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“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिंदी कविता

तृतीय विश्व युद्ध सिरहाने?

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ तृतीय विश्व युद्ध सिरहाने? ♦

एक जिद्दी सिरहाने आया,
अपनी गाथा फुल ही गाया।
नींद से जागो यही बताया,
दुनिया को नया सीख सिखाया।

एक युद्ध सिरहाने आया,
पहले युद्ध का याद दिलाया।
दूसरे युद्ध में तबाही बताया,
दुनिया को नई दिशा दिखाया।

एक तबाही फिर सिर उठाई,
भागी जनता पर देश दिखाई।
रीफूजियों का बढ़ रहा रेला,
दुनिया देख रही सब खेला?

बिखरी लाशें मौन माहौल,
बेसुध जख्मी दुनिया झोल।
भूल गया बड़े बड़ों का बोल,
कोई बोला विश्वयुद्ध का बोल।

हृदय में उसने नफरत पाली,
क्यों जीनियस से पंगा ले ली।
घमंड में तबाही गोली – बोली,
दुनिया बड़ा पिटारा खोली?

आसमान के बीच आरती पक्षी,
परदेस में जाकर शरण ले ली।
घरों में सहमे हीय में बूढ़े – बच्चे,
दुनिया मीटिंग करती रही दिखी।

गुड्डे की विभीषिका युद्ध में फंसा,
बिखर रही जिंदगी वह तो हंसा!
बड़बोली बोलकर वह तो फंसा,
दुनिया की दृष्टि कैसी, कैसे दशा।

राक्षस राज रावण से राक्षस बोले,
पास पर्याप्त हथियार विश्वास करें।
युद्ध में आप नागों को परास्त किया,
आप अपने आप में विशाद ना करें।

बहुसंख्यक कैलाश शिखर निवासी,
कुबेर को युद्ध में अपने बस में किया।
यक्षों से गिरे कुबेर को भी आपने,
मारकाट मचा कर बस में कर लिया।

यक्ष सेना विचलित कर बंदी बनाया,
कैलाश शिखर से विमान छीन लाए।
वर पाकर शक्तिशाली हो गए दानव,
उनका मान मर्दन आपने ही किया।

दानवों को अपने अधीन करके आपने
प्राप्त माया भी आपने प्राप्त कर ली।
आप ने वरुण के बलवान पुत्रों को भी,
चतुरंगिणि सेना युद्ध में परास्त किया।

आपने बहुत बड़े-बड़े वीरों को मारा,
राम पर विजय पाना कौन बड़ी बात।
रावण के घमंड का राम किए विनाश,
लंका पर विजय घमंड का सर्वनाश।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — अत्यधिक घमंड चाहे व्यक्तिगत हो या राष्ट्रीय सदैव ही सर्वनाश का कारण बनता है। अभी जो माहौल रूस यूक्रेन संघर्ष युद्ध का चल रहा है, यह युद्ध पूरी दुनिया के लिए हानिकारक है। संस्कृत का बहुत प्रसिद्ध लघु सूत्र है “अति सर्वत्र वर्जयेत्” जिसका हिंदी शब्दार्थ है कि “अति करने से हमेशा बचना चाहिए”, अति का परिणाम हमेशा हानिकारक होता है। वास्तव में अति किसी भी चीज की अच्छी नही होती। इस सूत्र की जांच-परख हम स्वयं अपने घरों में बैठकर कर सकते हैं, कहीं दूर जाने की आवश्यकता नही। गुड़ की एक छोटी सी ढेली का स्वाद सबको अच्छा लगता है लेकिन उसी गुड़ के एक छोटे से टुकड़े को बड़े टुकड़े में बदल कर उसका रस-पान किया जाय तो वही शरीर में विकार उत्पन करता है। एक गुब्बारे में अगर हम उसकी क्षमता से ज्यादा हवा भरने की कोशिश करेंगे तो परिणाम कोई सुखद नही मिलेगा बल्कि दुःख देने वाला ही मिलेगा। यूक्रेन भी आज इसी “अति” का शिकार हो रहा है।

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sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (तृतीय विश्व युद्ध सिरहाने?) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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सत्य के राही शिव।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ सत्य के राही शिव। ♦

शिव ही सत्य की ज्योत है,
उनके बिना न कोई होत है।
जीवन संघर्ष रूपी प्याला है,
नीलकंठ ने पिया विष का प्याला है।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

कहा जाता इन्हे सृष्टि के रचनाकार,
ऐसे निराले है हमारे भोले कलमकार।
इनके नाम में ही छुपा है जीवन का सार,
इसी से हम सभी का होगा बेड़ा पार।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

शिव के नाम से दिनचर्या होती आसान,
बढ़ता जग में आन बान और शान।
अन्याय के खिलाफ जो, लड़ना सिखाए,
सत्य के पथ पर हमें चलना।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

दिल और दिमाग के द्वंद से, आत्मनियंत्रण कराए,
खुद को नियंत्रित करने का ज्ञान।
शिव अपने महायोगी रूप से सिखलाते,
शांतचित रहने का सलीका तमाम।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

त्रिशूल और डमरू, धन और संपदा का सूचक,
सिखलाता भौतिकवाद के पीछे तू न भाग।
विष का कर पान, नीलकंठ ने विश्व को दिया,
नकारात्मकता छोड़, सकारात्मकता का संकेत सरेआम।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

शिव अपनी इच्छा को परे रख, दिया संदेश,
इच्छाएं होती जुनून, करती सर्वनाश।
अर्धनारीश्वर शिव पार्वती रूप से,
पत्नी को दिलाया मान और सम्मान।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

हाथ में धारित त्रिशूल बताता,
न कर हावी, न खुद पर घमंड।
महायोगी रूप बताया, पर न मोहमाया में,
नटराज रूप से मिलता, नृत्य की है सीख।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

मेरे प्रिय पाठकों आपको सपरिवार तहे दिल से महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं।–KMSRAJ51

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — ज्ञान और बुद्धि के बिना ये जीवन किसी काम का नहीं। भगवान शिव के करोड़ों भक्त महाशिवरात्रि (Mahashivratri) का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से भगवान शिवजी की चार पहर की पूजा-अर्चना करते हैं, महादेव उनकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते है। इस दिन भगवान शिव जी को प्रसन्न करने के लिए भक्तों को सच्चे मन से दिन व रात में शिवपुराण का पाठ करना चाहिए। जो भी भक्त सच्चे मन से इस दिन भोलेनाथ की पूजा-अर्चना व ध्यान करता है उसकी सभी तरह की मनोकामना पूर्ण होती है। महाशिवरात्रि मतलब पावन रात्रि वह रात्रि जिसमे अपने सम्पूर्ण विकारों को जलाकर भष्म कर भगवान शिवजी से सर्व सद्गति प्राप्त करने की रात्रि। आओ हम सब मिलकर सच्चे मन से महापर्व महाशिवरात्रि को मनाए।

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यह कविता (सत्य के राही शिव।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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तुझें बजानी होगी डमरू की मधुर तान।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ तुझें बजानी होगी डमरू की मधुर तान। ♦

भोलेबाबा आ गया तेरे पूजन का पावन त्यौहार।
तू सुन कर ही जाना भक्तों की करुण पुकार॥

तेरे जयकारे को सुनने को कितने हम तरसे।
अब तो तेरी मधुर डमरू की धुन ही बरसे॥

हेभोलेनाथ! गंगा-माँ जो समाई है जटाओं में तेरी।
बरसा दे पावन जल इसका हो जाये सुविचारों की फेरी॥

तेरा त्रिशूल करें त्रिदोष पापों का नाश समूल।
हे भोलेबाबा सब माफ कर जाना हमारी भूल॥

हे जटाधारी तेरा भोलापन सब भक्तों को ही भाए।
विषपान कर तू इस ब्रह्मांड को अमृत बरसाए॥

सुमधुर नृत्य होता जब डमरू-संग तेरा।
ब्रह्मांड में होता तब नवजीवन का सवेरा॥

बहुत तरसे भक्तों के नयन भोले अब दर्शन दो।
शिवलिंग पर दूध-जल अभिषेक से तू प्रसन्न हो॥

भक्ति से खुश होकर तू सबके दुख लेता हर।
सुर-असुर सबको ही तू प्रसन्न हो दे जाए वर॥

बसंत ऋतु में तेरा आगमन दिल को हर्षाये।
तेरे स्वागत में प्रकृति भी पुष्पों को बरसाए॥

दिलों के श्रद्धा-सुमन स्वीकार कर धरा को पावन कर जाना।
डमरू की मधुर तान पर प्रसन्नता बरसाने वाला नृत्य करते आना॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — भगवान शिव के करोड़ों भक्त महाशिवरात्रि (Mahashivratri) का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से भगवान शिवजी की चार पहर की पूजा-अर्चना करते हैं, महादेव उनकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते है। इस दिन भगवान शिव जी को प्रसन्न करने के लिए भक्तों को सच्चे मन से दिन व रात में शिवपुराण का पाठ करना चाहिए। जो भी भक्त सच्चे मन से इस दिन भोलेनाथ की पूजा-अर्चना व ध्यान करता है उसकी सभी तरह की मनोकामना पूर्ण होती है। महाशिवरात्रि मतलब पावन रात्रि वह रात्रि जिसमे अपने सम्पूर्ण विकारों को जलाकर भष्म कर भगवान शिवजी से सर्व सद्गति प्राप्त करने की रात्रि। आओ हम सब मिलकर सच्चे मन से महापर्व महाशिवरात्रि को मनाए।

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यह कविता (तुझें बजानी होगी डमरू की मधुर तान।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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अपने मत पर करो विचार!

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ अपने मत पर करो विचार! ♦

जगह – जगह छलियों का बढ़ रहा है रेला,
पूर्वांचल में आ आकर करना चाहते हैं खेला।
महाराष्ट्र में साधु के साथ क्या हुआ था देखा,
जगह जगह लग रहा है लोगों का बड़ा मेला।

यूक्रेन हालत देख वहां के राष्ट्रपति की सुनो बात,
सभी नागरिकों को लड़ने को क्यों बोल रहे आज!
पाकिस्तान और चीन आंख गड़ाए है आज,
कल तक थलसेना को मजबूत करता देश।

वर्तमान परिस्थिति वायुसेना मजबूत करना आज,
तुम्हारा एक वोट देश के लिए कीमती है आज।
देश को बचाने के लिए आप खड़े हैं क्या आज,
या जन विनाश के लिए आपका वोट है बताएं आप।

जगह जगह पर मेरे भाइयों का बढ़ रहा है प्रभाव,
पूर्वांचल में बुद्धिजीवी का क्या हो गया है अभाव।
जगह जगह सी उत्तर प्रदेश में आ रहे झमेले बाज,
आपकी शांति सद्भाव पर करना चाहते कुठाराघात।

पूर्वांचल के विकास पर करना चाहते हैं लोग प्रहार,
आपको करना चाहते हैं लोग यहां जार – जार!
बुद्धि शक्ति पहरा आप अपने में मस्त विकास,
सबको पहचान कर, आप अपना मत करो विचार।

आपके प्रदेश में इस बार फिर अगर अंधेरा आएगा,
सैकड़ों मुबारक तुंहारा अंधेरा नहीं छठ पाएगा।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — आपका वोट आपका सुरक्षित भविष्य निर्धारित करेगा, याद रखें अपना वोट सोच समझ कर प्रदेश हित और राष्ट्र हित को ध्यान में रख कर दे। कही ऐसा ना हो जाए की गलत व्यक्ति और गलत पार्टी को वोट देकर आपका भविष्य सदैव के लिए अंधकारमय और असुरक्षित हो जाए। वर्तमान की घटनाओं से सबक ले (अफगानिस्तान और तालिबान तथा यूक्रेन और रूस की घटना) याद रखें – राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है। वतन हमारी आन हमारा सम्मान है उस मां को हमारा सलाम वंदे मातरम् …वंदे मातरम् …वंदे मातरम्॥

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यह कविता (अपने मत पर करो विचार!) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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बस लिखना है।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बस लिखना है। ♦

मैं कवि हूं कविताएं लिखता हूं, सुनाता हूँ,
मेरी लेखनी बेबाक कुछ न कुछ कह जाएगी।
लोगों की सम्पत्ति संजोकर भी ढह जाएगी,
मेरी लेखनी की ज़ुबान थाती बन कर रह जाएगी।

लोग लगे हैं सब धन दौलत ही बटोरने,
मैं भाव, कल्पना और शब्द बटोरता हूं।
लोग लगे हैं औलादों को विरासत छोड़ने,
मैं सदियों दर सदियों भाव छोड़ता हूं।

बिकती है इस दुनियां में राख भी आज,
लकड़ियों के मुकम्मल जल जाने के बाद।
पर विडम्बना देखिए इस दुनियां में जनाब,
बिकती नहीं तो सिर्फ कवियों की किताब।

मैं निराश नहीं हूं खुद की बदहाली के ख्याल से,
मुझे समाज के भटक जाने का डर सता रहा है।
है नहीं मेरा कोई खून का रिश्ता इस दुनियां से,
फिर भी मुझे इसकी चिन्ता का घुन खा रहा है।

है नहीं याद यहां अपनी चौथी पीढ़ी के पुरखे किसी को,
फिर भी आदमी भगवान के होने पर सवाल उठा रहा है।
निकम्मी सोच की दात देनी होगी, है याद नहीं पुरखे ही,
तो क्या फिर तुम्हारा खानदान हवाओं से ही आ रहा है।

यकीन मानिए साहब भूल जाएगी बाप को भी दुनियां,
गर जीने का और आगे बढ़ने का यही… तरीका रहा।
मैं रहूं या न रहूं इस दुनियां में तब ए मेरे अजीज दोस्तो,
मेरी ओर से निशानी हर अल्फाज मेरा तुम्हें लिखा रहा।

सिर्फ बुद्धि – धन के बल पर ही इठलाना इतना,
ए जमाने! खुद ही बता कि जायज कितना है?
हवा में उड़ने वाले हर परिंदे को भी तो आखिर में,
थक हार कर किसी न किसी शाख पर टिकना है।

पड़ता नहीं है कोई फर्क मुझे किसी के सुनने,
या न सुनने से, मुझे कौन सा महान दिखना है?
कवि हूं मैं प्रत्यक्ष द्रष्टा समाज की हर घटना का,
इसी लिहाज से ही तो मुझे सच बस लिखना है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — एक कवि व लेखक सदैव ही सत्य को लिखने की कोशिश करता है वह भी बिना किसी दबाव के। इस संसार के लोग तो धन संपत्ति को इकट्ठा करने में ही सारा जीवन बिता देते है और अंत समय में उनके साथ कुछ भी नहीं जाता है। माना की एक कवि व लेखक के पास धन संपत्ति कम होती है दुनिया की नज़र में, लेकिन एक कवि / लेखक की लेखनी (मेरी लेखनी की ज़ुबान थाती बन कर रह जाएगी।) सदैव के लिए उसे अमर कर जाएगी। विडम्बना तो देखिये की आजकल के लोग लगे हैं सब धन दौलत ही बटोरने में। मैं भाव, कल्पना और शब्द बटोरता हूं। लोग लगे हैं औलादों को विरासत छोड़ने में, आने वाली पीढ़ी के लिए, मैं सदियों दर सदियों भाव छोड़ता हूं। “आजकल की पीढ़ी को नहीं याद यहां अपनी चौथी पीढ़ी के पुरखे किसी को, फिर भी आदमी भगवान के होने पर सवाल उठा रहा है। निकम्मी सोच की दात देनी होगी, है याद नहीं पुरखे ही, तो क्या फिर तुम्हारा खानदान हवाओं से ही आ रहा है।” आजकल की पीढ़ी आधुनिकता के नाम पर भूलते जा रहे है अपनी ही प्राचीन संस्कृति, संस्कार व सभ्यता को। याद रखें- हवा में उड़ने वाले हर परिंदे को भी तो आखिर में, थक हार कर किसी न किसी शाख पर टिकना है।

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यह कविता (बस लिखना है।) “हेमराज ठाकुर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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समय।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ समय। ♦

समय कहता मैं तुम्हारे साथ हूँ,
समय की चाल निरन्तर चलती है।

यह पल में अनेक रूप बदलता,
दुख दर्द और सुख का साथी बनता।

रोज अपने नए रंग, रूप दिखाता,
सब इसकी मर्जी से चलता।

अपना हर पल का महत्व बताता,
ये कभी रुकता नहीं थकता नहीं।

बस निरतंर ही चलता जाता हूँ,
इसके महत्व को अगर समझोगे।

जीवन में अपने लक्ष्य हासिल करोगे,
सारे काम समय पर ही होते।

चाहे हम कितने भी उत्त्सुक हो,
होगा काम समय के आने पर ही।

इसलिए समय के महत्व को समझे,
समय कहता मैं तुम्हारे साथ हूँ।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — एक बात सदैव ही – याद रखें ….. समय का प्रबंधन वास्तव में जीवन का प्रबंधन है। यह दरअसल घटनाओं के क्रम को नियंत्रित करना है। समय का प्रबंधन का अर्थ है, इस बात पर नियंत्रण करना कि आप अगला कार्य कौन सा करेंगे, और आप हमेशा अपना कार्य चुनने के लिए स्वतंत्र होते हैं। महत्वपूर्ण और महत्वहीन के बीच विकल्प चुनने कि आपकी काबिलियत, जिंदगी और काम-धंधे में आपकी सफलता तय करने वाली अहम कुंजी हैं। असरदार और उत्पादक लोग खुद को इस बात के लिए अनुशासित कर लेते हैं कि वे सबसे महत्वपूर्ण कार्य से ही दिन कि शुरुआत करें। मैं हूँ समय बता देता हूं, किसी के लिए भी मैं नहीं रुकता हूँ। वक़्त कभी नहीं रुकता सदैव चलता रहता है। कभी खुशी दे जाता है, तो कभी ग़म। “किसी महत्वपूर्ण कार्य को शुरू और पूरा करने के बारे में सोचने भर से ही आप प्रेरित हो जाते हैं। इससे आपको टालमटोल छोड़ने में मदद मिलती हैं।”

—————

यह कविता (समय।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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राष्ट्रीय पाठ्यचर्या।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ राष्ट्रीय पाठ्यचर्या। ♦

शिक्षा में बदलाव, बेहतरीन लचीलेपन के साथ।

आओ आज आपको,
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या का अर्थ बताते हैं,
विस्तार समझाते हैं…

शिक्षक और स्कूल अनुभवों की,
योजना बनाते हैं।
शैक्षणिक उद्देश्य, शैक्षिक अनुभव,
अनुभव संगठन, शिक्षार्थी आंकलन,
ये चार मुद्दे बताते हैं।
विस्तार समझाते हैं…

एनसीएफ पाठ्यचर्या और पाठ्यक्रम,
दोनों को अलग बतलाता है।
अनेक पहलुओं पर दिशानिर्देश दे,
व्यवहारवादी और मनोविज्ञान पर,
आधारित बताते है।
विस्तार समझाते है…

एनसीएफ 2005 टैगोर जी सभ्यता,
प्रगति, रचनात्मक भावना, उदारता का,
बचपन से जुड़ाव बताते हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा निति में केंद्र योजनाओं,
शैक्षिक प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर साक्षरता को दर्शातें है।
विस्तार समझाते हैं…

ज्ञान को बाहरी जीवन से,
जुड़ाव कर पढ़ना बताते हैं।
शिक्षा और परीक्षा को एकीकृत कर,
शिक्षा में लचीलापन लाते हैं।
विस्तार समझाते हैं…

यूईई के अनुसार सामाजिक,
आर्थिक, मनौवैज्ञानिक, शारीरिक,
बौद्धिक विकास बच्चे का होना बताते हैं।
विस्तार समझाते हैं…

संविधान में शामिल अधिकारों,
और कर्तव्यों, प्रतिबद्धताओं का,
ज्ञान करा सभ्य नागरिक बनाना बताते हैं।
विस्तार समझाते हैं…

सीखने का ज्ञान सक्रिय रूप से,
जोड़कर विचारों की संरचना के,
साथ विचारो के पुनर्गठन कर,
शिक्षार्थियों का विकास बताते हैं।
विस्तार समझाते हैं…

बाहर की दो चीजों के,
स्कूल लर्निंग से संबंध कर,
बच्चों को प्रोत्साहित करते,
हुए जवाबदेही बनाते हैं।
विस्तार समझाते हैं…

एनसीएफ पाठ्यचर्या ढांचा-शिक्षक,
शिक्षा 2019-20 में स्कूलों में लागू कर,
नित नए शिक्षा आयामों को खेल विधि से,
बच्चों तक पहुंचाते है।
विस्तार बताते हैं…

6-12 के छात्रों के लिए शिक्षा में,
व्यवसायिकरण विषय ला रोजगार के,
नए पहलू से जोड़ना बताते हैं।
विस्तार समझाते हैं…

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

—————

  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए समझाने की कोशिश की हैं —समय के साथ-साथ शिक्षा नीति में बदलाव की अति-आवश्यकता है, समय-समय पर परिवर्तन बहुत जरूरी है। शिक्षा व्यवहार परक व प्रैक्टिकल हो। प्रैक्टिकल ज्ञान का होना बहुत ही जरूरी है, क्योकि कार्य करना है, बैठकर केवल सुनाना नहीं हैं। अच्छी व्यवहार परक शिक्षा वह है जिससे सामाजिक, आर्थिक, मनौवैज्ञानिक, शारीरिक, बौद्धिक विकास के साथ-साथ बच्चों के अंदर भारतीय संस्कृति, संस्कार व सभ्यता का समझ का विस्तार हो। संविधान में शामिल अधिकारों, और कर्तव्यों, प्रतिबद्धताओं का ज्ञान करा सभ्य नागरिक बनाना हो। शिक्षा ऐसी हो की बच्चें शिक्षा लेने के बाद व्यवसायिकरण वाला उनका दिमाग बने, और अपना व्यवसाय शुरू कर अपने साथ-साथ अन्य को भी रोजगार प्रदान करें। उम्मीद है की नई शिक्षा नीति से कुछ बदलाव जरूर होगा।

—————

यह कविता (राष्ट्रीय पाठ्यचर्या।) “विजयलक्ष्मी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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लता जी को भावभीनी श्रद्धांजलि।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ लता जी को भावभीनी श्रद्धांजलि। ♦

भारत रत्न स्वर कोकिला लता मंगेशकर जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए चंद लाइनें।

6 फरवरी 2022 की सुबह,
स्वरों की दुनिया में कैसा सन्नाटा छाया।
बसंत पंचमी सरस्वती मां पूजा कर,
स्वर कोकिला लता जी स्वर्ग में स्थान है पाया।
स्वरों की दुनिया में कैसा…

28 सितंबर 1929 को इंदौर में,
दीनानाथ मंगेशकर के घर जन्म पाया।
सुरीली आवाज की धनी ने बचपन में,
नाटक अभिनय में इतिहास रचाया।
स्वरों की दुनिया में कैसा…

13 वर्ष की आयु 1942 में,
सिर से पिता का उठ गया साया।
नवयुग चित्रपट के मालिक ने,
लता जी को एक सिंगर, अभिनेत्री बनाया।
स्वरों की दुनिया में कैसा…

कठिनाइयों से लड़ते हुए गायिका,
नूरजहां की तुलना में नाम था पाया।
कठिन परिश्रम से सफलता आगे,
फिल्मी दुनिया स्वर कोकिला नाम पाया।
स्वरों की दुनिया में कैसा…

25 भाषाओं में 50,000 से ज्यादा,
फिल्मों में लता जी ने गाने हैं गाये।
उनकी आवाज़ में गाने सुन,
कई बार आंखों में पानी भी भर आया।
स्वरों की दुनिया में कैसा…

सीमा पर तैनात सैनिकों को,
अपनी आवाज से हौंसला दिलाया।
सारी दुनिया व फिल्मी नगरी में,
लता जी के जाने से सन्नाटा है छाया।
स्वरों की दुनिया में कैसा……

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

—————

  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए समझाने की कोशिश की हैं —मां शारदे का उन पर था अनमोल वरदान, वीणापाणी मां के सर्वस्व संरचना में अनमोल संरचना थी हमारी लता जी। स्वर भी जिसका करता गुणगान, वो कोई और नहीं थी इंसान, हमारी लता जी थी वो महान, गायिकी से जिसने बढ़ाया देश का मान। कला जगत की तुम थी सिरमौर, नहीं था तुम्हारा कोई जोर, लता दीदी तुम थी बेजोड़। लता मंगेशकर (28 सितंबर 1929 – 6 फ़रवरी 2022) भारत की सबसे लोकप्रिय और आदरणीय गायिका थीं, जिनका छः दशकों का कार्यकाल उपलब्धियों से भरा पड़ा है। हालाँकि लता जी ने लगभग तीस से ज्यादा भाषाओं में फ़िल्मी और गैर-फ़िल्मी गाने गाये हैं लेकिन उनकी पहचान भारतीय सिनेमा में एक पार्श्वगायिका के रूप में रही है।

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यह कविता (लता जी को भावभीनी श्रद्धांजलि।) “विजयलक्ष्मी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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आओं! गले मिल आते हैं।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ आओं! गले मिल आते हैं। ♦

आओं! आज हम सब रिश्तों के गले मिल कर आते हैं।
जो रिश्ते रूठ गए उनको अपने भाव अर्पण कर जाते हैं॥

भारतीय संस्कृति ने ही तो विश्व में अपना डंका बजाया।
फिर इसके गुणों को ही हमने क्यूँ इस कदर भुलाया॥

हर खुशी-गम को गले लग कर लेते थे बाँट।
फिर मिल-बैठ हर समस्या को हँस कर देते थे काट॥

अपने बच्चों को संस्कारों के गले मिलाकर ले आयें।
तब सच में ही हम अपनी संस्कृति को अपनायें॥

रिश्तों को गले लगाना ही सब गिले-शिकवे को देता मात।
सुख भरे सवेरे में तब तब्दील हो जाती हर दुख की रात॥

संयम, सब्र, संतोष को आलिंगन बद्ध करते हैं।
स्वयं की झोली ही आज खुशियों से भरते हैं॥

अपनी प्रीत केवल श्रीकृष्ण-सुदामा जैसी बना पायें हम।
सच्ची दोस्ती को ही इस कदर गले लगा मिटाए जीवन के तम॥

बस निस्वार्थ भाव से अपने गुणों की खुशबू हम फैलायें।
आओं! आज हम सब मानवता के गुणों को गले लगाए॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — गले मिलना अपनत्व का अहसास दिलाकर सुकून महसूस करवाता है दिलों दिमाग तक। गले मिलना भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से ही चला आ रहा है, जो आज मॉडर्न ज़माने में Hug Day के नाम से जाना जाता है। आखिरकार हमारी ही प्राचीन संस्कृति को नए नाम से हमे परोसा जा रहा है, क्योकि हम अपने प्राचीन संस्कृति और संस्कार को भूलते जा रहे है, और पश्चिमी सभ्यता वाले इसी का फायदा उठा रहे है। हमें हमारी ही प्राचीन संस्कृति को नए नाम से हमे सीखाने की कोशिश कर रहे है। इसी तरह की बहुत सारी प्राचीन भारतीय संस्कृति है जो हम छोड़ने की गलती कर रहे है और इसी का फायदा सदैव से ही पश्चिमी सभ्यता वाले उठा रहे है। अब भी समय है संभल जाओ और अपने प्राचीन भारतीय संस्कृति, सभ्यता व संस्कार का पूर्ण तन, मन से पालन करों। वर्ना पश्चिमी सभ्यता द्वारा हम पर हमारी ही प्राचीन संस्कृति, संस्कार को नए नाम के साथ थोपा जायेगा अपना अविष्कार बताकर।

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यह कविता (आओं! गले मिल आते हैं।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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पीड़ा अंतः मन की।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ पीड़ा अंतः मन की। ♦

अर्दित की स्मृति करे लहूलुहान मुझे,
पल-पल की यादें करती छलनी मुझे।

उर-वेदना की पीड़ा दृश्य पुराना दिखलाती,
छटपटाती काया जिसमें मृत तुल्य बतलाती।

हृदि-माला के घट में विजन सहन तक ले जाती,
खालीपन का बोध करा तन-निभृत कर ले आती।

द्रवित मन मेरा कसक हिय का ही बतलाये,
निशदिन खुद का दमन करूं अंतस् ये समझाये।

तेरा कुछ नहीं जग में विकल हो क्यूं तू फिरता,
अतिशय का रख बोध तन-मठ ही तेरा ही रहता।

इक दिन भस्मीभूत हो चिरयुवा तू हो जायेगा,
दारुण रुदन करता पुंगल तेरा चिरशान्त हो जायेगा।

आवेश न कर जग से तू तुझे जितना निसर्ग ने दिया,
अपने स्‍वप्‍न को अन्तर्घट में रख भव ने भार ले लिया।

सब सम्भाला हिय में अपने अधर तक न आने देना,
क्षण-क्षण जो बीते तुझपर होंठों को तुम सिल लेना।

पल-पल की पीड़ा से नम कारक दारुण हो ले,
शैल-शिखा की गति अपने खचित-उर तू कर ले।

अंतः मन की अर्दित सुध को प्रेत-पट समझ ओढ़ ले,
इक दिन उदधिमेखला के तन पर अर्घट बन उड़ ले।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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  • “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल`“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — जब अंतः मन में पीड़ा होती है उस समय मन में चलने वाले विचारों और भावनावों को बताया है। जब भी अंतः मन में पीड़ा होती है मन के अंदर किस-किस तरह से संकल्पो का उथल पुथल चलता है इसे समझाने की कोशिश की है। अतीत के पीड़ादाई दृश्य को मन का दर्पण बार-बार दिखलाता है, जिसमें तन व मन को बहुत ही ज्यादा पीड़ा दिखलाती, जैसे की मृत तुल्य हो ये काया। अंतः मन में पीड़ा को हृदय की अंतः गहराई तक ले जाती व खालीपन का बोध करा तन-निभृत कर ले आती वापस। मेरा द्रवित मन बार-बार मुझें ये बतलाये, निशदिन मैं खुद का दमन कर रहा हूँ आंतरिक मन यही समझाए। अंतः मन सदैव ही यही समझाए इस संसार में कुछ भी नही है तेरा फिर इस मोह पास में क्यों फस कर रोता है तू। एक दिन ये तन आग के हवाले होकर भस्मीभूत हो जायेगा। ये रोता हुआ तेरा मन चिरशान्त होकर सो जायेगा। आवेश में आकर दुनिया से तू बैर न कर, तुझें जितना ये प्रकृति ने दिया उसे सही से उपयोग कर। अपने स्‍वप्‍न को अंतः मन में रख कर अंतः आत्मा ने भार ले लिया।

—————

यह कविता (पीड़ा अंतः मन की।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।

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क्या बदलाव लायेगा नया साल।

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