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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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poetry in hindi

त्रिभाग पर भरोसा करूं।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ त्रिभाग पर भरोसा करूं। ♦

बंट चुका त्रिभाग में
किससे कहूं।
हो गया अवसाद माना
कैसे लिखूं।

हृदय शरीर दिमाग जाना
क्या कहूं।
पहले शरीर से अलग
किससे कहूं।

शरीर से अलग है हृदय
अलग दिखा दिमाग,
कहां पलूं।
देती शरीर जवाब
कैसे चलूं।

खुश रहता हूं फिर भी,
ब्रह्मा विष्णु महेश में,
यादों से कहता।

जैसे चलाएं।
चलता चलूं।
मचलता चलूं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – कौन हूँ मैं, शरीर, हृदय, या दिमाग। कौन शरीर से अलग है, भगवान चलाते जैसे चलाएं, चलता चलूं, मचलता चलूं। आत्मा, शरीर, हृदय, व दिमाग के बीच तालमेल।

—————

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यह कविता (त्रिभाग पर भरोसा करूं।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

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सोशल मीडिया – भारत।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ सोशल मीडिया – भारत। ♦

भारत पहले सबको मिलकर समझाता है।
सभ्यता और संस्कृत का उसको ज्ञान कराता है।
भारत की संस्कृति में यही कहा जाता है,
सबको यह पहले बहुत खूब समझाता है।

मनमानी करने वालों को ज्ञान पहले बताता है।
नियम और कानून का ध्यान उसको कराता है।
त्याग और तपस्या का भी पाठ उसे पढ़ाता है।
अहिंसा और शांति का संदेश उसको सिखाता है।

पुरुषोत्तम का देश है भारत उनका मान दिखाता है।
सूर्पनखा रावण की बहना उसको भी समझाता है।
श्रीराम द्वारा लक्ष्मण की तरफ ध्यान दिया जाता है।
इधर उधर जाकर भी जब नहीं मानती शूर्पणखा है।

अंत कोप भाजन से नाक अपनी कटवा दी है।
जबकि श्रीराम द्वारा उसको समझाया जाता है।
एक कथा और सुनाने का मन कर जाता है।
बालकृष्ण के पास कंस की बहन को भेजा जाता है।

उसका भी अंत श्री कृष्ण द्वारा किया जाता है।
कहने का तात्पर्य ही है जो भारत में आया है,
भारत के बने कानून का पालन उसको करना है।
मनमानी इस देश में कहीं नहीं चलने वाला है।
एक समय तक ही उसको छूट दिया जाता है।

इसलिए नियम कानून के अंदर काम करने हैं।
शांति और विश्व बंधुत्व से यहां पर आने हैं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – यह आर्यावर्त – हमारा भारत देश है, हम सभी का दिल से सम्मान करते है यहाँ। लेकिन यहाँ पर रहना है तो – भारत के बने कानून का पालन उसको करना है। मनमानी इस देश में कहीं नहीं चलने वाला है, एक समय तक ही उसको छूट दिया जाता है। इसलिए नियम कानून के अंदर काम करने हैं। शांति और विश्व बंधुत्व से यहां पर आने हैं।

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यह कविता (सोशल मीडिया – भारत।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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श्री कृष्ण द्वारा वसुदेव को ब्रह्म ज्ञान।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ श्री कृष्ण द्वारा वसुदेव को ब्रह्म ज्ञान। ♦

श्री कृष्ण बलराम जी वसुदेव जी को,
प्रातः दोनों आकर किया प्रणाम।
दोनों भाइयों का उन्होंने किया अभिनंदन,
ऋषियों के श्री मुख से सुना था जैसा वंदन।

हृदय से वसुदेव जी करने लगे दोनों से आलिंगन,
सच्चिदानंद स्वरूप का होने लगा उन्हें दर्शन।
वसुदेव बोले सच्चिदानंद स्वरूप श्री कृष्ण,
और मेरे महायोगेश्वर संकर्षण।

तुम दोनों ही जगत के हो प्रधान,
पुरुष के भी नियामक परमेश्वर।
तुम ही इस मायावी जगत के आधार हो,
तुम ही निर्माता और निर्माण सामग्री हो।

तुम दोनों जगत के स्वामी हो।
सब कुछ धारक तुम ही हो।
तुम भोग्य और भोक्ता से परे।
साक्षात भगवान तुम ही हो।

जगत की वस्तुओं के सृष्टिकर्ता,
पालन पोषण करता तुम ही हो।
विनाश वान सभी पदार्थों में तुम,
कारण रूप अविनाशी तत्व हो।

हो रहस्य ज्ञान योग माया का,
तुम्हारी कीर्ति गान लोग करते हैं।
भजन सुनकर श्री वासुदेव जी के,
भक्तवत्सल कृष्ण मुस्कुराने लगे।

विनय पूर्वक झुककर पिताजी को,
सु-मधुर वाणी में सुनाने लगे।

हम तो आपके पुत्र ही हैं पिता जी।
हमें लक्ष्य कर आपने ब्रह्म ज्ञान का,
उपदेश आप ही हमें सुनाने लगे।
मैं हूं! वही! सब आप ही बताने लगे।

जैसे छिति जल पावक गगन समीरा,
एक होते हुए अलग-अलग कहलाने लगे।
पंचमहाभूत अप्रकट – प्रकट होकर,
बड़े छोटे अधिक थोड़े दिखने लगे।

वैसे ही मैं! और बलराम जी भी,
भेद से ही दो पहचाने जाने लगे।

धरा पर जन्म – मृत्यु चक्कर रूप,
भटकते हुए जीव निमित्त आने लगे।
हम दोनों अन्याय के खिलाफ अपना,
आकर यहां शस्त्र उठाने लगे।

शरणागत उनके संसार भय को मिटाने लगे,
इस धरा को भार से मुक्ति दिलाने लगे।
मंगल प्रभु के श्री – चरण में जाने लगा,
अमृत तत्व सुख सागर सबको सुनाने लगा।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – श्री कृष्ण और वासुदेव जी के मिलन और संवाद का सुर मधुर वर्णन किया है। जहाँ एक तरफ पिता – पुत्र पर प्रेम वात्सल्य बर्षा रहा है तो, वहीं दूसरी तरफ श्री कृष्ण जी, वासुदेव जी को ब्रह्म ज्ञान दे रहे है। इस मधुर मिलन के साक्षी बलराम जी है।

—————

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यह कविता (श्री कृष्ण द्वारा वसुदेव को ब्रह्म ज्ञान।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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बंजर जमीं पे भी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बंजर जमीं पे भी। ♦

अदाओं में उसके सवालात होगी।
निगाहों में उसकी करामात होगी।
बच के कहाँ जायेगा तेरा आशिक।
मुझको यकीं है मेरी मात होगी।

सोचा ना था ये भी हालात होगी।
सरेआम रूसवा यूँ जज्बात होगी।
किसी और के पहलू में सिमटकर।
मेरी जां यूँ तुमसे मुलाकात होगी।

निशाने पे हाँ अब मेरी जात होगी।
खतरे में धर्म भी और औकात होगी।
वर्षों से सोया समाज भी जागेगा।
बहुत जल्द ये भी तिलस्मात होगी।

तोहमत की बौछार, आघात होगी।
बाकी सभी मसलों पे बात होगी।
है कौन बेवफा किसने वादा निभाया।
ये सवाल टालकर जश्न की रात होगी।

करूँ चिर प्रतीक्षा मैं दरख्वास्त होगी।
वो एक बार कह दे कि फिर प्रात होगी।
बदलेगा पहलू, पहेली और मौसम।
सुध! बंजर जमीं पे भी बरसात होगी।

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है – जीवन में कितना भी उतार चढ़ाव आए, कितनी भी विपरीत परिस्थिति आए यूँ ही घबराकर रुकना नहीं, एक न एक दिन फिर जीवन में बरसात होगी।

—•—•—•—

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यह कविता (बंजर जमीं पे भी।) “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: चली जाती है।
  • जरूर पढ़े: अच्छा लगता है।

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हंसिया।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

♦ हंसिया। ♦

हंसिया हल्के हाथ की,
मालिक से लड़ जाए।
खटर पटर करके चली।
गटर – गटर घर खाए।

हरीयर चारा चटक – चटक,
लपक – लपक नर लाए।
झटक – झटक उस चेहरे को,
मालिक द्वार पर लाए।

पटर पटर चारा मशीन से,
हरीअर चारा बाला जाए।
खेती गहबार अरहर की,
हच हच हंसिया काट गिराए।

धार प्रक्षालन रेती पर कर।
अरहर मालिक घर लाए।
धीराता वीरता के गुण सदा,
मनुष्य में मालिक बताए।

हसिया हाथ हिलाते जाती।
योग साधना बताने आती।
मन मौसम बनाने आती।
नारायण कोठीला भर आती।

अपनों को अपनापन सिखाती।
वह बार-बार लड़ने को जाती।
भूखे भक्तों की भूख मिटाती।
विश्व क भाव का पाठ पढ़ाती।

हंसकर हंसिया हाथ आती।
फंसरी काट मुक्ति दिलाती।
हंसिया हाथ हिलाते जाती।
विविध तरह का रूप दिखाती।

मदुआ सांवा खूब काटती।
उड़द टामुन से घर भारती।
चना चबैना गंगाजल अमृत।
हंसिया के मुठिया में रहता।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – बहुत सारे उदाहरण देकर हंसिया के महत्व और हंसिया के कार्य व गुणों को कवि ने बखूबी अक्षरस वर्णित किया हैं। हंसिया किस तरह से एक किसान का महत्वपूर्ण औजार हैं, मुख्य रूप से चारा काटना हो, गेहूँ, जौ, धान, बाजरा या कोई अन्य फसल काटना हो हंसिया का ही मुख्य रोल होता हैं।

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एक दिन फोन आया।

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CYMT-KMSRAJ51-4

♦ एक दिन फोन आया। ♦

विश्व गाथा प्रकाशन से,
मुझे फोन आया।

अ हिंदी क्षेत्र गुजरात,
से भी विश्व गाथा का,
प्रकाशन होता बताया।

लखनऊ में आफिस को,
एक है गाथा का बताया।

हमने उनसे जब नाम,
श्रीमान का जानना चाहा।
उन्होंने प्यार से नाम अपना,
पंकज त्रिवेदी हमें बताया।

हमने कहा श्रीमान आपकी,
पारदर्शिता ही विश्व गाथा,
को ऊंचाई प्रदान किया है।

आगे बढ़कर हिम्मत जुटाया।
अवध निवासी सुख मंगल सिंह।
अपना नाम उन्हें दर्ज कराया।

सोमवंशी क्षत्री कुल मेरा फरमाया।
काशी में प्रवासी हुकुम मैं बताया।
मां भगवती और गंगा को मनाया।
बाबा विश्वनाथ में दिल लगाया।

त्रिवेदी जी के दीर्घायु की कामना।
हमने फोन पर ही उन्हें सुनाया।
नमस्कार बंदगी के दरमियान।
काशी से अपना नाता है सन पाया।

हां जहां तक मुझे याद आता है।
सितंबर 2017 की यह बात है।
बड़े लोगों से बात कभी होती है।
हृदय में उमंग विशेष होती है।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – विश्व गाथा प्रकाशन से, फ़ोन कॉल आया, कवि ने कविता के माध्यम से प्रशंसा करना बताया। कैसे किसी की प्रशंसा करें, और शॉर्ट में अपना परिचय दिया। फोन कॉल के दौरान आपको कैसा व्यवहार करना चाहिए ये समझाया।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

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पुकार।

Kmsraj51 की कलम से…..

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♦ पुकार। ♦

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढो।

समर सुनसान पड़ा है।
लूटते देख मां की लाज।
निज जंगी बेड़ा पास पड़ा।
बलिदान, बलिदान खड़ा है।

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढ़ो।

कुर्बानी की जंग है लड़नी।
दुश्मन त ललकार रहा है।
फौलादी जंगी बेटा को,
तुम भी तो तैयार करो।

दुश्मन सीमा पर तैनात खड़ा है।
सीमा पर तैनात वह अड़ा है।

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढ़ो।

खड़ा शहीदी जत्था भी,
तुझको आज पुकार रहा है।
सुनसान समर निहार रहा।
बलवीर पुंज बनकर उभरों री।

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढ़ो।

त्याग तपस्या बलिदान का,
यही रहा है केंद्र बिंदु।
मंगल आज पुकार रहा है।

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढ़ो।

चारों तरफ बिछी देख,
लाशों की जब ढेर।
झुकने देना कभी नहीं,
भारत मां का शीश।

होगा तो ढूंढो, पढ़ो बहादुर बढ़ो।
चढ़ो बहादुर बढ़ो, चलो वीर बढ़ो।

तपोभूमि हर ग्राम हमारे,
कवि की वाणी गाती है।
लोरी गाती शाम को,
माता गाय हमारी प्यारी है।

कहां सिंह बन गए खिलौने,
वाली रानी बलिदान खड़ा है।
पढ़ो बहादुर पढ़ो,
लड़ो बहादुर लड़ो।

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढ़ो।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – सैनिकों का उमंग – उत्साह बढ़ाते हुए कवि कहते है, चाहे कुछ भी हो जाये कभी भी झुकने ना देना भारत माँ का शीश। त्याग तपस्या बलिदान का, यही रहा है केंद्र बिंदु। उठो बहादुर उठो। बढ़ो बहादुर बढ़ो।

—————

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यह कविता (पुकार।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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उठे ज्वार, भटका पनिहार।

Kmsraj51 की कलम से…..

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♦ उठे ज्वार, भटका पनिहार। ♦

हृदय में ताला कहां लटकता।
मन में केवल भ्रम पलता है।
मंजिल पर नजर टिकी हुई हों।
संवाद हकीकत होता ही है।

सूख गई स्याही हो तो भी।
दिल तो एक समंदर सा है।
आश्वासन में दुनिया चलती।
आमंत्रण में केवल बेचैनी है।

शब्द बाण से आंगन मेरा,
बुरी तरह पीट रहा।
बीच गगन टिमटिमाता दीपक।
जाने कब से दिख रहा।

असह्य वेदना परिपूर्ण भावना।
जब – जब निकले।
सुहाग छोटा ज्वार बृहद दिखता।
भाव – भक्ति में खोलें।

चरण जमी मन मंगल गगन उड़े।
तो वह जीवन बोले।
मानव मन की बस यही कहानी।
लड़ कर जो ले ले।

आंगन में आने वाले अंधियारे।
दिव्य प्रकाश ले रहा किनारे।
मंगलमय मंगल मनोहर गीत।
सुमधुर सुंदर प्रकृति सहारे।

आजकल लोगों को क्या हो गया है।
आख्यान से आंसू का मर गया है।
आकांक्षा इच्छाएं अनवरत बढ़ती गई।
आबरू उतार तार साहित्य में उतर गई।

दिल में जब जब चिराग जलता है।
देवासी समाज तब बनता है।
हाउस अली उमंग नेक काम करते हैं।
अपने और पराए का ख्याल रखते हैं।

मेरे गांव आते ही वह पाषाण हो गया।
मुखड़े बारिश के ठहराव आ गया।
मकान मन मंगल ऐसा बनाए जनाब।
छप्पर में पहले से ही रिसावर आ गया।

हंस कर अपना दिन काटिए जनाब।
सुख मंगल की तरह।
मिल गया हो दिल का कोई साथी।
गर समंदर की तरह।

जब – जब देखा एक गगन नारंग का।
जाने जीवन क्यों मगन था।
यूं तो कुछ कलियां निकली अधखुली।
मुरझाई पर अद्भुत सघन थीं।

अपने मीत गीत हम गुनगुनाते रहे।
सदा आपको हम याद आते रहें।
लोग इतनी करें काम मिलकर सभी।
गीत सुंदर सदा मिलकर गाते रहें।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – बहुत सारे उदाहरणों के माध्यम से कवि कहते है की कैसी भी विपरीत परिस्थिति क्यों न हो जीवन में कभी भी दुखी होकर बैठ न जाना। कोई भी दुःख लंबे वक्त के लिए नहीं ठहर सकता आपके जीवन में, इसलिए सदैव ही मुस्कुराते रहे। धैर्य से कार्य करते हुए आगे बढ़ते रहे जीवन में।

—————

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यह कविता (उठे ज्वार, भटका पनिहार।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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इतिहास को जीना होगा।

Kmsraj51 की कलम से…..

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♦ इतिहास को जीना होगा। ♦

हमें इतिहास को फिर-फिर से जीना होगा।
तस्वीर बजरंग लॉकअप में ही सीना होगा।
आदिकालीन इतिहास पर फोकस करना होगा।
उन घटनाओं के विषय में धारणा पहचानना होगा।

यूं तो इतिहास को दो अर्थों में जाना जाता है।
कुछ लोगों द्वारा इसे कथानक रूप में माना जाता है।
एक को आदिकालीन इतिहास के रूप में पहचाना जाता है।
दूसरा उन घटनाओं के विषय में धारणाएं जानी जाती है।

ज्यादातर लोग इसे श्रुति स्मृति से आना – माना है।
जिस राजा – राज्य में कवि निर्धन है राजा अयोग्य कहाता है।
विद्वान और कवि निर्धनता के बावजूद समाज में पूजा जाता है।
ऐसी विद्वानों के अपमान की बात सोचना निरर्थक कहलाता है।

सच्चे सेनानियों को दुनिया से श्रद्धांजलि दिया जाता है।
काल काेठरी में भ्रष्टाचारियों को सर्वत्र धकेला जाता है।
समसामयिकी इतिहास रचने के लिए मेहनत करनी होती है।
आदिकालीन इतिहास का संरक्षण और संवर्धन करना होता है।

बेसिक शिक्षा का स्तर ऊंचा करने के लिए आगे चलना होता है।
जूता मोजा बस्ता पोशाक बच्चों को पहन चलना पड़ता है।
सभी बच्चे स्कूल जाएं सरकार को योजना करनी पड़ती है।
अभिभावक के खाते में आवश्यकता पूर्ति में रुपया देना होता है।

घूम रहे उठा जासूस एप, पर शक्ति करनी होती है।
बच्चों पर पड़े ना बुरा प्रभाव, ऐप बंद करना होता है।
पुलिस के चाल चेहरा और चरित्र को भी समझना होता है।
अनुभवहीन अधिकारियों को बदल ना होता है।

देश की योजना को कड़ाई से पालन करवाना पड़ता है।
जन औषधि केंद्र पर, केंद्रों पर भी निगरानी रखनी होती है।
हमें प्राचीन इतिहास को अपने फिर-फिर जीना होता है।
समय के साथ भारतीयता का इतिहास लिखना होता है।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – हम सभी को अपने इतिहास को फिर से जीना होगा, अपने वीरों को याद कर अपने उमंग उत्साह को कायम रखना होगा। आजकल के बच्चे जो अपने इतिहास से दूर होते जा रहे है उन्हें भी अपने इतिहास से सभी माता-पिता को अवगत कराना चाहिए। आदिकालीन इतिहास का संरक्षण और संवर्धन करना होगा, तभी आने वाली पीढ़ी को प्राचीन इतिहास से प्रैक्टिकली जोड़ पाएंगे।

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यह कविता (इतिहास को जीना होगा।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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शक्ति विहीन पंख।

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♦ शक्ति विहीन पंख। ♦

शक्तिहीन पंख लगा न बढ़ाइए।
उड़ने की कोशिश न बनाइए।
विपरीत पवन के न जाइए।
ध्यान – ज्ञान अपना बढ़ाइए।

बेवजह बात कही में नहीं आइए।
घमंड की दुनिया कॉल लगाइए।
स्वार्थ से सनी सबंध पहचानिए।
अपने मान और सम्मान बढ़ाइए।

कौन क्या कर रहा इस पर न जाइए।
विज्ञापन की दुनिया मन निकालिए।
भविष्य के चिंतन में खुद को लगाइए।
सत्य की खोज में अपने को लगाइए।

समदर्शी बनने की सोच बढ़ाइए।
संतोष करके नित मंगल पाइए।
क्षमा जाप समाज पूजा बढ़ाइए।
परोपकार उपकार ध्यान लगाइए।

राष्ट्र भक्ति में डूब कर दिखाइए।
भक्ति रस में खुद को भी डुबाइए।
दरिद्र कलह लोभ मोह दूर भगाए।
बेवजह पंख शक्ति हीन न खिलाइए।

शुभ धरातल का रौनक बढ़ाइए।
प्रकृति के करीब धीरे-धीरे आइए।
देश भक्ति का मधुर गीत सुनाइए।
खुशहाल चिंतन में रमते जाइए।

आंगन में अपने ही रौनक लाइए।
हंसी ठिठोली से दिल न भार्माइए।
सीख एक धरा से अपनी बढ़ाइए।
जीवन में सहनशील बन जाइए।

गरीबी का दुखड़ा दूसरे से न सुनाइए।
हृदय को आकाश अंबर सा बढ़ाइए।
बादल की छांव में बैठकर न बताइए।
मंगल मनोहर एक कहानी सुनाइए।

काव्य साहित्य संकलन में लग जाइए।
दुनिया में हिंदुस्तान का नाम बढ़ाइए।
संयम साहस शील हृदय में लाइए।
बेवजह में पंख को ना फडफड़ाइए।

ईमानदारी से काम करते जाइए।
विरोधी बातों में अपनी न लाइए।
राष्ट्र की रक्षा में खुद भी लग जाइए।
सत्य अहिंसा के बूते आशा जगाइए।

यश कीर्ति जगत में अपनी फैलाइए।
मोहब्बत की दुनिया में नाम कमाइए।
हिंदी हिन्दू हिंदुस्तान करते जाइए।
सुर सुंदर अपना जीवन में लगाइए।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – बेवजह यूँ ही किसी बात में ना आइए, समय बर्बाद ना करें। स्वार्थ से सनी सबंध को पहचान कर घमंड को त्यागकर सत्य की खोज में अपने को लगाइए। बेवजह में पंख को ना फडफड़ाइए। भविष्य के चिंतन में खुद को लगाइए, भक्ति रस में खुद को डुबोकर काव्य साहित्य संकलन में लग जाइए, संयम, साहस व शील हृदय में लाइए, और दुनिया में हिंदुस्तान का नाम बढ़ाइए।

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