं इन हस्तों में रची।
तेरे हार श्रृंगार से ही ये दुनिया आज अनुपम सजी॥

तेरी लाल चुनरी लाल चोला सदैव ही करता कमाल दाती।
तू इस रूप में जब देने पर आती, दे जाती बेमिसाल तू दाती॥

सिंहासन पर विराजमान जो आज अनोखा रूप तेरा।
हे विश्व विनोदिनी माँ! सारा ब्रह्माण्ड झुकें तुझकों कोटिशः वन्दन मेरा॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — नवरात्र के प्रथम दिन छोटी देवकाली मंदिर में मां भगवती की आराधना और पूजन की जाती है। मां भगवती के आशीर्वाद से ही सभी मनोकामना पूर्ण होती है। पहले दिन छोटी देवकाली मंदिर में माता के शैलपुत्री स्वरूप का दर्शन किया जाता है। माता के 9 रूपों को देवताओं ने अपने-अपने शस्त्र देकर महिषासुर को वध करने का निवेदन किया। शस्त्र धारण करके माता शक्ति संपन्न हो गई। कहते हैं कि नौ रूपों को प्रकट करने का क्रम चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होकर नवमी तक चला। इसीलिए इन 9 दिनों को चैत्र नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। हे विश्व विनोदिनी माँ! सारा ब्रह्माण्ड झुकें तुझकों कोटिशः वन्दन मेरा।

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यह कविता (नवरात्रि की पावन बेला आई।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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