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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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Poems In Hindi

अनमोल बूँद।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ अनमोल बूँद। ♦

समुन्द्र की एक सीप से पूछों,
एक बूँद, कितनी अनमोल।
जो स्वाति नक्षत्र में गिरें तो,
बने सच्चा मोती, बिन मोल।

एक बूँद की कीमत चातक जानें,
स्वाति नक्षत्र की बूंद से प्यास बुझाए।
गर न मिलें, उचित समय तो,
पूरा वर्ष प्यासा रह जायें।

जब बरसे मेघा,
मयूर नृत्य करें, संग संग रोयें।
उसकी नेत्र-जल की बूंदों को पी,
मयूरी अपने विरह को धोयें।

जल जीवनदायीं,
क्यूँ व्यर्थ इसे बहायें।
बूँद बून्द सहेज लें, नीर की,
जो जीवन – अमृत कहलायें।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – सीप में स्वाति नक्षत्र में गिरें बूँद तो, बने सच्चा मोती, जो होता है अनमोल। इस एक बूँद की कीमत चातक जानें, स्वाति नक्षत्र की बूंद से प्यास बुझाए। गर न मिलें, उचित समय तो, पूरा वर्ष प्यासा रह जायें। प्रकृति का मनोरम दृश्य मयूर का यु मनमोहक नृत्य।

—————

यह कविता (अनमोल बूँद।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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Note:-

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

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त्रिभाग पर भरोसा करूं।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ त्रिभाग पर भरोसा करूं। ♦

बंट चुका त्रिभाग में
किससे कहूं।
हो गया अवसाद माना
कैसे लिखूं।

हृदय शरीर दिमाग जाना
क्या कहूं।
पहले शरीर से अलग
किससे कहूं।

शरीर से अलग है हृदय
अलग दिखा दिमाग,
कहां पलूं।
देती शरीर जवाब
कैसे चलूं।

खुश रहता हूं फिर भी,
ब्रह्मा विष्णु महेश में,
यादों से कहता।

जैसे चलाएं।
चलता चलूं।
मचलता चलूं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – कौन हूँ मैं, शरीर, हृदय, या दिमाग। कौन शरीर से अलग है, भगवान चलाते जैसे चलाएं, चलता चलूं, मचलता चलूं। आत्मा, शरीर, हृदय, व दिमाग के बीच तालमेल।

—————

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यह कविता (त्रिभाग पर भरोसा करूं।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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सोशल मीडिया – भारत।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ सोशल मीडिया – भारत। ♦

भारत पहले सबको मिलकर समझाता है।
सभ्यता और संस्कृत का उसको ज्ञान कराता है।
भारत की संस्कृति में यही कहा जाता है,
सबको यह पहले बहुत खूब समझाता है।

मनमानी करने वालों को ज्ञान पहले बताता है।
नियम और कानून का ध्यान उसको कराता है।
त्याग और तपस्या का भी पाठ उसे पढ़ाता है।
अहिंसा और शांति का संदेश उसको सिखाता है।

पुरुषोत्तम का देश है भारत उनका मान दिखाता है।
सूर्पनखा रावण की बहना उसको भी समझाता है।
श्रीराम द्वारा लक्ष्मण की तरफ ध्यान दिया जाता है।
इधर उधर जाकर भी जब नहीं मानती शूर्पणखा है।

अंत कोप भाजन से नाक अपनी कटवा दी है।
जबकि श्रीराम द्वारा उसको समझाया जाता है।
एक कथा और सुनाने का मन कर जाता है।
बालकृष्ण के पास कंस की बहन को भेजा जाता है।

उसका भी अंत श्री कृष्ण द्वारा किया जाता है।
कहने का तात्पर्य ही है जो भारत में आया है,
भारत के बने कानून का पालन उसको करना है।
मनमानी इस देश में कहीं नहीं चलने वाला है।
एक समय तक ही उसको छूट दिया जाता है।

इसलिए नियम कानून के अंदर काम करने हैं।
शांति और विश्व बंधुत्व से यहां पर आने हैं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – यह आर्यावर्त – हमारा भारत देश है, हम सभी का दिल से सम्मान करते है यहाँ। लेकिन यहाँ पर रहना है तो – भारत के बने कानून का पालन उसको करना है। मनमानी इस देश में कहीं नहीं चलने वाला है, एक समय तक ही उसको छूट दिया जाता है। इसलिए नियम कानून के अंदर काम करने हैं। शांति और विश्व बंधुत्व से यहां पर आने हैं।

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यह कविता (सोशल मीडिया – भारत।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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श्री कृष्ण द्वारा वसुदेव को ब्रह्म ज्ञान।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ श्री कृष्ण द्वारा वसुदेव को ब्रह्म ज्ञान। ♦

श्री कृष्ण बलराम जी वसुदेव जी को,
प्रातः दोनों आकर किया प्रणाम।
दोनों भाइयों का उन्होंने किया अभिनंदन,
ऋषियों के श्री मुख से सुना था जैसा वंदन।

हृदय से वसुदेव जी करने लगे दोनों से आलिंगन,
सच्चिदानंद स्वरूप का होने लगा उन्हें दर्शन।
वसुदेव बोले सच्चिदानंद स्वरूप श्री कृष्ण,
और मेरे महायोगेश्वर संकर्षण।

तुम दोनों ही जगत के हो प्रधान,
पुरुष के भी नियामक परमेश्वर।
तुम ही इस मायावी जगत के आधार हो,
तुम ही निर्माता और निर्माण सामग्री हो।

तुम दोनों जगत के स्वामी हो।
सब कुछ धारक तुम ही हो।
तुम भोग्य और भोक्ता से परे।
साक्षात भगवान तुम ही हो।

जगत की वस्तुओं के सृष्टिकर्ता,
पालन पोषण करता तुम ही हो।
विनाश वान सभी पदार्थों में तुम,
कारण रूप अविनाशी तत्व हो।

हो रहस्य ज्ञान योग माया का,
तुम्हारी कीर्ति गान लोग करते हैं।
भजन सुनकर श्री वासुदेव जी के,
भक्तवत्सल कृष्ण मुस्कुराने लगे।

विनय पूर्वक झुककर पिताजी को,
सु-मधुर वाणी में सुनाने लगे।

हम तो आपके पुत्र ही हैं पिता जी।
हमें लक्ष्य कर आपने ब्रह्म ज्ञान का,
उपदेश आप ही हमें सुनाने लगे।
मैं हूं! वही! सब आप ही बताने लगे।

जैसे छिति जल पावक गगन समीरा,
एक होते हुए अलग-अलग कहलाने लगे।
पंचमहाभूत अप्रकट – प्रकट होकर,
बड़े छोटे अधिक थोड़े दिखने लगे।

वैसे ही मैं! और बलराम जी भी,
भेद से ही दो पहचाने जाने लगे।

धरा पर जन्म – मृत्यु चक्कर रूप,
भटकते हुए जीव निमित्त आने लगे।
हम दोनों अन्याय के खिलाफ अपना,
आकर यहां शस्त्र उठाने लगे।

शरणागत उनके संसार भय को मिटाने लगे,
इस धरा को भार से मुक्ति दिलाने लगे।
मंगल प्रभु के श्री – चरण में जाने लगा,
अमृत तत्व सुख सागर सबको सुनाने लगा।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – श्री कृष्ण और वासुदेव जी के मिलन और संवाद का सुर मधुर वर्णन किया है। जहाँ एक तरफ पिता – पुत्र पर प्रेम वात्सल्य बर्षा रहा है तो, वहीं दूसरी तरफ श्री कृष्ण जी, वासुदेव जी को ब्रह्म ज्ञान दे रहे है। इस मधुर मिलन के साक्षी बलराम जी है।

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यह कविता (श्री कृष्ण द्वारा वसुदेव को ब्रह्म ज्ञान।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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जिंदगी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जिंदगी। ♦

जिंदगी जीने की कला है।
कर्ज चुकाने की अदा है।

देश को इससे आशा है।
मां की यही अभिलाषा है।

जिंदगी केवल खेल नहीं।
यह देवों की परिभाषा है।

कितना कहूं जीवन को,
मानवता की यह रक्षक है।

सफर जिंदगी का गुजर जाता।
कोई पल – पल याद आता है।

लोग आते-जाते रहते जिंदगी में,
पल-पल बिछड़ता जाता है।

जीवन शैली मानवता की रक्षक,
संतों सा लगत संरक्षक है।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – बहुत सारे उदाहरण के माध्यम से बताया है, ज़िंदगी क्या है, “कितना कहूं जीवन को, मानवता की यह रक्षक है।” मानव जीवन मिला है लोगो का और स्वयं का कल्याण करने के लिए। यूँ ही जीवन को नष्ट ना करें, समय फालतू न गवाए, अपने इस जीवन को अच्छे कार्यों में लगाए।

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कथा का सार तत्व।

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♦ कथा का सार तत्व। ♦

आज यहां मैं कथा – सार
तुम्हें सुनाने आया हूं।
यहां सुकदेव परीक्षित का
संबाद बताने आया हूं।

इंद्रिय – शक्ति अगर चाहो तो,
इंद्र का पूजन शुरू करो।
ब्रह्म तेज की चाह अगर हो,
बृहस्पती – कृपा भरो।

चाहें श्री लक्ष्मी को खुश करना।
माया देवी का जप करना।
तेज की हो चाहे यदि तुम्हें,
अग्नि प्रज्ज्वलित करके पूजना।

वीर तुम्हें है बनना यदि,
रूद्र को खुश करते जाओ।
धन पाने की हो जो लालसा,
वसुओं के आराधक बन जाओ।

अन्न कृपा तुम पर होगी ही,
अदिति को यदि आप मनायें।
स्वर्ग प्राप्ति की हो अभिलाषा,
अदिति पुत्रों का जप करें कराएं।

राज्य प्राप्ति के लिए सुनो,
विश्व – देव को तुम गुनो।
अनुकूल प्रजा अगर चाहो तो,
साध्य देव को तुरंत चुनो।

दीर्घायु की इच्छा वाले,
अश्वनी कुमारों को न भूलना।
अगर पुष्टि की तेरी कामना,
पृथ्वी को है तुम्हें पूजना।

प्रतिष्ठा की यदि चाह तुम्हारी,
पृथ्वी आकाश की पूजा न्यारी।
सौंदर्य अगर तुम्हें है पाना,
गंधर्व के पूजन पे दृष्टि हो सारी।

पत्नी प्राप्ति की खातिर तुम,
करो उर्वशी अप्सरा की पूजा।
सभी का स्वामी बनना चाहो,
ब्रह्मा के अतिरिक्त कोई न दूजा।

यश की कामना अगर तुम्हारी,
यज्ञ पुरुष का ध्यान धरो।
और खजाना आप आना चाहो,
वरुण देव का मान करो।

यदि ध्यान विद्या प्राप्ति पर,
शिव – शिव का ध्यान लगावे।
पति-पत्नी परस्पर प्रेम पावें,
मां पार्वती की पूजा करावें।

धन उपार्जन के लिए हे नर,
विष्णु भगवान की पूजा कर।
बाधाओं पर पढ़ोगे भारी,
मरुत गनों का हो आभारी।

राज्य कायम रखने का हो ध्यान,
मन्वंतर के अधिपति का रख मान।
अभि-चारक के लिए तू नर,
देवों का मान तूं कर।

भोगों खातिर तेरा यदि सफर,
चंद्रमा की उपासना कर।
निष्काम प्राप्त की खातिर ध्यान,
परम पुरुष नारायण का मान।

सभी थपेड़े दूर भगाओ,
श्री नारायण की स्तुति गाओ।
संवाद सुकदेव और परीक्षित,
पढ़ो – पढ़ाओ और सुनाओ।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – किस-किस व्रत और पूजा, जप, तप, आराधना से क्या-क्या सिद्धि और प्राप्ति होगी। व्रत और पूजा, जप, तप, आराधना के महत्व व गुणों को समझाया हैं। आम इंसान के जीवन में सुख, शांति और खुशहाली के लिए उसे किस-किस व्रत और पूजा, जप, तप, आराधना को करना चाहिए, बहुत ही सरल तरीके से समझाया हैं।

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यह कविता (कथा का सार तत्व।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

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किस्मत की लकीर।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

♦ किस्मत की लकीर। ♦

जब मेरे हाथों में तेरी तस्वीर होती है।
अंगुलियां साँस लेती हुई शरीर होती है।
मन आप ही निकल पड़ता आखेट को।
निगाहें शमशीर, आलमगीर होती है॥

हथेलियां धक – धक धड़कने लगती है।
जादुई तुम्हारे लम्स की तासीर होती है।
उस वक्त मैं कई जन्म, कई रुप लेता हूँ।
उस घड़ी जिंदगानी बेनजीर होती है॥

दो पल सीने पे जब विश्राम करते हो।
अनकही अनसुलझी बातें गंभीर होती है।
नैनो के पेंच, लबो की कुछ गुफ्तगू, तेरे।
माथे पे, मेरी किस्मत की लकीर होती है॥

दो अश्क मिलकर समंदर बन जाते हैं।
आँधी खुद कस्ती की दस्तगीर होती है।
जमीं पर वहीं जन्नत उतारकर उस दिन।
अना मेरी सबसे ऊँची, अमीर होती है॥

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से सच्चे प्यार को समझाने की कोशिश की है।

—•—•—•—

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यह कविता “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: चली जाती है।
  • जरूर पढ़े: अच्छा लगता है।

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अपना अधिकार।

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♦ अपना अधिकार। ♦

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ये करो, वो नहीं।
ऐसे करो, वैसे नहीं।
इससे बात करो, उससे नहीं।
ऐसे बैठो, ऐसे हँसो।
दिन भर खी-खी मत करो।
काम सुघड़ता से किया करो।
अपने घर जा के बेइज़्ज़त करोगी हमें॥

ये नही करने आता।
वो नही करने आता।
ठीक से कैसे बैठते हैं।
सबको खुश कैसे रखते हैं।
क्या सीखा है जीवन भर।
यही सीख के आयी हो।
मोहल्ले भर में बेइज्जती कराती फिरती हो।
ये सब करना है तो अपने घर जाओ वापस॥

कच्ची उम्र में ब्याह दी गयी।
उस नन्ही सी जान ने।
जीवन भर दूसरों का कहना ही सीखा था।
अपने मुँह में ज़बान होती है।
या दाँत भी होते हैं, ये जानती भी न थी।
कच्ची उम्र में खानदान की इज़्ज़त संभालना।
पड़ता था उसे, जब कि जानती भी नहीं कि,
हंसने बोलने से इज़्ज़त कैसे निकल जाती है॥

सीखते, संभालते उम्र निकल जाती है।
लेकिन अपना घर नही मिलता।
औरतों को खुल कर हंसने बोलने मुस्कुराने,
का अधिकार नही मिलता॥

♦–  प्राप्ति सिंह –♦

जरूर पढ़े: दिल से कागज में उतर ही जाती है।

जरूर पढ़े: हम दोनों की दो-दो आंखें।

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जरा सा मुस्कुरा दो।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ जरा सा मुस्कुरा दो। ϒ

मुस्कुराहट मे जो ताकत है।
वो क्रोध में कहा।

जरा सा मुस्कुरा दो।
सब को अपना बना लो।

हर किसी का दिल जीत सकते है।
हर बात का जवाब दे मुस्कुरा कर-
दुश्मन भी दुश्मनी भूल जाते है॥

अगर बात करे उनसे मुस्कुरा कर।
हमेशा चेहरे पर मुस्कुराहट रखो।

चाहे हो खुशी या गम।
चेहरा भी सुंदर लगता है।

हर किसी से प्रेम बढ़ता है।
जरा सा मुस्कुरा दो।

आज का दिन भी सुंदर बना लो।
हमेशा मुस्कुराओ जिंदगी मे-
खुशियों के फूल सजा दो॥

¤~≈~¤

लोग अब व्यवहारिक कम – व्यवसायिक अधिक हो गये है।
सम्बंध उन से ही मधुर रहते है – जिनसे मुनाफ़ा अधिक है और स्वार्थ पूर्ति अधिक है॥

©- विमल गांधी। ∇

Vimal Gandhi-kmsraj51
विमल गांधी जी।

हम दिल से आभारी हैं विमल गांधी जी के प्रेरणादायक हिन्दी कविता साझा करने के लिए।

विमल गांधी जी के लिए मेरे विचार: 

♣ “विमल गांधी जी” की कविताआे के हर एक शब्द में अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविताऐं छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

पढ़ें – विमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

∗ निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

* क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

* KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

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In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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हंसने पर फ़साना बना देती है।

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ϒ हंसने पर फ़साना बना देती है। ϒ

दुनिया बड़ी शातिर है।
जिनको अच्छा नही लगता…
हँसना किसी का –
हँसने पर फँसाना बना देती है॥

रोने पर ख़ुशियाँ मना लेती है।
कया करे रहना तो है ही यहाँ –
इसलिये दुनिया से लड़ना भी है।
और निभाना भी इन्हीं से॥

हमें जलती आग से अपने हाथ बचाने है।
तमाशाई दुनिया से ख़ुद को बचाना है।

हर किसी से मिलना मिलाना भी है।
रूलाये अगर कोई तो भी ख़ुद ही –
ख़ुद को हँसना और हँसाना भी है।
सबसे ख़ुद को बचाना भी है॥

¤~≈~¤

किसी को हराना जीवन में बहुत आसान काम होता है।
लेकिन किसी के दिल को जीतना बहुत मुश्किल काम होता है॥

©- विमल गांधी। ∇

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