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हिन्दी-कविता

माहिया छंद – माँ दुर्गा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ माहिया छंद – माँ दुर्गा। ♦

— 1 —
पर्वत से आयेगी
माँ शेरों वाली
रहमत बरसायेगी।

— 2 —
घर – घर जयकारा हो,
माँ का उत्सव है
रौशन जग सारा हो।

— 3 —
दुःख सारे हर लेगी
संकट हरणी माँ
अब झोली भर देगी।

— 4 —
जब चूनर लहरायी
समझ गये सारे
माँ आयी … माँ आयी।

— 5 —
दुर्गा अम्बे काली,
हे माँ जगदम्बे
हर ले विपदा सारी।

— 6 —
करते हैं हम वन्दन,
जगदम्बे तेरा
हम माटी तुम चन्दन।

— 7 —
करती हूँ मैं विनती,
करुणाकर मैया
सुन लो सब के मन की।

— 8 —
मैया अब आ जाओ,
हलुआ पूड़ी का
तुम भोग लगा जाओ।

— 9 —
किरपा मिल जायेगी,
मैया जो चाहे
विपदा टल जायेगी।

— 10 —
सारे जग की मैया,
भक्त खड़े द्वारे
पार लगाओ नैया।

♦ वेदस्मृति ‘कृती’ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

—————

  • “वेदस्मृति ‘कृती’ जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए —माँ दुर्गा का आह्वान किया है, दुःख सारे हर लेगी, संकट हरणी माँ अब झोली भर देगी। आओ हम सब मिलकर माँ दुर्गा का आह्वान करें। माता रानी हम सब के सब दुःख हर कर हमारी झोली खुशियों से भर दे। ॥ प्रेम से बोलो जय माता दी ॥

—————

यह माहिया छंद / कविता (माहिया छंद – माँ दुर्गा।) ” वेदस्मृति ‘कृती’ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/गीत/दोहे/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई आई टी . शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक. समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

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माँ कालरात्रि।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ माँ कालरात्रि। ♦

कालरात्रि आकर भक्तों के,
अंधकार नष्ट करती है।
कल्याण कारिणी-मंगल रूपिणी,
हम सदैव प्रणाम करते हैं॥

हंसिया हाथ में धारण करती,
तन बाघाम्बर ढके रहती।
अभीष्ट कार्य सिद्ध करती,
ज्ञानमयी ज्योति भरती॥

मां कृपा जिस पर कर दी,
विघ्न का विनाश करती।
ग्रह – बाधा दूर कर देती,
भय मुक्त – भक्त को करती॥

सहस्त्रार चक्र जाग जाता,
सिद्ध द्वार खुल जाता।
कांटेदार कटार रखती,
दुश्मन पर वार करती॥

सातवें दिन पूजा विधान,
शुभंकरी भी है नाम।
कालरात्रि स्वरूप डरावना,
सदैव शुभ फल है देता॥

अग्नि, जल शत्रु आदि से,
तुम ही भय मुक्त करती।
आराधना तेरी है न्यारी,
अक्षय पुण्य देने वाली॥

उपासना तुम्हारी जो करता,
मृत्यु भय से मुक्त रहता।
माई तोहार वरण काला,
भय मुक्त करने वाला॥

राक्षस ठहर नहीं पाता,
जो तेरे सामने आता।
साधना तुम्हारी न्यारी,
भक्तों की करे रखवारी॥

तीन नेत्र हैं मां तेरा,
तीनों लोक का घेरा।
साधक के मन भाती हैं,
सुख समृद्धि देती हैं॥

चन्द्र खड्ग धारण करती,
दुश्मन – नाश करती हैं।
दो हाथ में शंख ध्वनि से,
भीषण ध्वनि निकलती॥

तेरी महिमा महान तेजस्वी,
जय जय जय कार करूं मां।
तेरे द्वारे आया हाथ फैलाए,
मेरा बेड़ा पार करो मां॥

“ॐ देवी कालरात्रि नम: ॐ “

स्तोत्र पाठ करने का नियम —

  • स्तोत्र पाठ मानसिक नहीं करना चाहिए।
  • वाणी से अस्पष्ट उच्चारण उत्तम नहीं मानना चाहिए।
  • बहुत जोर से बोल कर पाठ नहीं करना चाहिए।
  • शुद्ध एवं स्थिर चित्त से पाठ करना चाहिए।
  • उतावले पन में जोर – जोर से नहीं पढ़ना चाहिए।
  • पाठ याद न हो तो पुस्तक से देखकर पढ़ना चाहिए।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — माता रानी के कालरात्रि स्वरूप के गुणों और शक्तियों का बखूबी वर्णन किया है। शेर पर सवार माँ का शांत रौद्र मुद्रा वाला रूप सर्व व्यापकता, सर्व सुख देने वाली। पाप नाशक, ध्यान पूर्वक जो भी पूजन करता माँ कालरात्रि देवी का, जीवन उसका सुखदायी हो जाता। माँ कालरात्रि देवी है बहुत ही दयालु अपने भक्तों पर सदैव ही माँ है बलिहारी। सच्चे मन से जो भी इंसान माँ के इस रूप का पूजन व भजन करता उसे जल्द ही सुख, समृद्धि ज्ञान – शक्ति भरपूर मिलता। आओ हम सब सच्चे मन से माँ कालरात्रि देवी का पूजन व भजन करे।

—————

sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (कालरात्रि) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

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हे आदिशक्ति।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हे आदिशक्ति। ♦

अब तो आजा!
हे करुणावतार!
कुमकुम लगें पैरों से अब आजा।
इस दुनिया को चैन,
अमन का रास्ता दिखा जा॥

तेरी राहें बुहारें हैं, कब से हम।
आ मिटा दे ये चारों ओर फैला तम।
भीगी पलकों से तड़पते ह्रदय ने …
तुम्हें ही पुकारा है।
हम तेरे दीवानों को न कोई और सहारा है॥

तुझें बरसाना ही होगा,
अपनी करुणा का जल।
दहकती ज्वाला को शांत,
तुझें ही करना होगा।
चाहे तू आज करें या कल॥

हमने तो भिखारी बन,
दामन यहां ही पसारा है।
हे आदिशक्ति, झोली भर,
एक तूही तो जीवन का उजियारा है॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से — आदिशक्ति माँ का आह्वान किया है। इस कविता में भक्त के मन में चलने वाले भावों को बखूबी व्यक्त किया है। हे आदिशक्ति माँ हम पर बरसा अपनी करुणा का जल, हमने तो दामन यहां ही पसारा है। हे आदिशक्ति, झोली भर, एक तूही तो जीवन का उजियारा है।

—————

यह कविता (हे आदिशक्ति।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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माँ चंद्रघंटा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ माँ चंद्रघंटा। ♦

माता चंद्रघंटा जी के घंटे के कंपन से,
मन की नकारात्मक ऊर्जा सकारात्मक हो जाती है।
ऊर्जा का यह बदलाव मानव हृदय के,
भाग्य को बदलकर समृद्ध बना देती है॥

मनुष्य के जीवन में सुख शांति तथा खुशहाली आती है।
श्रद्धालुओं की साधना एवं मनोकामना पूरी हो जाती है।
मानव का शरीर और हृदय आनंद से भर जाता है।
उसके स्वर में दिव्य कांति और मधुरता का समावेश हो जाता है॥

माता का भजन स्व लिखित एक और प्रस्तुत कर रहा हूं …

शांति स्वरूपा चद्रघंटा,
दुनिया में तोहार मान हौ।
कल्याणकारी मैया,
जगत तूही से प्रकाशमान हौ॥

शरण में तेरे शीश झुकाया,
तेरा भक्त दर पर आया।
तुम्हारी शरण जो भी आता,
खाली हाथ नहीं जाता॥

तेरी शरण में तेरा भक्त,
भक्त के भक्ति को विचार दो।
बदली हुई मेरी भावना,
माता जी सद विचार दो॥

सुनो ! भक्त को माता लोक –
परलोक में सद्गति देती हो।
दर पर तेरी मेरी चेतना में,
दैवीय – निखार दो॥

तू जीवन परिवर्तन करके,
भाग्य समृद्धि करती हो।
साधक के सिर की बाधा,
क्षण में दूर हटा देती हो॥

भक्तों के कष्टों का निवारण,
शीघ्र ही कर देती हो।
सकारात्मक ऊर्जा भर कर,
भक्त का दिल खुश करती हो॥

शरणागत की रक्षा तुम,
प्रतिपल करती रहती हो।
अपनी भक्तों को मां,
पराक्रमी बनाए रखती हो॥

उसके मुख मंडल पर,
कांति धैर्य की वृद्धि करती हो।
उसकी मन वचन काया को,
परिपूर्ण – पवित्र करती हो॥

स्वर सार्थक में विनम्रता,
माधुर्य – समावेश लाती।
धीरता वीरता निर्भीकता,
सर्वदा बनाए रखती हो॥

भक्त के मन में नकारात्मक,
ऊर्जा फटक नहीं पाती।
जिसके ऊपर माता कृपा,
दिल से तेरी हो जाती॥
” ॐ देवी घंटा दी “

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — माता रानी के चंद्रघंटा स्वरूप के गुणों और शक्तियों का बखूबी वर्णन किया है। शेर पर सवार माँ का शांत रौद्र मुद्रा वाला रूप सर्व व्यापकता, सर्व सुख देने वाली। पाप नाशक, ध्यान पूर्वक जो भी पूजन करता माँ चंद्रघंटा देवी का जीवन उसका सुखदायी हो जाता। माँ चंद्रघंटा देवी है बहुत ही दयालु अपने भक्तों पर सदैव ही माँ है बलिहारी। सच्चे मन से जो भी इंसान माँ के इस रूप का पूजन व भजन करता उसे जल्द ही सुख, समृद्धि ज्ञान – शक्ति भरपूर मिलता। आओ हम सब सच्चे मन से माँ चंद्रघंटा देवी का पूजन व भजन करे।

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शारदा प्राकट्य – बसंत पंचमी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शारदा प्राकट्य – बसंत पंचमी। ♦

हाथ में वीणा और पुस्तक,
माँ के दर सिर झुकाया जाए।
बागेश्वरी की जयंती तिथि,
शारदा माँ को मनाया जाए॥

पांच तत्व व बसंत पंचमी,
जभी एक जगह मिल आते ही।
ज्ञान तत्व और अमृत तत्व,
अमृत – ज्ञान बरसातें हैं॥

विद्या तत्व औ बुद्धि तत्व मिल,
सारे जहां सद्भाव लाते हैं।
प्रकृति तत्व भी जब मिलता,
आदिशक्ति सामने आती है॥

उनके हाथों में जप माला,
कमल – पुस्तक धारण करती।
तरुण चंद से शोभित मोती,
अभीष्ठ इच्छा प्रदान करती॥

कुंद – पुष्प सी कांति चमकती,
प्रकाशित शारदा प्रकट होती।
शारदा कुंडलिनी कहलाती,
सदा ज्ञान की ज्योति जगाती॥

माता के हाथ की वह पुस्तक,
सूक्ष्म ज्ञान की सूचक है।
एकाग्रता, मातृ शक्ति सूचक,
हाथों में माँ की माला है॥

कमलासन है सृष्टि प्रतीक,
ज्ञान मुद्रा सर्व व्यापकता है।
माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी,
बसंत पंचमी कहलाती है॥

पाप मोचनी तिथि पञ्चमी,
बागेश्वरी जयंती तिथि तय!
ध्यान पूर्वक जो पूजन करता,
जीवन उसका सुखदायी है॥

विशुद्ध वस्त्र धारण करती,
चंद्रप्रभा उनसे तुच्छ जैसे।
सदा सुंदरी हंसती रहती,
देवताओं से सुशोभित हैं॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — माँ शारदा देवी के प्राकट्य से लेकर उनके रूप गुणों और शक्तियों का बखूबी वर्णन किया है। कमलासन पर विराजित माँ का ज्ञान मुद्रा वाला रूप सर्व व्यापकता, सर्व सुख देने वाली। पाप मोचनी तिथि पञ्चमी को बागेश्वरी जयंती तिथि तय! ध्यान पूर्वक जो भी पूजन करता माँ शारदा देवी का जीवन उसका सुखदायी हो जाता। माँ शारदा देवी है बहुत ही दयालु अपने भक्तों पर सदैव ही माँ बलिहारी। सच्चे मन से जो भी इंसान माँ के इस रूप का पूजन व भजन करता उसे जल्द ही ज्ञान-शक्ति भरपूर मिलता। आओ हम सब सच्चे मन से माँ शारदा देवी का पूजन व भजन करे।

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sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (शारदा प्राकट्य – बसंत पंचमी।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

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बेटी पर है नाज।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बेटी पर है नाज। ♦

बेटी पर है नाज, बेटी ही विश्वास,
बेटी घर की साज, करती सब काज।
दो कूलों को संवारती है बेटी,
पापा की पाग सजाती है बेटी।

उनके है रूप अनेक, हर रूपों में रम वो जाती,
जीवन में मिले हर रोल, बड़ी संजीदगी से निभाती।
हर दुःख दर्द सह जाती, उफ तक न करती,
बेटी बन… पापा का नूर बन जाती।

मां बन घर को है स्वर्ग बनाती,
बहन बन भाई का रक्षा कवच बन जाती।
पत्नी के रूपों में सफल संगनी का हर फर्ज निभाती,
जिंदगी जिससे शुरू होकर जिस पर हो जाती खत्म।

उस बेटी का करें सम्मान, है वो बेटा के ही समान।
बेटा – बेटी में न कर फर्क, बेटी ही मान, बेटी ही सम्मान।
जगत में जिसका बढ़ रहा शान, हर क्षेत्र में कर रही देश का नाम।
फिर क्यूं होता उनका अपमान, गर्भ में जिनका रूढ़िवादी सोच से,
कर दिया जाता बिन दुनिया देखे, भ्रूण का ही नाश।

ऐसी हैवानियत की इन्तहा से, हो रहा मानवता का है ह्रास।
विवेक कर रहा जनमानस से, एक ही गुहार,
बेटी ही मान, बेटी ही हमारा अभिमान,
फिर क्यूं हो रहा उनका अपमान, छू रही चोटी, उड़ रही आसमान।

बेटा संग बेटी कंधे से कंधा मिलाकर कर रही हर काम,
सृष्टि की रचनाकार, प्यार से परिवार को रखती बांध।
ऐसी बेटी का करें मान – सम्मान,
करें उनकी महिमा का बखान, उनका करें सदा गुणगान।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ संदेश का कर उदबोधन,
होगा जगत का उद्धार, बेटी ही मान बेटी ही सम्मान।
बेटी पर है नाज, बेटी ही विश्वास।

♦ विवेक कुमार जी – जिला मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — बेटियां शक्ति, प्रेम, करुणा, ममता की वह चुलबुली चिड़िया सी चहकती, फूल सी महकती मुस्कुराती, राजकुमारी सबकी प्यारी लाड़ली – दुलारी, सबका सदैव ही ध्यान रखने वाली। ईश्वर द्वारा मानव जाती के लिए प्रदान की गई अनमोल शक्तिपुंज हैं। जो हर रूप में प्रिय और पालनहार है। बेटा संग बेटी कंधे से कंधा मिलाकर कर रही हर काम, सृष्टि की रचनाकार, प्यार से परिवार को रखती बांध। ऐसी बेटी का करें मान – सम्मान, करें उनकी महिमा का बखान, उनका करें सदा गुणगान।

—————

यह कविता (बेटी पर है नाज।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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गलियां गांव की।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ गलियां गांव की। ♦

आज न सखी महफूज रही,
अब देख ये गलियां गांव की।
अब मत करना आश कहीं तू,
घनी धूप में इनसे छांव की।

ये उगल रही है दारुण दंश निशी – दिन अब,
किसी का किसी पे रहा न आज भरोसा।
रही न नज़रें अब मां – बेटी को देखने वाली,
हर आंखों में आज बस गोश्त ही परोसा।

आज न जाने कब किस गली से?
निकल आए कोई हवस का प्यासा।
अपनी हिफाजत अब आप करो तुम,
मत बन जाना टी वी चैनल में तमाशा।

आज न है सिर्फ निशाचर से ही खतरे,
दिनचर ही झाड़ रहे हैं धूली निज पांव की।
साफगोई से झाड़ते हैं पल्ला फिर अपना,
महफूज कहां है अब गालियां गांव की?

घटना घट जाने के बाद है करते,
हंगामा फिर कानून के रखवाले।
रसूखदारों के चमकीले चांदी के जूते,
जड़ देते हैं इनके मुंह पर फिर ताले।

अब कहां बहती है वे पावन पवने?
गांव के छबीले सुंदर गलियारों में।
यहां महफूज नहीं बहू – बेटियां रही,
दिन के उजाले में न रात के अंधियारे में।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

• Conclusion •

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — अब क्या गांव ? क्या शहर ? कही भी बहू – बेटियां महफूज नहीं। कब किधर से निकल आए कोई हवस का प्यासा, कुछ नहीं खा जा सकता। इंसान के रूप में शैतान है अब यहां। जिस भी बहू – बेटी के साथ गलत होता है उनके दिलों – दिमाग पर नकारात्मक यादों के रूप में मन पटल पर लम्बे समय तक साया बनी रहती है। जो उनके दुखी करती रहती है। अब कहां बहती है वे पावन पवने? गांव के छबीले सुंदर गलियारों में।

—————

यह कविता (गलियां गांव की।) “हेमराज ठाकुर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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गुरु हमारे।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ गुरु हमारे। ♦

शिक्षक के पर्याय गुरु पर, आज इस कलम को लिखना है।
पर सच मानों, एक आदर्श शिक्षक की से भी, हमें सीखना है॥

इस शब्द की महानता तो, आज तक तो कोई सुना न पाया।
बस इनके गुणों के आगे, सबने शीश झुकाया॥

जितने गुणों को समाहित किया, वो सब इन्होंने दिया जिंदगी में।
बहुत कुछ नायाब मिला, सिर्फ इनकी बन्दगी में॥

जब ये पत्थर को भी तराशने पर आये, तो हीरा बन जाये कोहिनूर।
इनके जब आदर्शों पर चल पाए, तो जिंदगी में आये एक सरूर॥

ये तो वटवृक्ष है, जो जीवन में आदर्शों की छाया दे जाए।
ये वो अथाह सागर है, जहाँ बस प्रीत के मोती पाए॥

ये तो सितारा उस बुलंदी का, जिस पर आसमाँ भी हर्षाये।
ये तो जीवन की हरियाली है, जिस पर ये धरा भी इतराये॥

ये वो जौहरी है, जो परख – परख कर, खोटे को भी खरा बना जाए।
ये है वो कलाकार जो, पत्थर को भी तराश भगवान ले आये॥

कितनी ही उपाधियों से नवाजू इनको, ये भी नतमस्तक होती है इनके आगें।
जो एक सच्चे शिक्षक की उँगली भी थामे, उसके तो भाग्य जागें॥

मैं कौन हूँ, क्या हस्ती मेरी, सिर्फ इनके सजदे में ही शीश झुकाना।
इनके गुणों की रोशनी में, रहकर बस इस जिंदगी को जगमगाना है॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — कहते है की एक सच्चा शिक्षक जब अपने छात्र को तराशने पर आये तो पत्थर से हीरा बन जाये कोहिनूर। इस शब्द की महानता इतनी है की आज तक तो कोई सुना न पाया। बस इनके गुणों के आगे, सबने शीश झुकाया। ये तो वह वटवृक्ष है, जो जीवन में आदर्शों की छाया दे जाए। ये वो अथाह सागर है, जहाँ बस प्रीत ही प्रीत के मोती पाए सभी ने सदैव।

—————

यह कविता (गुरु हमारे।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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मनुष्य की चाह।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मनुष्य की चाह। ♦

कार्य कितना भी कठिन हो,
मनुष्य जो चाह दे।
पथ पर पड़े कांटे जटिल,
क्षण भर में ढाह दे।

दुनिया दागी – गमगीन,
जिंदा दिलवर ला दे।
है कौन इन्सा जहां में,
मोहब्बत की गीत सुना दे।

दिल पर पत्थर रख बैठा जहां,
माहौल खुशनुमा बना दे।
शहर आईना निहार बैठा,
कोई तो चिराग जला दे।

शांति वीरान हुए जुल्म बहुत,
यारी पक्की करा दे।
सूख गई स्याह गुलशन की,
महफिल का रंग जमा दे।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — कोई भी कार्य कितना भी कठिन क्यों न हो, जब इंसान सच्चे मन से उस कार्य को करना चाहे तो, वह कार्य आसान हो जाता है। बस जरूरत है सच्चे मन से दृढ़ता के साथ उस कार्य की शुरुआत कर पूर्ण करने की।

—————

sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (मनुष्य की चाह।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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हो गए जुदा हम मिलने से पहले।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हो गए जुदा हम मिलने से पहले। ♦

ढह गये उम्मीदों के स्तंभ,
छत बनने से पहले,
हो गये जुदा हम मिलने से पहले।

रह गई तड़पती, ए रूह जिंदगानी,
हुईं ना मुक्कमल जुबां की रुहानी।
बूझ गये दीये तमाम, जलने से पहले,
हो गये जुदा हम, मिलने से पहले।

ख़्वाहिश थी दिल की दीदार-ए-स़नम की,
रह गई अधूरी मेरे बात मन की।
मुरझा गये फूल, खिलने से पहले,
हो गये जुदा हम, मिलने से पहले।

एक रोज आंधी चली इस क़दर की,
बिखरे ये अरमां हुए दर बदर की।
सात टूटे वचन साथ चलने से पहले,
हो गये जुदा हम, मिलने से पहले।

ना उससे शिकायत ना मुझमे कमी थी,
दोनों के आंखों में ऐसी नमी थी।
बने थे एक दूजे के एक होने से पहले,
पर हो गये जुदा हम, मिलने से पहले।

♦ अमित प्रेमशंकर जी — एदला-सिमरिया, जिला–चतरा, झारखण्ड ♦

—————

Conclusion

  • “अमित प्रेमशंकर“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — जब भी इंसान किसी से बेहद प्यार करते, जो दिल के बहुत करीब होते है और वो अपना बनने वाला होता है, लेकिन अपना बनने से पहले ही हमसे दूर चला जाता है उस समय मन की क्या परिस्थिति, मन में क्या उथल – पुथल चलता है, इसका बहुत सटीक वर्णन किया है।

—————

यह कविता (हो गए जुदा हम मिलने से पहले।) “अमित प्रेमशंकर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। आपकी ज्यादातर कविताएं युवा पीढ़ी को जागृत करने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

नाम: अमित प्रेमशंकर
पता: एदला – सिमरिया
जिला: चतरा (झारखण्ड)
सम्प्रति: कवि, गीतकार व ढोलक वादक।

प्रकाशित पुस्तकें: आत्म सृजन, काव्य श्री, एक नई मधुशाला १, एक नई मधुशाला २, भावों के मोती, व अक्षर पुरूष।
प्रकाशित रचनाएं: देश के अलग-अलग पत्र पत्रिकाओं मे लगभग दो सौ रचनाएं प्रकाशित व समय समय पर सामाचार पत्रों के माध्यम से पत्राचार।
विशेष: “सीता माता सी कोई नहीं” तथा “आज राम जी आएंगे” महाराष्ट्र के वरिष्ठ साहित्यकार श्री ओ. सी. पटले द्वारा पोवारी भाषा में अनुवाद।

प्राप्त सम्मान: काव्य श्री साहित्य सम्मान, आत्म सृजन साहित्य सम्मान, सरदार भगतसिंह साहित्य सम्मान, सुमित्रानंदन पंत कृति सम्मान, साहित्य कर्नल सम्मान, रैदास साहित्य सम्मान, द फेस ऑफ इंडिया सम्मान, दिल्ली युथ डेवलपमेंट से सम्मानित।
प्रकाशनार्थ: मन की धारा

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