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“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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2021-KMSRAJ51 की कलम से

तेरा दर।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ तेरा दर। ♦

माँ, तेरे पावन आगमन का शुभ दिन आया है।
तेरे दर के दर्शन में ही, तो हर सुख समाया है।

तेरे दर की महिमा का क्या बखान करूँ माँ।
मेरी ज़ुबाँ छोटी, तेरी शान ऊंची कैसे बयां करूँ माँ।

कौन सी ख़ुशी ऐसी है, जो तेरे दर पर नहीं मिलती।
हर ख़ुशी की लहर, तो तेरे दर से ही चलती।

एक तेरा दर ही ऐसा, जहाँ से किसी को टाला नहीं जाता।
कोई सवाली ऐसा नहीं, जिसको संभाला नहीं जाता।

यूँ ही नही कहलाया, जगदाति नाम है तेरा।
देती सबको अपनी रहमत की सौगात, कर देती सुखों का सवेरा।

इस संसार की खुशियों के लिए, पीरो कर श्रद्धा का हार लाये है।
हे जगकल्याणी माँ, नमन हमारा स्वीकार कर लेना,
खड़े तेरे दर पर सिर झुकाए हैं।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है -इस कविता में कवयित्री ने माता रानी के गुणों और शक्तियों का स्तुति कर, माता रानी का आह्वान किया है इंसानियत के सुख और खुशियों के लिए। माता रानी के दर से आज तक किसी को भी ख़ाली हाथ नही लौटना पड़ता हैं।

—————

यह कविता (तेरा दर।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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त्रासदी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ त्रासदी। ♦

इस सदी की सुनकर त्रासदी,
नई नस्लें तो थरथर कांपेगी।
यह भी सच है, वे व्याधि की,
हर घटना का राज भी जांचेगी।

विश्व पटल पर जो है घटित हुआ आज,
कल को इतिहास वही तो बन जाएगा।
एक दूसरे देश का परदा फाश कर कर,
हर छुपाया राज भी तब सामने आएगा।

लोथ पे गिरती लोथों को देख देख,
मुलायम मोम सी जलती छाती है।
दारुण दंश देख दिल द्रवित न होवे,
वह इंसान नहीं खूनी खुराफाती है।

भव्य भवनों में ओ रहने वालो,
ये झुग्गियों के लोग भी अपने हैं।
जीने दो इत्मीनान से इनको भी,
इनके भी तो अपने कुछ सपने हैं।

जैविक युद्ध की सुगबुगाहट है या कि,
फिर कुदरत ने ही मचाई तबाही है?
शोध – चर्चाएं हैं विश्व में नित बड़ी बड़ी,
बन सकी न रोग की पक्की दवाई है।

पसीना चू – चू पड़ता है देखो तो,
भयभीत हो, होकर हर भालों से।
एक तो गुप्त यह व्याधि है व्यापी,
ऊपर से परेशानी दुगनी नकालों से।

श्वेत – ब्लैक और दो फंगस है आए अब,
कोरोना से कहां कोई कसर रही थी?
मानी कितनी वे बातें हमने अब तक, जो,
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हमसे कही थी।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – कोरोना काल के दौरान दुनिया भर में होने वाले उथल – पुथल, जान-माल की हानि को बखूबी दर्शाया है कविता के रूप में। विश्व पटल पर जो है घटित हुआ आज, कल को इतिहास वही तो बन जाएगा।। एक दूसरे देश का परदा फाश कर कर, हर छुपाया राज भी तब सामने आएगा।

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यह कविता (त्रासदी।) “हेमराज ठाकुर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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अयोध्या में गंधर्व गान।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ अयोध्या में गंधर्व गान। ♦

हिंद हिमालय की गोद से,
ऋषि – मुनि करते हैं ध्यान।
सभी के श्री मुख से निकला,
जय जय जय श्री सीताराम।

वेद श्री, श्रीमद् भागवत महाभारत,
रामायण, गीता, औ उपनिषद,
सर्वदा प्रासंगिक रहने वाले।
अपडेट करने के खोलें ताले।

बलशाली अभिमानी सानी रावण,
घमंड मर्दक उत्तम – नरोत्तम।
आतताई नाशक है सर्वोत्तम।
मान् करते गुरुजन का पुरुषोत्तम।

ढ़क नहीं पाए अंधविश्वास उमंग।
वृहद बिचार शीलता नेक ढंग।
घर संस्कृत की परंपरा हो ध्यान।
मानव जीवन संस्कार करे कल्याण।

विशाखा अनुपमा अयोध्या धाम,
कला और संचिका होता सम्मान।
प्रथम महापुरुषों का जन्म स्थान,
चारु दिशाओं को मिलता ज्ञान।

धरा धरातल होता यज्ञ ज्ञान स्थान।
अटके भटके मिलता बिरसा ज्ञान।
सहज समान भावना को सम्मान।
फैला तीनों लोक में संगीत गान।

शहंशाह बच पर रहते विद्वान,
कोई नहीं होता अज्ञान वान।
सदा से रही अजेय अयोध्या धाम,
वही मलिन का भी करती कल्याण।

रामायण महाभारत करें उत्थान,
सत्य पर चलने वाले का कल्याण।
जीवन जीने वालों कला निधान,
गीता औ उपनिषदों में वह ज्ञान।

दशो दिशाओं पर अवध का ध्यान,
आकर देवता करते गुणगान।
तल तलातल से होता प्रभु मान,
ऋषि – गंधर्व गावत अविरल गान।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – इस कविता में कवि ने अयोध्या की पावन भूमि के गुणों और विशेषताओं का वर्णन किया है। महापुरुषों की पावन भूमि का मनोरम वर्णन किया है, यह पावन भूमि सदैव से ही आध्यात्मिकता का स्रोत रहा है, जो आज भी निष्काम उपासकों की पुण्य गाथा से कण – कण सुशोभित करता है।

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यह कविता (अयोध्या में गंधर्व गान।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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आजा माँ।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ आजा माँ। ♦

हे जगजननी माँ, आज तुम आ ही जाओं,
तेरे भक्तों की पुकार है।

माँ, तू तो कृपा, दया की देवी,
तेरे कृपानिधि के नाम से जयकार है।

माँ, तुझें आना ही होगा,
इंसान का जीवन बचाना होगा।

तुझें इस धरा पर फिर,
जीवन की ज्योति को जगाना होगा।

माँ, चारों तरफ हो रही है बेहाल जिंदगी।
धरती पर सिर झुकाओं, कबूल करती तू बन्दगी।

त्रिपिंडी स्वरूपा माता, हे सुख दायिनी आजा,
इंसान की साँसाे की डोर थाम, बढ़ा दे इनको।

अपने आशीर्वाद से नवाज़े माँ तू,
तेरे आशीष की जरूरत अब सबकों।

तू तो जगत माता है,
इस जग को फिर से बचाने आजा।

हुई जाने अनजाने जो गलतियां,
उनको बख्श दे माँ, माँ वाला प्यार दिखा जा।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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यह कविता (आजा माँ।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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जनसंख्या कानून।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जनसंख्या कानून। ♦

जनसंख्या तेजी से बढ़ रही,
लोग प्रकृति को देते दोष।
साधन सीमित देश विदेश के,
आपस में ही लड़ते हैं लोग।

भूखे व्याकुल दुनिया में बच्चे,
लच्छेदार भाषण देते हैं लोग।
घोटाला करने वाले भी विरले,
दोष शासन को देते हैं लोग।

बड़े – बड़े महलों में रहने वाले,
गरीब देखकर हंसते हैं लोग।
सुखिया राशन गरीब का खाते?
दुखिया को ठग रहे हैं लोग।

विधवा पेंशन अमीर खा जाते!
गरीबों को पूछ सकते हैं लोग?
प्रधानमंत्री आवास योजना चली,
किस गरीब को मिलती सोच?

छात्रवृत्ति अल्पसंख्यक – मिलती,
कौन यहां अल्पसंख्यक हैं बोल।
सरकारी कर्मचारी भी लाभ उठाएं,
कौन करेगा अब इस पर खोज।

हम दो हमारे दो पुराना है नारा,
कानून लागू करेगा कौन सोच।
गरीब दुनियां में क्यों पिछड़ रहा,
जनसंख्या का हो रहा विस्फोट।

सरकारी सुविधा का लाभ ले रहे।
बोलते हैं शासन सत्ता में खोट।
अपनी ही मन की करते हैं लोग।
लोग प्रकृति को ही देते हैं दोष।

जनसंख्या विस्फोट हो रही है।
सब्सिडी वाले झगड़ते हैं लोग।
जिससे नौकरियां घटती रही।
आतंकी संगठन के बढ़ते लोग।

जमीन की आवश्यकता बढ़ती।
छप्पर फाड़ पर लड़ते लोग।
कपड़ों की कमी से बच्चे जूझते।
कुदरत बच्चा दिया कहते लोग।

मीठा पानी पीने योग्य घटाता।
दोष सरकार को तुरंत देते सोच।
बीमार पड़ जाता जब भी बच्चा,
प्रकृति को कोसते रहते लोग।

जनसँख्या वृद्धि पर रोक लगाओ, सबको तुम जागरूक बनाओ।
अपने घर को खुशहाल बनाओ, शिक्षित नागरिक होने का फर्ज निभाओ॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – इस कविता में कवि ने बहुत तेजी से जनसंख्या बढ़ने से क्या क्या परेशानियां हो रही है बताया है। लोगों के क्या क्या बहाने है जनसंख्या को बढ़ाने को लेकर यह भी बताया हैं। जब जनसंख्या कंट्रोल में होगा तभी सभी सुखी और संपन्न होंगे।

—————

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यह कविता (जनसंख्या कानून।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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मेरा मन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मेरा मन। ♦

घड़ी दो घड़ी तो मेरे पास भी बैठ।
कभी खामोश कभी उदास भी बैठ।
तितलियों सा बेफिक्र डोलते रहते हो।
कभी परेशान कभी हताश भी बैठ।
आसमान में उड़ते रहते चिड़ियों सा,
सबके खेत में घुस जाते हो नदियों सा।

अपने पराये, लोकलाज का कोई शर्म नहीं।
ठहर क्यूँ नहीं जाते, ऐ मन, सदियों सा।
नजर लग जाएगी थक के कभी तू ,
मेरे पहलू में आ बदहवास भी बैठ
घड़ी दो घड़ी…..

मत भूल ये अपना गाँव नहीं शहर है।
जमाने की टेढी, तुम ही पे नजर है।
सभी को खबर है तेरी दिलनवाजी का।
तुमको ही अपनी नही कोई खबर है।
पर्दे का थोड़ा तो लिहाज लाजिमी है।
कभी नाउम्मीद, हो निराश भी बैठ।
घड़ी दो घड़ी…..

पंथी, ग्रंथी औ पुजारी, महापौर का,
तू मेरा ही है या है किसी और का।
तन-स्पंदन में भी कभी मिलते नहीं।
तू इसी दौर का है या है उस दौर का।
बता तुझे ला दूंगा सारे खेल खिलौने।
ला दूंगा तुझको जमीं आकाश भी बैठ।
घड़ी दो घड़ी…..

बीच – बीच में लंबी ताजी साँसें लो सुस्ता लो।
कभी – कभी अपने घर का भी रस्ता लो।
मेहमान नवाजी, आवारगी कुछ दिन ही अच्छी।
वतन वापसी का विकल्प भी बावस्ता लो।
रोज दीवान-ए-आम तू जाया करता है।
आज हृदय के साथ दीवान-ए-खास भी बैठ।
घड़ी दो घड़ी…..

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है – मन के यूँ उमड़ने – घुमड़ने की प्रक्रिया को समझाने की कोशिश की है। मन से संवाद किया है, सभी को खबर है तेरी दिलनवाजी का तुमको ही अपनी नही कोई खबर है। मेरे पहलू में आ बदहवास भी बैठ घड़ी दो घड़ी।

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यह कविता (मेरा मन।) “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: चली जाती है।
  • जरूर पढ़े: अच्छा लगता है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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जय बोलो अयोध्या धाम की।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जय बोलो अयोध्या धाम की। ♦

श्री राम के दर्शन की अभिलाषी,
लहरें गाती हैं श्री सीताराम की।
शैल शिखर से सरयू प्रति प्रताप में,
महिमा गाती ललित कलाम की।
जय बोलो अयोध्या धाम की॥

कंचन महल दशांश – सुखरासी,
पांव पखारने आती लहरें नाथ की।
जहां पृथु यज्ञ में आते हैं अविनाशी,
जल का आचमन करते मृदुभाषी।
जय बोलो अयोध्या धाम की॥

जहां सनत कुमारों की आवा जाही,
माता सरयू मानव कल्याण की।
जिसके दर्शन करने से मनुष्य जीवन,
धन्य हो जाता, ध्यान करें उस धाम की।
जय बोलो अयोध्या धाम की॥

अविद्या रूपी कर्म – मार्ग गामी,
स-काम पुरुषों के उद्धार की।
बोलो बोलो जय श्री सीताराम की।
जय बोलो अयोध्या धाम की॥

उपासना रूपी विद्या – मार्ग आमी,
निष्काम उपासकों की गाथा कहानी।
जाने अनजाने में किया पाप नाशक,
पाप विनाशक अयोध्या धाम की।
बोलो जय बोलो सीताराम की॥

भोग प्राप्त करने वाले दक्षिण मार्गी,
मोक्ष प्राप्त करने वाले उत्तर मारगी।
यात्रा करने वाले पुरुषोत्तम भगवान जी,
दोनों आधारभूत के गुणगान की।
बोलो जय बोलो अयोध्या धाम की॥

रंग लाए, समुद्र में निकला शब्द ‘तप’,
प्रथम स्वर के ‘अ’ से निर्मित अयोध्या।
ब्रह्मा के कानों में जय घोष गान की,
जय बोलो जय बोलो सीताराम की।
बोलो जय बोलो अयोध्या धाम की॥

स्वर्गादी फल देने वाली कर्म – विद्या,
आदि अंत स्थान अयोध्या धाम की।
ऋषि – मुनि – महात्मा के देव स्थान,
गाती लहरें श्री पुरूषोत्तम धाम की।
बोलो जय बोलो सीताराम की॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – इस कविता में कवि ने सरयू नदी व अयोध्या के गुणों और विशेषताओं का वर्णन किया है। महापुरुषों की पावन भूमि का मनोरम वर्णन किया है, जहाँ पर उपासना रूपी विद्या – मार्ग आमी, निष्काम उपासकों की पुण्य गाथा से कण – कण सुशोभित है।

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यह कविता (जय बोलो अयोध्या धाम की।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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शारदे दया करो।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शारदे दया करो। ♦

बसंत ऋतु की मंगल बेला में,
बागेश्वरी शारदा प्रकट हुई।
बसंत पंचमी की तिथि थी वह,
पांचों तत्व थीं लिये खड़ी।

ज्ञानतत्व कुबुद्धी का नाशक,
समूल में ज्ञान मा भरती हो।
अमृत्तत्व सर्वज्ञान – का सूचक,
कल्याण निरंतर करती हो।

विद्यातत्व सर्वकल्यान का सूचक,
मधुर वाणी में रमती हो।
प्रकृतितत्व शुभ्र ज्योत्स्ना सूचक,
शक्ति कुंडलनी कहलाती हो।

वीणा बजा जगाकर जग को,
विनीत ज्ञान दे लुभाती हो।
भवानी भाव से मगन हो पर,
मेरी यह विनती सुन लो।

अज्ञानी को मां ज्ञान तू देती।
सर चरणों में अर्पित, घ्यान करो।
मैं हूं बालक तेरा शक्ति भर दो।
सुदूर दृष्टि वाली दया तु कर दो।

हाथ जोड़कर विनती करता हूं,
शारदा हमें क्षमा कर, वर दो।
हर पल तेरे नाम की महिमा,
तेरी जय – जय जयकार करूं।

पूजन में तेरे शामिल होकर,
तेरा ही गुणगान करूं।
द्वारे पर मेरे माता आकर,
इस जीवन का उद्धार करो।

मां तेरी जय जय जयकार करूं।
भव सागर से मां पार तरूं।
ब्रह्म विद्या का तत्व ज्ञान जपूं।
तेरी जय – जय जयकार करूं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – इस कविता में कवि ने माँ शारदे के गुणों और शक्तियों का गुणगान करते हुए, माता रानी से स्तुति की है मानवता के कल्याण के लिए।

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मेरी माँ।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मेरी माँ। ♦

माँ, तेरी दिव्य दृष्टि से कुछ भी न छुपा है।
तू तो अलौकिक, अद्भुत निराकार सरूपा है।

हम तुझकों अपनी इस नाचीज़ ज़ुबा से,
इस जग का क्या हाल सुनाए।

पार लगा दे नैया इस भंवर से,
तू तो समय की हर चाल बताएं।

माँ, न जाने ये समय मनुष्य के,
किस कर्म के भार को ढो रहा है।

जिसमें फँसकर,
अच्छा इंसान भी रो रहा है।

माँ, तेरे चरणों में इस समय के,
ग़मों को अर्पण किया है।

इस जग को आशीष से नवाज़े,
तुझें श्रद्धा, आस्था के फूलों ने समर्पण किया है।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है -इस कविता में कवित्री ने माता रानी के गुणों और शक्तियों को बताया है, माता रानी से स्तुति की है आज के समय और इंसानियत के व्यवहार व् गतिविधि को लेकर।

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यह कविता (मेरी माँ।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

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राजा पृथु को मुनिश्वरों का उपदेश।

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♦ राजा पृथु को मुनिश्वरों का उपदेश। ♦

पृथ्वी पालक पृथु महाराज का,
प्रजा जब स्तुत गान करती रही।
उसी समय चार तेजस्वी मुनीश्वर,
तेज पुंज, आकाश मार्ग से आए।

आकाश और से उतरते हुए उन्हें,
राजा पृथु – अनुचर पहचान गए।
आगे बढ़ महाराज किए सम्मान,
उचित संस्कार से मुनियों का मान।

राजा निवेदन सनकादी ने माना,
आपस में बातचीत से पहचाना।
मुनि के चरणों दक सीष लगाया।
सत्य पुरुषों सा व्यवहार दिखाया।

सोने के सिंहासन पर उन्हें बिठाया।
विधिवत पूजा पाठ उनका कराया।
अग्नि देवता सदृष्य तेज था उनका।
मुनियों के तेज से आह्लादित जनता।

विनम्रता पूर्वक राजा पृथु जी बोले,
आपका दर्शन योगियों को दुर्लभ।
यद्यपि आप सर्वव्यापी और सर्वत्र,
फिर भी सर्वसाक्षी आत्मा ना सुलभ।

जिस घर आप कुछ ग्रहण करते हैं,
धनहीन भी ध्यान कर धन्य हो जाता।
हम सभी इंद्रिय संबंधी भोगों को,
अपना पुरुषार्थ मान लिया करते हैं।

आप एकाग्र चित्त ब्रह्म चारी महान।
श्रद्धा भक्ति आचरण पालक विद्वान।
जिस पर आपकी कृपा दृष्टि बरसती,
वह इस संसार में हो जाता है महान।

इन कर्मों के निस्तार का कोई उपाय,
जो भी हो मुनिवर हमको बताइए।
सांसारिक मनुष्य का कैसे होता है,
कल्याण, उसको हमें समझाइए।

यह भी सच है कि उपासक धीर,
पुरुषों के ऊपर वह कृपा करते हैं।
अजन्मा नारायण भगवान जी,
भक्तों का अपने कल्याण करते हैं।

राजा के गंभीर मधुर वाणी सुनकर,
मुनीश्वर प्रशन्नता से कहने लगे?
आप सबकुछ जानते हैं फिर भी,
जन कल्याण हेतु अच्छी बातें पूछी।

साधु पुरुषों की ऐसी बुद्धि होती।
प्रश्न से उनके कल्याण होता है।
मधुसूदन के चरणों में आपकी प्रीत,
अविरल सुंदर है आप की नीति।

ईश्वर में अविरल प्रेम जाग जाता।
वासनायें उसकी सभी नष्ट हो जाती।
आत्म स्वरूप निर्गुण का मुनि ने,
राजा पृथु जी को ब्रह्म ज्ञान बताया।

मुनीश्वर ने राजा पृथु को पावन,
पुनीत प्रीति युक्त भजन सुनाए।
ब्रह्म में लीन हो जाने पर पुरुष,
सतगुरु की शरण में जाता बताए।

विषय इंद्रिय संबंधी भोगों से बचाएं।
विचार शक्ति को बढ़ाते ही जाएं।
विचार शक्ति नष्ट हो जाने पर,
पूर्व स्मृतियां भी नष्ट हो जाती हैं।

और स्मृतियों के नष्ट हो जाने पर,
ध्यान – ज्ञान नष्ट होने लगता है।
अपने द्वारा आत्मा नाश होने पर,
जीवन का सब हानि हो जाता है।

भगवान के चरण, चरण कमल ही,
दुस्तर समुद्र को पार कर देते हैं।
कुमार से आत्मीय उपदेश सुनकर,
राजा पृथु उनकी प्रशंसा करने लगे।

आप लोग बड़े ही दयालु कृपालु हैं।
श्रीहरि भेजी, मुझ पर कृपा की है।
जिस कार्य के लिए आप पधारे थे,
आपने अच्छी तरह उसे संपन्न किया।

इस उपकार के बदले आपको क्या दूं ?
मेरा जो वह महापुरुषों का प्रसाद है।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – इस कविता में कवि ने बताया है कि महाराजा पृथु ने कैसे मुनिश्वरों का स्वागत किया। आत्म स्वरूप निर्गुण मुनिश्वरों ने बहुत ही सरल शब्दों में राजा पृथु जी को ब्रह्म ज्ञान बताया।

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यह कविता (राजा पृथु को मुनिश्वरों का उपदेश।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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