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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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2021-KMSRAJ51 की कलम से

हार्दिक शुभकामनाएं – नीरज चोपड़ा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हार्दिक शुभकामनाएं – नीरज चोपड़ा। ♦

खिलते कंवल की तरह, तू राष्ट्रीय पहचान बन गया।
नीरज तू अपने नामानुरूप खिल कर, देश की शान बन गया॥

तूनें तो, एक गौरवमय इतिहास ही रच डाला।
बचपन से शौकीन, पकड़ हाथ में भाला॥

कभी अपने दर्द की भी, तूनें नही की परवाह।
सदैव सपनों को हकीकत में बदलने की, भरी आह॥

बना है तू देश का प्रहरी, अपने स्वप्न को भी शिखर तक पहुचाया।
एक नमन तेरे मात-पिता को, जिनका सीना आज गर्व से भर आया॥

कोटिशः सादर वंदन तेरे गुरु को, जिसने अपने शिष्य के नाम का परचम लहरवाया।
तूनें भी शिष्य-गुरु की परंपरा को रख कायम, गुरु का मान बढ़ाया॥

हार्दिक बधाइयां नीरज चोपड़ा तुम्हें, तू बन गया आज बुलंदी के आसमाँ का सितारा।
इस गौरवमय दिन के लिए, हर भारतीय का दिल ऋणी रहेगा तुम्हारा॥

हार्दिक बधाइयां💐हार्दिक बधाइयां॥

भारत के स्टार जैवलीन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक में 87.58 मीटर दूर भाला फेंककर गोल्ड मेडल पर अपना कब्जा जमाया है। भारत के पिछले सौ साल के इतिहास में यह ट्रैक एंड फील्ड में पहला ओलंपिक मेडल है। ट्रैक एंड फील्ड में गोल्ड मेडल जीतकर नीरज ने अपना नाम ओलंपिक इतिहास में सुनहरे अक्षरों से दर्ज करवा लिया है।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा को तहे दिल से हार्दिक शुभकामनाएं दी है, गौरवमयी इतिहास रचने के लिए।

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यह कविता (हार्दिक शुभकामनाएं – नीरज चोपड़ा।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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भारत में भूतहा जगह कहां और कौन?

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ भारत में भूतहा जगह कहां और कौन? ♦

भारत में भूत-ही जगह देखने जब जाइए,
नियम और कानून का पालन करते हुए जाइए।
आप जब स्थानीय आदेश पर चलोगे अगर,
तो पर्यटन का आनंद मिलता रहेगा मंगल॥

पुणे का शनिवार बाड़ा किला है पुराना महान,
बाजीराव पेशवा से जुड़ा हुआ है यह स्थान।
हॉन्टेड माना जाने वाला इस किले के अंदर,
मना किया जाता है सूरज डूबने के बाद जाना॥

राजस्थान के अलवर में स्थित भानगढ़ का किला,
बहुत ही सुंदर सुहाना लेकिन किला है डरावना।
कहते 17 वीं सदी में इसका निर्माण हुआ था,
भूतिया गतविधियों से विद्यमान यह किला है।
सूरज डूबने के बाद शाम से यहां इंट्री बंद रहती,
यहां चाहे कोई राजनीतिक जाए या आए विद्वान॥

मुंबई के कोलाबा में स्थित है मुकेश मिल्स,
देश की 10 हॉन्टेड जगहों में यह शामिल हिल।
फिल्मों की शूटिंग के लिए मशहूर है मिल,
भूतों की कहानियां से भरपूर है सबका दिल॥

राजस्थान से 18 किलोमीटर दूरी पर स्थित गांव,
कुलधरा गांव में कभी 600 परिवार रहते थे।
सुना था रसोई के बाद यहां भी कोई नहीं रहता,
रातों रात गांव छोड़ कर लोग कहीं चले गये॥

हैदराबाद का गोलकुंडा फोर्ट का 13 वीं सदी में निर्माण हुआ,
इस फोर्ट में रानी तारामती की आत्मा रात में चलती है।
जिसको पति के साथ यहां दफनाया गया था,
डांस करती और डांस करने की आवाज आती॥

बृज राजभवन पैलेस कोटा राजस्थान में स्थित,
लगभग 180 वर्ष पुराना बताया जाता रहा है।
पैलेस को 18 सौ अस्सी में हेरिटेज होटल बना दिया गया,
हेरिटेज होटल में एक ब्रिटिश मेजर बर्टन का भूत रहता है।
ब्रिटिश मेजर बर्टन को सन 1857 में ही मारा गया था,
मेजर को भारतीय सिपाहियों ने हीं मारा था॥

दार्जिलिंग का डाव हिल, कुर्सियांग इलाका,
प्राकृतिक खूबसूरती में बहुत ही मशहूर है।
स्थानीय लकड़ हारो का कहना है कि यहां,
बिना सिर वाला एक लड़का टहलता रहता है।
यह इलाका भुतहा अनुभव से भरा हुआ है,
जंगल में लकड़ी काटने वालों ने सिर विहीन लड़का देखा॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में भारत के सभी मुख्य भूतहा जगह के बारे में बताने की कोशिश की है जो काबिले तारीफ है। भारत में भूत-ही जगह देखने जब जाइए, नियम और कानून का पालन करते हुए जाइए। आप जब स्थानीय आदेश पर चलोगे अगर, तो पर्यटन का आनंद मिलता रहेगा मंगल॥

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sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (भारत में भूतहा जगह कहां और कौन?) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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हस्तिनापुर नरेश परीक्षित।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हस्तिनापुर नरेश परीक्षित। ♦

युधिष्ठिर द्रोपदी आदि से अनुमति लेकर,
श्री कृष्ण ने द्वारिका पुरी का किया प्रस्थान।
आंखों से ओझल हो जाने पर श्री कृष्ण के,
प्रेम जनित उत्कंठा के पर बस अर्जुन गुणवान॥

अभिन्न निर्दयता और प्रेम व्यवहार लिए,
याद पर याद आती रही वहीं बारंबार उन्हें।
शरीर प्राण से रहित होती तो मृत्यु होती सुने,
परंतु श्री कृष्ण वियोग में संसार अप्रिय दिखता उन्हें॥

उन्हीं के सानिध्य में देवताओं और इंद्र को भी,
जीत कर अग्नि देव को खांडव वन दान किया।
अनु जय भीम सेना ने उन्हें की शक्ति सेवा कर,
अभिमानी जरासंध का भी वध था किया॥

जिन राजाओं को जरासंध ने बंदी था बनाया,
उन्हीं बहुत राजाओं को भगवान ने मुक्त कराया।
जिन – जिन दुष्टों ने भरी सभा में महारानी,
द्रोपदी को छूने का साहस रहा किया॥

आंखों में बिखरे आंसू भरकर तब द्रोपदी,
श्री कृष्ण के चरणों में जा गिरी पड़ी।
उस घोर अपमान का बदला लेने को,
भगवान श्री कृष्ण ने प्रण तब था ठाना॥

मन खडयंती दुर्योधन में आकर वन वास में,
ऋषि दुर्वासा ने हमें दुष्कर संकट में डाला था।
बचे पात्र की शाक की एक पत्ती के भोग,
लगाकर श्री कृष्ण ने हम सबको पता उबारा॥

भगवान के प्रताप से युद्ध में भी हमने आकर,
पार्वती सहित शंकर को आश्चर्य में डाला।
युद्धभूमि खुश होकर शंकर ने अस्त्र पशुपति प्रदान किया,
तरह-तरह के अस्त्र-शस्त्र लोक पालों ने हमें दिया॥

श्रेष्ठ पुरुष मुक्ति पाने को जिन चरणों का सेवन करते!
उन्होंने दुर्लभ और दुस्तर कार्यों को भी सरल बना डाला॥

युद्ध क्षेत्र में वही हमारे रथी बने रहे,
गांडीव धनुष और बाण बहुतेरे पर,
जबकि अस्त्र – शस्त्र सब सधे हैं मेरे,
फिर भी आज रथी मैं अर्जुन हूं॥

बड़े-बड़े राजा कल तक जो सिर झुकाते थे,
श्री कृष्ण के बिना वही सब सार शून्य हो गये।
युद्ध क्षेत्र में उनकी दी गई शिक्षाएं सभी हमको,
तब – तक शांति करने वाली होती थी॥

श्री कृष्ण के चरण कमलों का चिंतन करने से,
अर्जुन की चित्तवृत्ति जब निर्मल होने लगी,
भक्ति में गण के प्रवाह, प्रबल प्रवाह मंथन ने,
अर्जुन के सारे विकारों को बाहर कर डाला॥

बुद्ध क्षेत्र के भगवान श्री कृष्ण का उपदेश,
गीता – ज्ञान पुण्यस्मरण के साथ आया पाले।
जन्म मृत्यु रूपी संसार से मुख्य मुड़ता गया,
अपने को श्रीकृष्ण में लगाते हुए चला, लगाते हुए चला॥

लोक सृष्टि के भगवान श्री कृष्ण ने,
यादव शरीर से पृथ्वी का भार उतारा।
उसी मनुष्य के शरीर का उन्होंने,
पृथ्वी से परित्याग कर डाला॥

इधर पृथ्वी पर कलयुग ने आकर पांव पसारा,
देख महाराज युधिष्ठिर ने महाप्रस्थान का निश्चय कर डाला।
सहित समान गुणों से युक्त पौत्र परीक्षित को,
समुद्री से गिरी हस्तिनापुर का राजा बना डाला॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में बताया हैं की — किस तरह सभी देवी देवताओं ने महाराजा परीक्षित को तरह-तरह के अस्त्र-शस्त्र प्रदान किया। हस्तिनापुर नरेश परीक्षित के जीवन पर सटीक प्रकाश डाला है। अर्जुन का श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति और प्रेम को दर्शाया हैं।

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यह कविता (हस्तिनापुर नरेश परीक्षित।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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आज न जाने क्यों?

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ आज न जाने क्यों? ♦

आज न जाने क्यों मेरे हर हौसले है, यूं बेबजह पस्त हुए?
इस दुनियां में हर आदमी, क्यों बेपरवाह और व्यस्त हुए?

आज है फुरसत नहीं यहां, किसी को किसी से बतियाने की।
रही तहजीब नहीं है शेष अब, किसी में किसी को मनाने की।

जो रूठ गया सो रूठ गया, फिर करता ही कोई बात नहीं।
अरे भाई सुलह भी तो रास्ता है, हर बात का हल तलाक नहीं।

नेमत है यह जिन्दगी खुदा की, यूं ही तो कोई इतेफाक नहीं।
सौदे जिन्दगी के हैं ये दोस्त, कोई सड़कों पर बिछी खाक नहीं।

बुजुर्गों की अब सुनता ही कौन है? युवा नशों में है खो गए।
चोर – उचक्के घूम रहे हैं खुले आम आज, कोतवाल है सो रहे।

ऊपर से नीचे तक है फैल गया, देखो तो आज भ्रष्टाचार यहां।
आदमी से आदमी का रिश्ता है स्वार्थ का, रहा कहां अब प्यार यहां?

खौलता है देख के खून तो अपना, यह लूटपाट होती खुले आम, में।
चाहकर भी न कर पाता हूं इच्छित कुछ, फंस जाता हूं बने विधान में।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बताया है की “आजकल के युवाओं का जीवन किस राह पर भटक रहा है, उनको खुद ही नही मालूम। उनके अनियंत्रित भटकते हुए जीवन का कोई किनारा नहीं।” ये कैसा समय चल रहा है जहां खुले आम लूटपाट होती है। चोर – उचक्के घूम रहे हैं खुले आम आजकल, कोतवाल है सो रहे।

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यह कविता (आज न जाने क्यों?) “हेमराज ठाकुर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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Education and Manners : Two Sides of One Coin

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ Education and Manners : Two Sides of One Coin ♦

It’s perfectly said by someone —

“A gentleman is not defined by the content of his wallet or the cut of his suit. He is defined by his manners and the content of his character.” -Anonymous

Therefore, rather than saying, education and manners are two sides of one coin, I would like to say that manners is education. And I’m not saying this metaphorically, it’s the fact.

Education doesn’t mean a large amount of knowledge on one or more subjects nor the number of diplomas, degrees and certificates you possess that can define how educated you are.

The word education is generally misunderstood. The person who has the ability to read and write is considered as educated. In fact, the term literate is more appropriate for such a person.

Any individual who has done masters in any field of science, commerce and literature, the term scholar, genius, learned or any other such adjective can be applicable to define his or her persona.

Now, the question arises if academic qualification is not education then what is education?

In my opinion, your manners to lead your life is education. Art of living is education.

When school, colleges, Gurukulas were not in existence, people were both educated as well as uneducated by their manners and etiquettes. You can acquire qualifications in any subject to make a living. Nothing wrong in being skilled in any of the fields of your choice to make money.

Qualification in any particular subject can make you a doctor, an engineer, a scientist, an industrialist, a manager, a lawyer, a chairman and so on. But it can not make you polite, kind and civil. It can not erase anger, jealousy, greed etc. from your heart. For this you have to educate yourself through moral values.

Any successful person can make money to buy all types of luxuries like an expensive cozy bed, mattress, food items, electrical appliances, attractive furniture, decorative pieces, royal vehicles etc. but not even a richest person in the world can buy sleep, hunger and happiness.

Your knowledge is judged by your mark lists or certificates you get after qualifying various exams and competitions set for it but education is judged by your behavior, gentility, the way you talk and walk and nevertheless your capability to solve the problems without getting panicked and losing your temper.

The simplest way to explain education is your manners. Education and manners are synonyms. Manners refine you. There are innumerable rich and successful people in the world but only those who have manners are appreciated and set an example for upcoming generations.

It’s not their wealth, magnificent palace or lavish lifestyle which is discussed by the people but their manners and behavior is talked about.

Being mannered is more beneficial than being rich and knowledgeable. I don’t mean to say that you shouldn’t be rich and a scholar. I am just talking about what is more important between being bright and mannered.

  • Combination of knowledge and wisdom makes you adorable wherever you go.
  • Be a millionaire but remain down to earth.

We all have heard innumerable true stories of many successful people. Let us divide them into two categories and observe the difference ourselves : —

  1. What happens when an ill mannered person becomes rich and successful?
  2. What happens when a mannered person becomes rich and successful?

The people in the first category after getting a little success and money in their life will be boastful, conceited, aggressive, impudent, insolent, egoistic and self – admiring. Wrapped up from toe to top in superiority complex such people invite unhappiness and misery for life time not only for themselves but also for everyone they meet. Not even the members of their own family feel comfortable and relaxed in their presence.

Their wealth and cosy fascinating surroundings cannot replace their lofty words and scornful attitude. People wait for their departure and feel happy in their absence.

Second Category

On the other hand, the people in the second category after getting success and money in their life will emerge as polite, thoughtful, sympathetic, sober, compassionate, helpful, well behaved, sensible and rational individuals.

They automatically turn into philanthropists and play a pivotal role in the society by their deeds and speeches. Whatever they do and say, set examples to teach the importance of values.

They won’t be seen behaving arrogantly with anyone. Therefore, these are the individuals who can be called the real gems of society. Further generations remain indebted for the contribution they make for them to be inspired by.

If you are mannered you will be respectful to everyone irrespective of the academic qualifications you have. Manners matter.

Gain knowledge but don’t lose your sensitivity. Be aware of the feelings of others. Choose any profession of your choice but don’t ever forget to be a better human being. As all of us, first, are human beings and then doctors, engineers, advocates, lecturers and so on. First of all we are human, therefore developing human qualities is manners.

Manners can’t be taught. They are inbuilt.

Only we have to develop them to be a better personality. The hallmark to be an extraordinary person lies in your manners and attitude. Nobody will care for your beauty and richness if your manners are ugly. In the end I would like to conclude with the words quoted by Diana Mather —

“ Good manners are ageless, priceless and classless.”

Be mannered first as good manners are your wealth.

♦ Vedsmriti ‘Kritee’ Ji – Pune, Maharashtra ♦

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  • ” Vedsmriti ‘Kritee’ Ji “ Describe In very simple words – Gain knowledge but don’t lose your sensitivity. Be aware of the feelings of others. Choose any profession of your choice but don’t ever forget to be a better human being. As all of us, first, are human beings and then doctors, engineers, advocates, lecturers and so on. First of all we are human, therefore developing human qualities is manners.

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This Article (Education and Manners : Two Sides of One Coin) is Written by ” Vedsmriti ‘Kritee’ Ji “ for – KMSRAJ51.COM readers. Your articles are life-changing by getting down to the depths of the heart in simple words. I have full faith that your poems and articles will benefit the public. May your writing activity continue like this for the welfare of the people.

Brief introduction of Poet & Author
_________________________
Name : Vedsmriti Gour
Name for publication : Vedsmriti ‘Kritee’
Education : M. A. English litrature
B. Ed. ( Physical )
Diploma in Information Technology
Teacher : Private coaching classes, Freelance writer, poet, critic, translator, lyricist, social – worker.
Adhyaksh : ‘Siddhi Ek Sahityik Samooh’
State Head : ‘Akhil Bhartiya Sahitya Sadan’ ( Maharashtra )
Mahila Prakoshtth : ‘Rashtriya Aanchalik Sahitya Sansthan Bihar Prant’.
Sah Sangthan Mantri : ‘Antarrashtriya Hindi Parishad Mahila Prakoshtth, Mumbai, Maharashtra.
Representative ( Maharashtra ) : Shri Sanstha Charitable Trust
Write in both the languages – Hindi & English

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

 

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जीवंत भाषा में ग्राही शक्ति।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जीवंत भाषा में ग्राही शक्ति। ♦

जीवंत भाषा का उत्तम लक्षण,
उसकी ग्राही का शक्ति होती है।
विशेषता के अनुरूप औरों से,
जितना अधिक ग्रहण कर लेते।

दूरगामी प्रभाव उसका प्रांजल।
हिंदी ने ग्रहण करने की दिशा में,
उदासीनता कभी नहीं दिखाई।
जब भी जैसे जरूरत पड़ी उसने,
अपनी भाषा शक्ति समृद्धि बढ़ाई।

विभिन्न भाषाओं की शब्द शैली,
यात्रा लंबी चलकर कदम बढाई।
ज्यों ज्ञान – विज्ञान विस्तृत होता,
हिंदी की शक्ति यदि और बढ़ती।

ग्रहण शीलता से संपन्नता आती,
हिंदी साहित्य के और काम बाकी।
चिंतन मनन में कमी न हो उदासी,
ज्ञान दर्पण के क्षेत्र में बढ़े देश वासी।

हिंदी साहित्य का बढ़ाया ज्ञान,
संस्कृत का अधिकांश ही दान।
शब्द शैली पद रचना व व्याकरण,
हिंदी अलंकार से अलंकृत होती।

भाषा संस्कृत संकुचित सीमा से पार,
जनता के विशाल क्षेत्र में जब आई!
भाषा की सहजता का प्रयोग प्रश्न,
जनता के अनरूप करने की पाई।

माना कि शासन प्रशासन शिक्षा का,
हिंदी करण तेजी से आगे बढ़ रहा है।
विस्तार के अनुकूल शब्द भंडार भरे
अनिवार्यता का अभाव भी खल रहा।

दुनियां ने ज्ञान विज्ञान की दौड़ में,
तेजी से विस्तार की रफ्तार बढ़ाया।
हिंदी शब्द भंडार में बहुलता मूल्य,
विरासत में पैतृक सम्पत्ति से पाया।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में — हिंदी भाषा के गुणों और महत्व को बताते हुए अन्य भाषाओं में इसकी उपयोगिता को बताया है, चाहे वो संस्कृत की भाषा को निखारने की बात हो या अन्य भाषा की। हिंदी भाषा में जो अपनापन है वो दुनिया के किसी भी अन्य भाषा में नही है।

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यह कविता (जीवंत भाषा में ग्राही शक्ति।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें: पृथु का प्रादुर्भाव।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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धरती पर ही।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ धरती पर ही। ♦

धधक रही है विश्व धारा आज, ज्वालाओं सी बैर – विकारों से।
अराजकताएं है कहीं फैली तो, कहीं जल रही है भ्रष्टाचारों से।

अम्बर का सब पानी बुझा न सके, कहां ठंडक चांद सितारों से?
यह नस – नस में फैली नफरत कैसे, हो सकेगी दूर सरकारों से?

ईर्ष्या, द्वेष, वैमनस्यी आग से, हर देश है दुनियां में जुलस रहा।
कहीं जाति, धर्म के झगड़े हैं, कहीं आवाम सत्ता से उलझ रहा।

खतरे में आज है समूची दुनियां, न के महज एक मानव प्राणी।
आतंकवाद कहीं दमन की नीति, हर देश की देखो एक कहानी।

रोग – शोक और महामारी, भ्रष्टाचार से मानवता सब भूल गए।
नकली जीवन, झूठ फरेबी, सच्चे तो मशाल से ढूंढने को ही रहे।

भाई – भाई का बैरी बना है, बाप – बेटों में भी तो आज दरारें हैं।
बहनों के साथ भी निभती कहां? पति – पत्नी में भी तकरारें हैं।

अध्यात्म से होती दूर यह दुनियां, जल रही है दहकते अंगारों सी।
अध्यात्म की पावन जलधारा ही, धो सकेगी मैल ये विकारों की।

पर लोग कहां सुनते बात यहां अब, ज्ञान, ध्यान व संस्कारों की।
होड़ लगी है सब में तो बस, कैसे कृपा मैं पा सकूं सरकारों की।

धन से बड़ा तो कुछ नहीं लगता, आज दुनियां में देखो लोगों को।
लालसा बढ़ी कि, भोग ले धरती पर ही, स्वर्ग के सारे भोगों को।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से वर्तमान समय में धरती पर पर क्या – क्या हालात हो गए है, इंसानियत किस दिशा में जा रही है कुछ पता नही किसी को। वर्तमान समय में पृथ्वी पर अनियंत्रित बिखरे हालात का सुंदर मनोरम वर्णन किया है।

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यह कविता (धरती पर ही।) “हेमराज ठाकुर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस। ♦

आज बहुत ही, शुभ मंगल घड़ी आई।
सबको आज मित्रता दिवस की हार्दिक बधाई॥

मित्रता श्रीकृष्ण और सुदामा की, दुनिया में हो गए चर्चे।
महान थी उनकी मित्रता, दिए ब्रह्मांड ने भी अव्वल दर्जे॥

आओं मित्रों, अपने दिलों में मंथन करें आज।
जुबां से न बोलें सुदामा, फिर भी श्री कृष्ण ने सँवारे काज॥

एक भरोसा, एक आस्था, विश्वास था, दोस्ती के नाम में।
दुनिया भर की खुशी देखी, बस अपने श्याम में॥

अगाध प्रेम, श्रद्धा रखी थी, सुदामा ने अपने मित्र में।
जब-जब दोस्त का चेहरा देखें,
भगवान का ही अक्स नजर आए, उनके चित्र में॥

स्वार्थ वशीभूत होकर सुदामा ने,
कभी अपनी जिंदगी की व्यथा नही सुनाई।
ना ही कभी, अपने मित्र के समक्ष रखी गरीबी की दुहाई॥

सिर्फ एक लगन में ही, सुदामा रमें जा रहा था।
बस मित्रता के नाम में, भगवान जपे जा रहा था॥

बचपन के छुटे सब संगी साथी, रखी बस दोस्ती दिल मे निभायें।
निश्चल प्यार, दुलार की लगन रखी, श्री कृष्ण से लगाएं॥

था वो बहुत ही शुभ दिन, जब भगवान के घर भक्त चला आया।
भगवान ने भी मित्रता को ही, सर्वोपरि मान, मित्र को गले लगाया॥

वो एक ऐतिहासिक दिन था, जब भगवान भक्त के,
प्यार, आस्था, विश्वास से लबालब हो गया।
सिहांसन पर बैठा, चरण धोकर मित्र भक्त सुदामा के,
और भगवान भक्त के वश में हो गया॥

आओं, हम भी मित्रता के शब्द को सार्थकता में पिरोए।
आस्था, लग्न, प्रेम को सच्चे अर्थों में ही सँजोये॥

अपने जीवन में सदैव ही, सच्ची मित्रता के बोए मोती।
मित्र बने और बनायें ऐसे,
जो तेरे पथ को प्रकाशवान करें, ऐसी जगाए ज्योति॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से इस कविता में कवयित्री ने श्री कृष्ण और सुदामा की मित्रता का उदाहरण देकर, एक सच्चे मित्र के गुणों और व्यवहार का सुंदर मनोरम वर्णन किया है।

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यह कविता (अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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आदि शंकराचार्य कलयुग के प्रथम गुरु।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ आदि शंकराचार्य कलयुग के प्रथम गुरु। ♦

कलयुग में साक्षात शिव रूप में अवतरित हुए,
गुरु आदि शंकराचार्य।
दूर किया मानव के भाती – भाती कलशों को,
आदि शंकराचार्य की तरह आंख मूंदकर,
हठ और तर्क नहीं करते॥

वे शास्त्रीय ढंग से शास्त्र प्रमाण युक्त बातें करते,
सत्य रूप अनुभव और अनुभूतियों से संदेश लोक में देते।
शिव के वैभव और शिष्टता को संसार में,
मुक्त कंठ से बदला आने वाले॥

कलयुग में अवतार लेने वाले सिद्ध गुरुओं में से एक,
आचार्यों में अद्वितीय है आदि शंकराचार्य।
सर्वज्ञान संपन्न महा पंडित जी आदि शंकराचार्य,
ब्रह्मा अनुभूति में रमण करने वाले ब्रह्म ज्ञानी॥

विभिन्न शक्तियों सिद्धियों से युक्त सिद्ध पुरुष शंकराचार्य,
आचार्यों की तरह साधारण पुरुष नहीं थे आदि शंकराचार्य।
असत्य बाद से दूर सत्यवादी थे आदि शंकराचार्य,
बुद्धि वाद या भ्रांति वाद से अलग अनुभूति वादी आदि शंकराचार्य॥

यथार्थवादी गुणों से भरपूर संपन्न आदि शंकराचार्य,
आचार्यों की भांत संकुचित होकर,
देवताओं की निंदा कभी नहीं किया है शंकराचार्य॥

शिव की जितनी उपासना किया उन्होंने,
उतनी ही जगदंबा, विष्णु, नरसिंह स्वामी आदि देवताओं की।
शिवानंद लहरी नामक ग्रंथ की अद्भुत ढंग से लिखा,
अद्वितीय शैली की रचना कर रहस्य ज्ञान को व्यक्त किया॥

जिस प्रकार ज्ञानी को ज्ञानी ही पहचान सकता,
सर्वोत्तम को जिस प्रकार सर्वोत्तम ही पहचानता।
उसी तरह महा ज्ञानी सर्वोत्तम महागुरु आदि शंकराचार्य,
देवाधिदेव शिव शंकर स्वरूप है आदि शंकराचार्य॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में कवि ने, आदि शंकराचार्य जी के गुणों, शक्तियों और कार्यों को समझाने की कोशिश की है। आदि शंकराचार्य जी कलयुग के प्रथम गुरु है।

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यह कविता (आदि शंकराचार्य कलयुग के प्रथम गुरु।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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आज के युग में बच्चों को पढ़ाने के तरीके।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ आज के युग में बच्चों को पढ़ाने के तरीके। ♦

या » — आज के दौर में बच्चों को पढ़ाने के 11 तरीके।

वर्तमान समय में कुछ सीखने और कुछ नया कर जाने के लिए पढ़ाई बहुत आवश्यक है। लेकिन कुछ बच्चे पढ़ाई को लेकर परेशान रहते हैं, वे पढ़ाई से दूर भागते हैं, किताबें, नोटबुक आदि उनके लिए समस्या बन जाती है, उन्हें पढ़ना अच्छा नहीं लगता। ऐसी स्थिति में शिक्षक और अभिभावक दोनों की ही बच्चों की शिक्षा में भूमिका और भी महत्वपूर्ण बन जाती है।

ऑनलाइन शिक्षा —

आज कोरोना महामारी के साथ ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा मिला है, इसमें शिक्षक बच्चों को पढ़ाने हेतु अपनी कक्षा को रूचिपूर्ण बनाने के लिए प्रयासरत रहते हैं, जबकि अभिभावकों के लिए इस समय बच्चों को पढ़ाना काफी चुनौतीपूर्ण होता है।

लेकिन फिर भी आज के प्रतियोगिताओं से भरे युग में बच्चों के लिए पढ़ाई नितांत आवश्यक है।

शिक्षक द्वारा बच्चों को पढ़ाने के लिए निम्न तरीके प्रयोग में लाये जा सकते हैं —

  1. प्रस्तुति को आनंद से भरपूर रखें — यदि हम बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेजेंटेशन तैयार करते हैं तो उसमें कुछ मज़ेदार जोड़ सकते हैं। बच्चों से सम्बंधित वास्तविक तथ्य, कहानी आदि जोड़कर प्रस्तुति को अधिक आनंददायक बनाया जा सकता है।
  2. परस्पर संवादात्मक कालांश बनाने की कोशिश करें — कक्षा में विषय को पढ़ाने के लिए सेशन को इंटरेक्टिव रखना अच्छे परिणाम दे सकता है क्योंकि इसके द्वारा बच्चों को भी अपने विचार रखने के अवसर प्राप्त हो सकेंगे।
  3. किताबी ज्ञान का दबाव न बनाएं — बच्चों को केवल किताब द्वारा शिक्षा देने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इससे बच्चे को पढ़ाई नीरस लगने लगती है और वे पढ़ाई से कटते चले जाते हैं।
  4. पढ़ाई को मजेदार बनाकर प्रस्तुत करें — आजकल विभिन्न प्रकार की ऐप से प्रश्नोत्तरी आदि का निर्माण करके समबन्धित विषय बच्चों को समझाया जा सकता है। कुछ चित्र बनाकर उन पर लिखने को दिया जा सकता है। इसी तरह से अन्य गतिविधियाँ कराकर उनके विचारों को जान सकते हैं।
  5. बच्चों के प्रयास को सराहें — शिक्षक को चाहिए कि वे बच्चों द्वारा किये गए प्रयास को समझते हुए उनकी सराहना करें।

अभिभावकों द्वारा बच्चों को पढ़ाने के तरीके —

बच्चों को सिखाने के क्षेत्र में शिक्षक के साथ – साथ अभिभावक की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। देखा जाए तो अभिभावक ही बच्चों के प्रथम गुरु हैं, घर ही उनकी प्रथम पाठशाला है, ऐसी स्थिति में बच्चों के जीवन में अभिभावक का योगदान और भी महत्वपूर्ण बन जाता है। अतः उन्हें पढ़ाने के लिए कुछ कारगर उपाय हो सकते है जैसे —

  1. परीक्षा से अधिक सीखने पर बल दें — बच्चे के अंदर ये डर पैदा न होने दे कि परीक्षा है और उन्हें दिन रात पढ़ना होगा। इसके स्थान पर उन्हें कहें कि तुम्हारा सीखना अधिक ज़रूरी है। इससे बच्चों को सीखने की प्रेरणा मिलेगी और वे अपने आप ही परीक्षा के लिए तैयार हो सकेंगे।
  2. परिणाम से अधिक प्रयास कराने की चर्चा करें — अभिभावकों को कभी भी बच्चे के परीक्षा परिणाम को बच्चों पर हावी नहीं होने देना चाहिए कि तुम्हारे परीक्षा में इतने प्रतिशत अंक अवश्य आने ही चाहिए। ऐसा करने से बच्चे पर अतिरिक्त दबाव आ सकता है। इसके स्थान पर उन्हें प्रयास/कोशिश करने को कहें। परिणाम अपने आप बेहतर होंगे।
  3. बच्चे के साथ प्यार से पेश आएं — बच्चे को मारना या धमकाना नहीं चाहिए। उन्हें प्यार से समझाना चाहिए।
  4. लेखन अभ्यास पर ध्यान केंद्रित करें — हम अक्सर सोचते हैं कि हमारे बच्चे ने आज क्या पढ़ा है ? हम भूल जाते है कि उसके लेखन अभ्यास की स्थिति क्या है ? अतः हमें उसका लेखन अभ्यास भी कराना चाहिए।
  5. पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियां भी कराएं — माता-पिता को चाहिए कि कुछ समय पढ़ाई के अतिरिक्त बच्चों की पसंद के कार्यकलाप को स्थान दे। जैसे – नृत्य, गिटार, संगीत, चित्रकला आदि। इससे बच्चों को कार्य करने के लिए एक नई ऊर्जा मिलेगी।
  6. भरपूर नींद दिलाएं — आज जहाँ स्क्रीन पर बच्चे अधिक पढ़ाई कर रहे हैं तो कहीं न कहीं वे शारीरिक और मानसिक रूप से इससे प्रभावित होते हैं। उन्हें भरपूर नींद लेने के लिए कहें।
  7. जिज्ञासा को शांत करें — बच्चे का स्वभाव चंचल होता है। वह एक ही प्रश्न को बार- बार पूछ सकता है, उस पर झुँझलाएं नहीं अपितु उसकी जिज्ञासा शांत कर उसकी समस्या का समाधान करें।
  8. पाठ को रोचक बनाकर पढ़ाएं — कविता, खिलौने, मॉडल, चार्ट आदि के माध्यम से बच्चों को पढ़ाकर उन्हें अच्छे से समझाया जा सकता है।
  9. अनुकूल स्थिति होने पर घूमने जाएँ — बच्चों को कई बार सुनने से अधिक देखकर बातें समझने में सरलता होती है, अतः पार्क, बगीचे आदि में उनका भ्रमण कराएं।
  10. बच्चे का मनोबल बढ़ाएं — बच्चे को समय-समय पर प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है। उनका हौसला बढ़ाते रहे। उनके मनोबल को बिल्कुल भी टूटने न दें।
  11. बच्चों की पीठ थपथपाएँ — बच्चों के अच्छे कार्य पर उनकी प्रशंसा अवश्य करें। तारीफ़ के रूप में उनकी पीठ थपथपाई जा सकती है।

अतः कुछ बातों को ध्यान में रखकर बच्चों को सही तरीके से समझाकर उचित परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं।

♦ नंदिता शर्मा जी। – नोएडा, उत्तर प्रदेश ♦

♦ अध्यापिका – बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, नोएडा, उत्तर प्रदेश ♦

लेखिका नंदिता शर्मा जी अभी अध्यापिका के पद पर कार्यरत है — बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, नोएडा, उत्तर प्रदेश में। नंदिता शर्मा जी KMSRAJ51.COM की सीनियर लेखक टीम पैनल की सदस्य भी है। (Nandita Sharma Ji, is also a member of the Senior Writers Team Panel of KMSRAJ51.COM.)

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  • “नंदिता शर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, इस कारगर लेख में लेखिका ने बताया है की बच्चों को सिखाने के क्षेत्र में शिक्षक के साथ – साथ अभिभावक की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। देखा जाए तो अभिभावक ही बच्चों के प्रथम गुरु हैं, घर ही उनकी प्रथम पाठशाला है, ऐसी स्थिति में बच्चों के जीवन में अभिभावक का योगदान और भी महत्वपूर्ण बन जाता है। लेख के हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। छोटे – छोटे बदलाव है पर काफी कारगर है, हर एक शिक्षक और अभिभावक व शिक्षार्थी को इस विषय में गंभीरता से साेचने कि जरुरत हैं।

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यह लेख (आज के युग में बच्चों को पढ़ाने के तरीके।) “नंदिता शर्मा जी।“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे। हम दिल से आभारी हैं नंदिता शर्मा जी के “आज के युग में बच्चों को पढ़ाने के तरीके।” विषय पर हिन्दी में Article साझा करने के लिए।

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