Kmsraj51 की कलम से…..

♦ दर्द ए दिल। ♦

क्यूं पूछते हो मेरी खैरियत,
इस मतलबी जमाने में,
तेरी तारीफ़ सुना है हर जुबां से।
बड़े उस्ताद हो नश्तर चुभाने में,
कभी गूंजती थी किलकारी,
मेरे घर _आँगन में।
आपस की अदावत ने,
घर को सुनसान ओ श्मशान बना दिया।
कैसी फितरत हो गई पढ़े-लिखे इंसान की,
गुलजार गुलशन का गुल खिल न पाया,
नफ़रत की आड़ में पतझड़ बना दिया।
जो खेलते थे मेरी गोद में, मुंह बिना दांत के
मेरी आंखो में आंसू देकर रुलाते रहते हैं।
रिश्तों को मरते देख नहीं सकता,
आंसू पोंछ कर रिश्ता निभाते रहते हैं।
पैसे का गुरुर उन्हें अंधा बना दिया,
जिनके मुंह में खिलाते थे रोटी का टुकड़ा।
मेरी छोटी-छोटी बात को राई का पहाड़ बना दिया।
जो कभी दिल से करते एहतराम,
बिना सच्चाई जाने, लाल आंखें दिखा दिया।
करता हूं गुजारिश आपसे,
न परेशान कीजिए न हैरान कीजिए।
कुछ दिन जीने दो खुदा के वास्ते,
सुन लो दर्द ए दिल मेरी,
मुस्कुरा कर छोड़ दीजिए।
बड़े तास्सुफ की बात है,
उन्सीयत का नमोनिशान नहीं।
हवाख्वाह को लोग भूल गए,
दिल में उल्फत का अरमान नहीं।
तेरे लव पे रहे तबस्सुम,
मांगता रहा दुआ सुबह शाम।
इफलाह के बदले गर मिली इफ्तरा,
तेरी हर दुआ कबूल हो,
मुझे मंजूर हर अंजाम,
दिल से दुआ है मेरी,
तू सदा रहे आबाद।
तुझे कभी न “भोला” याद आए,
कितनी भी वक्त गुजरे,
मेरी फूरकत के बाद।
♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦
—————
- “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस संसार में जननी-जनक व जन्मभूमि के लिए जो सम्मान था वो आजकल के पीढ़ी में कही गुम सा हो गया है। पैसे का गुरुर उन्हें इस क़दर अंधा बना दिया की जिनके मुंह में खिलाते थे रोटी का टुकड़ा। मेरी छोटी-छोटी बात को राई का पहाड़ बना दिया आज। जो कभी दिल से करते एहतराम, बिना सच्चाई जाने, आज लाल आंखें दिखा दिया तुमने अपने जननी-जनक पर। जननी-जनक रिश्तों को मरते देख नहीं सकते, आंसू पोंछ कर रिश्ता निभाते रहते हैं। इस संसार में एक माता-पिता ही है जो सदैव ही अपने बच्चों को सुखी और प्रसन्न देखता चाहते है। इसलिए जननी-जनक व जन्मभूमि का सदैव ही दिल से सम्मान करे, वर्ना अंतिम समय में पछतावे के अलावा कुछ बचेगा नहीं आपके पास।
—————

यह कविता (दर्द ए दिल।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।
आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—
मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।
अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!
Please share your comments.
आप सभी का प्रिय दोस्त
©KMSRAJ51
———– © Best of Luck ® ———–
Note:-
यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari Etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)
____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____











मां-बाप से बेहतर आपकी खुशी कोई नहीं चाह सकता। अब समय आ गया संभल कर चलने का। संभल कर रहने का, चारों तरफ गिद्ध नजरे गड़ाए खड़े हैं। यह तुम्हें देखना है कि इनकी नजरों से खुद को कैसे सुरक्षित करें। हालांकि सभी ऐसे नहीं होते। परंतु कोई भी रिश्ता निभाने से पहले अपने माता-पिता से जरूर पूछ लेना चाहिए।उनके पास वर्षों का अनुभव होता है। तुम्हारा अच्छा- बुरा उनसे बेहतर कोई नहीं जान पाएगा और तुम्हारे लिए कौन कैसा साबित होगा उनकी पारखी नजरों से बच नहीं पाएगा। हालांकि ऐसा नहीं है कि अभिभावक मानेंगे नहीं उन्हें भी अपने बच्चों की खुशी का पता है।
Love is the highest, the grandest, the most inspiring, the most sublime principle in creation. Love and forbearance are essential to the growth of harmony. Love nurtures all things that grow, it harmonizes and unites. On the other hand, hatred agitates and separates, and indifference destroys what could have been made good and beneficial. Love is harmony, and harmony is love. All human souls, the world, the entire universe, are attuned to the cosmic external harmony of love. Disharmony arises from ignorance of this divine unity, which is the heart of God pulsating in everything He has created. He is Love that flows through caring hearts and the bliss that expressed as Joy in all souls. When the summer of good fortune warms my tree of life, it easily burgeons with fragrant blossoms, during winter month of misfortune, “O Lord” may my denuded branches change lessly waft towards thee a secret scent of gratitude.


